Wednesday, 12 July 2017

भारत करेगा विश्व के सबसे बड़े 8 वें थियेटर ओलंपिक्स की मेजबानी

       संस्कृति और पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने भारत द्वारा 17 फरवरी से 08 अप्रैल 2018 तक विश्व के सबसे बड़े थियेटर समारोह 8 वें थियेटर ओलंपिक्स की मेजबानी की घोषणा की।

       यह थियेटर कार्निवल देश के विभिन्न भागों में एक साथ होगा। यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि कार्निवल में विश्व के 500 नाटक और 700 एंबीयेंस प्रदर्शन होंगे। 
      इसके अतिरिक्त प्रदर्शनियां, सेमीनार, गोष्टियां, सक्रिय संवाद तथा शिक्षाविदों, लेखकों, अभिनेताओं, डिजाइनरों तथा निर्देशकों के साथ कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। 
          उन्होंने कहा कि विश्व नाट्य मंच की प्रमुख हस्तियां इसमें भाग लेंगी। इस अवसर पर एनएसडी सोसाइटी के अध्यक्ष रतन थियम और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक प्रो. वामन केंद्रे उपस्थित थे। 
          भारत को विश्व थियेटर के मानचित्र पर सबसे ऊपर रखने के लिए देश प्रसिद्ध थियेटर ओलंपिक्स के अगले संस्करण की मेजबानी के लिए तैयार है। 1993 में स्थापित थियेटर ओलंपिक अग्रणी राष्ट्रीय थियेटर समारोह है और इसमें जाने-माने थियेटर कर्मियों की बेहतरीन कृतियों को प्रस्तुत किया जाता है।
          भारत में पहली बार आयोजित होने वाले थियेटर ओलंपिक का आयोजन संस्कृति मंत्रालय का राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय कर रहा है। विश्व का सबसे बड़ा यह थियेटर समारोह 17 फरवरी से 8 अप्रैल, 2018 तक भारत के 15 शहरों में एक साथ आयोजित किया जाएगा।
        नई दिल्ली में थियेटर ओलंपिक के भव्य उद्घाटन समारोह के आयोजन की घोषणा भी की गई। इस समारोह में सैंकड़ों कलाकार अपनी कला दिखाएंगे। समापन समारोह मुम्बई में होगा। थियेटर ओलंपिक 2018 8 वां संस्करण है और इसमें अधिक से अधिक संख्या में अंतर्राष्ट्रीय थियेटरों को दिखाया जाएगा। 
      इसमें प्रदर्शनियां, सेमीनार, गोष्टियां, सक्रिय संवाद तथा शिक्षाविदों, लेखकों, अभिनेताओं, डिजाइनरों तथा निर्देशकों के साथ कार्यशाला जैसे एंबीयेंस प्रदर्शन होंगे।
        थियेटर ओलंपिक्स की स्थापना यूनान के डेल्फी में 1993 में पहले अंतर्राष्ट्रीय थियेटर समारोह के रूप में हुई थी। 
          क्रोसिंग मिलेनिया शीर्षक इस पहल का उद्देश्य वर्तमान और भविष्य के साथ अतीत की संस्कृति को जोड़ना, थियेटर की समृद्ध और विविध विरासत को एक साथ लाना और समकालीन शोध है।

महाराष्‍ट्र-कर्नाटक में शोलापुर-बीजापुर पर राष्‍ट्रीय राजमार्ग, लागत 1889 करोड़

         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने महाराष्‍ट्र और कर्नाटक में शोलापुर-बीजापुर सेक्‍शन पर नये राष्‍ट्रीय राजमार्ग-52 के चार लेन को विकसित करने की मंजूरी दे दी है। 

       करीब 110 किलोमीटर लंबे 4 लेन वाले इस राजमार्ग के विकास पर करीब 1889 करोड़ रूपये लागत आएगी। इसमें भूमि अधिग्रहण और निर्माण पूर्व क्रिया-कलापों की लागत भी शामिल है। 
       यह सड़क वर्तमान में दो लेन की है और महाराष्ट्र के भीड़-भाड़ वाले शोलापुर, ताकली और नंदनी तथा कर्नाटक में जल्की, होर्ती और बीजापुर से गुजरती है। यह दक्षिण भारत को उत्तर भारत से जोड़ती है। 
        इस सड़क को चार लेन में विकसित करने से यह राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के उत्तर-दक्षिण गलियारे के लिए एक वैकल्पिक मार्ग बन सकेगा। इस सड़क के विकसित हो जाने, शोलापुर और बीजापुर पर बाईपास बनने तथा 6 फ्लाइओवरों के निर्माण से यात्रा समय बचेगा और वाहनों की संचालन लागत कम होने के साथ-साथ महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में बुनियादी ढांचे के सुधार में तेजी आएगी।
      यह सड़क सघन यातायात वाले बंगलुरु-चित्रदुर्ग-बीजापुर-शोलापुर-औरंगाबाद-धुले-इंदौर-ग्वालियर यातायात गलियारे का हिस्सा है। दो बाईपास के प्रावधान से शोलापुर और बीजापुर के शहरी इलाकों में भीड़-भाड़ कम हो सकेगी। इसी प्रकार 6 फ्लाईओवर के बनने से शोलापुर, मनद्रुप, जल्की और बीजापुर में यातायात की गति बढ़ने के साथ ही इलाके में भीड़-भाड़ कम हो सकेगी। 
        सड़क के किनारे ट्रकों को खड़ा करने के लिए दो स्थानों के बनने से माल ढुलाई करने वाले वाहन सुगमता से चल सकेंगे। विश्राम के लिए बनाए गए दो क्षेत्रों में दी गई सुविधाओं से भी ट्रक चालकों को लाभ मिलेगा। परियोजना के 14 किलोमीटर के क्षेत्र में दोनों तरफ सर्विस रोड़, करीब 40 किलोमीटर में स्लिप रोड़ और 24 स्थानों पर बस शेल्टरों के प्रावधान से लंबी दूरी के व्यवसायिक वाहन सुरक्षित और सुचारू रूप से चल सकेंगे। साथ ही बसे हुए-शहरी इलाकों में स्थानीय यातायात सुगम हो जाएगा।
         पर्यटकों को बीजापुर, हम्पी और चित्रदुर्ग जैसे नजदीकी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के लिए बेहतर सम्पर्क का लाभ मिलेगा। इस परियोजना से स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ेगी। यह अनुमान लगाया गया है कि एक किलोमीटर राजमार्ग के निर्माण के लिए कुल 4076 मानव दिवसों की जरूरत पड़ेगी। टेक्सटाइल केन्द्र होने के नाते शोलापुर को बढ़े हुए आर्थिक अवसरों से लाभ मिलेगा।

नई दूरसंचार नीति कनेक्टिविटी के बजाय अप्लिकेशन संचालित

        संचार मंत्री मनोज सिन्‍हा ने कहा है कि उनका मंत्रालय नई दूर संचार नीति तैयार कर रहा है, जो राष्‍ट्रीय दूर संचार नीति, 2012 की तुलना में कनेक्टिविटी की बजाय अप्लिकेशन संचालित होगी।

 यहां 'सूचना संचार प्रौद्योगिकी : नई संचालन विधियों का जन्‍म' विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्‍होंने कहा कि नई नीति में अंतिम इस्तेमालकर्ता पर ध्‍यान केन्द्रित किया जायेगा।
        उसमें दूरसंचार सेवाओं की उपलब्‍धता के विस्‍तार के नए अवसर तलाश किए जायेंगे। उन्‍होंने कहा कि नई नीति तैयार करने के लिए पहली बार सरकार ने विभाग से बाहर के विशेषज्ञों के एक समूह को शामिल करने का निर्णय किया है, ताकि नई नीति के बारे में नागरिकों और हितभागियों से अधिक से अधिक जानकारी एवं सुझाव प्राप्‍त किए जा सकें।
         मंत्री ने कहा कि ज्ञान के घनत्‍व वाले युग में दूरसंचार क्षेत्र ने सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य ढांचे का स्‍थान ले लिया है। उन्‍होंने कहा कि देश में अप्रैल 2017 तक टेलीफोन कनेक्‍शनो की संख्‍या 1.2 अरब के करीब पहुच चकी थी, जिसमें 1.17 अरब वायरलेस टेलीफोन शामिल हैं। इसी प्रकार ब्रॉडबैंड कनेक्‍शनों की संख्‍या भी बढ़कर 27.652 करोड़ पर पहुंच गयी है।
         सिन्‍हा ने यह भी कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में एफडीआई इक्विटी पूंजी निवेश अप्रैल 2016 से मार्च 2017 की अवधि में 556.4 करोड़ अमरीकी डालर का हुआ, वर्ष 2013-14 की तुलना में चार गुणा अधिक है। औसत निवेश हर वर्ष करीब 1.3 अरब अमरीकी डालर का रहा है।
         मंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम और डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अंतर-निहित कनेक्टिविटी की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने कहा कि सरकार सड़क ढांचे पर भी निरंतर ध्‍यान दे रही है, जो आर्थिक विकास के लिए आवश्‍यक है।
         इस अवसर पर दूरसंचार सचिव सुश्री अरुणा सुंदरराजन ने कहा कि दुनिया भारत को विकास के इंजन के रूप में देखना चाहती है। भारत से यह उम्‍मीद की जा रही है कि वह 7.6 की मौजूदा विकास दर को 10 प्रतिशत पर पहुंचाए।