Thursday, 8 June 2017

कौशल विकास से भारतीय युवाओं को रोजगार से ज्‍यादा अवसर मिलेंगें

राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिशन के विशेष सत्र को संबोधित किया। राष्‍ट्रपति भवन में इस कार्यक्रम का आयोजन एआईएमए की हीरक जयंती के उपलक्ष्‍य में किया गया। 

राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि देश में उद्यमियता को प्रोत्‍साहित करने के लिए प्रबंध शिक्षा की अति आवश्‍यकता है। हमारी कामकाजी आबादी में लाखों युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने के लिए स्‍टार्टअप और छोटे व्‍यवसायों को आगे आना चाहिए। शायद अपनी जनसांख्यिकीय लाभांश के पूर्ण उपयोग का हमारे पास यही एक मात्र रास्‍ता हो सकता है। रोजगार के लिए युवाओं के कौशल विकास पर भी ध्‍यान देना होगा। उन्‍होंने उद्यमियता विकास कौशल और प्रबंधन के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए एक परिषद के गठन को लेकर एआईएमए की पहल की सराहना की। 
उन्‍होंने कहा कि कौशल विकास से भारतीय युवाओं को रोजगार से ज्‍यादा अवसर मिलेंगें और वे कई उद्यमों की स्‍थापना में सक्षम साबित हो सकेंगें। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत ने वर्ष 1957 के बाद उत्‍साहजनक प्रगति की। इसी वर्ष एआईएमए ने अपनी यात्रा शुरू की। एआईएमए ने अपनी स्‍थापना के समय से ही भारत में प्रबंधन संस्‍कृति और क्षमता के विकास में उत्‍कृष्‍ट योगदान दिया है। प्रबंधन में भारतीय प्रबंधक बेहतर माने जाने जाते हैं और उनकी अच्‍छी मांग हैं। 
उन्‍होंने प्रसन्‍नता जा‍हिर करते हुए कहा कि एआईएमए अपने दायित्‍वों का निर्वाह करने में ज्‍यादा से ज्‍यादा उत्‍साह दिखा रहा है और अपनी गतिविधियों का विस्‍तार भी कर रहा है। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि एआईएमए 60 वर्ष पहले अपनी स्‍थापना के समय से जिन विचारों, सिद्धांतों और दर्शन पर चल रहा है उनका भविष्‍य में भी पालन करता रहेगा। इस अवसर पर मौजूद विशिष्‍ठ अतिथियों में एआईएमए के अध्‍यक्ष और हीरो कॉर्पोरेट के चेयरमैन सुनील कांत मुंजाल, एआईएमए की महानिदेशक श्रीमती रेखा सेठी, एआईएमए की पूर्व अध्‍यक्ष एवं अपोलो हॉस्पिटल एंटरप्राइजेज लिमिटेड की उपाध्यक्ष श्रीमती प्रीथा रेड्डी शामिल थे।

गोबर एवं गांवों के जैविक कचरे को एक अच्‍छी गुणवत्‍ता वाली जैविक खाद में बदला

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय ने 16 मई से 31 मई,2017 तक स्‍वच्‍छता पखवाड़ा मनाया। इस दौरान मंत्रालय के परिसर में चलाए जाने वाले स्‍वच्‍छता अभियान से बाहर निकलकर कृषि मंडियों, मछली बाजारों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों के आसपास स्‍थित गांवों में जागरूकता कार्यक्रम एवं सफाई अभियान चलाया गया। 

स्‍वच्‍छता अभियान के संदेश का मीडिया के माध्‍यम से व्‍यापक प्रचार-प्रसार किया गया। स्‍वच्‍छता पखवाड़े के दौरान कुछ ऐसे महत्‍वपूर्ण विषयों पर विशेष बल दिया गया जिन्‍हें अनुकूल परिणाम प्राप्‍त करने के लिए पखवाड़े के बाद भी जारी रखा जाएगा। कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्‍याण विभाग ने किसानों को सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए स्‍वच्‍छता पखवाड़े का आयोजन किया। स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत गांवों को स्‍वच्‍छ रखने एवं किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए राष्‍ट्रीय जैविक खेती केंद्र (एनसीओएफ) द्वारा एक कचरा निपटान तकनीक (वेस्‍ट डी-कम्‍पोजर तकनीक) का विकास किया गया है जिसके द्वारा जानवरों के गोबर एवं गांवों के जैविक कचरे को बहुत कम लागत में एक अच्‍छी गुणवत्‍ता वाली जैविक खाद में बदला जा सकता है। 
पखवाड़े के दौरान एनसीओएफ द्वारा 142 गांवों/कृषि मंडियों में इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया। देश में इस तकनीक के बारे में जानकारी का प्रचार-प्रसार करने के लिए इस तकनीक के संबंध में विभिन्‍न भाषाओं में प्रकाशित होने वाले 80 समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किए गए। इसके अतिरिक्‍त वर्ष 2017-18 के दौरान कम्‍पोस्‍ट वेस्‍ट मैनेजमेंट प्‍लांट स्‍थापित करने के लिए आरकेवीवाई के तहत राज्‍यों को 36 करोड़ रु. की निधि एवं 250 ई-नेम एपीएमसी को 12.5 करोड़ रु. जारी करने का निर्णय भी लिया गया।
इसके अतिरिक्‍त इस विभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्‍न कार्यालयों में सामान्‍य स्‍वच्‍छता गतिविधियों के अलावा गहन सफाई अभियान चलाया गया। स्‍वच्‍छता पखवाड़ा पशुपालन, डेयरी एवं मत्‍स्‍य पालन विभाग के मुख्‍यालय तथा इस विभाग के संबद्ध, अधीनस्‍थ एवं स्‍वायत्‍तशासी संस्‍थानों/कार्यालयों में मनाया गया। पखवाड़े के दौरान 11 राज्‍यों के 20 मछली बाजारों में सफाई अभियान चलाया गया। इसके अलावा, एक स्‍वच्‍छता पदयात्रा निकालने के साथ-साथ 23 जागरूकता अभियान चलाए गए तथा मछली रखरखाव पर राज्‍य स्‍तर की 3 कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। स्‍वच्‍छता अभियानों में स्‍थानीय जनप्रतिनिधियों, मंत्रालयों और सरकारी अधिकारियों तथा आम लोगों की प्रतिभागिता भी सुनिश्‍चित की गई।

          नियमित सफाई कार्यों के अलावा क्षेत्रीय चारा केंद्र, हिसार द्वारा राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक विद्यालय, मिर्जापुर और हिसार के मिर्जापुर गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया। इसी प्रकार सेंट्रल हर्ड रजिस्‍ट्रेशन स्‍कूल, रोहतक के स्‍टाफ द्वारा सीसाना में स्‍थित अस्‍पताल परिसर में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस विभाग के अधीन प्रजनन सुधार संस्‍थानों ने विभिन्‍न फार्मों, राजकीय, कृषि और पशुपालन प्रबंधन कार्यों में लगे हुए कार्मिकों/कर्मचारियों के लिए जागरूकता सत्र जैसे कार्यकलाप भी किए गए। इसके अतिरिक्‍त पशुपालन स्‍वास्‍थ्‍य प्रभाग के अधीनस्‍थ संस्‍थानों के अधिकारियों ने अपने अधीनस्‍थ कार्मिकों को जैविक निपटान प्रणाली और स्‍वच्‍छ उर्जा उपयोग के बारे में जानकारी दी।

           विभाग में वर्ष 2017-18 के दौरान स्‍वच्‍छता कार्य योजना (एसएपी) के तहत स्‍वच्‍छता संबंधी बुनियादी कार्यकलापों यथा वर्मी कम्‍पोस्‍ट इकाइयों की स्‍थापना, जैव बायोगैस संयंत्रों को स्‍थापित करने, अपशिष्‍ट पुनर्चक्रण पर राज्‍य स्‍तर की कार्यशालाओं के आयोजन और स्‍लरी/वाश वाटर टैंकों आदि को स्‍थापित करने के लिए 5.32 करोड़ आबंटित किए गए हैं। स्‍वच्‍छता पखवाड़े के दौरान कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग/आईसीएआर के नई दिल्‍ली स्‍थित मुख्‍यालय, सभी 102 अनुसंधान संस्‍थान और 671 कृषि विज्ञान केंद्रों ने पखवाड़ा कार्यकलापों में सक्रिय भाग लेने के साथ-साथ व्‍यापक आधार पर सफाई अभियान चलाया। 

आईसीएआर के संस्‍थानों द्वारा कार्यशालाओं, संगोष्‍ठियों, जागरूकता शिविरों, रैलियों, नुक्‍कड़ नाटकों और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं (अर्थात स्‍वच्‍छ भारत – क्‍या स्‍वस्‍थ भारत ?, “स्‍वच्‍छता का महत्‍व”) का आयोजन किया गया। आईसीएआर संस्‍थानों और 671 केवीके के माध्‍यम से गोद लिए गए गांवों में जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। किसानों और ग्रामीण युवकों की सक्रिय प्रतिभागिता के साथ विभिन्‍न आईसीएआर संस्‍थानों और केवीके द्वारा 5200 से अधिक गांवों में स्‍वच्‍छता कार्यकलाप किए गए। 

इन कार्यकलापों के एक भाग के रूप में स्‍वच्‍छ कृषि प्रौद्योगिकियों, अभ्‍यासों और कृषि संबंधी व्‍यर्थ पदार्थों से आमदनी करने की 130 संबंधित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्‍साहित किया गया जिसमें जैव कम्‍पोस्‍ट, वर्मी कम्‍पोस्‍ट को तैयार करने, छाछ के अपेक्षित उपयोग, स्‍ट्रा संवर्धन, गंदे पानी का परिष्‍करण, कपास और मत्‍स्‍य से संबंधित व्‍यर्थ पदार्थों का उपयोग आदि शामिल हैं।

तटीय सामुदायिक विकास के क्षेत्र में चार सौ से अधिक परियोजनाओ की पहचान की गई

जहाजरानी मंत्रालय की मुख्य योजना सागरमाला संकल्पना और योजना से आगे बढ़कर वर्तमान में क्रियान्यन स्तर पर है। 

कार्यक्रम के तहत बंदरगाह आधुनिकीकरण और नवीन बंदरगाह विकास, संपर्क विस्तार,बंदहगाह से जुडा औद्योगीकरण और तटीय सामुदायिक विकास के क्षेत्र में चार सौ से अधिक परियोजनाओ की पहचान की गई है। सागरमला कार्यक्रम के अंतर्गत इस संबंध में हितधारको के बीच जागरूकता बढाने के लिए आगामी 6 से 8 माह की अवधि में मंत्रालय कार्यशालाओ की श्रृंखला का आयोजन करेगा। इस संबंध में प्रथम कार्यशाला सागरमाला योजना के क्रियान्वयन को त्वरित करना- राज्यो के साथ सम्बद्धता का आयोजन 09 जून,2017 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटाट सेंटर में किया जाएगा। 
 इस कार्यशाला का उद्देश्य सागरमाला कार्यक्रम के लिए जहाजरानी मंत्रालय, अन्य संबधित मंत्रालय और विभिन्न तटीय राज्यो के बीच गतिविधि का विस्तार करना है।
       कार्यशाला की अध्यक्षता जहाजरानी सचिव करेंगे और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत इसमें मुख्य भाषण देंगे। कार्यशाला में तटीय राज्यो के प्रधान सचिवो, बंदरगाहो के अध्यक्षो और संबधित मंत्रालयो के अधिकारियो के भाग लेने की आशा है।

भारत और इरान के बीच द्विपक्षीय समझौते को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और प्रतिभूति और विनिमय संगठन ( एसईओ), ईरान के बीच प्रतिभूति बाजारों से संबंधित मामले में आपसी सहयोग के लिए एक द्विपक्षीय समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है।

 इस समझौते से दोनों नियामको के बीच आर्थिक संबंधों और सहयोग को और अधिक बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसका लक्ष्य दोनों देशों में प्रतिभूति बाजारों के प्रभावकारी विकास के लिए स्थितियां तैयार करना है। इससे दोनों देशों के बीच सूचना साझा करने के नेटवर्क को मजबूत करने में भी सहयोग मिलेगा। इससे  सेबी और एसईओ, ईरान के विदेशी आपसी सहयोग और नियमन संबंधी क्रियाकलापों को बल मिलने की उम्मीद है। इस समझौते से सेबी और एसईओ, ईरान के बीच सूचना साझा करने के नेटवर्क को मजबूत करने में भी योगदान मिलने की संभावना है।