Friday, 2 June 2017

स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना मुख्य प्राथमिकता

             सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना हमारी मुख्य प्राथमिकता है। हालांकि, नई चुनौतियां यह मांग करती हैं कि हम नवाचार बनाएं और नए विचारों और नवाचारों को प्रोत्‍साहित करें तथा उनका फायदा उठाएं ताकि कोई भी व्‍यक्‍ति हमारी सेवाओं से वंचित न रहे।

     केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने यह बात यहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की 10वीं सामान्‍य समीक्षा मिशन (सीआरएम) रिपोर्ट के प्रसार के लिए आयोजित कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्‍गन सिंह कुलस्‍ते और श्रीमती अनुप्रिया पटेल भी उपस्थित थे। इस अवसर पर नड्डा ने कुष्ठ रोग, मलेरिया, कालाजार जैसे रोगों को नष्ट करने के लिए आवश्यक और मजबूत स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि मजबूत स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को समयबद्ध रूप से लागू करने और संरचित रोग उन्मूलन योजनाओं को विकसित करने की आवश्यकता है। 

            नड्डा ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की गुणवत्ता और स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल की सामग्री के मामले में काफी सुधार हुआ है। केवल संस्‍थागत वितरण में ही नहीं बल्‍कि बाह्य रोगियों और मरीजों के मामले में भी सेवा आपूर्ति सुधार हुआ है। नड्डा ने यह भी कहा कि पहुंच का विस्‍तार करने और लागत घटाने के लक्ष्‍यों की दिशा में पिछले तीन वर्षों के दौरान कई नई पहलों की शुरूआत की गई है,  क्योंकि मंत्रालय सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। राज्यों को पूरी मदद का आश्वासन देते हुए उन्‍होंने राज्‍यों से सेवाओं की आपूर्ति के लिए नवाचारी कार्यक्रम शुरू करने के लिए अपने प्रस्‍तावों के साथ आगे आने का आग्रह किया। 

             उन्‍होंने बताया कि साझा एनसीडी कार्यक्रम की सार्वभौमिक स्क्रीनिंग के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के हर व्‍यक्‍ति की पहले चरण में देश के 100 जिलों में जांच की जाएगी। धीरे-धीरे इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा और लगभग 50 करोड़ लोगों को इसके तहत लाया जाएगा ताकि समय पर किए गए प्रयास से देश में बीमारी के बोझ को कम किया जा सके। साझा संसाधन मिशन की सराहना करते हुए, नड्डा ने कहा कि यह एक विशिष्‍ट मिशन है, क्योंकि जिले और राज्य न केवल अपनी सर्वश्रेष्‍ठ प्रकिया का प्रदर्शनकरेंगे बल्‍कि अपनी चुनौतियों के बारे में भी आगे बढेंगे। मुझे विश्‍वास है कि इससे हमारा विश्‍वास मजबूत होगा कि सीआरएम निष्‍कर्ष मिशन के कार्यान्वयन करने के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य करते हैं। 

              प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्‍ते ने कहा कि एनएचएफ ने स्वास्थ्य देखभाल वितरण की मजबूत प्रणाली के कारण स्वास्थ्य निष्‍कर्षों और स्‍वास्‍थ्‍य संकेतकों को बढ़ावा दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लगातार राज्य और उप जिला स्तरों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुपम पटेल ने कहा कि सीआरएम एनएचएम की समीक्षा के लिए सीआरएम एक महत्वपूर्ण तंत्र है क्योंकि यह प्रक्रियाओं और गुणवत्ता की वास्‍तविक समीक्षा के लिए गहन बातचीत आयोजित करने में मदद करता है। उन्होंने राज्यों से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए राज्‍यों से नवाचार रणनीति विकसित करने के लिए अनुरोध किया और सीआरएम रिपोर्ट के प्रमुख निष्‍कर्षों पर प्रकाश डाला। 

           स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव सी.के. मिश्रा ने कहा कि एनएचएम में सुधार के लिए विश्लेषण को मुख्‍य ताकत बनाने के लिए सीआरएम के इनपुट बहुत महत्वपूर्ण हैं। सीआरएम महत्वपूर्ण विश्लेषण के लिए मंच उपलब्‍ध कराता है जो एनएचएम के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण है। यह कार्यक्रम की गुणवत्ता के मानकों का मूल्यांकन करता है और निवेश पर रिटर्न के बारे में हमें जानकारी उपलब्‍ध कराता है। मिश्रा ने नए विचारों, नवीन मतों पर जोर दिया ताकि गति को बरकरार रखा जाए। 10 वीं सीआरएम टीम ने 16 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों का दौरा किया, जिसमें 3 पूर्वोत्‍तर राज्यों सहित 9 अधिक केंद्रित राज्‍य,  5 गैर-उच्च केंद्रित राज्य और 2 केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।

             विचारणीय विषयों में सेवा आपूर्ति गुणवत्ता आश्वासन; आरएमएनसीएच अए; मानव संसाधन; समुदाय प्रक्रियाएं; सूचना और ज्ञान; स्वास्थ्य वित्तपोषण; दवाइयों की खरीदारी निदान और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन; एनयूएचएम; शासन और प्रबंधन शामिल हैं। सीआरएम रिपोर्ट में स्वास्थ्य प्रणाली सुधार के सभी पहलू शामिल हैं।  इस समारोह में डीजीएचएस डॉ. जगदीश प्रसाद, अपर सचिव एवं मिशन निदेशक (एनएचएम), अरुण कुमार पांडा, संयुक्‍त सचिव (नीति) मनोज झालानी, संयुक्‍त सचिव (आरसीएच, आईईसी) सुश्री वंदना गुरनानी, मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी राज्‍य/ केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता पांच गुना

           केंद्रीय बिजली, कोयला, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा एवं खनन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने बर्लिन, लिपजिग और म्यूनिख की यात्रा की। मंत्री ने यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय और बिजनेस बैठकें कीं। 

        यात्रा की शुरुआत जर्मन विकास एजेंसी जीआईजेड (गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनल जुसामेनाबेट) के उपाध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफ बेयर के साथ बैठक से हुई। गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे भारत ने हाइड्रो और परमाणु समेत अपनी हरित ऊर्जा क्षमता को 100 जीडब्ल्यू से अधिक बढ़ाया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारत ने अपनी सौर ऊर्जा की क्षमता को वर्ष 2014 से पांच गुना अधिक बढ़ा दिया है। मंत्री ने जर्मन पक्ष को सूचित किया कि कैसे भारत ने किफायती नवीकरणीय ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए उसकी नीलामियों में सफलता प्राप्त की और जर्मनी, जो कि फीड इन टैरिफ (एफआईटी) से दूर हो रहा है, भी इसे अपना सकता है।

            130 से अधिक देशों में जीआईजेड की वैश्विक उपस्थिति को देखते हुए, गोयल ने ईईएसएल के साथ साझेदारी का प्रस्ताव रखा, जिससे भारत को अपने ऊर्जा दक्षता उत्पादों को दुनिया भर में वितरित करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने दीर्घकालिक धन, ग्रिड संतुलन, विद्युत वाहनों के विकास, ऑफ ग्रिड प्रणाली, हरित ऊर्जा कॉरिडॉर पर भी बात की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र के विजन 'मेक इन इंडिया मिटेलस्टांड (एमआईआईएम)' के मद्देनजर गोयल ने कुछ जर्मन कंपनियों से भेंट की और उनसे मेक इन इंडिया से जुड़ने व उसमें संभावनाएं तलाशने को लेकर विचार-विमर्श किया। बर्लिन और म्युनिख में आयोजित बैठकों के दौरान मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे जर्मन कंपनियां भारत में मेक इन इंडिया के तहत कम लागत पर अपना दुनिया भर के लिए उत्पाद बनाकर इस अवसर का लाभ उठा सकती हैं। 

           जर्मन और भारतीय कंपनियों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से गोयल ने सिफारिश की कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) सचिवालय सीआईआई, फिक्की आदि के सहयोग से मासिक बैठक करे। इस बैठक में वित्तीय कंपनियों समेत जर्मन और भारतीय कंपनियां शामिल हो सकती हैं। जर्मन पर्यावरण, प्राकृतिक संरक्षण, बीएमयूबी संघीय मंत्री डॉ. बारबरा हेंड्रिक्स और उनके अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक में गोयल ने दोहराया कि कैसे भारत ने श्री मोदी के नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा को आस्था का विषय बना लिया है और वह पेरिस प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। 

           बैठक में गोयल ने डॉ. हेंड्रिक्स को बताया कि भारत पेस समझौते में सतत जीवन शैली पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दोनों मंत्रियों में इस बात पर सहमति बनी कि नवीकरणीय ऊर्जा को एक बोझ की तरह नहीं बल्कि हरित ग्रह के निर्माण के लिए संभावनाओं की तरह लिया जाए। गोयल ने री-इनवेस्ट 2017 में भारत के साथ साझेदारी के लिए जर्मन पक्ष को आमंत्रित किया।

पटना में रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, लागत 243.27 करोड़

        केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने पटना में सिंचाई, गंगा एवं भू-जल तथा नदी प्रबन्धन पर अपने विचार व्यक्त किए। 

         केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा, बिहार में गंगा पर हुई सिल्ट के लिए एक्सपर्ट की कमेटी बनाई जा चुकी है। उसे रिपोर्ट को स्वीकृत करने से पहले जल संसाधन मंत्रालय अपने सचिव को 5 जून को मुख्यमंत्री बिहार के पास भेजेगा तथा मुख्यमंत्री बिहार के अनुरोध के अनुसार विषेषज्ञों का दल जल संसाधन सचिव के नेतृत्व में पटना से फरक्का तक स्थल निरीक्षण करेगा। यह समिति एक वर्ष पहले ही बनाई जा चुकी है। भारत सरकार का यह पहला प्रयास है गंगा को गाद (सिल्ट) मुक्त करने की योजना, गंगा पर लागू करने के बाद अन्य नदियों पर भी लागू की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी विषेषज्ञ इस समिति में शामिल हैं तथा इस रिपोर्ट को लागू करते समय सभी को भागीदारी करनी पड़ेगी जिसमें केन्द्र सरकार के कुछ विभाग तथा राज्य सरकार को मिलकर सामंजस्य से यह काम करना होगा। 

             फरक्का बैराज के बारे में मुख्यमंत्री बिहार की आशंका के बारे में प्रश्न के उत्तर में जल संसाधान मंत्री ने कहा कि विषेषज्ञों की राय ही इसमें अंतिम होगी। 2018 तक गंगा को निर्मल एवं सिल्ट से मुक्त करने के संबंध में एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्रीय मंत्री जी ने बताया कि “गंगा की निर्मलता के लिए मैंने 10 वर्ष कहे हैं जिसके चरण मैंने इस प्रकार से हमेशा कहे हैं- 2 साल में निर्मलता के फेज-1 का प्रारंभ व इसके 2 साल बाद निर्मलता के फेस-1 का परिणाम तथा अविरलता एवं निर्मलता दोनों के लिए आगे चार या पांच साल और लगेगा। इस तरह से मिलाकर के दस वर्ष यही मैंने हमेशा कहा है। जहां तक गंगा को गाद मुक्त करने की बात है यह सिर्फ जल संसाधन मंत्रालय का काम नहीं है इसको अंतर्देशीय जलमार्ग विभाग, पर्यावरण मंत्रालय, राज्य सरकारें तथा जल संसाधन मंत्रालय मिलकर करेंगे इसकी समय-सीमा नहीं बताई जा सकती। नमामि गंगे के अंतर्गत कार्यक्रम, पुराना कार्य- बेगुसराय, मुंगेर, बक्सर और हाजीपुर में - एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और सीवर लाइन का निर्माण हो रहा है। इसकी पूर्व में कुल लागत - 442 करोड़ थी जिसमें से केंद्र सरकार का हिस्सा 70 फीसदी यानी की लगभग 309 करोड़ रुपए बिहार सरकार को दिए गए लेकिन राज्य सरकार किसी भी प्रोजेक्ट को समय पर पूरा नहीं कर पाई है। ये सब कार्य एनजीआरबीए प्रोग्राम के तहत स्वीकृत किेए गए थे। इन प्रोजेक्टों में देरी होने से लागत बढ़ गई है। 

                अब हम इन सभी प्रोजेक्टों को बढ़ी हुई लागत के साथ नामामि गंगे परियोजना के अंतर्गत पुन: संशोधित लागत (लगभग 600 करोड़) पर ला रहे हैं। नए स्वीकृत प्रोजेक्ट, पटना के बेउर, सैदपुर, करमलीचक और पहाड़ी में लगभग 1834 करोड़ रुपए की लागत के एसटीपी तथा सीवरेज लाइन का कार्य निर्माण के विभिन्न स्टेजों में हैं। इसमें 200 एसएलडी का एसटीपी और लगभग 700 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क शामिल है। इन परियोजनाओं के लिए धन का आवंटन किया जा चुका है। इसका क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। इन सभी परियोजनाओं का समय पर पूरा होना निर्मल गंगा के लक्ष्य के प्राप्ति के लिए अति आवश्यक है। 

            अन्य नए प्रोजेक्ट, उपरोक्त प्रोजेक्टों के अतिरिक्त बिहार के अन्य शहरों के लिए लगभग 2526 करोड़ रुपए की लागत से 319 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित किया गया है, जिसका तकनीकी मूल्यांकण किया जा चुका है एवं धन आवंटन अंतिम चरणों में है। सुल्तानगंज - 12 एमएलडी का एसटीपी - 55 करोड़, मोकामा - 9 एमएलडी का एसटीपी - 61 करोड़, दीधा - 128 एमएलडी का एसटीपी - 1000 करोड़, कंकड़बाग - 60 एमएलडी का एसटीपी - 600 करोड़, बाढ़ - 11 एमएलडी का एसटीपी - 61 करोड़, मुंगेर - 27 एमएलडी का एसटीपी - 345 करोड़, भागलपुर - 72 एमएलडी का एसटीपी - 404 करोड़, घाटों व शवदाहगृहों का निर्माण व पुर्णोधार, लगभग 135 करोड़ की लागत से 23 घाटों व 5 शवदाहग्रहों का निर्माण किया जा रहा है। यह घाट हाजीपुर, बक्सर, जमालपुर, मुंगेर और सोनपुर में एनबीसीसी द्वारा किया जा रहा है। 

               पटना में रिवर फ्रंट डेवलपमेंट का निर्माण कार्य 243.27 करोड़ की लागत से किए जा रहे हैं। इसके तहत 20 घाट बनने थें। इनमें से 12 पर कार्य पूरा हो चुका है और 8 पर कार्य जारी है। यह परियोजना भी देरी से चल रही है। राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट को शीघ्र पूरा करे ताकि पटना के लोग इस प्रोजेक्ट से लाभान्वित हो सके। फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादूरन द्वारा प्रस्तावित डीपीआर के अंतर्गत गंगा के किनारे जिलों में वृक्षारोपण कार्य वन विभाग द्वारा किया जा रहा है जिसमें 6 करोड़ की राशी रिलीज की जा चुकी है। तथा 2017-18 में लगभग 19 करोड़ बजट धन का आवंटन किया गया है। नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट, यह प्रोजेक्ट 2016-17 से शुरू होकर 2023-24 तक चलेगा। इस योजना में बिहार को सतही जल के अंतर्गत 105 करोड़ और भूजल के अंतर्गत 30 करोड़, कुल 135 करोड़ दिए जा रहे हैं।

            प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, पुनपुन बैराज प्रोजेक्ट, इस प्रोजेक्ट को 2018-19 में पूरा होना है। इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 46.65 करोड़ केंद्र दे चुकी है। राज्य को इसे पूरा करने में परेशानी आ रही है। दुर्गावती रिजर्वेयर प्रोजेक्ट, इस प्रोजेक्ट को 2018-19 में पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने 103.84 करोड़ रुपए राज्य को दिए हैं। अलग से कमांड एरिया डेवलपमेंट के लिए लगभग 17 करोड़ रिलीज किए हैं। नई योजना - हर खेत में पानी - भूजल विकास, बिहार के लिए 700 करोड़, केंद्रीय अंश - 420 करोड़,  राज्य अंश - 280 करोड़, इस योजना से कुल 66,000 हेक्टेयर में इरीगेशन पोटेंशियल बनेगा। कुल 22,000 नलकूप बनाए जाएंगे जिसमें 5000 सोलर ऊर्जा से संचालित होंगी। इसमें बिहार के 6 जिले प्रस्तावित हैं - दरभंगा, जमुई, खगड़िया, पूर्णिया, समस्तीपुर, मधेपुरा । सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के प्रोजेक्ट, 28 आर्सेनिक फ्री वेल बनाकर दिए गए हैं।

         जिले - भोजपुर, बक्सर, भागलपुर, दरभंगा, पटना, समस्तीपुर, सारन और बेगुसराय। 10 करोड़ की लागत से अतिरिक्त 45 आर्सेनिक फ्री वेल बनाने का कार्य एक माह में शुरू होगा जो कि मार्च 2018 तक बिहार सरकार को उपलब्ध करा दिया जाएगा। अबतक बिहार में लगभग 9000 स्कवायर किलोमीटर की एक्वूफर मैपिंग की जा चुकी है। इससे जमीन के अंदर उपलब्ध भूजल की जानकारी मिलेगी और आगे के कर्यक्रमों के क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। इस वर्ष 5000 अतिरिक्त क्षेत्रफल की एक्वीफर मैपिंग की जाएगी।

14 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे,  8 करोड़ किसानों को कार्ड वितरित

         सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम किसानों के लिए शुरू की गयी एक क्रांतिकारी योजना है जिससे किसानों की खेती और उपज पर काफी फर्क पड़ रहा है।

     
  इससे फसल की  उत्पादकता में वृद्धि हो रही है और खेती की लागत कम हो रही है। इस स्कीम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़, राजस्थान में किया गया था। सॉयल हेल्थ कार्ड मिट्टी के पोषक तत्वों की स्थिति एवं और मिट्टी की उर्वरकता में सुधार के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की सिफारिश की जानकारी किसानों को प्रदान करता है। इससे किसानों को खेत की मिट्टी की प्रकृति की जानकारी भी मिलती है। इसके बाद किसान उसी अनुसार खेत में उर्वरक और अन्य रसायन डालता है। 

           इससे लागत में कमी आती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम के पहले 2 वर्षीय चक्र (2015-17) में अभी तक 2.53 करोड़ लक्षित नमून एकत्र किए जा चुके  हैं एवं 93ऽ नमूने परीक्षित किए जा चुके हैं। राज्य सरकारों द्वारा लगभग 14 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे हैं जिसमें 31 मई तक 8 करोड़ किसानों को कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। अगले तीन माह में शेष सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे। देश में अब तक सॉयल हेल्थ कार्ड के इस्तेमाल से काफी अच्छे परिणाम आए हैं।
16 राज्यों के 136 जिलों के किसानों से आई प्रतिक्रिया तथ्य दर्शाती है। नाइट्रोजन उर्वरकों के उपयोग में कमी आयी है और फॉस्फोरस पोटाश और सूक्ष्मपोषक तत्वों के उपयोग में बढ़ोतरी हुई है। 

          धान में 16ऽ से 25ऽ, दालों और तिलहनों में 10ऽ से 15ऽ खेती की लागत में कमी की सूचना मिली है। धान में 10ऽ से 22ऽ, गेहूं और ज्वार में 10ऽ से 15ऽ, दालों में 10ऽ से 30ऽ और तिलहन में 35ऽ से 66ऽ की उत्पादन वृद्धि दर्ज की गयी है।

पूर्वोत्‍तर में मजदूरों को निर्माण उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षण

       पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में कामगारों को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत निर्माण क्षेत्र में इस्‍तेमाल किये जाने वाले उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

           सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा शिपिंग मंत्री नीतिन गड़करी ने नई दिल्‍ली में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये इस प्रकार के प्रशिक्षणों के पहले चरण का शुभारंभ किया। यह प्रशिक्षण राष्‍ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के सहयोग से राष्‍ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचा विकास कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) द्वारा पूर्वोत्‍तर में अपने परियोजना स्‍थलों पर दिया जा रहा है। पहले चरण में त्रिपुरा में राष्‍ट्रीय राजमार्ग-44 के अगरतला-उदयपुर-सबरूम सेक्‍शन पर चल रही परियोजनाओं के दो निर्माण कार्यालयों पर 20-20 लोगों के दो बैच में 40 प्रशिक्षुओं को एक से 30 जून, 2017 तक एक महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

            इस कार्यक्रम के तहत पूर्वोत्‍तर में एक हजार से अधिक लोगों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जायेगा। उद्घाटन करते हुए गड़करी ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्‍य पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के स्‍थानीय युवाओं में कौशल विकसित करना है, ताकि क्षेत्र की आगामी परियोजनाओं में उन्‍हें रोजगार मिल सके। उन्‍होंने कहा कि उनका मंत्रालय पूर्वोत्‍तर, अन्‍य दूरदराज तथा अल्‍प विकसित क्षेत्रों में अधिक से अधिक स्‍थानीय ठेकेदारों को भी काम दे रहा है, ताकि वे निर्माण स्‍थल पर प्रशिक्षित स्‍थानीय युवाओं को अपने कार्य में शामिल कर सकें। 

      गडकरी ने कहा कि स्‍थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देने और रोजगार की संभावना बढ़ाने के लिए 71 चालक प्रशिक्षण स्‍कूल भी शुरू किये जा रहे हैं। इस अवसर पर सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा शिपिंग राज्‍य मंत्री मनसुख एल.मंडाविया ने कहा कि स्‍थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देने से उद्योग पूर्वोत्‍तर की ओर आएंगे तथा निर्माण की गुणवत्‍ता में भी सुधार होगा।

‘हिंदी संसाधन केंद्र’ स्‍थापित करने का प्रयास

          नार्थ ब्‍लॉक, नई दिल्‍ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्‍यक्षता में गृह मंत्रालय, भारत सरकार की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। 

     बैठक में गृह राज्‍य मंत्री किरेन रीजिजू, लोकसभा सांसद रामचरण बोहरा, दिनेश त्रिवेदी, राज्‍यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर, प्रमोद तिवारी तथा वि‍वेक गुप्‍ता के अलावा डॉ. महेश चंद्र गुप्‍त, सुश्री चित्रा मुद्गल, रविंद्र नाथ श्रीवास्‍तव, राम प्रसाद, प्रो. पुष्‍पेश पंत, राहुल देव सहित सलाहकार समिति के सदस्‍य तथा गृह विभाग व राजभाषा विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे। 

            इस मौके पर बैठक की अध्‍यक्षता कर रहे गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राजभाषा नीति के सुचारु रूप से कार्यान्‍वयन के संबंध में सलाह देने के उद्देश्‍य से हिंदी सलाहकार समिति का गठन किया गया है। संघ का राजकीय काम-काज हिंदी में करने के संवैधानिक दायित्‍वों की पूर्ति की दिशा में हिंदी सलाहकार समितियों की अहम भूमिका है। उनका कहना था कि हिंदी भारतीय संस्‍कृति के मूल तत्‍वों की अभिव्‍यक्ति का सरलतम माध्‍यम होने के साथ-साथ भारत के संविधान में वर्णित भावात्‍मक एकता को सुदृढ़ करने का सशक्‍त जरिया है। किसी भी देश की मौलिक सोच और सृजनात्‍मक अभिव्‍यक्ति सही मायनों में सिर्फ अपनी भाषा में ही की जा सकती है। अपनी भाषा के प्रति लगाव एवं अनुराग हमारे राष्‍ट्र-प्रेम का ही एक रूप है। किसी भी देश की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्‍कृतिक प्रगति में उस देश की भाषा का अहम योगदान होता है।

             उन्‍होंने कहा कि हिंदी ने अपनी मौलिकता, सरलता एवं सुबोधता के बल पर ही भारतीय संस्‍कृति एवं साहित्‍य को जीवंत बनाए रखा है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार और जनता के बीच वही भाषा प्रभावी एवं लोकप्रिय हो सकती है जो आसानी से सभी को समझ आ जाए और बे-झिझक जिसका प्रयोग स्‍वाभिमान से किया जा सके। सरकार की कल्‍याणकारी योजनाएं तभी प्रभावी मानी जाएंगी जब जनता और सरकार के बीच निरंतर संवाद, संपर्क और पारदर्शिता बनी रहे तथा सरकार की योजनाओं का लाभ सभी नागरिकों को समान रूप से मिले। हमारा लोकतंत्र तभी फल-फूल सकता है जब हम जन-जन तक उनकी ही भाषा में उनके हित की बात पहुचाएं। उन्‍होंने आम बोल-चाल के शब्‍दों व वाक्‍यों का अधिकाधिक प्रयोग करने पर बल दिया और कहा कि इससे हिंदी का चलन बढ़ेगा और अनुवाद पर निर्भरता कम होगी। 

             राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय द्वारा किए जा रहे उल्‍लेखनीय कार्यों की प्रशंसा करते हुए सिंह ने बताया कि संसदीय राजभाषा समिति के नौवें खंड की सिफारिशों पर राष्‍ट्रपति के आदेश जारी किए जा चुके हैं। उन्‍होंने विभाग द्वारा तकनीकी संगोष्ठियों के आयोजन को राजभाषा प्रचार-प्रसार की दिशा में नई पहल एवं कारगर कदम बताया। उनका यह भी कहना था कि क्षेत्रीय सम्‍मेलनों में विचार-विमर्श हेतु सशक्‍त मंच प्राप्‍त होता है। बैठक को संबोधित करते हुए अपने स्‍वागत भाषण में गृह सचिव राजीव महर्षि ने कहा कि हमारी राजभाषा देश के जन-मानस के हृदय को स्‍पर्श करती है इसलिए हमारा दायित्‍व है कि हम इसे कार्यालयीन कार्यों में अपनाएं तथा इसके विकास में अपना योगदान दें। 

            राजभाषा विभाग के सचिव प्रभास कुमार झा ने राजभाषा विभाग द्वारा किए जा रहे प्रमुख कार्यों का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने बताया कि विभाग द्वारा वृहत् राजभाषा शब्‍दावली बनाने, ई-महाशब्‍दकोश का मोबाइल रूप तैयार करने तथा हिंदी सीखने के ‘लीला’ नामक साफ्टवेयर का मोबाइल रूप तैयार करने के साथ-साथ ‘हिंदी संसाधन केंद्र’ स्‍थापित करने का प्रयास किया जा रहा है जिसमें अनुवाद कार्य को सुगम बनाने हेतु साफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। समिति की बैठक में उपस्थित सदस्‍यों ने राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्‍वयन के लिए तकनीकी सुविधाएं उपलब्‍ध कराने और राजभाषा के कार्यान्‍वयन को अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। सदस्‍यों ने कार्यालयीन हिंदी तथा सरल हिंदी के बीच सामंजस्‍य बिठाने की भी बात कही। 

         बैठक के दौरान संघ की राजभाषा नीतियों के अनुपालन की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों पर भी विस्‍तार से चर्चा की गई तथा आने वाले समय में सरकारी कार्यालयों में अधिक से अधिक कार्य राजभाषा हिंदी में किए जाने की प्रतिबद्धता संपुष्‍ट की गई।