Thursday, 27 July 2017

एनआरआई विवाह के लिए एक विशेषज्ञ समिति

     सरकार ने भारतीय मूल के विदेशों में रह रहे नागरिकों से विवाह करने वाले भारतीय नागरिकों के सामने आने वाले मुद्दों और कठिनाइयों का पता लगाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। 

  वर्तमान कानूनों- नीतियों- नियमों में संशोधनों का सुझाव दिया है। ऐसा विवाहों के टूटने से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों में फंसे पुरूषों- महिलाओं (और उनके बच्चों) की बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बाद किया गया है। एनआरआई आयोग, पंजाब के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार गोयल के नेतृत्व में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। समिति के सदस्यों में पूर्व सांसद बलवंत सिंह रामूवालिया, महिला और बाल विकास मंत्रालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और दूर संचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और प्रोफेसर पैम राजपूत शामिल हैं। 
      एनआरआई विवाहों से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए अब तक विशेषज्ञ समिति की चार बैठकें हो चुकी हैं। महिलाओं और बच्चों से जुड़े विषयों से निपटने के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय प्रमुख मंत्रालय है। उसे विभिन्न व्यक्तियों, नागरिक समाज संगठनों/संस्थानों सहित विभिन्न साझेदारों से इस बारे में अनेक सुझाव मिल रहे हैं।
       इऩमें से कुछ सुझावों में विदेशी विवाह अधिनियम, 1969 सहित अनेक कानूनों में संशोधन; विदेश स्थित दूतावासों/मिशनों में पृथक प्रकोष्ठ का गठन ताकि लोग स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर सकें; प्रभावित इलाकों जैसे गांवों, कस्बों और शैक्षणिक संस्थानों में इस विषय में क्या करें और क्या न करें का प्रसार; केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड (सीएसडब्ल्यूबी) द्वारा गठित परिवार परामर्श केन्द्रों (एफएफसी) के जरिये विवाह से पहले और विवाह के बाद सलाह प्रदान करने; कानूनी और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए दूतावास संबंधी सार्थक डिवीजन का गठन; विवाह के लिए पंजीकरण अनिवार्य करना; मां को बच्चे का सहज अभिभावक बनाना और अऩेक अन्य सुझाव शामिल हैं।
      इन सभी सुझावों को महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा जांच के लिए विशेषज्ञ समिति के पास भेजा गया है। विशेषज्ञ समिति सभी सुझावों पर गौर करेगी और सरकार को अपनी सिफारिशें देगी। सरकार भविष्य की रणनीति तय करने के लिए बड़ी संख्या में साझेदार समूहों के साथ विचार-विमर्श कर सिफारिशों की जांच करेगी।
        अतः यह स्पष्ट किया जाता है कि महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा विशेषज्ञ समिति को भेजे गये सुझाव केवल प्रक्रिया का हिस्सा हैं ताकि विभिन्न साझेदारों के विचारों पर समिति द्वारा विधिवत विचार किया जा सके। इस संबंध में मंत्रालय की औपचारिक और अंतिम सिफारिशों के रूप में दी गई खबरें पूरी तरह गुमराह करने वाली और गलत हैं।
     मंत्रालय ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से कहा है कि वह ऐसे बच्चों के मामलों को देखे जिनके माता पिता का विवाह टूट चुका है। एनसीपीसीआर से कहा गया है कि वह इस मुद्दे पर विस्तृत विचार-विमर्श करे ताकि इस विषय से जुड़े सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, कानूनी और अन्य आयामों की जांच हो सके।

 

तुगलकाबाद में 10 मीटर राइफल व पिस्टल मिनी रेंज

       युवा मामले और खेल राज्यमंत्री विजय गोयल व सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल (सेवानिवृत्त) राज्यवर्धऩ राठौर ने यहां तुगलकाबाद स्थित डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में नवनिर्मित 10 मीटर राइफल और पिस्टल मिनी रेंज का उद्घाटन किया। 

     इस अवसर पर विजय गोयल ने कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्टेडियमों और अन्य बुनियादी ढांचों का इस्तेमाव करना है। उन्होंने कहा कि 10 मीटर मिनी रेंज किसी भी उम्र के उन नव आगन्तुकों को शूटिंग का बुनियादी प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है जो शूटिंग प्रतिस्पर्धा में शामिल होना चाहते हैं। 
         उन्होंने कहा कि इस नये मैनुअल इलेक्ट्रॉनिक्स 05 पोइंट लक्ष्य के शुरू होने के बाद वे न्यूनतम मानदंड हासिल करने में सक्षम होंगे और उन्हें इसके बाद कम्प्यूटरीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स लक्ष्य प्रणाली में भेजा जा सकेगा जिसे आईएसएसएफ नियमों के अनुसार सर्वोत्कृष्ट शूटिंग प्रशिक्षण प्रतिस्पर्धाओं के लिए बनाया गया है। 
      गोयल ने कहा कि इससे न केवल प्रशिक्षकों की संख्या कई गुना बढ़ेगी बल्कि शूटर बनने की आकांक्षा रखने वालों के बीच शूटिंग लोकप्रिय बन जाएगी। मिनी रेंज पर नये प्रशिक्षण से निचले स्तर के शूटरों के लिए दरवाजे खुलेंगे जो प्रतिस्पर्धात्मक खेलों में उत्कृष्टता हासिल करना चाहते हैं। 
      कर्नल राठौर ने खेल मंत्री को बधाई देते हुए कहा कि शूटिंग को लोकप्रिय बनाने की दिशा में यह एक अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं की शूटिंग में दिलचस्पी और ओलंपिक में भारत के लिए संभावनाएं बढ़ेंगी। आम जनता के लिए इसमें क्रमशः 200 रुपये, 3000 रुपये और 36,000 रुपये की दर से दैनिक, मासिक और वार्षिक सदस्यता उपलब्ध है। 
       डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज विश्वस्तर का शूटिंग रेंज हैं जहां 72 एकड़ हरित क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका निर्माण 9वें एशियाई खेलों के दौरान 1982 में किया गया था और बीकानेर के महाराजा डॉ. कर्णी सिंह जी के नाम पर इसका नामकरण किया गया जिन्हें 1961 में शूटिंग में पहला अर्जुन पुरस्कार मिला था।

भूकम्‍प मापदंडों के विस्‍तार के लिए इंडिया क्‍वेक एप

        विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान, पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने नई दिल्‍ली पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय की स्‍थापना दिवस के अवसर पर ‘इंडिया क्‍वेक’ लांच किया। 

       राष्‍ट्रीय भूकम्‍प केन्‍द्र (एनसीएस) 84 स्‍टेशनों के साथ राष्‍ट्रीय भूकम्पीय नेटवर्क का संचालन करता है। ये स्‍टेशन वास्‍तविक समय में डाटा संचार के लिए री-सैट के माध्‍यम से राष्‍ट्रीय भूकम्‍प केन्‍द्र से जुडे हुए हैं। भूकम्‍प आने की स्थिति में राष्‍ट्रीय भूकम्‍प केन्‍द्र अपने नेटवर्क से डाटा का उपयोग करते हुए इन स्‍टेशनों का पता लगा लेता है और एसएमएस, ईमेल तथा फैक्‍स के माध्‍यम से संबंधित सरकारी विभाग और अन्‍य हितधारकों में भूकम्‍प मापदंडों का प्रसार करता है। लेकिन इस प्रसार में कुछ देरी होती है और मापदंडों को प्राप्‍त करने में थोड़ा गतिरोध होता है।
         इस गतिरोध को दूर करने के लिए राष्‍ट्रीय भूकम्‍प केन्‍द्र द्वारा एक मोबाइल एप विकसित किया गया है। भूकम्‍प आने के बाद यह एप स्‍वचालित रूप से भूकम्‍प के स्‍थान, समय और उसकी तीव्रता (मापदंडों) का प्रसार करेगा। इस एप से तेजी से मापदंडों का प्रसार हो सकेगा।
         यह एप कोई भी नागरिक डाउनलोड कर सकता है और अपने मोबाइल पर वास्‍तविक समय पर भूकम्‍प स्‍थान की सूचना प्राप्‍त कर सकता है। एप के वैज्ञानिक और प्रशासनिक लाभों के अतिरिक्‍त इससे भूकम्‍प के दौरान लोगों की घबराहट कम करने में मदद मिलेगी। 
      उदाहरण के लिए यदि हिन्‍दकुश, (अफगानिस्‍तान) में भूकम्‍प आता है और इसे दिल्‍ली में गंभीरता से महसूस किया जाता है तो उस स्थिति में दिल्‍ली के लोग दो मिनट से भी कम समय में यह जान सकेंगे कि भूकम्‍प दिल्‍ली में नहीं बल्कि अफगानिस्‍तान में आया है।

किसानों को उपज बेचने के लिए नजदीक बाज़ार उपलब्ध हों

         केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कृषि के विकास के बारे में विचार काफी समय से होता आ रहा है परन्तु आज़ादी के बाद से यह पहली सरकार है जो कृषि के विकास के साथ- साथ कृषकों के आर्थिक उन्नयन के बारे में भी धरातल स्तर पर बहुत तेजी के साथ कार्रवाई भी कर रही है।

      सिंह ने यह बात पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी में हुई परामर्श दात्री समिति की बैठक में कही। बैठक का विषय सॉयल हेल्थ कार्ड था। राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमन्त्री का सपना है कि वर्ष 2022 तक कृषकों की आय दोगुनी हो जाए और वे विकास की मुख्य धारा में अपनी भागीदारी को सहज भाव से महसूस करें क्ष् सिंह ने कहा इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 3 स्तंभों पर कार्रवाई करनी होगी। 
      सिंह ने कहा कि प्रथम स्तम्भ के अंतर्गत हमें अपने उत्पादन लागत को कम करना होगा तथा उत्पादकता को बढ़ाना होगा क्ष् दूसरे स्तंभ के रूप में किसानों को जरुरत है कि कृषि के साथ-2 इसे विविधीकृत करें और कृषि आधारित अन्य लाभकारी क्रियाकलापों यथा पशुपालन, मुर्गीपालन, बकरी पालन, मतस्य पालन, मधुमक्खीपालन, मेड़ों पर इमारती लकड़ी के पेड़ लगाने को भी अपनाएँ।
         तीसरा एवं सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ ये है की किसानों को उनकी उपज बेचने के लिए नजदीक में बाज़ार उपलब्ध हों तथा उनके उपज का उनको लाभकारी मूल्य मिल सके। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उत्पादन लागत कम करने तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने देश के सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना चलायी है। 
      सॉयल हैल्थ कार्ड में मृदा स्वास्थ्य सुधार और उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की जानकारी के साथ खेतों की पोषण स्थिति पर किसानों को सूचना दी जाती है। सिंह ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य स्थिति को नियमित रूप से प्रत्येक 2 वर्ष में आंकलित किया जाएगा ताकि पोषक तत्वों में कमी का पता लगाया जा सके और उसके अनुसार सुधार किया जा सके। 
      उन्होंने कहा कि सॉयल नमूनों के संग्रहण और प्रयोग शालाओं में परीक्षण पर एकीकृत दृष्टिकोण, देश में सभी भू-जोतो का एक रूप कवरेज, प्रत्येक 2 वर्षों के पश्चात सॉयल हेल्थ कार्ड जारी करना सॉयल हेल्थ कार्ड योजना की मुख्य विशेषताएँ हैं। सिंह ने कहा कि पहली बार एक एकीकृत सॉयल नमूना मापदंड अपनाया गया है। सिंचित क्षेत्र में 2.5 हैक्टेयर और गैर सिंचित क्षेत्र में 10 हैक्टेयर के ग्रिड में नमूनों को एकत्र किया जा रहा है। जीपीएस आधारित मिटृी के नमूने एकत्र करने को अनिवार्य कर दिया गया गया है ताकि सुव्यवस्थित डाटाबेस तैयार किया जा सके और पिछले वर्षों में मृदा की स्थिति में परिवर्तन को मॉनिटर किया जा सके। 
        केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि एकीकृत मृदा परीक्षण पद्धति को अपनाया जा रहा है जिसके अधीन व्यापक रूप से 12 स्वास्थ्य मानकों अर्थात प्राथमिक पोषकतत्व (एनपीके); द्वियतीयक पोषकतत्व (सल्फर); सूक्ष्म पोषकतत्व (बोरोन, जस्ता, मैंगनीज़, लोहा और तांबा), और अन्य (पीएच, ईसी और ओसी) का विश्लेषण किया जा रहा है। द्वियतीयक और सूक्षम पोषक तत्वों का विश्लेषण अब अनिवार्य है। सिंह ने कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड का एक समान प्रारूप अपनाया गया है। 
       सॉयल हेल्थ कार्ड में सॉयल जांच आधारित फसलवार उर्वरक सिफ़ारिश के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। पहले दो वर्षीय चक्र (2015-17) में दिनांक 25.07.2017 तक 253 लाख मिट्टी के नमूनों के लक्ष्य की तुलना में सभी 253 लाख मिट्टी के नमूने एकत्रित किए जा चुके हैं और 248 लाख नमूनों (98ऽ) का परीक्षण किया जा चुका है। 12 करोड़ मृदा स्वस्थ्य कार्ड के लक्ष्य के तुलना में अब तक 9 करोड़ कार्ड (75ऽ) किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। 
      केन्द्रीय कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि इस योजना के माध्यम से न सिर्फ किसानों के लागत मूल्य में कमी आ रही है वरन सही पोषक तत्वों की पहचान एवं उपयोगिता भी बढ़ी है। वर्ष 2014-17 के दौरान इस योजना के अन्‍तर्गत 253.82 करोड की राशि जारी की गई है। वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2016-17 के दौरान रसायनिक उर्वरकों की खपत में 8 से 10 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत की समग्र वृद्धि हुई है। 
       सिंह ने कहा कहा कि कुछ राज्यों ने इसमें अच्छी प्रगति की है और 16 राज्यों ने पूर्ण लक्ष्य प्राप्त कर लिया है और 9 राज्य जुलाई 2017 के अंत तक पूर्ण लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे। लेकिन अभी भी 7 राज्यों में प्रगति धीमी चल रही है, ये राज्य हैं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पंजाब, असम, जम्मू-कश्मी्र एवं मणिपुर। उन्होंने समिति के सदस्यों से अनुरोघ किया कि वे अतिशीघ्र अपने राज्य में पूर्ण लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयत्न करें।

रामेश्वरम में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्मारक का उद्घाटन

         प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रामेश्वरम में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्मारक का उद्घाटन किया। मोदी ने डॉ. कलाम की प्रतिमा का अनावरण किया और कलाम स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की। 

   प्रधानमंत्री ने डॉ. कलाम के परिवार के सदस्यों के साथ एक संक्षिप्‍त मुलाकात भी की। प्रधानमंत्री ने कलाम संदेश वाहिनी नामक एक प्रदर्शनी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बस देश के विभिन्न राज्यों में यात्रा करते हुए पूर्व राष्ट्रपति की जयंति यानि 15 अक्टूबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन पहुंचेंगी। 
        एक विशाल सार्वजनिक बैठक में, प्रधानमंत्री ने ब्लू क्रांति योजना के तहत चुने गये लाँग लाइन ट्रॉलरों के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से रामेश्वरम से अयोध्या के बीच एक नई एक्‍सप्रेस रेलगाड़ी श्रद्धा सेतु का शुभारंभ किया।
       उन्होंने ग्रीन रामेश्वरम परियोजना के सारांश जारी किए। राष्ट्रीय राजमार्ग-87 पर मुकुंदायरार चतिरम और अरिचलमुनई के बीच 9.5 किमी लिंक रोड राष्ट्र को समर्पित करते हुए एक पट्टिका का अनावरण किया। सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि रामेश्वरम पूरे देश के लिए आध्यात्मिकता का प्रतीक रहा है। अब इसे डॉ कलाम के साथ करीबी रूप से जुड़े स्थान के रूप में भी जाना जाता है।
         उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम रामेश्वरम की सादगी, गहराई और शांति का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. कलाम का यह स्मारक विशेष रूप से उनके जीवन और समयकाल का दर्शाता है। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जे. जयललिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह एक ऐसी नेता हैं जिन्‍हें हम सभी याद करते हैं। 
       उन्होंने कहा कि यह सब देखकर वह बहुत खुश होंगी और अपनी शुभकामनाएं देंगी।प्रधानमंत्री ने कहा कि बंदरगाहों और रसद के क्षेत्र में परिवर्तन, भारत के विकास में महत्‍वपूर्ण योगदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि जहां तक स्वच्छ भारत मिशन का संबंध है, इसे लेकर राज्‍यों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है।
       प्रधानमंत्री ने कहा कि डा. कलाम ने भारत के युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा प्रगति की ऊंचाइयों को प्राप्‍त करके रोजगार प्रदाता बनना चाहते हैं।

सामाजिक-आर्थिक, गणना की लागत 4893.60 करोड़, गरीबों की बेहतरी का मार्ग

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना 2011 (एसईसीसी 2011) की लागत में संशोधन करने संबंधी ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

     इसमें सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना 2011 की लागत को संशोधित करके 4893.60 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि इससे पहले स्‍वीकृत अनुमानित व्यय 3543.29 करोड़ रुपये था, जो सरकार द्वारा अनुमोदित 4000 करोड़ रुपये की सांकेतिक लागत के भीतर था। तय अवधि एवं लागत में बढ़ोतरी और इसके परिणामस्‍वरूप केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के कंसोर्टियम के लिए प्रति-रिकॉर्ड लागत की ऊपरी सीमा में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है।
        सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना-2011 परियोजना 31 मार्च, 2016 को पूरी हो चुकी है। इसके तहत तय धनराशि का परिव्‍यय पहले ही हो चुका है और परियोजना ने अपने सभी लक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिए हैं। सरकार समाज के गरीब और अधिकार विहीन वर्ग की सहायता के लिए देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में गरीबी उन्मूलन और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर भारी मात्रा में धनराशि खर्च कर रही है।
       एसईसीसी ने गरीबों के लिए बेहतरी का मार्ग प्रशस्‍त किया है और गरीब परिवारों की स्थिति सुधारने के लिए साक्ष्‍य आधारित नियोजित हस्‍तक्षेप किया है। एसईसीसी के आंकड़ों की उपलब्‍धता से पहले, पात्र लाभान्वितों की सही पहचान करना एक प्रमुख चुनौती था। गरीबी रेखा से नीचे की सूची में पक्षपात के आरोपों के कारण सबसे गरीब को शामिल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। एसईसीसी के आंकड़े परिवारों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित हैं साथ ही परिवारों को यह अवसर प्रदान किया गया है कि वे एसईसीसी के एकत्र और प्रकाशित आंकड़ों के बारे में दावों और आपत्तियों को उठाएं। 
       अत: एसईसीसी के आंकड़े ग्रामीण विकास और अन्‍य विभागों द्वारा चलाई जा रही विभिन्‍न योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वितों की पहचान करने और प्राथमिकता का आधार तय करने के लिए परिवारों द्वारा दी गई जानकारी की एक प्रामाणिक सूची प्रदान करते हैं। 
        परिवारों का क्रम त्रिस्‍तरीय प्रक्रिया के जरिए तय किया गया है। इसमें गरीब-नहीं परिवार, गरीब परिवारों में सबसे गरीब के लिए पांच स्‍वत: शामिल मानदंड और गरीब परिवारों की पहचान करने के लिए सात आपद मानदंडों को शामिल किया गया है। सरकार ने गरीब की पहचान करने के लिए राज्‍यों को दीन दयाल अंत्‍योदय योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण आदि के अंतर्गत एसईसीसी आंकड़े और परिवारों की टीआईएन संख्‍या प्रक्रिया का इस्‍तेमाल करने की सलाह दी है। 
       एसईसीसी-2011 के इस्‍तेमाल से लाभान्वित के चयन में पारदर्शिता आई है और डीबीटी के साथ उसकी संरचित व्‍यापकता का शासन और जवाबदेही पर अधिकतम प्रभाव पड़ा है।

जहाजों के जरिये हज यात्रा दोबारा शुरू करने की संभावना

         अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय भारतीय हज यात्रियों के लिए अतिरिक्त विकल्प के रूप में जहाजों के जरिये हज यात्रा दोबारा शुरू करने की संभावना पर जहाजरानी मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है।

     जहाजरानी मंत्रालय ने जानकारी दी है कि यदि 1100 यात्रियों की क्षमता वाले जहाजों का इस्तेमाल किया जाता है तो उसके टिकट का खर्च विमान के खर्च के मुकाबले कम होगा। इसके अलावा यात्रियों के एकत्र होने और यात्रा समय सहित अन्य तार्किक प्रबंधों पर भी विचार करना जरूरी है। 
    जहाजरानी मंत्रालय द्वारा दी गई सलाह पर विदेश मंत्रालय के साथ भी सलाह मशविरा किया गया है। इस बारे में अभी भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं और कुछ भी तय नहीं किया गया है। अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।