Friday, 22 December 2017

नया उपभोक्ता सरंक्षण विधेयक संसद के चालू सत्र में पेश होने की संभावना

    नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि मंत्रिमंडल ने नए उपभोक्ता सरंक्षण विधेयक को स्वीकृति दे दी है। 

   इस विधेयक को संसद के चालू सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। श्री पासवान ने कहा कि बीआईएस अधिनियम – 2016 तथा उपभोक्ता संरक्षण विधेयक उपभोक्ता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण घटना है। 
   राम विलास पासवान राष्ट्रीय उपभोक्त दिवस 2016 के उद्घाटन समारोह में अध्यक्षीय भाषण दे रहे थे। राष्ट्रीय उपभोक्त दिवस 2017 का थीम उभरते डिजिटल बाजार : उपभोक्ता सरंक्षण के लिए विषय और चुनौतियां है। इसका आयोजन आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उपभोक्ता मामले विभाग ने किया। 
    श्री पासवान ने कहा कि 1986 में बना वर्तमान उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम 31 वर्ष पुराना है। इस बीच बाजार का पूरा परिदृश्य बदल गया है। किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि स्मार्ट फोन अपने आप में पूरी दुनिया बन जायेंगे। 
      उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्षों में डिजिटल विश्व की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। राम विलास पासवान ने कहा कि सरकार ने बाजार में हो रहे परिवर्तनों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए उपभोक्ता सरंक्षण कानून को आधुनिक बनाने का काम प्रारंभ किया है ताकि उपभोक्ताओं को उचित उत्पाद और सेवा मिल सके और उपभोक्ता संरक्षण में बाधक स्थिति में कार्यकारी हस्तक्षेप हो सके।
    उन्होंने कहा कि यह टेक्नालाजी का युग है और उपभोक्ताओं को शिक्षित करना और डिजिटल विश्व में शिकायतों का समाधान महत्वपूर्ण है। श्री पासवान ने कहा कि डिजिटल साक्षरता तथा वित्तीय साक्षरता दोनों साथ साथ चलनी चाहिए ताकि सरकार के नकद रहित अर्थव्यवस्था विजन में डिजिटल भुगतान तथा विभिन्न वित्तीय उत्पादों के उपयोग के बारे में उपभोक्ता कुशल हो सकें।
    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री सी आर चौधरी ने कहा कि आज व्यापार व्यवसाय वैश्विक हो गए हैं। इसलिए उपभोक्ता नीतियों का प्रणालीबद्ध विकास आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि हम न केवल उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना चाहते हैं बल्कि उन्हें सशक्त बनाना भी चाहते हैं।
      एनसीडीआरसी के अध्यक्ष जस्टिस डी के जैन ने कहा कि इस वर्ष एनसीडीआरसी के समक्ष दायर मामलों में 139 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह वृद्घि उपभोक्ताओं की बढ़ती जागरुकता दिखाती है। उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव अविनाश के. श्रीवास्तव ने बताया कि ऑनलाइन वर्ल्ड में उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए विभाग ने तीन महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 
     इनमें कानूनी मेट्रोलाजी (पैकेज सामग्री) नियम, 2011 में संशोधन करके ई-कामर्स प्लेटफार्म पर प्रदर्शित सामग्रियों पर नियम के अंतर्गत आवश्यक घोषणा शामिल करना अनिवार्य करना प्रमुख ई-कामर्स कंपनियों को कंवर्जन्स प्लेटफार्म पर लाना तथा ई-कामर्स के लिए नियम बनाना शामिल है।

देश के 15,183 गांवों में विद्युतीकरण, उजाला के तहत 28 करोड़ एलईडी

     नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने 2019 तक देश भर में 24न्7 बिजली प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम शुरू किया है। आधी अवधि पूरा होने के बाद ही सरकार ने विद्युत क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किए हैं। 

   ग्रामीण विद्युतीकरण पर दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजूजेवाई) के तहत विशेष ध्यान दिया गया है। शहरी विद्युतीकरण पर एकीकृत ऊर्जा विकास योजना (आईपीडीएस) के अंतर्गत विशेष ध्यान दिया गया है।
     मार्च 2019 तक सौभाग्य योजना के तहत, अब अलग-अलग घरेलू विद्युतीकरण पर जोर दिया जा रहा है। ऊष्मीय विद्युत उत्पादन, पनबिजली और सबसे महत्वपूर्ण सौर, पवन और अन्य हरित ऊर्जा से संबंधित कई ऐतिहासिक निर्णय पहले ही लिए जा चुके हैं, इसके साथ ही प्रेषण और वितरण को सुदृढ़ बनाने, फीडर को अलग करने और उपभोक्ताओं के लिए बिजली के मीटर व्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। 
     इसके तहत न सिर्फ क्षमता बढ़ाने की उपलब्धियां शामिल हैं बल्कि वर्तमान बुनियादी ढांचे में भी ऊर्जा दक्षता बढ़ाने हेतु महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं और साथ ही विद्युत के नुकसान को कम करने एवं उत्तरदायित्व और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई मोबाइल एप्लिकेशन तथा वेबसाइट जैसे ऊर्जा एप, सौभाग्य पोर्टल, केन्द्रीय विद्युत पोर्टल, मेरिट पोर्टल की शुरूआत की गई है।
     दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना : दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजूजेवाई) के तहत 32 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में कुल 42,565 करोड़ रूपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। देश में ग्रामीण विद्युतीकरण की स्थिति : संचयी रूप से (30 नवंबर 2017 तक), 1,24,219 गांवों में विद्युतीकरण और 4,68,827 गांवों में गहन विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो गया है। 277.20 लाख बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन जारी किए गए हैं। 
     देश में 18,452 जनगणना गांवों (2011 की जनगणना के अनुसार 5,97,644 के कुल ग्रामीण बस्तियों में से) में 1 अप्रैल 2015 तक राज्यों द्वारा विद्युतीकृत नहीं किए गए थे। 30 नवंबर 2017 तक, 15,183 गांवों में विद्युतीकरण पूरा हो गया है और 1,052 गांवों में गैर-बसे हुए (गैर-आबाद) लोगों की सूचना मिली है। बचे हुए 2217 गांवों में 1 मई 2017 तक विद्युतीकरण होने की उम्मीद है। 
     ये 2217 गांव विभिन्न राज्यों अरूणाचल प्रदेश (1069), असम (214), बिहार (111), छत्तीसगढ़ (176), जम्मू और कश्मीर (99), झारखंड (176), कर्नाटक (8), मध्य प्रदेश (34), मणिपुर (54), मेघालय (50), मिजोरम (11), ओडिशा (182) और उत्तराखंड (33) में स्थित हैं। सौभाग्य : प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना, भारत सरकार ने सितंबर 2017 में देश में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण हासिल करने के लिए "प्रधानमंत्री सहज बिजल हर घर योजना (सौभाग्य)" नामक एक योजना की शुरूआत की, इस योजना की कुल लागत 16,320 करोड़ रुपये है जिसमें 12,320 करोड़ रूपये का सकल बजटीय समर्थन शामिल है।
       इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सभी परिवारों को जोड़ना एवं बिजली कनेक्शन प्रदान करना है। ग्रामीण इलाकों में एसईसीसी आंकड़ों के आधार पर और शहरी इलाकों में आर्थिक रूप से गरीब परिवारों के आधार पर कम-से-कम वंचित रहने वाले सभी गैर-विद्युतीकृत परिवारों को मुफ्त बिजली के कनेक्शन दिए जायेगें। 
    इसके अलावा दूसरे परिवारों से बिल के साथ दस समान किश्तों में प्रति परिवार 500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित घरों को सौर फोटोवोल्टाइक (एसपीवी) आधारित स्टैंडअलोन पद्दति के साथ एलईडी लाइट, पंखे, पावर प्लग इत्यादि प्रदान किया जाएगा। 2011 के एसईसीसी आंकड़ों को आधार मानते हुए सामाजिक आर्थिक स्थितियों के अनुसार लाभार्थियों की पहचान की जाएगी। 31 मार्च 2019 तक सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
    इस योजना की शुरूआत 28 नवंबर 2017 को मणिपुर में हुआ था और मणिपुर के 1.75 लाख परिवारों (1.62 लाख ग्रामीण परिवारों और 0.13 लाख शहरी परिवारों) को इस योजना के तहत शामिल करने का प्रस्ताव है। एकीकृत ऊर्जा विकास योजना : आईपीडीएस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में गुणवत्ता और विश्वसनीय 24ज्र्7 निर्बाध बिजली आपूर्ति प्रदान करना है। अब तक, निगरानी समिति ने 3,616 शहरों के लिए कुल 26,910 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। राज्यों से संबंधित संस्थाओं को 23,448 करोड़ रुपये मूल्य का कार्य दिया गया है।
     इस योजना में आईटी और तकनीकी सहायता के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में 24ज्र्7 बिजली की आपूर्ति को सुनिश्चित करेगा, लेकिन बिलिंग और संग्रहण दक्षता में भी सुधार करने में मदद मिलेगी, जिसके परिणामस्वरूप तकनीकी और वाणिज्यिक (ए टी एंड सी) नुकसान में भी कमी आएगी। अब तक, आर-एपीडीआरपी के तहत 1363 शहरों को "गो-लाइव" घोषित किया गया है, 52 शहरों में स्काडा नियंत्रण प्रणाली की स्थापना की गई है, 20 स्काडा शहरों में कार्य पूरा कर लिया गया है।
     इस योजना के भाग-1 के तहत 21 डेटा केंद्रों में से 20 अधिकृत हो चुके हैं। 970 शहरों में भाग-बी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। भारत में 45/57 डिस्कॉम (निजी सहित) में उपभोक्ताओं के लिए ऑल इंडिया शॉर्ट कोड '1912' की शुरूआत हो चुकी है। उज्ज्वल डिस्‍कॉम एश्योरेंस योजना : उज्ज्वल डिस्‍कॉम एश्योरेंस योजना (यूडीएवाई), जो बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय और परिचालन को घाटे से उबार कर लाभ में लाने के लिए एक योजना है, सरकार द्वारा विभिन्न हितधारकों के परामर्श से रूप-रेखा देकर दिनांक 20.11.2015 को शुरू की गई थी।
   इस योजना का उद्देश्य लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपयों के लंबे समय से कर्ज और भविष्य में संभावित नुकसान का स्थायी समाधान करना है। इस योजना में सभी क्षेत्रों - उत्पादन, प्रेषण, वितरण, कोयला और ऊर्जा दक्षता में सुधार लाने हेतु उपायों की परिकल्‍पना भी की गई है। योजना की वैधता अवधि दिनांक 31-03-2017 को समाप्त हो गई है। नागालैंड, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव ने दिनांक 20 नवंबर 2017 को यूडीएवाई योजना के तहत भारत सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही, अब तक यूडीएवाई में 27 राज्य और 4 संघ राज्‍य क्षेत्र शामिल हो चुके हैं।
   राष्ट्रीय विद्युत योजना पर तैयार प्रारूप दस्‍तावेज 2021-22 की समय-सीमा में 226 गीगावॉट परियोजना की अधिकतम मांग को पूरा करने हेतु 2017-22 की योजनागत अवधि के लिए अंतर-क्षेत्रीय पारेषण लिंक सहित पारेषण प्रणाली (पारेषण लाइनों और संबद्ध सबस्टेशनों) को कवर करता है। सीबीटीई को सुविधाजनक बनाने के लिए पड़ोसी देशों को विशेष रूप से बिजली आपूर्ति के लिए भारतीय उत्पादक केंद्रों को पड़ोसी देशों के पारेषण प्रणाली से जोड़ने हेतु स्वतंत्र पारेषण  प्रणाली बनाने के अनुमोदन के लिए सक्षम प्राधिकरण (सीए) के लिए आचरण व्यापार नियम (सीबीआर) जारी किए गए हैं। 
     थर्मल : पराई जलाने के कारण उत्‍पन्‍न प्रदूषण को कम करने के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने चूर्णित कोयले की आग से चालित बॉयलरों में को-फायरिंग के माध्यम से बिजली उत्पादन के लिए बायोमास उपयोग हेतु एक नीति जारी की है।
    हाइड्रो पावर परियोजनाएं : हाइड्रो पावर सेक्टर में, 1305 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता वाली 11 हाइड्रो पावर परियोजनाएं वर्ष 2017-18 में चालू होने की संभावना है। इन परियोजनाओं में से, 465 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाली 7 परियोजनाओं को 30.11.2017 तक पहले ही चालू कर दिया गया है और शेष क्षमता मार्च'18 तक चालू होने की संभावना है।
   वित्तीय वर्ष 2017-18 (जनवरी 2017 से नवंबर '2017) के लिए हाइड्रो पावर उत्पादन 120.87 बीयू है। 2880 मेगावाट की दिबांग बहुउद्देशीय परियोजना की डीपीआर को सीईए द्वारा वर्ष 2017 में मंजूरी प्रदान की गई है। 60 मेगावाट नटवर मोरी एचईपी के निवेश के अनुमोदन के बारे में एसजेवीएनएल को सूचित किया गया।
     सौर परियोजनाओं के लिए आईएसटीएस पारेषण प्रभारों की छूट की अवधि को आगे बढ़ाना और घाटा:: संशोधित टैरिफ पॉलिसी 2016 के प्रावधानों के अनुसार, विद्युत मंत्रालय ने अंतरराज्यीय पारेषण शुल्क की छूट के लिए तथा ऊर्जा के सौर और पवन स्रोतों से उत्पन्न बिजली के पारेषण में घाटे के संबंध में 30.9.2016 को एक आदेश जारी किया है। यह छूट उन पवन परियोजनाओं के लिए उपलब्‍ध थी जिन्‍होंने 31 मार्च 2019 तक सीओडी प्राप्त कर लिया था और उन सौर परियोजनाओं के लिए जिन्‍होंने 30 जून 2017 तक सीओडी प्राप्त किया गया था। दिनांक 14.6.2017 को एक संशोधन आदेश जारी किया गया है जिसके माध्यम से उन सौर परियोजनाओं के लिए आईएसटीएस पारेषण शुल्क की छूट और घाटे का प्रावधान उपलब्‍ध कराया गया है जो 31 दिसंबर 2019 तक सीओडी प्राप्त कर लेंगे।
    इससे देश में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। ऊर्जा (शहरी ज्योति अभियान) मोबाइल ऐप : ऊर्जा ऐप उपभोक्ता शिकायत निवारण, नए सेवा कनेक्शन जारी करने, उपभोक्ता द्वारा महसूस की गई बाधाओं की औसत संख्‍या, उपभोक्ता द्वारा महसूस की गई बाधाओं की औसत अवधि, ई-भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या, ऊर्जा हानि / बिजली की चोरी, यानी एटी एंड सी हानि, आईटी सक्षमता (गो-लाइव ऑफ टाउन्‍स), स्काडा का कार्यान्वयन, शहरी व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, राष्ट्रीय पावर पोर्टल पर फीडर डेटा, आईपीडीएस एनआईटी की प्रगति, आईपीडीएस पुरस्कार की प्रगति के बारे में जानकारी उपलब्‍ध कराता है।
      सौभाग्य वेबपोर्टल : 'सौभाग्य' वेब पोर्टल – पारदर्शी सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण की निगरानी के लिए एक प्‍लेटफॉर्म – को दिनांक 16 नवंबर, 2017 को शुरू किया गया। राष्ट्रीय विद्युत पोर्टल : राष्ट्रीय पावर पोर्टल (एनपीपी) - भारतीय पावर सेक्टर सूचना के समेकन और प्रसार के लिए एक केंद्रीयीकृत प्‍लेटफॉर्म - को दिनांक 14 नवंबर, 2017 को शुरू किया गया, जो मंत्रालय द्वारा पूर्व में आरंभ किए गए सभी पावर सेक्टर ऐप्स के लिए एक सिंगल प्‍वाइंट इंटरफेस होगा।