Tuesday, 1 August 2017

पुलिस तंत्र को डिजिटल तकनीक क्षेत्र में उन्नयन करना चाहिए

        केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने यहां राज्यों- संघ शासित प्रदेशों के युवा पुलिस अधीक्षकों और सीएपीएफ के कमाडेंटों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

        इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन गृह मंत्रालय के पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि युवा अधिकारियों को भारत में होने वाले परिवर्तनों से अवगत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की पहल और योजनाएं कुछ इस तरह से बनायी जाती हैं कि नागरिक सशक्त होकर बेहतर जीवन जी सके।
     मंत्री ने ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य डिजिटल खाई को पाटना है। इसके तहत समाज के कमजोर तबकों पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सशक्तिकरण तब तक पर्याप्त नहीं है जब तक कि डिजिटल समावेशन न हो। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक सस्ती, समावेशी और विकास केन्द्रित होनी चाहिए। रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि भारत में सोशल मीडिया तेजी से बढ़ रहा है। पुलिस तंत्र को डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में उन्नयन करना चाहिए।
         उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सही जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल करें। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर सुरक्षा में अधिकारियों के प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिकारियों को इस दो दिवसीय सम्मेलन से ज्ञान प्राप्त होगा। यहां सीखे सबक का उपयोग वे अपने प्रोफेशनल जीवन में करेंगे।
        इस सम्मेलन के दौरान केन्द्रीय मंत्री ने ‘नेशनल पुलिस रिसर्च रिपॉजिटरी’ नामक पुस्तक का लोकार्पण किया। खुफिया ब्यूरो के निदेशक राजीव जैन ने कहा कि युवा अधिकारियों से काफी उम्मीदें हैं। वे अपने भविष्य में कुछ बेहतर करेंगे। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो की महानिदेशक डॉ. मीरन सी. बोरवंकर ने कहा कि पहली बार इस तरह का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
        उन्होंने कहा कि बेहतर पुलिस व्यवस्था के लिए पुलिस और सीएपीएफ को नागरिकों और तकनीकों दोनों का अच्छा उपयोग करना चाहिए। उद्घाटन सत्र के दौरान इस विषय पर तीन प्रस्तुतियां दी गईं कि पुलिस को किस तरह बेहतर तरीके से तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए।

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के लिए गठित समिति का तकनीकी सचिवालय

        प्रख्‍यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक एवं पद्म विभूषण विजेता डॉ. के. कस्‍तूरीरंजन ने बेंगलुरू स्थित राष्‍ट्रीय आकलन एवं प्रत्‍यायन परिषद (एनएएसी) के परिसर में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2017 का मसौदा तैयार करने वाली समिति के तकनीकी सचिवालय के नये कार्यालय का उद्घाटन किया। 

          इस समिति का गठन डॉ. के. कस्‍तूरीरंजन की अध्‍यक्षता में भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा किय गया है। जिसमें देशभर के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल हैं। इस समिति को राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति, 2017 का मसौदा तैयार करने की जिम्‍मेदारी दी गई है। यह तकनीकी सचिवालय एनएएसी के परिसर में ही है। यूजीसी इसके लिए प्रमुख एजेंसी है। राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति, 2017 का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति के अध्‍यक्ष डॉ. कस्‍तूरीरंजन ने कहा कि नई शिक्षा नीति सटीक एवं कारगर होगी। 
       इसमें समग्र राष्‍ट्रीय विकास के लिए व्‍यापक परिप्रेक्ष्‍य होगा। उन्‍होंने कहा कि भारत ने दुनिया को ‘तक्षशिला’ और ‘नालंदा’ जैसे अनेक प्रभावशाली केन्‍द्र सुलभ कराए हैं। हालांकि आज के परिदृश्‍य में इस तरह के जुड़ाव का सख्‍त अभाव देखा जा रहा है। इस खाई को पाटने की जरूरत है, ताकि भारतीय शिक्षा को आज की वैश्विक शिक्षा के उच्‍च स्‍तर के दायरे में लाया जा सके। 
         इस अवसर पर एनएएसी के निदेशक प्रो. डी.पी. सिंह ने एक ऐसी समग्र शिक्षा की जरूरत पर विशेष बल दिया, जो आधुनिक ज्ञान और प्राचीन बुद्धिमता के बीच समुचित संतुलन स्‍थापित कर सके। इससे लोगों को सामाजिक, राष्‍ट्रीय एवं वैश्विक स्‍तरों पर जोड़ने में शिक्षा एक कारगर साधन साबित हो सकेगी। 
      राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति, 2017 का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति के सदस्‍य प्रो.एम.के. श्रीधर ने समिति के उद्देश्‍यों के बारे में संक्षिप्‍त जानकारी दी। उन्‍होंने यह भी कहा कि समस्‍त हितधारकों के दृष्टिकोण एवं सुझावों को ध्‍यान में रखते हुए समिति इस साल के आखिर तक अपनी रिपोर्ट पेश करने का मन बना रही है।   

नासिक में प्याज के लिए शीत भंडारण गोदाम की आधारशिला

         रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के नासिक के पास लासलगांव में शीत भंडारण की आधारशिला रखी। भारतीय रेलवे का सार्वजनिक उपक्रम कॉनकोर (कन्टेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) नासिक के पास लासलगांव में एक शीत भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) का निर्माण करा रहा है ताकि प्याज और जल्द खराब होने वाली अन्य उपजों का भंडारण किया जा सके। 

       इस शीत भंडारण की कुल क्षमता 2500 एमटी होगी जिसमें से 1500 एमटी का उपयोग विशेषकर प्याज के भंडारण के लिए और बाकी भंडारण क्षमता का इस्तेमाल शीघ्र खराब होने वाली अन्य उपज जैसे फल और सब्जी यथा प्याज, अनार, अंगूर, केला, टमाटर के लिए किया जायेगा। भारतीय रेलवे अब किसानों को भंडारण की सुविधा देगी और लासलगांव के शीत भंडारण का लाभ न सिर्फ नासिक तथा लासलगांव के किसान, बल्कि इसके आसपास के जलगांव, मनमड़, धुले आदि क्षेत्रों के किसान भी उठा सकेंगे। 
      यह शीत भंडारण कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मॉडल के तहत 5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जा रहा। इस शीत भंडारण की देख-रेख मेसर्स लासलगांव विभाग सहकारी खरीद बिक्री संघ लिमिटेड करेगा। भारतीय रेलवे प्याज का मुख्य परिवाहक है और उत्पादक राज्यों से विभिन्न उपभोक्ता बाजार तक प्याज पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
       भारतीय रेलवे प्याज रखने के लिए रेक-माल-डिब्बा प्राथमिकता के आधार पर आवंटित करेगी ताकि प्याज किसानों के नुकसान को कम किया जा सके। जलवायु परिवर्तन प्याज वाले क्षेत्रों को काफी प्रभावित करता है जिससे कृषि उत्पाद में उतार-चढ़ाव हो सकता है। भरपूर उत्पादन का भंडारण करने की जरूरत है जिससे कमी के दौरान पूर्ति की जा सके। पारम्परिक तरीकों से मौसम के बदलने से 35 फीसदी तक हानि हो सकती है। इस हानि से लागत राशि बढ़ सकती है जो कि राष्ट्रीय हानि हो सकती है। 
      यह कोल्ड स्टोरेज प्याज को खराब होने से बचायेगा और दूरवर्ती स्थानों पर भेजा जा सकेगा। श्रम लागत काफी कम हो सकती है और प्याज को पारंपरिक भंडारण में रखने की भी जरूरत नहीं होगी। सामग्री लागत और कृषि लागत में बचत की जा सकती है और उत्पाद को खराब होने से भी बचाया जा सकता है। महाराष्ट्र, राष्ट्रीय प्याज उत्पादन के भंडारण में 33 प्रतिशत तक का योगदान दे सकता है। 
        कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कॉनकोर के तहत उत्तरप्रदेश में गाजीपुर के गाजीपुर घाट रेलवे स्टेशन पर शीघ्र विनाशशील कार्गो केन्द्र (पीसीसी) को स्थापित किया जिसमें फल और सब्जियों का भंडारण किया जाता है। कॉनकोर को किराये पर दी गई रेलवे भूमि पर 2500 वर्गमीटर क्षेत्र पर फल और सब्जियों को पकाने और उनका भंडारण करने की सुविधा के लिए निर्माण किया गया है। यह सुविधा आस-पास के क्षेत्रों के किसानों की जरूरतों को पूरा कर रही है और जिससे सब्जियों तथा कृषि उत्पादों को खराब होने से बचाया जा रहा है।
          इस सुविधा का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने 14 नवम्बर 2016 को यूपी के गाजीपुर में किया। इसी तरह की सुविधा का उत्तरप्रदेश के वाराणसी में राजातालाब में निर्माण किया जा रहा है जिससे आस-पास के किसान फल और सब्जियों का भंडारण कर सकेंगे। इसकी नींव प्रधानमंत्री द्वारा रखी गयी। इसके नवंबर के अंत शुरू होने की संभावना है। कॉनकोर ने दिल्ली के आजादपुर में विनाशशील कार्गो केन्द्र स्थापित किया। 
       यह सुविधा केले को पकाने के साथ आर्द्रता के तापमान और एथीलीन संकेन्द्रण को स्वतः नियंत्रित करती है। केले को पकाने से पहले की प्रक्रिया और अन्य फलों को जैसे धोना, छंटाई, निर्धारण और पैकिंग आदि की सुविधा भी है। यह शीत भंडारण फलों और सब्जियों के भंडारण की सुविधा भी देता है। पश्चिम बंगाल के जिले हुगली के सिंगूर में कॉनकोर ने शीघ्र विनाशशील कार्गो केन्द्र (पीसीसी) स्थापित किया है। 
         शीघ्र विनाशशील कार्गो केन्द्र, सिंगूर में ‘अत्याधुनिक’ सीआईपीसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है ताकि आलू के उत्पादकों के लिए ज्यादा मूल्य वर्द्धन संभव हो सके। यह आलू को सर्वोत्तम तापमान देने और उसके मूल्य वृद्धि को बढ़ने में मदद करता है। सिंधुदुर्ग में मैंगो पैक हाउस का उन्नयन, कॉनकोर ने महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग की तहसील देवगड़ में मैंगो पैक हाउस के उन्नयन का काम किया ताकि आम को पैदा करने वाले किसानों को आम निर्यात करने की बेहतर सुविधाएं मिल सके।

उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाढ़ राहत के लिए 2000 करोड़ की सहायता

        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित उत्तर-पूर्वी राज्यों में राहत, पुनर्वास, पुनर्निर्माण और बाढ़ की स्थिति से निपटने के उपायों के लिए 2000 करोड़ रुपए से अधिक के राहत पैकेज की घोषणा की। उच्चस्तरीय बैठकों के अंतिम चरण में यह घोषणा की गई, जिसमें प्रधानमंत्री ने इन राज्यों में बाढ़ की स्थिति और राहत के उपायों की समीक्षा की। 

     प्रधानमंत्री ने दिनभर असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड राज्यों में बाढ़ की स्थिति के बारे में विस्तृत और अलग-अलग समीक्षा बैठकों में हिस्सा लिया। इन राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी बैठकों में उपस्थित थे। मिजोरम के मुख्यमंत्री की ओर से एक ज्ञापन भेजा गया था, जो व्यक्तिगत रुप से बैठक में उपस्थित नहीं हो पाए। 
   केंद्र सरकार की ओर से केवल बुनियादी क्षेत्र के लिए 1200 करोड़ रुपए से अधिक धनराशि दी जाएगी। इस धनराशि का इस्तेमाल सड़कों, राजमार्गों, पुलों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत, रखरखाव और मजबूती के लिए किया जाएगा। ब्रह्मपुत्र नदी की जल ग्रहण क्षमता में सुधार के लिए 400 करोड़ रुपए की धनराशि दी जाएगी, जिससे बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी।
         मौजूदा वित्त वर्ष में, केंद्र सरकार ने राज्य आपदा राहत निधि के केंद्रीय हिस्से के रूप में 600 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसमें से 345 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं और शेष धनराशि शीघ्र जारी की जाएगी, ताकि राहत और पुनर्वास कार्य में राज्य की सहायता की जा सके। केंद्र सरकार इस क्षेत्र में लगातार बाढ़ की स्थिति से निपटने हेतु समयबद्ध दीर्घकालिक समाधान के प्रयासों के बीच तालमेल आधारित एक अध्ययन के संचालन के लिए 100 करोड़ रुपए प्रदान करेगी। 
         भारत भूमि के आठ प्रतिशत हिस्सा वाले पूर्वोत्तर क्षेत्र में देश का एक-तिहाई जल संसाधन मौजूद है। केंद्र सरकार इस क्षेत्र के विशाल जल संसाधन के समुचित प्रबंधन के लिए भारत सरकार के मंत्रालयों और राज्यों के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी। 
       प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत निधि के अधीन बाढ़ के कारण मारे गए लोगों के निकट संबंधी को 2,00,000 रुपए और गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि मंजूर की गई है।

जोशीला गान स्‍वच्‍छता की ज्‍योति जगी....

         स्वच्छता जन आंदोलन में लोगों को प्रतिभागिता के लिए प्रेरित करने तथा उन्हें आवास और शहरी विकास मामले मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ‘स्वच्छता सर्वेक्षण - 2018’ के साथ जोड़ने के लिए एक गीत पेश किया जिसकी पहली पंक्ति है, ‘स्वच्छता की ज्योति जगी है’।

      सर्वेक्षण के गान के रूप में गाए जाने वाले इस गीत को भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो ने पेश किया। सुप्रियो की परिकल्पना को जाने-माने गीतकार प्रसून जोशी ने अपनी कलम से साकार किया। निर्माता मुकेश भट्ट ने स्वेच्छा से इसे मंत्रालय के लिए तैयार किया। शंकर महादेवन ने इसे संगीतबद्ध किया है।
      स्वच्छता सर्वेक्षण के साथ लोगों को जोड़ने के लिए आज से इसका सोशल मीडिया सहित विभिन्न मंचों पर व्यापक उपयोग किया जाएगा। इस गीत को बाबुल सुप्रियो, उदित नारायण, सुश्री श्रेया घोषाल, सुश्री अल्का याज्ञनिक, सुश्री आकृति कक्कड़ और शान बैनर्जी तथा बच्चों ने मिलकर गाया है। गीत में अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर के संदेश भी हैं। गीत की पहुंच बढ़ाने के लिए इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी डब किया जाएगा।