Wednesday, 4 January 2017

अब अंगदान भी ऑनलाइन, एक लाख भारतीय हिस्सा बने


            भारत सरकार ने मृतक लोगों के अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय अंग दान कार्यक्रम शुरू किया है। सफदरगंज अस्पताल, नई दिल्ली में उच्च स्तरीय संगठन राष्ट्रीय अंग व ऊतक प्रत्यारोपण संगठन स्थापित किया गया है।   

     प्रत्यारोपण अस्पतालों की नेटवर्किंग को सर्वप्रथम दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में शुरू किया गया। क्षेत्रीय स्तर पर तमिलनाडु, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल व चंडीगढ़ है। गुर्दा, लीवर, दिल व फेफड़े तथा कॉर्निया के आवंटन संबंधी नीति व नियमावली को स्वीकृत किया गया है। एक लाख से ज्यादा लोगों से अंग दान किया है।  “द लांग्टिड्यूनल एजिंग स्टडी इन इंडिया” भारत में दीर्घ आयु का अध्ययन है। एलएएसआई देश में वृद्धजनों पर सबसे बड़ा अध्ययन है। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई ने हावर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया (यूएससी) के संयुक्त तत्वावधान में कर रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष-भारत ने मिलकर फंड किया। गरीब को मुफ्त डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्यों को सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।  ई-रक्तकोष, यह इंटिग्रेटेड ब्लड बैंक मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम है।

              वेब-आधारित यह तकनीकी प्लेटफॉर्म राज्य के सभी ब्लड बैंकों को एक साथ जोड़ देगा। इंटिग्रेटेड ब्लड बैंक एमआईएस रक्तदान व ट्रांसफ्यूजन सेवाओं से जुड़ी सूचनाओं तथा रक्त की उपलब्धता, मान्यता, भंडारण व अन्य तरह के आंकड़ों को सुनिश्चित करेगा।  तपेदिक कार्यक्रम में 500 कैटरेज आधारित न्यूक्लिक एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्ट (सीबीनैट) मशीनों को शामिल किया गया है। सीबीनैट मशीन माइक्रबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस का पता लगाने में परिवर्तनकारी है। काला-जार को वर्ष 2017 तथा लम्फेटिक फिलेरिसिस को 2020 तक जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गय है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल व उत्तर प्रदेश के 625 प्रखंडों में से 502 में इस खत्म किया जा चुका है।

          भारत सरकार ने नई स्वास्थ्य बीमा योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) लाने का प्रस्ताव किया है जिसमें गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को 1.0 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर दिया जाना है। 60 साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसमें 30,000 रुपये की राशि अतिरिक्त होगी। जैव चिकित्सा उपकरण प्रबंधन व रखरखाव की प्रक्रिया चलाई गई। यह प्रक्रिया 29 राज्यों में हुई जिसके परिणामस्वरूप 29,115 स्वास्थ्य सुविधाओं में 7,56,750 उपकरणों की पहचान हुई, जिनका मूल्य लगभग 4564 रुपये करोड़ रुपए आंका जा रहा है। ऐसे अप्रयुक्त उपकरणों की लागत लगभग 1015.74 करोड़ रुपये है। उपकरणों के लिए चिकित्सा उपकरण रखरखाव को आउटसोर्स करने के लिए राज्य सरकारो को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।