Tuesday, 23 January 2018

उद्यमिता बढ़ाने के लिए एसएमई आर्थिक प्रणाली को प्रोत्‍साहन

    नई दिल्ली। वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने आसियान देशों के मंत्रियों तथा विदेश राज्‍य मंत्री जनरल (डॉ.) (सेवानिवृत्त) वी के सिंह के साथ संयुक्‍त रूप से आसियान-भारत व्‍यवसाय तथा निवेश सम्‍मेलन और एक्‍सपो का उद्घाटन किया।

   आसियान देशों के मंत्रियों में ब्रुनेइ के प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री तथा द्वितीय विदेश और व्‍यापार मंत्री लिम जॉक सेंग, इंडोनेशिया के व्‍यापार मंत्री इनगैरसियास्‍तो लुकिता, म्‍यांमार के उद्योग मंत्री उ खिन माउंग चो, कंबोडिया के विदेश मंत्रालय में से‍क्रेट्री ऑफ स्‍टेट छुओन दारा, फिलीपींस के व्‍यापार और उद्योग विभाग की अंडर सेक्रेट्री सुश्री नौरा काकिलाला तेरादो, थाइलैंड की वाणिज्‍य उपमंत्री सुश्री चुटीमा बिनयाप्रफसारा, वियतनाम के उद्योग और व्‍यापार उपमंत्री कावो क्‍योक हुंग तथा आसियान के महासचिव लिम जॉक होइ इस अवसर पर उपस्थित थे। 
   उद्घाटन सत्र में साझी समृद्धि के लिए परस्‍पर व्‍यवसाय और निवेश को प्रोत्‍साहन देने के विषय पर संवाद में पूर्व के देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों का उद्देश्‍य क्षेत्र में द्विपक्षीय व्‍यापार और निवेश को बढ़ाना है। सत्र में विनिर्माण क्षेत्र में भारत और आसियान देशों के व्‍यापार को प्रोत्‍साहित करने, क्षेत्र में उद्यमिता बढ़ाने के लिए एसएमई आर्थिक प्रणाली को प्रोत्‍साहित करने तथा नए विचार पैदा करने के लिए स्‍टार्ट अप संस्‍कृति प्रोत्‍साहित करने के लिए व्‍यापार सहायता कदमों पर बल दिया गया।
    वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने आसियान देशों के मंत्रियों को उनकी उपस्थिति के लिए धन्‍यवाद देते हुए कहा कि भारत और आसियान देशों के संबंध गहरे और मजबूत हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत आसियान देशों के साथ भविष्‍य में सहयोग बढ़ाने की ओर देख रहा है और अगले चार दिनों के लिए सभी कार्यक्रम साझे मूल्‍यों और समान नियति का उत्‍सव मानने के लिए तैयार हैं।
    उन्‍होंने कहा कि इस आयोजन से अगले 25 वर्षों के भारत-आसियान संबंधों का खाका तैयार करने में मदद मिलेगी। आसियान-भारत एक्‍सपो में भारत के व्‍यापार और सेवा क्षेत्र तथा आसियान क्षेत्र की श्रेष्‍ठता प्रदर्शित की गई है।
      एक्‍सपो में अवसंरचना, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और इंजीनियरिंग, आईसीटी, स्‍वास्‍थ्‍य, पर्यटन, पर्यावरण, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, वित्त और बैंकिंग, लॉजिस्टिक तथा रिटेल क्षेत्र के खरीदार और प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। एक्‍सपो में आसियान देशों के व्‍यवसाय तथा कार्यकारी अधिकारी भाग ले रहे हैं, आसियान देश के पैवेलियन, भारतीय राज्‍य तथा निर्यात संवर्धन परिषद के पैवेलियन हैं।
      आयोजन के दूसरे दिन यानी 23 जनवरी, 2018 को सेवा क्षेत्र, क्षेत्रीय वैल्‍यू चेन और कनेक्टिविटी, कृषि, व्‍यापार तथा निवेश जैसे पारस्‍परिक हित के विषयों पर चर्चा की जाएगी। तकनीकी सत्र की अध्‍यक्षता इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स तथा सूचना प्रौद्योगिकी और विधि और न्‍याय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद, खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर द्वारा की जाएगी और वित्त तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्री अरुण जेटली समापन सत्र को संबोधित करेंगे।

धर्म और अध्यात्म का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण

    वडोदरा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वडोदरा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 66वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। 

  इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि महाराजा सयाजीराव गायकवाड ने इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उच्चतर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की थी।
  उन्होंने डॉ. बी आर अंबेडकर सहित समाज के वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली लोगों को समर्थन एवं प्रोत्साहन दिया था। उस वक्त ऐसी व्यापक दृष्टि रखने वाले बहुत कम लोग थे।
  राष्ट्रपति ने आर्थिक रूप से निर्बल वर्ग के छात्रों के लिए अध्यावृत्तियों को संस्थागत बनाने के लिए महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित एवं पिछड़े वर्गों के विकास की दिशा में इस विश्वविद्यालय के छात्रों का योगदान सयाजीराव के आदर्शों के अनुरूप बना रहेगा। बाद में राष्ट्रपति ने गोंडल में अक्षर डेरी की 150वीं जयंती के समारोह में भी भाग लिया। 
    राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे पहले भी ‘अक्षर देरी’ आने का अवसर मिला है। राष्ट्रपति के रूप में यहां पहली बार आकर और इस समारोह में शामिल होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश का यह सौभाग्य रहा है कि, समय-समय पर, अनेक संतों ने समाज सेवा और मानव कल्याण को ही धर्म और अध्यात्म का मुख्य उद्देश्य बनाया है। उन्होने अपने श्रद्धालुओं में सेवा भावना का प्रसार किया है। कई संतों ने ऐसी संस्थाएं बनाई हैं, जो लोक-कल्याण के लिए अनेक क्षेत्रों में निरंतर काम कर रही हैं।
   राष्ट्रपति ने कहा कि मानवता की नि:स्वार्थ सेवा के लिए सभी श्रद्धालुओं को प्रेरित करने वाली स्वामीनारायण संस्था द्वारा आयोजित ‘अक्षर देरी’ के 150वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर, मैं इस संस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को बधाई देता हूं। देश-विदेश के कोने-कोने से इतनी बड़ी संख्या में आये हुए श्रद्धालुओं के इस समूह को मैं मानव-कल्याण के लिए तत्पर एक सेना के रूप में देखता हूं।राष्ट्रपति ने कहा कि यह स्थान श्री गुणातीतानन्द स्वामी का समाधि स्थल है। मैं स्वामीजी के प्रगतिशील विचारों और कार्यों का प्रशंसक रहा हूं। उन्होंने अंध-श्रद्धा का हमेशा विरोध किया। उन्होंने जाति, वर्ग और ऊंच-नीच से हमेशा परहेज किया, और सबके कल्याण के लिए काम किया।
   राष्ट्रपति ने कहा कि अध्यात्म की बुनियाद पर समाज सेवा करना इस संस्था का उद्देश्य है, यह जानकर, मुझे बहुत खुशी होती है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति ‘भारतरत्न’ डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम भी इस संस्था की आध्यात्मिकता और मानव-कल्याण के कार्यों से बहुत प्रभावित थे।
    राष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात की धरती ने, व्यावहारिकता और अध्यात्म के समन्वय के कई उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। महात्मा गांधी ने इसी समन्वय के साथ अध्यात्म की बुनियाद पर आधारित राजनीति की मिसाल पेश की। इसी कड़ी में दूसरा बड़ा उदाहरण है, गांधी जी को अपना पथ-प्रदर्शक मानने वाले, और भारत को वर्तमान स्वरुप प्रदान करने वाले लौहपुरुष, सरदार वल्लभभाई पटेल का। देश के भूतपूर्व प्रधानमन्त्री मोरारजी देसाई का अनुशासित और नैतिकतापूर्ण जीवन भी इसी समन्वय का एक और उदाहरण है।
  राष्ट्रपति ने कहा कि समाज सेवा और अध्यात्म का समन्वय करते हुए, स्वामीनारायण संस्था ने, मानव कल्याण के अनेकों प्रकल्प चलाए हैं। इस संस्था ने सैकड़ों मंदिर और केंद्र दुनियां भर में स्थापित किए हैं। लेकिन इन मंदिरों की एक खासियत है, जो इन्हे अलग पहचान देती है। ये सभी मंदिर, व्यक्ति और समाज के बहु-आयामी विकास के लिए काम करते हैं। इन मंदिरों में चरित्र-निर्माण और नि:स्वार्थ समाज सेवा पर ज़ोर दिया जाता है।
   राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे बताया गया है कि पूरी दुनियां में इस संस्था के लगभग दस लाख अनुयायी हैं और लगभग पचपन हजार कर्मठ स्वयं-सेवी हैं। सभी स्वयंसेवी नियमित रूप से मानव सेवा में अपना समय लगाते है। ये सभी लोग मिलकर, पूरी दुनियां में, लाखों लोगों को हमारे देश की संस्कृति और नैतिक आदर्शों से जोड़ रहे हैं।
      राष्ट्रपति ने कहा कि व्यक्ति के चरित्र से परिवार बनता है, परिवार से समाज बनता है और समाज से राष्ट्र बनता है। स्वामी नारायण संस्था द्वारा पवित्रता, नैतिकता और सेवा भाव पर आधारित शिक्षा देकर लोगों का चरित्र निर्माण किया जाता है। उन्हे जमीन से जुड़े प्रकल्पों में काम करने का अवसर दिया जाता है, मानव कल्याण के कार्यों में लगाया जाता है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि कमजोर वर्गों में शिक्षा का प्रसार करने के लिए इस संस्था द्वारा कई माध्यमों से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसी प्रकार, लोगों के कल्याण के लिए, स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंध किया जाता है। यह जानकर मुझे खुशी हुई है कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आप सब प्रयासरत हैं। सामुदायिक विकास के कार्यक्रमों द्वारा लोगों को सशक्त बनाने के लिए भी इस संस्था द्वारा योगदान दिया जा रहा है। अनेक प्राकृतिक आपदाओं के बाद, उन आपदाओं से प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाने में आप सबने सराहनीय योगदान दिया है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे बताया गया है कि दस दिनों तक चलने वाले इस समारोह में, विश्व-शान्ति के लिए एक महा-यज्ञ किया जायेगा। विश्व-शान्ति पर, आतंकवाद समेत, बहुत से खतरे मंडरा रहे हैं। अस्थिरता और तनाव से भरे हुए इस दौर में, विश्व-शांति के लिए किया जा रहा आप सबका यह संकल्प, सराहनीय है। मैं प्रत्येक भारत-वासी की ओर से इस संकल्प के सिद्ध होने की शुभकामनाएं देता हूं।
    राष्ट्रपति ने कहा कि इस समारोह में स्वच्छ भारत अभियान के विषय पर प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में योगदान देने के लिए मैं आप सबकी प्रशंसा करता हूं। राष्ट्रपति ने कहा कि इस समारोह के ज़रिये आप सब प्रेम, सौहार्द, समानता और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों का प्रसार कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों के लिए मैं आप सबकी विशेष सराहना करता हूं।
   राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे विश्वास है कि स्वामीनारायण संस्था, मानव कल्याण के अपने अभियानों में, निरंतर आगे बढ़ती रहेगी। आप सभी, आध्यात्मिक विकास और सेवा के अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हों, यही मेरी शुभकामना है।