Tuesday, 10 October 2017

योग सभी व्‍यायामों की जननी, तंदुरुस्‍ती का विज्ञान

     नई दिल्ली। उप-राष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि योग सभी व्‍यायामों की जननी है। उप-राष्‍ट्रपति यहां तीसरे अंतर्राष्‍ट्रीय योग सम्‍मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    इस अवसर पर आयुष राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीपाद येसो नाइक और अन्‍य गणमान्‍य व्‍य‍क्‍ति‍ भी मौजूद थे। उप-राष्‍ट्रपति ने कहा कि योग का प्राचीन विज्ञान आधुनिक विश्‍व को भारत का अमूल्‍य उपहार है। 
      उन्‍होंने कहा कि हमारा मानना है कि ज्ञान और विज्ञान का समूचे विश्‍व के कल्‍याण के लिए मुक्‍त संचार होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि सर्वे जना सुखिनो भंवतु चिर काल से हमारी उत्‍कट प्रार्थना है। 
    उप-राष्‍ट्रपति ने कहा कि योग शारीरिक व्‍यायाम से बढ़कर है और यह शरीर को सोचने की प्रक्रिया से जोड़ता है। उन्‍होंने कहा कि योग का धर्म से कुछ लेना-देना नहीं है, जैसाकि कुछ लोग दुर्भाग्‍यवश इस प्राचीन वैज्ञानिक प्रणाली को धर्म से जोड़कर देखते हैं। यह लोगों की तंदुरुस्‍ती का विज्ञान है जिसका किसी भी अन्‍य चिकित्‍सा प्रणाली के रूप में अध्‍ययन किया जाना चाहिए और इसका इस्‍तेमाल किया जाना चाहिए। 
      उप-राष्‍ट्रपति ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली से जुड़ी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से निपटने के लिए योग को दैनिक जीवन का हिस्‍सा बनाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि योग हमें समानता की अवस्‍था हासिल करने में मदद करता है जब हम शान्ति की अवस्‍था में होते हैं ताकि हम शान्तिपूर्ण माहौल बना सके। 
     उप-राष्‍ट्रपति ने बाबा रामदेव जैसे लोगों के प्रयास की सराहना की जिन्‍होंने साधारण तरीके से योग को घर-घर तक पहुंचाया है। ‘योग और स्‍वास्‍थ्‍य’ पर दो-दिवसीय अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन आयुष मंत्रालय ने किया है। सम्‍मेलन में दुनिया भर के 44 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। 
     इस सम्‍मेलन में योग और डिप्रेशन, योग और हृदय संबंधित बीमारियां, योग और कैंसर नियंत्रण, योग और दर्द दूर करने के उपाय, महिलाओं के लिए योग, स्‍त्री रोग संबंधी परेशानियों के बारे में अध्‍ययन जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों द्वारा पेपर प्रस्‍तु‍त किए जाएंगे। 
     उप-राष्‍ट्रपति ने संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा 21 जून को अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्‍यवाद दिया। उन्‍होंने कहा कि योग दिवस अब दुनिया भर में मनाया जाता है। 
     उन्‍होंने कहा कि इस प्राचीन विज्ञान को भारत और दुनिया के अनेक देशों में कई वर्षों से व्‍यवहार में लाया जा रहा है। योग के विभिन्‍न आयाम है और हम उन्‍हें पतंजलि के योग सूत्र और भगवद्गीता के कालातीत ग्रंथ सहित अन्‍य ग्रंथों में पाते हैं। समत्‍वंयोगउच्‍यते यह योग है जो समत्‍व, धीरज और एकरूपता पर आधारित है। जब शरीर अथवा दिमाग के भीतर असंतुलन होता है तो हम स्‍वस्‍थ महसूस नहीं करते। योग का मानना है कि स्‍वास्‍थ्‍य और सम्‍पूर्ण तंदुरुस्‍ती हासिल करने के लिए इस संतुलन को बहाल करना होगा। 
      योग भारत में ‘स्‍वास्‍थ्‍य और शारीरिक शिक्षा’ का अभिन्‍न अंग है, अमेरिका के स्‍कूलों में भी इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है और ध्‍यान के स्‍तर और भावपूर्ण संतुलन पर इसके सकारात्‍मक प्रभाव के कारण ब्रिटेन और ऑस्‍ट्रेलिया के स्‍कूलों में भी इसे शुरू किया गया है।

एनआईए को पूर्ण स्‍वायत्ता देने के लिए कदम

     नई दिल्ली। केन्‍द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने देश को सुरक्षित स्‍थान बनाने और वैश्विक आतंकवाद के हमलों से भारत की रक्षा करने में महत्‍वपूर्ण भू‍मिका निभाई है।

  यहां एनआईए के नए मुख्‍यालय कार्यालय परिसर का उद्घाटन करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआईए आतंकवाद से उत्‍पन्‍न खतरे पर अंकुश लगाने के कार्य में लगा हुआ है। 
   केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एनआईए ने हाल ही में पड़ोसी देश और विदेश में तीसरे देशों में मौजूद उनके साथियों द्वारा कश्‍मीर घाटी में आतंकवादियों को सहायता पहुंचाने के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। 
     गृह मंत्री ने आतंकवादियों का बड़ी संख्‍या में सफाया करने के लिए एनआईए, अन्‍य सुरक्षा एजेंसियों, सेना, सीएपीएफ तथा राज्‍य पुलिस बल के एटीएस के सम्मिलित प्रयासों की सराहना की। राजनाथ सिंह ने कहा सरकार ने जांच में एनआईए को पूर्ण स्‍वायत्ता देने के लिए कदम उठाए हैं।
      इससे पहले एनआईए ने कार्रवाई के लिए आगे बढ़ने के लिए गृह मंत्रालय की अनुमति मांगी थी लेकिन मैंने निर्देश दिया कि गृह मंत्रालय की मंजूरी की कोई आवश्‍यकता नहीं है और एनआईए स्‍वतंत्र होकर अलग से कार्रवाई कर सकता है। 
      उन्‍होंने कहा कि यहां तक की एनआईए के अगले महानिदेशक की नियुक्‍त‍ि करीब दो महीने पहले कर दी गई है। इससे सरलता से कार्य हो सकेगा। आतंकवाद को सभ्‍य समाज के लिए अभिशाप और दुनिया भर के लोकतंत्र में विकास के प्रयासों में बाधा बताते हुए केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकबाद से मुकाबला करने के लिए विश्‍व समुदाय को जोड़ा है। 
   केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अपने अस्तित्‍व में आने के बाद एनआईए ने अभी केवल 8 वर्ष पूरे किए हैं और उसने अधिकतर दु:साहसी आतंकवादी हमलों में से कुछ की निष्‍पक्ष, प्रामाणिक और पेशेवर जांच करके आम आदमी का विश्‍वास हासिल कर लिया है। 
      राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआईए की जांच के परिणामों की दोष सिद्धि दर 95 प्रतिशत है। मुझे विश्‍वास है कि एनआईए अपनी प्रामाणिकता और पेशेवराना अंदाज बनाए रखेगा। 
     इस अवसर पर एनआईए के महानिदेशक शरद कुमार ने कहा कि एनआईए जल्‍द ही गुवाहाटी में दिसम्‍बर, 2017 और हैदराबाद में जून 2018 में अपनी नई क्षेत्रीय कार्यालय इमारत का उद्घाटन करेगा। उद्घाटन समारोह में गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर और किरेन रिजिजू, सीएपीएफ के प्रमुख और गृह मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद थे।

रेलों की गति 200 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाने के लिए भारतीय-जर्मन रेलवे की संयुक्त घोषणा

   नई दिल्ली। यात्री रेल गाड़ियों की गति 200 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे और जर्मन रेलवे ने मौजूदा चेन्नई - काजीपेट कॉरिडोर का व्यवहार्यता अध्ययन करने के संबंध में 10 अक्टूबर, 2017 को रेल भवन में रेल मंत्रालय के रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी की उपस्थिति में प्रयोजन की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए। 

     यह कार्य 50-50 प्रतिशत लागत भागीदारी के आधार पर किया जाएगा। प्रयोजन की इस वर्तमान संयुक्त घोषणा का उद्देश्य विशेष रूप से अर्ध उच्च गति (एसएचएस) रेल के प्राथमिकता वाले क्षेत्र में उपलब्धि की दिशा में सहयोग मजबूत करना है, मौजूदा यात्री सेवाओं का चेन्नई-काज़िपेट कॉरिडोर (643 किमी) पर 200 किलोमीटर की अर्ध उच्च गति का उन्नयन करना है।
    इस परियोजना में 22 महीने की अवधि में तीन चरणों में निम्नलिखित उद्देश्यों को उपलब्ध कराना शामिल है। रण 1, कॉरीडोर के लिए तीन मांग आधारित उन्नयन परिदृश्यों की परिभाषा। चरण 2, संबंधित परिचालनों और आर्थिक-वित्तीय प्रभाव पर आधारित इस कॉरिडोर पर एसएचएस के लिए पसंदीदा उन्नयन परिदृश्य का चयन।
   चरण 3, पसंदीदा परिदृश्य, संदर्भ डिजाइन और तकनीकी निविदा दस्तावेज। पसंदीदा उन्नयन परिदृश्यों के बारे में तकनीकी समाधान के लिए संदर्भ डिजाइन का विकास। निर्माण कार्यों और रेलवे प्रणालियों के लिए खरीदारी की अवधारणा। रेलवे परिचालनों के तहत निर्माण के चरणों के लिए अवधारणा और आवश्यकताएं। डिज़ाइन और निविदा प्रक्रिया के लिए उपयुक्त पसंदीदा परिदृश्य के लिए तकनीकी निविदा दस्तावेजों को तैयार करना।
      भारत के लिए बड़े एसएचएस कार्यक्रम के संबंध में सिफारिशों का विकास। कॉरिडोर के कार्यान्वयन के लिए संभावित वित्तीय विकल्प। इस व्यवहार्यता अध्ययन की लागत में भारत सरकार के रेल मंत्रालय और जर्मनी की सरकार की 50 - 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इस व्यवहार्यता अध्ययन करने की अंतिम शर्तों को एक अलग करार पर हस्ताक्षर करके पूरा किया जाएगा।
      इससे पहले, रेल क्षेत्र के सहयोग के बारे में एक प्रोटोकॉल पर जर्मनी में मई, 2016 में दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें निम्नलिखित प्राथमिकता क्षेत्र शामिल हैं। डिजाइन और वास्तविक रूप से चल रही संचालित गति बढ़ाने की अवधारणाएं, यात्रियों और माल परिवहन में रेलवे लाइनों की क्षमता बढ़ाने के लिए अवधारणाएं; घटनाओं और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए परिचालन सुरक्षा में सुधार करने के लिए अवधारणाएं; ऊर्जा कुशल रेलवे परिचालनों के माध्यमों द्वारा परिचालन लागत घटाने के लिए अवधारणाएं; रेलवे के बारे में जानकारी बढ़ाने के उद्देश्य के साथ भारत और जर्मनी में शिक्षा और प्रशिक्षण सुविधाओं के बारे में सहयोग के लिए अवधारणाएं।
    उच्च गति और अर्ध उच्च गति नेटवर्क के विस्तार में सहायता करना; सक्षम नियामक प्राधिकरणों की भागीदारी से भारत के लिए उपयोगकर्ता उन्मुख मानकों और मानदंडों का संयुक्त विकास; बहुआयामी यातायात के लिए लंबे प्रखंडों पर गति बढ़ाने के लिए अवधारणाएं; आधुनिक लाइनों पर स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए अवधारणाएं; चेन्नई-काज़िपेट कॉरिडोर की मुख्य विशेषताएं।
     मार्ग चेन्नई-गुडुर जं., नेल्लोर-तेनाली जं., विजयवाड़ा जं., वारंगल-काजीपेट जं. कॉरिडोर की कुल लम्बाई - 643 किलोमीटर (135 किलोमीटर दक्षिण रेलवे में और 508 किलोमीटर दक्षिण मध्य रेलवे में) और पूरा कॉरिडोर विद्युतीकृत है। शामिल डिवीजन - चेन्नई (135 किमी), विजयवाड़ा (311 किमी) और सिकंदराबाद (197 किमी)। दक्षिणी रेलवे में इस कॉरिडोर पर अधिकतम स्वीकृत गति 110 किमी प्रति घंटा है और दक्षिण मध्य रेलवे में 120 किमी प्रति घंटा है। 
    इस कॉरिडोर में 216 (दक्षिणी रेलवे -68 और दक्षिण मध्य रेलवे-148) लेवल क्रॉसिंग हैं और सभी मानवीकृत हैं। इस कॉरिडोर पर पुलों की संख्या 1979 (दक्षिण रेलवे - 514 और दक्षिण मध्य रेलवे -1465) हैं। काजीपेट से चेन्नई तक केवल एक सीधी ट्रेन संख्या 12760/ चारमीनार एसएफ़ एक्सप्रेस है जो अपने सफर में 11 घंटे 20 मिनट लेती है।
     57 किलोमीटर प्रति घंटा की औसत गति से चलती है और 13 स्टॉपेज पर रूकती है। अधिकांश ट्रेनें वारंगल से चेन्नई (638 किमी) के लिए चलती हैं। सबसे तेज गति की ट्रेन संख्या 12433/12434 राजधानी एक्सप्रेस 75.3 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति से 8 घंटे 29 मिनट में यह दूरी तय करती है और केवल विजयवाड़ा में रूकती है।
    मार्ग पर कोचिंग ट्रेनों का विवरण: गरीब रथ -1, जनशताब्दि -1, सुपरफास्ट -40, मेलएक्सप्रेस -21 और हॉलिडे स्पेशल -8, कुल-71।, मार्ग पर कुल स्टेशनों की संख्या - 108 (दक्षिणी रेलवे -28 और दक्षिण मध्य रेलवे -80)। ऐसे स्टेशनों की कुल संख्या जहां मुख्य लाइन पर प्लेटफार्म हैं - 29 (दक्षिणी रेलवे -23 और दक्षिण मध्य रेलवे -06)। दक्षिणी रेलवे - स्वचालित पूर्णतया सिग्नल युक्त, दक्षिण मध्य रेलवे - मुख्य रूप से मुकम्मल और एमएसीएलएस।

आपदाओं में बिम्‍सटेक देशों में 317,000 लोगों की जान गई

   नई दिल्ली। केन्‍द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग आपदा प्रबंधन अभ्‍यास (बिम्‍सटेक डीएमएक्‍स-2017) के लिए पहली चार दिवसीय बंगाल की खाड़ी पहल का उद्घाटन किया। राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) दिल्‍ली और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10-13 अक्‍टूबर, 2017 तक अभ्‍यास का संचालन प्रमुख एजेंसी के रूप में कर रहा है। 

 काठमाडू, नेपाल में 7 फरवरी, 2017 को आयोजित बिम्‍सटेक के वरिष्‍ठ अधिकारियों की 17वीं बैठक में यह फैसला किया गया था कि भारत क्षेत्र के लिए पहले वार्षिक आपदा प्रबंधन अभ्‍यास का आयोजन करेगा। 
    इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने संयुक्‍त अभ्‍यास में भाग लेने के लिए एकत्र हुए बिम्‍सटेक देशों से आए सभी प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं दी। उन्‍होंने कहा कि इस अभ्‍यास के लिए उनकी उपस्थिति आपदा जोखिम प्रबंधन के क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग के प्रति उनकी सरकारों की प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्‍व करती है।
   आपदाओं पर चिंता प्रकट करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि हाल में मानसून बाढ़ और भू-स्‍खलन ने लगभग सभी बिम्‍सटेक देशों के लाखों लोगों को प्रभावित किया। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि यह हमें आपदा की तैयारियों में सुधार के महत्‍व की एक बार फिर याद दिलाता है। 
     राजनाथ सिंह ने कहा कि 1996 से 2015 की अवधि में आपदाओं में बिम्‍सटेक देशों में 317,000 लोगों की जान गई। इन आपदाओं में बिम्‍सटेक देशों में 16 मिलियन से अधिक लोग बेघर हो गये और बहुत अधिक आर्थिक नुकसान हुआ। उन्‍होंने कहा कि अत्‍यधिक खराब मौसम की स्थितियों-बाढ़, सूखा, लू और चक्रवात के मामलों में आने वाला समय बेहतर नहीं दिखाई देता और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए इनकी आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
     गृह मंत्री ने कहा कि फिर भी यदि हम अपने समुदाओं, अपने कस्‍बों और गांवों तथा अपनी आर्थिक गतिविधियों को लोचदार बना लें तो हम नुकसान को कम कर सकते है। उन्‍होंने कहा कि आपदा से निपटने की बेहतर तैयारी इस प्रयास में और इस दिशा में एक आधार बन सकता है, सभी बिम्‍सटेक देशों ने पिछले दो दशकों में महत्‍वपूर्ण प्रगति की है। 
   विभिन्‍न देशों की प्रगति को उजागर करते हुए उन्‍होंने कहा कि बांग्‍लादेश के चक्रवात तैयारी कार्यक्रम को विश्‍व भर में श्रेष्‍ठ कार्यक्रम के रूप में पहचाना गया है और थाईलैंड में सुनामी की पूर्व चेतावनी प्रणाली की अंतिम मील कनेक्‍टीविटी ने तटीय क्षेत्रों में तैयारियों में महत्‍वपूर्ण सुधार किया है। 
     इस दिशा में भारत के प्रयासों की चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि हम आपदा से होने वाली मौतों और अन्‍य नुकसान को कम करने के लिए सम्‍मि‍लित प्रयास कर रहे हैं और आपदा मृत्‍यु दर के नमूने का विश्‍लेषण कर रहे हैं तथा केन्द्रित कदम उठा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत में फैलिन और हुदहुद जैसे चक्रवातों से प्रभावी तरीके से निपटना इस बात का प्रत्‍यक्ष प्रमाण है कि पिछले एक दशक में नीतिगत पहल के कारण पूर्व चेतावनी क्षमताओं को बढ़ाने, अग्रिम तैयारी, प्रशिक्षण और क्षमता विकास जैसे उपाए किए गए हैं। 
     उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि अगले कुछ दिनों में संयुक्‍त अभ्‍यास पर ध्‍यान केन्द्रित करने के अलावा, प्रतिनिधियों को अपने-अपने देश के अनुभव बांटने का अवसर मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि इस संयुक्‍त अभ्‍यास की सफलता न केवल अगले कुछ दिनों में किए जाने वाले कार्यों पर निर्भर करेगी बल्कि अभ्‍यास के बाद का कार्य भी महत्‍वपूर्ण होगा।
     गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में हमें सभी भागीदार देशों में फैले बिम्‍सटेक आपदा प्रतिभागियों के पूल को विकसित करने के लिए अभ्‍यासों का इस्‍तेमाल करना होगा जिससे यह सुनिश्चित हो सकेगा की जरूरत पड़ने पर हम प्रभावी जवाबी कार्रवाई कर सकें और समय पर एक-दूसरे की मदद कर सकें। उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि बिम्‍सटेक देशों को आपदाओं को कम करने के लिए एक-दूसरे से हाथ मिलाने की जरूरत है क्‍योंकि उन्‍हें नियमित आधार पर बाढ़ की समस्‍या का सामना करना पड़ता है। 
       राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि बिम्‍सटेक देश डाउनस्‍ट्रीम देशों के साथ अंतर्राष्‍ट्रीय नदियों के हाईड्रोलॉजिकल आंकड़ों को बांटना शुरू कर दें तो इससे देशों को जोखिम कम करने में मदद मिलेगी और वे आपदा से निपटने की बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
     उन्‍होंने जोर देकर कहा कि हमें अंतर्राष्‍ट्रीय नदियों के हाईड्रोलॉजिकल आंकड़ों को नियमित आधार पर बांटने के बारे में आम सहमति बनानी होगी। राजनाथ सिंह ने आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने और सहयोग के हर संभव क्षेत्रों का पता लगाने के साझा लक्ष्‍य को हासिल करने में अन्‍य बिम्‍सटेक देशों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर चलने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। 
    उन्‍होंने कहा कि भारत ने हिंद महासागर रिम देशों के लिए सुनामी की पूर्व चेतावनी प्रणाली स्‍थापित कर दी है। हमने कार्रवाई करने के लिए प्रभावी देशों में राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल को तैनात किया है। उन्‍होंने बताया कि बिम्‍सटेक से पहले भारत ने सार्क देशों के साथ संयुक्‍त द्विपक्षीय अभ्‍यास किया और सभी ब्रिक्‍स देशों के आपदा जोखिम प्रबंधन के बारे में संयुक्‍त बैठक की मेजबानी की। पिछले वर्ष हमने आपदा जोखिम कम करने के लिए एशियाई मंत्रिस्‍तरीय सम्‍मेलन की मेजबानी की।
     राजनाथ सिंह ने कहा कि इस वर्ष मई में भारत ने दक्षिण एशिया जियो स्‍टेशनरी (भू-स्‍थैतिक) संचार उपग्रह छोड़ा जिससे संचार प्रणाली, मौसम की भविष्‍यवाणी आदि में सुधार आएगा। उन्‍होंने आश्‍वासन दिया कि भारत बिम्‍सटेक के अंतर्गत समान स्‍तर की प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा और बिम्‍सटेक देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। 
       उन्‍होंने इस संयुक्‍त अभ्‍यास के लिए भारत आने के लिए बिम्‍सटेक देशों के प्रतिनिधियों को धन्‍यवाद दिया। बिम्‍सटेक महासचिव एम. शहीदुल इस्‍लाम ने कहा कि पहले आपदा प्रबंधन अभ्‍यास में उपस्थित होना उनके लिए सम्‍मान और सौभाग्‍य की बात है। 
     उन्‍होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि यह अभ्‍यास ऐसे समय पर आयोजित किया गया है जब बिम्‍सटेक इस वर्ष अपने गठन के 20 वर्ष पूरे कर रहा है और यह क्षेत्रीय सहयोग की सच्‍ची भावना को दर्शाता है। उन्‍होंने कहा कि आपदा प्रबंधन सर्वोच्‍च प्राथमिकता है क्‍योंकि बंगाल की खाड़ी का क्षेत्र दुनिया का ऐसा क्षेत्र है जहां सबसे अधिक आपदाएं आती हैं और हाल में अनेक आपदाएं देखने को मिली हैं। 
      उन्‍होंने इस बात पर चिंता जाहिर की कि आपदाओं के दौरान लोगों की जान जाने के अलावा भारी पैमाने पर आर्थिक नुकसान होता है जो देश के सकल घरेलू उत्‍पाद को प्रभावित करता है। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं पर हमारा बहुत कम नियंत्रण है इसलिए हमें आपदा जोखिम को कम करने पर विशेष ध्‍यान देना चाहिए। 
    हमें एक-दूसरे के पुराने अनुभवों से सीख लेनी चाहिए। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि समन्‍वय और त्‍वरित कार्रवाई एक साथ होनी चाहिए। 
    उन्‍होंने कहा कि विभिन्‍न ढांचागत और गैर-ढांचागत प्रणालियां तैयार करने के कारण आपदाओं में मरने वाले लोगों की संख्‍या कम हुई है। महासचिव ने कहा कि संस्‍थागत ढांचे के साथ लोगों का आपस में संपर्क बहुत जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि यह अभ्‍यास वृहद सहयोग की शुरुआत है।

वायु सेना के स्वदेशीकरण मेक इन इंडिया का आकलन

  नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना के द्वि-वार्षिक सम्मेलन का रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने वायु सेना मुख्यालय (वायु भवन) में उद्घाटन किया गया। 

  वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी.एस. धनोआ ने रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और रक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे का स्वागत किया। उनसे भारतीय वायु सेना के कमांडरों का परिचय कराया। वायु सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री को भारतीय वायुसेना की वर्तमान स्थिति और हाल के दिनों में किए गए प्रयासों के बारे में जानकारी दी। 
   रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना प्रमुखों अपनी क्षमताओं को अर्जित करने के लिए उन्हें दिए गए अधिकारों का पूरी तरह से उपयोग करना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि वायु सेना को आयुध कारखाना बोर्ड और डीआरडीओ के साथ मिलकर 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत स्वदेशीकरण के बारे में आकलन करना चाहिए। 
   उन्होंने यह भी कहा कि बजटीय आवंटनों को एक बाधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि जो बिल्कुल जरूरी है उसे प्राप्त करने के बारे में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार पिछले दशक के दौरान समय पर निर्णय लेने की कमी के कारण पैदा हुए अंतरालों को पाटने के लिए प्रतिबद्ध है। 
      वायुसेनाध्यक्ष ने कमांडरों को संबोधित करते हुए भारतीय वायु सेना को अत्याधुनिक बनाए रखने के लिए सतत प्रयास और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सर्वाधिक आकस्मिकताओं में सबसे पहले उत्तरदाता के रूप में वायुसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल का उपयोग करते हुए क्षमता बढ़ाने की वर्तमान प्रक्रिया को सतत बनाए रखने की जरूरत है।
     कमांडरों का सम्मेलन अगले तीन दिन यानि 12 अक्टूबर, 2017 तक आयोजित किया जाएगा जिसमें भारतीय वायु सेना के भविष्य की गति का निर्धारण करने वाले विभिन्न विषयों के बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा। इन विषयों में परिचालन, रखरखाव मुद्दे और विभिन्न प्रशासनिक पहल शामिल हैं जिन्हें भारतीय वायु सेना के मुख्य सिद्धांत 'पीपुल फर्स्ट, मिशन आलवेज' पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारतीय वायुसेना के कार्य वातावरण में बढ़ोतरी करने के लिए शुरू किया जाएगा।
      भारत सरकार की 'डिजिटल इंडिया' पहल के अनुरूप, इस सम्मेलन के दौरान भारतीय वायुसेना सेलुलर नेटवर्क (एएफसीईएल) फोन के लिए दो मोबाइल ऐप पहल 'मैडवाच' और 'एफचैट' जारी किए जाएंगे। इस पहल को आगे बढाने के लिए ऑनलाइन परीक्षण एवं मूल्यांकन तथा ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा जैसी अन्य विभिन्न पहलों को भी शामिल किया जाएगा।
    नई विशेषताओं से युक्त न्यू लुक एयरफोर्स सेन्ट्रल अकाउंट्स ऑफिस (एएफसीएओ) वेबसाइट की भी शुरूआत की जाएगी। इस सम्मेलन के दौरान 'एरो इंडिया- एसेन्ट थ्रू द एजिज' नामक किताब भी जारी की जाएगी।

भारत में विश्व जल संसाधन का सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्सा

   नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में भारत जल सप्ताह 2017 का शुभारंभ किया। भारत जल सप्ताह 2017 के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मुझे 5वें भारत जल सप्ताह का उद्घाटन करते हुए प्रसन्नता हो रही है। 

      राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मैं विशेषकर यूरोपीय यूनियन के देशों तथा दूसरी जगहों से आए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत करना चाहू्ंगा। वह इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर भारतीय समकक्षों के साथ विचार-विमर्श करने में शामिल हो रहे हैं।
      राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि मानव जीवन के लिए जल आवश्यक है। वास्तव में मानव शरीर का 60 प्रतिशत हिस्सा जल है। यह कहा जा सकता है कि जल स्वयं जीवन है। जल के बिना किसी भी क्षेत्र में मानवीय गतिविधि पूरी नहीं हो सकती। 
    आज विश्व इस विषय पर चर्चा कर रहा है कि क्या सूचना प्रवाह ऊर्जा प्रवाह से अधिक महत्वपूर्ण है। यह एक अच्छा प्रश्न है। लेकिन जल प्रवाह भी महत्वपूर्ण है। यह अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी और मानव समानता का मूल है। जलवायु परिवर्तन और संबंधित पर्यावरण चिंताओं को देखते हुए जल विषय के रूप में और महत्वपूर्ण हो गया है।
     राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत में हमारे कुछ अग्रणी कार्यक्रमों के केंद्र में जल है। मैं यह कहना चाहूंगा कि भारत का आधुनिकीकरण जल प्रबंधन के आधुनिकीकरण पर निर्भर हैं। यह आश्चर्य नहीं है कि विश्व की 17 प्रतिशत आबादी वाले हमारे देश के पास विश्व के जल संसाधन का सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्सा है। 
   राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारतीय कृषि और उद्योग के लिए समान रूप से जल का बेहतर और कारगर इस्तेमाल एक चुनौती है। इसके लिए हमें अपने गांव और शहरों में नए मानक स्थापित करने होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत में 54 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं, फिर भी राष्ट्रीय आय में उनका हिस्सा केवल 14 प्रतिशत है। 
      कृषि को और मूल्य आकर्षक बनाने तथा किसान समुदाय की समृद्धि में सुधार के लिए सरकार ने अनेक नई परियेजनाएं शुरू की है, इन परियोजनाओं में शामिल हैं, हर खेत को पानी – प्रत्येक खेत के लिए पानी: इसके लिए जल की आपूर्ति और उपलब्धता में वृद्धि आवश्यक। ‘प्रति बूंद’, अधिक फसल – इसके लिए उत्पादकता सुधार में टपक सिंचाई और संबंधित तरीकों का उपयोग आवश्यक।
       2022 तक कृषि आय दुगुनी करना: इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार सिंचाई क्षेत्र का तेजी से विस्तार कर रही है और 99 लम्बित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कर रही है। ऐसी 60 प्रतिशत परियोजनाएं सूखा प्रभावित क्षेत्रों में है।’ 
    राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि अब मैं भारत की औद्योगिकीकरण और जल की भूमिका पर बात करना चाहूंगा। मेक इन इंडिया मिशन के अंतर्गत भारत जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है। हम जीडीपी में वर्तमान 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी 2025 तक बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने के लिए संकल्पबद्ध हैं। 
     उद्योग को बड़े स्तर पर जल की आवश्यकता होती है। इलेक्ट्रोनिक हार्डवेयर, कम्प्यूटर तथा मोबाईल फोन बनाने के मामले में विशेष रूप से। यह सारे क्षेत्र मेक इन इंडिया के फोकस में हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत में अभी 80 प्रतिशत जल का उपयोग कृषि कार्य में किया जाता है और उद्योग में जल का उपयोग केवल 15 प्रतिशत होता है। आने वाले वर्षों में इस अनुपात में बदलाव होगा। 
     जल की कुल मांग भी बढ़ेगी। इसलिए औद्योगिक परियोजनाओं के ब्लू प्रिंट में सक्षम तरीके से जल के उपयोग और पुन: उपयोग को शामिल किया जाना चाहिए। इस समस्या के समाधान में व्यवसाय और उद्योग को भागीदारी करनी होगी। इसलिए मुझे खुशी है कि इस सम्मेलन में मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनियों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित हैं।
      राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत का शहरीकरण पहले की तुलना में बहुत अधिक तेजी से हो रहा है। स्मार्ट सिटी कार्यक्रम के अंतर्गत 100 आधुनिक सिटी बनाने या उन्नत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि स्मार्ट सिटी के मूल्यांकन के लिए जल का पुन: उपयोग, ठोस कचरा प्रबंधन तथा बेहतर स्वच्छता ढांचा और व्यवहार मानक हैं। 
     राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि शहरी भारत में प्रतिदिन 40 बिलियन लीटर गंदा जल उत्पन्न होता है। इस जल के विषैले प्रभाव को कम करने और सिंचाई या अन्य कार्यों में इस जल के उपयोग के लिए प्रोद्योगिकी अपनाना महत्वपूर्ण है। यह शहरी नियोजन कार्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए। 
     राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मैं जल अनुभव के बारे में भारत में क्षेत्रीय भिन्नता की ओर भी संकेत देना चाहूंगा। एक तरफ भू-जल संसाधनों का अंधाधुन दोहन किया जा रहा है, और हमारे उत्तरी और पश्चिमी राज्य जर्जर हो रहे हैं तो दूसरी और पूर्वी व पूर्वोत्तर राज्यों में नदियों के ऊफान और नियमित बाढ़ की चुनौती बनी हुई है। प्रत्येक वर्ष इससे आबादी को नुकसान होता है और अनगिनत परिवारों में त्रासदी आती है।
      राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि ऐसी त्रासदियों से केवल बहुहितधारक और बहुपक्षीय दृष्टिकोण से निपटा जा कसता है। इस कार्य में जहां संभव हो नदियों को आपस में जोड़ने का लक्ष्य शामिल है। नदियों को स्वच्छ रखने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के उपयोग के उद्देश्य से नदी प्रणाली का प्रबंधन बेसिन व्यापी करना आवश्यक है। नमामि गंगे परियोजना एक अच्छी शुरूआत है।
       हमें ऐसी सोच को देश की अन्य नदी प्रणालियों तक और भारतीय उपमहाद्वीप विशेषकर देश की पूर्वी हिस्सों तक ले जाना चाहिए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि निष्कर्ष के रूप में, मैं आग्रह करूंगा कि जल का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर किया जाना चाहिए। इस कार्य में गांव और पड़ोसी समुदाय को शसक्त बनाना चाहिए और उन्हें जल संसाधन प्रबंधन, आवंटन और मूल्य क्षमता के लिए सक्षम बनाया जाना चाहिए। 
     21वीं शताब्दी की किसी भी जल नीति में जल के मूल्य को शामिल करना होगा। समुदायों सहित सभी हितधारकों की सोच को व्यापक बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, हमें लोगों को जल परिमाण निर्धारित करने से आगे लाभ परिमाण निर्धारित करने की ओर बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि निश्चित रूप से लाभ परिमाण का निर्धारण गतिशील होगा। यह मैपिंग तथा मानव समाज में आजीविका के तौर-तरीकों के अनुमानों से जुड़ा होगा और यह विकसित होता रहेगा। 
     राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मानव सम्मान के लिए जल तक पहुंच एक पर्याय है। भारत में 6 सौ हजार गांवों तथा शहरी क्षेत्रों की आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना केवल परियोजना प्रस्ताव नहीं है। यह पवित्र संकल्प है। सरकार ने भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरा होने पर 2022 तक सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई सुनिश्चित करने की रणनीतिक योजना बनाई है। उस वर्ष तक का लक्ष्य है 90 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में पाईप से पानी सप्लाई करना। 
     इस अवसर पर केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन और राजमार्ग व शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत 27 परियोजनाएं इस साल तक पूरी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि 1 करोड़ 88 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए अगले साल तक 285 नई सिंचाई परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा।
      गडकरी ने कहा कि बूंद-बूंद सिंचाई या ड्रिप सिंचाई और पाइपलाइन के जरिए सिंचाई सरकार के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में होंगी क्‍योंकि इससे बड़ी मात्रा में पानी की बचत होगी और इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण में निहित लागत भी घट जाएगी।
    केंद्रीय जल संसाधन मंत्री ने कहा कि जल, बिजली, परिवहन और संचार विकास के चार सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर घर में सुरक्षित पेयजल और हर खेत में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की इच्‍छुक है। 
     इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के हालिया उद्घाटन का उल्लेख किया, जो 4 करोड़ से भी अधिक लोगों को पानी मुहैया कराएगी और 8 लाख हेक्टेयर भी से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा सुलभ कराने में मदद करेगी। 
      गडकरी ने कहा कि बाढ़ और सूखे से लोगों को बचाने के लिए नदियों को आपस में जोड़ना अत्‍यंत आवश्‍यक है। उन्होंने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने के लिए 30 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है जिनमें से तीन परियोजनाओं यथा केन-बेतवा, पार-तापी-नर्मदा और दमन गंगा-पिंजल परियोजनाओं पर काम तीन माह के भीतर शुरू हो जाएगा। 
     मंत्री ने कहा कि सरकार नदियों को आपस में जोड़ने के लिए एक बड़ा कोष बनाने की संभावनाएं तलाश रही है। गडकरी ने कहा कि शोधित अपशिष्ट जल के उपयोग के लिए नए तरीके ढूंढ़ने होंगे। गडकरी ने कहा कि उन्होंने एनटीपीसी के बिजली संयंत्रों में पुनरावर्तित (रिसाइकिल्‍ड) पानी का उपयोग करने की संभावना तलाशने के लिए विद्युत मंत्री से अनुरोध किया है। 
     उन्होंने नदी के 70 फीसदी पानी का उपयोग करने के लिए अभिनव तरीकों की खोज करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया जो समुद्र में चला जाता है। पंचेश्वर परियोजना का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय में सचिव जल्द ही लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए नेपाल का दौरा करेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि परियोजना पर काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।
       गडकरी ने यह भी उम्‍मीद व्यक्त की कि ‘भारत जल सप्ताह’ के दौरान होने वाले विचार-विमर्श और चर्चाओं से कुछ अच्छे सुझाव सामने आएंगे। केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार वर्ष 2022 तक देश के हर घर में सुरक्षित पेयजल और प्रत्येक खेत में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गंभीरतापूर्वक काम कर रही है। 
     उन्होंने कहा, ‘यह गंभीर चिंता का विषय है कि भूजल का स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है। हमने भूजल का दुरुपयोग किया है एवं इसे बर्बाद किया है। हमें पानी, नदियों एवं भूजल का सम्मान करना होगा और देश में बहने वाली नदियों को अवि‍रल एवं निर्मल बनाना होगा।’ 
     भारत जल सप्ताह 2017 के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि जल और ऊर्जा दो महत्वपूर्ण संसाधन हैं जिनका समुचित संरक्षण और इष्टतम उपयोग राष्ट्र के समेकित विकास के लिए अत्‍यंत आवश्यक है।
      उन्होंने कहा कि देश के 112 जिलों में 20 प्रतिशत से भी कम सिंचाई कवरेज है। उन्होंने यह भी कहा कि पानी की कमी और बाढ़ प्रबंधन की चुनौतियों का सामना करने के लिए समयबद्ध उपायों की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने भूजल के टिकाऊ प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार योजना का प्रस्ताव किया है जो विश्व बैंक से सहायता प्राप्‍त 6,000 करोड़ रुपये की योजना है।
     केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने ‘आईडब्ल्यूडब्ल्यू -2017’ में भाग ले रहे सभी प्रतिनिधियों का धन्यवाद किया और आशा व्‍यक्‍त की कि पानी और ऊर्जा के बुनियादी मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित सत्र नीति निर्माताओं और राष्ट्र के लिए अत्‍यंत लाभदायक साबित होंगे।

तेल-गैस के क्षेत्र में खोज व अनुसंधान

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज विश्व भर के तेल और गैस क्षेत्र से जुड़े मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ बातचीत की। 

    इस बैठक में रोसनेफ्ट, बीपी, रिलायंस, सऊदी अरामको, एक्सॉन मोबिल, रॉयल डच शेल, वेदांता, वुड मैकेंजी, ईएचएस मार्किट, स्लमबरजर, हेलीबर्टन, एक्सकोल, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, गेल, पेट्रोनेट एलएनजी, ऑइल इंडिया, एचपीसीएल, डेलोनेक्स एनर्जी, एनआईपीएफपी, इंटरनेशनल गैस यूनियन, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
   केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और आर. के. सिंह तथा नीति आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे। नीति आयोग द्वारा बैठक का समन्वय किया गया था। अपनी शुरुआती संक्षिप्त टिप्पणी में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने इस क्षेत्र में किए गए कार्यों पर चर्चा की। 
    उन्होंने भारत में ऊर्जा की मांग में अनुमानित वृद्धि और विद्युतीकरण तथा एलपीजी में हुए विस्तार पर भी चर्चा की। एक संक्षिप्त प्रस्तुति में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने भारत में तेल और गैस के क्षेत्र में हाल के विकास और चुनौतियों के बारे में चर्चा की।
    अनेक भागीदारों ने पिछले 3 वर्षों में भारत की प्रगति और सुधारों की सराहना कीप्र् भागीदारों ने उस गति और अभियान की, जिसके साथ प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व सुधार किए हैं। चर्चा के अन्य विषयों में एकीकृत ऊर्जा नीति की आवश्यकता, अनुबंध कार्यक्रम और व्यवस्थाएं, सिस्मिक डाटा सेट की आवश्यकता, जैव-इंधन को बढ़ावा, गैस की आपूर्ति में सुधार, गैस कारोबार केंद्र की स्थापना और विनियामक मुद्दे शामिल हैं।
    कई भागीदारों ने गैस और बिजली क्षेत्र को जीएसटी कार्यक्रम में शामिल करने की जोरदार मांग की। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने तेल और गैस क्षेत्र के बारे में जीएसटी परिषद के हाल के फैसले की चर्चा की। अपने विचारों को साझा करने के लिए भागीदारों को धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 में पिछली बैठक में मिले सुझावों से नीति निर्माण में मदद मिली है। 
      उन्होंने यह भी कहा कि कई क्षेत्रों में सुधार की संभावना अभी भी है। प्रधानमंत्री ने भागीदारों के केंद्रित सुझावों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने सभी भागीदारों को ठोस सुझाव साझा करने के लिए धन्यवाद दिया, जो तेल और गैस के क्षेत्र में भारत की अद्वितीय संभावना और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दिए गए हैं, न कि केवल उनके संबंधित संगठनों की चिंताओं तक सीमित है। 
     प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के सुझावों में नीति, प्रशासनिक मामले के साथ साथ नियामक मामले भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रोसनेफ्त को भारत के ऊर्जा क्षेत्र के समर्थन की उनकी प्रतिबद्धताओं के लिए धन्यवाद दिया।
    उन्होंने सऊदी अरब के शाह के दृष्टि पत्र 2030 की सराहना की। सऊदी अरब की अपनी यात्रा का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में वहां कई प्रगतिशील निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने निकट भविष्य में भारत और सऊदी अरब के बीच विभिन्न अवसरों की संभावना व्यक्त की।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति में एकरूपता नहीं है। उन्होंने व्यापक ऊर्जा नीति के लिए दिए गए सुझावों का स्वागत किया। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में आधारभूत ऊर्जा विकसित करने और ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। 
     उन्होंने जैविक ऊर्जा की संभावना पर जोड़ दिया और कोयले के गैसीकरण के क्षेत्र में भागीदारों और संयुक्त उपक्रमों को आमंत्रित भी किया। उन्होंने तेल और गैस के क्षेत्र में खोज और अनुसंधान के लिए सभी संभावनाओं का स्वागत किया। 
   प्रधानमंत्री ने संकेत देते हुए कहा कि जैसा कि भारत एक स्वच्छ और इंधन के तौर पर अधिक सक्षम अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, उन्होंने इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सभी हिस्से और विशेषकर निर्धनतम लोगों को इसका पूरा लाभ मिलना चाहिए।