Thursday, 18 January 2018

अब भारत के घर-घर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी !

     हैदराबाद। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने हैदराबाद में ‘जियोस्पेशल वर्ल्ड फोरम’ के अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन में प्रमुख व्याख्यान दिया।

  सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत को विश्व समुदाय में अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सराहना की। उन्होंने कहा कि इसरो ने मोदी सरकार के विजन के अनुरूप अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का शानदार विकास किया है और उसे भारत के प्रत्येक घर तक पहुंचा दिया है।
    मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निजी पहल और सर्मथन के बदौलत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में विकसित हुई है और उसने ‘न्यू इंडिया’ के निर्माण में अभूतपूर्व काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के प्रतिनिधियों के बीच अपने तरह का पहला विमर्श आयोजित किया गया है। इसके तहत उन क्षेत्रों के विषय में चर्चा की गयी जहां अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल संभव है।
     डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में टीम इसरो और अंतरिक्ष विभाग ने कई मंत्रालयों के साथ सहमति-ज्ञापनों को अंतिम रूप दिया, जिनमें रेल मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय इत्यादि शामिल हैं। स्मार्ट सिटी कार्यक्रम, शहरी एवं आवासीय योजनाओं, मानव रहित रेलवे क्रांसिंगों की निगरानी, मनरेगा की जियो-टैगिंग, सड़कों और अन्य परियोजनाओं के लिए प्रमाणपत्र और कृषि मृदा जांच जैसे प्रमुख कार्यकमों के क्रियान्वयन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 
   डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि नव वर्ष के आरंभ में 12 जनवरी को 28 विदेशी उपग्रहों को लांच किया गया, जो हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह डॉ विक्रम साराभाई के सपनों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने कई वर्षों पहले अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किये थे, वे भी हमारी क्षमता देखकर अपने उपग्रहों को भारत से लांच करवा रहे हैं।
    पिछले वर्ष भारत ने एक साथ 104 उपग्रह लांच करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था। ‘जियोस्पेशल वर्ल्ड फोरम’ का उल्लेख करते हुए डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों का विस्तार कर रहा है, जिनमें अन्य साझेदार भी हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ बडे औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति से यह साबित होता है कि ये सभी भारत के साथ सहयोग करने के आकांक्षी हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परिधान मेले में 200 मिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापार

   नई दिल्ली। कपड़ा राज्य मंत्री अजय टमटा ने यहां प्रगति मैदान में 60वें भारत अंतर्राष्ट्रीय परिधान मेले (आईआईजीएफ) का उद्घाटन किया। मंत्री ने कहा कि परिधान क्षेत्र रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि आईआईजीएफ एक ऐसा विशाल मंच है, जहां विदेशी परिधान क्रेता और परिधान निर्यातक, दोनों हिस्सा लेते हैं। मेले में भारत के लगभग आधे राज्य हिस्सा ले रहे हैं।

  श्री टमटा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ‘टैक्सटाइल पैकेज’ से कपड़ा क्षेत्र को बहुत फायदा पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पिछली बार 200 मिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापार हुआ था। उन्होंने मेले में हिस्सा लेने वाले खरीददारों और निर्यातकों को शुभकामनाएं दीं। 3 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिधान मेला प्रगति मैदान के हॉल नम्बर 11, 12 और 12 ए में आयोजित किया जा रहा है।
   मेले के इस संस्करण में यूरोपीय संघ, अमरीका और अन्य पश्चिमी बाजारों के शरदकालीन परिधानों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस अवसर पर एईपीसी के अध्यक्ष एचकेएल मागू ने मेले और उद्योग में आने वाले भारी बदलाव के लिए संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मेले का बड़े पैमाने पर विकास हुआ है और वह एशिया में सबसे बड़ा और लोकप्रिय मंच बन गया है।
    उन्होंने कहा कि यहां विदेशी परिधान क्रेता उत्पादों और भारत के निर्माताओं के साथ कारोबारी सहयोग प्राप्त कर सकते हैं। गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुल 294 निर्यातक मेले में भाग ले रहे हैं। ये निर्यातक महिलाओं, पुरूषों और बच्चों के परिधान और अन्य वस्त्रों का प्रदर्शन कर रहे हैं। 95 देशों के क्रेता इसमें हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें से ब्राजील, स्पेन, जापान, उरुग्वे, इंग्लैंड, हांगकांग और अमरीका के खरीददारों ने मेले में हिस्सा लेने के लिए पंजीकरण करवा लिया है। 
     आईआईजीएफ सभी तीन दिनों के दौरान दिन में दो बार फैशन-शो का आयोजन कर रह है। इसके अलावा सबसे सुंदर स्टॉलों को 18 जनवरी 2018 को एक पुरस्कार समारोह में स्वर्ण, रजत और कांस्य ट्राफियां प्रदान की जाएंगी।

अब 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सौर विकास निधि

    नई दिल्ली। 6 दिसंबर 2017 को 15 देशो से अनुमोदन होने पर अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए)ढांचा अनुबंध की शुरूआत हुई।

  इसने अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को एक विधि सम्मत संधि आधारित अन्तर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन बना दिया। अभी तक 19 देशों ने इसे स्वीकृति दी है और 48 देशों ने आईएसए ढांचा अनुबंध पर हस्ताक्षऱ किये हैं। अपनी तरह की पहले कार्यक्रम में आईएसए ने विश्व ऊर्जा भविष्य शिखर सम्मेलन-2018 (डब्लयूएफई एस) के अवसर पर 17 से 18 जनवरी, 2018 के दौरान दो दिवसीय ‘अन्तर्राष्ट्रीय ऊर्जा गठबंधन मंच’ की मेजबानी की। 
    डब्लयूएफईएस वैश्विक स्तर का अनूठा कार्यक्रम है। आबूधाबी (यूएई) में 18 जनवरी, 2018 को आबूधाबी निरंतरता सप्ताह का आयोजन मसदर द्वारा किया गया। आईएसए कार्यक्रम के दौरान आईएसए के बारे में सूचना के प्रसार और इसकी गतिविधियों और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी के लिए आईएसए मंडप स्थापित किया गया।
    अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन मंच के पहले दिन 17 जनवरी,2018 को आईएसए मंत्रियों का पूर्ण मंत्रीस्तरीय सत्र का आयोजन किया गया। आईएसए सदस्य देशों के सात ऊर्जा मंत्रियो ने मंत्रीस्तरीय सत्र में भाग लिया। उन्होंने सार्वभौमिक ऊर्जा, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सौर ऊर्जा के सहयोग, ज्ञान के लाभ और शुरूआती सत्रों में सौर परियोजनाओं के लिए नवोन्मेष प्रौद्योगिकी और अनुसंधान और विकास में निवेश पर अपने विचार रखे।
     इस अवसर पर अपने मुख्य भाषण में केन्द्रीय ऊर्जा एवं नवीन और नवीनकरणीय ऊर्जा(स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री राजकुमार सिंह ने अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन मंच के आयोजन के लिए आईएसए को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा सस्ती हो गई है और परंपरागत ऊर्जा को बदलने के लिए तैयार है और यह एक स्वस्थ विकास है।
    उन्होंने कहा भारत के पास विश्व में तीव्र गति से बढ़ना वाला नवीनकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम हैं और वर्ष 2020 से पूर्व 175 जीडब्लयू के स्थापित नवीनकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। आर के सिंह ने कहा आईएसए सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक निधि एकत्र करने में सहायता करेगा। अपने संबोधन के दौरान श्री सिंह ने सौर परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए भारत सरकार द्वारा 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सौर विकास निधि की स्थापना की घोषणा की।
   आईएसए के अंतरिम महानिदेशक उपेन्द्र त्रिपाठी ने मंत्रीस्तरीय सत्र का औपचारिक उद्घाटन और कार्यक्रम में भाग लेने वाले भागीदारों का स्वागत करते हुए कहा विभिन्न कंपनियों और बैंको द्वारा सौर ऊर्जा से संबंधित नौ परियोजनाओं के लिए अनुमति पत्र आदान–प्रदान के संबंध में जानकारी दी। उन्होने कहा कि आईएसए को अब कार्य को आदान प्रदान में बदलने के रूप में जाना जायेगा। 
   उन्होंने कहा कि अप्रैल 2018 तक आईएसए के अंतर्गत 100 से अधिक परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किये जायेगे। उन्होने सदस्य देशों और विभिन्न भागीदारको का बेहद कम समय में आईएसए को स्थापित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने भारत सरकार के अंतर्गत नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 19 से 21 अप्रैल 2018 तक आयोजित दूसरे रि-इन्वेस्ट बैठक के संबंध में बताया और इसका निमंत्रण दिया। मंत्री स्तरीय बैठक के बाद तीन तकनीकी समूह परिचर्चा का आयोजन किया गया।
    इसमें ऊर्जा मंत्रियों, नीतिनिर्धारकों,बहुस्तरीय बैंक और वित्तीय संस्थान, अनुसंधान और विकास संगठन एवं नवाचार,सौर ऊर्जा विकासक और निर्माता, निवेशक और अन्य भागीधारकों ने भाग लिया। आईएसए मंत्री स्तरीय सत्र की समाप्ति पर यस बैंक ने पांच बिलियन अमेरिकी ड़ॉलर से अधिक की राशि सौर परियोजनाओं को वित्तीय मदद के रूप में देने की घोषणा की।
     इसके साथ ही मैसर्स सीएलपी और मैसर्स एनटीपीसी लिमिटेड ने आईएसए के साथ भागीदारी गठित करने की घोषणा की और दोनों ने आईएसए निधि के लिए एक–एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का स्वैच्छिक योगदान देने का ऐलान भी किया। 
   आईए और जीसीएफ ने भी आईएसए के साथ भागीदारी में प्रवेश करने की घोषणा की। कार्य आधारित संगठन होन के कारण आईएसए सौर परियोजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रारंभ में सहयोग प्रदान करता है।इसलिए दिन के पहले हिस्से में नौ कंपनियों ने सौर ऊर्जा संबंधी परियोजनाओं के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये।