Wednesday, 11 October 2017

निर्मल गंगा सरकार की सर्वोच्‍च प्राथमिकता

     नई दिल्ली। केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने स्‍वच्‍छ गंगा राष्‍ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) पर नई दिल्‍ली में एक संवादमूलक वेबसाइट शुरू की ताकि कॉर्पोरेट गंगा संरक्षण के लिए सामाजिक जिम्‍मेदारी को हाथ में ले सकें। 

     इस वेब पेज के जरिए कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्‍मेदारी (सीएसआर) कोष के अंतर्गत हाथ में ली जा सकने वाली संभावित परियोजनाओं और गतिविधियों का विवरण आसानी से प्राप्‍त हो सकता है। यह वेब पेज एनएमसीजी की वेबसाइट पर उपलब्‍ध है। 
      गडकरी ने इस अवसर पर एनएमसीजी सूचना पत्र का शुरूआती अंक जारी किया। इस अवसर पर गडकरी ने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम में अगले वर्ष दिसम्‍बर तक महत्‍वपूर्ण प्र‍गति दिखाई देगी। कार्यक्रम का बड़ा हिस्‍सा मार्च 2019 तक समाप्‍त हो जाएगा।
       गडकरी ने निजी क्षेत्र का आह्वान किया कि वे सीएसआर ग‍तिविधियों के अंतर्गत नमामि गंगे की विभिन्‍न परियोजनाओं को हाथ में लेकर अपने संसाधनों, पहुंच और अनुभव के साथ गंगा संरक्षण के विशाल कार्य में शामिल हों। उन्‍होंने धार्मिक संस्‍थानों और एनजीओ का आह्वान किया कि वे गंगा नदी के किनारे बसे गांवों को गोद लेकर उन्‍हें आदर्श गंगा ग्राम के रूप में विकसित करें। 
    गडकरी ने जानकारी दी कि नमामि गंगे की 184 परियोजनाओं में से 46 परियोजनाएं अब तक पूरी हो चुकी हैं। शेष परियोजनाएं पूरा होने के विभिन्‍न चरणों में हैं। गडकरी ने कहा कि निर्मल गंगा सरकार की सर्वोच्‍च प्राथमिकता है, उन्‍होंने कहा कि गंगा नदी के तट पर बसे 97 शहरों का 1750 एमएलडी सीवेज कचरा गंगा नदी में चला जाता है। इन सभी शहरों में राज्‍य सरकारों, नगर निगम और कॉर्पोरेट कंपनियों की मदद से सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्‍थापित करने की जरूरत है।
     गडकरी ने जानकारी दी की प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 14 अक्‍तूबर 2017 को पटना में 140 एमएलडी के चार एसटीपी स्‍थापित करने की आधारशिला रखेंगे। उन्‍होंने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय ऐसे नवप्रवर्तनशील तरीके अपना रहा है जिससे नदी में सीवेज का पानी बिलकुल न गिरे। 
    गडकरी ने कहा कि गंगा के तट पर एनटीपीसी की 23 विद्युत परियोजनाएं हैं। हम इन विद्युत परियोजनाओं को एसटीपी का दोबारा प्रयोग में आने लायक पानी बेचने की योजना बना रहे हैं। इस पानी का इस्‍तेमाल ट्रेनों की धुलाई के लिए किया जा सकता है। किसान सिंचाई के लिए भी इसे इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इस तरीके से हम गंगा में सीवेज का पानी बिल्‍कुल नहीं गिरने देने की अवस्‍था तक पहुंच सकते हैं। 
      इस अवसर पर स्‍वच्‍छ गंगा राष्‍ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) और राज्‍य स्‍तर की अमल में लाने वाली एजेंसियों (हरि‍द्वार के लिए उत्‍तराखंड पेयजल निगम और उत्‍तर प्रदेश के लिए उत्‍तर प्रदेश जल निगम) ने सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) के निर्माण और रख-रखाव के लिए निजी क्षेत्र के रियायत पाने वालों के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्‍ताक्षर किए। 
   वाराणसी 50 एमएलडी के एसटीपी निर्माण, उसके संचालन और रख-रखाव का कार्य 153.16 करोड़ की अनुमानित लागत पर एस्‍सेल इन्‍फ्रा प्रोजेक्‍ट्स लिमिटेड के नेतृत्‍व वाले संकाय को सौंपा गया है। हरिद्वार में, एचएनबी इंजीनियर्स प्राइवेट लि‍मिटेड को 171.53 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत पर 82 एमएलडी (जगजीतपुर में 68 एमएलडी और सराय में 14 एमएलडी) की क्षमता के सीवेज शोधन का ठेका प्राप्‍त हुआ है। 
    परियोजनाओं के जरि‍ए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अशोधित सीवेज गंगा नदी में न बहे, इससे भारत के प्रमुख नमामि गंगे कार्यक्रम को गति मिलेगी। इन दो नए/हरित क्षेत्र के एसटीपी का निर्माण जल्‍द ही शुरू होगा। दोनों परियोजनाएं शत-प्रतिशत केन्‍द्रीय सहायता प्राप्‍त है। विश्‍व बैंक के समूह का सदस्‍य अंतर्राष्‍ट्रीय वित्‍त निगम (आईएफसी) एनएमसीजी का कारोबार सलाहकार सहयोगी है।
     समझौते पर हस्‍ताक्षर होना निर्मल गंगा के स्‍वप्‍न को हकीकत में बदलने की दिशा में एक प्रमुख कदम है क्‍योंकि भारत में ऐसा पहली बार हुआ है कि हाईब्रिड एन्यूइटी आधारित पीपीपी मोड को सीवरेज क्षेत्र में अपनाया गया है। एनएमसीजी का कार्य यहीं पर नहीं रूकता है। हाईब्रिड एन्यूइटी मोड (एचएएम) के अंतर्गत सीवेज शोधन परियोजना का दूसरा भाग तैयारी के चरण में है। 
      एचएएम के अंतर्गत मंजूर आगामी परियोजनाओं में इलाहबाद में नैनी, झूंसी और फाफामऊ में एसटीपी (72 एमएलडी), कानपुर के साथ लगे उन्‍नाव, शुक्‍लागंज और बिठूर (21.4 एमएलडी) में एसटीपी, बिहार में दीघा और कंकड़बाग (150 एमएलडी), कोलकाता और हावड़ा (141 एमएलडी) में एसटीपी, फर्रूखाबाद (30 एमएलडी) में एसटीपी, भागलपुर (65 एमएलडी) में एसटीपी शामिल हैं। इनमें से 10 परियोजनाओं के लिए टेंडर दस्‍तावेज तैयार किए जा रहे हैं। 
    एनएमसीजी ने कानपुर, इलाहाबाद,पटना और कोलकाता में सीवेज शोधन ढांचे के समाकलन के लिए डिजाइन और कार्य सम्‍पादन सलाहकार की सहायता के लिए रणनीतिक परामर्शदाताओं की नियुक्ति की है। सीवरेज क्षेत्र में यह सफलता एक मिसाल है क्‍योंकि इससे बेहतर जवाबदेही, स्‍वामित्‍व और अधिकतम कार्य सम्‍पादन के कारण सीवेज ढांचा परिसम्‍पत्तियों का निरंतर कार्य निष्‍पादन सुनिश्चित होगा।
     परिणामोन्‍मुखी दृष्टिकोण अपनाते हुए हाइब्रिड एन्‍यूइटी मोड की सबसे महत्‍वपूर्ण विशेषता यह है कि एन्‍यूइटी और संचालन तथा रखरखाव भुगतान दोनों ही एसटीपी के कार्य-निष्‍पादन से जुड़े हैं जैसा कि पहले नहीं होता था जब ईपीसी अथवा डीबीओडी मोड के अंतर्गत परियोजनाओं को लागू किया जाता था। इस अवसर पर केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और डॉक्‍टर सत्‍यपाल सिंह मौजूद थे।

दृष्टिकोण संवेदनशील, उत्तरदायी व समावेशी होना चाहिए

    नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि प्रौद्योगिकी आधारित सरकारी प्रक्रियाएं समकालीन भारत में विविध चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक हैं। वे भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) की 63 वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित कर रहे थे।

  उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईआईपीए को भारतीय प्रशासन, परिवर्तनों को आत्‍मसात करने, सुधारों की जांच करने और अनुसंधान आकलन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को चलाने का 6 दशकों से भी अधिक का अनुभव है। 
   उन्होंने कहा कि जन प्रबंध हमेशा परिवर्तन का प्रबंधन रहा है। इससे समाज, अर्थव्‍यवस्‍था और राजनीतिक जीवन में परिवर्तन आया है। प्रमुख लोकतंत्र में यह बहुत आवश्‍यक है। 
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें केंद्र और राज्य सरकारों की नवाचार और नागरिक-केंद्रित योजनाओं को लागू करने के लिए अपनी प्रशासनिक योग्‍यताओं को फिर से तैयार करना है। उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि भारत का पन्द्रह वर्ष का विकास एजेंडा नागरिक-केंद्रिता के वैश्विक संयुक्त राष्ट्र सशक्त विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। इस एजेंडा को उपयोग से पहले सुशासन और समाज के हर वर्ग तक पहुंच बनाकर सुराज को स्‍वराज में बदलना है। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारा उद्देश्‍य बेहतर निपुणता और दक्षता पर केंद्रित होना चाहिए। हमें अपनी शासन प्रणालियों में 'मूल्यांकन' और निरंतर 'सीखने' की संस्कृति का निर्माण करना है। उन्‍होंने उम्‍मीद जाहिर की कि आईआईपीए अपने जैसे संस्‍थानों के साथ मिलकर राज्‍य स्‍तर पर एक व्‍यापक शासन सुधार एजेंडा तैयार करके केन्‍द्र में जनता के साथ शासन प्रणाली का सृजन करेगा। 
    उन्‍होंने कहा कि कार्यक्रमों को अंत्योदय दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए, जिसमें अधिक वंचितों हाशिए वाले और जनसंख्‍या समूहों पर ध्‍यान केंद्रित किया जाता है। हमारे दृष्टिकोण को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और समावेशी होना चाहिए, जो महिलाओं दिव्‍यांगों की दिल से देखभाल करता है। 
    समाज के सभी वर्गों को बिना किसी भेदभाव के "सब का साथ, सबका विकास" सिद्धांत की भावना वाले लोकतांत्रिक शासन के लाभों को फैलाने में पूरी तरह समर्पित है। 
    उन्‍होंने कहा कि अधिकारियों और पूरे प्रशासनिक प्रणाली को आज के विकास की अनिवार्यताओं को समझना चाहिए। प्रत्येक नागरिक की सेवा के सामान्य लक्ष्य की प्रक्रियाओं को दोबारा शुरू करना चाहिए।
    उपराष्ट्रपति ने अनेक प्रकाशन जारी किए। आईआईपीए की ऑनलाइन पुस्तकालय, डिजिटल नॉलेज रिपोजिटरी का उद्घाटन किया। जिसमें संस्‍थान के अनुसंधान उत्पादन और प्रकाशित संसाधनों का प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने आईआईपीए और लोक प्रशासन के क्षेत्र में प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए "पॉल एच एपलबाई पुरस्कार" भी प्रदान किया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित नानाजी देशमुख प्लांट फिनोमिक्स केंद्र का उद्घाटन

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूसा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित नानाजी देशमुख प्लांट फिनोमिक्स केंद्र का उद्घाटन किया । 

  जलवायु परिवर्तन एवं अजैव प्रतिबल जैसे कि सूखा, जलक्रांति, ताप, लवणता, पोषक तत्वों की कमी तथा जैव प्रतिबल, फसल उत्पादकता एवं गुणवत्ता को दुष्प्रभावित करते हैं। इन समस्याओं को दूर करने जननद्रव्य संसाधन-सम्पदा से अनुकूलन एवं उपज गुणों के लिए जीनों की पहचान करना आवश्यक है। 
  जलवायु अनुकूल फसल-किस्में विकसित करने के लिए उनका उपयोग किया जाना चाहिए। लक्षण-प्ररूपण की पारम्परिक विधियां प्रायः क्षतिकारक होती हैं। पादप-विकास की विभिन्न अवस्थाओं के दौरान पौधों में होने वाले गतिकीय परिवर्तनों का अभिलक्षण नहीं कर पाती हैं।
       लक्षण प्ररूपण वह प्रमुख बाधा है जो जीनोमिक्स की सहायता से फसल सुधार में जननद्रव्य संसाधनों के उपयोग को सीमित करती है। लक्षणप्ररूप एवं जीनप्ररूप के बीच एक सेतु के रूप में, हाल ही में फिनोमिक्स का बहु-विषयक विज्ञान विकसित हुआ है। नॉन-इनवेजिव सेंसर्स तथा प्रगत इमेज प्रोसेसिंग कम्प्यूटेशनल कार्यक्रमों का उपयोग कर बुआई से कटाई तक विभिन्न विकासशील अवस्थाओं पर लगभग वास्तविक समय में पौधों के कार्यिकीय एवं आकारिकीय गुणों का अविनाशकारी अभिलक्षणन, फिनोमिक्स है। 
    मानव स्वास्थ्य एवं रोगों के निदान में उपयोग किए जाने वाले एम.आर.आई. या सीटी-स्कैन के समान ही फिनोमिक्स में भी पौधों को क्षति पहुंचाए बिना लगभग वास्तविक समय में, क्षति न पहुंचाने वाले सैंसर्स एवं उन्नत प्रतिबिम्ब प्रसंस्करण अभिकलनी कार्यक्रमों का उपयोग होता है। 
    राष्ट्रीय कृषि विज्ञान निधि (भा.कृ.अ.प.) द्वारा दी गई वित्तीय सहायता के साथ 45 करोड़ रूपये की लागत से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने एक अत्याधुनिक, स्वचालित, अविनाशकारी पादप फिनोमिक्स केन्द्र की स्थापना की है। यह भारत की सबसे बड़ी और विश्व के सार्वजनिक निधि प्राप्त संस्थानों की सर्वोत्तम सुविधाओं में से एक है।
      यह केन्द्र हाई-टैक नियंत्रित जलवायु वाले ग्रीनहाउस, गतिशील फील्ड कन्वेयर सिस्टम, स्वचालित भारोत्तोलन एवं सिंचाई स्टेशन और विभिन्न इमेंजिंग सैंसर्स प्रतिबिम्बों का स्कैनेलाइजर 3 डी सॉफ्टवेयर द्धारा विश्लेषण इत्यादि सुविधाओं से सुसज्जित है। जलवायु अनुकूल फसल-किस्में विकसित करने के लिए श्रेष्ठ जीनों एवं जीनप्ररूपों की पहचान करने हेतु यथेष्ट पर्यावरणीय परिस्थितियों के अ्रतर्गत, जननद्रव्य का सम्पूर्ण जीवन-चक्र के दौरान यथार्थ लक्षणप्ररूपण (फीनोटायपिंग) करने के लिए फिनोमिक्स उपयोगी है।
      इसकी सहायता से फसल सुधार एवं प्रबंधन के क्षेत्र में हमारे ज्ञान की सीमा के विस्तार के अगले चरण के रूप में जीनों एवं पर्यावरण के बीच परस्परिक क्रिया को समझा जा सकेगा। परिशुद्ध कृषि में संसाधन एवं फसल प्रबंधन हेतु यू.ए.वी. और सुदूर संवेदन-समर्थित अनुप्रयोगों के लिए फिनोमिक्स द्वारा पहचान किए गए प्रतिबिम्ब उपयेागी सिद्ध होंगे।फसल सुधार के लिए डिजिटल फीनोटायपिंग एवं बिग डेटा सांइस के अग्रणी अनुसंधान क्षेत्र में यह केन्द्र वैश्विक स्तर पर सक्षम मानव संसाधन विकसित करने में सहायक होगा।

महिलाओं व लड़कियों के जीवन में परिवर्तन लाने में सशक्तिकरण महत्वपूर्ण

     नई दिल्ली। महिला और विकास मंत्रालय तथा यूनिसेफ ने मिलकर अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली में बालिकाओं के सशक्तिकरण में खेलों की भूमिका विषय पर एक पैनल परिचर्चा आयोजित की। 

   इस परिचर्चा में यूनिसेफ के सद्भावना दूत सचिन तेंदूलकर, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज, भारतीय महिलाओं की राष्ट्रीय बॉस्केट बॉल टीम की पूर्व कप्तान रसप्रीत सिधु, विशेष ओलंपिक एथलीट रागिनी शर्मा, कराटे चैम्पियन माना मंडलेकर और अंतर्राष्ट्रीय पैरा तैराक तथा ग्वालियर, मध्यप्रदेश से बीबीबीपी चैम्पियन रजनी झा ने भाग लिया। 
      महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने परिचर्चा की शुरूआत की। इस अवसर पर यूनिसेफ भारत की प्रतिनिधि डॉ यास्मिन अली हक और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव राकेश श्रीवास्तव भी उपस्थित थे। 
   सत्र की शुरूआत करते हुए महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि सरकार लड़कियो और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काफी कार्य कर रही है। मंत्री ने बताया कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम लड़कियों का मान बढ़ाने और उनके अधिकारों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। 
     मंत्री ने बताया कि 161 जिलों में शुरू किये गये इस कार्यक्रम के परिणाम अत्यधिक उत्साहवर्द्धक हैं। उन्होंने कहा कि 2015-2016 और 2016-2017 की अवधि में 104 जिलों में जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में सुधार देखा गया, 119 जिलों में एएनसी पंजीकरण की तुलना में पहली तिमाही में पंजीकरण में प्रगति दर्ज हुई और 146 जिलों में अस्पतालों में प्रसव कराने की स्थिति में सुधार हुआ। 
      श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि खेल इस कार्यक्रम का एक ऐसा पहलू है जो महिलाओं और लड़कियों के जीवन में परिवर्तन लाने तथा उनके सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आज हम लड़कियों के कौशल के प्रदर्शन और उनकी आकांक्षाओं को हासिल करने के लिए मंच के तौर पर खेलों की बेहतर भूमिका का पहचान रहे हैं। 
      मंत्री ने कहा कि इसी कारण महिला और बाल विकास मंत्रालय तथा खेल एवं युवा मामले मंत्रालय ने खेलों में महिलाओं की अधिक सहभागिता का बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने बताया कि लड़कियों और महिलाओं की खेलों में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक अभियान शुरू किया जाएगा और इससे भी महत्वपूर्ण लड़कियों के लिए खेल का बुनियादी ढांचा विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसके लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय आर्थिक सहयोग देने को तैयार है। 
      भारत में यूनीसेफ की प्रतिनिधि डॉ. यास्मिन अली हक ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस सभी लड़कियों की जरूरतों और अवसरों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए बहु क्षेत्रीय साझेदारी जारी रखने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है। तीन प्राथमिकताओँ जिससे लड़कियों की स्थिति में बदलाव आ सकता है वे हैं लड़कियों की शिक्षा, बाल विवाह पर रोक और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना। 
       यूनिसेफ के सद्भावना दूत सचिन तेंदुलकर ने कहा कि मेरे जीवन की उपलब्धियां मेरे माता-पिता और परिजनों से प्रेरित है, जिन्होंने मेरी प्रतिभा को बढ़ावा देने के साथ ही बचपन से ही मेरा सहयोग किया। पालकों और समुदायों को अपनी बेटियों को अनमोल समझना चाहिए। 
     उन्हें यह समझने की आवश्यकता है कि बोझ समझ कर जल्दी से बेटियों का विवाह करने की बजाय एक व्यक्ति के तौर पर बेटियों को स्वावलंबी बनाकर समाज में योगदान देने लायक बनाना चाहिए। इसके लिए बेटियों पर निवेश करने की आवश्यकता है जैसा कि भारत सरकार कर रही है।
      हमें माता-पिताओं के सिर से वित्तीय बोझ कम करना चाहिए ताकि लड़कियां अपनी शिक्षा पूरी कर सकें और समाज में अपनी क्षमताओं के अनुरूप कदम उठाये तथा अपनी आकांक्षाओं को पूरा करें। हमें माता-पिताओं की चिंताओं का समाधान कर उन्हें संभावित बदलाव लाने में शामिल करना चाहिए। बाल विवाह और अन्य सामाजिक दबावों से बच्चे की प्रगति बाधित होती है। मैं बाल विवाह निषेध और हमारी लड़कियों के लिए बेहतर दुनिया बनाने का पक्षधर हूं।
      ओलंपिक पैरा एथलीट रागिनी शर्मा ने कहा कि लैंगिकता से परे एक खिलाडी सामाजिक, शारीरिक और सामुदायिक बाधाओं को पार कर सकता है। मैं सरकार के बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम के सराहना करती हूं जिससे देशभर में लोगों के विचारों में बदलाव आया कि हम सब मिलकर कैसे बालिका का जीवन सुनिश्चित कर सकते हैं और उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में फलने फुलने का समान अवसर दे सकते हैं।
      मिताली राज ने कहा कि एक खिलाड़ी के तौर पर मुझे विश्वास है कि लैंगिकता मायने नहीं रखती है। प्रत्येक बच्चे को खेलों में भाग लेना चाहिए क्योंकि इससे टीम भावना को बढ़ावा मिलता है, मानसिक ताकत बढ़ती है, बच्चे स्वस्थ रहते हैं और इससे वे जीवन की चुनौतियों का मुकाबला करने में सक्षम बनते हैं।
        अंतर्राष्ट्रीय पैरा तैराक रश्मि झा ने भारत सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि "लड़कियों और लड़कों, महिलाओं और पुरुषों के लिए समानता हमारे अपने घरों और जीवन से ही शुरू करके हासिल की जाती है। घर, स्‍कूल और कॉलेज में एक सक्षम और सहयोगी वातावरण लड़कियों के लिए विभिन्‍न बाधाओं को दूर करने और अधिक से अधिक लड़कियों को खेलों के लिए प्रोत्साहित करके लैंगिक समानता की दिशा में काफी मदद कर सकता है।"
      महिला और बाल विकास सचिव राकेश श्रीवास्तव ने समापन संबोधन दिया और कहा कि उनका मंत्रालय लैंगिक समानता को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्‍होंने लडकियों और महिलाओं के पक्ष में राष्ट्रीय और मुख्यधारा के क्षेत्र में महिलाओं की सफलता की सकारात्मक कहानियों को उजागर करने में मीडिया के सहयोग की सराहना की।
      9 अक्टूबर से 14 अक्टूबर, 2017 तक आयोजित होने वाले "बेटी बचाओ बेटी पढाओ सप्‍ताह- नए भारत की बेटियों" के आयोजन के एक हिस्‍से के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर इस पैनल चर्चा का आयोजन भारत सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढाओ कार्यक्रम की पृष्‍ठभूमि में बालिकाओं के महत्‍व का सृजन करने के लिए किया गया था।
     इस कार्यक्रम में बालिकाओं के अस्तित्व, संरक्षण, शिक्षा और विकास पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया गया है। पैनल के सदस्यों ने लंबी अवधि के समाधानों पर चर्चा की जिन्‍हें बालिकाओं के महत्‍व को बढ़ाने उनके लचीलेपन को मजबूत करने और परिवर्तनकारी तथा जीवंत पर्यंत अवसरों और आकांक्षाओं को उपलब्‍ध कराने के लिए एक प्रेरक के रूप में लडकियों के लिए खेल का उपयोग करने हेतु तैयार किया जा सकता है। 
     शिक्षा और जीवन कौशल के साथ लड़कियों के महत्‍व और सशक्तिकरण को बढ़ाने के लिए खेल की उत्प्रेरित भूमिका पर भी चर्चा हुई। भारत सरकार के बीबीबीपी जैसे बहुआयामी कार्यक्रमों ने देश में लाखों लडकियों और उनके परिवारों को अवसर उपलब्‍ध कराकर और बालिकाओं के भविष्‍य का निर्माण करके सशक्‍त बनाया है। 
   जैसे जैसे महिलाओं के खेल अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं लडकियां इनसे समर्थ बनती हैं। यहां तक कि अधिकांश वंचित तबकों की लडकियों को जो विशेष रूप से बाल विवाह की जोखिम से ग्रस्‍त हैं या पहले से ही विवाहित हैं वे भी खेलों में भाग लेकर अपने सपनों को पूरा कर रही हैं। 
    बीबीबीपी कार्यक्रम किशोरावस्था की लड़कियों की परिवर्तन लाने और चैंपियन बनने क्षमता को स्वीकार करता है, पुराने ढर्रे को तोडने, अपने अधिकारों और गरिमा का दावा करने और दूसरों को ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करने की संभावनाओं को स्‍वीकार करता है।

अनुपम खेर भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पुणे के अध्यक्ष

   नई दिल्ली। वरिष्ठ फिल्म अभिनेता अनुपम खेर को फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पुणे का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। 

   अभिनेता अनुपम खेर श्री गजेन्द्र चौहान का स्थान ग्रहण करेंगे। श्री खेर ने 500 से अधिक फिल्मों में काम किया है और सिनेमा तथा कला क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 2004 में पद्मश्री और 2016 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। 
   वरिष्ठ कलाकार ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। उन्हें सर्वश्रेष्ठ हास्य भूमिका के लिए पांच बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिल चुका है। 
     उन्होंने लोकप्रिय अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया है, जिनमें ‘बेंड इट लाईक बेकहम’ को 2002 में गोल्डन ग्लोब पुरस्कार के लिए नामित किया गया। इसके अलावा इनमें 2007 में गोल्डन लायन पुरस्कार प्राप्त ‘लस्ट, कॉशन’ और 2013 में ऑस्कर विजेता ‘सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक’ शामिल हैं। 
    उन्होंने 100 से अधिक नाटकों में काम किया है और ‘दी बेस्ट थिंग अबाउट यू इज यू’ नामक पुस्तक भी लिखी है। इसके पूर्व उन्होंने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में तथा 2001 से 2004 तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक के रूप में भी काम किया है। 
    उन्होंने (1978 बैच) राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी। उल्लेखनीय है कि भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्तशासी संस्थान है और पूरी दुनिया में उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है।
     संस्थान के छात्रों द्वारा बनाई गई फिल्मों को भारतीय और विदेशी समारोहों में बहुत सराहा गया है तथा उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं।

महिलाओं के पुनर्वास में एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका

   नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के भागीदार गैर-सरकारी संगठनों के पहले सम्मेलन का नई दिल्ली में आयोजन किया गया।

   महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने महिलाओं और बच्चों के लिए नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों का कार्यान्वयन : चुनौतियां और आगे की राह नामक सम्मेलन का उद्घाटन किया। पूरे देश के विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के 130 से अधिक प्रतिभागियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। जिसका उद्देश्य महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के बारे में संवेदनशील बनाना और अपने अनुभवों तथा विचारों को साझा करने का अवसर प्रदान करना था।
     श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि एनजीओ बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं क्योंकि सरकार की अनेक योजनाएं, कार्यक्रम और नीतियां जमीनी स्तर पर एनजीओ की सहायता से लागू की जा रही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वन स्टॉप सेंटर, बेटी बचाओ, बेटी पढाओ, महिला हेल्पलाइन, महिलाओं के लिए राष्ट्रीय नीति, तस्करी के खिलाफ विधेयक, बाल दुर्व्यवहार के खिलाफ राष्ट्रीय गठबंधन और ऐसी अन्य अनेक पहलें शुरू की हैं। 
    उन्होंने एनजीओ से इन पहलों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ बेहतर आपूर्ति के लिए अपने सुझाव देने का अनुरोध किया। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई महत्वपूर्ण योजना बेटी बचाओ, बेटी पढाओ ने एक शानदार सफलता दर्शायी है क्योंकि 161 बीबीबीपी जिलों में से 104 में जन्म के समय लिंग अनुपात में बढ़ती प्रवृत्ति को देखी गई है। यह लोगों के रूख में स्पष्ट परिवर्तन को दर्शाता है। 
     उन्होंने एनजीओ से योजना की आगे सफलता को सुनिश्चित करने के लिए आगे आने को कहा। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने प्रतिभागियों के साथ आधे घंटे तक बातचीत की जिसमें उन्होंने जमीनी स्तर विभिन्न मुद्दों और समस्याएं के बारे में प्रकाश डाला। श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि मंत्रालय प्रतिभागियों द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार सरपंच और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पहले से ही प्रशिक्षण दे रहा है।
   उन्होंने यह आश्वासन दिया कि महिलाओं और बाल विकास के क्षेत्र में एनजीओ के लिए जल्द ही ऑनलाइन सुविधा जुटाई जाएगी ताकि वे अपनी शिकायतें और मुद्दों को उठाने में समर्थ हो सकें। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने विभिन्न क्षेत्रों में एनजीओ द्वारा निभायी गई भूमिका की सराहना की। 
   उन्होंने कहा कि एनजीओ तस्करी की गई महिलाओं के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दें चिंता का विषय बन गए हैं। गैर-सरकारी संगठनों को इस क्षेत्र में सरकार के साथ काम करने के लिए आगे आना चाहिए।
    महिला एवं बाल विकास सचिव राकेश श्रीवास्तव ने एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की कि सरकार और एनजीओ के बीच साझेदारी बढ़ेगी और इससे योजनाओं और कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू करने में मदद करेगी।
   सम्मेलन व्यापक विषयों पर आधारित था। महिलाओं के खिलाफ हिंसा:रोकथाम और न्याय तक पहुंच में सहायता प्रदान करना, महिलाओं के लिए राष्ट्रीय नीति:लिंग समानता के लिए नीतिगत हस्तक्षेप, महिलाओं और बच्चों के तस्करी:राज्य संस्थानों की भूमिका, साइबर अपराध और बच्चे:रोकथाम और हानि कमी करना, किशोर न्याय अधिनियम का कार्यान्वयन: संरचनात्मक चुनौतियां और बच्चों को मुख्य धारा में लाना, जमीनी स्तर पर मौजूदा आपूर्ति प्रणाली की वर्तमान स्थिति में विद्यमान समस्याओं और खामियों का पता लगाना, रचनात्मक नीति निर्माण और कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए सम्मेलन के दौरान चर्चा किए गए विषयों का मूल्यांकन करते हुए उपायों को विकसित करना, महिलाओं के सशक्तिकरण और बाल सुरक्षा के लिए इन संगठनों की भागीदारी बढ़ाना।

सेवाओं का एकीकरण प्राथमिकता

   नई दिल्ली। रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने दिल्ली कैंट के मानकेशॉ सेंटर में आयोजित सेना कमांडर सम्मेलन में भाग लिया।

   सेना प्रमुख और सेना के कमांडरों सहित उच्चाधिकारियों को संबोधित किया। रक्षा मंत्री का स्वागत करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद रक्षा मंत्री सियाचिन सहित कई फारवर्ड पोस्ट्स का दौरा कर चुकीं हैं।
    उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रक्षा मंत्री उत्तर-पूर्व और तिब्बत के सीमा क्षेत्रों की भी यात्रा कर चुकीं हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा क्षेत्रों की उनकी यात्रा आँखे खोल देने वाली थी।
      उन्होंने भारतीय सेना के पेशेवर दृष्टिकोण प्राथमिक आपदाओं के दौरान कार्यकुशलता और पूर्वोत्तर राज्य में विद्रोह पर नियंत्रण जैसे कार्यों की प्रशंसा की। सेना के क्षमता विकास, रणनीतिक अवसंरचना विकास, सैन्य संशोधन, सेवारत व सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों व परिवार के कल्याण के प्रति मंत्री ने बारीकी से निगरानी का भरोसा दिया।
    रक्षा मंत्री ने कहा कि एचएडीआर उपकरणों के प्रावधान के लिए गृह मंत्री को प्रस्ताव भेजा है। भारतीय सेना प्राकृतिक आपदाओं के दौरान उपरोक्त उपकरणों का इस्तेमाल कर सकेगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, संचार, परिवहन और साइबर क्षेत्रों का एकीकरण उनकी प्राथमिकता है। 
     रक्षा मंत्री ने कहा कि सेनाओं का मनोबल सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने राजनयिक रक्षा सहयोग, मेक इन इंडिया का समर्थन और राष्ट्र निर्माण के प्रति भारतीय सेना के योगदान की प्रशंसा की।