Tuesday, 27 June 2017

बिलासपुर-मनाली-लेह की नई बड़ी लाइन के लिए आधारशिला

       जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य में रेल लाइन बिछाने के काम में महत्‍वपूर्ण प्रगति के बाद भारतीय रेल परिवहन के सामाजिक, आर्थिक लाभों का विस्‍तार कर उन्‍हें पर्वतीय राज्‍यों (हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू-कश्‍मीर) के दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाना चाहता है।

    देश में विभिन्‍न सामाजिक रूप से वांछित परियोजनाओं के बीच बिलास-मंडी-लेह रेल लाइन (मार्ग की लंबाई 498 किलोमीटर) का बहुत महत्‍व है। परियोजना रणनीतिक तथा आर्थिक विकास और पर्यटन महत्‍व की है। 
          इसकी विशेषता यह है कि यह रेल लाइन विश्‍व में सबसे ऊंचे मार्ग पर है। रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने लेह में बिलासपुर-मनाली-लेह नई बड़ी रेल लाइन के अंतिम स्‍थान सर्वे के लिए आधारशिला रखी। 
        इस अवसर पर महत्‍वपूर्ण अतिथि तथा उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आर के कुलश्रेष्‍ठ तथा अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित थे। जम्‍मू-कश्‍मीर के लद्दाख शहर में लेह महत्‍वपूर्ण शहर है। इसकी आबादी लगभग 1.5 लाख है।
            यहां हर वर्ष बड़ी संख्‍या में भारतीय एवं विदेशी पर्यटक आते हैं। व्‍यापक रक्षा प्रतिष्‍ठानों के साथ लेह जिला देश का दूसरा सबसे बड़ा जिला है और 14 कोर का यह मुख्‍यालय भी है। इस क्षेत्र में शीतकाल में तापमान शून्‍य से भी नीचे चला जाता है।
          भारी बर्फबारी के कारण देश के दूसरे हिस्‍सों के साथ इस क्षेत्र का सड़क संपर्क टूट जाता है ऐसे में सामरिक तथा सामाजिक, आर्थिक आवश्‍यकताओं के लिए सभी मौसम के अनुकूल रेल संपर्क आवश्‍यक है। देश के दूसरे हिस्‍सों के साथ लेह को एक बड़ी लाइन से जोड़ने के लिए भारतीय रेल ने अंतिम स्‍थल सर्वेक्षण का काम लिया है। 
          यह मनाली होते हुए बिलासपुर से लेह तक वास्‍तविक निर्माण शुरू होने से पहले की प्रक्रिया है। इससे मंडी, कुल्‍लू, मनाली, कीलांग तथा हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू-कश्‍मीर के महत्‍वपूर्ण शहरों से संपर्क कायम होगा। बिलासपुर से लाइन को आनंदपुर साहेब और नांगल बांध के बीच भानूपाली से जोड़ा जायेगा। 
         यह लाइन शिवालिक, ग्रेट हिमालय तथा जानसकर क्षेत्र होते हुए जाएगी। इन क्षेत्रों में ऊंचाई को लेकर अंतर है (एमएसएल से ऊपर 600 एम से 5300 एम) और यह भूकंपीय में आता है। इसलिए बड़ी संख्‍या में सुरंग, छोटे और बड़े पुल की जरूरत होगी। 
            अंतिम स्‍थल सर्वेक्षण का काम रेल मंत्रालय ने राइट्स लिमिटेड को दिया है। 157 करोड़ रुपये की लागत से यह लाइन 2019 तक पूरी कर ली जायेगी। निर्माण योग्‍य, आर्थिक रूप से लाभकारी, सुरक्षित तथा सभी मौसम के अनुकूल रेल लाइन में अत्‍याधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग किया जायेगा। 
           उन्‍नत डिजिटल मॉडल का उपयोग करते हुए गलियारों का विकास तथा भूगर्भीय मानचित्र, हिमपात और हिमस्खलन अध्ययन, जल विज्ञान और भूकंपीय डेटा के लिए नवीनतम सॉफ्टवेयर का उपयोग इष्टतम कॉरिडोर के चयन के साथ। 
        ऐसे कठिन और दुर्गम इलाके में रेलवे लाइन का निर्माण भारतीय रेलवे के लिए चुनौतीपूर्ण होगा और विश्‍व का बेजोड़ रेल मार्ग होगा।

दुनिया के उद्योग में सबसे तेजी से बढ़ता क्रूज पर्यटन

          केन्द्रीय शिपिंग, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि क्रूज पर्यटन दुनिया भर में पर्यटन उद्योग के सबसे तेजी से बढ़ते घटकों में से एक है। यह बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर जुटाकर भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास करने वाला एक प्रमुख चालक हो सकता है।

          गडकरी नई दिल्ली में "भारत में क्रूज पर्यटन के विकास के लिए कार्य योजना" पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में बोल रहे थे। इस कार्यशाला में संस्कृति और पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री डॉ महेश शर्मा और क्रूज पर्यटन को प्रभावित करने वाले मुद्दों से निपटने वाली नियामक एजेंसियों सहित सरकारी और निजी क्षेत्र के सभी हितधारक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 
          गडकरी ने कहा कि औसत रूप से, क्रूज जहाज पर रोज़गार का सृजन 3-4 यात्रियों के लिए एक नौकरी का है। भारत में प्रति वर्ष 700 क्रूज जहाजों के रख-रखाव की क्षमता है जबकि इस साल केवल 158 जहाजों का रख-रखाव हुआ। क्रूज उद्योग दस लाख क्रूज यात्रियों के लिए 2.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकता है और यह देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहा हैं। 
           उन्होंने आगे बताया कि क्रूज टर्मिनलों का पांच मुख्य बंदरगाहों- मुंबई, गोवा, कोचीन, मैंगलोर और चेन्नई में विकास किया जा रहा है। इसके अलावा 111 अंतर्देशीय जलमार्गों की परिवहन क्षमता का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इस वर्ष के अंत तक दस अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए कार्य शुरू हो जाएगा। इसमें गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ शामिल हैं जिन पर पहले से ही काम चल रहा है। 
          गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से यह अनुरोध किया कि वे अधिक से अधिक पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग द्वारा क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायें। शिपिंग मंत्रालय देश में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सभी सम्बंधित मंत्रालयों और सरकारी संगठनों के साथ सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। 
      शिपिंग सचिव और पर्यटन सचिव के नेतृत्व में इस कार्य के लिए एक संयुक्त कार्य बल का किया गया था। कार्य योजना तैयार करने के लिए एक वैश्विक सलाहकार भी नियुक्त किया गया था। कार्यशाला का उद्देश्य इस कार्य योजना के बारे में विचार विमर्श करना था जिसमें देश में क्रूज पर्यटन के विकास के लिए एक समर्थ व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र का सृजन करने के लिए सरकार के विभिन्न भागों द्वारा कार्य करने की जरूरत है। 
           इस अवसर पर डॉ महेश शर्मा ने कहा की भारत तेजी से बढ़ता हुआ एक आकर्षक पर्यटक गंतव्य है। देश में क्रूज पर्यटन की पूरी क्षमता प्राप्त करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा आपस में सहयोग करके मिलजुल काम करने की जरूरत है ताकि विकास के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा सके।
          क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिपिंग मंत्रालय द्वारा किये गये प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए शिपिंग मंत्रालय में विशेष सचिव (शिपिंग) डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने बताया की इ-वीजा, इ-लैंडिंग तथा सभी क्रूज जहाज सम्बंधित प्रभारों पर न्यूनतम 30 प्रतिशत छूट और तटीय क्रूज आवाजाही पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट जैसे प्रोत्साहन पहले ही लागू किये जा चुके हैं।
          इसके अलावा शिपिंग और पर्यटन मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त कार्य बल की स्थापना की गई है तथा मानक परिचालन प्रक्रिया के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है जिसे विभिन्न हितधारकों के साथ विचार विमर्श करने के बाद समयबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। 
         पर्यटन सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा ने कहा कि देश में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिपिंग और पर्यटन मंत्रालयों द्वारा एक साथ मिलकर काम करने से इस क्षेत्र से अधिकतम लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
         कार्यशाला में हितधारकों ने सुरक्षा, अप्रवास, कस्टम और बंदरगाह जैसे क्रूज बंदरगाह परिचालन के विभिन्न पहलुओं से सम्बंधित अनेक नियामक मुद्दों पर विचार विमर्श किया। उन्होंने क्रूज जहाज रख-रखाव के लिए सभी सरकारी संगठनों हेतु मानक परिचालन प्रक्रियाओं को तैयार करने के लिए कार्य किया।

क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग एक नई अवधारणा, आईटी बुनियादी ढांचे की तुलना में किफायती एवं लाभप्रद

      राष्‍ट्रीय एमएसएमई पुरस्‍कार समारोह 2015 यहां आयोजित किया गया। केन्‍द्रीय सूक्ष्‍म, लघु एवं मझौले उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने एमएसएमई पुरस्‍कार 2015 प्रदान किये। 

      संयुक्‍त राष्‍ट्र ने जब से 27 जून को संयुक्‍त राष्‍ट्र एमएसएमई दिवस घोषित किया है, तब से लेकर अब तक सूक्ष्‍म, लघु एवं मझौले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय इस दिन का चयन एमएसएमई को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार प्रदान करने के लिए करता आया है। एमएसएमई को ये पुरस्‍कार उनके उल्‍लेखनीय प्रदर्शन के लिए दिये जाते हैं। 
          इस पुरस्‍कार समारोह का आयोजन एमएसएमई क्षेत्र में उल्‍लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले उन उद्यमों के प्रति आभार व्‍यक्‍त करने के लिए किया जाता है जो राष्‍ट्रीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं। राज्‍य मंत्री गिरिराज सिंह और हरिभाई पी.चौधरी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
         सचिव के.के. जालान, विकास आयुक्‍त सुरेन्‍द्र नाथ त्रिपाठी, केवीआईसी के अध्‍यक्ष विनय कुमार सक्‍सेना और कॉयर बोर्ड के अध्‍यक्ष सी.पी. राधाकृष्‍णन भी इस अवसर पर मौजूद थे। इस अवसर पर केन्‍द्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने ‘डिजिटल एमएसएमई योजना’ का भी शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्‍होंने एसएपी इंडिया, इंटेल और एचएमटी को तीन सहमति पत्र (एमओयू) सौंपे। 
           इन कदमों से डिजिटल इंडिया मिशन को सफल बनाने की दिशा में मंत्रालय द्वारा किये जा रहे प्रयासों को नई गति मिलेगी। डिजिटल एमएसएमई योजना क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग पर केन्द्रित है, जो एमएसएमई द्वारा अपने यहां स्‍थापित किये गये आईटी बुनियादी ढांचे की तुलना में एक किफायती एवं लाभप्रद विकल्‍प के रूप में उभर कर सामने आई है।
          क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग के तहत एमएसएमई अपनी कारोबारी प्रक्रियाओं के समुचित प्रबंधन के लिए साझा एवं खुद के लिए स्‍थापित किये गये सॉफ्टवेयर सहित आईटी बुनियादी ढांचे तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने हेतु इंटनेट का इस्‍तेमाल करते हैं। क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग के तहत हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं पर कुछ भी निवेश नहीं करना पड़ता है। अत: ‘कैपेक्‍स’ ऐसी स्थिति में ‘ओपेक्‍स’ में परिवर्तित हो जाता है।
           इस योजना से एमएसएमई अपने यहां सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) को उपयोग में लाने के लिए इस नई अवधारणा अर्थात क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। केन्‍द्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र ने इस अवसर पर यह जानकारी दी कि वर्ष 2015 में विभिन्‍न श्रेणियों के तहत राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं की कुल संख्‍या 56 है, जिनमें एमएसएमई के लिए 50 और बैंकों के लिए 6 पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ता शामिल हैं।
            उन्‍होंने यह भी कहा कि एमएसएमई मंत्रालय प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप अथक प्रयास कर रहा है। उन्‍होंने विभिन्‍न क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍ट उपलब्धियां हासिल करने वाले पुरस्‍कार विजेताओं को बधाई दी और उम्‍मीद जताई कि इस क्षेत्र के अन्‍य उद्यम भी पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं द्वारा स्‍थापित किये गये उदाहरणों का अनुकरण करेंगे। 
          केन्‍द्रीय एमएसएमई राज्‍य मंत्री हरिभाई पी.चौधरी ने कहा कि एमएसएमई की अहमियत और भारत के आर्थिक-सामाजिक विकास में उनके उल्‍लेखनीय योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती है। खादी एवं ग्रामीण उद्योगों और कॉयर क्षेत्र सहित एमएसएमई सेक्‍टर कृषि के बाद सबसे बड़ा नियोक्‍ता है।
           हाल के वर्षों में एमएसएमई ने 10 फीसदी से भी ज्‍यादा की वृद्धि दर दर्शाई है, जो बड़ी कंपनियों द्वारा दर्ज की गई वृद्धि दर से भी ज्‍यादा है। केन्‍द्रीय एमएसएमई राज्‍य मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप ‘कारोबार करने में आसानी’ और डिजिटल इंडिया मिशन को ध्‍यान में रखते हुए अनेक कदम उठाये हैं। 
         सितम्‍बर, 2015 में लांच किये गये उद्योग आधार ज्ञापन को कुछ ही मिनटों में बगैर किसी शुल्‍क के दाखिल किया जा सकता है। एमएसएमई इसके अलावा इस मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जा रही सभी योजनाओं के बारे में विभिन्‍न जानकारियां एकल खिड़की अर्थात मोबाइल एप ‘माईएमएसएमई’ पर प्राप्‍त कर सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिये डॉ. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में समिति

        राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने के लिये सरकार ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक पद्म विभूषण डॉ के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।

    समिति के अन्य सदस्य है। डॉ. वसुधा कामत शिक्षा तकनीक के क्षेत्र की एक सुप्रसिदध विद्वान है जिन्होंने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक योगदान दिया है।वे एसएनडीटी विश्वविद्यालय मुंबई की कुलपति भी थीं।
       के.जे. अलफोन्से को स्कूली शिक्षा के सुधार में आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों से निपटने का प्रशासनिक अनुभव है। केरल के कोट्टायम और अरनाकुलम जिलों में 100ऽ साक्षरता हासिल करने में उनकी अहम भूमिका थी। 
         डॉ. मंजुल भार्गवा अमेरिका के पिन्सटन विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर रहे हैं। गौस नंबर सिद्धान्त के क्षेत्र में उनके योगदान के लिये उन्हें बहुत ही कम आयु में गणित का फील्ड मेडल प्रदान किया गया था। डॉ. राम शंकर कुरील, मध्य प्रदेश के महू स्थित बाबा साहेब अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति हैं और वंचित वर्ग को शिक्षा एवं विकास की मुख्य धारा में लाने के विषय पर उनके अनेक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं। 
           डॉ. टी.वी. काट्टीमानी अमरकंटक स्थित आदिवासी विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। वे भाषा शिक्षा और जनसंचार क्षेत्र से हैं। कृष्ण मोहन त्रिपाठी को सर्व शिक्षा अभियान को लागू करने का व्यापक अनुभव है और वह उत्तर प्रदेश हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं। डॉ. मज़हर आसिफ गौहाटी विश्वविद्यालय में फारसी भाषा के प्रोफेसर हैं। उनके शोध निर्देशन में फारसी-असमी-अंग्रेजी भाषा का पहला शब्दकोष संकलित किया गया था। 
           डॉ. एम. के. श्रीधर कर्णाटक नवाचार परिषद और कर्णाटक ज्ञान आयोग के पूर्व सदस्य सचिव हैं। एक दिव्यांग विद्वान, डॉ. एम. के. श्रीधर, सीएबीई के सदस्य भी हैं। समिति तत्काल प्रभाव से काम करना शुरू कर देगी। 
          एक व्यापक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत, जो कि पिछले 30 महीनों से चल रही थी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय को देश भर से शिक्षा शास्त्रियों, शिक्षकों, विशेषज्ञों, छात्रों एवं अन्य हितधारकों से हजारों सुझाव प्राप्त हुये थे। इसके लिये तहसील, जिला एवं राज्य स्तर पर चर्चा की गयी थी।
            राज्य सरकारों ने क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में अपने व्यापक सुझाव दिये थे। राज्य सभा में भी इस विषय पर चर्चा की गयी और शिक्षा पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें 48 सांसदों ने भाग लिया। कई सांसदों ने अपने विचार लिखित रूप से दिये।
           सरकार के माय गव प्लेटफॉर्म पर 26,000 लोगों ने इंटरनेट के जरिये अपनी राय रखी। टीएसआर सुब्रमण्यिन सिति ने भी विस्तार से अपनी सिफारिशें दी। समिति इन सभी सुझावों और सिफारिशों पर विचार करेगी। 

आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतिओं से समाज की सुरक्षा भारत व अमेरिका की प्राथमिकता

        प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाशिंगटन डी सी में कहा, भारत व अमेरिका का आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतिया से अपने समाज की सुरक्षा प्राथमिकताओं मे से एक है।

      समाज का चौमुखी आर्थिक विकास तथा इन की सांझी प्रगति भारत व अमेरिका का मुख्य लक्ष्य था और आगे भी रहेगा। अमेरिका का परस्पर सहयोग तथा सहभागिता की चरम सीमाओं की उपलब्धि पर केन्द्रित है। क्योंकि भारत तथा अमेरिका विश्व की दो विशाल साँझा सशक्तिकरण हमारा उद्देश्य है। भारत व अमेरिका ने मानव प्रयासों के लगभग सभी क्षेत्रों को छुआ है।
        प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, भारत के सामाजिक-आर्थिक बदलाव के लिए हम अमेरिका को प्रमुख मानते हैं। मुझे विश्वास है कि अमेरिका का सहयोग भारत मे नए आयाम पैदा करेगी । मेरा यह स्पष्ट मत है कि एक मजबूत और सफल अमेरिका में ही भारत का हित है। 
           इसी तरह, भारत का विकास और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भारत की भूमिका अमेरिका के हित में है। निवेश का भरपूर विकास हमारे प्रयासों की सांझी प्राथमिकता होगी। भारत व अमेरिका के सभी क्षेत्रो में सहयोग का विस्तार और उनमें गहनता हमारे मुख्य लक्ष्यों मे से एक होगा। इसके लिए हमारी सफलता को और सुदृढ़ करने के लिए हम कदम उठायेंगे।