Sunday, 3 December 2017

जम्मू कश्मीर के कठुआ में उत्तर भारत का पहला जैव-टेक पार्क, उधमपुर में रेडियो स्टेशन

      नई दिल्ली। जम्मू एवं कश्मीर के मुख्य सचिव बी.बी. व्यास ने केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जन शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह से मुलाकात की। 

   उन्होंने डॉ. जितेंद्र सिंह को राज्य की विभिन्न विकास परियोजनाओं की स्थिति के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री के विकास पैकेज का उल्लेख करते हुए, व्यास ने डॉ जितेंद्र सिंह को जानकारी दी कि कोष का उपयोग प्रगति पर है। हाल के महीनों में, इसमें और प्रगति हुई है।
    उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई जन कल्याण की अन्य केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन के बारे में भी एक संक्षिप्त जानकारी दी। मुख्य सचिव ने ऊर्जा क्षेत्र में हुई प्रगति और दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना (डीडीजीजेवाई) की वर्तमान स्थिति की भी डॉ. जितेंद्र सिंह को जानकारी दी। 
    डॉ. जितेंद्र सिंह ने "शाहपुर कंडी परियोजना" से संबंधित कार्ययोजनाओं की स्वीकृति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह संपूर्ण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में सामने आएगी, इससे न सिर्फ कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में बल्कि बिजली क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव आएगा। मुख्य सचिव ने मंत्री को बताया कि ​​"शाहपुर कंडी परियोजना" के संबंध में कोई लंबित मुद्दे नहीं हैं। 
    उन्होंने बताया कि कठुआ क्षेत्र में यूजेएच बहुउद्देशीय परियोजना भी अंतिम चरण में है। डॉ। जितेंद्र सिंह ने चत्तरगला सुरंग के संबंध में सेना के तीन वरिष्ठ जनरलों, लेफ्टिनेंट जनरल सुरेश शर्मा, अभियंता-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल श्रीवास्तव, डीजी बीआरओ और लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट, डीजीएमओ के साथ अपनी एक संयुक्त बैठक का उल्लेख किया।
    इस सुरंग के तैयार होने पर बानी से डोडा तक लखनपुर से, भद्रवाह के बीच सभी मौसमों के अनुकूल एक वैकल्पिक सड़क संपर्क उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि चूंकि सुरंग का निर्माण एक दुर्गम इलाके में हो रहा है और इसमें बड़ा बजट शामिल है इसलिए यह एक आसान काम नहीं है, बीआरओ द्वारा किए जाने वाले कार्यों में यह एक बड़ी उपलब्धि।
    उन्होंने मुख्य सचिव से इसे प्राथमिकता सूची में शामिल किये जाने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ वार्ता करने का सुझाव दिया। मुख्य सचिव ने डॉ जितेंद्र सिंह को जानकारी दी कि भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से कठुआ में उत्तर भारत का पहला जैव-टेक पार्क और उधमपुर में प्रसार भारती द्वारा रेडियो स्टेशन की स्थापना के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से सहयोग के लिए तैयार है।
       किश्तवार में एयर पट्टी के उन्नयन के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण के लिए रक्षा अधिकारियों और राज्य सरकार के बीच जल्द ही एक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने पर भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि इससे किश्तवार में नागरिक और राज्य के विमानों के लिए एक विकल्प तैयार होगा।

कृषि शिक्षा बजट में वितीय वर्ष 2013-14 की तुलना में 47.4 प्रतिशत की वृद्धि

     बिहार। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि स्कूली बच्चों से लेकर नौजवानों को कृषि शिक्षा के प्रति आकर्षित करना हमारा मुख्य उद्देश्य है। 

    उन्होंने कहा कि इसी क्रम में भारत सरकार ने कृषि से संबंधित अनेक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाना शुरू किया हैं ताकि कृषि का समग्र और तीव्र गति से विकास हो।
      सिंह ने यह बात राष्ट्रीय कृषि शिक्षा दिवस, (3 दिसम्बर, 2017) के अवसर पर डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार में कही।
     केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने दो वर्ष पूर्व 3 दिसंबर को राष्ट्रीय कृषि शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया क्योंकि आज ही के दिन हमारे प्रथम केंद्रीय कृषि मंत्री व पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी का जन्मदिवस पड़ता है। 
   उन्होंने बताया कि कृषि शिक्षा दिवस का भव्य आयोजन गत वर्ष से हमारे कृषि विश्वविद्यालयों तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सभी संस्थान करते आ रहें है। सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने कृषि में दीर्घकालीन व स्थाई प्रगति के लिए कृषि शिक्षा, शोध एवं प्रसार को सुदृढ़ करने की दिशा में कई कार्यक्रमों का कार्यान्वयन शुरू किया है। नई तकनीकों के विकास के साथ कृषि प्रवृत्तियों में प्रतिदिन परिवर्तन हो रहे हैं। उन्नत प्रौद्योगिकियों का अधिकतम उपयोग करने के लिए यह जरूरी है कि कृषि शिक्षा का पर्याप्त सुदृढ़ीकरण किया जाए। 
    केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि आईसीएआर ने उच्च कृषि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई नए कार्यक्रम आरंभ किए हैं। इसके अंतर्गत भारत सरकार ने इस वर्ष कृषि शिक्षा बजट में वितीय वर्ष 2013-14 की तुलना में 47.4 प्रतिशत की वृद्धि की है। 
    सिंह ने बताया कि उच्च कृषि शिक्षा में गुणवत्ता व समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए पांचवी डीन समिति रिपोर्ट सभी कृषि विश्वविद्यालयों में लागू कर दिया गया है। इस नये पाठ्यक्रम के माध्‍यम से कृषि आधारित समस्‍त स्‍नातक कोर्स पहली बार प्रोफेशनल कोर्स की श्रेणी में तब्‍दील किये गए हैं जिससे कृषि स्‍नातकों को भविष्‍य में प्रोफेशनल कार्य से नौकरी मिलने में मदद मिलगी। कृषि स्नातकों को इसके पेशेवर डिग्री घोषित करने से अधिक लाभ मिलेगा क्योकि यह डिग्री अब अभियांत्रिक डिग्री के समक्ष हो गई है।
     उन्होंने बताया कि कृषि स्नातकों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का अधिक अवसर मिलेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि पांचवी डीन समिति रिपोर्ट के अंतर्गत कृषि शिक्षा में निहित विषयों के लिए समसामयिक पाठ्यक्रमों का निर्माण एवं उनके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक शैक्षिक मानकों के लिए दिशा-निर्देश तैयार किया गया है। 
    उन्होंने बताया कि कृषि एवं संबद्ध विषयों के स्नातकों को नई दिशा और उनमें उद्यमिता विकास और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए स्टूडेंट रेडी कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि स्नातक छात्रों को शैक्षनिक अध्ययन के दौरान हुनरमंद बनाते हुए उन्हें रोजगार के अनुकूल प्रशिक्षण देना है। 
    इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को स्‍नातक डिग्री के चौथे वर्ष में समग्र कौशल विकास व किसानों के साथ काम करने का भी प्रावधान है। इसके अतिरिक्त उत्पादन इकाइयों में भी प्रशिक्षण की व्यवस्था को व्यापक रूप दिया गया है। स्टूडेंट रेडी के अंतर्गत विद्यार्थियों को दिए जाने वाले परिलब्धियों को रुपये 750/- से बढाकर रुपये 3000/- प्रति माह किया गया है।
     पूर्वोत्तर भारत की अपार क्षमताओं को पहचानते हुए मोदी सरकार द्वारा केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल के अंतर्गत छः नए कॉलेज खोले गये है। इससे पूर्वोत्तर भारत में कृषि कॉलेजों की संख्या में पिछले दो वर्षों में लगभग 85 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी होकर कुल कॉलेजों की संख्या 13 हो गई है।
     इसमें से अरूणाचल एवं मेघालय राज्‍य में कृषि के दो कॉलेज, मिजोरम एवं सिक्‍किम में बागवानी के दो कॉलेज नागालैंड में पशु‍ चिकित्‍सा विज्ञान का एक कॉलेज, तथा इम्‍फाल, मणिपुर में खाद्य प्रौद्योगिकी का एक कॉलेज खोला गया है।
    सिंह ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने झारखंड और असम में अलग अलग दो भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, आईएआरआई - झारखंड और आईएआरआई - असम की स्थापना की है। बुंदेलखंड क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के अंतर्गत 4 नए कॉलेज खोलने का कार्य जोरों पर है।