Friday, 12 January 2018

राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में अब 108 वर्ष पुरानी मोनो रेल

    नई दिल्‍ली। भारतीय रेलवे की समृद्ध धरोहर को अब दर्शकों के लिए राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में खोल दिया गया है। 

   संग्रहालय में आकर्षण का प्रमुख केन्द्र 108 वर्ष पुरानी मोनो रेल है जिसे पटियाला के महाराजा, स्वर्गीय श्री भूपिन्द्र सिंह इस्तेमाल किया करते थे। हाल में राष्ट्रीय रेल संग्रहालय ने इस ट्रेन को प्रत्येक गुरुवार आगुंतकों के लिए शुरू करने की पहल की। 
   स्टीम इंजन से चलने वाली यह मोनो रेल दुनिया में अपनी तरह की अनोखी है। इस मोनो रेल में यात्रा एक निराला अनुभव है। इसके अलावा आगुंतक संग्रहालय में अन्य अद्वितीय प्रदर्शनीयों का आनंद ले सकते है।
   भारत की रेल धरोहर का केन्द्र, राष्ट्रीय रेल संग्रहालय सभी की रेलवे में दिलचस्पी पैदा करने वाला और आकर्षण का केन्द्र है। इस संग्रहालय का 1 फरवरी, 1977 को औपचारिक रूप से उद्घाटन किया गया था, यह एशिया में अपने किस्म का एक अनूठा संग्रहालय है, जिसमें इतिहास, विरासत, रोमांस, अतीत की झलक, आनंद, आमोद-प्रमोद और मनोरंजन का एक ही स्थान पर दिलचस्प संग्रह है। 
   चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में दस एकड़ क्षेत्र में फैले इस संग्रहालय में एक गैलरी है जो विभिन्न प्रदर्शनियों, मॉडलों, रिकॉर्डों, फोटो, कुल-चिन्हों, दस्तावेजों आदि को समर्पित है। 100 से अधिक वास्ताविक आकार की प्रदर्शित वस्तुएं प्राचीन युग के वैभव को दर्शाती है।
    यह संग्रहालय दर्शकों को रेलवे के इतिहास और उसकी धरोहर की रोमांचक यात्रा में ले जाती है और देश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति में उसके योगदान को दिखाती है।

हुनरहाट एक भरोसेमंद ब्रांड बन गया

      नई दिल्‍ली। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा देशभर में आयोजित किया जाने वाला हुनरहाट एक भरोसेमंद ब्रांड बन गया है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टैंड अप इंडिया’ और ‘स्टार्ट अप इंडिया’ की प्रतिबद्धता को पूरा करता है।

    आज यहां हुनरहाट पर दिए गए एक बयान में श्री नकवी ने कहा कि हुनरहाट देशभर के उस्ताद दस्तकारों और शिल्पकारों की प्रतिभा के मद्देनजर बाजार और अवसर प्रदान करने का एक प्रभावशाली अभियान साबित हो रहा है।
   श्री नकवी ने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान हुनरहाट ने 3 लाख से अधिक दस्तकारों और उनके साथ जुड़े अन्य व्यक्तियों को रोजगार और रोजगार अवसर देने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
     उन्होंने कहा कि नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले और बाबा खड़क सिंह मार्ग, पुद्दुचेरी तथा मुम्बई में पांच हुनरहाटों का आयोजन किया गया था। उन्होंने बताया कि इस्लाम जिमखाना, मैरीन लाइन्स, मुम्बई में 4-10 जनवरी, 2018 को पांचवा हुनरहाट आयोजित किया गया था, जो बहुत सफल रहा।
     इसमें 5 लाख से अधिक लोग पहुंचे और उन्होंने देशभर से आए उस्ताद दस्तकारों तथा खानपान विशेषज्ञों का उत्साहवर्धन किया। आगंतुकों ने इन दस्तकारों द्वारा हस्तनिर्मित उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीददारी की। दस्तकारों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से बड़े पैमाने पर आर्डर भी मिले। मंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय देश के विभिन्न भागों में ‘उस्ताद’ योजना के तहत हुनरहाट का आयोजन कर रहा है। 
     हुनरहाट हजारों उस्ताद दस्तकारों, शिल्पकारों और खानपान विशेषज्ञों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में रोजगार तथा रोजगार अवसर प्रदान करने के अभियान में बहुत सफल रहा है। मुम्बई में आयोजित होने वाले हुनरहाट में 130 से अधिक दस्तकारों, शिल्पकारों और खानपान विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बड़ी तादाद में महिला दस्तकारों ने भी अपने कौशल का प्रदर्शन किया।
     दस्तकारों ने अपने शानदार हस्तशिल्पों और हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया और उनकी बिक्री की। इन उत्पादों में असम के बेंत, बांस और पटसन उत्पाद; भागलपुर का टसर, गीजा, मटका रेशम; राजस्थान एवं तेलंगाना के पारंपरिक आभूषण, लाख की चूड़िया और आभूषण; पश्चिम बंगाल के कान्था उत्पाद; वाराणसी की कशीदाकारी; लखनवी चिकन कारीगरी, उत्तर प्रदेश की जरी जरदोजी; खुर्जा के चीनी मिट्टी के उत्पाद; पूर्वोत्तर के काले पत्थर के पात्र, सूखे फूल और पारंपरिक हस्तशिल्प; कश्मीर की कालीन और कागजी उत्पाद; गुजरात के अजरख प्रिंट, मुतवा, कच्छ की कढ़ाई और बंधेज; मध्यप्रदेश के बातिक/बाग/माहेश्वरी; बाड़मेर की एप्लीक और अजरख; मोरादाबाद के चमड़ा उत्पाद, बर्तन; तेलंगाना की कलमकारी इत्यादि उत्पाद शामिल थे। 
     पहली बार पारसी गारा कढ़ाई, लकड़ी पर खत्ताती और रोगन-कला के दस्तकारों ने भी शिरकत की। इसके अलावा मुम्बई के हुनरहाट के आगंतुकों ने कश्मीरी वाजवान, बंगाली मिठाई, नगालैंड के व्यंजन, केरल के कटहल, बिरयानी एवं कबाबों, राजस्थानी थाली, गुजराती थाली और कई अन्य व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
    श्री नकवी ने कहा कि छठवें हुनरहाट का आयोजन फरवरी में बाबा खड़क सिंह मार्ग पर किया जाएगा। आने वाले दिनों में हुनरहाट का आयोजन जयपुर, चंडीगढ़, कोलकाता, लखनऊ, भोपाल और अन्य स्थानों पर भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘हम देश के प्रत्येक राज्य में हुनर-हब स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जहां वर्तमान आवश्यकता के मद्देनजर दस्तकारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।’

एक्‍ट ईस्‍ट नीति केवल आर्थिक अवसरों का सहभाजन नहीं, बल्कि सपनों का एकीकरण

     बिहार। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजगीर, बिहार में धर्म-धम्‍म पर चौथे अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। 

   इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि इस सम्‍मेलन का समय बेहद उपयुक्‍त है। हम आसियान-भारत संवाद साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। जनवरी का महीना भारत-आसियान संबंधों का उत्‍सव है। 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस पर आयोजित समारोह में सभी 10 आसियान देशों के नेता मुख्‍य अतिथि होंगे।
    आज यह सम्‍मेलन भारत और आसियान की मित्रता तथा सहभागी मूल्‍यों के साथ-साथ दोनों उप-महाद्वीपों और दक्षिण-पूर्व एशिया की आध्‍यात्मिक परम्‍परा और ज्ञान का पालन करने का साक्ष्‍य है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि यह सम्‍मेलन धर्म और धम्‍म की विविध परम्‍पराओं की जड़ों और समानताओं में समझ को बढ़ाने का एक प्रयास है। हम उन्‍हें अनेक नामों से जानते हैं, लेकिन ये हमें एक ही सच्‍चाई की तरफ ले जाते हैं। ये किसी एक मार्ग के बजाय अनेक मार्गों को महत्‍व देते हैं, जो हमें एक ही लक्ष्‍य तक ले जाता है।
   राष्‍ट्रपति ने कहा कि इस शब्‍द के लोकप्रिय होने से काफी पहले, बौद्ध धर्म वैश्‍वीकरण के शुरूआती रूप और हमारे महाद्वीप में आपसी संपर्क का आधार था। इसने विचारों में अनेकता की स्थिति और विविधता को बढ़ावा दिया। इसने अनेक विचारों और उदार अभिव्‍यक्ति को स्‍थान दिया। इसने व्‍यक्ति के जीवन, मानवीय साझेदारियों और सामाजिक तथा आर्थिक लेन-देन में नैतिकता पर जोर दिया। इसने प्रकृति और पर्यावरण के साथ सौहार्द से कार्य करने और सहयोग करने तथा जीने का सिद्धांत सिखाया। इसने ऐसे व्‍यापार और व्‍यवसाय संपर्कों के लिए प्रेरित किया, जो नेकनीयत, पारदर्शी और सहयोगी समुदायों के आपसी लाभ के लिए हो।
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि यह अनुमान लगाया गया है कि दुनिया की आधे से अधिक वर्तमान आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है, जिन पर इतिहास का प्रभाव है और अनेक मामलों में भगवान बुद्ध द्वारा प्राप्‍त निर्वाण से अभी तक प्रभावित हैं। यह ऐसा धागा है, जिसने हम सभी को एकसूत्र में पिरो कर रखा है। इस दूरदर्शिता को हमें 21वीं सदी में प्रेरित करना चाहिए और वास्‍तव में इसी को एशिया की रोशनी कहा गया है। भारत की एक्‍ट ईस्‍ट नीति को इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए। 
   राष्‍ट्रपति ने कहा कि यह कूटनीतिक पहल से कहीं अधिक है। इसे केवल अधिक व्‍यापार और निवेश के रूप में नहीं देखा गया है। निश्चित रूप से ये सभी अपेक्षाएं भारत और हमारे सभी सहयोगी देशों की समृद्धि और भलाई के लिए काफी महत्‍वपूर्ण है। फिर भी एक्‍ट ईस्‍ट नीति का उद्देश्‍य केवल आर्थिक अवसरों को साझा करना नहीं है, बल्कि यह भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में रह रहे करोड़ों लोगों के सपनों और उम्‍मीदों का एकीकरण है।
     एशिया के अन्‍य भागों में जहां धर्म-धम्‍म के पद चिन्‍ह हैं, हमारे अतीत का एक साझा स्रोत है। यह सम्‍मेलन और नया नालंदा विश्‍वविद्यालय उस विचारधारा का प्रतीक हैं, जिसका हम अनुकरण करते हैं। हमारे आर्थिक और कूटनीतिक प्रयासों का एक स्रोत होना चाहिए।