Wednesday, 8 March 2017

महिलाओं के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी

              केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन इरानी ने विशेषकर, महिला हथकरघा बुनकरों और हस्‍तशिल्‍प कारीगरों के लिए नई श्रेणी के पुरस्‍कार- ‘कमलादेवी चट्टोपाध्‍याय राष्‍ट्रीय पुरस्‍कारों’ की घोषणा की। अब तक केवल एक महिला द्वारा संत कबीर पुरस्‍कार ग्रहण किया गया है, इसे देखते हुए श्रीमती इरानी ने कहा कि ये पुरस्‍कार इस वर्ष से प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि महिला बुनकरों और कारीगरों को उचित पहचान और पुरस्‍कारों से जुड़े आर्थिक लाभ मिल सकें। यह अपने घरों से काम करने वाली उन लाखों महिलाओं के उत्‍कृष्‍ट शिल्‍प और कड़े परिश्रम के प्रति एक छोटी सी श्रद्धांजलि होगी, जो भारत के गौरवशाली हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प की धरोहर की मशाल को आगे ले जा रही हैं। 

         श्रीमती इरानी ने देश भर की महिला हथकरघा बुनकरों को मुद्रा ऋण मुहैया कराने के लिए एक विशेष अभियान भी शुरू किया। उन्‍होंने कहा कि इस अभियान को शुरू करने के लिए 1,700 से अधिक महिला बुनकरों को ऐसे ऋण दिए जा रहे हैं। इस अवसर पर पांच बुनकरों ने श्रीमती इरानी से मुद्रा ऋण ग्रहण किए। श्रीमती इरानी ने इस अवसर पर भारत में शोषक और अस्वास्थ्यकर थाइ रीलिंग की प्रथा को खत्म करने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान की भी शुरूआत की। (टसर सिल्‍क की थाइ रीलिंग आमतौर पर सीमांत महिला उद्यमियों द्वारा की जाती है, जो प्रतिदिन अपने घर में खाली समय के दौरान काम करती हैं)। 

               श्रीमती इरानी ने कहा कि भारत में बनाया जाने वाला 30 प्रतिशत टसर सिल्‍क थाइ रीलिंग के जरिये बनाया जाता है। उन्‍होंने कहा कि इस अस्‍वास्‍थ्‍यकर और अमानवीय प्रथा पर रोक लगाने के लिए मंत्रालय ने महिला सिल्‍क रीलर्स के लिए महिलाओं के अनुकूल बुनियाद रीलिंग मशीनों का वितरण शुरू किया है। केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी), वस्‍त्र मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय रेशम प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्‍थान द्वारा विकसित की गई बुनियाद मशीन थाइ रीलिंग के कठिन परिश्रम में ही कमी नहीं लाती, बल्कि उत्‍पादकता और आमदनी में सुधार लाती है। इस मशीन के विकास के लिए सीएसबी की सराहना करते हुए, श्रीमती इरानी ने आशा व्यक्त की कि थाइ रीलिंग से रेशम बनाने वाली 100 प्रतिशत  महिलाओं को यह मशीन प्राप्त हो जाएगी। इस प्रकार अमानवीय प्रथा समाप्‍त हो जाएगी। 

           उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई 75 प्रतिशत सब्सिडी के कारण, सीमांत उद्यमियों को यह मशीन किफायती दाम पर मिल सकेगी। श्रीमती इरानी ने इस पहल का शुभारम्‍भ करने के प्र‍तीक के रूप में तीन लाभार्थियों को बुनियाद रीलिंग मशीन के प्रतिकृतियां वितरित कीं। केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री ने पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से ऑनलाइन "हैंडलूम वीवर मुद्रा  पोर्टल" का भी शुभारंभ किया। श्रीमती इरानी ने कहा कि अक्सर हथकरघा बुनकर मुद्रा ऋण के लिए आवेदन करने के बाद अपने आवेदन की स्थिति का पता लगाने में सक्षम नहीं होते । 

             उन्होंने कहा कि पोर्टल इस खामी को दूर करेगा; इस पोर्टल से बुनकर और अधिकारी ऋण आवेदन की स्थिति की रीयल टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे। इसके अलावा, पोर्टल के माध्यम से, बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालय दावे जमा करने और निधियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से बुनकर के ऋण खाते सीधे अंतरित करने में सक्षम होंगे। नई प्रणाली से दावों के भुगतान और हथकरघा बुनकरों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में होने वाली देरी में कमी आएगी। उन्‍होंने घोषणा की कि नई प्रणाली नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत 01 अप्रैल, 2017 से लागू होगा। 

            इस अवसर पर वस्त्र मंत्रालय और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत  राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के बीच दो समझौता पर हस्ताक्षर किए गए। जिनका मुख्‍य उद्देश्य हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों में काम करने वाली पिछड़ी वर्गों से संबंधित लाखों महिला हथकरघा बुनकरों और कारीगरों की आय में वृद्धि करना है। यह बड़ी संख्या में क्लस्टर विकास परियोजनाओं के द्वारा किया जाएगा। श्रीमती इरानी ने संतोष व्यक्त किया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति विकास निगम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही समय बाद, सरकार आज कई जगहों पर (मधुबनी पेंटिंग, कढ़ाई शिल्प और शीशे के काम युक्‍त कढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए) अनुसूचित जाति से संबंधित महिला कारीगरों के लाभ के लिए हस्तशिल्प विकास परियोजनाएं शुरू कर रही है। 

             इसी प्रकार, श्रीमती इरानी ने विभिन्न शिल्पों को बढ़ावा देने के लिए अनुसूचित जनजातियों की महिला कारीगरों के लाभ के लिए भी हस्तशिल्प विकास परियोजनाएं शुरू कीं। उन्‍होंने कहा कि इससे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित महिलाओं के लाभार्थियों को लक्षित लाभ के संवितरण को सक्षम बनाया जा सकता है। इस अवसर पर, श्रीमती इरानी ने महिलाओं के लाभार्थियों के लिए तीन अनुसूचित जाति कारीगर क्लस्टर परियोजनाओं और दो अनुसूचित जनजाति कारीगर क्लस्टर परियोजनाओं को स्‍वीकृतियों का संवितरण किया। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं ने लम्‍बा फासला तय किया है। अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। 

             उन्‍होंने कहा कि मंत्रालय का विजन महिला बुनकरों और कारीगरों को लक्षित लाभ दिलाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री के शासन दर्शन ‘सबका साथ सबका विकास’ की तर्ज पर महिलाओं से संबंधित इन पहलों को 'महिला विकास महिला के साथ’ के विषय के अंतर्गत समर्पित किया। इस अवसर पर भारत के विभिन्न हिस्सों से अनेक महिला कारीगरों, महिला हथकरघा बुनकरों और महिला सिल्‍क रीलर्स के अलावा केंद्रीय रेशम बोर्ड के अध्यक्ष, के एम हनुमंतरायप्पा; सचिव, वस्‍त्र, श्रीमती रश्‍मि वर्मा; सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, श्रीमती जी. लता कृष्ण राव और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए कदम

             केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने कार्य स्थल पर महिलाओं को प्रोत्साहित करने एवं सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न कदम उठाए है। 

         अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह यहां अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर दो बार सफलतापूर्वक चढ़ने वाली भारतीय पर्वतारोही श्रीमती संतोष यादव भी उपस्थित थीं।  डॉ. जितेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि महिला दिवस, महिलाओं के संकल्प और उनकी ताकत का प्रतीक है। 

             उन्होंने कहा कि एक महिला न केवल अपनी देखभाल करती है बल्कि परिवार और पूरे समाज की देखभाल करती है। इसलिए महिलाओं का समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान है। मंत्री ने कहा कि महिलाओं ने उद्योग जगत, राजनीति एवं अन्य क्षेत्रों समेत विभिन्न क्षेत्रों में काफी कुछ अर्जित किया है। ये महिलाएं प्रथम पीढ़ी की अचीवर्स हैं क्योंकि उनके पास ऐसी कोई पृष्ठभूमि नहीं थी जिससे उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि यह विकास और प्रथम पीढ़ी के अचीवर्स की यह प्रगति आने वाले पीढ़ियों के लिए एक मिशाल बनेगी।

             डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। डीओपीटी द्वारा कामकाजी महिला केन्द्रित कदमों पर रोशनी डालते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (बचाव, निषेद एवं समाधान) अधिनियम में सुविचारित एवं सख्त प्रावधान शामिल किया हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत यौन उत्पीड़न के दायरे को भी विस्तारित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश को तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया है जिससे कि वे अपनी और अपने बच्चे की बढ़िया देखभाल कर सकें। 

           अपने अनुभव को साझा करते हुए श्रीमती संतोष यादव ने कहा कि खुद में विश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज है। हमें हमेशा सकारात्मक तरीके से सोचना चाहिए। जीवन में किसी भी समस्या के समाधान के लिए संकल्प और ईमानदारी का परिचय देना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण के लिए सोच बदलना महत्वपूर्ण

             सूचना और प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंत्रालय की महिला कर्मचारियों से मुलाकात की। उन्होंने महिलाकर्मियों से बातचीत करते सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन के विजन को मुख्यधारा में लाने के लिए मंत्रालय ने नारी शक्ति द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। 

           उन्होंने कहा कि उन्हें आशा है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण शीघ्र ही वास्तविकता बनेगी। महिलाओं के लिए आरक्षण के बारे में नायडू ने कहा कि महिलाओं से संबंधित व्यापक विषयों के समाधान के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और सोच में परिवर्तन महत्वपूर्ण है। समाज के संस्थागत ढांचे में महिला सशक्तिकरण, मुक्ति और समानता को स्थान देना महत्वपूर्ण है। 

              नायडू ने कहा कि यह जीवन की सभी महिलाओं-माताओं-बहनों-बेटियों और पत्नियों के लिए उत्सव का समय है। प्रत्येक महिला भद्र, देखभाल करने वाली और दयालु होती है। महिला पूर्णता, कठिन परिश्रम, सक्षम विभिन्न कार्य करने वाली और करुणा की समरूप है। इससे विश्व अधिक मानवीय बना है। हमें महिलाओं की हृदय की सराहना और आदर करना चाहिए। 

           नायडू ने कहा कि यदापि आज अतंर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है लेकिन महिलाओं व लड़कियों को आदर सम्मान देना दैनिक बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को ‘बेटर हाफ’ कहा जाता है जबकि किसी भी संबंध में महिला ‘बेस्ट हाफ’ है। महिलाएं हमेशा हमारी मित्र, चिंतक और मार्गदर्शक रही हैं। उन्होंने महिलाओं की महत्व की चर्चा करते हुए बृघंम यंग का यह उद्धरण ‘आप एक पुरुष को शिक्षित करते है, आप एक पुरुष को शिक्षित करते है। 

                 आप एक महिला को शिक्षित करते, एक पीढ़ी को शिक्षित करते है। यह पहला अवसर है जब मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाकर्मियों के साथ संवाद किया गया है। सभी सेक्सनों और रैंक की महिलाकर्मियों ने नायडू के साथ संवाद किया। नायडू ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय में महिलाकर्मियों के कार्य अनुभव बारे में भी बातचीत की।

अंतर्राष्ट्रीय योग उत्सव

             सूचना और प्रसारण तथा शहरी विकास और आवास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में तीन दिन के अंतर्राष्ट्रीय योग उत्सव का उद्घाटन किया।


           इस उत्सव का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2017 की पूर्व प्रस्तुति के रूप में किया गया है। वेंकैया नायडू ने कहा कि लोगों में सौहार्द और एकता लाने के लिए योग एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि योग स्वस्थ और तदुरुस्त रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते है कि योग को जन आंदोलन बनाया जाए। उन्होंने दुनिया के 192 देशों तक योग को फैलाया है। 

            सूचना और प्रसारण मंत्री ने योग को जन आंदोलन बनाने के काम में योगदान कर रहे योग गुरूओं तथा योग मास्टरों को भी धन्यवाद दिया। इस अवसर पर आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येसो नाईक ने कहा कि समग्र स्वास्थ्य और चिकित्सा के लिए योग को पूरे विश्व में स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि योग भारतीय चिकित्सा की परंपरागत प्रणाली है। इसमें रोग की रोकथाम तथा चिकित्सा की क्षमता है। एक बिलियन से अधिक आबादी वाले भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में समग्र आयुष प्रणाली अपनाने की आवश्यकता है ताकि समेकित और उत्पादक तरीके से बड़े कार्यबल का उपयोग किया जा सके। नाईक ने कहा कि आधुनिकीकरण बढ़ने और व्यस्त सामाजिक जीवन के कारण योग का महत्व बढ़ा है।

              उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक समुदाय योग-अनुसंधानकर्ता, शिक्षाविद् और चिकित्सक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में योग के उपयोग और उत्साह की बात कर रहे हैं। इस उत्साह से समग्र मानव विकास के लिए योग को नई दिशा मिलेगी। येसो पद नाईक ने बताया कि उनके मंत्रालय ने लोगों के बीच योग को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। युवाओं में योग को लोकप्रिय बनाने के लिए फ्रेंचाइज आधारित योग लीग का आयोजन किया जा रहा है। आयुष रिसर्च स्कॉलरों को 200 फेलोशिप दिए जा रहे है। इस वर्ष योग के प्रोत्साहन और विकास के लिए उत्कृष्ट व्यक्ति और संगठन को एक राष्ट्रीय और एक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा।

               इस अवसर पर आयुष सचिव अजीत एम. शरण ने बताया कि पिछले वर्ष आय़ोजित अंतर्राष्ट्रीय योग उत्सव के अनुरूप देश के विभिन्न भागों में राज्य योग उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग संबंधी गतिविधियां पूरी वर्ष चलाई जाएगी। आयुष सचिव ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा सीबीएसई के परामर्श से डॉ. एच. आर. नागेन्द्र की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमों के लिए योग विषय को तैयार किया गया है। तीन दिन के इस उत्सव का आयोजन आयुष मंत्रालय, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा भारतीय योग एसोसिएशन और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) के सहयोग से आयोजित किया गया ताकि प्रत्येक वर्ष मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के बारे में लोगों को संवेदी बनाया जा सके।

               इस अवसर पर योग ऋषि स्वामी रामदेव, डॉ. एच. आर. नागेन्द्र, स्वामी चिदानंद सरस्वती, ओ.पी. तिवारी, श्रीमती हमसा जयदेव, ब्रह्म कुमारी आशा, स्वामी भारत भूषण, स्वामी रितावन भारती, सिस्टर वी.के. आशा, एस. श्रीधरन, स्वामी दर्शक और स्वामी उलासा सम्मानित अतिथि थे। इस उत्सव में जाने-माने योग गुरू, योग मास्टर, विद्वान, नीति निर्माता, अधिकारी, योग उत्साही तथा संबद्ध विज्ञानों के विशेषज्ञ और 15-18 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। 

                योग उत्सव में द आर्ट ऑफ लिविंग, बेंगलुरु, पतंजलि योग पीठ, हरिद्वार, ईशा फाउंडेशन, कोयम्बटूर, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश, एसवीवाईएएसए विश्वविद्यालय, बेंगलुरु, कैवल्यधाम, लोनावाला, जिला पुणे, योग संस्थान, सांताक्रूज़, मुंबई, राममणि अय्यंगार मेमोरियल योग संस्थान, पुणे, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली, प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, माउंट आबू, मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योग आश्रम, सहारनपुर, कृष्णामाचार योग मंदिर, चेन्नई, स्वामी राम साधक ग्राम, ऋषिकेश, श्री अरबिंदो आश्रम, पुड्डुचेरी, शिवानंद योग वेदांत केंद्र, नई दिल्ली, अध्यात्मा साधना केंद्र, नई दिल्ली, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, अंतर्राष्ट्रीय नेचुरोपैथी संगठन, विवेकानंद योग आश्रम और अस्पताल, कुकरेजी, नई दिल्ली हैं। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान में 10 मार्च, 2017 को बाबा रामदेव तथा विभिन्न योग स्कूलों के मास्टरों के नेतृत्व में उत्सव बाद की योग कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
  1.    

33 महिलाओं को प्रतिष्ठित नारी शक्ति पुरस्‍कार

                 राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नई दिल्‍ली में आयोजित एक विशेष समारोह में नारी शक्ति पुरस्‍कार 2016 प्रदान किए। ये पुरस्‍कार महिलाओं के प्रयोजन, विशेष रूप से वंचित तथा सीमांत वर्गों की महिलाओं के कल्‍याण की दिशा में विशिष्‍ट सेवाओं को प्रदान करने में उनके प्रयासों की सराहना करते हुए प्रदान किये गये हैं। 

             राष्‍ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि सरकार भी महिलाओं के खिलाफ हिंसक अपराधों की बढ़ती दर से चिंतित है। यह बात क्षमा योग्‍य नहीं है कि उतनी सुरक्षित एवं महफूज नहीं महसूस करती, जितनी उन्‍हें करनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि विद्यालयों तथा उच्‍चतर शिक्षा के संस्‍थानों में बच्‍चों एवं युवाओं को संवेदनशील बनाने पर विशेष जोर दिये जाने से उनमें महिलाओं के प्रति समुचित सम्‍मान की भावना पैदा करने में मदद मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि इसे हमारे ग्रामीण एवं शहरी आबादी समुचित उपायों तथा सुविचारित एवं समन्वित सरकारी कार्यक्रमों के द्वारा उपयुक्‍त कदम उठाये जाने के जरिये प्रारंभ किया जा सकता है। 

              राष्‍ट्रपति ने कहा कि अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यह दोहराना महत्‍वपूर्ण है कि हमारे देश की प्रत्‍येक बालिका एवं महिला को यह भरोसा होना चाहिए कि भारत सरकार उसे एक सक्षमकारी वातावरण उपलब्‍ध कराने के प्रति पूरी त‍रह प्रतिबद्ध है, जो उसे समान अवसर प्रदान करता है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने अपने संबोधन में देश में महिलाओं को मिलने वाले सर्वोच्‍च पुरस्‍कार प्राप्‍त करने वाली महिलाओं को बधाई दी। 

            उन्‍होंने कहा कि इस वर्ष पुरस्‍कारों के चयन का मानदंड वैसे अज्ञात अचीवर्स की असाधारण उपलब्धियों की खोज करना था, जिन्‍होंने अपनी अदम्‍य भावना से नारीत्‍व के साहस को प्रदर्शित किया है। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि ‘पुरस्‍कार प्राप्‍त करने वाली इनमें से प्रत्‍येक महिला की कहानी एक संघर्ष का प्रतिनिधित्‍व करती है। यह ऐसी कहानी है कि जो बताती है कि किस प्रकार उन्‍होंने भीषण बाधाओं के बावजूद अपने दिल की आवाज सुनी और अपनी उपलब्धियों की बदौलत अपने समुदाय के जीवन में एक अन्‍तर पैदा कर दिया। 

             महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहलों को रेखांकित करते हुए श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि महिलाओं को सशक्‍त बनाने के लिए बड़ी संख्‍या में कदम उठाये गये है, जिससे कि वे बड़े स्‍वप्‍न देख सकें और अपनी आकांक्षाओं को पूरी कर सकें। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है, जिसके लिए सरकार ने कई कदम उठाये है। इन कदमों में देश भर में वन स्‍टॉप केन्‍द्रों के एक नेटवर्क की स्‍थापना करना तथा मोबाइल फोनों में पैनिक बटन का संस्‍थापन शामिल है, जिसे अगले महीने लॉन्‍च किया जाएगा। कार्यस्‍थलों पर महिलाओं के यौन उत्‍पीड़न (बचाव, रोकथाम एवं समाधान) अधिनियम, 2013 के तहत विस्‍तृत दिशा-निर्देशों को निर्माण किया गया है। 

              श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि महिलाओं से प्राप्‍त शिकायतों को एक समर्पित ई-मेल द्वारा प्राप्‍त किया जाता है एवं उनका निपटान एक शिकायत निपटान प्रकोष्‍ठ द्वारा किया जाता है, जिसका गठन केवल इसी उद्देश्‍य के लिए किया गया है। उन्‍होंने कहा कि सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्मों पर महिलाओं को मिलने वाली हिंसक धमकियों से निपटने के लिए एक अलग तंत्र भी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पर उपलबध है। 

                 श्रीमती मेनका संजय गांधी ने ऐसी और अधिक पहलों की जानकारी देते हुए कहा कि पासपोर्ट दिशा-निर्देशों में हाल में संशोधन किया गया है, जिससे कि एकल महिलाएं एवं माताएं खुद के लिए तथा अपने बच्‍चों के लिए पासपोर्ट प्राप्‍त करने में सक्षम हो सकें। ऐसी महिलाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं का विकास किया जा रहा है, जिन्‍हें एनआरआई से शादी करके बुरी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। 

           श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि जमीनी स्‍तर पर हमने महिला पुलिस कार्यकर्ता योजना की शुरूआत की है, जिससे कि महिलाओं को इन कार्यकर्ताओं के जरिये सुरक्षित तरीके से स्‍थानीय पुलिस प्राधिकारियों के साथ जोड़ा जा सके। महिला एवं बाल विकास राज्‍य मंत्री श्रीमती कृष्‍णा राज ने नारी शक्ति पुरस्‍कार 2016 की विजेताओं को बधाई दी। उम्‍मीद जताई कि वे महिला सशक्तिकरण के ध्‍येय के लिए दूसरों को प्रेरित करने का माध्‍यम बनेंगी। 

           महिला एवं बाल विकास सचिव सुश्री लीना नायर ने अपने संदेश में कहा कि नारी शक्ति पुरस्‍कार उन लोगों को सम्‍मानित करता है, जिन्‍होंने जटिल परिस्थितियों के बावजूद साहस की भावनाओं का परिचय दिया। यह महिलाओं को सशक्‍त बनाने एवं महिलाओं के मुद्दे उठाने वाले व्‍यक्ति विशेषों के प्रेरणापूर्ण योगदान को भी सम्‍मानित करता है।

महिला खिलाड़ियों की शिकायतों के समाधान के लिए उच्च स्तरीय समिति

           अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर युवा मामलों और खेल मंत्रालय ने महिलाओं के लिए खेल को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करने संबंधी विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए भारत में महिला और खेल विषय पर सम्मेलन आयोजित किया। 

             इस अवसर पर युवा मामले और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने कहा कि उनका मंत्रालय पुरुष और महिला एथलीटों को समान रूप से सहायता और प्रोत्साहन देता है। प्रशिक्षण आदि के लिए किसी तरह का लैंगिक भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने बताया कि भारतीय खेल प्राधिकरण ने अपनी विशेष एरिया गेम योजना में कुल 1862 खिलाड़ियों में से 807 महिला खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया है। गोयल ने घोषणा कि उनका मंत्रालय महिला खिलाड़ियों की शिकायतों के समाधान के लिए संयुक्त सचिव खेल की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगा।

              इस समिति में एथलीट, वकील, एमवाईएएस के वरिष्ठ अधिकारी और खेल पत्रकार (सभी महिलाएं) शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि अगर महिला एथलीट को किसी तरह की शिकायत है तो वह समिति से शिकायत समाधान के लिए संपर्क कर सकती है। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय यौन उत्पीड़न के विषय पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाता रहा है। 

            सम्मेलन में लड़की एथलीटों, महिला कॉचों के लिए सुरक्षित स्थान बनाने, खेल परिसरों में यौन उत्पीड़न के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने, प्रत्येक प्रशिक्षण मॉड्यूल में लैंगिक संवेदनशीलता का मॉड्यूल शामिल करने, खेल संस्थानों, फेडरेशनों तथा अन्य खेल संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व देने और महिला एथलीटों को समर्थन के बारे में विस्तृत चर्चा की गई।

महिलाओं को वित्तीय सहायता

            केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने कहा है कि महि‍लाओं तक वित्‍तीय सहायता पहुंचाने के लि‍ए यह जरूरी है कि देश में महि‍ला सहकारि‍ता को मजबूत बनाया जाए।

केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने कहा कि महिला सहकारिता में प्रगति और सफलता की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि सफलता जारी रहती है तो सफल महि‍ला सहकारि‍ताओं से अधि‍क से अधि‍क महि‍लाओं को लाभ होगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बात नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा ‘महिला सहकारिताओं का सुदृढ़ीकरण’ पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही। कार्यशाला में सहकारिता से जुड़ी देश भर से आईं करीब 200 महिलाओं ने हिस्सा लिया। परस्‍पर बातचीत से महि‍ला सहकारि‍ता की वि‍भि‍न्‍न योजनाओं के बारे में एक दूसरे को बताया। 

               राधा मोहन सिंह ने कहा कि भारत की 1.2 अरब की जनसंख्‍या की लगभग 70 प्रति‍शत जनसंख्‍या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। महि‍लाएं फसल बुआई से लेकर फसल कटाई तथा इसके बाद की गतिविधियों में भी महत्‍वपूर्ण भूमि‍का नि‍भाती हैं। सिंह ने कहा कि देश की लगभग 8 लाख सहकारि‍ताओं में केवल महि‍लाओं द्वारा संचालि‍त मात्र 20,014 सहकारि‍ताएं कार्यरत हैं। कृषि‍ एवं कि‍सान कल्‍याण मंत्रालय अपनी सभी योजनाओं और कार्यक्रमों में महि‍लाओं की भागेदारी सुनिश्चित करता है। 30 प्रतिशत फंड महिला किसानों के लिए रखता है।

               राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों को महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए वर्ष 2013-14 से मौजूदा केन्द्रीय प्रायोजित/केन्द्रीय सेक्टर योजनाओं के तहत महिलाओं के स्वामित्व वाले पशुधन के लिए निधि का 10 से 20 प्रतिशत उपयोग करने की सलाह दी गयी है। इसके अलावा देश भर में स्थापित 668 कृषि विज्ञान केन्द्रों में एक – एक महिला वैज्ञानिक की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गयी है। 3.1 लाख कृषिरत महिलाओं को देशभर में कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा वर्ष 2016-17 के दौरान प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा कृषिरत महिलाओं की कृषि विज्ञान केन्द्रों के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे कि अग्रपंक्ति प्रदर्शन तथा कृषि प्रसार के विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता सुनिश्चित की गयी है। 

             अब केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने हर वर्ष 15 अक्तूबर को महिला किसान दिवस मनाने का फैसला लिया है। कृषिरत महिलाओं पर जेंडर नॉलेज पोर्टल विकसित किया गया है। जिसमें किसान महिलाओं से संबंधित सूचना और आंकड़े दर्शाये गये हैं। इसके अलावा महिलाएं सम्बद्ध मात्स्यिकी क्रियाकलापों, जैसे मत्स्य बीज एकत्र करना, छोटी मछली पकड़ना, मुसेल, खाने योग्य ऑएस्टर, समुद्री अपतृण एकत्र करना, मत्स्य विपणन, मत्स्य प्रसंस्करण और उत्पाद विकास इत्यादि से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। मात्स्यिकी क्षेत्र में उनकी हिस्सेदारी और भागीदारिता को और बढ़ाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण तथा माइक्रो वित्त दिया जाता है ताकि उन्हें प्रोत्साहित करके समूह में संगठित करके उनकी क्षमता का निर्माण किया जा सके।

             सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) का उद्देश्‍य वि‍शेष रूप से सहकारी संस्‍थाओं को कृषि‍ उपज के उत्‍पादन, प्रसंस्‍करण, वि‍पणन, भंडारण, नि‍र्यात तथा आयात इत्‍यदि‍ के लि‍ए धन मुहैया कराना है। एनसीडीसी, महि‍ला सहकारि‍ताओं को अपने कमजोर वर्गों के कार्यक्रम के अंतर्गत वि‍त्‍तीय सहायता प्रदान करता है। एनसीडीसी, महि‍ला सहकारि‍ताओं के कार्यक्रमों के लिए 50 लाख रूपये तक एवं उससे ऊपर की परि‍योजनाओं के लिए क्रमश: 0.50 प्रति‍शत एवं 0.25 प्रति‍शत कम वार्षि‍क ब्‍याज दर पर ऋण उपलब्‍ध कराता है। 

             इस मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कृषिरत महिलाओं के लिए केन्द्रीय कृषिरत महिला संस्थान, भुवनेश्वर स्थापित किया गया है। यह वर्ष अप्रैल 1996 से कार्यरत है। विश्व में कृषि से जुड़ी महिलाओं के लिए यह पहला और अकेला संस्थान है। राधा मोहन सिंह ने इसके बाद राष्‍ट्रीय सहकारी वि‍कास नि‍गम की सामान्‍य परि‍षद की 81वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 17334 करोड़ रूपये की वि‍त्‍तीय स्‍वीकृति‍यां प्रदान की जा चुकी हैं। 11579 करोड़ रूपये का वि‍तरण कि‍या जा चुका है, जो इस वर्ष के 6000 करोड़ रूपये के वि‍तरण लक्ष्‍य से लगभग दुगुना है। इस अवधि‍ में नि‍गम का नि‍वल एनपीए शून्‍य रहा है। ऋणों की वसूली दर 99.59ऽ से अधि‍क है। 

             सिंह ने चालू वर्ष 2016-17 में बढ़िया काम के लिए प्रबंध नि‍देशक एनसीडीसी तथा उनके अधि‍कारि‍यों को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि एनसीडीसी कमजोर वर्गों के कार्यक्रमों जैसे कि मछलीपालन, डेयरी, मुर्गीपालन, हथकरघा, अनुसूचि‍त जाति‍/ अनुसूचि‍त जनजाति‍‍ की सहकारि‍ताओं और वि‍शेष रूप से पूर्वोत्‍तर क्षेत्र तथा सहकारी रूप से अल्‍पतम एवं अल्‍प वि‍कसि‍त क्षेत्र में स्‍थि‍त सहकारि‍ताओं के वि‍कास के लि‍ए अपने प्रयासों को जारी रखेगा। भविष्य में सफलता की नयी उचाइयां छुएगा।

केन-बेतवा नदी जोडो परियोजना पर काम अब

            नदियों को जोड़ने के लिए विशेष समिति की बारहवीं बैठक संपन्न। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री विजय गोयल ने उम्‍मीद जताई है कि केन बेतवा नदी जोडो परियोजना पर इस साल के मध्‍य तक काम शुरू हो जायेगा। 

            नई दिल्ली में नदियों को जोड़ने के विषय पर बनी विशेष समिति की बारहवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए गोयल ने कहा कि नदी जोडो परियोजना पर देश में वर्षों से चर्चा चल रही थी, लेकिन अब यह परियेजना जल्‍द ही मूर्त रूप लेने जा रही है। गोयल ने कहा कि उनके मंत्रालय ने नदी जोडो परियोजना के लिए पांच प्राथमिकता प्राप्‍त लिंकों की पहचान की है। इनमें से पहले चरण के रूप में केन बेतवा लिंक के लिए विभिन्‍न विभागों से लगभग सभी मंजूरियां प्राप्‍त हो चुकी हैं। 

            उन्‍होंने कहा कि परियोजनाओं को तय समय सीमा के अंदर पूरा किया जाना चाहिए। इस बैठक में 9 नवम्‍बर, 2016 को नई दिल्ली में समिति की हुई पिछली बैठक के कार्य विवरण की पुष्टि की गई। साथ ही विगत बैठक में किये गए निर्णयों के बारे में प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैठक में जिन अन्य विषयों पर विचार किया गया उनमें केन-बेतवा संपर्क परियोजना चरण 1 की विभिन्न वैधानिक मंजूरियों की स्थिति, केन-बेतवा संपर्क परियोजना चरण 2 की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की स्थिति, दमनगंगा-पिंजल तथा पार-तापी-नर्मदा संपर्क परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की स्थिति, महानदी-गोदावरी का प्रणाली अनुकरण अध्ययन, नदियों को जोड़ने के लिए नदी बेसिन में सुरक्षित जल भंडार, अंतर राज्य संपर्क प्रस्तावों की स्थिति तथा राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी का नवीनीकरण शामिल है।

           केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 जुलाई 2014 को अपनी बैठक में नदियों को जोड़ने के लिए विशेष समिति के गठन को स्वीकृति दी थी। इस स्वीकृति के अनुपालन में 23 सितंबर, 2014 को विशेष समिति गठित की गई। समिति की पहली बैठक 17 अक्टूबर 2014 को अयोजित की गई थी। समिति सभी हितधारकों की राय पर विचार करने के बाद संदर्भ के अनुसार नदियों को जोड़ने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वैकल्पिक योजनाओं के विकास के लिए सहमति कायम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। परियोजनाओं को पूरा करने की योजना भी बनाई जा रही है।

भारत के पास विशेषज्ञता व इच्छा शक्ति

           उप-राष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी ने कहा है कि पहले हिन्द महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) के नेताओं का शिखर सम्मेलन संतोषजनक रहा।

           उप-राष्ट्रपति इंडोनेशिया के जकार्ता से सम्मेलन में भाग लेकर स्वदेश आते हुए एयर इंडिया-1 विशेष विमान में संवाददाताओँ को संबोधित कर रहे थे। आतंकवाद पर एसोसिएशन की राय के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उप-राष्ट्रपति ने कहा कि शिखर सम्मेलन में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद को रोकने और मुकाबले करने के बारे में घोषणापत्र स्वीकार किया गया। यह घोषणापत्र आतंकवाद के मसले पर क्षेत्रीय विचारों का मिश्रण है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि सभ्य जीवन के लिए किसी तरह की हिंसा आवंछित है। लोग यह महसूस करने लगे है कि हिंसा रोकी जानी चाहिए। 

             उप-राष्ट्रपति ने कहा कि लोग आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले विचारों को दरकिनार कर रहे हैं। श्रीलंका की नौसेना द्वारा एक भारतीय मछुवारे को कथित रूप से मारे जाने के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए उप-राष्ट्रपति ने बताया कि शिखर बैठक के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति से हुई मुलाकात में उन्होंने यह विषय उठाया। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने उनसे कहा कि उन्होंने श्रीलंका नेवी के कमांडर से बातचीत की और कमांडर ने उन्हें बताया कि श्रीलंका की ओर से इस तरह की किसी घटना को अंजाम नहीं दिया गया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने इस मामले की पूरी और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

            आईओआरए के अस्तित्व के बारे में उप-राष्ट्रपति ने कहा कि 2011 में बेंगलुरु शिखर बैठक में हिन्द महासागर रिम पर नए तरीके से फोकस किया गया। इंडोनेशिया चिन्हित क्षेत्रों को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। अब एसोसिएशन की गतिविधि पर नए तरीके से बल दिया जा रहा है। यह एक चिन्हित संस्था है, जिसमें शामिल होने वाले देशों की संख्या 21 है। आईओआरए उत्कृष्टता केन्द्र (आईसीई) स्थापित करने के भारत के प्रस्ताव पर उप-राष्ट्रपति ने कहा कि सभी सदस्य देश समुद्री विषयों और हितों से संबंधित विषयों पर विस्तृत कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहला काम ज्ञान को आकर्षित करना होगा।

            इस प्रयास में नेतृत्व के लिए भारत के पास विशेषज्ञता और इच्छा शक्ति है। यह ऑनलाईन व्यवस्था होगी। प्रत्येक व्यक्ति इसे एक्सेस कर सकता है। इनपुट दे सकता है। इंडोनेशिया को बढ़ रहे निर्यात के बारे में प्रश्न के जवाब में उप-राष्ट्रपति ने कहा कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ उनकी इस विषय पर भी बातचीत हुई। हमारे व्यापारिक संबंध बढ़ाने में नई दिलचस्पी दिखी। उप-राष्ट्रपति ने कहा कि रक्षा उपकरणों तथा फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में विशेष प्रगति हुई है।

महिलाएं परिवर्तन की वाहक

           राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति पुरुस्कार प्रदान किए। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

            भारत में हम अपने दैनिक जीवन में अनेक तरीकों से अपनी महिलाओं को स्वीकार करते है। याद करते है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम समाज के प्रति महिलाओं के निःस्वार्थ उपहार के लिए उन्हें विश्व द्वारा नमन करने में शामिल हो रहे है। नारी शक्ति पुरुस्कार प्राप्त करने वाली महिलाओं और संगठनों को बधाई देता हूं। उन्होंने चुनौतियों को स्वीकार करके तथा उच्च आकांक्षाओं को पूरा करने का उत्कृष्ठ कार्य किया है। प्रत्येक सफलता के पीछे संकल्प और दृढ़ता की कहानी होती है। 

          प्रत्येक सफलता हजारों अन्य महिलाओं के प्रयासों का प्रतिनिधित्व करती है। इनका समान रूप से आदार किया जाना चाहिए। भारत के स्वतंत्र गणराज्य बनने से पहले अपने देश में महिलाओं की सशक्तिकरण पर विचार-विमर्श शुरू हुआ। हमारे संविधान और नीति निर्देशक तत्वों में नीति और नियोजन के लिए सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए है। महिलाएं अब केवल कल्याण लाभों को प्राप्त करने वाली नहीं बल्कि समान अधिकार, समान सहभागी और देश की सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक प्रक्रियाओं में परिवर्तन की वाहक के रूप में मान्य दी जाती हैं। 

            राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं का प्रयास सराहनीय रहा है। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक असमानता को कम करने में प्रभावी रूप से योगदान दिया है। निःस्वार्थ भाव से विकास तथा राष्ट्र निर्माण के लक्ष्यों के लिए कार्य कर रही है। स्थानीय स्वशासन के क्षेत्र में ग्रामीण भारत में एक मिलियन से अधिक, निर्धारित 33 प्रतिशत से अधिक- महिलाओं ने अधिकार प्राप्त किए हैं। प्रभावी रूप से अपने दायित्व को निभा रही हैं। रक्षा सेवाओं, पुलिस तथा सुरक्षा बलों, खेल, शिक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और नवाचार जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में महिलाएं कमजोर और शोषित लोगों के लिए काम कर रही हैं, समुदाय तक पहुंच रही है। 

           स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भागीदारी कर रही हैं। अच्छे टीम कार्य और सफलता के लिए महिलाएं अपरिहार्य हैं। हमें यह स्वीकार करना होगा कि प्रायः महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि महिलाएं ऐसी कठिनाइय़ों को पार कर जाती है और प्रेरित करती हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यह दोहराना आवश्यक है कि प्रत्येक लड़की और महिला को यह आवश्स्त किया जाना चाहिए कि भारत सरकार उन्हें ऐसा सक्षम वातावरण उपलब्ध कराने के लिए संकल्पबद्ध है, जिसमें उन्हें को बराबरी का अवसर मिले। महिलाओं को आत्मविश्वासी महसूस होना चाहिए, उन्हें यह विश्वास होना चाहिए कि जिस क्षेत्र को वह चुनती हैं उन क्षेत्रों में वह उच्च आकांक्षाओं की पूर्ति कर सकती है। 

             देश के अनेक हिस्सों में बाल लिंग अनुपात में गिरावट को देखते हुए प्रधानमंत्री का ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान लांच किया गया है। यह अभियान इस तरह बनाया गया है ताकि देश के प्रत्येक हिस्सें में लड़की प्राथमिक शिक्षा में नामांकन के लिए प्रेरित हो सके। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 2015 तक देश के 100 जिलों को चुना गया। 2016 में इसमें 61 अतिरिक्त जिले जोड़े गए। सरकार महिलाओं के प्रति बढ़ रही हिंसा को लेकर चिंतित है। यह अक्षमय बात है कि भारत में महिला उतनी सुरक्षित महसूस नहीं करतीं, जितनी सुरक्षा होनी चाहिए।  

               राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, आधुनिक भारत में लैंगिंक असमानता और भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। भारत का प्रमुख लक्ष्य समावेशी विकास है। इस बारे में स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को संवेदी बनाने से महिलाओं को उचित सम्मान मिलेगा। यह कार्य हमारे ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच उचित उपायों के जरिए और समेकित सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से पूरा किया जाना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि महिलाओं में अनेक कार्य संपन्न करने की आपार क्षमता होती है। अपने परिवारों तथा घरों से लेकर खेतों, व्यवसायों और विभिन्न कार्यों में महिलाओं का संकल्प किसी से कम नहीं है। गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की कृति घरे बायरे में पढ़ी हुई पंक्ति मुझे याद आती है कि, ‘हम महिलाएं घर के चिराग की केवल देवियां नहीं, बल्कि इसकी ज्योति और आत्मा है।’ 

            महिलाओं को आदार देते समय यह पंक्तियां हमारे दिमाग में होनी चाहिए। यह कठिन नहीं है क्योंकि यह बुनियादी मूल्य हमारी महान विरासत का हिस्सा रहे हैं। हमारी चेतना में हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हमें इन बुनियादी मूल्यों की रक्षा और प्रसार के प्रति अपने आप को समर्पित करना चाहिए। इन शब्दों के साथ मैं एक बार फिर नारी शक्ति पुरुस्कार विजेताओं को बधाई देता हूं। उनके प्रयासों में सफलता की कामना करता हूं। महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी को इन पुरुस्कारों के गठन के लिए मैं हृदय से धन्यवाद देता हूं। यह पुरुस्कार महिलाओं के सशक्तिकरण और अपने देश की प्रगति के लिए व्यक्तियों, संस्थानों और संगठनों को छोटा-बड़ा योगदान करने के लिए प्रेरित करेगे।

‘कारोबार करने में सुगमता’, सीआरजेड मंजूरी के लिए वेबपोर्टल

            पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्‍य मंत्री अनिल माधव ने यहां तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) के लिये मंजूरी पाने के लिए वेब पोर्टल का शुभारम्‍भ किया। 

           मंत्री ने पोर्टल के शुभारम्‍भ को ‘कारोबार करने में सुगमता’ का अच्‍छा उदाहरण बताया। यह पोर्टल परियोजना प्रस्‍तावकों के लिए ‘तटीय विनियमन क्षेत्र’ के अंतर्गत मंत्रालय से आवश्‍यक मंजूरी प्राप्‍त करने के लिए वेब आधारित प्रणाली है। इस प्रणाली से परियोजना प्रस्‍ता‍वकों और राज्‍य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (एससीजेडएमए) तथा नगरपालिका/नगर नियोजन एजेंसियों जैसे संबंधित राज्‍य/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के निकायों को अपने प्रस्‍तावों की स्थिति जानने में मदद मिलेगी।

             पर्यावरण और वन मंजूरी प्रदान करने की मौजूदा प्रणाली के समान ही यह प्रणाली वेब आधरित है। यह पोर्टल उपयोगकर्ता के लिए काफी सुविधाजनक है, जिससे एक ही खिड़की के जरिए सीआरजेड मंजूरी के लिए आवेदन जमा कराने में और मंजूरी से संबंधित त्‍वरित जानकारी पाने मदद मिलेगी। इस पोर्टल में भविष्‍य के सभी संदर्भों के लिए प्रत्‍येक प्रस्‍ताव को अलग पहचान दी गई है। यह इंटरनेट सुविधा के साथ किसी भी कम्‍प्‍यूटर पर उपलब्‍ध है। 

              वेबपोर्टल के उद्देश्‍यों में दक्षता बढ़ाना, सीआरजेड मंजूरी की प्रक्रिया में पारदर्शीता और जिम्‍मेदारी लाना, सीआरजेड मंजूरी प्रस्‍तावों की स्थिति के बारे में सही समय पर जानकारी उपलब्‍ध करवाने के जरिए जवाबदेही बढ़ाना, कारोबार करने में सुगमता लाना और सूचनाओं तथा सेवाओं तक नागरिकों की सुविधाजनक पहुंच बढ़ाना, केन्‍द्र और राज्‍य स्‍तर पर विधियों और प्रक्रियाओं को मानकीकृत करना शामिल है। 

           इसके अलावा ज्‍वार-भाटे के बारे में अधिसूचना, सीआरजेड-1 के अंतर्गत आने वाले पारिस्थितिकीय रूप से संवेदी क्षेत्र, खतरे की रेखा जैसी कई अन्‍य पहलों पर कार्य चल रहा है। इन सब कदमों का उद्देश्‍य पक्षपात कम करना और सभी स्‍तरों पर जवाबदेही बढ़ाना है।

‘सर्वश्रेष्‍ठ लघु विश्‍वविद्यालय’ की श्रेणी में शामिल होने पर आईआईएससी को बधाई

            राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारतीय विज्ञान संस्‍थान (आईआईएससी) बैंगलोर को टाइम्‍स हायर एजुकेशन (टीएचई) रैंकिंग 2017 में ‘सर्वश्रेष्‍ठ लघु विश्‍वविद्यालय’ की श्रेणी में 10 शीर्ष संस्‍थानों की सूची में अपना स्‍थान बनाने के लिए बधाई दी है।

          राष्‍ट्रपति ने आईआईएससी बैंगलोर के निदेशक प्रो. अनुराग कुमार को भेजे संदेश में कहा, ’आपके संस्‍थान के टाइम्‍स हायर एजुकेशन (टीएचई) रैंकिंग 2017 में ‘सर्वश्रेष्‍ठ लघु विश्‍वविद्यालय’ की श्रेणी में 10 शीर्ष संस्‍थानों की सूची में शामिल होने के अवसर पर मेरी ओर से बधाई स्‍वीकार करें। आपके प्रतिष्ठित संस्‍थान की पूरी फेकल्‍टी, कर्मचारी और छात्रों को भी मेरी ओर से बधाई दें, जिन्‍होंने विश्‍व के शीर्ष शैक्षिक संस्‍थानों में अपना स्‍थान बनाने के मेरे आग्रह को साकार किया। 

            इस उपलब्धि से मेरा विश्‍वास दोबारा पुख्‍ता हुआ है कि भारतीय संस्‍थानों में योग्‍यता की कोई कमी नहीं है और वे विश्‍व के सर्वश्रेष्‍ठ संस्‍थान बन सकते हैं। मुझे विश्‍वास है कि आपका संस्‍थान अधिक से अधिक ऊंचाई हासिल करने के प्रयास जारी रखेगा।’  

पेंशन के लिए अब आधार आवश्‍यक

          कई पेंशनधारियों ने अभी भी पेंशन जारी रखने के लिये अपने जीवन प्रमाण पत्र के रूप में आधार सत्‍यापित जीवन प्रमाण जमा नहीं करवाये हैं। 

         इसे देखते हुए कि कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने डिजिटल माध्यम से जीवन प्रमाण पत्र जमा कराने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2017 तक बढ़ा दी है। इससे पहले अंतिम तारीख 28 फरवरी 2017 थी। कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) 1995 के सदस्‍यों और पेंशनधारकों को 31 मार्च, 2017 तक अपनी आधार संख्‍या जमा कराना आवश्‍यक है। अगर किसी सदस्‍य के पास आधार संख्‍या नहीं है तो उन्‍हें पेंशन प्रक्रियाओं और मासिक पेंशन भुगतान जैसे ईपीएस 1995 के अंतर्गत दावों के निपटान के लिए आधार नामांकन पहचान पर्ची लगानी होगी। 

              अगर पेंशन योजना का सदस्‍य फॉर्म 10 सी में आवेदन कर 10 वर्ष से कम की सेवा काल से बाहर आने का निर्णय लेता है, तो उस मामले में आधार संख्‍या की आवश्‍यकता नहीं है। अगर नियोक्‍ता द्वारा कर्मचारी के योगदान के भाग को काटा नहीं गया है, तो वह माफ है। मामूली नुकसान होने पर इस अभियान के अंतर्गत घोषित कर्मचारी के संदर्भ में नियोक्‍ता को भुगतान करना होगा, जो एक रुपये प्रति वर्ष की दर से है। प्रशासकीय शुल्‍क माफ किया गया है। 

              यहां तक कि कर्मचारी भविष्‍य निधि और अन्‍य प्रावधान (ईपीएफ और एमपी) अधिनियम 1952 में भी कैजुअल, अनुबंधित और नियमित कर्मचारियों के बीच अंतर नहीं किया गया है। देखा गया है कि सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और स्‍वायत्‍त संगठनों सहित प्रमुख नियोक्‍ता द्वारा अनुबंध के आधार पर बड़ी संख्‍या में लोग रखे जाते हैं, जो अभी भी ईपीएफ के अंतर्गत कवरेज से बाहर हैं। पूर्व सैनिकों के लिए रक्षा मंत्रालय ने ईसीएचएस नामक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल योजना तैयार की है।

             अभी तक ईसीएचएस के अनुबंधित कर्मी ईपीएफओ के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित थे। अब ईसीएचएस को ईपीएफ अधिनियम की परिधि में लाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने ईसीएचएस के अपने अनुबंधित कर्मचारियों के पंजीकरण के लिए आवश्‍यक निर्देश जारी कर दिए हैं। इसी प्रकार सैन्‍य अभियांत्रिकी सेवा (एमईएस) और भारतीय रेल के साथ कार्य करने वाले ठेकेदारों द्वारा नौकरी पर लगाए गए सभी योग्‍य कर्मियों को भी ईपीएफओ के अंतर्गत अनुबंधित कर्मचारियों के कवरेज सुनिश्चित करवाने का आग्रह किया जा रहा है।

            सुविधा और दक्षता बढ़ाने के सतत प्रयासों की दिशा में यूएएन से जुड़े ग्राहकों की आधार संख्‍या के लिए फार्म संख्‍या 19 (यूएएन), 10सी (यूएएन) और 31 (यूएएन) के स्‍थान पर एक पृष्‍ठ का समग्र दावा फॉर्म (आधार) लाया गया है।

सामुदायिक रेडियो को प्रोत्‍साहन

                  सूचना और प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौर ने कहा है कि सरकार विभिन्‍न संचार मंचों के जरिए अंतिम व्‍यक्ति तक को संपर्क प्रदान करने के अपने उद्देश्‍य के लिए प्रतिबद्ध है।

              इस संदर्भ में विभिन्‍न पहलों के जरिए सामुदायिक रेडियो ने काफी प्रोत्‍साहन प्रदान किया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में सामुदायिक रेडियो स्‍टेशन (सीआरएस) स्‍थापित करने के लिए अनुदान राशि 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत और अन्‍य राज्‍यों में 75 प्रतिशत कर दी है, लेकिन यह 7.5 लाख रुपये की अधिकतम सीमा पर निर्भर करेगा।

                इसमें अधिक भागीदारी के लिये विश्‍वविद्यालय और गैर सरकारी संगठनों सहित विभिन्‍न प्रतिभागियों को देश में सीआर स्‍टेशन स्‍थापित करने की अनुमति दी गई है। मंत्री ने यह बात आज नई दिल्‍ली में सूचना और प्रसारण के लिए अतिरिक्‍त महानिदेशक फ्रैंक ला रू के नेतृत्‍व में यूनेस्‍को प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान कही।  कर्नल राठौर ने कहा कि सामुदायिक रेडियो विभिन्‍न स्‍थानीय और संबंधित मुद्दों पर स्‍थानीय भाषा और बोली में जानकारी प्रदान कर जमीनी स्‍तर पर सूचना प्रदान करने की आवश्‍यकता को पूरा करेगा।

              प्रेस की स्‍वतंत्रता से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में कर्नल राठौर ने कहा कि सरकार स्‍व नियमन के दर्शन में विश्‍वास करती है। प्रति‍निधिमंडल ने मंत्री को मीडिया और संचार के क्षेत्र में यूनेस्‍को की विभिन्‍न गतिविधियों के बारे में बताया। उन्‍होंने सहयोग के संभावित क्षेत्रों के बारे में भी सरकार को अवगत कराया।