Thursday, 31 August 2017

प्रसंस्‍करण केंद्र सुनिश्‍चित करेगा कि प्‍याज बर्वाद न हो

       केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने यहां वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए तमिलनाडु के पेरंबलुर जिले के चेट्टीकुलम गांव में छोटे प्‍याजों (शालोट्स) के लिए साझा खाद्य प्रसंस्करण इनक्यूबेशन केंद्र का शुभारंभ किया।

   इस अवसर पर श्रीमती हरसिमरन कौर बादल ने कहा कि यह तमिलनाडु और खासकर चेट्टीकुलम गांव के लिए ऐतिहासिक अवसर है। उन्‍होंने 2022 तक किसानों के आय को दुगुना करने के लक्ष्‍य के प्रति इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी (आईआईएफपीटी, तंजावुर) के पहलों की सराहना की।
   उन्‍होंने कहा कि पेरंबलूर जिले के किसान कृषि लागत में वृद्धि, अप्रत्याशित मौसम, बीमारी फैलने और बाजार में पर्याप्त कीमत नहीं मिलने के बावजूद 8,000 हेक्‍टेयर के कृषि क्षेत्र में प्रति वर्ष 70,000 टन छोटे प्‍याजों का उत्‍पादन करते हैं। पेरंबलूर का यह छोटे प्‍याजों के लिए केंद्रीय प्रसंस्‍करण केंद्र सुनिश्‍चित करेगा कि प्‍याज बर्वाद न हो, किसानों की आमदनी में वृद्धि हो और उपभोक्‍ताओं को छोटे प्‍याज उपलब्‍ध हों। छोटे प्‍याजों की यह तकनीक भारत के सभी भागों के लिए उपयोगी है।
    इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी के निदेशक सी. आनंदधर्माकृष्‍णन ने कहा कि उनके संस्‍थान ने प्रति वर्ष एक फसल के प्रसंस्‍करण की तकनीक तथा फसल के लिए संबंधित आधारभूत संरचना विकसित करने का निश्‍चय किया है। इस संबंध में पिछले वर्ष मिशन बनाना (केला) को लागू किया गया और इस वर्ष मिशन अनियन को लागू किया जा रहा है। 
      पेरंबलुर जिले के चेट्टीकुलम गांव में छोटे प्‍याजों (शालोट्स) के लिए साझा खाद्य प्रसंस्करण इनक्यूबेशन केंद्र भी मिशन अनियन अभियान का एक हिस्‍सा है, जो क्षेत्र के प्‍याज उत्‍पादकों का जीवन बेहतर करेगा। मूल्‍य संवर्द्धन के माध्‍यम से यह केंद्र किसानों के आय को दुगुना करने में सहायता प्रदान करेगा। यह केंद्र छोटे प्‍याजों का प्रसंस्‍करण करेगा और चार प्रकार के उत्‍पाद तैयार करेगा- ताजे छोटे प्‍याज, छिलका उतारे हुए छोटे प्‍याज, प्‍याज पाउडर, प्‍याज पेस्‍ट, प्‍याज के बारीक कतरन। 
    उन्‍होंने बताया कि आईआईएफपीटी मिशन कोकोनट पर कार्य कर रहा है, जिसका शुभारंभ अगले वर्ष विश्‍व नारियल दिवस (2 सितंबर, 2018) के अवसर पर किया जाएगा। पेरंबलुर जिला छोटे प्‍याजों के उत्‍पादन का केंद्र है यहां प्रतिवर्ष 8,000 हेक्‍टेयर में छोटे प्‍याज की खेती की जाती है और उत्‍पादन लगभग 70,000 टन प्रतिवर्ष है। किसानों ने भारी घाटे की शिकायत की। इसका कारण संभवत: पारंपरिक रूप से रख-रखाव किया जाना और भंडारण है।
    इस क्षेत्र के सभी साझेदारों ने कहा कि बर्वादी को रोकने के लिए तकनीकी समाधान आवश्‍यक है। इस संबंध में किसान उत्‍पादक यूनियन की भी शुरूआत हुई जो इस पहल में हिस्‍सा लेगा। आईआईएफपीटी ने तीन मशीनें विकसित की हैं। 
     रख-रखाव व भंडारण से छोटे प्‍याज 15 दिनों तक उपयोग के लायक रह सकते हैं,लेकिन मूल्‍यवर्द्धन से प्‍याज पाउडर 6 महीनों तक, प्‍याज पेस्‍ट 5 महीनों तक, छिलका उतारे हुए तथा वैक्‍यूम पैकिंग किए हुए प्‍याज 1 महीने तक तथा प्‍याज की बारीक कतरनें 6 महीने तक उपयोग की जा सकती हैं। इस प्रकार यह प्‍याज की सेल्‍फ लाइफ बढ़ाता है और किसानों को भी अपनी फसल के लिए बेहतर कीमत मिलती है।

वैश्विक अभिशाप : हवाला हो या हथियारों व ड्रग्स से संबंधित मनी हो

       स्विस कॉन्फ़ेडरेशन के राष्ट्राध्यक्ष की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारत आपके लिए नया नहीं है, आप पहले भी कई बार भारत की यात्रा कर चुकी हैं। परन्तु राष्ट्रपति के रूप में आपकी ये यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब हम भारत की स्वतंत्रता के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। सात दशक पूरे होने का भी समय है। 

   प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि आपकी इस यात्रा से आपको उसी गर्मजोशी, और आतिथ्य का अनुभव होगा जो हमें 2016 में अपनी स्विटजरलैंड यात्रा के दौरान मिला था। मुझे ये देखकर हार्दिक प्रसन्नता होती है कि दोनों ही पक्षों की इच्छा सभी स्तरों पर घनिष्ठ संबंध बनाए रखने की है।
     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आज हमने दिव्पक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर व्यापक और सार्थक चर्चा की है। इस यात्रा से, हमारे मजबूत द्विपक्षीय संबंध और आगे बढ़े हैं। भौगोलिक प्रसार और निरस्त्रीकरण जैसे विषय भारत और स्विटजरलैंड दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह बहुत ही स्वागत योग्य कदम है।
       प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आज दुनिया के सामने चिंता का एक गहन विषय है। चाहे वह हवाला हो या हथियारों और ड्रग्स से संबंधित मनी हो। इस वैश्विक अभिशाप से निपटने के लिए स्विट्जरलैंड के साथ हमारा सहयोग जारी है। आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार है और भारत निवेशकों का विशेष रूप से स्वागत करता है। 
   प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि इस संदर्भ में, हम एक नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत जारी रखने की आवश्यकता पर सहमत हुए हैं।भारत की वृद्धि और विकास में सहभागी बनने के लिए स्विट्जरलैंड की कंपनियों के पास अनेक अवसर हैं। आज दोनों देशों के साथ हमारी बातचीत के दौरान हमने ये महसूस किया कि उनमें, परस्पर लाभ के लिए लगातार बढ़ाते रहने की पुरजोर इच्छा है। 
     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारतीय पारंपरिक औषधियां, विशेषकर आयुर्वेद को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। मुझे खुशी है कि स्विट्जरलैंड ने आयुर्वेद को मान्यता दी है तथा इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में और अधिक सहयोग के लिए उत्सुक है।
      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हम पेरिस समझौते को लागू करने की जरूरत पर और इसके कार्यान्यवन के तौर-तरीके विकसित करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए।भारत को अपनी बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए सदस्यता से मदद मिलेगी।

राजीव गौबा ने केंद्रीय गृह सचिव का कार्यभार ग्रहण किया

      भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजीव गौबा (झारखंड कैडर-1982) ने केंद्रीय गृह सचिव का कार्यभार ग्रहण किया।

      गौबा 27 जून 2017 को गृह मंत्रालय में विशेष कार्याधिकारी के रूप में शामिल हुए थे। राजीव महर्षि की सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव का कार्यभार संभाला है।
     इससे पूर्व गौबा केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत थे। गौबा को केंद्र, राज्य सरकार और अंतर्राष्ट्रीय संगठनो में कई वरिष्ठ पद पर कार्य करने का विस्तृत अनुभव है। 
       राजीव गौबा का जन्म वर्ष 1959 में पंजाब में हुआ था और वे भौतिक विज्ञान में स्नातक हैं। गौबा झारखंड के मुख्य सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इससे पहले गौबा गृह, रक्षा, पर्यावरण और वन एवं इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में भी कार्य कर चुक हैं। 
        गौबा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के बोर्ड में भारत के प्रतिनिधि के रूप में 4 वर्ष तक कार्यरत रहे हैं।

प्रधानमंत्री का अतिरिक्त सचिवों एवं संयुक्त सचिवों के साथ चौथा संवाद

         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत सरकार में कार्यरत 80 अतिरिक्‍त सचिवों और संयुक्त सचिवों के समूह से मुलाकात एवं बातचीत की।

    इस तरह की पांच संवाद श्रृंखला में यह चौथा संवाद था। संवाद के दौरान अधिकारियों ने गवर्नेंस, स्वास्थ्य देखभाल, स्वास्थ्य शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, ई–गवर्नेंस, कर प्रशासन और जीएसटी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, शिकायत निवारण और बाल अधिकारों जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। 
      प्रधानमंत्री ने गवर्नेंस की प्रक्रिया में सुधार करने की दिशा में अधिकारियों से काम करने का अनुरोध किया उन्होंने कहा कि टीम भावना को विकसित करने के लिए मानवीय स्पर्श अनिवार्य होता है जो कि सामूहिक परिणाम दे सकता है।
     भारत के पक्ष में वर्तमान सकारात्मक वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को वर्ष 2022 तक न्यू इंडिया के निर्माण की दिशा में स्पष्ट उद्देश्यों के साथ कार्य करने को कहा।