दक्षिण कोरिया का शरीरिक शिक्षा व योग को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोग
राष्ट्रीय योग ओलंपियाड नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने राज्यों के विजेता बच्चों को पुरस्कृत किया।
इस अवसर पर एस व्यास विश्वविद्यालय बेंगलुरु के कुलपति डॉ. एच. आर. नागेन्द्र सम्मानित अतिथि थे। चार श्रेणियों में पुरस्कार दिया गया। अपर प्राइमरी (लड़कियां)- गुजरात टीम को स्वर्ण पदक, दिल्ली को रजत पदक और हरियाणा का कांस्य पदक प्राप्त हुआ। अपर प्राइमरी (लड़के)- दिल्ली की टीम को स्वर्ण पदक मिला।
गुजरात टीम को रजत और तमिलनाडु की टीम को कांस्य पदक मिला। माध्यमिक (लड़कियां)- स्वर्ण पदक दिल्ली की टीम को प्राप्त हुआ। गुजरात टीम को रजत पदक और कर्नाटक की टीम को कांस्य पदक हासिल हुआ। माध्यमिक (लड़के)- हरियाणा की टीम को स्वर्ण पदक मिला।
दिल्ली की टीम को रजत और मणिपुर की टीम को कांस्य पदक मिला। समारोह में भाग लेने वाले 450 विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा अभिभावकों को संबोधित करते हुए कुशवाहा ने कहा कि बच्चों की वर्तमान अवस्था खुशी और आनंद की है, और उन्हें किसी तरह का तानव नहीं है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि बच्चों का जीवन हमेशा तनाव मुक्त रहेगा। उन्होंने कहा, मस्तिष्क और शरीर से तभी स्वस्थ्य रहा जा सकता है जब शरीर सक्रिय हो और मन शांत हो। इन दोनों के बीच संतुलन को ही योग कहते हैं। यदि इस नाजुक उम्र में योग की आधारशिला रखी जाती है तो योग की आदत जीवन भर बनी रहेगी। उन्होंने पदक विजेता बच्चों को बधाई दी।
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने सुझाव दिया कि इस ओलंपियाड को स्पर्धा नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि योग को दैनिक जीवन के हिस्से के रूप में अपनाना चाहिए। कुशवाहा ने कहा कि योग से व्यक्ति की सोच सकारात्मक होती है और परिणामस्वरूप बेहतर तरीके से ध्यान केन्द्रित होता है। जीवन में किसी भी तरह की सफलता के लिए ध्यान केन्द्रित होना आवश्यक है।
कुशवाहा ने कहा कि पहले योग को संतो से जुड़ा हुआ समझा जाता था, लेकिन अब योग को इस तरह प्रोत्साहित किया जा रहा है कि प्रत्येक बच्चा इसके प्रति जागरुक हो रहा है। इसे न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपनाया जा रहा है। डॉ. एच.आर. नागेन्द्र ने कहा कि योग व्यक्ति को स्वस्थ रखता है। राष्ट्रीय योग ओलंपियाड में देश के 143 जिलों के 20,000 बच्चों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि योग अभ्यास करते समय बच्चों को तनाव महसूस नहीं करना चाहिए। बच्चों के चेहरे पर खुशी होनी चाहिए और मैंने 40-50 बच्चों को ही मुस्कुराते हुए देखा। पिरामिड आकार बनाते समय लड़कियों का ध्यान अधिक केन्द्रित रहा और लड़को की शरीरिक शक्ति का प्रदर्शन हुआ। उन्होंने कहा कि बच्चे बहुत नाजुक उम्र में मादक पदार्थों के शिकार हो जाते है और उनका जीवन बर्बाद हो जाता है लेकिन योग से मादक पदार्थों की लत से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है।
डॉ. नागेन्द्र ने बच्चों में योग के प्रति जागरुकता लाने के लिए एनसीईआरटी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों का झुकाव मादक द्रवों की ओर नहीं होगा और बच्चें ध्यान केन्द्रित कर सकेंगे और स्वस्थ जीवन जी सकेंगे। एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. ऋषिकेश सेनापति ने बताया कि एनसीईआरटी ने दक्षिण कोरिया की एकेडमी ऑफ कोरिया के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। यह सहमति ज्ञापन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शरीरिक शिक्षा और योग को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोग के बारे में है।