Thursday, 22 June 2017

विश्‍व में तीसरा सबसे बड़ा वन्‍य जीव सामग्रियों का व्‍यापार

         केन्‍द्रीय पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि विश्‍व में तीसरा सबसे बड़ा व्‍यापार वन्‍य जीव सामग्रियों का है। 

       उन्‍होंने कहा कि जानवर के अंगों का अवैध व्‍यापार तथा अन्‍य वन्‍य जीव अपराध को गंभीरता से लिया जा रहा है और ऐसे अपराधियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। नोएडा में ‘वाइल्‍ड नेट’ ऑरेशन में वन्‍य जीव सामग्रियों की जब्‍ती की सराहना करते हुए डॉ. वर्धन ने इसे समय पर चलाया गया ऑपरेशन बताया। 
          उन्‍होंने बताया कि यह ऑपरेशन वेबसाइटों की निगरानी पर आधारित था। जब्‍त सामग्रियों में 25 हथा जोड़ी, 25 सियार सिंघी, 24 सी फैन, 1 ट्रोचर्स 6 घोंघा, 91 काली कौड़ी, 130 सफेद कौड़ी, 27 समुद्री घोघे शामिल हैं, ये सभी वन्‍य जीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्‍न अनुसूचियों के अंतर्गत संरक्षित हैं। 
         इसके अतिरिक्‍त 18 लाख से अधिक नकद राशि भी जब्‍त की गई। नोएडा में एक व्‍यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। उत्‍तर प्रदेश के नोएडा वन डिविजन के अंतर्गत दादरी रेंज द्वारा वन्‍य जीव (संरक्षण) कानून 1972 के सेक्‍शन 9,39,48 ए, 49बी तथा 50 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। 
        पर्यावरण मंत्री ने बताया कि मध्‍य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा में सफल ऑपरेशन के बाद नोएडा में ऑपरेशन चलाया गया। ऐसे ऑपरेशन संकेत देते हैं कि वन्‍य जीव अपराध से लडने के प्रति मोदी सरकार गंभीर है।

 

आंध्र प्रदेश में बिजली के लिए विश्व बैंक से 240 मिलियन डॉलर का ऋण

         भारत ने आंध्र प्रदेश में 24-7 बिजली आपूर्ति परियोजना के सह वित्तपोषण के लिए विश्व बैंक से 240 मिलियन डॉलर और एआईआईबी से 160 मिलियन डॉलर (60:40 का अनुपात) का ऋण समझौता किया।

       भारत की ओर से वित्‍त मंत्रालय में आर्थिक मामले विभाग के संयुक्‍त सचिव (एमआई) राजकुमार और विश्व बैंक की तरफ से विश्व बैंक (भारत) के संचालन प्रबंधक और प्रभारी निदेशक, हिसम अब्दो व एआईआईबी की ओर से उपाध्यक्ष एवं मुख्य निवेश अधिकारी डीजे पांडियन ने ऋण समझौते पत्र पर हस्‍ताक्षर किये। 
          कार्यक्रम कार्यान्वयन इकाई समझौते पत्र पर आंध्र प्रदेश सरकार के ऊर्जा विभाग के सलाहकार (ऊर्जा) के रंगनाथम तथा विश्‍व बैंक की तरफ से निदेशक (भारत) और एआईआईबी की तरफ से उपाध्यक्ष और मुख्य निवेश अधिकारी ने हस्‍ताक्षर किये। 
          परियोजना की कुल लागत 570 मिलियन डॉलर है, जिसमें से 240 मिलियन डॉलर विश्‍व बैंक (आईबीआरडी) और 160 मिलियन डॉलर एआईआईबी प्रदान करेगा। शेष राशि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्‍ध कराई जाएगी। 
        परियोजना का उद्देश्‍य उपभोक्‍ताओं के लिए विद्युत आपूर्ति को बेहतर बनाना है तथा आंध्र प्रदेश के कुछ चुने हुए क्षेत्रों में बिजली वितरण में संचालन कार्य कुशलता और प्रणाली के प्रति विश्‍वसनीयता बढ़ाना है।

दक्षिण कोरिया का शरीरिक शिक्षा व योग को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोग

        राष्ट्रीय योग ओलंपियाड नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने राज्यों के विजेता बच्चों को पुरस्कृत किया।

     इस अवसर पर एस व्यास विश्वविद्यालय बेंगलुरु के कुलपति डॉ. एच. आर. नागेन्द्र सम्मानित अतिथि थे। चार श्रेणियों में पुरस्कार दिया गया। अपर प्राइमरी (लड़कियां)- गुजरात टीम को स्वर्ण पदक, दिल्ली को रजत पदक और हरियाणा का कांस्य पदक प्राप्त हुआ। अपर प्राइमरी (लड़के)- दिल्ली की टीम को स्वर्ण पदक मिला।
         गुजरात टीम को रजत और तमिलनाडु की टीम को कांस्य पदक मिला। माध्यमिक (लड़कियां)- स्वर्ण पदक दिल्ली की टीम को प्राप्त हुआ। गुजरात टीम को रजत पदक और कर्नाटक की टीम को कांस्य पदक हासिल हुआ। माध्यमिक (लड़के)- हरियाणा की टीम को स्वर्ण पदक मिला।
           दिल्ली की टीम को रजत और मणिपुर की टीम को कांस्य पदक मिला। समारोह में भाग लेने वाले 450 विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा अभिभावकों को संबोधित करते हुए कुशवाहा ने कहा कि बच्चों की वर्तमान अवस्था खुशी और आनंद की है, और उन्हें किसी तरह का तानव नहीं है। 
         उन्होंने आशा व्यक्त की कि बच्चों का जीवन हमेशा तनाव मुक्त रहेगा। उन्होंने कहा, मस्तिष्क और शरीर से तभी स्वस्थ्य रहा जा सकता है जब शरीर सक्रिय हो और मन शांत हो। इन दोनों के बीच संतुलन को ही योग कहते हैं। यदि इस नाजुक उम्र में योग की आधारशिला रखी जाती है तो योग की आदत जीवन भर बनी रहेगी। उन्होंने पदक विजेता बच्चों को बधाई दी। 
            मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने सुझाव दिया कि इस ओलंपियाड को स्पर्धा नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि योग को दैनिक जीवन के हिस्से के रूप में अपनाना चाहिए। कुशवाहा ने कहा कि योग से व्यक्ति की सोच सकारात्मक होती है और परिणामस्वरूप बेहतर तरीके से ध्यान केन्द्रित होता है। जीवन में किसी भी तरह की सफलता के लिए ध्यान केन्द्रित होना आवश्यक है। 
          कुशवाहा ने कहा कि पहले योग को संतो से जुड़ा हुआ समझा जाता था, लेकिन अब योग को इस तरह प्रोत्साहित किया जा रहा है कि प्रत्येक बच्चा इसके प्रति जागरुक हो रहा है। इसे न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपनाया जा रहा है। डॉ. एच.आर. नागेन्द्र ने कहा कि योग व्यक्ति को स्वस्थ रखता है। राष्ट्रीय योग ओलंपियाड में देश के 143 जिलों के 20,000 बच्चों ने भाग लिया।
            उन्होंने कहा कि योग अभ्यास करते समय बच्चों को तनाव महसूस नहीं करना चाहिए। बच्चों के चेहरे पर खुशी होनी चाहिए और मैंने 40-50 बच्चों को ही मुस्कुराते हुए देखा। पिरामिड आकार बनाते समय लड़कियों का ध्यान अधिक केन्द्रित रहा और लड़को की शरीरिक शक्ति का प्रदर्शन हुआ। उन्होंने कहा कि बच्चे बहुत नाजुक उम्र में मादक पदार्थों के शिकार हो जाते है और उनका जीवन बर्बाद हो जाता है लेकिन योग से मादक पदार्थों की लत से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है।
            डॉ. नागेन्द्र ने बच्चों में योग के प्रति जागरुकता लाने के लिए एनसीईआरटी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों का झुकाव मादक द्रवों की ओर नहीं होगा और बच्चें ध्यान केन्द्रित कर सकेंगे और स्वस्थ जीवन जी सकेंगे। एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. ऋषिकेश सेनापति ने बताया कि एनसीईआरटी ने दक्षिण कोरिया की एकेडमी ऑफ कोरिया के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। यह सहमति ज्ञापन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शरीरिक शिक्षा और योग को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोग के बारे में है।  

भारत के 68 शहरों में कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक-ई-कचरा व बायो मेडिकल शामिल

        पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार ने वर्ष 2016 में कचरा प्रबंधन नियमों के अंतर्गत 6 नियम अधिसूचित किए थे, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम-2016, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम-2016, बायो मेडिकल कचरा प्रबंधन नियम-2016, निर्माण और विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम-2016, खतरनाक और अन्य कचरा (प्रबंधन और सीमापार परिवहन) नियम-2016, ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2016। स्वच्छ भारत मिशन के हिस्से के रूप में शहरी विकास मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने उपरोक्त नियमों के बारे में जागरूकता पैदा करने और उनके कार्यान्वयन पहलुओं के बारे में चुने हुए 68 शहरों में शहरी स्थानीय निकायों-शहरी एजेंसियों तथा विभिन्न सम्बद्ध पक्षों में राष्ट्रीय क्षमता निर्माण के लिए एक परियोजना प्रारंभ की है। 

     भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के साथ मिल कर इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम समन्वयक के रूप में काम कर रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कचरा प्रबंधन संबंधी इन 6 नियमों के लिए क्षमता निर्माण परियोजना हेतु राष्ट्रीय कार्यान्वयन एजेंसी है। 
         क्षमता निर्माण परियोजना का उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों और सम्बद्ध पक्षों के बीच संस्थागत क्षमता सुदृढ़ बनाना है, ताकि विभिन्न प्रकार के और विभिन्न श्रेणियों के कचरे का संग्रहण, उपचार, निपटान और सक्षम प्रबंधन किया जा सके। 

       इसी श्रृंखला में प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने और देश के विभिन्न भागों के कचरा प्रबंधन विशेषज्ञों को इस कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में शामिल करने के लिए 29-30 जून, 2017 के दौरान एनपीसी कांफ्रेंस हाल में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

 

उत्तर प्रदेश में शहरी निर्धनों के लिए 70,784 और मकान, 3528 करोड़ का निवेश

          आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में शहरी निर्धनों के लिए 3,528 करोड़ रुपये के निवेश से 70,784 अतिरिक्त सस्ते मकानों के निर्माण की मंजूरी प्रदान की है। 

      इस परियोजना के लिए केंद्रीय सहायता के रूप में 1,062 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने के तत्काल बाद योगी आदित्य नाथ और शहरी आवास और गरीबी उपशमन मंत्री एम. वेंकैया नायडू के बीच बैठक के बाद राज्य सरकार ने 145 शहरों में सस्ते मकान बनाने का प्रस्ताव भेजा था, जिसका अनुमोदन कर दिया गया है। 
     इससे पहले उत्तर प्रदेश के लिए राजीव आवास योजना के अंतर्गत 41,254 मकानों के निर्माण की मंजूरी दी गई थी। यह योजना अब पीएमएवाई (शहरी) के अंतर्गत समाहित कर दी गई है। अद्यतन अनुमोदन को मिलाकर उत्तर प्रदेश में इस कार्यक्रम के अंतर्गत 1,12,738 मकान बनाए जाएंगे। 
       कर्नाटक के 93 शहरों और कस्बों के लिए 56,281 अतिरिक्त सस्ते मकानों के निर्माण की मंजूरी दी गई है। 844 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता सहित इस परियोजना पर कुल 2,950 करोड़ रुपये की लागत आएगी। 
          पहली दफा अंडमान निकोबार के लिए पोर्ट ब्लेयर में 609 मकानों के निर्माण के लिए 9 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता सहित कुल 54 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है।अद्यतन अनुमोदनों को मिलाकर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंर्गत सस्ते मकानों के निर्माण के लिए कुल लागत बढ कर 20,95,718 करोड़ रुपये हो गई है।