Thursday, 21 September 2017

हुनर हाट में 16 राज्यों से दस्तकार, शिल्पकार, कारीगर भाग लेंगे

     नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि अल्पसंख्यक तबकों के हुनर के उस्तादों को मौका-मार्किट मुहैय्या कराने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय हुनर हाट का आयोजन कला-संस्कृति के प्रमुख केंद्र पुड्डुचेरी में 24 से 30 सितम्बर 2017 तक कर रहा है।

    नकवी ने आज कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा अभी तक आयोजित हुनर हाट बहुत सफल एवं दस्तकारों, शिल्पकारों और परंपरागत कारीगरों के लिए उत्साहवर्धक रहे हैं। पुड्डुचेरी में लगने वाले हुनर हाट का उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी करेंगे। 
       अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा हुनर हाट का आयोजन पुड्डुचेरी के क्राफ्ट बाजार, गांधी थीडल बीच, गोर्बट एवन्यू, में किया जा रहा है। इस हुनर हाट में 16 राज्यों से दस्तकार, शिल्पकार, कारीगर भाग लेंगे। इन दस्तकारों-शिल्पकारों दवारा अनेक तरह के पारंपरिक हैंडी क्राफ्टस, हैंडलूम एवं दुर्लभ हस्त निर्मित वस्तुओं का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जायेगा।
      इस हुनर हाट में हैदराबादी मोती, रोट आयरन, लकड़ी पर नक्काशी, हस्त निर्मित गहने, कांथा एंमब्रोइड्ररी बैग, हैंडलूम चादर, सीरामिक/क्ले आइटम्स, काले पत्थर के बर्तन, हाथ की कशीदाकारी, चिकन वर्कस, चमड़े की वस्तुएं, हस्त निर्मित पेंटिंगस, ज़री बैग, वालॅ हैंगिंग, मुटावा हैंडीक्राफ्ट, अज़रक प्रिंट, कापर/ब्रास/एल्युमिनियम हैंडीक्राफ्ट, जूट/केन/बैम्बू के सामान, संगमरमर निर्मित वस्तुएं, लकड़ी एवं चन्दन की कलाकृतियां, पारम्परिक प्रिंटेड कपड़े, दरी-कारपेंट, बाग़/बाटिक प्रिंट, रैपराउंड प्लाजो, लददाख एंड कश्मीरी हस्त निर्मित सामान, सी-ओरनामेंटस, अटटर, एपलीक, बैंगल्स, शीशे का सामान, माहेश्वरी साड़ी इत्यादि प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। 
       इस हुनर हाट में पारम्परिक स्टाल तैयार किये जा रहे हैं जहाँ लोग देश के अलग-अलग हिस्सों के विभिन्न प्रकार के लजीज़ व्यंजनों का भी आनंद ले सकेंगे। हुनर हाट में विभिन्न राज्यो से आए व्यंजन विशेषज्ञों द्वारा तैयार किये गए राजस्थानी व्यनजन, मराठी व्यजनं, गुजराती थाली, पंजाबी थाली, मालाबार फूड, मुगलई व्यंजन, मटन/काकोरी कबाब, आंध्र प्रदेश के व्यंजन, हलवा, घेवर, बंगाली मिठाईयां, केरल एवं विभिन्न राज्यों के परंपरागत आचार, मुरब्बे, चटनी इत्यादि उपलब्ध रहेंगे। 
       पुडुचेरी में आयोजित किये जा रहे हुनर हाट में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, जम्मू एंड कश्मीर, झारखण्ड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पुड्डुचेरी एवं उत्तराखंड आदि राज्यों से हुनर के उस्ताद भाग ले रहे हैं। अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा इससे पूर्व भी विभिन्न स्थानों पर हुनर हाट का आयोजन किया गया।
      हाल ही में हुनर हाट का आयोजन नई दिल्ली के क्नॉट प्लेस के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर किया गया था। इस हुनर हाट में 26 लाख से भी ज्यादा लोग आए जिनमे देश ही नहीं बल्कि विदेश के लोग भी शामिल थे। लोगों ने दस्तकारों-शिल्पकारों के सामान की बड़े पैमाने पर खरीद ही नहीं की बल्कि इन्हें बड़ी संख्या में देश-विदेश से आर्डर मिले।
      जिससे दस्तकारों, शिल्पकारों और परंपरागत कारीगरों को उनके हुनर की विरासत को आगे बढ़ने में प्रोत्साहन मिला। आने वाले समय में हुनर हाट का आयोजन मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, बंगलुरु, लखनऊ, इलाहाबाद, रांची, गुवाहाटी, जयपुर, भोपाल आदि स्थानों पर भी किया जायेगा जिससे कि देश के हर कोने के दस्तकारों, शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जा सके।

 

भारतीय सेना से अनुशासन की सीख

     नई दिल्ली। सदभावना अभियान के प्रतिभागी जम्‍मू कश्‍मीर की गुरेज घाटी युवाओं के एक दल ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से राष्‍ट्रपति भवन में मुलाकात की। 

   युवाओं का स्‍वागत करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि युवा वर्ग जम्‍मू कश्‍मीर का भविष्‍य है और राज्‍य के विकास में अपनी भूमिका अदा करना उनकी जिम्‍मेदारी है। उन्‍होंने कहा कि देश की सरकारों ने राज्‍य के लोगों के कल्‍याण के लिए कई कार्य किए हैं। उन्‍होंने युवाओं से भारतीय सेना के अनुशासन से सीख लेने को कहा। 
       उन्‍होंने सद्भावना पहल के लिए सेना को बधाई दी और इस कार्यक्रम की सफलता की कामना की। भारतीय सेना की 109 इंफेंट्री ब्रिगेड द्वारा सद्भावना यात्रा का आयोजन किया गया था जिसका उद्देश्‍य युवाओं में विश्‍वास और राष्‍ट्रीय सद्भाव की भावना पैदा करना है। इस यात्रा में ये युवा श्रीनगर, दिल्‍ली, लेंसडाउन, ऋषिकेश और देहरादून का दौरा कर रहे हैं।

अर्थव्यवस्था में एक शिक्षित लड़की का योगदान महत्वपूर्ण

     नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आज जीसस और मैरी कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन के अवसर पर मुझे बहुत खुशी हो रही है।

   इस संस्थान ने हमारे देश और दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया है। पिछले पांच दशकों से इसने लड़कियों और युवा महिलाओं को शिक्षित किया है और मुझे यह कहना चाहिए कि इसने उन्हें क्षमता हासिल कराने और समाज अर्थव्यवस्था में योगदान देने और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का एक हिस्सा बनने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के उद्यम में हम सभी शामिल हैं। 
      यह केवल सरकार तक ही सीमित नहीं है इसके लिए निजी संस्थानों, धार्मिक और जनसाधरण और व्यक्तिगत रूप से हम सबको चाहे हम कुछ भी काम करते हों इसमें भागीदारी करने की जरूरत है। ऐसे व्यापक और समृद्ध विविधता वाले देश में राष्ट्र निर्माण की प्रकृति के विभिन्न कार्यों की जरूरत है।
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मुझे यह उल्लेख करना है कि ईसाई समुदाय ने, जिसका इतिहास भारत में 2000 साल पुराना है, हमारी साझा संस्कृति में बहुत योगदान दिया है और शिक्षा के क्षेत्र में स्वयं के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका बनाई है। इस जैसे मिशनरी संस्थान छात्रवृत्ति, समर्पित शिक्षण और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रतीक बन गये हैं। अपने स्वरूप में सभी धर्म हम से लगातार शिक्षा गृहण करने, विकास करने, ज्ञान प्राप्त करने और बुद्धि प्राप्त करने का अनुरोध करते हैं। ईसाई धर्म में जोन के अनुसार अध्याय 8 पद 12 में जीसस इस प्रकार कहते हैं-मैं दुनिया का प्रकाश हूं जो मेरा अनुसरण करता है वह अधंकार में नहीं चलता है बल्कि उसके जीवन में प्रकाश होगा। 
       राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि इस भावना की गूंज, उपनिषद के एक यादगार श्लोक में सुनाई देती है, असतो मा सद्पमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मुझे झूठ से सच्चाई की और आगे ले जाएं, अंधेरे से प्रकाश की और ले जाएं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि यह ज्ञान के लिए एक रूपक के रूप में "प्रकाश" और हमारे मन में जागरूकता के लिए शिक्षा के पवित्र कार्य से जोड़ सकता है।
      चाहे हमारा किसी भी धर्म में विश्वास हो और हमारी कोई भी पहचान हो शिक्षा का कार्य वास्तव में भगवान का कार्य है और मैं इस अच्छे काम को करने के लिए आज यहां जीसस और मैरी कॉलेज में इस समुदाय की सराहना करना चाहता हूं। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं है बल्कि यह तो एक शुरुआती बिंदु है। वास्तव में वे लोग शिक्षित नहीं हैं जो डिग्री प्राप्त करते हैं बल्कि वे लोग शिक्षित हैं जो उन डिग्री का उपयोग करके हमारे समाज में राष्ट्र निर्माता बन जाते हैं। 
      राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छा इंसान पैदा करना है। यह न केवल राष्ट्र बल्कि पूरी मानवता के लिए एक महान सेवा हो सकती है अगर आप अच्छे मानव हैं तो आप अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ में विश्वास करेंगे। चाहे आप कहीं भी स्थापित हों। उदाहरण के लिए अगर आप एक अध्यापक हैं तो आपको श्रेष्ठ टीचर ही बनना होगा।
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि लड़कियों की शिक्षा जितना हम महसूस करते हैं उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक शिक्षित लड़की अर्थव्यवस्था और कार्य में योगदान करती है वह यह भी सुनिश्चित करती है कि उसके परिवार के अन्य बच्चों के साथ-साथ जिस परिवार में उसकी शादी होती है वह भी शिक्षित हो। लड़की की शिक्षा के द्वारा अगली पीढ़ी भी जिम्मेदार और शिक्षित बन जाती है।
     इस तरह लड़कियों की शिक्षा का सामाजिक प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि जीसस और मैरी कॉलेज दूसरों के लिए एक आदर्श है यह बहुत खुशी का मामला है कि इस कॉलेज ने स्वर्ण जयंती समारोह में पास के एनडीएमसी स्कूल को एक भागीदार बनाया है और स्कूल और इसके बच्चों के विकास में मदद की है। यह समाज को कुछ वापस देने का प्रशंसनीय उदाहरण है। अन्य कॉलेज भी इसे अपना सकते हैं। 
     राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मुझे यह भी बताया गया है कि जीसस और मैरी कॉलेज नियमित रूप से रक्त दान शिविरों का आयोजन करता है, जिसमें कर्मचारियों के सदस्य और छात्र उत्साह के साथ भाग लेते हैं। अभी हाल में रक्त दान शिविर का 14 सितंबर को आयोजन किया गया था। 
      इससे पहले दिन कॉलेज में अंग दान शिविर का आयोजन किया था जिसमें कई छात्रों ने पंजीकरण कराया है। मैं करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की इस भावना की प्रशंसा करता हूं। इस तरह के कार्य हमारे युवाजनों में हमारे विश्वास को मजबूत बनाते हैं। 
     राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत कई परिवर्तनों के बीच में है। हमारी सभ्यता बहुत पुरानी है लेकिन देश युवा है। 21 वीं सदी के पहले 50 वर्षों में दुनिया में हमारे देश में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी होगी। युवा आबादी की ऊर्जा का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है। शिक्षा इस प्रयास के लिए मौलिक है - जो शिक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता की पहुंच के लिए आह्वान करती है। 
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमें अपने उच्च शिक्षा प्रणाली को अपग्रेड करने की आवश्यकता है और यथा संभव बनाने की जरूरत है। हमारे शिक्षा का बुनियादी ढांचा पाठ्यक्रम और शिक्षण के तरीकों को 21 वीं सदी के संगत होना चाहिए। दिल्ली विश्वविद्यालय और 100 से भी अधिक विश्वविद्यालयों के विज़िटर के रूप में कुछ मुद्दे हैं जो मुझे चिंतित करते हैं आगे आने वाले दिनों में मैं अपने शैक्षिक समुदाय के साथ ऐसे विषयों पर सार्थक चर्चाओं की आशा करता हूं। मैं समझता हूं कि जीसस और मैरी कॉलेज के लिए यह समारोह महत्वपूर्ण हैं।

देश के विकास के लिए उद्योगों की स्‍थापना अत्‍यंत जरूरी

      नई दिल्ली। उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू सूक्ष्‍म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय द्वारा आयोजित किये गये राष्‍ट्रीय एससी-एसटी हब (एनएसएसएच) सम्‍मेलन में मुख्‍य अतिथि थे। इस अवसर पर उन्‍होंने राष्‍ट्रीय एससी-एसटी हब के लिए प्रथम रेडियो जिंगल भी जारी किया। 

   केन्‍द्रीय सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, केन्‍द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुआल ओराम, सूक्ष्‍म, लघु एवं मझोले उद्यम मंत्रालय में राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) गिरिराज सिंह और वित्‍त मंत्रालय में राज्‍य मंत्री शिव प्रताप शुक्‍ला भी इस अवसर पर उपस्थित थे। भारत के उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि देश में एससी (अनुसूचित जाति) एवं एसटी (अनुसूचित जनजाति) उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए संबंधित परितंत्र को मजबूत करने हेतु सामूहिक एवं समन्वित कदम उठाने की जरूरत है। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि देश तभी विकसित होगा जब समाज के वंचित एवं अल्‍प सुविधा प्राप्‍त तबकों का उन्‍नयन होगा। उन्‍होंने यह भी कहा कि देश के विकास के लिए हमें एकीकृत एवं बहुआयामी विकास एजेंडे की जरूरत है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारे देश के विकास के लिए उद्योगों की स्‍थापना अत्‍यंत जरूरी है और इससे बेरोजगारी की समस्‍या सुलझेगी तथा आमदनी बढ़ेगी। 
     उन्‍होंने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए उद्योग एवं कृषि दो महत्‍वपूर्ण कारक हैं। उपराष्‍ट्रपति ने आयोजित राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन, स्‍टैंड-अप, स्‍टार्ट-अप, इन्‍क्‍यूबेशन तथा नवाचार का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इन्‍हें नई गति प्रदान करने की जरूरत है। उन्‍होंने यह भी कहा कि मेक इन इंडिया, कौशल भारत, डिजिटल इंडिया एवं स्‍वच्‍छ भारत जैसे सभी कार्यक्रमों को प्रत्‍येक तबके तक पहुंचना चाहिए तथा प्रत्‍येक को इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि क्षमता निर्माण महत्‍वपूर्ण है, ऋणों की उपलब्‍धता अहम है और तकनीकी उन्‍नयन भी महत्‍वपूर्ण है। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि सूक्ष्‍म, लघु एवं मझोले उद्यम क्षेत्र (एमएसएमइ) भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की चार दीवारी है तथा कृषि के बाद सबसे बड़ा नियोक्‍ता है। उन्‍होंने यह भी कहा कि देश के सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) में भी यह क्षेत्र अहम योगदान दे रहा है। उन्‍होंने कहा कि जहां एक ओर मेक इन इंडिया के जरिए विनिर्माण क्षेत्र का योगदान वर्ष 2022 तक बढ़कर जीडीपी का 25 प्रतिशत हो जाने की परिकल्‍पना की गई है, वहीं दूसरी ओर इस लक्ष्‍य की प्राप्ति में एमएसएमई क्षेत्र से अहम भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाएगी। 
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि कौशल उन्‍नयन एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर विशेष ध्‍यान देने की जरूरत है ताकि एससी/एसटी उद्यमियों का समग्र विकास संभव हो सके। उन्‍होंने 2000 से ज्‍यादा उद्यमियों का कौशल बढ़ाने हेतु सेक्‍टर कौशल परिषदों के साथ सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर करने के लिए राष्‍ट्रीय एससी/एसटी हब का धन्‍यवाद किया। 
     उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय एससी/एसटी हब के उद्देश्यों को समर्थन देने में संगठनों और इन्‍क्‍यूबेटरों को महत्‍वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्‍होंने कहा कि प्रत्‍येक संगठन को अपने-अपने क्षेत्रों में क्षमता निर्माण और उद्यमियों का मार्ग दर्शन करने के लिए निश्चित तौर पर आवश्‍यक सहायता देनी चाहिए। वित्‍त मंत्रालय में राज्‍य मंत्री शिव प्रताप शुक्‍ला ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ समावेशिता के विचार की उत्पत्ति है। 
    उन्‍होंने एससी-एसटी समुदाय के बीच उद्यमिता सुनिश्चित करने के लिए अपने मंत्रालय की ओर से एमएसएमई मंत्रालय को पूर्ण सहयोग देने का भी वादा किया। जनजातीय कार्य मंत्री जुआल ओराम ने कहा कि वह इस बात से अत्‍यंत प्रसन्‍न हैं कि सरकार ने देश के एसटी समुदाय के उन्‍नयन के लिए एनएसएसएच जैसी अनोखी पहल की है। 
     सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि सभी एमएसएमई को बड़े उद्यमों से प्रतिस्‍पर्धा के कारण अपने उत्‍पादों के विपणन में विभिन्‍न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि सार्वजनिक खरीद नीति एक स्‍वागत योग्‍य कदम है। एमएसएमई मंत्रालय में राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) गिरिराज सिंह ने प्रत्‍येक व्‍यक्ति को उनकी मौजूदगी के लिए धन्‍यवाद कहा और इस बात का उल्‍लेख किया कि यदि एससी-एसटी उद्यमियों को 5,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिल सकें तो यह इस तरह के उद्यमियों के लिए काफी मददगार साबित होगा। 
          उन्‍होंने इस बात का उल्‍लेख किया कि जिस दिन रोजगार मांगने वाले रोजगार देने लगेंगे, उस दिन प्रत्‍येक व्‍यक्ति का सपना साकार हो जाएगा। एमएसएमई मंत्रालय में सचिव डॉ. अरुण कुमार पांडा ने इस बात पर रोशनी डाली कि यह कार्यक्रम संपर्क सुनिश्चित करने और इस तरह प्रत्‍येक व्‍यक्ति को कनेक्‍ट करने तथा हर व्‍यक्ति को एक साझा प्‍लेटफॉर्म पर लाने का माध्‍यम है। इस सम्‍मेलन से उदयोग संगठनों एवं इन्‍क्‍यूबेटरों की विभिन्‍न अंतर्दृष्टि सामने आई जिससे सार्वजनिक खरीद नीति के अधिदेश को साकार करने के मार्ग में मौजूद कमी को समझने में मदद मिली।