Monday, 22 May 2017

64 लाख नए बीपीएल परिवारों को गैस कनेक्शन

           देश में सब्सिडी छोड़ने की पहल का डंका खूब गूंजा। 1.05 करोड़ परिवारों ने स्वैच्छिक रूप से एलपीजी सब्सिडी को त्याग दिया, ताकि सब्सिडी का लाभ ज़रूरतमंद उपभोक्ताओं को मिल सके। 

        वित्त वर्ष 2015-16 में करीब 64 लाख नए बीपीएल परिवारों को गैस कनेक्शन जारी किए गए। वाराणसी को दो वर्षों में पाइप लाइन के जरिए रसोई गैस मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी गंगा ऊर्जा योजना की शुरुआत की गई। यह योजना वाराणसी के बाद, झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लोगों की ज़रूरतों को भी पूरा करेगी। यह योजना पांच राज्यों के 40 ज़िलों और 26 गांवों की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करेगी। 

            यह योजना तीन बड़े उर्वरक संयंत्रों के पुनरुत्थान के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी। यह 20 से अधिक शहरों में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देगी और 7 शहरों में गैस नेटवर्क का विकास करने में मदद करेगी, जिसके परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में नौकरियों की संभावना बढ़ेगी। पिछले कुछ सालों के दौरान देश में रिफाइनिंग क्षमता में काफी अधिक वृद्धि हुई है। पारादीप रिफाइनरी के चालू से वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान रिफाइनिंग क्षमता में 15 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) की क्षमता का विस्तार हुआ है। इस वृद्धि के साथ, अब रिफाइनिंग क्षमता 230.066 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष पर पहुंच गई है।

            सरकार ने घरेलू स्तर पर मांग को पूरा करने के लिए देश में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई नीतिगत पहल और प्रशासनिक उपाय किए हैं। सरकार ने विभिन्न चरणों के अंतर्गत 01 अप्रैल 2017 से देशभर में बीएस-4 ऑटो ईंधन के कार्यान्वयन को अधिसूचित कर दिया है। यह निर्णय लिया गया है कि देश बीएस -4 से सीधे बीएस -6 ईंधन के मानकों पर पहुंचेगा और बीएस -6 मानकों को 1 अप्रैल, 2020 से लागू कर दिया जाएगा। इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) ने विशाखापट्टनम, मैंगलोर और पादुर में तीन स्थानों पर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की भंडारण क्षमता के साथ स्ट्रेटेजिक क्रूड ऑयल के भंडारण का निर्माण किया है। 

             सरकार ने राष्ट्रीय तेल कम्पनियां ओएनजीसी और ओआईएल द्वारा किए गए 69 हाइड्रोकार्बन खोजों से मुनाफा कमाने और धन अर्जित करने के लिए खोजी लघु क्षेत्र नीति को भी मंजूरी दी है। ये वही परियोजनाएं हैं, जहां पृथक स्थान, भंडारण का छोटा आकार, उच्च विकास लागत, तकनीकी बाधाएं, वित्तीय व्यवस्था आदि विभिन्न कारणों से कई वर्षों से धन अर्जित नहीं किया जा सका है। यह गुवाहाटी, बोंगाइगांव और नुमालिगढ़ रिफाइनरी के विस्तार, नुमालिगढ़ में बायो-रिफाइनरी की स्थापना और राज्य में प्राकृतिक गैस, पीओएल एवं एलपीजी पाइपलाइन के नेटवर्क को विकसित करने का प्रस्ताव करता है। हाइड्रोकार्बन विजन डॉक्यूमेंट 2030, पूर्वोत्तर में तेल और गैस क्षेत्र में वर्ष 2030 तक 1.3 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव करता है।

प्‍याज के मूल्‍यों में गिरावट

           केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह के संज्ञान में लाया गया है कि ओड़िशा राज्‍य में प्‍याज के मूल्‍यों में भारी गिरावट आई है। मण्‍डियों में प्‍याज 3-4 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है, जिससे कि किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

           सिंह ने कहा कि ओड़िशा राज्‍य सरकार ने आज तक प्‍याज की खरीद करने के लिए बाजार हस्‍तक्षेप योजना के तहत कोई भी प्रस्‍ताव भारत सरकार के समक्ष प्रस्‍तुत नहीं किया है। सिंह ने जानकारी दी कि ऐसी स्‍थिति में किसानों को वाजिब मूल्‍य दिलाने के लिए भारत सरकार की एक योजना है जिसका नाम है बाजार हस्‍तक्षेप योजना । इस योजना के तहत अगर सामान्‍य वर्ष की तुलना में पैदावार में 10ऽ से ज्‍यादा की वृद्धि होती है या बाजार मूल्‍य में 10ऽ से ज्‍यादा गिरावट आती है तब राज्‍य सरकार के प्रस्‍ताव पर भारत सरकार उन जिन्‍सों का जिनके लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य का निर्धारण नहीं होता, उनको क्रय करने का आदेश देती है। 

          इस योजना के तहत राज्‍य और केन्‍द्र सरकार नुकसान का बोझा बराबर (50:50) वहन करते हैं। सिंह ने यह भी बताया कि इस योजना के तहत पिछले एक साल में कर्नाटक राज्‍य में सुपाड़ी, आंध्र एवं तेलंगाना में मिर्चा, आंध्र और तमिलनाडु में ऑयलपाम और उत्‍तर प्रदेश में आलू क्रय करने का अनुमोदन दिया गया है। हाल ही में उत्‍तर प्रदेश में इस योजना के तहत आलू की खरीद से बाजार मूल्‍य में भी वृद्धि हुई और किसानों को पैदावार लागत प्राप्‍त हुई है। 

             सिंह ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ओड़िशा राज्‍य सरकार किसानों को वाजिब दाम दिलाने में होने वाले वित्‍तीय बोझ को वहन नहीं करना चाहती। इसी कारण से शायद आज तक प्‍याज की खरीद करने के लिए बाजार हस्‍तक्षेप योजना के तहत कोई भी प्रस्‍ताव भारत सरकार के समक्ष राज्‍य सरकार ने प्रस्‍तुत नहीं किया है।

डॉ. हर्षवर्धन अब पर्यावरण मंत्री भी

            विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने यहां आईपी भवन में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री का पदभार ग्रहण किया। केन्‍द्रीय पर्यावरण राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे का आकस्मिक निधन हो गया था। 

             डॉ. हर्षवर्धन ने आईपी भवन के परिसर में स्‍वर्गीय अनिल माधव दवे की याद में एक पौधा लगाकर अपने कार्य की शुरूआत की। उन्‍होंने कहा कि वे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन का मं‍त्री पद पाकर अनुगृहीत हैं तथा स्‍वर्गीय अनिल माधव दवे को याद करते हुए कहा कि वे नदी संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति समर्पित थे। दवे पर्यावरण का संरक्षण बच्‍चों के लिए करना चाहते थे। इसमें बच्‍चों के प्रति उनका स्‍नेह दिखाई पड़ता है। दवे जी ने देश की नदियों, वनों तथा पारितंत्र के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किया। पर्यावरण के प्रति उनका यह समर्पण उन्‍हें एक महान पर्यावरणविद बनाता है। 

                  डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अनिल माधव दवे कहा करते थे, ‘यदि मैं कर सकता हूं तो हम सभी कर सकते हैं।’ डॉ. हर्षवर्धन ने मंत्रालय के सचिव व अन्‍य अधिकारियों के साथ प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया। पिछले तीन वर्षों में मंत्रालय द्वारा किये गये कार्यों की प्रगति तथा प्रमुख कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई। उन्‍होंने माना कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के मामले में कई जटिल समस्‍याएं हैं, जिसके लिए समन्वित व ठोस प्रयासों की आवश्‍यकता है। 

                  उन्‍होंने इस तथ्‍य पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में सरकार का प्रयास है कि पर्यावरण की चिंताओं को विकास की नीतियों और कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, ताकि भारत के सतत विकास और प्रगति हेतु दोनों में संतुलन स्‍थापित किया जा सके। इसके लिए यह आवश्‍यक है कि मंत्रालय आधुनिक तकनीक को अंगीकृत कर मंजूरी देने की प्रक्रिया में तेजी लाए तथा नीतिगत प्रयासों को विकसित करे ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही तथा समय पर कार्य-निष्‍पादन में तेजी आ सके।
 

               मंत्री ने जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता संरक्षण, प्रदूषण की रोकथाम, चार ‘आर’  (रिड्यूस, रिकवर, रियूज, रिसाइकल) की अवधारणा के अंतर्गत अपशिष्‍ट प्रबंधन, जैव-पर्यटन, वानिकी तथा राज्‍यों को सीएएमपीए कोष प्रदान किये जाने पर विशेष ध्‍यान देने की बात कही। 

                  उन्‍होंने इस तथ्‍य को रेखांकित करते हुए कहा कि जल तथा वायु प्रदूषण पूरे देश के लिए विशेषकर दिल्‍ली तथा राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र हेतु चिंता का विषय है। मंत्रालय प्राथमिकता के साथ इस समस्‍या के निदान का प्रयास करेगा। उन्‍होंने आगे कहा कि जलवायु परिवर्तन तथा पेरिस समझौते हेतु भारत की प्रतिबद्धता मंत्रालय के समक्ष अन्‍य चुनौतियां हैं।

भारत की कृषि वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत

             केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के निर्देशन में तीन वर्ष में कृषि और किसानों की बेहतरी के लिए जो सतत प्रयास किए गये हैं उनके उत्साहजनक व सकारात्मक परिणाम  दिखने लगे हैं।  मोदी सरकार किसानों के कल्याण के लिए जिस मनोयोग से काम में जुटी है, इससे किसानों के जीवन में गुणात्मक सुधार आ रहा है।

             राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य दिया है जिसे हासिल करने के लिए कृषि मंत्रालय लगातार काम कर रहा है। सिंह ने ये बात मोदी सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कही। राधा मोहन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने देश के विकास के लिए इन तीन वर्षों में देश के सामने नई कार्यविधि, पारदर्शी कार्यशैली के नए प्रतिमान रचे हैं। सरकार ने समयबद्ध तरीके से प्रधानमंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन में किसान कल्याण की योजनाओं के पूर्ण क्रियान्वयन के लक्ष्यों को मिशन मोड में परिवर्तित किया है। सुशासन के नये आयामों, नवाचारों एवं सुधारवादी दृष्टिकोण से एक आधुनिक और भविष्योन्मुख भारत की नींव हमारी सरकार ने रखी है। सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के मन में देश की कृषि उन्नति के लिए की गई  नई पहलों के प्रति जागरूकता लाने में सफल हुई है। तीन वर्ष के कार्यकाल में किसानों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के जीवन स्तर में गुणात्मक परिवर्तन लाने का सतत् एवं सशक्त प्रयास किया है। 

                 केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान मंत्रालय द्वारा किया जाने वाला खर्च अधिकतर बजटीय प्रावधानों से कम रहता था। उदाहरण के लिए वर्ष 2011-12 में बजटीय प्रावधान रु 24,526 करोड़ था जबकि खर्च मात्र रु 23,290 करोड़ रहा। इसी तरह 2012-13 में बजटीय में 28,284 करोड़ था जबकि खर्च मात्र 24,630 करोड़ हुआ। वर्ष 2013-14 में बजटीय प्रावधान रु. 30,224 करोड़ था जबकि खर्च रु. 25,896 करोड़ हुआ। वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार में किसान हित में मंत्रालय द्वारा खर्च बजटीय प्रावधान से ज्यादा किया जा रहा है। उदाहरणस्वरूप 2016-17 में जहां बजटीय प्रावधान रु 45035 करोड़ था, वह संशोधित बजटीय आवंटन में यह बढकर रु 57503 करोड़ किया गया है।

                   मोदी सरकार द्वारा कृषि एवं किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए अधिक बजटीय आवंटन किया है। उदाहरणस्वरूप यूपीए सरकार के चार वर्ष यथा 2010-11 से 2013-14 के बजट में कुल रु 1,04,337 करोड़ का बजटीय प्रावधान कृषि क्षेत्र के लिए किया गया था, वहीं वर्तमान सरकार द्वारा 2014-15 से 2017-18 तक कृषि क्षेत्र को कुल 1,64,415 करोड़ रुपये आवंटित किए गये हैं जो कि 57.58 प्रतिशत अधिक है। राधा मोहन सिंह ने आगे कहा कि विगत तीन वर्षों के प्रारम्भिक दो वर्षों में कम मानसून में भी किसानों को सुरक्षा एवं विश्वास का संबल सरकार द्वारा दिया गया है। 

            स्वॅयल हैल्थ कार्ड का वितरण, सिंचाई सुविधाओं में विस्तार, कम लागत की जैविक खेती, राष्ट्रीय कृषि बाजार, बागवानी विकास, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन, दुग्ध, मछली एवं अंडा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार पर विशेष बल दिया गया है। सहकारी संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण में भी ज्यादा निवेश किया गया है। दलहन-तिलहन में आत्म-निर्भरता की ओर बढ़ने के लिए कई नई पहलें तीन वर्षों में प्रारम्भ की गयी हैं। सबसे कम प्रीमियम एवं विभिन्न जोखिमों को शामिल कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों को अभूतपूर्व सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है।

                 देश के सभी जिलों के लिए आकस्मिक योजना उपलब्ध कराए गए तथा सूखा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मिलने वाली राहत मानकों को बढ़ाकर सरकार ने अर्थव्यवस्था में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है। कहा कि मोदी सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में उन्नति एवं किसान कल्याण की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के द्वारा किसान सशक्तिकरण के लिए सतत् पहल एवं प्रयास के परिणाम दिखने लगे हैं। मोदी सरकार की कृषि में उपलब्धियां हैं। वर्ष 2016-17 में खादायान्न उत्पादन के पिछले सारे रिकार्ड टूट गये हैं। इस वर्ष  कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों की वृद्धि दर लगभग 4.4 प्रतिशत रही है।

·         2016-17 के दौरान तृतीय अग्रिम अनुमान के अनुसार देश में कुल खाद्यान्‍न का उत्‍पादन लगभग 273.38 मीलियन टन अनुमानित है जो वर्ष 2015-16 की तुलना में 8.67ऽ अधिक है। यहां यह भी उल्‍लेखनीय है कि खाद्यान्‍न का यह उत्‍पादन पिछले 5 वर्षों के औसत उत्‍पादन से भी 6.37ऽ अधिक है।·  2016-17 के दौरान दलहनों का कुल उत्‍पादन 22.40 मिलियन टन अनुमानित है जो अब तक का रिकार्ड उत्‍पादन होगा जो पिछले वर्ष 2015-16 से 37ऽ अधिक है। 16.05.2017 तक 725 लाख स्वॅयल हैल्थ कार्ड किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। नमूनों की जांच हो रही है। कार्ड छपाई का काम चल रहा है। आगामी तीन महीनों में शेष बचे किसानों का कार्ड उपलब्‍ध करा दिया जाएगा।

            वर्ष 2011-14 के दौरान जैविक खेती के तहत संचयी क्षेत्र 7.23 लाख हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2014-17 के दौरान 20 लाख हेक्टेयर हो गया है। अब तक राष्ट्रीय कृषि बाजार से 417 मंडियां जुड़ चुकी हैँ। 15.05.2017 तक 20,000 करोड़ रूपये के 84 लाख टन कृषि उत्‍पाद का कारोबार हो चुका है। 15.05.2017 तक 46 लाख किसानों, 90 हजार व्‍यापारियों और 46,411 कमीशन एजेंटों को प्‍लेटफार्म पर पंजीकृत किया जा चुका है। दूध का उत्पादन 2011-14 के दौरान 398.01 मिलियन टन हुआ था, जो कि 2014-17 के दौरान बढ़कर 465.5 मिलियन टन हो गया है। तीन वर्षों के उत्पादन विकास की वृद्धि दर 16.9ऽ रही है। वर्ष 2011-14 के दौरान अंडा उत्पादन 210.93 बिलियन था जो कि 2014-17 में बढ़कर 248.73 बिलियन हो गया। 

              तीन वर्षों के उत्पादन विकास की वृद्धि दर 17.92 ऽ रही है। वर्ष 2011-14 के दौरान मछली का उत्पादन 272.88 लाख टन था, जो कि 2014-17 के दौरान बढ़कर 327.74 लाख टन हो गया है। तीन वर्षों के उत्पादन विकास की वृद्धि दर 20.1ऽ रही है। वर्ष 2011-14 तक 223 किसान उत्पादक संगठन बने, जबकि 2014-17 तक 383 बनाये गये। वर्ष 2007-14 तक 6.7 लाख ज्वॉइंट लाइबिलीटी ग्रुप बनाकर 7 वर्ष में 6630 करोड़ राशि दी गई जबकि 2014-17 तीन वर्षों में 15.85 लाख समूह बनाकर 16,268 करोड़ की राशि दी गई। 

            मधुमक्खी पालन में 2011-14 तक 5.94 करोड़ खर्च किए गये जबकि 2014-17 तक 18.14 करोड़ खर्च किए गये। 205 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यू.पी.ए. के पांच वर्षों में राज्‍यों को राज्‍य आपदा अनुक्रिया कोष में 33,580 करोड रूपये स्‍वीकृत किए गये हैं। मोदी सरकार ने 5 वर्षों  के लिए 61,260 करोड रूपये आवंटित किए है। यू.पी.ए. सरकार के 2011-12 से 2013-14 के तीन साल के बीच राष्‍ट्रीय आपदा अनुक्रिया कोष में राज्‍यों को 9,099 करोड रूपये दिए गये। मोदी सरकार ने 2014-15 से 2016-17 के तीन वर्षों में राज्‍यों को 29,194 करोड दिये गये हैं, जबकि अभी इसके अलावा कर्नाटक, केरल एवं पुद्दूचेरी विचाराधीन है। 

            प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्‍तर्गत वर्ष 2016-17 में 8 लाख 40 हजार हेक्‍टेयर का रिकार्ड कवरेज सूक्ष्‍म सिंचाई के अधीन लाया गया है। राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजना अन्‍तर्गत सिर्फ खरीफ सीजन में 2011-14 के तीन साल में 6 करोड किसानों ने बीमा कराया। जिसमें 77 लाख गैर ऋणी किसान थे। जबकि 2014-17 के बीच 3 वर्ष में सिर्फ खरीफ सीजन में 9 करोड 47 लाख किसानों ने बीमा कराया जिसमें 2 करोड 61 लाख गैर ऋणी किसान है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आकर्षण के कारण खरीफ फसल में गैर ऋणी किसानों की संख्‍या में 238.96ऽ की वृद्धि हुई है तथा इसी तीन वर्ष में इसके पूर्व के तीन वर्षों की तुलना में रवी फसलों में भी गैर ऋणी किसानों की संख्या में 128.50ऽ की वृद्धि हुई है।

 ‘दी क्वें स्टा फोर ए वर्ल्डी विदआउट हंगर’ का लोकार्पण

                  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विख्‍यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम एस स्‍वामीनाथन के व्‍यक्तित्‍व पर लिखी गई पुस्‍तक शृंखला के दो भागों का लोकापर्ण किया। इस श्रृंखला का शीर्षक – एम एस स्‍वामीनाथन : दी क्‍वेंस्‍ट फोर ए वर्ल्‍ड विदआउट हंगर’ है। 

           इस अवसर पर अनेक केंद्रीय मंत्री और अन्‍य गणमान्‍य उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए प्रधानमंत्री ने उन क्षणों को याद दिलाया कि गुजरात के मुख्‍यमंत्री के कार्यकाल के रूप में उन्‍होंने प्रोफेसर स्‍वामीनाथन के साथ सलाह मशविरा करके मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड पहल की शुरूआत की थी। प्रोफेसर स्‍वामीनाथन की लगन और वचनबद्धता की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने उन्‍हें एक ‘किसान वैज्ञानिक’ बताया – मात्र ‘कृषि वैज्ञानिक’ की अपेक्षा वे किसानों के वैज्ञानिक थे। 

              प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रोफेसर स्‍वामीनाथन की विशेषताओं को जमीनी हकीकतों को यथार्थ धरातल से जोड़ती हैं। उन्‍होंने प्रोफेसर स्‍वामीनाथन की सादगी को भी सराहा। कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र की सफलता को पूर्वी भारत में विस्‍तार दिए जाने की आवश्‍यकता है और वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी गत उपायों को इसे यथार्थ रूप दिया जाना अपेक्षित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक पद्यतियों तथा पारंपरिक कृषि ज्ञान के सम्मिश्रण से सर्वोत्‍तम परिणाम प्राप्‍त किए जा सकते हैं। 

            कतिपय राज्‍यों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के प्रत्‍येक जिले की एक अपनी ‘कृषि पहचान,’ होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इससे विपणन को बढ़ावा और औद्योगिक-क्‍लस्‍टरों की तर्ज पर कृषि-क्‍लस्‍टर का विकास करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लक्ष्‍य का उल्‍लेख किया और बताया कि इसके लिए अनेक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र में लक्ष्‍य परक दृष्टिकोण अपनाये जाने की जरूरत है। उन्‍होंने इस बात संतोष प्रकट किया कि पिछली कृषि बीमा योजनाओं की अपेक्षा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को कृषक समुदाय बड़े पैमाने पर अंगीकार कर रहा है। 

         उन्‍होंने कहा कि इससे किसानों की जोखिम उठाने की सामर्थ्‍य बढ़ाने में मदद मिलेगी और नवाचार को ‘प्रयोगशाला से खेत’ तक पहुंचाने की प्रक्रिया आसान बनेगी। डॉ. एम एस स्‍वामीनाथन ने प्रधानमंत्री के उदगारों के प्रति धन्‍यवाद ज्ञापित किया और उनके दृष्टिकोण को सराहा। उन्‍होंने प्रौद्योगिकी और लोक नीति के बीच सामंजस्‍य के महत्‍व पर जोर डाला।

28 रेलवे स्‍टशनों पर नि:शुल्‍क वाई-फाई

            रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने यहां कुडाल रेलवे स्‍टेशन से कोंकण रेलवे के 28 रेलवे स्‍टेशनों पर वाई-फाई सुविधा का उद्घाटन किया। भारतीय रेलवे ने कोंकण रेलवे के 28 रेलवे स्‍टेशनों पर 24 घंटे नि:शुल्‍क टू एमबीपीएस पीयर टू पीयर वाई-फाई इंटरनेट बैंडविड्थ सुविधा के प्रावधान के लिए सिस्कोन-जॉयस्टर के साथ अनुबंध किया है। 

          सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप मैसर्स सिस्कोन-जॉयस्टर महाराष्ट्र राज्य में पुणे और मुम्बई के शैक्षणिक संस्थानों में जॉयस्पॉट ब्रांड वाई-फाई उपलब्‍ध करा रहे हैं। अब कोंकण मार्ग के ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्‍क वाई-फाई बैंडविड्थ उपलब्‍ध कराने के लिए अपनी नैगमिक सामाजिक जिम्‍मेदारी (सीएसआर) गतिविधि के एक हिस्‍से के रूप में अब यह जिम्‍मेदारी उठा रहे हैं। जॉयस्पॉट नि:शुल्क वाई-फाई मोबाइल ऐप असीमित अपलोड के साथ 2 एमबीपीएस हाई स्पीड वायरलेस इंटरनेट उपलब्‍ध कराता है। नि:शुल्‍क वाई-फाई इंटरनेट बैंडविड्थ को कोंकण रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध कराया गया है।

            कोलाड, माणगांव, वीर, करंजड़ी, विनयेर, दिवाणख़ावती, खेड, अंजनी, चिपलुन, कामथे, सावर्दा, अरावली रोड, संगमेश्वर, उक्शी, भोके, रत्नागिरि, निवासी, अडावाली, विलावेड़, राजापुर रोड, वैभववाडी रोड, नंदगाव रोड, कंकावली, सिंधुदुर्ग, कुडाल, ज़ाराप, सावंतवाड़ी रोड, मदुरे रेलवे स्‍टेशन पर 24 घंटे नि:शुल्‍क वाई-फाई है। पहले चरण में कोलाड से मदुरे के बीच 28 स्टेशनों पर असीमित नि:शुल्‍क वाई-फाई सुविधा 2 एमपीएसकी पीयर टू पीयर स्‍पीड के साथ उपलब्‍ध कराई जाएगी। यह प्रणाली बड़े स्टेशनों पर लगभग 300 उपयोगकर्ताओं और छोटे स्टेशनों पर लगभग 100 उपयोगकर्ताओं को यह सुविधा उपलब्‍ध कराएगी। 

          यह सुविधा यात्री जनता और पर्यटकों को आवश्‍यक जानकारी प्राप्‍त करने में मदद करेगी और यात्री रेलवे स्‍टेशनों पर रेल की प्रतीक्षा करते हुए अपने समय का लाभकारी उपयोग कर सकेंगे। कोंकण रेलवे सदैव अपने यात्रियों को बेहतर यात्री सुविधाएं उपलब्‍ध करवाने में विश्‍वास करती है ताकि उनकी यात्रा आरामदेय रहे।