Sunday, 19 November 2017

पुस्तक सोशल एक्सक्लूजन एण्ड जस्टिस इन इंडिया का विमोचन

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि हम एक विकसित भारत का निर्माण नही कर सकते यदि समाज में जाति, पंथ, धर्म और लिंग पर आधारित असमानताएं विद्यमान हैं।

  श्री पी.एस.कृष्णन द्वारा लिखित पुस्तक ‘सोशल एक्सक्लूजन एण्ड जस्टिस इन इंडिया’ का विमोचन करने के बाद उपराष्ट्रपति उपस्थित जनसमुदाय को यहां संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावर चन्द गहलोत व अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले सात दशकों से लेखक समाज के वंचित वर्गों की समस्याओं का अध्ययन कर रहे है। इन्होंने भारतीय समाज में भेदभाव को नजदीक से अनुभव किया है।
   पुस्तक इस तथ्य का साक्ष्य है कि उन्हे वंचित वर्गों, दलितों आदिवासियो और सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गो के मामलों की गहरी जानकारी है। लेखक को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में रहने वाले पिछड़े सामाजिक वर्गों की कठिनाईयों का लम्बा अनुभव है और वे इनके निदान के लिए व्यवहारिक और प्रभावी तरीके भी सामने रखते हैं।
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि लेखक ने गांधीजी और डॉ. अम्बेडकर के बीच संवादों का पता लगाया है। पुस्तक में इस बात का वर्णन है कि भारतीय संविधान के अंतिम प्रारूप में इन दोनों व्यक्तियों के पृथक विचारों का किस प्रकार समायोजन किया गया है। 
    पुस्तक संविधान के प्रावधानों का गंभीरता से वर्णन करती है कि किस प्रकार प्रावधानों को अधिनियमों में परिवर्तित किया गया है। उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासी और पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने के पश्चात ही हमारा देश प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकेगा।

कोचीन वैश्विक जहाज मरम्मत का केन्द्र

      कोचीन। केंद्रीय जहाजरानी, सड़क परिवहन व राजमार्ग तथा जल संसाधन एवं नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कोचीन, वैश्विक जहाज मरम्मत का केन्द्र बनने के लिए तैयार है।

    कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड की 970 करोड रूपये की लागत से निर्मित होने वाली अंतर्राष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा की आधारशिला रखने के बाद वे आज कोचीन में इस अवसर पर उपस्थित जन-समुदाय को संबोधित कर रहे थे। 
  यह सुविधा कोचीन पोर्ट ट्रस्ट में निर्मित की जा रही है, जहां सीएसएल ने 40 एकड़ भूमि पट्टे पर दी है। अंतर्राष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा केंद्र आधुनिकतम तकनीक से सुसज्जित होगा, जो छोटे और मध्यम आकार के जहाजों की अधिकांश संख्या को परिचालित करने में सक्षम होगा।
      सीएसएल 130 मीटर न् 25 मीटर की आकार वाले एक लिफ्ट प्रणाली का निर्माण करेगा, जो 6 हजार टन की भार क्षमता को उठाने में सक्षम होगा। इसमें 6 कार्य-स्टेशन होंगे। यह सुविधा 85 जहाजों को मरम्मत कर पाएगी और इस प्रकार सीएसएल अपनी मरम्मत क्षमता को दो गुना कर लेगा।
      अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाज मरम्मत बाजार में भारत के हिस्से को बढ़ाने के महत्व को रेखांकित करते हुए गडकरी ने कहा कि इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 6 हजार नौकरियों का सृजन होगा। इसके अतिरिक्त राज्य में कई अनुषांगिक इकाईयों की स्थापना होगी। इससे रोजगार और अर्थव्यवस्था में गुणात्मक बदलाव होगा।
        गडकरी ने कोचीन में जहाज मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘बिल्ड द शिप-2017’ सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन जहाज निर्माण, जहाज डिजाइन, जहाज मरम्मत और समुद्री सहायक उद्यमों के विकास के लिए किए गए एक अध्ययन की अनुसंशाओं पर आधारित है। इस सम्मेलन में मंत्री ने समुद्री और जहाज निर्माण के क्षेत्र में कौशल विकास के लिए एक उत्कृष्टता केन्द्र (सेंटर फॉर एक्सेलेंस इन मेरीटाइम एण्ड शिप बिल्डिंग) के स्थापना की घोषणा की। 
    सीईएमएस के मुम्बई और विशाखापट्टनम में परिसर होंगे। इसे सीमेंस के सहयोग से जहाजरानी मंत्रालय सागरमाला कार्यक्रम के तहत निर्मित कर रहा है। सीईएमएस पोर्ट और समुद्री क्षेत्र में छात्रों की इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षमता का विकास करेगा। इस सुविधाओं से जहाजों के निर्माण, डिजाइन, परिचालन और प्रबंधन के क्षेत्र में घरेलू जरूरतों की मांग भी पूरी की जा सकेगी। 
     यह संस्थान दक्षिण एशिया में एक अंतरराष्ट्रीय नोडल केंद्र बनना चाहता है, जहां श्रीलंका, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया जैसे देशों के छात्रों को आकर्षित किया जा सके। पोर्ट और समुद्री क्षेत्र में कौशल विकास के लिए इंडोनेशिया यह पहल समुद्री क्षेत्र में मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया के प्रयासों को भी जोड़ देगा। आज कोचीन के लॉन्च समारोह में श्री गडकरी ने सीईएमएस के लोगो का भी अनावरण किया।
     कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड सीएसएल और एचडीपीईएल-हुगली का एक संयुक्त उद्यम है। एचसीएल में सीएसएल और एचडीपीईएल की हिस्सेदारी क्रमशः 74 प्रतिशत और 26 प्रतिशत है। सम्मेलन के दौरान सीएसएल और एचडीपीईएल के बीच एक समझौता हुआ। 
    इसके तहत सीएसएल कोलकाता में एचडीपीईएल की निर्माण सुविधाओं का अधिग्रहण कर लेगा। इस प्रकार सीएसएल कोलकाता की समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करेगा और मजबूती प्रदान करेगा। गडकरी ने आज मन्नार का दौरा किया, जहां उन्होंने बोडेमट्टू से मन्नार तक एनएच 85 के नवीनीकरण की आधारशिला रखी। 42 किलोमीटर लम्बी इस परियोजना की अनुमानित लागत 380.76 करोड़ रुपये है।

भाषाओं को ज्ञान का सेतु बनने में सहायता करनी चाहिए

     हैदराबाद। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि भाषा सुशासन में सहायता कर सकती है क्योंकि सूचना और ज्ञान मिलकर एक प्रबुद्ध नागरिक का निर्माण कर सकते हैं। 

  नायडू आज हैदराबाद में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के 16वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
   इस अवसर पर तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मोहम्मद महमूद अली, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई के उपाध्यक्ष, एच हनुमंतप्पा, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अध्यक्ष, बी ओबिया और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। 
     इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदी ने भारत की एकता, अखंडता और भाषाई सद्भावना के विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि देश के एकीकरण के लिए अधिकांश भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली भाषा से अधिक शक्तिशाली घटक कोई नहीं है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 1936 में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा का कार्यालय विजयवाड़ा में स्थापित किया गया था। इस सभा के अध्यक्षों के रूप में, कोंडा वेंकापापैया पंतलु, आंध्र केसरी तुंगतुरी प्रकाश पंटुलु, बेजवाड़ा गोपालरेड्डी, स्वामी रामानंद तीर्थ ने शानदार कार्य किया। 
     उन्होंने कहा यह जानकर बेहद हर्ष हो रहा है कि हिंदी प्रचार सभा ने सिर्फ हिंदी का प्रचार-प्रसार ही नहीं किया बल्कि बड़ी संख्या में हिंदी अध्यापकों, अनुवादकों एवं प्रचारकों को तैयार किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, आंध्र एवं तेलंगाना आज अपना 16वाँ दीक्षांत समारोह मना रही है।
     उन्होंने गाँधी जी की पंक्तियाँ को भी याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी देश सच्चे अर्थों में तब तक स्वतंत्र नहीं है, तब तक वह अपनी भाषा में नहीं बोलता है। उपराष्ट्रपति ने हिंदी में राष्ट्रभाषा विशारद और राष्ट्रभाषा प्रवीण की डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी।