Wednesday, 30 August 2017

सस्‍ता डीजल एसयूवी व कारों के लिए नहीं

       पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान ने कहा है कि पेट्रोल और डीजल जैसे पेट्रोलियम उत्‍पादों पर कर शुल्‍क लागू करने का भारत का लंबा इतिहास रहा है। कीमतों में वृद्धि से घरेलू उपभोक्‍ताओं को बचाने अथवा विकास परियोजनाओं के लिए सरकार के राजस्‍व में वृद्धि के लिए इन करों शुल्‍कों को समय-समय पर युक्ति संगत बनाया गया है।

       प्रधान यहां डीजल और पेट्रोल के मूल्‍यों के बीच भिन्‍नता विषय पर एक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। डीजल और पेट्रोल के मूल्‍यों के बीच भिन्‍नता के बारे में डॉक्‍टर कीरीट पारिख की अध्‍यक्षता में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को उजागर करते हुए प्रधान ने कहा कि करों शुल्‍कों के अलावा अन्‍य कारकों जैसे प्रौद्योगिकी, विध्‍वंसकारक प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभाव आदि पर भी गौर किया जाना चाहिए। 
     उन्‍होंने कहा कि एक बार जब पेट्रोलियम उत्‍पाद जीएसटी के दायरे में आ जाएंगे, कर की दरों में अंतर का मुद्दा अपने आप ही हल हो जाएगा। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि डीजल का इस्‍तेमाल कृषि संबंधी कार्यों और सार्वजनिक परिवहन के लिए होता है। यही कारण है कि डीजल पर करों शुल्‍कों को पेट्रोल की तुलना में कम रखा गया है।
       उन्‍होंने जोर देकर कहा कि सस्‍ता डीजल एसयूवी और कारों के लिए नहीं है। उत्‍सर्जन की चिंताओं के मद्देनजर धर्मेन्‍द्र प्रधान ने कहा कि भारत स्‍टेज ज्क्ष् (बीएस ज्क्ष्) अप्रैल 2020 में शुरू किया जाएगा। ये सीएनजी की तरह स्‍वच्‍छ होगा। 
      उन्‍होंने कहा कि 30 हजार करोड़ रूपये के निवेश से बीएस ज्क्ष् उत्‍पादन के लिए रिफाइनरियों का उन्‍नयन किया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि जून 2017 से मोटर स्पिरिट (एमएस) और उच्‍च गति के डीजल (एचएसडी) के दैनिक मूल्‍यों के शुरू होने के बाद अंतर्राष्‍ट्रीय मूल्‍यों के साथ बेहतर तालमेल बना है। 
      तेल उद्योग का संचालन प्रबंधन बेहतर हुआ है। इस अवसर पर उन्‍होंने एक पुस्‍तक ए केस फॉर रेशनलाइज ऑफ द सेन्‍ट्रल एक्‍साइस ड्यूटी का भी विमोचन किया। कार्यशाला का आयोजन एकीकृत अनुसंधान और विकास के लिए कार्य (आईआरएडीए) ने किया था।

8.79 लाख करोड़ के निवेश वाली 183 परियोजनाओं की समीक्षा

     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में अति सक्रिय सुशासन और समय पर कार्यान्‍वयन के लिए प्रगति आईसीटी आधारित मल्‍टी मॉडल प्‍लेट फार्म के माध्‍यम से 21वीं इन्‍टर-एक्‍शन बैठक हुई। प्रगति की 21वीं बैठक में 8.79 लाख करोड़ रूपये के कुल निवेश वाली 183 परियोजनाओं की संचयी समीक्षा की गई। 17 क्षेत्रों में जन शिकायतों की भी समीक्षा की गई।

   प्रधानमंत्री ने पेटेंट और ट्रेडमार्कों से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई और समाधान की प्रगति की समीक्षा की। उन्‍होंने कार्य निष्‍पादन के सुधार पाया और संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे पेटेंट और ट्रेडमार्क आवेदन पत्रों पर और तेजी से कार्यवाही करने की दिशा में काम करें। अधिकारियों ने स्‍पष्‍ट किया कि पेटेंट और ट्रेडमार्क प्रदान करने और जनशक्ति बढ़ाने की दिशा में तेजी से कदम उठाए गये हैं। 
       प्रधानमंत्री ने इस संबंध में नवीनतम उपलब्‍ध प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल, प्रक्रिया को सुचारू बनाने और अन्‍तर्राष्‍ट्रीय मानक प्राप्‍त करने के महत्‍व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, राजस्‍थान, महाराष्‍ट्र, उत्‍तराखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना और केरल सहित अनेक राज्‍यों में फेली रेलवे, सड़क, विद्युत और तेल पाइपलाइन तथा स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में 56 हजार करोड़ रूपये से ज्‍यादा लागत की नौ महत्‍वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
      आज जिन परियाजनाओं की समीक्षा की गई उनमें दिल्‍ली, मुंबई औद्योगिक कारिडोर आंध्र प्रदेश के मंगलागिरी, पश्चिम बंगाल के कल्‍याणी, महाराष्‍ट्र के नागपुर और उत्‍तर प्रदेश के चार नये एम्‍स के निर्माण शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने स्‍मार्ट सिटी मिशन की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्‍होंने चुनौती भरे कार्यों में शहरों की सहभागिता को सराहा। 
     उन्‍होंने कहा कि अब प्रत्‍येक के सामने यही चुनौती है कि 90 चुने हुए शहरों में इस मिशन के कार्यान्‍वयन को सुनिश्चित करने तथा उच्‍च गुणवत्‍ता के साथ इस कार्य को तेजी से अन्‍जाम तक ले जाना सुनिश्चित करें। वन अधिकार अधिनियम की प्रगत‍ि की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों को सुनिश्‍चित करने और उनके दावों के तेजी से निपटान के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल के महत्‍व पर जोर दिया।
       प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी के संबंध में उठाई गई शंकाएं अब निराधार साबित हुईं हैं और इसमें सुचारू लेन-देन हो रहा है। उन्‍होंने सभी मुख्‍य सचिवों से कहा कि वे इस संबंध में एक माह के भीतर उल्‍लेखनील लक्ष्‍य प्राप्‍त करने के लिए जीएसटी के अन्‍तर्गत पंजीकरण में वृद्धि करने के लिए अपने प्रयासों में और तेजी लाएं। सरकारी ई-मार्केट प्‍लेस (जीईएम) के संबंध में उन्‍होंने कहा कि पोर्टल से पारदर्शिता में सुधार आया है और फिजूलखर्ची में कमी आई है।
       उन्‍होंने सभी राज्‍यों के मुख्‍य सचिवों को कहा कि वे सरकारी खरीद में जीईएम को प्राथमिकता दें।

वाराणसी व हरिद्वार में निजी साझेदारी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

       राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने गंगा नदी बेसिन के दो बड़े शहरों वाराणसी व हरिद्वार में हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण और मरम्मत का काम निजी क्षेत्र को प्रदान किया है। 

   अपनी तरह के इस पहले हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण का काम शुरू हो गया है। वाराणसी में 153.16 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले 50 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण, परिचालन और मरम्मत का काम भारतीय अवसंरचना कंपनी, ईसेल इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड को दिया गया है।
      हरिद्वार में 171.53 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले कुल 82 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता (जगजीतपुर में 68 एमएलडी अ सराय में 14 एमएलडी) वाले इस सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण, परिचालन और मरम्मत का काम एचएनबी इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। यह परियोजना सुनिश्चित करेंगी कि गंगा नदी में सीवरेज का अशोधित पानी ना जाये। 
     हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के आरंभ से कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय कंपनियों ने एनएमसीजी की परियोजनाओं में रूचि दिखाई है। बाजार में मौजूद कंपनियों के साथ वार्ता और बैठकों ने बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को आकर्षित किया। 30 से ज्यादा कंपनियों ने वाराणसी और हरिद्वार परियोजनाओं के लिए बैठक में बोली से पहले रूचि दिखाई है। 
    कंपनी का चुनाव 15 वर्षों की अवधि के लिए अवसंरचना के विकास, परिचालन की न्यूनतम बोली के आधार पर किया गया। भारत सरकार को हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत वित्त पोषण के साथ जनवरी 2016 में कैबिनेट का अनुमोदन मिल गया। इस मॉडल के अंतर्गत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण, परिचालन और मरम्मत का काम एक विशेष उद्देश्य वाहन (एसपीवी) की सहायता से किया जाएगा।
      जिसका निर्माण क्षेत्रीय स्तर पर ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी द्वारा किया जाएगा। इस मॉडल के अनुसार 40 प्रतिशत लागत उद्धृत राशि का भुगतान निर्माण कार्य पूरा होने पर किया जाएगा जबकि बकाया 60 प्रतिशत लागत राशि का भुगतान वार्षिक परिचालन और मरम्मत लागत (ओएंडएम) खर्च, परियोजना की अवधि के अनुसार किया जाएगा। 
       इस मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वार्षिक और परिचालन और मरम्मत (ओएंडएम) भुगतान दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के प्रदर्शन से जुड़े हुए हैं। बेहतर जवाबदेही, स्वामित्व और सर्वोत्तम प्रदर्शन से परिसंपत्तियों का बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होगा। 
      देश में पहली बार हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल को सीवरेज प्रबंधन क्षेत्र में अपनाया गया है। पहले भी इस तरह के मॉडल को हाइवे क्षेत्र में सफलता पूर्वक अपनाया गया है।

बांध सुरक्षा क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने के लिए समझौता

     केंद्रीय जल आयोग ने विभिन्‍न कार्यान्वयन एजेंसियों और सीडब्‍लयूसी के बांध पुनर्वास प्रयासों में सहायता के लिए एनआईटी कालीकट और एनआईटी राउरकेला के साथ समझौता पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

    जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने विश्‍व बैंक की सहायता वाली बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के जरिए बांध सुरक्षा के क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने के लिए चयनित प्रमुख अकादमिक और अनुसंधान संस्‍थानों को बोर्ड में शामिल किया है। इसके तहत संस्‍थानों के संकायों की जांच प्रयोगशालाएं सुदृढ़ करना, विशलेषणात्‍मक क्षमताएं बढ़ाना, सर्वश्रेष्‍ठ वैश्विक संस्‍थानों का दौरा करना और बांध स्‍थलों की सुरक्षा शामिल है। 
     सीडब्‍लयूसी ने जनवरी 2017 में आईआईटी मद्रास और आईआईएससी बैंगलूरू के साथ भी समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए थे। मंत्रालय इन संस्‍थानों की जांच और मॉडलिंग क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष उपकरण तथा सॉफ्टवेयर खरीद में सहायता करता है। 
           डीआरआईपी सात राज्‍यों में 225 बांधों के पुनर्वास में सहायता कर रहा है जिसमें उसे विभिन्‍न स्‍तरों पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन बांधों के मालिकों को बांध की स्थिति की जांच करने और पुनर्वास प्रयासों में सहायता के लिए तकनीकी मदद की आवश्‍यकता है। 
     भारत सरकार ने बांध सुरक्षा क्षेत्रों में चुने गए प्रमुख अकादमिक संस्‍थानों की क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है ताकि वे बांध स्‍थल पर जाकर सामग्री की जांच कर सके और बांध पुनर्वास प्रयासों में बांध मालिकों को प्रशिक्षण और परामर्श दे सकें।

अटल पेंशन योजना के 62 लाख ग्राहक

      एक राष्‍ट्र एक पेंशन के अंतर्गत कुल 3.07 लाख अटल पेंशन योजना (एपीवाई) खाते हो गए हैं। इस अभियान के तहत बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले देश के सबसे बड़े बैंकों में से एक भारतीय स्‍टेट बैंक शामिल है जिसमें शानदार 51 हजार एपीवाई खाते हैं।

   अन्य प्रमुख बैंक जैसे केनरा बैंक में 32,306 और आंध्रा बैंक में 29,057 एपीवाई खाते हैं जबकि अन्‍य निजी श्रेणी के बैंकों में कर्नाटक बैंक में 2,641 एपीवाई खाते हैं। आरआरबी श्रेणी में इलाहाबाद, उत्‍तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में 28,609 खाते हैं। इसके बाद मध्‍य बिहार ग्रामीण बैंक में 5,056, बड़ौदा उत्‍तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में 3,013, काशी गोमती संयुक्‍त ग्रामीण बैंक में 2,847 और पंजाब ग्रामीण बैंक में 2,194 एपीवाई खाते हैं।
       बचत बैंक खातों सहित विभिन्‍न वित्‍तीय सुविधाओं पर ब्‍याज दर कम हो रहा है। ऐसे समय में पेंशन योजना के रूप में अटल पेंशन योजना ग्राहकों के लिए गांरटीड 8 प्रतिशत दर से रिटर्न सुनिश्चित करता है। इस योजना में 20 से 42 वर्ष के लिए निवेश करने पर परिपक्‍वता के समय रिटर्न दर आठ प्रतिशत से अधिक रहने पर उच्‍च आय का अवसर भी उपलब्‍ध होता है।
       नामांकन बढ़ने से संपत्तियों का वित्‍तीयकरण होता है। लोग पेंशन सुविधाओं की ओर आकर्षित होते है, जो भारत सरकार ग्राहक, उसके जीवन साथी और ग्राहक द्वारा नामित व्‍यक्ति को निश्चित रिटर्न गारंटी देती है। पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के सहयोग से वित्‍तीय सेवा विभाग ने कई एपीवाई अभियान आयोजित किए हैं, जिनके माध्‍यम से एपीवाई सेवा प्रदाता बैंक और डाक विभाग किसी भी पेंशन योजना के त‍हत कवर नहीं किए गए लोगों के पास जाकर एपीवाई योजना की विशेषताओं और लाभों की जानकारी देते हैं। 
      इस योजना में नामांकन करने के लिए उन्‍हें प्रोत्‍साहित करते हैं। पीएफआरडीए ने एपीवाई सेवा प्रदाता बैंकों के साथ मिलकर देशभर में 2 से 19 अगस्‍त, 2017 तक राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पेंशन जागरूकता अभियान ‘एक राष्‍ट्र एक पेंशन’ आयोजित किया था। योजना शुरू होने के दो वर्ष बाद अब तक 62 लाख ग्राहक अटल पेंशन योजना के सदस्‍य बने हैं।
     पीएफआरडीए का उद्देश्‍य किसी भी पेंशन योजना के अंतर्गत कवर नहीं किए गए अधिकतम लोगों को एपीवाई योजना के तहत कवर करना है ताकि भारत एक राष्‍ट्र के रूप में पेंशन रहित से पेंशन भोगी समाज बने और नागरिक अपनी वृद्धावस्‍था में सम्‍मानपूर्वक जीवन जी सके।