Monday, 27 March 2017

करीब 37,500 लोगों को रोज़गार

            भारत सरकार ने डिस्कवर्ड स्माल फील्ड बिड राउंड 2016 के अंतर्गत आवंटित अनुबंधों के आवंटियों के साथ नई दिल्ली में अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने की। 

           प्रधान के प्रतिनिधिमंडल में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डी.के. त्रिपाठी एवं मंत्रालय के कई अन्य अधिकारी शामिल थे। मंत्री ने भारत में व्यवसाय के माहौल को सरल बनाने की दिशा में डीएसएफ के लिए एक सह-क्रियात्मक (इंटरएक्टिव) पोर्टल का उद्घाटन भी किया, जिसे अनुबंध प्रबंधन और समस्या निवारण के लिए डीजीएच द्वारा विकसित किया गया है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि डीएसएफ की शुरुआत वर्ष 2022 तक भारत में ऊर्जा आयात को 10 फीसदी तक कम करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।

              उन्होंने कहा कि कम समय में पूरे हुए डीएसएफ बिड राउंड ने ई-बिडिंग व्यवस्था, इंटरएक्टिव मोबाइल एप, वर्चुअल डाटा केन्द्र की व्यवस्था, डेडिकेटेड सुविधा केन्द्र, अनुबंधकर्ताओं की सुविधा के लिए कार्यशालाओं का आयोजन आदि तमाम नई पहलों में मदद की है। मंत्री ने कहा कि आवंटित क्षेत्रों में संचित उत्पादन लगभग 15000 बीओपीडी तेल और गैस के 2 एमएमएससीएमडी होने की संभावना है। अनुमानित कुल राजस्व करीब 46,400 करोड़ रुपये होगा, जिसमें से रॉयल्टी और सरकार के राजस्व का हिस्सा क्रमशः करीब 5000 करोड़ एवं 9,300 करोड़ रुपये होगा। 

                यह भी अनुमान है कि आवंटित क्षेत्रों से करीब 37,500 लोगों को रोज़गार मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने यह उल्लेख किया कि, सरकार डीएसएफ आवंटन के दूसरे चरण की दिशा में भी कार्य कर रही है, और जल्द ही ओपन एक्रीज लाइसेंसिंग (ओएएल) के जरिए हाइड्रोकार्बन एक्स्प्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (एईएलपी) को अमलीजामा पहनाया जाएगा, जिससे ईएंडपी निवेश के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। प्रधान ने आवंटियों को बधाई दी और आश्वस्त किया कि उन्हें सरकार की ओर से पर्याप्त समर्थन एवं मदद दी जाएगी।

                उन्होंने अनुबंधों की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए अधिकारियों सहयोगी संगठनों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की। हाल ही में, केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री के साथ-साथ केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती निर्मला सीतारमण और केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री पोन. राधाकृष्णन ने तमिलनाडु के नेदुवसल गांव के प्रतिनिधिमंडल के प्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र में अन्वेषण संबंधी चिंताओं के बारे में मुलाकात की थी।

              मंत्रियों ने प्रतिनिधिंडल को आश्वासन दिया कि इस संबंध में कार्य तभी शुरु किया जाएगा, जब तमिलनाडु सरकार, केन्द्र सरकार के साथ चर्चा कर स्थानीय लोगों की परेशानियों का समाधान निकाल लेगी।

विशेष खिलाडि़यों का दल सम्‍मानित

               खेल और युवा मामलों के मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने 14 से 25 मार्च, 2017 तक ऑस्ट्रिया में आयोजित विश्‍व शीतकालीन खेलों के सफल दौरे के बाद भारत लौटे विशेष खिलाडि़यों, उनके कोच और अधिकारियों को सम्‍मानित किया। 

           विशेष ओलम्पिक भारतीय टीम ने 107 देशों से आये 2700 खिलाडि़यों के बीच 27 स्‍वर्ण, 10 रजत और 26 कास्‍य पदक जीतें। भारत को पांचवां स्‍थान मिला। इससे पहले खेल और युवा मामलों के मत्रालय ने 90 खिलाडि़यों, 23 कोचों तथा 3 अधिकारियों के इस दल को इन खेलों में भागीदारी करने के लिए पूरे खर्च के साथ मंजूरी दी थी। 

           इन खेलों में भाग लेने पर इस दल पर लगभग 1.50 करोड़ रूपये का खर्चा आया। इस अवसर पर गोयल ने कहा कि इन खिलाडि़यों ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ निश्‍चय और समर्पण के द्वारा एक व्‍यक्ति अपने जीवन में कुछ भी हासिल कर सकता है। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि इन विशेष खिलाडि़यों में से कई खिलाड़ी भविष्‍य के खेल सितारे बन जाएंगे और देश का नाम रोशन करेंगे। 

         उन्‍होंने टीम के हर सदस्‍य को बधाई दी और उनके बेहतरीन भविष्‍य की कामना की। गोयल ने कहा कि उनकी यह जीत युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और हम भविष्‍य में उनके प्रयासों के लिए अपना समर्थन जारी रखेंगे।

देश में करीब 50 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता

                  केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने नये भारत यानी न्यू इंडिया का आह्वान किया है जिसमें कालेधन और भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं है। 

           देश में डिजिधन और कैशलेस लेनदेन को आगे ले जाना भी प्रधानमंत्री की इसी सोच का हिस्सा है। सिंह ने यह बात मोतिहारी के में आयोजित डिजिधन मेले के उद्धघाटन के अवसर पर कही। मोतिहारी में आयोजित डिजिधन मेला पूरे दिन चला जहां बैंक, सामान्य सेवा केन्द्र (सीएससी), निजी डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाता आदि डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए उपभोक्ताओं और व्यापारियों को सेवाएं दीं।

                राधा मोहन सिंह ने डिजिधन मेले में लोगों को बताया कि कैशलेस लेने-देन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। देश में नकदरहित लेन-देन के लिए शिक्षित युवाओं की बढती संख्या देखते हुए पहली बार सरकार ने एक सरल भीम ऐप लांच किया है जो कि अत्यधिक लोकप्रिय है। अब तक 1.25 करोड़ लोग इस भीम ऐप से जुड चुके हैं और इसकी मदद से कुल 361 करोड़ रूपये का लेन-देन किया जा चुका है। सिंह ने कहा कि देश में 100 करोड़ से ज्यादा फोन हैं जिसमें से 30-40 करोड़ स्मार्ट फोन हैं एवं करीब 50 करोड़ इंटरनेट के उपभोक्ता हैं। 

               अगर इनका सही इस्तेमाल किया जाए तो क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कार्ड बैंकों द्वारा बनाई नई व्यवस्था है, जिसमें मोबाईल एप्प डाउनलोड करने के बाद किसी भी बैंक से फोन नम्बर के आधार पर लेन-देन किया जा सकता है। सिंह ने बताया कि रेल विभाग में कुल 2.15 करोड़ रेलवे टिकट बुक होते हैं जिसमें से 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा टिकट ऑनलाइन बुक होते हैं।

             सिंह ने जानकारी दी कि कुल बैंक अकाउंट 144 करोड़ हैं जिसमें से 117 करोड़ सेविंग्स अकाउंट हैं। कुल जन-धन अकाउंट 28.02 करोड़ हैं। 40 करोड़ बैंक अकाउंट आधार कार्ड से जुड़े हैं। कुल आधार कार्ड की संख्या है 113 करोड़। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि कुल मशीन की संख्या है 20.13 लाख एवं मार्च, 2017 तक इसमें 10 लाख नई मशीनें जोड़ी जायेंगी। देशभर में कुल 110.6 करोड़ क्रेडिट/डेबिट कार्ड हैं। 21.9 करोड़ लोगों के पास रूपये कार्ड हैं जिसका इस्तेमाल वर्तमान में 40 प्रतिशत बढ़ा है।

             सिंह ने कहा कि कृषि मंत्रालय कृषि से जुड़े हर लेनदेन में कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है और इसके लिए हर सुविधा मुहैया करवा रहा है। राधा मोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने विमुद्रीकरण की शुरुआत कर कालेधन के खिलाफ जंग छेड़ दी है। 500 शहरों में जानकारी एवं जागरूकता हेतु प्रयास किये जा रहे हैं।

आईटी उद्योग का प्रदर्शन अच्‍छा, भारत में बहुत अधिक संभावनाएं

             राष्‍ट्र‍ीय रेल संग्रहालय ऑडिटोरियम, चाणक्य पुरी, नई दिल्‍ली में ‘डिजिटल इंडिया के लिए आईआर-वन आईसीटीसी (वन इंफोर्मेशन एंड कम्‍युनिकेशन टैक्‍नोलॉजी) बिल्डिंग डिजिटल रेलवे की थीम पर एक सम्‍मेलन का आयोजन किया गया।

            सम्‍मेलन का उद्घाटन केन्‍द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने किया। इस अवसर पर रेल राज्‍य मंत्री राजेन गोहेन भी मुख्‍य रूप से उपस्थि‍त थे। सम्‍मेलन में रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष ए.के. मित्‍तल, रेलवे बोर्ड के सदस्‍य प्रदीप कुमार के साथ रेलवे बोर्ड के अन्‍य सदस्‍य, भारतीय रेल के अधिकारी गण और नेस्‍कॉम के प्रतिनिधि तथा आईटी उद्योग के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। 

               इस अवसर पर संबोधित करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, ‘यह बेहद दिलचस्‍प कार्यक्रम है। पिछले कई वर्षों से आईटी क्षेत्र में भारी वृद्धि देखी गई है। आईटी क्षेत्र में बहुत अधिक अवसर हैं। आईटी उद्योग चारों और व्‍यापार के रूप में फैल रहा है। यह उद्योग व्‍यापार के लिए अगले दरवाजे की तलाश नहीं करता है। आईटी उद्योग ने बहुत अच्‍छा प्रदर्शन किया है और भारत में बहुत अधिक संभावनाएं मौजूद है। भारतीय रेलवे व्‍यापक अवसर प्रदान करता है। भारतीय रेल का मतलब केवल संचालन से ही नहीं है। भारतीय रेलवे में चिकित्‍सा, शिक्षा, समाज, पर्यावरण जैसे विभिन्‍न क्षेत्रों की अन्‍य बहुत सी गतिविधियां शामिल हैं। 

               बजट भाषण में यह घोषणा की गई थी, कि भारतीय रेलवे को डिजिटलीकरण के लिए एकीकृत और समग्र दृष्टिकोण की आवश्‍यकता है। यह पता लगाया गया है कि भारतीय रेल नेस्‍कॉम के माध्‍यम से किस तरह से आईटी उद्योग के साथ भागीदारी कर सकती है। इस उद्यम के माध्‍यम से विक्रेता और रेलवे दोनों को बराबर फायदा होना चाहिए। यह एक महत्‍वपूर्ण बदलाव होगा। यदि रेलवे दो बिलियन डॉलर का निवेश कर छह बिलियन डॉलर की बचत कर सकता है, तो यह महत्‍वपूर्ण उपलब्धि होगी। डिजिटल प्‍लेटफॉर्म के दो मॉडल उपलब्‍ध हैं। पहला – केपेक्‍स प्‍लेटफॉर्म तथा दूसरा- ओपेक्‍स मॉडल है। छह बिलियन डॉलर के आंकड़े में गैर-किराया राजस्‍व शामिल नहीं है। गैर-किराया राजस्‍व लाभकारी हो सकता है, क्‍योंकि इससे रेलवे के राजस्‍व में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।’

101 नई एकीकृत कोल्‍ड चेन परियोजनाओं को मंजूरी

              भारत विश्व में सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक और फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके बावजूद यहां केवल 2.2 प्रतिशत फलों और सब्जियों का प्रसंस्‍करण ही किया जाता है।

          भारत में प्रत्‍येक खाद्य उत्पादन केंद्र पर सस्ते शीत भंडार और शीत श्रृंखलाओं की आवश्यकता है। मौजूदा शीत भंडार सुविधा कुछ राज्यों में ही केंद्रित है और मौटे तौर पर 80 से 90ऽ शीत भंडारों का आलू के भंडारण के लिए उपयोग किया जाता है। भारत को इस बारे में लंबा रास्‍ता तय करना है। खाद्य प्रसंसकरण मंत्रालय देश में राष्ट्रीय कोल्‍ड चेन ग्रिड का निर्माण कर रहा है ताकि सभी खाद्य उत्पादक केन्द्रों को शीत भंडारण और प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ा जा सके। खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय नई कोल्‍ड चेन अवसंरचना को स्थापित करने में जुटा हुआ है, जिसमें शीत भंडारण और प्रसंस्करण दोनों ही सुविधाएं शामिल हैं। मंत्रालय ने मई, 2015 में 30 कोल्‍ड चेन परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। 

            मंत्रालय ने पूरे देश में फैली 101 नई एकीकृत कोल्‍ड चेन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं फलों और सब्जियां, डेयरी, मछली, मांस, समुद्री उत्‍पाद, मुर्गी उत्‍पाद, खाने के लिए तैयार/पकाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थों के लिए हैं। मंत्रालय रणनीतिक योजना द्वारा कोल्‍ड चेन अवसंरचना की स्‍थापना पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे पूरे देश में कोल्‍ड चेन ग्रिड बनेगा। इससे प्रधान मंत्री के किसानों की आय को दोगुना करने के मिशन को प्राप्‍त करने में मदद मिलेगी। इससे कृषि आपूर्ति श्रृंखला में बर्बादी कम हो जाएगी और बड़ी संख्‍या में रोजगार के अवसर जुटाने में भी मदद मिलेगी।

             कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना योजना में उद्यमियों को 10 करोड़ तक की वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध कराई जाती है। इन नई एकीकृत कोल्‍ड चेन परियोजना के तहत खाद्य प्रसंस्‍करण क्षेत्र के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा सृजन के लिए 3100 करोड़ रुपये के कुल निवेश की जरूरत पड़ेगी। इन परियोजनाओं के लिए कुल अनुमानित ग्रांड-इन-एड 838 करोड़ रूपये होगी।
 

               इन 101 नई कोल्ड चेन परियोजना से 2.76 लाख मीट्रिक टन कोल्ड स्टोरेज / नियंत्रित वायुमंडल / फ्रोजन भंडारों की अतिरिक्त क्षमता, 115 मीट्रिक टन प्रति घंटे की व्यक्तिगत त्वरित फ्रीजिंग (आईक्यूएफ) क्षमता, 56 लाख लीटर प्रति दिन दूध प्रोसेसिंग की क्षमता, 210 मीट्रिक टन प्रति बैच ब्लास्ट फ्रीजिंग और 629 रेफ्रिजेरेटेड/ इंसुलेटेड वाहनों की क्षमता उपलब्‍ध होगी।

           इन एकीकृत कोल्‍ड चेन परियोजनाओं से संबंधित राज्यों में न केवल खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना के विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्‍कि किसानों को भी उनके उत्‍पाद की बेहतर कीमत उपलब्‍ध होगी जो किसानों की आय को दुगुना करने की दिशा में एक कदम होगा। बुनियादी ढांचे से जल्‍दी खराब होने वाले उत्‍पादों की बर्वादी घटाने में मदद मिलेगी इसके अलावा कृषि उत्‍पादों के मूल्‍य संवर्द्धन में सहायता मिलने के अलावा विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। 

              उपरोक्‍त कोल्‍ड चेन अवसंरचना और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण करने और देश में आवश्‍यक खाद्य प्रसंस्‍करण अवसंरचना बुनियादी ढांचे का और विस्‍तार करने तथा मजबूती प्रदान करने के लिए अभी लंबा रास्‍ता तय करना होगा। इससे उत्पादकों से प्रसंस्‍करणकर्ताओं, खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों से छोटी, सुसंगत और संपीड़ित आपूर्ति श्रृंखला बनाने में मदद मिलेगी और इससे फल और सब्‍जी तथा दुग्‍ध प्रसंस्‍करण तथा गैर-बागवानी खाद्य उत्‍पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा।

100 बिलियन डॉलर सालाना जीवाश्म ईंधन की बचत

            केन्द्रीय विद्युत, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयुष गोयल ने पर्यावरण 2017 विषय पर आयोजित विश्व सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान परिदृश्य में इस तरह के सम्मेलन अत्यंत सराहनीय हैं, क्योंकि इस तरह के सम्मेलनों में होने वाली चर्चा जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में नए विचारों को पैदा करने में मदद करने के साथ-साथ पर्यावरण एवं जलवायु से जुड़े विभिन्न संवेदनशील विषयों की ओर हमारा ध्यान केन्द्रित करते हैं। 

            गोयल ने कहा कि हम इस ग्रह पर रह रहे हैं। इसके संसाधनों का इस तरह से इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसे कि भविष्य में हमें किसी अन्य ग्रह पर जाना हो। मंत्री ने कहा कि यह ऐसा समय है, जब मनुष्य समझता है कि जलवायु परिवर्तन का कारण मनुष्य ही है। वह ही इस समस्या का समाधान कर सकता है। उन्होंने उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से सबसे अधिक नुकसान गरीबों और वंचित वर्ग के लोगों को हुआ है। वर्ष 1911 में महात्मा गांधी ने ‘प्रकृति की अर्थव्यवस्था’ पंक्ति का इस्तेमाल किया था, जिसने प्रकृति द्वारा की जाने वाली आपूर्ति और मानव अस्तित्व की मांग की आवश्यकता के बारे में विस्तार से चर्चा की गई थी। मंत्री ने महात्मा गांधी की बात का उदाहरण देते हुए कहा कि पृथ्वी प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराती है, मगर लोगों के लालच की पूर्ति के लिए नहीं। 

                  जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बात करते हुए गोयल ने कहा कि सरकार ऊर्जा, पर्यावरण एवं बढ़ती अर्थव्यवस्था की ऊर्जा ज़रूरतों को संतुलित करने की दिशा में 360 प्रतिशत समग्र दृष्टिकोण को अपना रही है। सरकार इस बात को लेकर वचनबद्ध है कि इस राष्ट्र को पर्यावरण को बचाना एवं उसका संरक्षण करना होगा एवं आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण करना होगा। सरकार द्वारा प्रकाश के बोझ को कम करने के लिए सभी लाइटों को एलईडी लाइट्स से बदला जा रहा है, सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना कॉर्बन उत्सर्जन को करीब 80 मिलियन टन की दर से सालाना कम करेगा और आर्थिक रूप से बेहतर यह परियोजना लोगों के बिजली के बिलों में सालाना करीब 4000 करोड़ रुपये की बचत करेगी। 

                मंत्री ने कहा कि भारत थर्मल पॉवर पर निर्भरता वाली अर्थव्यवस्था से नवीकरणीय ऊर्जा वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा कार्यक्रम को 20 गीगावॉट से बढ़ाकर, वर्ष 2022 तक 100 गीगावॉट करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है, और मैं आपको आश्वासन देता हूं कि पेरिस में हमने जो भी वादे किए थे, वे न सिर्फ पूरे होंगे, बल्कि सरकार के प्रयासों द्वारा हम इन वादों और लक्ष्यों से भी आगे निकल जाएंगे। खनन क्षेत्र को अधिक दक्ष बनाने की दिशा में सरकार की योजनाओं के बारे में बातचीत करते हुए गोयल ने कहा कि यह क्षेत्र प्रत्येक दिन ऊर्जा के प्रति अधिक दक्ष और पर्यावरण के प्रति जागरूक होता जा रहा है।

                    सरकार देशभर में खनन के दौरान निकलने वाले पानी का सदुपयोग करने की दिशा कार्य करने के बारे में विचार कर रही है, ताकि संबंधित क्षेत्र में रह रहे लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ नदी पुनरुद्धार और ज़मीनी जल का स्तर ऊंचा उठाने में इसका इस्तेमाल किया जा सके। देशभर में सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को बारे में बात करते हुए गोयल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ मंत्रियों के एक समूह को इस संबंध में निर्देश देकर कहा है कि वर्ष 2030 तक इस दिशा में पर्याप्त काम कर, ज़्यादातर वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तित करें। मंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत के वाहनों का इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तन होने से देशभर में करीब 100 बिलियन डॉलर सालाना जीवाश्म ईंधन की बचत होगी। 

                 सरकार द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत वर्ष 2030 तक अपने सभी वाहनों को राजस्थान की केवल एक फीसदी भूमि का इस्तेमाल कर सृजित की जाने वाली सौर ऊर्जा से ही चला सकता है। गोयल ने यह कहकर अपनी बात का समापन किया कि भारत उसके पीछे नहीं भागता जिसके पीछे दुनिया भागती है, मगर दुनिया उसके पीछे ज़रूर आती है, जिस क्षेत्र में भारत बढ़त बनाता है। उन्होंने स्टीव जॉब्स द्वारा कही गई बात का उदाहरण देते हुए कहा कि उठो और बीते कल की चिंता करने के बजाय आने वाले कल के बारे में सोचो एवं अविष्कार करो।

                कार्यक्रम के दौरान अन्य गणमान्य अतिथियों में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार, भारत के सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव अजय नारायण झा के अलावा कई विदेश गणमान्य अतिथि, राजदूत, पर्यावरणविद् एवं छात्र मौजूद थे।

मज़बूत होंगे भारत व वियतनाम संबंध

                 सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि फिल्म, प्रसारण एवं सूचना प्रसार के क्षेत्र में सहयोग भारत और वियतनाम के बीच संबंधों को और अधिक मज़बूत करेगा।

             सोशल मीडिया में संस्थानिक क्षमता निर्माण सहयोग एवं पत्रकारिता एवं फिल्म के क्षेत्र में दोनों देशों के प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच छात्र विनिमय कार्यक्रम दोनों देशों को और करीब लेकर लाएगा। भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने यह विचार वियतनाम सरकार के सूचना एवं संचार मंत्री त्रोंग मिन तुआन के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से औपचारिक मुलाकात के दौरान कहीं। नायडु ने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय दोनों देशों के बीच सार्वजनिक प्रसारकों, सामग्री सृजन, स्क्रीनिंग एवं फिल्मों के वितरण के क्षेत्र में विनिमय कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने एवं समर्थन करने के लिए हर संभव मदद उपलब्ध कराएगा। 

              नायडु ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा फिल्म निर्माताओं को एकल खिड़की सुविधा के माध्यम से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किए गए फिल्म सुविधा कार्यालय (एफएफओ) के बारे में वियतनाम के प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया। एफएफओ फिल्म निर्माताओं के लिए एक सुविधा केन्द्र के रूप में कार्य करेगा। अपेक्षित अनुमित प्राप्त करने, शूटिंग के बारे में सूचना प्रसारित करने के साथ-साथ भारतीय फिल्म उद्योग से जुड़ी निर्माण पूर्व एवं निर्माण के बाद की तमाम सुविधाओं को प्राप्त करने में मदद करेगा। 

               वियतनाम मंत्री ने अपनी बात रखते हुए वियतनाम में मीडिया के परिदृश्य के बारे में संक्षेप में बताया और उम्मीद जताई कि सूचनाओं को एकत्रित करने और उनका प्रसार करने की दिशा में दोनों देशों के राष्ट्रीय लोक प्रसारकों के बीच सहयोग बढ़ेगा। वर्ष 2014 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और वियतनाम सरकार के संस्कृति, खेल एवं पर्यटन मंत्रालय के बीच वर्ष 2015-17 के लिए हस्ताक्षर किए गए संस्कृति विनियम कार्यक्रम (सीईपी) ने फिल्म के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक संस्थानिक ढांचा उपलब्ध कराया है।

            वर्ष 2016 में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वियतनाम यात्रा दोनों देशों के नज़रिए से एक प्रासंगिक एवं महत्वपूर्ण कार्यक्रम था, जो भारत की पूर्व में देखो नीति को सुदृढ़ करता है। वर्ष 2017 दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों की 45वीं वर्षगांठ और रणनीतिक सहयोग के 10वें वर्ष का प्रतीक है।

 

भारत में स्‍वच्‍छता जन-जन की आदत

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रह्माकुमारीज़परिवार के 80वीं वर्षगांठ समारोह के अवसर पर वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए समारोह को संबोधित किया। 

          प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्था के सभी सदस्यगण, अन्तराष्ट्रीय सम्मलेन और सांस्कृतिक महोत्सव हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश से आये हुए सभी लोगों का हृदय से अभिनन्दन करता हूँ। और आप सब को भी मेरी तरफ से ॐ शांति कह करके अभिवादित करता हूँ। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍वविद्यालय के संस्‍थापक दादा लेखराज जी, आज जरूर उनकी आत्‍मा को शांति होती होगी कि जिस विचार को उन्‍होंने संस्‍थागत रूप दिया, और स्‍त्री शक्ति के माध्‍यम से उसे आगे बढ़ाया; उस आंदोलन को आज 80 वर्ष हो रहे हैं। हमारे देश में 80 वर्ष का एक विशेष महत्‍व माना जाता है। 

                     दुनिया में 25 साल, 50 साल, 75 साल, 100 साल; ये तो मनाए जाते हैं, लेकिन भारत में 80 साल का एक विशेष महत्‍व है। और जब किसी व्‍यक्ति के जीवन में या संस्‍था के जीवन में 80 साल होते हैं, मतलब कि वो सहस्र चंद्र-दर्शन का पर्व होता है। 80 साल की यात्रा में व्‍यक्ति या संस्‍था ने एक हजार बार पूर्ण चंद्र के दर्श किए होते हैं। आज ब्रह्मा कुमारी विश्‍वविद्यालय, दादा लेखराज जी के प्रयत्‍नों से आरंभ हुआ ब्रह्मा कुमारी आंदोलन उस सहस्र चंद्रदर्शन की बेला पर है तब, विश्‍व की पूरी मानव जाति को शीतलता प्रदान करने का उसका प्रयास इस अवसर से नई ऊर्जा पा करके आगे बढ़ेगा।

                गत वर्ष दादी जानकी जी ने शताब्‍दी पूरी की, एक सौ वर्ष की हैं; और आज भी एक कर्मयोगी की तरह समय दे करके हम सबको आशीर्वाद दे रही हैं। मैं दादीजी को यहां से प्रणाम करता हूं। दो दिन के बाद 'चेटी चन्न' का पर्व मनाया जाएगा। पूरे हिन्‍दुस्‍तान में संवत्‍सर का अवसर होता है। मैं आप सबको नव-संवत्‍सर की, चेटी चांद की भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आप लोगों के बीच मुझे कई बार आने का अवसर मिला है। आप सबका मुझ पर अपार स्‍नेह रहा है। एक उच्‍च विचार के साथ संस्‍था के जीवन में 80 साल कम समय नहीं होता। आज विश्‍व की जो स्थिति है, मानव का जो स्‍वभाव बनता जा रहा है, उसमें कोई भी संगठन या व्‍यवस्‍था; 10 साल, 15 साल, 20 साल के बाद बिखराव शुरू हो जाता है। गुट बन जाते हैं, ग्रुप बन जाते हैं, एक में से दस संस्‍थाएं पैदा हो जाती हैं।

            दादा लेखराज जी की कमाल रही कि 80 साल के बाद भी, जिन आदर्शों, मूल्‍यों को ले करके ब्रह्माकुमारी विश्‍वविद्यालय, ब्रह्मा कुमारी आंदोलन को चलाया, नारी शक्त्ति को प्राधान्‍य देते हुए चलाया; और वो और वो आज भी उतने ही मनोयोग से, उतनी ही कर्मठता से, उतनी ही एकजुटता के साथ विश्‍व भर में अपना संदेश दे रहे हैं; लाखों कार्यकर्ताओं की श्रृंखला तैयार की है। ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारी, भारत के आध्‍यात्‍म के संदेश को विश्‍व में पहुंचा रहे हैं। आप सब बधाई के पात्र हैं, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं।

                 उन्‍होंने कहा कि हम एक ऐसे देश के प्रतिनिधि हैं, एक ऐसे देश की संतान हैं, जो कभी भी अपने विचारों को थोपने में विश्‍वास नहीं करता है। हम वो लोग हैं, जिस बात को मानते हैं कि ज्ञान को न कोई सीमाएं होती हैं, ज्ञान को न कोई समय के बंधन होते हैं, ज्ञान को न पासपोर्ट की जरूरत होती है, ज्ञान ये युगों-युगों तक मानव-संपदा होती है; वो कालातीत होती है; वो कालबाह्य होती है; वो नित्‍य नूतन होती है, और उस ज्ञान के मार्ग पर ही हम जीवन के सत्‍य को जान पाते हैं। ‍ब्रह्माकुमारी के माध्‍यम से ये जो निरंतर प्रयास चला है और भारत की विशेषता रही है। 

            यही देश हैं जिसने विश्‍व को डंके की चोट पर कहा है ईश्‍वर एक है। विविध रूप से लोग उसको जानते हैं, हिन्‍दू का भगवान अलग; मुसलमान का भगवान अलग; ईसाई का भगवान अलग; पारसी का भगवान अलग; ये हमारा चिंतन नहीं है। और इसलिए ज्ञान के समय में भी हमारे महापुरुषों ने हमें, हमारे शास्‍त्रों ने वेदकाल से हमें यही सिखाया- एकमसत, विप्रा: बहुधा वदन्ति, उन्‍होंने कहा कि अलग-अलग लोग उसको अलग-अलग रूप से व्याख्‍या करते हैं। लेकिन हमारा जो सत्‍य के संबंध में दृष्टिकोण है वो दृष्टिकोण उसी भावनाओं से भरा हुआ है। उन्‍होंने कहा कि मुझे विश्‍वास है कि आपके मार्गदर्शन में देश में एक ऐसी ऊर्जा क्रांति आ रही है, मानव जीवन में एक ऐसी ऊर्जा क्रांति आ रही है; हम साफ देख रहे हैं कि प्रकृति में सौर-ऊर्जा का जितना महत्‍व है, उतना ही व्‍यक्त्वि में शौर्य ऊर्जा का महत्‍व है। और जब औज़ हो, तेज़ हो, सामर्थ्‍य हो, संकल्‍प हो, तो व्‍यक्तित्‍व नई ऊंचाइयों को पार करता है। 

           एक बहुत बड़ा बदलाव समाज में लाने का प्रयास आपके द्वारा हो रहा है। सिर्फ अध्‍यात्मिक बातें नहीं, लेकिन प्रकृति के साथ जी करके गरीब से गरीब व्‍यक्ति के जीवन में कैसे बदलाव लाया जा सकता है, उसकी दिशा में प्रयास किया है। भारत भी दुनिया जिस संकट से जुझ रही है, उसमें दुनिया के लिए भारत किस प्रकार से काम आ सकता है; भारत से संकल्‍प किया है- 2030 तक यानी आज से 13 साल के भीतर-भीतर भारत की जो ऊर्जा है, हमारा लक्ष्‍य है।
 

            वृक्षों की दिशा में आपका काम, हमारे यहां तो पौधे को ही परमात्‍मा माना गया है। हरित क्रांति, दुग्ध क्रांति, ऊर्जा क्रांति; कई ऐसे काम हैं जो प्रकृति की रक्षा करेंगे, मानव को भी एक नई दिशा देंगे, उस पर आप काम कर रहे हैं। मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। नगर पालिकाओं ने, महानगर पालिकाओं ने, लोगों ने अपने घरों में लगाए हैं और इससे करीब-करीब 11 हजार करोड़ रुपये की बचत सामान्‍य मानवी को होती है। आपका ब्रह्माकुमारी का 8500 केंद्र हैं, लाखों कार्यकर्ता हैं। 
 

             उन्‍होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्‍था का मंत्र -'एक ईश्‍वर, एक विश्‍व परिवार' ये मूलत: हमारे देश का चिंतन है। 'वसुधैव कुटुम्‍बकम' शायद दुनिया में इतना विशाल, व्‍यापक और चिरंतन विचार इसी धरती से पैदा हुआ है। समय-समय पर उसकी वाक्‍य रचना अलग होगी, अभिव्‍यक्ति अलग रही होगी, और इसलिए भारत विश्‍व में न्‍याय, गरिमा, अवसर और समृद्धि के लिए प्रयत्‍नशील रहता है। भारत के ही प्रयास से आज विश्‍व में प्रकृति की रक्षा के लिए एक आंदोलन चल रहा है और दुनिया के देश हमसे जुड़ रहे हैं। आज जब सभी लोग वहां मिले हैं तब, आप 80 साल मना रहे हैं तब, मैं आपसे एक आग्रह करूंगा, और आज यहां से जाने से पहले, इतना बड़ा समारोह हो रहा है, देश भर के लोग वहां आए हैं, तब आप भी कुछ सोचिए कि 2022, भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं।

               देश की आजादी के लिए मरने-मिटने वालों ने जो सपने देखे थे, क्‍या हम सबका जिम्‍मा नहीं है उन सपनों को पूरा करने के लिए कुछ करें? सामूहिक रूप से करें? संकल्‍प ले करके करें? सही दिशा में प्रयास करें? और दुनिया की इतनी बड़ी आबादी में अगर उसके जीवन में बदलाव लाते हैं तो विश्‍व का कल्‍याण करने का भी एक बहुत बड़ा आधार बन सकता है। आज जब आप इतनी बड़ी तादाद में वहां इकट्ठे हुए हैं, 2022 तक ब्रह्माकुमारी विश्‍वविद्यालय के माध्‍यम से, ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियों के माध्‍यम से, विश्‍व में फैले हुए ब्रह्माकुमारी संगठन के माध्‍यम से, भारत में आठ हजार से ज्‍यादा आपकी इकाइयों के माध्‍यम से; दो, तीन, पांच, सात; जो भी आपको ठीक लगे, आप संकल्‍प लीजिए। 2022 तक इसको पूरा करके रहेंगे, इसका आप निर्णय कीजिए। देखिए आपका कितना बड़ा योगदान होगा। जो भारत इस प्रकार से ....... हो रहा है उसमें आप भी ऊर्जा भर देंगे, ऐसा मुझे विश्‍वास है।
 

             उन्‍होंने कहा कि अब पिछले दिनों आप लोगों ने देखा है नोटबंदी के बाद भ्रष्‍टाचार और कालेधन के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई की ओर हम आगे बढ़े हैं। नकद से मुक्ति की दिशा में जाने के लिए प्रयास कर सकते हैं क्‍या? मैं आज जब आपके बीच आया हूं, मेरा आपके साथ इतना नाता रहा है कि मैं आपसे हक से भी कह सकता हूं कि ब्रह्माकुमारी के द्वारा इस काम को बल दिया जाये और देश में परिवर्तन के सूत्रधार के रूप में आपकी इतनी बड़ी संस्‍कारित जो मानव शक्ति है वो काम आए। ब्रह्माकुमारी आंदोलन में ब्रह्माकुमार तो हैं ही हैं, लेकिन ब्रह्माकुमारी बहुत सक्रिय हैं।

                हमारे देश में आज भी लाखों की तादाद में ऐसे बच्‍चे हैं जो टीकाकरण से वंचित हैं। और टीकाकरण से वंचित होने के कारण वो किसी न किसी गंभीर बीमारी के शिकार हो जाते हैं। माता मृत्‍युदर, शिशु मृत्‍युदर, ये चिंता का विषय होता है। कुपोषण चिंता का विषय होता है। उन्‍होंने कहा कि हमारे बालकों को कुपोषण से बाहर निकालना है, तो आप बहुत बड़़ा योगदान दे सकते हैं। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप इसमें सोचिए। मैं भारत सरकार से भी कहूंगा, राज्‍य सरकार से भी आग्रह करूंगा कि अगर आप इस काम को लेकर आगे आते हैं तो जरूर वे भी आपको उचित मार्गदर्शन करेंगे; जो भी मदद करनी चाहिए, वो करेंगे। लेकिन एक आंदोलन हम खड़ा कर सकते हैं।

           भारत सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए हैं। अभी आपने देखा होगा कुछ दिन पहले डिलीवरी के बाद, प्रसूति के बाद पहले उनको सिर्फ 12 सप्‍ताह की छुट्टी मिलती थी, हमने उसको 12 सप्‍ताह से 26 सप्‍ताह कर दिया है ताकि वो अपने बालक की देखभाल करने की जब सबसे ज्‍यादा आवश्‍यकता होती है, तो मां अपने बच्‍चे के साथ रह सके, पूरा समय दे सके, और वो समय प्रारंभ के जो कुछ महीने होते हैं; जो बालक की जिंदगी में बड़े महत्‍व होते हैं, संतान की जिंदगी में बड़े महत्‍व होते हैं। मां की मौजूदगी बहुत बड़ा है। और दुनिया में शायद दो या तीन ही देश हैं जो 26 हफ्ते से ज्‍यादा छुट्टी देते होंगे। दुनिया के समृद्ध और प्रगतिशील देश भी 26 हफ्ते की छुट्टी नहीं दे रहे, भारत ने इतना बड़ा फैसला कर लिया है! क्‍योंकि हमारी माताओं-बहनों का सशक्तिकरण देश के सशक्तिकरण में एक नई ऊर्जा भर सकता है, नई गति भर सकता है और परिणाम की दृष्टि से काफी सफल यात्रा की ओर हमें ले जा सकता है।
 

                 सुकन्‍या समृद्धि योजना हो, गर्भवती महिलाओं के लिए बैंक खाते से तीन किश्‍तों में 6000 रुपये देने की योजना हो, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान हो। अभी उज्‍ज्‍वला योजना के तहत एक बड़ा अभियान चलाया है। हमारी गरीब मां-बहनें लकड़ी का चूल्‍हा जला करके खाना पकाती थीं, लोगों का कहना है कि जब एक मां, गरीब मां लकड़ी से चूल्‍हा जला करके खाना पकाती है तो एक दिन में उसके शरीर में 400 सिगरेट का धुंआ जाता है। बच्‍चे खेलते होते हैं उनके शरीर में भी वो धुंआ जाता है। हमारी मां-बहनो की तबियत का क्‍या हाल होगा? भारत सरकार ने इन गरीब माताओं को खाना पकाने के लिए लकड़ी के चूल्‍हे से मुक्ति दिलानी है। और लकड़ी के चूल्‍हे से मुक्ति दिलाने के लिए एक बहुत बड़ा आंदोलन चला। पिछले दस महीने से ये आंदोलन चलाया है, अब तक करीब-करीब दो करोड़ गरीब परिवारों में गैस पहुंच चुके हैं, गैस का चूल्‍हा जल रहा है; लकड़ी के चूल्‍हे से, धुंए से उनको मुक्ति मिल चुकी है। और ये तीन साल में 5 करोड़ परिवारों में पहुंचने का संकल्‍प है। उन्‍होंने कहा कि हमारी मातृ शक्ति, हमारी महिला शक्ति, उनको कैसे मदद मिले, उस पर हमारा बल चल रहा है।

                ब्रह्माकुमारी के द्वारा इसमें बहुत बड़ा योगदान हो सकता है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप भी सक्रियता से ऐसे काम; क्‍योंकि आप करते ही हैं, अनेक प्रकार के काम आप करते ही हैं। सक्रियता से इन कामों को अगर आप बल देंगे, एक बहुत बड़ा परिणाम लाने में आपका योगदान बनेगा। आज मुझे फिर से आपके बीच में आने का अवसर मिला है। प्रकृति की रक्षा, मातृ शक्ति की रक्षा, बालकों की जिंदगी में बदलाव लाने का प्रयास, ये सारी बातें अपने-आप में एक बहुत बड़ी अमानत के रूप में हैं। और मैं आपसे, आपके बीच आया, आपका ये समागम दुनिया के जब सभी देशों से जब लोग आए हैं तब, भारत के इस महान चिंतन का विचार ले करके जाएंगे, ज्ञान का प्रकाश सब दूर पहुंचेगा, मानव कल्‍याण के लिए काम आएगा; और दादा लेखराज जी ने जो काम को आरंभ किया था, आपके प्रयत्‍नों से उसको एक नई ऊर्जा मिलेगी। 100 वर्ष के बावजूद भी इतना कठोर परिश्रम, दादी का जीवन नई पीढ़ी को प्ररेणा देता रहेगा, एक नई ऊर्जा के साथ लोगों को काम करने की ताकत मिलती रहेगी। जब स्‍वच्‍छ भारत अभियान मैं चला रहा था तो दादीजी हमारी रहीं हैं। दादीजी ने ब्रह्माकुमारियों के द्वारा स्‍वच्‍छता अभियान को बल दिया है। और मुझे विश्‍वास है कि सफेद वस्‍त्रों में हमारे जो ब्रह्माकुमार, ब्रह्माकुमारी हैं, वे स्‍वच्‍छता के आंदोलन को बहुत ताकत दे सकते हैं।
 

             उन्‍होंने कहा कि 2022 तक ऐसे कुछ संकल्‍प ले करके चलें। 2019, महात्‍मा गांधी को 150 वर्ष हो रहे हैं। जब गांधी को 150 वर्ष हो रहे हैं तो भारत में स्‍वच्‍छता के विषय में जन-जन की आदत कैसे उसको बने, ये आंदोलन आदत में कैसे परिवर्तित हो, उसको हमें परिणाम पर ले जाना है। मैं आज आप सबके बीच आया हूं तो मैं आपसे कुछ बातों के लिए आग्रह कर रहा हूं। और मुझे विश्‍वास है कि आप इसको करके दिखाएंगे। आप के पास सामर्थ्‍य है, संगठन है, संकल्‍प है। पवित्र कार्य से प्रेरित आप लोग हैं। आपसे परिणाम मिलने की संभावना है। मैं फिर एक बार विश्‍वभर से आए हुए सभी महानुभावों का हृदय से स्‍वागत करता हूं और ये ज्ञान का प्रकाश सब दूर फैलाने में आपका भी योगदान मिलता रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ईश्वरीय विश्वविद्यालय के भारत और विदेश के प्रतिनिधियों का अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन एवं सांस्‍कृति उत्‍सव में स्‍वागत करते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्‍थापक दादा लेखराज का अभिवंदन किया। 

            उन्‍होंने दादी जनक जी, कोसच्‍ची कर्म योगी की संज्ञा देते हुए उनकी प्रशंसा की, जो 100 वर्ष  की आयु में भी समाज की सेवा में अनवरत रूप से कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा सहित अनेक क्षेत्रों में ब्रह्माकुमारीज़ संस्‍था द्वारा किये गये कार्यों को सराहा। उन्‍होंने भ्रष्‍टाचार समाप्‍त करने के लिए डिजिटल लेन-देन के विस्‍तार का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने स्‍वच्‍छ भारत और एलईडीप्रकाश व्‍यवस्‍था जैसे उद्देश्‍यों पर भी अपने विचार रखें।

विविधता ही भारत की पहचान व ताकत

              प्रधानमंत्री ने राजधानी में उगादि समारोह में कहा, भारत की विविधता इसकी पहचान के साथ ही ताकत भी है। वेंकैया नायडू ने उगादि मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया। 

             प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी राजधानी में उगादि समारोह में शामिल हुए।  उन्‍होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी पहचान होने के साथ ही उसकी ताकत भी है। इस कार्यक्रम का आयोजन सूचना और प्रसारण, शहरी विकास तथा आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्री एम वेंकैया नायडू ने अपने आवास पर किया था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्र को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुये कहा कि त्‍यौहार प्रकृति में परिवर्तन को दर्शाते हैं। यह हमारी संस्‍कृति तथा परपंरा से जुड़े होते है। 

                    सरकार की एक भारत श्रेष्‍ठ भारत पहल का उदाहरण देते हुए नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि इससे आगामी पीढ़ी को विभिन्‍न राज्‍यों और उनकी संस्‍कृतियों की विविधता को समझने में मदद मिलेगी। इससे सभी भारतीयों के मन में एकजुटता और एकता की भावना सुदृढ़ होगी। उन्‍होंने राज्‍य सरकारों से अपने राज्‍य के विभिन्‍न क्षेत्रों की संस्‍कृति और परंपराओं की विशिष्‍टताओं को बढ़ावा देने में एक दूसरे के साथ सहयोग करने का आग्रह भी किया। एक भारत श्रेष्‍ठ भारत पहल के बारे में प्रधानमंत्री ने हरियाणा और तेलंगाना के बीच हुए समझौता ज्ञापन का उदाहरण दिया, जिसके त‍हत फिल्‍मोत्‍सव, भाषा, व्‍यंजन के क्षेत्र में दोनों राज्‍यों के बीच सहयोग और खिलाडि़यों, नीति निर्माताओं तथा विधायकों को एक दूसरे के राज्‍यों में आने जाने का अवसर प्रदान किया जाता है।

               सांस्‍कृतिक कार्यक्रम जटायु मोक्षम की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जटायु का संघर्ष हम सभी को आतंकवाद का साहस का मुकाबला करने की प्रेरणा देता है जो आज  संपूर्ण मानवता के सक्षम सबसे बड़ी चुनौती है। नायडू ने कहा कि भारतीय कैलेंडर के अनुसार उगादि से नव वर्ष की शुरूआत होती है। यह पूरे देश में इस महीने में मनाया जाता है। उन्‍होंने कहा कि उगादि पछाड़ी छह विभिन्‍न स्‍वादों (शट रूचि)का सम्मिश्रण होता है, जिसमें मीठा, खट्टा, मसालेदार या तीखा, नमकीन, कसैला और कड़वा स्‍वाद खुशी, घृणा, कोध्र, भय, आश्‍चर्य और उदासी की विभिन्‍न भावनाओं का प्रतीक है। 

             उन्‍होंने कहा कि भारतीय संस्‍कृति विशिष्‍ट और सबसे सभ्‍य है क्‍योंकि यहां का प्रत्‍येक त्‍यौहार और परंपरा विज्ञान पर आधारित है। नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में नए साल में देश में और समृद्धि और विकास होगा। दक्षिण भारत के कई हिस्‍सों में उगादि बंसत और ग्रीष्‍म ऋतु के आगमन तथा नव वर्ष की शुरूआत माना जाता है। खुशी का यह त्‍यौहार विकास और समृद्धि का प्रतीक है क्‍योंकि यह नव वर्ष के त्‍यौहारों के साथ ही नए उद्यम शुरू करने का अवसर भी होता है।

                    इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्‍यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल अनिल बैजल, विधि और न्‍याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद, पर्यटन और संस्‍कृति मंत्री महेश शर्मा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन, खेल और युवा मामले मंत्री विजय गोयल, सूचना और प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौर, सांसद, उच्‍चतम न्‍यायालय और उच्‍च न्‍यायालय के वरिष्‍ठ न्‍यायाधीश, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा शहरी विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर तमिलनाड़, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कलाकारों ने सांस्‍कृतिक कार्यक्रम प्रस्‍तुत किए।