Thursday, 13 July 2017

पंजाब में देश का पहला प्रौद्योगिकी व नवाचार केंद्र

          वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का औद्योगिक नीति संवर्धन विभाग देश का पहला प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र (टीआईएससी) स्थापित करने के लिए नई दिल्ली में पंजाब राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के साथ संस्थागत समझौते पर हस्ताक्षर किया। 

      यह केंद्र पंजाब के पेटेंट सूचना केंद्र में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के टीआईएससी कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। टीआईएससी का उद्देश्य गतिशील, जीवंत और संतुलित बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली को सक्रिय करना है ताकि सृजनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहन मिले और सामाजिक-आर्थिक तथा सांस्कृत विकास हो सके। 
      टीआईसीएस द्वारा निम्न सेवाएं दी जाती हैं। ऑनलाइन पेटेंट तथा गैर पेटेंट (वैज्ञानिक और तकनीकी) संसाधनों तथा आईपी संबंधित प्रकाशनों तक पहुंच। प्रौद्योगिकीय सूचना की खोज और वापसी में सहायता। डाटाबेस खोज प्रशिक्षण।
          मांग आधारित खोजों (नवीन अत्याधुनिक) प्रौद्योगिकी निगरानी तथा प्रतिस्पर्धा। औद्योगिक संपदा कानूनों, प्रबंधन तथा रणनीति, तकनीकी वाणिज्यिकरण तथा विपरण के बारे में बुनियादी सूचना। आईपीआर संवर्धन और प्रबंधन सेल (सीआईपीएएम) को टीआईएससी राष्ट्रीय नेटवर्क के लिए फोकल प्वाइंट बनाया गया है। 
       नेशनल फोकल प्वाइंट के रूप में सीआईपीएएम संभावित मेजबान संस्थानों की पहचान करेगा, उनकी क्षमताओं का मूल्यांकन करेगा और टीआईएससी कार्यक्रम में शामिल होने में समर्थन देगा। पूरे विश्व में 500 से अधिक टीआईएससी कार्यरत हैं। भारत में इसकी स्थापना से संस्थानों को विश्व नेटवर्क से जुड़ने में मदद मिलेगी।

दुनिया में हर चौथा स्नातक भारत के उच्च शिक्षा प्रणाली से होगा

        राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय राष्ट्र को समर्पित किया।

     इस अवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय राष्ट्र को समर्पित करते समय मुझे अत्याधिक प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय नए विश्वविद्यालयों में से एक है, जिसमें भविष्य मे स्वयं को सर्वश्रेष्ठ संगठन मे परिवर्तित करने की क्षमता है। 
       इस विश्वविद्यालय की स्थापना देश के सबसे सम्मानित उद्योगपति और हीरो समूह के संस्थापक बृज मोहन मुंजाल के जीवन को सम्मानित करने के लिए की गई है। श्री मुंजाल स्वयं कभी कॉलेज नहीं गए, लेकिन उन्होंने कई लोगों को स्वयं के बारे में सोचने के बारे में सिखाया।
         मुंजाल जी ने अपने अनुभवो से कौशल में निपुणता और प्रायोगिक होने की महत्व के बारे में सीखा। उनका विश्वास था कि जीवन में शिक्षा और सीखना विश्वविद्यालय की कक्षा के भीतर और बाहर जारी रह सकता है। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि बदलती हुई वैश्विक परिस्थितियों में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता महिला और पुरूष के पेशे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
        अब से 10 वर्षों के भीतर 14 करोड़ युवा कॉलेज जाने वाले आयु वर्ग में सम्मिलित होगें। दुनिया में हर चौथा स्नातक भारत के उच्च शिक्षा प्रणाली से होगा। इस प्रकार के प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में केवल योग्य कुशल और प्रशिक्षित पेशेवर ही सफलता प्राप्त करेंगे। 
        उच्च शैक्षिण संस्थानों की जिम्मेदारी है वे ऐसे विद्यार्थी प्रशिक्षित करे जो वैश्विक स्तर पर सक्षम होने के साथ साथ स्थानीय सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता के प्रति संवेदनशील हों।