Sunday, 25 February 2018

कनाडा के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

   नई दिल्ली। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। 

   राष्ट्रपति भवन में कनाडा के प्रधानमंत्री की अगवानी करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा के साथ हम अपने संबंधों को उच्च प्राथमिकता देते हैं। लोकतंत्र, बहुलतावाद और कानून का राज हमें एक दूसरे से बांधता है।
     हाल के समय में निवेश, शिक्षा, ऊर्जा और सम्पर्कता के क्षेत्रों में हमारे सहयोग में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 
   राष्ट्रपति ने कहा कि भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी में अपार क्षमता मौजूद है। भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ रही है। यहां कनाडा के निवेश के नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं। भारत कनाडा की कंपनियों को मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्मार्ट सिटी, संरचना विकास और स्किल इंडिया जैसी पहलों में साझेदारी करने के लिए आमंत्रित करता है।
    राष्ट्रपति ने बल देकर कहा कि दोनों देशों को अपने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और उसमें विविधता लाने की दिशा में काम करना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाजों को आतंकवाद और उग्रवाद जैसी ताकतों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रणनीतिक साझेदार होने के नाते हमें आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के विरूद्ध मिलकर खड़ा होना होगा।

फिल्‍मों को बदलाव का साधन बनना चाहिए

    चेन्‍नई। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि फिल्मों को बदलाव का साधन बनना चाहिए। सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना चाहिए तथा अपनी लोकप्रियता को कम किए बिना सांप्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को भी बढ़ावा देना चाहिए।

  उप राष्‍ट्रपति आज चेन्‍नई में श्री बी नागी रेड्डी पर एक डाक टिकट और एक पुस्‍तक जारी करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, राज्‍य के उच्च शिक्षा मंत्री के.पी.अनबलागन, तमिलनाडु के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल एम. संपत और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। 
    उप राष्ट्रपति ने कहा कि श्री नागी रेड्डी एक जाने-माने प्रकाशक, सफल फिल्म निर्माता, समाजसेवी और एक महान मानवतावादी थे। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे सफल परियोजनाओं में से एक 1947 में बच्चों की पत्रिका 'चंदामामा' का शुभारंभ करना था। सच्‍चाई यह है कि नेत्रहीनों के लिए चंदामामा का चार भाषाओं में ब्रेल संस्करण भी था, इससे उनके अंदर नेत्रहीनों के प्रति मानवीयता दृष्टिकोण झलकता है। 
     उपराष्ट्रपति ने फिल्म निर्माताओं का आह्वान किया कि वे भ्रष्टाचार, जातिवाद, शराब और नशीले पदार्थों की लत, महिलाओं पर अत्याचार, लिंग आधारित भेदभाव, सामंतवाद और धार्मिक या वैचारिक अतिवाद के खतरे जैसी बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रयास करें।
    उन्होंने कहा कि फिल्म व्यवसाय से जुड़े लोगों को खुद से सवाल करना चाहिए कि क्या फिल्में समाज में होने वाली घटनाओं का आईना हैं? उन्होंने कहा कि सोचना एकदम गलत है कि हिंसा, अपराध और अश्लीलता का चित्रण किए बिना साफ और विशुद्ध रूप से मनोरंजक फिल्में नहीं बनाई जा सकती हैं। 
      उपराष्ट्रपति ने कहा कि मनोरंजन के नाम पर हिंसा और अश्लीलता को असंगत तरीके से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, खासतौर से जब फिल्मों का जनता पर काफी असर पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि सभी जानते हैं कि सिनेमा संचार का एक शक्तिशाली माध्यम है। हिंसा, असहिष्णुता और अपराध के वर्तमान समय में, फिल्म निर्माताओं की बड़ी जिम्मेदारी है कि वे संदेश देने वाली फिल्में बनाएं और फिल्में मनोरंजक भी होनी चाहिए।

शिशु बिना शिक्षा के वयस्क के रूप में विकसित नहीं हो सकता

    नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास एवं जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने फिजी के नादी में आयोजित राष्ट्रकुल शिक्षा मंत्रियों के 20वें सम्मेलन (20 सीसीईएम) में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व किया।

  सम्मेलन की थीम थी ‘अनुकूलता एवं लचीलापन: क्या शिक्षा कारगर हो सकती है? डॉ. सिंह ने फिजी के यूनिवर्सिटी ऑफ साऊथ पैसिफिक के कुलपति डॉ. राजेश चंद्रा द्वारा ‘20 सीसीईएम विषयगत मुद्वों‘ पर प्रस्तुति पर ‘प्रतिक्रिया वक्तव्य‘ दिया था।
    मंत्री ने उल्लेख किया था कि सतत विकास लक्ष्यों का मूल उद्वेश्य हमारे शिक्षकों एवं छात्रों में भी सार्वभौमिक, मानवतावादी, नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को अंतर्निविष्ट करना एवं उनका पोषण करना है। 
   उन्होंने जोर देकर कहा कि अच्छी शिक्षा को एक वैश्विक एजेंडा बन जाना चाहिए। जब तक सभी देशों के बच्चे अच्छी तरह से शिक्षित, कुशल नहीं हो जाते एवं रोजगार से नहीं जुड़ जाते, विश्व शांति सुनिश्चित करने की संभावना अस्पष्ट बनी रहेगी।
     मंत्री ने सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी4) पर विचार विमर्शों के दौरान ‘वयस्क शिक्षा एवं अध्ययन‘ पर भी एक वक्तव्य दिया था। डॉ. सिंह ने प्रतिभागी राष्ट्रकुल सदस्यों को भारत सरकार द्वारा वयस्क शिक्षा के लिए ‘राष्ट्रीय साक्षरता मिशन‘, ‘साक्षर भारत‘ ; मतदाता साक्षरता (मतदान करने का प्रतिशत बढ़ाने के लिए), वित्तीय साक्षरता (प्रधानमंत्री जन धन योजना), सीमांत वर्गों के लिए कानूनी साक्षरता और वयस्कों के लिए स्व रोजगार प्रशिक्षण (कौशल विकास) पाठ्यक्रमों, आईसीटी-इनैबल्ड अध्ययन रूपांतरण (मैसिव ओपेन ऑनलाइन लर्निंग कोर्सेस (एमओओसीएस/स्वयम), राष्ट्रीय डिजिटल लाईब्रेरी, आदि जैसी आरंभ की गई विभिन्न योजनाआं के बारे में जानकारी दी। 
    उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोई भी शिशु बिना शिक्षा के वयस्क के रूप में विकसित नहीं हो सकता। मंत्री महोदय के वक्तव्यों एवं टिपण्णियों की सभी प्रतिभागी देशों द्वारा काफी सराहना की गई। डॉ. सिंह ने सम्मेलन के दौरान फिजी के प्रधानमंत्री रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) माननीय जोसेइया वोरेक बैनीमारामा से मुलाकात की। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी जी की तरफ से, डॉ. सिंह ने 11 मार्च, 2018 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले सौर शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। फिजी के प्रधानमंत्री ने धन्यवाद दिया एवं शिखर सम्मेलन में अपनी प्रतिभागिता की पुष्टि की। 
    डॉ. सिंह ने फिजी के शिक्षा मंत्री श्री अयाज सैयद खैयूम के साथ भी विचार विमर्श किया। डॉ. सिंह की 21 फरवरी, 2018 को ब्रिटेन के शिक्षा मंत्री डॉ. निक गिब; ऑस्ट्रेलिया की सहायक शिक्षा मंत्री सुश्री केरेन एंड्रज; एवं टोंगा के शिक्षा मंत्री पेनिसीमनी इपेंसिया के साथ भी द्विपक्षीय सार्थक बैठक हुई। मंत्री ने 24 फरवरी, 2018 को विभिन्न द्विपक्षीय मुद्वों पर चर्चा करने के लिए न्यूजीलैंड की सहायक शिक्षा मंत्री सुश्री जेनी सलेसा से भी मुलाकात की। 
    डॉ. सिंह की 21 फरवरी, 2018 को बहुपक्षीय सहयोग पर विचार विमर्श करने के लिए राष्ट्रकुल के महासचिव सुश्री पैट्रिसिया स्कॉटलैंड के साथ भी अच्छी बैठक हुई। डॉ. सिंह ने रामकृष्ण मिशन द्वारा संचालित विवेकानंद महाविद्यालय का भी दौरा किया जहां उन्होंने महाविद्यालय के छात्रों/शिक्षकों से बातचीत की। 22 फरवरी, 2018 को मंत्री ने भारतीय उच्चायोग में भारतीय डायसपोरा के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए सुवा की यात्रा की जहां ‘विश्व हिन्दी दिवस‘ का आयोजन किया गया।
     उन्होंने फिजी के तीन नागरिकों को पुरस्कार प्रदान किया जो फिजर में हिन्दी भाषा को बढ़ावा देने एवं प्रसार करने में बेशुमार योगदान दे रहे हैं। ‘हिन्दी भाषा एवं संस्कृति‘ पर डॉ. सिंह के भाषण ने भारतीय डायसपोरा के दिलों को छू लिया। 22 फरवरी, 2018 को मंत्री ने तवुवा में राबुलु सनातन के एक नए विद्यालय परिसर का उद्घाटन किया।
    इस अवसर पर, फिजी के शिक्षा मंत्रालय की स्थायी सचिव सुश्री एलिसेन ब्रुचेल भी उपस्थित थीं। यह विद्यालय 2016 के फरवरी महीने में कैट-5 तूफान ‘विंस्टन‘ के कारण बुरी तरह ध्वस्त हो गया था। डॉ. सिंह ने 23 फरवरी, 2018 को लौटोका में गिरमिट सेंटर का दौरा किया जहां उन्होंने केंद्र के पुस्तकालय को 100 किताबें उपहारस्वरूप भेंट कीं तथा गिरमिट सेंटर के अधिकारियों से मुलाकात की।
     इसके बाद मंत्री ने लौटोका में फिजी विश्वविद्यालय के रविंद्रनाथ टैगोर सेंटर का भ्रमण किया जहां उन्होंने केंद्र को 100 किताबें उपहारस्वरूप भेंट कीं। फिजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रेम मिसिर द्वारा संपादित पुस्तक ‘द सुबालटर्न इंडियन वूमेन‘ (गिरमिट महिलाओं पर) की प्रस्तुति के दौरान भारतीय डायसपोरा के साथ उनकी शानदार मुलाकात रही।
     मॉरीशस की शिक्षा मंत्री श्रीमती लीला देवी भी इन सामुदायिक मुलाकातों के दौरान उपस्थित रहीं और उन्होंने भारतीय डायसपोरा से अगस्त, 2018 में मॉरीशस में आयोजित होने वाले ‘विश्व हिन्दी सम्मेलन‘ में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की। डॉ. सिंह ने‘ संस्कृति, समाज एवं सभ्यता के विकास में महिलाओं की भूमिका‘ एवं ‘स्वास्थ्य, भाषा एवं संस्कृति का संरक्षण‘ पर भाषण दिया जो भारतीय डायसपोरा को बहुत प्रेरणादायक लगा।