Tuesday, 6 June 2017

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए पहाड़ी क्षेत्र विकास की घोषणा

          केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जन-शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मणिपुर की राजधानी इंफाल में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम (एचएडीपी) की घोषणा की। 

        डॉ. जितेन्द्र सिंह पूर्वोत्तर वित्त निगम लिमिटेड द्वारा आयोजित और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए मंत्रालय और मणिपुर सरकार की संयुक्त भागीदारी में निवेशकों और उद्यमियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए मंत्रालय सचिव राम मुइवा और प्रमुख उद्यमी भी उपस्थित थे। 

          नई योजना के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि मणिपुर, त्रिपुरा और असम के पहाड़ी क्षेत्रों की विभिन्न पहचान है और ये क्षेत्र सामाजिक-आर्थिक विकास में पीछे छूट गए हैं। विशेष परिस्थितियां होने के कारण पहाड़ी और घाटी वाले जिलों में आधारभूत ढांचा, सड़कों की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और शिक्षा आदि क्षेत्रों में बड़ा अंतर आ गया है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी विकास कार्यक्रम इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए और गंभीर अनुसंधान से प्रेरित है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि मणिपुर के संबंध में मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पहाड़ी क्षेत्रों का कम विकास हुआ है। 

       उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के 80 जिलों में से मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र के तीन जिले संयुक्त जिला आधारभूत ढांचा सूचकांक में सबसे नीचे पैमाने पर हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम कम विकसित पहाड़ी क्षेत्रों में ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से बनाया गया है और इसे प्रायोगिक आधार पर मणिपुर के पहाड़ी जिलों से प्रारंभ किया जाएगा। इससे पहले अपने आगमन के तुरंत बाद डॉ. जितेन्द्र सिंह ने केंद्र सरकार के तीन वर्ष पूरा करने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया और उन्होंने उज्ज्वला योजना के अंतर्गत जरूरतमंद महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन वितरित किए। डॉ. जितेन्द्र ने कहा कि केंद्र सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने की मुख्य विशेषता में न सिर्फ पूर्वोत्तर राज्यों में तीव्र विकास हुआ बल्कि उन विकास कार्यक्रमों का भी शुभारंभ किया गया, जिन्हें दशकों पहले प्रारंभ किया जाना चाहिए था। 

             उन्होंने कहा कि सरकार की नीति द्विस्तरीय है, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों के सभी क्षेत्रों, समाज के हर खंड और प्रत्येक जनजाति का समान विकास सुनिश्चित करने के साथ-साथ आठ पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत के अधिक विकसित राज्यों के समकक्ष लाना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने डॉ. जितेन्द्र सिंह का पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम की घोषणा करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रीय परियोजनाओं में राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए मंत्रालय की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

तुलसी, पीपल तथा नीम के पेड़ पौधे लगाने का आग्रह

    केंदीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने भू-जल में कमी की गंभीर समस्‍या के समाधान के लिए लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने का आग्रह किया।

       जल संसाधन मंत्री  उत्‍तर प्रदेश के नरोरा में विश्‍व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘’गंगा चौपाल’’ को संबोधित कर रही थीं। सुश्री भारती ने लोगों से पलाश और अशोक जैसे पेड़ों के पौध लगाने का आग्रह किया क्‍योंकि ये पेड़ भू-जल को रिचार्ज करते हैं। सुश्री भारती ने कहा कि ‘भारत में आप पवित्र तुलसी, पीपल तथा नीम के पौधे लगाते हैं, मैं आपसे पलाश एवं अशोक के पौध लगाने का आग्रह करुंगी क्‍योंकि इससे पेड़ से भू-जल के स्‍तर उठाने में मदद मिलती है। भू-जल के स्‍तर को ऊपर उठाना भारत की बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का समाधान करोड़ों रूपये खर्च किए बिना आर्थिक और पर्यावरण संगत तरीकों से निकाला जा सकता है।
 

            उन्‍होंने कहा कि भू-जल में कमी की समस्‍या पर विचार के लिए ग्रामीण विकास सचिव, जल संसाधन सचिव तथा पर्यावरण सचिव की एक समिति शीघ्र ही बनाई जाएगी। उन्‍होंने प्रदूषण को कम करने के लिए प्‍लास्‍टिक/पॉलिथीन बैग के इस्‍तेमाल से परहेज करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि गंगा नदी के प्रदूषण का प्रमुख कारण प्‍लास्‍टिक सामग्री का इस्‍तेमाल है और इसे रोका जाना चाहिए। सुश्री भारती ने कहा कि वह जल संरक्षण, वर्षा जल संचय तथा घाटों को स्‍वच्‍छ रखने के लिए एक जन आंदोलन शुरू करना चाहती हूं, जिसमें सेवा निवृत्‍त वरिष्‍ठ नागरिक विद्यार्थी तथा गृहणियां की आवश्‍यकता होगी।
 
           उन्‍होंने कहा कि विकास और परिवर्तन के लिए जन भागीदारी महत्‍वपूर्ण है। जल संसाधन मंत्री अभी गंगा सागर से गंगोत्री तक की तीन सप्‍ताह के गंगा निरीक्षण अभियान पर हैं ताकि वह नमामि गंगे कार्यक्रम की प्रगति के बारे में व्‍यक्‍तिगत रूप से जान सकें। जल संसाधन मंत्री उत्‍तर प्रदेश के नरोरा पहुंची है और आज वहां से भृगु आश्रम तथा नजीबाबाद के रास्‍ते हरिद्वार जाएंगी।

     गंगा बेसिन में कुल पुन:पूर्ति योग्‍य भू-जल संसाधन 170.99 बिलियन क्‍यूबिक मीटर (बीसीएम) है। गंगा बेसिन में 433 बीसीएम के साथ देश के कुल पुन:पूर्ति योग्‍य भू-जल का 40 प्रतिशत है। वास्‍तविक भू-जल उपलब्‍धता 398 बीसीएम हैं। वार्षिक भू-जल ड्राफ्ट 245 बीसीएम (31 मार्च, 2017 को) और कुल 6607 मूल्यांकित इकाइयों (ब्‍लॉक, मंडल, जिला ) और 107 इकाइयां अत्‍यधिक दोहन वाली इकाइयां हैं। 217 गंभीर इकाइयां, 697 अर्द्धगंभीर ईकाइयां तथा 4530 सुरक्षित ईकाइयां हैं। इसके अतिरिक्‍त 92 ईकाइयां लवणयुक्‍त हैं।’

चीन सहित दुनिया के देश चखेंगे अब भारतीय आम का स्वाद

         चीन, ईरान, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया, मॉरीशस, कोरिया गणराज्‍य और संयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) के 21 प्रमुख आयातकों ने एपीडा द्वारा आयोजित आम क्रेता-विक्रेता बैठक (बीएसएम) में भाग लिया।

      देश भर के 100 से भी ज्‍यादा निर्यातकों ने इस क्रेता-विक्रेता बैठक में हिस्‍सा लिया। चीन की एक प्रमुख आयातक मेसर्स डालियान इदू ने भारतीय निर्यातकों के साथ बातचीत की और पेशकश किये गये भारतीय आम पर अच्‍छी प्रतिक्रि‍या व्‍यक्‍त की। कुछ प्रमुख निर्यातकों जैसे कि मेसर्स बॉम्‍बे एक्‍सपोर्ट्स, मेसर्स असर ब्रदर्स, केइबी एक्‍सपोर्ट्स ने बीएसएम के दौरान अच्‍छी प्रतिक्रि‍या मिलने के बारे में जानकारी दी। इस बैठक की एक खास बात यह भी रही कि इस दौरान आम की विभिन्‍न वाणिज्यिक किस्‍मों जैसे कि अल्फांसो, केसर, बंगानपल्ली, दशहरी, लंगड़ा, चौसा इत्‍यादि के लुभावने नमूने पेश किये गये।

          इसी तरह स्थानीय स्वदेशी किस्मों जैसे मल्लिका, पीटर, रुमानी, नीलम, हिममपसंद, अरकाअनमोल, फजली इत्‍यादि के नमूने भी बैठक के दौरान पेश किये गये। दस आम उत्‍पादक राज्‍यों के राज्‍य बागवानी विभागों ने अपने-अपने यहां उगाये जाने वाले आमों की विभिन्‍न किस्‍मों को प्रदर्शित किया। इन राज्‍यों को आमों की विभिन्‍न किस्‍मों को प्रदर्शित करने के लिए स्‍टॉल भी उपलब्‍ध कराये गये। एपीडा ने अपने पवेलियन में ताजे फलों की विस्‍तृत रेंज प्रदर्शित की, ताकि आयातकों को ताजे फलों के रूप में भारत की पेशकश से आयातक परिचित हो सकें। इसके अलावा आम के अनेक मूल्‍य वर्धित उत्‍पादों जैसे कि मैंगो पल्प, अचार, चटनी, जैम एवं जेली, जूस इत्‍यादि को भी इस दौरान प्रदर्शित किया गया।

             इस कार्यक्रम का उद्घाटन वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय में अपर सचिव आलोक वर्धन चतुर्वेदी ने किया और इस अवसर पर एपीडा के चेयरमैन डी. के. सिंह, कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव डॉ. शकील पी अहमद, कर्नाटक राज्‍य आम विकास एवं विपणन निगम के प्रबंध निदेशक कादिर गौड़ा, आंध्र प्रदेश के बागवानी आयुक्‍त चिरंजीव चौधरी, पश्चिम बंगाल की बागवानी आयुक्‍त सुश्री मुधमिता सिन्‍हा रे और विभिन्‍न राज्‍य सरकारों के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

चीन के बीजिंग में मिशन नवाचार एवं स्‍वच्‍छ ऊर्जा मंत्रि‍स्‍तरीय सम्‍मेलन में डॉ. हर्षवर्धन भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे

        विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की अगुवाई में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वितीय मिशन नवाचार एवं स्‍वच्‍छ ऊर्जा मंत्रिस्‍तरीय सम्‍मेलन में भाग लेगा। 

     इस सम्‍मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी शिरकत करेंगे। 18 माह पहले 30 नवंबर, 2015 को 20 देशों के राजनेता मिशन नवाचार (एमआई) का शुभारंभ करने के लिए एकजुट हुए थे। यह नवाचार की गति में तेजी लाने और स्‍वच्‍छ ऊर्जा को व्‍यापक रूप से किफायती एवं विश्‍व भर में सुगम्‍य बनाने के लिए एक उल्‍लेखनीय पंचवर्षीय प्रतिबद्धता है। मिशन नवाचार (एमआई) में अब 22 अर्थव्‍यवस्‍थाओं के साथ-साथ  यूरोपीय आयोग भी शामिल है जो यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्‍व करता है और स्‍वच्‍छ ऊर्जा से जुड़े अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में कुल वैश्विक सार्वजनिक वित्त पोषण के 80 प्रतिशत से भी ज्‍यादा का योगदान देता है। 

           यह नवाचार की गति बढ़ाने और इस स्‍वच्‍छ ऊर्जा क्रांति शुभारंभ के जरिये बदलाव लाने के लिए 22 सदस्‍य देशों एवं यूरोपीय संघ की ओर से समेकित प्रयास है, ताकि समय पर आर्थिक, ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ अन्‍य लक्ष्‍य हासिल किये जा सकें। भारत संचालन समिति का संस्‍थापक सदस्‍य है।

      इसके साथ ही भारत इन दो उप-समूहों का भी एक सदस्‍य है: संयुक्‍त अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी। उपर्युक्‍त बैठक के दौरान सात अभिनव चुनौतियों की घोषणा की जायेगी जिनमें से इन तीन चुनौतियों की अगुवाई भारत करता है: स्‍मार्ट ग्रिड, ग्रिड से इतर पहुंच और टिकाऊ जैव ईंधन।