Sunday, 30 September 2018

खुद तय करें अपनी लम्बी उम्र !

   अगर आप लंबी उम्र की कामना करते हैं, तो जानिए कि वे कौन से कारण हैं, जो तय करते हैं कि आप का जीवन काल क्या होगा। रिसर्च इन पांच कारणों के बारे में बताती है। अध्ययन एवं शोध है कि... 

   डीएनए : डीएनए लंबी उम्र के लिए अच्छे जीन्स का होना जरूरी है। जीन्स हमें अपने माता पिता से मिलते हैं। अकसर देखा गया है कि जो मां बाप लंबा जीते हैं। उनके बच्चों की उम्र भी लंबी होती है। इसकी वजह हमारे डीएनए में छिपी है। सही जीन के होने से हमारी जीवन प्रत्याशा बढ़ सकती है। हमारी उम्र पर इनका 25 से 30 फीसदी तक असर होता है।
   लिंग: महिलाएं आम तौर पर पुरुषों से लंबा जीती हैं। ऐसा क्यों है, इसका जवाब शायद हमारे क्रोमोजोम में छिपा है। महिलाओं में दो एक्स क्रोमोजोम होते हैं। जबकि पुरुषों में एक एक्स और एक वाय। अगर वाय में कुछ गड़बड़ी हो जाए, तो एक्स कोई मदद नहीं कर सकता। इसलिए पुरुषों में जीन डिफेक्ट अधिक देखे जाते हैं।
   खान पान: अच्छी सेहत के लिए सही तरह का खाना बेहद जरूरी है। जैसे कि मेडिटरेनियन डाइट यानी भूमध्यसागर के इलाकों में रहने वाले लोगों का खान पान. ऑलिव ऑयल, सब्जियां और सलाद खाने वालों की उम्र लंबी होती है। साथ ही, दिन भर में कितनी कैलोरी लेते हैं, ये भी उम्र को निर्धारित करता है। सही आहार के जरिए अपने वजन पर काबू करने वाला लंबा जीता है।
   रवैया: अमेरिका में हुए एक शोध में देखा गया कि जो लोग अपनी बढ़ती उम्र को ले कर सकारात्मक रवैया रखते हैं, वे लंबा जी पाते हैं। रिसर्च के अनुसार रिटायर होने के बाद आराम करने वालों की तुलना में वो लोग जो साठ-पैंसठ की उम्र के बाद भी खुद को व्यस्त रखते हैं, वे चार साल लंबा जीते हैं। यानी बुढ़ापे में व्यस्त रहने से उम्र लंबी होती है।
   कसरत: नियमित रूप से कसरत करना और चलते फिरते रहना सेहत और उम्र दोनों के लिए अच्छा है, जो लोग जॉगिंग करते रहे हैं। उसका फायदा उन्हें तब भी मिलता है, जब वे बुढ़ापे में दौड़ना भागना बंद कर देते हैं। कसरत करने से शरीर की कोशिकाओं में ऐसे बदलाव होते हैं, जो कसरत करना छोड़ने पर भी बने रहते हैं। कसरत करने से शरीर लंबी उम्र के लिए तैयार होता है।

Friday, 28 September 2018

नीदरलैण्ड में इंसान से कहीं अधिक साइकिल !

   नीदरलैण्ड में इंसानों से कहीं अधिक साइकलें हैं। जिससे कई बार कानून व्यवस्था का संकट खड़ा हो जाता है। खास यह कि अमीर व्यक्ति भी शानदार कारों की श्रंखला रखने के बजाय बेहतरीन साइकिल रखने की लालसा रखता है। खास तौर से नीदरलैण्ड साइकिल की अधिकता से होने वाली दिक्कतों से जूझ रहा है। 

   नीदरलैण्ड का एम्सटर्डम एक ऐसा शहर है जहां इंसान से ज्यादा साइकिलें हैं। नीदरलैंड्स की राजधानी में सात लाख की आबादी है लेकिन साइकिलों की संख्या दस लाख है। साइकिल खड़ी करने की जगहें भरी हुईं हैं। सड़कें गैरकानूनी ढंग से खड़ी साइकिलों से पटी पड़ी हैं। साइकिल चोरी आम बात है।
   खबर है कि एम्सटर्डम में साइकिल खड़ी करना सिरदर्द साबित हो सकता है। रास्ते संकरे हैं साथ ही साथ साइकिल पार्किंग की जगह भी सीमित है। एम्स्टर्डम सेंट्रल स्टेशन के बाहर साइकिल पड़ाव में 2500 साइकिलें निशुल्क खड़ी की जा सकती हैं, लेकिन दफ्तर और कॉलेज जाने के समय ये पड़ाव कुछ मिनटों में ही भर जाता है। तीन मंजिल वाली इस पार्किंग में साइकिल सवार को पार्किंग के लिए कभी ऊपर तो कभी नीचे भागना पड़ता है।
   खबर है कि आधिकारिक पड़ाव में नहीं खड़ी की गईं साइकिलें हटाई जा सकती हैं. साइकिल डिपो के मैनेजर पीटर बरखोउट कहते हैं, अगर आप साइकिल नहीं हटाते हैं तो शहर में जाम लग सकता है। शहर आने-जाने लायक नहीं रहेगा. साल 2012 में साइकिल डिपो में 65 हजार से ज्यादा साइकिलें खड़ी की गई थी।
   खबर है कि साइकिल डिपो के कर्मचारी गैरकानूनी तरीके से खड़ी की गईं साइकिलों को मुख्य स्टेशन वाले इलाके से हटाते हैं। गैरकानूनी तरीके से खड़ी की गईं साइकिलों के ताले तोड़े जाते हैं और फिर उन्हें डिपो में लाया जाता है। इस डिपो में एक समय में 12 हजार से लेकर 17 हजार तक साइकिलें होती हैं।
   खबर है कि इन साइकिलों को छांटने के बाद कंप्यूटर में इनकी जानकारी दर्ज की जाएगी। साइकिलों के रंग, साइकिल की कंपनी का नाम, सीरियल नंबर और साइकिल कहां से हटाई गई जैसी अहम जानकारियां होती है। साइकिल को हटाए जाने वाले दिन के हिसाब से उन पर एक स्टीकर लगाया जाता है जिसमें एक खास नंबर होता है।
    खबर है कि लिग्हार्ट कहती हैं, "साइकिल की चोरी बहुत परेशान करने वाली थी। साइकिल खड़ी करने की जगह नहीं थी। लिग्हार्ट ने डिपो की हॉटलाइन सेवा को फोन किया और अपनी साइकिल खोजने में कामयाब हुई। डिपो साइकिल मालिकों से मामूली फीस वसूल करता है। फिलीप बोंके कहते हैं उनकी साइकिल जब हटाई गई थी तो उनका दिन खराब हो गया था। बोंके के मुताबिक गैरकानूनी तरीके से लगी साइकिलों को हटाना एक अच्छा काम है। इससे कुछ और लोगों के लिए पार्किंग की जगह बन जाती है।
    खबर है कि साइकिल डिपो के मैनेजर बरखोउत कहते हैं, "हम साइकिल को उसके मालिक को वापस करना चाहते हैं। ये हमारा मुख्य व्यापार है. यहां तीन महीने तक साइकिलें रखी जाती हैं। जिन साइकिलों पर दावा नहीं होता, उन्हें नीलाम कर दिया जाता है। एम्स्टर्डम साइकिल चोरी के लिए कुख्यात है।

Thursday, 27 September 2018

अब विदेशियों के लिए जर्मनी में नौकरी पाना आसान

   खबर है कि जर्मन सरकार एक नए इमिग्रेशन कानून पर काम कर रही है ताकि देश में काम करने वाले लोगों की किल्लत से निपटा जा सके।

  खबर है कि नए कानून का मकसद यूरोपीय संघ के बाहर के देशों से दक्ष कामगारों को आकर्षित करना है। खबर है कि जर्मनी की अर्थव्यवस्था मजबूत है। बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत से भी कम है लेकिन देश में कई उद्योग कामगारों की कमी से जूझ रहे हैं। कारखानों में काम करने के लिए लोग नहीं है। ऐसे में विदेशों से कामगार बुलाने की मांग उठ रही है।
   खबर है कि कामगारों की किल्लत को देखते हुए सरकार ऐसा कानून बनाना चाहती है जिसमें कंपनियों से यह नहीं कहा जाएगा कि वे नियुक्तियां करते वक्त जर्मन नागरिकों को प्राथमिकता दें। यानी जर्मन कंपनी यूरोप के बाहर के देशों के लोगों को आराम से नौकरी पर रख पाएंगी।
  खबर है कि जर्मनी के सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टियों सीडीयू, सीएसयू और एसपीडी के बीच नए कानून को लेकर एक दस्तावेज पर सहमति हुई है। इसके लिए जर्मनी के श्रम, अर्थव्यवस्था और गृह मंत्रालयों से भी हरी झंडी ले ली गई है।
   खबर है कि जिन विदेशी स्नातकों और कामगारों के पास पेशेवर ट्रेनिंग होगी, उन्हें कुछ समय के लिए जर्मनी आने की अनुमति दी जाएगी ताकि वे अपने लिए काम तलाश सकें. लेकिन इसके लिए कुछ योग्यताओं और भाषा संबंधी जरूरतों को पूरा करना होगा।
   खबर है कि दस्तावेज के अनुसार इन लोगों को इस अवधि के दौरान सामाजिक कल्याण भत्ता नहीं मिलेगा, लेकिन उन्हें ऐसी नौकरियां करने की भी इजाजत दी जाएगी, जिनके लिए वे ओवर क्लालिफाइड हैं। ताकि वे कुछ पैसे कमा सकें।
   खबर है कि जर्मनी में क्वालिफिकेशन के मूल्यांकन की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया जाएगा। सहमति पत्र कहता है कि कुछ चुनिंदा देशों में खास तौर से मुहिम चलाए जाने की योजना है। ताकि वहां से युवा और दक्ष कामगारों को जर्मनी की तरफ आकर्षित किया जा सके।
   खबर है कि वैसे जर्मनी में मौजूदा इमिग्रेशन सिस्टम भी सबसे उदार सिस्टमों में से एक माना जाता है। खबर है कि ओईसीडी संगठन के मुताबिक, अमेरिका के बाद जर्मनी विदेशियों के लिए सबसे लोकप्रिय देश है। यूरोपीय संघ के कामगार तो यहां आसानी से रह और काम कर सकते हैं।
   खबर है कि जर्मनी में ब्लू कार्ड सिस्टम है जो कम से कम 50,800 यूरो के सालाना वेतन पर विदेशों से अकादमिक और पेशेवर क्षेत्र से जुड़े लोगों को भर्ती की प्रक्रिया को आसान बनाता है। अब वेतन की इस सीमा को और नीचे लाने की कोशिश हो रही है।

Tuesday, 18 September 2018

गायों की सौंदर्य प्रतियोगिता

   खूबसूरत दिखने के लिए मेकअप सिर्फ इंसानों के लिए रिजर्व नहीं है। जर्मनी में गायों की भी सौंदर्य प्रतियोगिता होती है। 

   खबर है कि जर्मनी में 'मिस काउ' चुनी जाती है। जर्मनी में 42 लाख दुधारू गायें हैं। इनमें से 60 फीसदी होल्स्टाइन प्रजाति की है। जर्मनी में गायों की भी 'मिस काउ' प्रतियोगिता होती है। इस गौ सुंदरी को शूटिंग से पहले आइना दिखाया जाता है। 
   प्रतियोगिता के लिये गायों को साफ सुथरा रखना पड़ता है। एटेंडेंट गायों को प्रतियोगिता में भेजने से पहले उनकी साफ सफाई करती हैं।
   बारीकी से सफाई के अलावा उनके लिये हेयर ड्रेसर भी होते हैं। कंटेस्टेंट गायें अपने अपने केयरटेकरों के साथ खड़ी होती है। जज बहुत ही बारीकी से हर पहलू की जांच करते हैं। मिस प्रतियोगिता में जीत की खुशी होती है।

महिला कर्मचारियों को सैनिटरी पैड

   महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए अपनी पहल के माध्यम से ‘स्त्री स्वाभिमान’ नामक सामान्य सेवा केंद्र ग्रामीण इलाकों में किशोर महिलाओं और लड़कियों के घरों के पास सस्ती और सुलभ सैनिटरी उत्पादों को उपलब्ध कराने के लिए एक टिकाऊ मॉडल बनाने का प्रयास कर रहा है।

   यह पहल जागरूकता और उन महिला उद्यमियों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर चलाया जा रहा है जो स्वयं सैनिटरी नैपकिन का उत्पादन और विपणन करती हैं। यह पहल महिलाओं और लड़कियों को विकास के अवसरों तक पहुंचने में लिंग-भेद को कम करने में अपनी भूमिका निभाना चाहता है जो अफसोसजनक तरीके से शिक्षा, स्वास्थ्य और कार्यबल में भागीदारी को हासिल करने में बाधक है।
   महिलाओं के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए ‘स्त्री स्वाभिमान’ पहल के तहत महिला उद्यमी अपने समुदायों में महिलाओं एवं लड़कियों के सशक्तिकरण के प्रतीक बन चुकी हैं। अब तक इन महिला उद्यमियों द्वारा 278 सैनिटरी नैपकिन लघु विनिर्माण इकाइयों को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। 
  इन इकाइयों द्वारा उत्पादित सैनिटरी नैपकिन न केवल कम आय वाले समुदायों की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं बल्कि स्वाभाविक तरीके से नष्ट होने वाले और पर्यावरण के अनुकूल हैं। इसके अलावा ये ग्रामीण समुदायों के लिए आसानी से उपलब्ध हैं।
    महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के अलावा यह पहल ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान करती है क्योंकि प्रत्येक इकाई में 5 से 7 महिलाओं को रोजगार मिलता है। महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के उद्देश्य सीएससी एसपीवी ने इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के महिला विश्रामशाला में सैनिटरी नैपकिन बिक्री मशीनें लगाई हैं।
   इससे मंत्रालय की महिला कर्मचारियों को सैनिटरी पैड उपलब्ध हो सकेगा। इस पहल की सफलता और सबक के आधार पर अन्य सार्वजनिक और निजी संस्थानों में भी इसी तरह की सैनिटरी नैपकिन मशीनें लगाई जाएंगी।

Monday, 17 September 2018

खटमलों को खोज रहे कुत्ते

   खबर है कि खटमल की समस्या जर्मनी में भी है, पर इसे लाते हैं छुट्टी बिताकर यात्रा से लौटने वाले लोग. इसलिए 2018 से फ्रैंकफर्ट के हवाई अड्डे पर अब कुत्ते लोगों के सामान जांच रहे हैं ताकि पता चले कि कहीं उसमें खटमल तो नहीं.

   खबर है कि फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी फ्रापोर्ट की इस टीम में चार पुरुष, एक महिला और कई कुत्ते हैं. वे सुबह साढ़े छह बजे से रात दस बजे तक काम करते हैं. इसी समय में फ्रैंकफर्ट हवाईअड्डे पर विमान उतरते हैं. 
   खबर है कि हानसेन कहते हैं कि हर तीसरी या चौथी ड्यूटी में सामान में खटमल मिल जाता है. ऐसा नहीं है कि लोगों पर सामान चेक करवाने के लिए दबाव डाला जाता हो. मन हो तो जांच करवाइए, नहीं है तो कोई बात नहीं. इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करानी होती है. पहले तीन बैग के लिए 105 यूरो की फीस लगती है और हर अगले नग के लिए 30 यूरो.

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्मार्ट बाड़

   केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू में भारत-पाक अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्मार्ट बाड़ के लिए दो प्रायोगिक परियोजनाओं का उद्घाटन किया।

   इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने देश की सीमाओं की और अधिक सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीमा की सुरक्षा-व्यवस्था को और मजबूत एवं प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी का अधिकतम इस्तेमाल करती रही है।
  उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए सीमा पर स्मार्ट बाड़ एक तकनीकी समाधान है। जम्मू में भारत-पाक अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर प्रायोगिक आधार पर दो परियोजनाएं स्थापित की गई है।
   उन्होंने कहा कि इस स्मार्ट बाड़ से सीमा पर शहीद हो रहे हमारे जवानों की संख्या में कमी आएगी और जवानों में तनाव का स्तर भी बहुत हद तक कम होगा। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि डिजिटल स्मार्ट बाड़ से हमारी सीमाएं बिल्कुल सुरक्षित होंगी क्योंकि आतंकवादियों के लिए इसका अतिक्रमण करना और सीमा पार से घुसपैठ करना असंभव होगा।
     इस अवसर पर पूर्वोत्तर राज्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक के. के. शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा की सुरक्षा को पुख्ता करना सरकार की प्राथमिकता है।
    उन्होंने कहा कि 2026 किलोमीटर लंबी सीमा अतिसंवेदनशील है और सीमा पर ऐसे क्षेत्रों की रक्षा के लिए डिजिटल बाड़ प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सीमा बाड़ की मदद से हमारी सीमाएं सुरक्षित होंगी और जवानों द्वारा पैट्रोलिंग पर निर्भरता कम होगी। समग्र एकीकृत सीमा प्रबंधन व्यवस्था (सीआईबीएमएस) कार्यक्रम के तहत स्मार्ट सीमा बाड़ परियोजना देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है।
    सीमा पर 5.5 किलोमीटर लंबी दूरी की दो सीमा बाड़ परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था तकनीक तौर पर काफी उन्नत है जिससे भूमि, जल और यहां तक की हवा में भी अदृश्य इलेक्ट्रॉनिक बाधाएं लगी हैं। इससे काफी कठिन क्षेत्रों में भी बीएसएफ को खतरे की पहचान करने और घुसपैठ की कोशिशों को रोकने में मदद मिलेगी।
   सीआईबीएमएस निगरानी, संचार और डाटा संग्रहण में बड़ी संख्या में अलग-अलग यंत्रों का इस्तेमाल करता है। बीएसएफ इससे सीमा पर 24 घंटे निगरानी करने में सक्षम होगा चाहे मौसम आंधी-तूफान, कोहरा या बारिश का ही क्यों न हो। जम्मू यात्रा के दौरान गृहमंत्री स्वच्छ भारत अभियान में भी शामिल हुए और बीएसएफ अधिकारियों और जवानों को स्वच्छता की शपथ दिलाई।

मातृभूमि को कभी नहीं भूलें: उपराष्ट्रपति

   उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग देश का गौरव बढ़ा रहे हैं और प्रवासी देश तथा अपनी मातृभूमि दोनों के प्रति अपार योगदान कर रहे हैं।

   उपराष्ट्रपति कल रात भारत के उच्चायुक्त द्वारा माल्टा की राजधानी वैलेटा में आयोजित भारतीय समुदाय के स्वागत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल और माल्टा में भारतीय उच्चायुक्त राजेश वैष्णव तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि उभरता भारत हमेशा भारतीय मूल के लोगों के साथ रहेगा। उन्होंने भारतीय मूल के लोगों से आग्रह किया कि वे पालन-पोषण करने वाली मातृभूमि को कभी न भूलें। उन्होंने कहा कि भारत की कला, संस्कृति, मूल्यों और परम्पराओं का संदेश विश्व में पहुंचाने में भारतीय समुदाय के लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत-माल्टा संबंधों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि माल्टा ने छोटा देश होने के बावजूद काफी प्रगति की है और भारत और माल्टा के संबंध दीर्घकालिक होंगे। 
    उन्होंने कहा कि देश का आकार महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि विकास महत्वपूर्ण है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय आबादी सभी क्षेत्रों में अच्छा कार्य कर सकती है और विश्व के समाजों के साथ एकीकृत हो सकती है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक सीमाएं भारत और माल्टा को अलग नहीं करती हैं। भारत की विकास गाथा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश में स्थायी रूप से विकास हो रहा है और देश आगे बढ़ रहा है। प्रणालीगत सरकारी सुधारों से समाज समावेशी बन रहा है और भारत को औपचारिक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत परिवर्तन के शिखर पर है और यह परिवर्तन अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के डिजिटीकरण, वित्तीय समावेशन, जीएसटी तथा जन धन से भारतीय आर्थिक परिदृश्य में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। सड़क और दूरसंचार नेटवर्क ने भारत को बदल दिया है और भारत जैसे विशाल देश में संचार प्रणाली क्रांतिकारी हो गई है।
   उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किए गए कार्यों की याद दिलायी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय कला योग और आयुर्वेद पूरे विश्व में लोकप्रिय हो रहे है। उन्होंने कहा कि भारत स्वास्थ्य के मामले में गंतव्य देश हो गया है और शीघ्र लॉन्च किए जाने वाले आयुष्मान भारत कार्यक्रम से भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बदल जाएगी।

Sunday, 16 September 2018

भारत-सर्बिया के संबंधों की जड़ें इतिहास में काफी गहरी

   मार्शल टिटो-पंडित नेहरु के युग की गर्मजोशी एवं सहयोग की भावना को पुनर्जीवित करने को चिन्हित करते हुए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु को कल रात बेलग्रेड में एक दुर्लभ सम्मान के प्रतीक में सर्बिया गणराज्य के संसद के विशेष सत्र को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया।

   यह सर्बिया की नेशनल असेंबली का वही विशाल सभागार था जहां पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने युगोस्लाविया के विख्यात नेता मार्शल टिटो के साथ गुट निरपेक्ष आंदोलन आरंभ करते हुए विश्व के नेताओं को संबोधित किया था।
  मेजबान देश के विधि निर्माताओं को संबोधित अपने एक घंटे के भाषण के दौरान श्री नायडु ने उस घनिष्ठ संबंध और साझा विजन को याद किया जिसमें दोनों देशों के नेताओं ने निर्गुट आंदोलन (एनएएम) को आरंभ करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की जड़ें इतिहास में काफी गहरी हैं। 
   कल अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर को उद्धृत करते हुए श्री नायडु ने भारत में संसदीय लोकतंत्र के सतत विकास एवं संघटन की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। प्रतिभागी विकास के लिए लोकतंत्र के महत्व को रंखांकित करते हुए, उन्होंने 1961 में इसी स्थान पर पंडित नेहरु द्वारा दिए गए भाषण का समरण किया और कहा कि नेहरु ने हमारे देशों में ऐसे समाज का निर्माण करने की अपील की थी जहां स्वतंत्रता वास्तविक है। सर्बिया संसद के सभापति ने श्री नायडु का स्वागत किया एवं उन्हें पीठिका ले गए एवं सदन के सदस्यों से उनका परिचय कराया।
    उपराष्ट्रपति के लिए कई बार तालियां बजाई गई और विशेष रूप से जब उन्होंने कहा कि जब वह (उपराष्ट्रपति) स्कूल में पढ़ते थे, उस वक्त मार्शल टिटो का नाम भारत में काफी लोकप्रिय था। सर्बिया के कानून निर्माताओं ने उपराष्ट्रपति के संबोधन की समाप्ति पर उनका खड़े होकर सम्मान किया। श्री नायडु ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुकिक, प्रधानमंत्री सुश्री अना ब्रनाबिक एवं सर्बिया की नेशनल असेंबली की सभापति सुश्री माजा गोजकोविक के साथ कई द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय मुद्वों पर विस्तार से चर्चा की तथा एक बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया।
   श्री नायडु के साथ संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुकिक ने शानदार आर्थिक प्रगति के लिए भारत के राजनीतिक नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने सर्बिया की क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता देने के लिए भारत को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्बिया भारत के साथ कृषि, फार्मेसी, आईटी एवं जेनरिक दवाओं के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग का इच्छुक है। उन्होंने रक्षा सहयोग के प्रति भी दिलचस्पी प्रदर्शित की।
    उपराष्ट्रपति ने नोट किया कि हाल के इतिहास में दोनों देशों का समय काफी कठिन था लेकिन वे इन संकटों से और अधिक मजबूत बन कर उभरे हैं क्योंकि उनमें सुधार करने का साहस है। उन्होंने कहा कि, भारत और सर्बिया में 1990 के दशक के आर्थिक सुधारों ने प्रभावी रूप से कुछ बड़ी चुनौतियों को अवसरों के रूप में परिवर्तित कर दिया। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे हो जाने के अवसर पर सर्बिया पोस्ट एवं इंडिया पोस्ट ने सर्बिया के विख्यात भौतिक विज्ञानी एवं नवोन्मेषक निकोला टेस्ला तथा स्वामी विवेकानंद पर स्मारक टिकट जारी किया।
   सर्बिया के राष्ट्रपति एवं भारतीय उपराष्ट्रपति की उपस्थिति में दोनों देशों ने दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए। पादप सुरक्षा एवं क्वारान्टाइन पर समझौते में फलों, सब्जियों एवं प्रसंस्कृत, खाद्य वस्तुओं में व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया गया है जबकि वायु सेवा समझौते का उद्वेश्य दोनों देशों के बीच सीधा वायु संपर्क सहित व्यापार एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाना है।

कानून कोई कैरियर नहीं, राष्ट्र निर्माण का एक तंत्र

  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक के बेलागवी में कर्नाटक लॉ सोसाइटी एवं राजा लखमगौडा विधि महाविद्यालय के प्लैटिनम जुबली समारोहों में भाग लिया तथा उन्हें संबोधित किया।

  इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि कानून कोई कैरियर नहीं है, यह एक आह्वान (कॉलिंग) है। यह न्याय के प्रयोजन में सहायता करने का, समाज के गरीब से गरीब व्यक्ति की मदद करने का तथा नियमों, परंपराओं एवं निष्पक्षता के अनुपालन के जरिये परिभाषित समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करने का एक तंत्र है। आधारभूत विश्लेषण में अधिवक्ता और न्यायाधीश सच्चाई के ही अन्वेषक हैं। 
  राष्ट्रपति ने कहा कि हम प्रौद्योगिकी एवं उद्यमशीलता के युग में रहते हैं। चौथी औद्योगिक क्रांति हमारे करीब है। यह हमारे जीने और काम करने के ढंग में बदलाव ला रहा है। यह हमारे युवाओं की आकांक्षाओं को बदल रहा है। हमारे शैक्षणिक संस्थानों को नवोन्मेषण एवं उत्कृष्टता की इस खोज के साथ सुसंगत होना पड़ेगा। उन्हें 21वीं सदी के अनुकूल बनना पड़ेगा। 
  राष्ट्रपति ने कहा कि तेज प्रौद्योगिकीय विकास के बीच कानून की पढ़ाई, कानून का विकास बेहद महत्वपूर्ण है। किसी नवोन्मेषण के होने एवं समाज में इसके व्यापक अनुप्रयोग के बीच की समय अवधि बड़ी तेजी से घट रही है।
  यह जेनेटिक इंजीनियरिंग, बायोइथिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे क्षेत्रों में -कानून के लिए अनिगिनत चुनौतियां पेश करेगी। कानूनी व्यवसाय को तेजी से इसका प्रत्युत्तर देना पड़ेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि हमारे अग्रणी कानूनी विशेषज्ञ ऐसे मामलों पर चिंतन करेंगे।