Friday, 29 September 2017

चार वर्षों में लगभग 50 करोड़ श्रम दिवसों के रोजगार का सृजन होगा

  नई दिल्ली। भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की वर्तमान एवं लक्षित परियोजनाओं से सीजनल आधार पर अगले चार वर्षों के दौरान लगभग 50 करोड़ श्रम दिवसों के अनुमानित रोजगार का सृजन होगा। 

   यह साल 2018 से लेकर साल 2022 तक की अवधि के दौरान औसतन लगभग 12.5 करोड़ श्रम दिवस प्रति वर्ष होगा। इनमें से लगभग एक करोड़ प्रोफेशनल, 3.5 करोड़ कुशल श्रम दिवस और 8 करोड़ अर्द्ध-कुशल तथा अकुशल श्रम दिवस होंगे। वर्तमान में, देशभर में एनएचएआई की 282 परियोजनाएं क्रियान्‍वयनाधीन हैं जिनकी कुल लम्‍बाई लगभग 20,000 किलोमीटर है। इनमें से 10,000 किलोमीटर लम्‍बे राजमार्गों का निर्माण अगले एक-दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है। 
   एनएचडीपी और भारत माला योजनाओं के तहत देश के सभी राज्‍यों में अगले तीन-चार वर्षों में लगभग 31,000 किलोमीटर की लम्‍बाई वाली तकरीबन 220 परियोजनाओं के ठेके देने एवं इन्‍हें पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है। 
    अत: एनएचएआई ने अगले चार वर्षों में लगभग 50,000 किलोमीटर लम्‍बे राजमार्गों का निर्माण करने की योजना बनाई है। इससे सीजनल रोजगार अवसर सृजित होंगे, क्‍योंकि परियोजनाओं का सफलतापूर्वक एवं दक्ष क्रियान्‍वयन सुनिश्चित करने के लिए योग्‍य प्रोफेशनलों, कुशल एवं अर्द्ध-कुशल श्रम बल की आवश्यकता पड़ेगी। प्रोफेशनलों, कुशल एवं अर्द्ध-कुशल श्रम बल की आवश्यकता पूरी करने के लिए एनएचएआई ने कौशल विकास के लिए एक व्‍यापक कार्यक्रम शुरू किया है। 
      प्रोफेशनलों, कुशल एवं अर्द्ध-कुशल श्रम बल का कौशल बढ़ाने का खाका तैयार करने के लिए एनएचएआई के अध्‍यक्ष दीपक कुमार ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की। बैठक के दौरान कौशल विकास से जुड़े विभिन्‍न मुद्दों पर चर्चा हुई। 
   एनएचएआई के अध्‍यक्ष्‍ा ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधिकारियों से एनएचएआई की परियोजनाओं की आवश्‍यकता के अनुरूप कौशल विकास की विस्‍तृत योजना पेश करने को कहा है। संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

भारत में शिशु मृत्‍यु दर में कमी

   नई दिल्ली। भारत में शिशु मृत्‍यु दर (आईएमआर) में कमी दर्ज की गई है। हाल ही में जारी एसआरएस बुलेटिन के मुताबिक वर्ष 2016 में भारत के आईएमआर में तीन अंकों (8 प्रतिशत) की गिरावट दर्ज की गई है।

  वर्ष 2015 में जन्‍मे 1000 बच्‍चों में से 37 बच्‍चों की मृत्‍यु हो गई थी। यह आंकड़ा वर्ष 2016 में घटकर 34 के स्‍तर पर आ गया है। इससे पिछले वर्ष भारत के आईएमआर में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। इतना ही नहीं, भारत में जन्‍मे कुल बच्‍चों की संख्‍या में भी उल्‍लेखनीय कमी देखने को मिली है, जो पहली बार घटकर 25 मिलियन के स्‍तर से नीचे आई है।
   वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2016 के दौरान भारत में 90,000 कम नवजात शिशुओं की मृत्‍यु हुई। वर्ष 2015 में 9.3 लाख नवजात शिशुओं की मृत्‍यु होने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2016 में 8.4 लाख नवजात शिशुओं की मृत्‍यु हुई थी। एसआरएस बुलेटिन के मुताबिक नवजात बच्‍चे एवं बच्चियों की संख्‍या में अंतर निरंतर घटता जा रहा है। 
    नवजात बच्चियों एवं बच्‍चों की मृत्‍यु दर में अंतर घटकर अब 10 फीसदी से भी कम रह गया है। इससे सरकार की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना को काफी बढ़ावा मिला है। 
     आंकड़ों से यह पता चलता है कि मंत्रालय की रणनीतिक अवधारणा के सकारात्‍मक नतीजे अब आने शुरू हो गए हैं और इसके साथ ही इस मामले में खराब प्रदर्शन करने वाले राज्‍यों पर ध्‍यान केंद्रित करने के प्रयास भी अब सार्थक साबित हो रहे हैं। जहां तक सशक्‍त क्रियाशील समूह (ईएजी) वाले राज्‍यों का सवाल है, उत्‍तराखंड को छोड़ सभी राज्‍यों के आईएमआर में वर्ष 2015 की तुलना में कमी दर्ज की गई है।
       यह कमी बिहार में 4 अंकों, असम, मध्‍य प्रदेश, उत्‍तर प्रदेश एवं झारखंड में 3-3 अंकों और छत्‍तीसगढ़, ओडिशा एवं राजस्‍थान में 2-2 अंकों की रही है। 
     सरकार की विभिन्‍न पहलों के जरिये स्‍वास्‍थ्‍य सेवा कवरेज बढ़ाने के देशव्‍यापी प्रयासों के परिणामस्‍वरूप भी सिर्फ एक साल में ही ये उल्‍लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं। सेवा प्रदान करने की व्‍यवस्‍था को मजबूत करना, गुणवत्‍ता का आश्‍वासन, आरएमएनसीएचअए, मानव संसाधन एवं समुदाय संबंधी प्रक्रियाएं, सूचना एवं ज्ञान, दवाओं एवं निदान और आपूर्त‍ि श्रृंखला प्रबंधन इत्‍यादि भी इनमें शामिल हैं।

आईएएस न्यू इंडिया के स्वपन को साकार करने में योगदान दें

     उत्तराखंड। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने युवा आईएएस प्रशिक्षुओं का आह्वान किया है कि वे प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिए अपना योगदान दें। वे उत्तराखंड के मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में 92वें स्थापना पाठ्यक्रम के अधिकारी प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

    उऩ्होंने कहा कि आपको लोगों की सहायता के लिए कठिन कार्य करना है। आपको अपने कठिन परिश्रम के जरिए लोगों के बीच विश्वास की भावना पैदा करनी है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अधिकारियों को लोगों के साथ सहानुभूति से पेश आना चाहिए, जो उनके पास अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने उन्हें मानवता और देश के सामान्य नागरिकों की सेवा का सुअवसर दिया है। उन्होंने कहा कि आपको लोगों की समस्याओं को टालना नहीं चाहिए। 
      उन्होंने यह भी कहा कि आपका दृष्टिकोण व्यक्तिगत नहीं होना चाहिए, बल्कि हमेशा प्रणाली आधारित होना चाहिए। युवा आईएएस अधिकारियों को सतर्क करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उऩ्हें अपने अहम को टालना चाहिए, क्योंकि अहम दशमलव अंक के समान है, जिसे यदि अंक से पूर्व लगा दिया जाए तो अंक का मूल्य घट जाता है।
     उन्होंने युवा अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपको उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। आदर्श बनना चाहिए, लोग आपका अनुकरण कर सकें। उन्होंने कहा कि आप दूसरों के लिए तभी अनुकरणीय बन पाएंगे, जब आप उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति दृढ़ रहेंगे। आपको सार्वजनिक जीवन में हमेशा सतर्क रहना चाहिए। 
    उन्होंने प्रशिक्षुओं को उज्जवल भविष्य और सफल कैरियर की शुभकामनाएं दी। केंद्रीय गृह मंत्री बाद में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की माना बॉर्डर आउट पोस्ट जाएंगे। अपनी चार दिन की यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लापथाल और रिमखिम सीमा आउट पोस्ट का दौरा भी करेंगे। वे ऑली में आईटीबीपी के पर्वतीय और कौशल संस्थान में पर्वतारोहन और कमांडो कार्रवाई को भी देखेंगे। वे जोशी मठ में नागरिक कार्य कार्यक्रम और रक्तदान शिविर का उद्घाटन भी करेंगे।