Tuesday, 12 September 2017

पशुओं के लिए कैट स्‍कैन व एमआरआई जैसी सुविधा

       नई दिल्‍ली। केन्‍द्रीय पर्यावरण वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने वन्‍य प्राणियों की बीमारियों का पता लगाने और इलाज करने में पशु चिकित्‍सकों की कठिनाइयों को स्‍वीकार करते हुए कहा कि पशुओं के लाभ के लिए कैट स्‍कैन तथा एमआरआई जैसी विकसित सुविधा का लाभ उठाया जाना चाहिए। 

       डॉ. हर्षवर्धन यहां बंद करके रखे गये पशुओं के स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन पर भारतीय चिडि़याघर के चिकित्‍सकों के क्षमता सृजन पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला स्मिथसोनियन नेशनल जूलॉजिकल पार्क के समकक्ष विशेषज्ञता रखने वाले संगठनों के सहयोग से आयोजित की गई है।
        उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय जूलॉजिकल पार्क नई दिल्‍ली को विश्‍व के सर्वश्रेष्‍ठ जूलॉजिकल पार्क बनने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। डॉ. हर्षवर्धन ने आश्‍वासन दिया कि मॉडल चिडि़याघर विकसित करने के विचार के साथ आने वाले चिडि़याघरों के प्रस्‍ताव का सरकार उचित समर्थन करेंगी। 
       उन्‍होंने कहा कि कार्यशाला में स्मिथसोनियन नेशनल जूलॉजिकल पार्क के विशेषज्ञों के साथ कार्यशाला में भाग लेने वाले लोगों के संवाद और आपसी कार्य से पशुओं की देखभाल में अपने चिडि़याघरों को आधुनिक उपायों को अपनाने में मदद मिलेगी। उन्‍होंने आज के महत्‍व के बारे में कहा कि आज ही 1893 में शिकागो में आजोजित धर्म संसद में स्‍वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक संबोधन की 125वीं वर्षगांठ है।
     पर्यावरण मंत्री ने इस अवसर पर दो मैनुअल जारी किये। ये मैनुअल है – मैनुअल फॉर बायो‍लॉजिकल सैम्‍पल कलेक्‍शन एंड प्रिजर्वेशन फॉर जेनेटिक, रिप्रोडेक्टिव एंड डिजीज एनालिसिस तथा मैनुअल ऑन केमिकल इमोबिलाइजेशन ऑफ वाइल्‍ड ऐनीमल्‍स। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन केन्‍द्रीय चिडि़या प्राधिकरण द्वारा स्मिथसोनियन नेशनल जूलॉजिकल पार्क, वांशिगटन डीसी, अमरीका के सहयोग से 11 से 19 सितम्‍बर, 2017 तक नेशनल जूलॉजिकल पार्क, नई दिल्‍ली में किया जा रहा है।
       बंद करके रखे गये वन्‍य प्राणियों की बीमारियों का पता लगाने, उनका इलाज करने, उनकी पौष्टिकता तथा भोजन और स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल के उपायों के लिए पशु-चिकित्‍सक उत्‍तरदायी है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशु चिकित्‍सकों को न केवल अमरीका में व्‍यवहार में लाये जाने वाले तकनीक और प्रक्रिया जानने में मदद मिलेगी, बल्कि वह अभ्‍यास भी कर सकते है। आशा की जाती है कि इस तरह के अभ्‍यास, विचार-विमर्श और विशेषज्ञों के साथ अनुभवों को साझा करने से भाग लेने वाले लोगों का आत्‍म विश्‍वास बढ़ेगा। 
       प्रशिक्षण का अंतिम उद्देश्‍य चिडि़याघर के पशु चिकित्‍सकों को आवश्‍यक ज्ञान, कौशल और मनोवृत्ति के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर का प्रशिक्षण देना है। केन्‍द्रीय चिडि़याघर प्राधिकरण ने पशु स्‍वास्‍थ्‍य और क्षमता सृजन पर बल देने वाले संयुक्‍त शोध अध्‍ययनों को विकसित और लागू करने के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किये। इस सहमति ज्ञापन की अवधि वर्ष 2020 तक है। 
      सहमति ज्ञापन के हस्‍ताक्षर के बाद वरिष्‍ठ पशु चिकित्‍सा अधिकारियों का एक शिष्‍टमंडल जून 2016 में नेशनल जूलॉजिकल पार्क-दिल्‍ली, लॉयन सफारी – इटावा, श्री चामराजेन्‍द्र जूलॉजिकल गार्डन-मैसूर, बनेरघाटा बॉयोलॉजिकल पार्क, बेंगलूरू तथा एरिगनार, अन्‍ना जूलॉजिकल पार्क, वंडालूर-चेन्‍नई, गया और भारत में वन्‍य जीव की विलुप्‍त होने वाली प्रजातियों के संरक्षण में सुधार के लिए तकनीकी सूचना सांझा की। चिडि़याघरों की देखभाल करने वालों के प्रशिक्षण का आयोजन भारत की भाषायी विविधता को देखते हुए क्षेत्रीय आधार पर किया जाता है। 
     प्रत्‍येक वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशु की आवासीय व्‍यवस्‍था, देखभाल और अन्‍य प्रंबधन से जुड़े 240 कर्मियों को शामिल किया जाता है। हाल में बंद करके रखे गये पशुओं की पहचान और उनकी मार्किंग पर भारतीय वन्‍य जीव संस्‍थान, देहरादून के सहयोग से देहरादून जूलॉजिकल पार्क में चिडि़याघर के निदेशकों को प्रशिक्षण दिया गया।
      पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के चिडि़याघरों के लिए चिडि़याघर की देखभाल करने वालों का प्रशिक्षण सेपाहिजाला जूलॉजिकल पार्क सेपाहिजाला में, पूर्वी क्षेत्र के चिडि़याघर के लिए संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना, उत्‍तर क्षेत्र के चिडि़याघरों के लिए जूलॉजिकल पार्क-कानपुर, पश्चिम क्षेत्र के चिडि़याघरों के लिए कमला नेहरू जूलॉजिकल गार्डन, अहमदाबाद, दक्षिणी क्षेत्र के चिडि़याघरों के लिए जूलॉजिकल गार्डन- तिरूअनंतपुरम में आयोजित किये गये। 
    केन्‍द्रीय चिडि़याघर प्राधिकरण का गठन पर्यावरण वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वन्‍य जीव (संरक्षण) अधिनियम1972 के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया। प्राधिकरण ने चिडि़याघरों के कामकाज देखने तथा उन्‍हें तकनीकी तथा अन्‍य सहायता उपलब्‍ध कराने के लिए 1992 से काम करना शुरू किया।
      केन्‍द्रीय चिडि़याघर प्राधिकरण ने प्रसिद्ध अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों के साथ शोध और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए सहमति ज्ञापन समझौते किये है। इन संगठनों में वाइल्‍ड लाइफ रिजर्व सिंगापुर, नेशनल ट्रस्‍ट फॉर नेचर कन्‍जर्वेशन नेपाल, लि‍पजिंग जू जर्मनी, कैलिफोर्निया विश्‍वविद्यालय, पराग जू चेक गणराज्‍य और स्मिथसोनियन नेशनल जूलॉजिकल पार्क, वाशिंगटन शामिल हैं।

तीन नदियों को जोड़ने की परियोजना पर कार्य तीन महीने के अंदर प्रारंभ

       नई दिल्ली। जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा शिपिंग मंत्री नितिन गडगरी ने कहा है कि उनका मंत्रालय अगले तीन महीने के अंदर तीन नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजना पर काम शुरू करेगा। ये परियोजनाएं हैं- केन-बेतवा संपर्क परियोजना, दमनगंगा- पिंजाल संपर्क परियोजना तथा पार-तापी-नर्मदा संपर्क परियोजना।

    नितिन गडगरी ने कहा है कि तीनों परियोजनाओं को जरूरी स्वीकृति मिल गई है। वह जल्द ही अंतर-राज्य विवादों को सुलझाने के लिए संबंधित मुख्य मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे ताकि अगले तीन महीने के अंदर इन परियोजनाओं पर कार्य शुरू हो सके।
        नितिन गडगरी नई दिल्ली में राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी सोसाइटी की 31वीं वार्षिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सत्यपाल सिंह भी उपस्थित थे। वार्षिक बैठक में आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और राजस्थान के जल संसाधन सिंचाई मंत्री शामिल हुए। 
    देश के 13 सूखा प्रभावित और 7 बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को लोगों की दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए गडगरी ने उपलब्ध जल को संरक्षित करने और आवश्यकता से अधिक जल को आपस में साझा करने के लिए कारगर उपाय विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। 
      उन्होंने कहा कि समुद्र में गिरने वाले 60 से 70 प्रतिशत जल को बचाने के तरीके विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करते समय जल परियोजनाओं की सामाजिक-आर्थिक लागत को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
        उन्होंने कहा कि जल परियोजनाओं के लिए धन-पोषण के तरीके विकसित किए जाने चाहिए। कम ब्याज दरों पर ऋण लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय को उठाएंगे। जल संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न भागों में जल संरक्षण और जल प्रबंधन के सफल मॉडलों का प्रलेखन होना चाहिए। इसे मंत्रालय द्वारा वितरित किया जाना चाहिए ताकि प्रत्येक क्षेत्र एक-दूसरे के अनुभवों का लाभ उठा सकें।

सुधार, प्रदर्शन व परिवर्तन भारत का विकास मंत्र

      नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू ने कहा है कि सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन भारत के विकास का मंत्र है। बेलारूस गणराज्य के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकानशेंको के साथ बातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति नायडू ने यह बात कही। 

     उपराष्ट्रपति ने कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जून 2015 में बेलारूस की यात्रा के बाद दोनो देशों के बीच द्विपक्षीय दौरों में तेजी आयी है। दोनों ही देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ताओं की श्रृंखला निरंतर जारी है।
       उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में न्यायाधीश पद के लिए दलवीर भंडारी के नामांकन का समर्थन करने के लिए भारत बेलारुस का आभारी है। 
   दोनों ही देशों के बीच आपसी व्यापार में असीम संभावनाएं हैं और व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू ने कहा कि भारत में विश्व स्तर की स्वास्थ्य सुविधायें मौजूद हैं। इससे दोनो ही देशों के बीच मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिल सकता है।
     उपराष्ट्रपति ने दौरे पर आये प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात के पहले शुभकामनाएं दी। बेलारूस के राष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू को बेलारूस की यात्रा का आमंत्रण दिया और औपचारिक आमंत्रण भेजने की पेशकश की।

भारत-मोरक्‍को के बीच स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में सहयोग

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और मोरक्‍को के बीच स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में सहयोग पर आधारित सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर किए जाने को अपनी मंजूरी दे दी। 

  सहमति पत्र में सहयोग के क्षेत्र बच्‍चों के हृदय रोग और कैंसर सहित असंक्रामक रोग, मादक पदार्थ नियमन और औषधि गुणवत्‍ता नियंत्रण, संक्रामक रोग, मातृ, शिशु और नवजात स्‍वास्‍थ्‍य, अच्‍छी सुविधाओं के आदान-प्रदान के लिए अस्‍पतालों को तैयार करना, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं और अस्‍पतालों के प्रशासन के लिए प्रशिक्षण और प्रबंधन, परस्‍पर निर्णय के आधार पर सहयोग का कोई अन्‍य क्षेत्र शामिल है। 
    इस सहमति पत्र में शामिल सहयोग के क्षेत्र के लिए विवरण को और अधिक स्‍पष्‍ट करने तथा इसके कार्यान्‍वयन की देख-रेख के लिए एक कार्य समूह का गठन किया जाएगा।

नदियों की गाद निकालने के लिए नया व्यापक कानून

          नई दिल्ली। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने नदियों की गाद निकालने के मुद्दे से निपटने के लिए एक नया व्यापक कानून की मांग की है। 

   उन्होंने नई दिल्ली में अपने मंत्रालय से संबंधित संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को बाढ़ प्रबंधन के मुद्दे पर संबोधित करते हुए कहा कि यह नया कानून राज्यों के परामर्श से तैयार किया जाएगा। देश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए गडकरी ने कहा कि देश में बाढ़ की चुनौतियों को प्रभावी ढंग से निपटना जरूरी है।
       कहा कि नदियों को जोड़ने और बांधों के निर्माण जैसे कार्यों को भी बाढ़ को कम करने के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। गडकरी ने कहा कि हमें अपने देश में बाढ़ के पूर्वानुमान करने वाले नेटवर्क को भी मजबूत करना और सुधारना होगा। बाढ़ के पूर्वानुमान की मल्टी-मॉडल एन्सेबल (एमएमई) और वैश्विक पूर्वानुमान प्रणाली (जीएफएस) के परिणाम का संदर्भ देते हुए मंत्री ने कहा कि पूर्वानुमान का समय पांच से सात दिनों तक बढ़ाया जाने का प्रस्ताव है। 
      मंत्री ने सदस्यों को बताया कि ओडिशा में महानदी डेल्टा के लिए 0.5 मीटर समोच्च अंतराल के डिजिटल एलिवेशन मॉडल का उपयोग भूक्षेत्र के पूर्वानुमान का सीमित डेटा के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम को राज्य सरकार द्वारा सत्यापन किया जा रहा है और 2018 तक इसके कार्यान्वयन की संभावना है। गडकरी ने कहा कि रडार डेटा को इनुडेशन पूर्वानुमान मॉडल के साथ एकीकृत किया जाना है। 
      साथ ही मंत्री ने कहा कि देश में अन्य बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के लिए इसी तरह की डिजिटल एलिवेशन मॉडल को 2020 तक लागू करने की योजना है। बैठक में भाग लेने वाले संसद सदस्यों ने देश में बाढ़ प्रबंधन के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए गए उपायों का समर्थन किया। एक सदस्य ने सुझाव दिया कि नदियों को जोड़ने की परियोजना पर पर अधिक बल दिया जाना चाहिए।
          एक और सदस्य का मानना था कि बाढ़ को रोकने के लिए गंगा नदी के किनारे अधिक तटबंध का निर्माण किया जाना चाहिए। संसद सदस्यों ए टी (नाना) पाटिल, श्रीमती अंजू बाला, बहादुर सिंह कोली, धर्मबीर भालेराम, प्रेम सिंह चंदूमाजरा, सुनील कुमार मंडल और स्वामी साक्षी महाराज (सभी लोकसभा) तथा राज्यसभा सांसद राम नारायण डूबी ने इस बैठक में भाग लिया।
      मंत्रालय में राज्यमंत्रियों डॉ सत्यपाल सिंह और डॉ अर्जुन राम मेघवाल, सचिव डॉ अमरजीत सिंह, केन्द्रीय जल आयोग के अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार, एनडीडब्ल्यूए के महानिदेशक एस मसूद हुसैन तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बैठक में भाग लिया।

प्रधानमंत्री शिखर बैठक के लिए जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे की अगवानी करेंगे

       नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के निमंत्रण पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे 13 और 14 सितंबर 2017 को भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अबे 14 सितंबर को गांधी नगर गुजरात में महात्‍मा मंदिर में 12वीं भारत-जापान वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। दोनों नेता मीडिया के समक्ष अपना वक्‍तव्‍य भी देंगे। भारत-जापान व्‍यावसायिक शिष्‍टमंडल इसी दिन भारत पहुंचेगा।
     प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अबे के बीच यह चौथी वार्षिक शिखर वार्ता होगी। दोनों नेता विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के फ्रेम वर्क के अंतर्गत भारत और जापान के बीच बहुउद्देशीय सहयोग की दिशा में हाल में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और भावी दिशाएं तय करेंगे। दोनों नेता अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली भारत की तेज गति रेल परियोजना के भारत में निर्माण के शुभांरभ के लिए 14 सितंबर को आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में भाग लेंगे। 
      इस रेल के दो शहरों के बीच चलने से यात्रा में लगने वाले समय में उल्‍लेखनीय कमी आने की संभावना है। उच्‍च गति रेल नेटवर्क के क्षेत्र में जापान एक अग्रणी देश है। इसकी शिंककेनसेन बुलेट रेल दुनिया की सबसे तेज चलने वाली रेलगाडि़यों में एक है।
     अहमदाबाद शहर के लोग 13 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री अबे का एक भव्‍य समारोह में नागरिक अभिनंदन करेंगे। जिसमें अनेक कार्यक्रमों की श्रृंखला के माध्‍यम से भारत की सांस्‍कृतिक विविधता की झलक देखने को मिलेगी। दोनों प्रधानमंत्री साबरमती नदी के किनारे महात्‍मा गांधी द्वारा स्‍थापित साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे। 
     उसके पश्‍चात वे अहमदाबाद में 16वीं शताब्‍दी की प्रसिद्ध मस्जिद सिडी सईद नी जाली का दौरा करेंगे। दोनों नेता महात्‍मा मंदिर में महात्‍मा गांधी को समर्पित दांडी कुटीर संग्रहालय का भी दौरा करेंगे।

गृहमंत्री का सीमा सुरक्षा बल के शिविरो का दौरा

     राजौरी। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर दौरे के तीसरे दिन राजौरी जिले के नौशेरा में सेना और सीमा सुरक्षा बल के शिविरो का दौरा किया और जवानो से बातचीत की। 

     उन्होंने युद्धविराम उल्लंघन के कारण सीमावर्ती क्षेत्रो से शिविरो में प्रवास कर रहे लोगो और छात्रो के एक समूह से भी मुलाकात की। राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने युद्धविराम उल्लंघन के दौरान मारे गए लोगो को दी जानी वाली सहायता राशि को एक लाख रूपए से बढ़ाकर पांच लाख रूपए किया है। 
     इसके साथ ही पचास प्रतिशत से अधिक दिव्यांग वाले लोगो को भी पांच लाख रूपए की सहायता राशि दी जाएगी। सिंह ने कहा कि अधिकारियो को सीमावर्ती क्षेत्रो में रहने वाले लोगो को सुरक्षा बलो में अधिक भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रो में रहने वाले लोग हमारे लिए बेहद अहम हैं।
     राजनाथ सिंह ने सीमा सुरक्षा बलो के जवानो को संबोधित करते हुए कहा कि मैं जानता हूं कि आप लोग बेहद चुनौती भरे माहौल में काम कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि देश के प्रति प्रेम के कारण आप सुरक्षा बल में शामिल हुए। इससे पूर्व श्रीनगर में एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए सरकार जम्मू कश्मीर की समस्याओ का पांच सी के आधार पर समाधान करेगी। 
       सिंह ने कहा कि ये पांच सी करूणा, संवाद, सहअस्तित्व, विश्वास में बहाली और स्थिरता हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पर्यटन अभियान शुरू करेगी। इसके बाद राजनाथ सिंह अपने दौरे में जम्मू पहुंचे और उन्होंने पनून कश्मीर सहित समाज के विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधिमंडलो से मुलाकात की।