Tuesday, 14 February 2017

दिल्ली वसंतोत्सव : 80 देशों के 6500 से अधिक विदेशी खरीददार

                  दुनिया के सबसे बड़े हस्तशिल्प और उपहार मेले के 43वें संस्करण, आईएचजीएफ- 2017 के दिल्ली दिल्ली वसंतोत्सव का आरंभ 16 फरवरी, 2017 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे में होगा। 

            लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड ने इसे एक ही छत के नीचे लगने वाले हस्तकला प्रदर्शकों को दुनिया के सबसे बड़े समूह के रूप में मान्यता दी है। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि यह मेला 16 से 20 फरवरी, 2017, तक आयोजित होने वाला यह मेला 1,97,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला होगा। देश भर से 900 स्थायी बाजारों (मार्ट) सहित 3,000 से अधिक प्रदर्शक, चौदह उत्पाद श्रेणियों से संबंधित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित करेंगे जिनमें घरेलू बर्तन, होम फर्निशिंग, फर्नीचर, उपहार और सजावटी समान, लैंप और लाइटिंग क्रिसमस और उत्सवी सजावटी समान, फैशन गहने और सामान, स्पा, कारपेट और कालीन, बाथरूम सामान, उद्यान उपकरण, शैक्षिक खिलौने और गेम्स, हस्तनिर्मित कागज उत्पाद और स्टेशनरी तथा चमड़े के बैग शामिल हैं। 

                अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इस मेगा मेले में 80 देशों से ज्यादा देशों के 6500 से अधिक विदेशी खरीददार, भारतीय घरेलू खरीददारों के आने की उम्मीद है। प्रदर्शनी के स्थान में बढोत्तरी और आगंतुकों की संख्या में वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि यह मेला भारत के साथ साथ अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के खरीददारों के लिए भी कितना महत्तवपूर्ण है। यह मेला यह भी दर्शाता है कि विदेशी और देशी खरीददारों के लिए कितना महत्वपूर्ण है जहां उनके लिए एक छत के नीचे घरेलू संबंधी, लाइफस्टाइल, फैशन और कपड़ा उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं। घर, जीवन शैली, फैशन और वस्त्र उद्योग के लिए दुनिया के सबसे बड़े शो में कच्चे माल से निर्मित 2,000 से अधिक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृखंला पेश की जाएगी जिसमें  लकड़ी, धातु, बेंत और बांस, प्राकृतिक रेशों से बने वस्त्र, ऊन, रेशम, जूट, पत्थर, चमड़े, टेराकोटा, लाख और वनस्पति रंग शामिल हैं।

                  इस शो के मुख्य आकर्षणों के तहत उत्तर पूर्वी क्षेत्र और जोधपुर मेगा क्लस्टर के उत्पादों की एक विषयगत प्रदर्शनी प्रस्तुत की जाएगी। लकड़ी के उत्पादों, लकड़ी के हस्तशिल्प वस्तुओं पर एक मंडप इसमें लगा रहेगा। उत्पादन तकनीक, कौशल विकास, जीएसपी योजना, प्रवृत्तियां और पूर्वानुमान, केंद्रीय बजट और आगामी जीएसटी पर चर्चा करने के लिए संबंधित जानकारीपूर्ण सेमिनार भी इस दौरान आयोजित किए जाएंगे। घरेलू खुदरा बाजार में अभूतपूर्व वृद्धि को साकार करने के उद्देश्य से परिषद ने ऑटम 2014 के दौरान घरेलू खुदरा व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए आईएचजीएफ -दिल्ली मेले के दरवाजे खोल दिये थे। तब से, प्रमुख खुदरा ब्रांड और ई कॉमर्स कंपनियां जैसे- गुड अर्थ, फर्नीचर रिपब्लिक, फैब इंडिया, वेस्ट साइड, आर्चीज लिमिटेड, डीएलएफ ब्रांड्स लिमिटेड, ऋहोम, शॉपर्स स्टॉप, लाइफस्टाइल ग्रुप, अरबन लैडर.कॉम, पीप्पेरफ्राई.कॉम, अजियो.कॉम, फैब फर्निश.कॉम, शॉपक्लूज.कॉम सहित अन्य दूसरी कंपनिया इस मेले में नियमित रूप से भाग ले रही हैं। 

               इन कंपनियों ने मेले में भाग लेने के लिए खुद का पंजीकरण कराया है। मीडिया के साथ बातचीत में ईपीसीएच के ईडी राकेश कुमार ने बताया कि 1994 में अपनी स्थापना के बाद से, आईएचजीएफ- दिल्ली मेले ने भारत के हस्तशिल्प व्यापार मे एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने मेले में न केवल बड़ी संख्या में भारतीय निर्यातकों को भाग लेने के लिए सक्षम बनाया है बल्कि विदेशी खरीदारों को भी एक ही स्थान पर एक ही छत के नीचे उनकी आवश्यकता की चीजें मुहैया करायी हैं।

                   उन्होंने कहा कि आईएचजीएफ द्वारा निभायी गयी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका से देश की विदेशी मुद्रा आय में बढ़ोत्तरी हुई है और इससे रोजगार भी पैदा हुए हैं। ईपीसीएच के चैयरमैन दिनेश कुमार ने कहा कि यह हकीकत है कि अमेरिका और यूरोप भारत के प्रमुख खरीददार हैं लेकिन इसके बावजूद ईपीसीएच अब अपना ध्यान लातिन अमेरिका, मध्य एशिया, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे नए उभरते बाजारों पर केंद्रित कर रहा है।

             अप्रैल 2016 से दिसंबर 2016 के दौरान हस्तशिल्प के निर्यात में 12.10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी, जो रूपये के संदर्भ में 17,939.05 रुपये करोड़ है। डॉलर के संदर्भ 2673.48 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ इसमें 8.25ऽ की वृद्धि दर्ज की गयी। ईडी, ईपीसीएच ने बताया कि वर्ष 2016-17 के लिए निर्यात लक्ष्य 3600 मिलियन डॉलर (23,560.00 करोड़ रुपये) का रखा गया है और परिषद को उम्मीद है कि यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। हस्तशिल्प निर्यात के विकास को बढ़ावा देने के लिए ईपीसीएच देश की एक नोडल एजेंसी है।

हृदय रोगियों के लिये राहत , स्‍टंट की कीमतों में 380 प्रतिशत की कमी

               सबके लिए सस्‍ती और बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा प्रदान करने के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत सरकार ने हृदय में लगाये जाने वाले स्‍टंट की मूल्‍य सीमा तय करने की अधिसूचना जारी कर दी है। 

            यह सूचना यहां रसायन एवं उर्वरक तथा संसदीय कार्यमंत्री अंनत कुमार ने दी। मंत्री ने कहा कि इस कदम से स्‍टंट की कीमतों में लगभग 380 प्रतिशत की कमी आ जायेगी। अनंत कुमार ने बताया कि बाजार में बेयर मेटल स्‍टंट (बीएमएस) का 10 प्रतिशत हिस्‍सा है। उसकी कीमत 7260 रुपये सीमित कर दी गई है। इसी तरह ड्रग एल्‍यूटिंग स्‍टंट (डीईएस) का बाजार में 90 प्रतिशत हिस्‍सा है, जिसकी कीमत 29,600 रुपये सीमित कर दी गई है। कीमतों में वैट और अन्‍य स्‍थानीय कर शामिल नहीं हैं। मंत्री ने बताया कि स्‍टंट पर तमाम राज्‍यों में 5 प्रतिशत वैट लगाया जाता है, जिसके हिसाब से बीएमएस और डीईएस का खुदरा मूल्‍य क्रमश: 7623 रुपये और 31,080 रुपये होगा।

               उन्‍होंने बताया कि 60 दिन के अंदर राष्‍ट्रीय औषध मूल्‍य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने यह कीमतें तय की हैं। अनंत कुमार ने कहा कि पहले स्‍टंटों की बिक्री से मनमाना नफा कमाया जाता था, जिस पर इस नि‍र्णय से बहुत प्रभाव पड़ा है। उन्‍होंने कहा कि बहरहाल नई कीमतों से उद्योगों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। पहले बीएमएस का खुदरा मूल्‍य 45,000 रुपये और डीईएस का 1,21,000 रुपये था। अब बीएमएस की कीमत घटकर 7623 और डीईएस की 31,080 हो गई है। इस तरह मरीजों को औसतन 80-90 हजार रुपये का लाभ होगा।

               अनंत कुमार ने बताया कि स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने हृदय में लगाये जाने वाले स्‍टंट को 19 जुलाई, 2016 को आवश्‍यक औषधि सूची 2015 में शामिल किया था। इसी तरह रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने 21 दिसंबर, 2016 को हृदय में लगाये जाने वाले स्‍टंट को औषधि मूल्‍य नियंत्रण आदेश, 2013 की अनुसूची 1 में शामिल किया था। 

                    मंत्री ने आश्‍वासन दिया कि वे स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय को लिखेंगे कि कीमतों को बढ़ने से रोका जाये तथा डॉक्‍टरों की फीस और अस्‍पताल में मरीज के रहने की अवधि के संबंध में निगरानी रखी जाये ताकि कीमतों की कमी का लाभ मरीजों को मिल सके। उन्‍होंने कहा कि अस्‍पतालों में जो स्‍टंट पहले से जमा हैं, उनकी कीमतों में भी संशोधन किया जायेगा। उन्‍होंने बताया कि अगर तयशुदा कीमतों की अवलेहना होती है तो एनपीपीए को यह अधिकार दिया गया है कि‍ वह अतिरिक्‍त कीमत को 15 प्रतिशत ब्‍याज के साथ वसूल करे। 

                 उन्‍होंने कहा कि मंत्रालय ने ‘फार्मा जन समाधान’ और ‘फार्मा सही दाम’ नामक दो मोबाइल एप्प शुरू किये हैं। इनके द्वारा कोई भी व्‍यक्ति मंत्रालय के पास शिकायत भेज सकता है। उन्‍होंने कहा कि नई कीमतों से ‘मेक इन इंडिया’ को बड़े पैमाने पर प्रोत्‍साहित करने का अवसर मिलेगा। 

                     इस अवसर पर औषध विभाग के सचिव जय प्रिय प्रकाश, एनपीपीए के अध्‍यक्ष भूपेन्‍द्र सिंह और एनपीपीए की सदस्‍य सचिव श्रीमती शर्मिला मैरी जोसेफ और अन्‍य विशिष्‍टजन भी उपस्थित थे।

ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों के लिए योजनाएं

                      भारत सरकार के सामाजिक न्याय एंव अधिकारिता मंत्रालय की सांविधिक निकाय- ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहु निःशक्तताग्रस्त व्यक्तियों के कल्याण के राष्ट्रीय न्यास ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली के बाल न्यूरोलॉजी प्रभाग के साथ मिलकर विज्ञान भवन नई दिल्ली में 'ऑटिज्म टूल्स-आईएनसीएलईएन एंड आएसएए में मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए दूसरी तीन दिवसीय कार्यशाला' का आयोजन किया।

               केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (दिव्यांगजन) के सचिव एन एस कांग, राष्ट्रीय न्यास के संयुक्त सचिव व मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश जैन, एम्स के डॉक्टरों के साथ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो बलराम ऐरन, गैर सरकारी संगठन और और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता के अधिकारीगण भी मौजूद थे। इस कार्यशाला को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सरकारी अस्पतालों के 53 से अधिक डॉक्टरों ने भाग लिया। 

                   इसमें दिल्ली के विभिन्न सरकारी अस्पतालों से 29 डॉक्टर, पंजाब से 5, पश्चिम बंगाल से 4, बिहार और चंडीगढ़ से 3-3 और असम तथा मेघालय से 1-1 डॉक्टर शामिल थे। दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के लिए इसी तरह, तीसरी कार्यशाला को 31 मार्च, 1 अप्रैल और 2 अप्रैल, 2017 को दिल्ली में आयोजित करने की योजना बनाई गयी है। कार्यशाला का उद्देश्य आईएनसीएलईएन और आईएसएए टूल्स का प्रयोग कर ऑटिज्म का सही ढंग से निदान करने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों (बाल रोग विशेषज्ञों, मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों) को प्रशिक्षित करना था। 

             कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षित किया गया, जो बाद में आईएनसीएलईएन और आईएसएए टूल्स का प्रयोग कर अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ऑटिज्म के निदान के लिए प्रशिक्षण देंगे। यह ऑटिज्म निदान और प्रमाणीकरण में एकरूपता सुनिश्चित करेगा। विशेषाधिकार लाभ उठाने के लिए व्यक्तियों और परिवारों को सक्षम बनाएगा। सरकार ने ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों के लिए विभिन्न योजनाएं और नीतियां तैयार की हैं। 

                  ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहु निःशक्तताग्रस्त व्यक्तियों के कल्याण का राष्ट्रीय न्यास देश में 450 से अधिक पंजीकृत संगठनों के माध्यम से शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास, स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा और आवासीय देखभाल की सुविधा के साथ विकलांग व्यक्तियों के लिए 10 योजनाएं लागू कर रहा है। ऑटिज्म पर प्रमाणीकरण की इन सुविधाओं से लोगों को अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

प्रकाशन वि‍भाग व सस्‍ता साहित्‍य मंडल के बीच समझौता

              सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन प्रकाशन विभाग वा सस्‍ता साहित्‍य मंडल ने यहां एक समझौता-दस्‍तावेज पर हस्‍ताक्षर किये। 

            समझौते के तहत दोनों संस्‍थान स्‍वतंत्रता संग्राम के महानायकों, सांस्‍कृतिक हस्तियों और राष्‍ट्र विकास में कार्य करने वाले अन्‍य प्रतिष्ठित व्‍यक्तियों के बारे में संयुक्‍त रूप से पुस्‍तकों का प्रकाशन करेंगे। यह समझौता दोनों संगठनों के बीच एक संयुक्‍त पहल है, जिसके तहत युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध और विविधतापूर्ण संस्‍कृति तथा इतिहास की जानकारी दी जायेगी। विभिन्‍न विषयों पर लोगों को बेहतर साहित्‍य उपलब्‍ध कराया जायेगा। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण सचिव अजय मित्तल, सस्‍ता साहित्‍य मंडल के सचिव प्रोफेसर इंद्रनाथ चौधरी, प्रकाशन विभाग की एडीजी डॉ. साधना राउत और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव मिहिर कुमार सिंह उपस्थित थे। 

               समझौते में 20 पुस्‍तकों के एक सेट का संयुक्‍त प्रकाशन किया जायेगा, जिनमें 10 पुस्‍तकों को दोनों संस्‍थान एक दूसरे के कैटलॉग से चुनेंगे। इसके अलावा स्‍वतंत्रता संग्राम, भारतीय संस्‍कृति और नैतिकता और आदर्शों पर 10 छोटी नई पुस्‍तकों के एक सेट का संयुक्‍त प्रकाशन भी किया जायेगा। इस समझौते से दोनों संगठनों को यह अवसर मिलेगा कि वे अपने एक-दूसरे द्वारा प्रकाशित पुस्‍तकों की प्रदर्शनी और ब्रिकी का आयोजन कर सकते हैं। 

           यह समझौता हस्‍ताक्षर करने की तिथि से 3 वर्षों तक मान्‍य होगा जिसे आपसी रजामंदी के तहत बढ़ाया जा सकता है। उल्‍लेखनीय है कि महात्‍मा गांधी ने 1925 में न्‍यास के रूप में सस्‍ता साहित्‍य मंडल की स्‍थापना की थी, जिसका उद्देश्‍य उच्‍चस्‍तरीय हिंदी साहित्‍य को प्रोत्‍साहित, विकसित और प्रकाशित करना तथा जनता को सस्‍ती कीमतों पर उपलब्‍ध कराना था।

           अपनी स्‍थापना के समय से अब तक सस्‍ता साहित्‍य मंडल ने भारतीय संस्‍कृति, विरासत, भारतीय महाकाव्‍यों और कहानियों की 2500 से अधिक पुस्‍तकें प्रकाशित की हैं। संगठन ने बच्‍चों के लिए विशाल साहित्‍य का सृजन किया है ताकि उन्‍हें राष्‍ट्र और मानवता के प्रति प्रेम और जीवन के आदर्शों की शिक्षा दी जा सके।

5.35 करोड़ से कृषि शिक्षा के 100 केन्द्र

                 केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कृषि स्नातक तक के पाठयक्रमों को रोजगार से जोड़ कर पेशेवर बना दिया गया है। जिससे अब छात्र - छात्राओँ को अपनी आजीविका कमाने में भारी मदद मिलेगी। 

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष पांचवी डीन समिति की रिपोर्ट देश भर के कृषि विश्वविद्यालयों में लागू कर दी गयी है। यह इसी शैक्षणिक सत्र 2016-17 से लागू हो जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं परिषद संस्थानों के निदेशकों के सम्मेलन में कही। इस मौके पर कृषि व किसान कल्याण राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला, डेयर के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र और कृषि विश्वविद्यालयों के माननीय कुलपति उपस्थित थे। 

              केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि युवा राष्ट्र की धरोहर हैं। कृषि की बेहतरी के लिए जरूरी है कि हम अपने युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करें। इसमें कृषि विश्व विद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की अहम भूमिका है। इस दिशा में आईसीएआर द्वारा ‘स्टूडेंट रेडी’ योजना चलाई जा रही है जिसमें वर्ष 2016-17 में सभी छात्रों की फेलोशिप को एक हजार रूपये से बढ़ाकर तीन हजार रूपये किया गया है। इसके अलावा एक अन्य योजना ‘आर्या’  भी सफलता से चलाया जा रहा है।

             सिंह ने कहा कि वर्ष 2016 में कृषि शिक्षा को बढावा देने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना प्रारंभ की गई जिसमें 5.35 करोड़ रूपये के बजट के साथ 100 केन्द्र खोले जाने हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि देश में नए विश्व विद्यालयों तथा कॉलेजों के माध्यम से कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं जैसे कि राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार के रूप में अपग्रेड किया गया है, साथ ही इसके तहत चार नए कॉलेज खोले गए हैं। 

              मोतिहारी में एकीकृत कृषि प्रणाली पर एक राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र स्थापित किया गया। सीएयू इम्फाल में छ: नए कॉलेज खोले गये हैं जिससे वहां कॉलेजों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।  रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्व विद्यालय, झांसी, बुन्देलखंड में चार नए कॉलेज खोले गए हैं जिनमें दो उत्तर प्रदेश में और दो कॉलेज मध्य प्रदेश में हैं।

            सिंह ने कहा कि आईएआरआई-झारखंड की स्थापना की जा चुकी है, वहां के छात्र विभिन्न पाठयक्रमों में शिक्षा  ग्रहण कर रहे हैं। देश के उत्तर- पूर्वी राज्यों में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए असम में आईएआरआई के लिए जमीन की पहचान कर ली गई है। जल्द ही आईएआरआई-असम की आधारशिला रखी जाएगी। आन्ध्र प्रदेश में आचार्य एन.जी.रंगा कृषि विश्वविद्यालय तथा तेलंगाना में दोनों को अलग - अलग 122.5 करोड़ रूपये जारी कर दिए गये हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अंतराष्ट्री्य सहयोग बढ़ाने की दिशा में भारत का विदेशी सरकारों, विदेशी विश्वविद्यालयों और अंतर्राष्ट्रीय बॉडीज के साथ लगातार मजबूत हुआ है। ब्रिक्स कृषि अनुसंधान प्लेटफार्म (एक विचुअल नेटवर्क) की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ है।

                   कृषि मंत्रालय कंधार, अफगानिस्तान में अफगान राष्ट्री्य विज्ञान व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने में सहायता कर रहा है। म्यांमार में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के एडवांस्ड सेन्टर की स्थापना करने में भी सहयोग कर रहा है। इसी प्रकार का सहयोग अफ्रीका महाद्वीप में भी किया जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन से उत्पादकता,  टिकाऊपन,  लाभप्रदता में सुधार होगा। सिंह ने यह भी कहा कि ‘लैब टू लैण्ड’ कार्यक्रम आगे बढ़ाने की जरूरत है। इसमें कृषि विज्ञान केन्द्रों की खास भूमिका है। 

            केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आईसीएआर के सभी संस्थानों को आर्थिक रूप से व्यावहारिक मॉडल विकसित करने पर बल देना चाहिए।

              संस्थानों को डिजिटलाइजेशन की दिशा में भी पूरी सक्रियता से काम करने की जरूरत है। आखिर में सिंह ने सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अनुसंधान व शिक्षा का बेहतर तालमेल बनाते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।
    

एयरो इंडिया 2017 का अवलोकन

           सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बेंगलुरु में वायुसेना स्‍टेशन येलाहानका में 11वां द्विवार्षिक एयरोस्‍पेस एवं रक्षा प्रदर्शिनी-एयरो इंडिया 2017 का अवलोकन किया।

          एयरो इंडिया 2017, 14 से 18 फरवरी, 2017 तक चलेगा। सेना प्रमुख ने सरकारी, सार्वजनिक और निजी उद्योगों की वीथिकाओं का भी दौरा किया। उन्‍होंने राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय निर्माताओं से भी बातचीत की। सेना प्रमुख ने ‘मेक इन इंडिया’ के प्रति दिलचस्‍पी दिखाई जिसके कारण आधुनिकीकरण में तेजी आई है। एयरो इंडिया 2017 के दौरान भारतीय सेना के विमानन कोर ने हवाई प्रदर्शन किया। उन्‍नत हल्‍के हेलीकॉप्‍टर ने मारक क्षमता और सेना की सहायता करने में अपनी योग्‍यता दिखाई।

               उल्‍लेखनीय है कि उन्‍नत हल्‍के हेलीकॉप्‍टरों को भारत में बनाया गया है। इसे आमतौर पर ‘रुद्र’ के नाम से जाना जाता है। सेना विमानन मंडप में भारतीय सेना के विभिन्‍न विमानों को भी प्रदर्शित किया गया है।

इलेक्ट्रोनिक निर्माण के लिए 250 निवेश प्रस्ताव

            इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रोद्योगिकी तथा विधि एवं न्यायमंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि मोदी सरकार का 2017-18 का बजट ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है। 

            उन्होंने कहा कि भारत विशाल डिजिटल क्रांति की दहलीज पर खड़ा है, जिसके मद्देनजर डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देना सरकार की रणनीति का हिस्सा है, ताकि व्यवस्था साफ सुथरी हो तथा भ्रष्टाचार और काले धन का सफाया हो सके। मंत्री ने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था का उद्देश्य उत्तरदायित्व और पारदर्शिता बढ़ाना है। इस संबंध में भारत में ‘इको प्रणाली’ बनाई जा रही है, ताकि देश इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने का केन्द्र बन सके। पिछले दो वर्षों के दौरान इलेक्ट्रोनिक निर्माण के लिए 250 से अधिक निवेश प्रस्ताव मिले हैं। 

                 कुल 1.26 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि भारत में ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के कारण बहुत परिवर्तन आया है। जून 2014 तक भारत में टेलीफोन का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 95 करोड़ थी, आज 108 करोड़ लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। 2014 में 63 करोड़ लोगों के पास आधार कार्ड थे। अब उनकी संख्या 111 करोड़ हो गई है। इसी प्रकार 2014-15 में छह करोड़ मोबाइल हैंडसैट थे। भारत की मोबाइल निर्माण क्षमता 11 करोड़ तक हो गई है। पिछले दो वर्षों के दौरान 72 मोबाइल हैंडसैट और पूर्जे बनाने की नई इकाईयां लगाई जा चुकी हैं। 

            इसके साथ ही सामान्य सेवा केन्द्र, भारतीय नेट, जीवन प्रमाण पोर्टल, छात्रवृत्ति पोर्टल, ई-नैम, ऑन लाइन, अस्पताल सेवा, आदि सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। देशभर में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के लिए दिसंबर 2016 में ‘डिजी धन अभियान’ शुरू किया गया था। देश भर के 640 जिलों के 5636 संभागों में दो करोड़ से अधिक लोगों और 7.18 लाख दुकानदारों को डिजिटल भुगतान के प्रशिक्षित किया गया।

             इसी प्रकार सरकार द्वारा हाल में जारी ‘भीम ऐप्प’ से मोबाइल फोन द्वार डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अब तक 140 लाख लोगों ने ‘भीम ऐप्प’ को अपना लिया है। उल्लेखनीय है कि व्यापारिक गतिविधियों के लिए शीघ्र ही ‘आधार पे’ प्रणाली शुरू की जाएगी। इससे उऩ लोगों को सुविधा होगी जिनके पास डेबिट कार्ड, मोबाइल वॉलेट और मोबाइल फोन नहीं हैं। सरकार जल्द ही ‘स्वयं प्लेटफार्म’ को भी जारी करेगी।

            इसके तहत 350 ऑन लाइन पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे। वित्तीय क्षेत्र की सुरक्षा और स्थायित्व लिए साइबर सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण हैं। सरकार वित्तीय क्षेत्र के लिए कंप्यूटर आपात प्रणाली गठित कर रही है।

विधानसभा चुनाव देखने के लिए भारत में नामीबिया व रूस सहित 13 देशों के चुनाव प्रबंधन प्रमुख

                  रूस, नामीबिया, किर्गिस्तान, मिस्र और बांग्लादेश सहित 13 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रतिनिधि और प्रमुख भारत में चल रहे विधानसभा चुनावों को देखने के लिए नई दिल्ली पहुंच गये हैं। 

            इस प्रतिनिधिमंडल में नामीबिया के निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष एवं एक आयुक्त, मिस्र के सुप्रीम कोर्ट के दो सदस्य, रूसी संघ के केंद्रीय निर्वाचन आयोग के सदस्य तथा बांग्लादेश और किर्गिस्तान के निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इन प्रतिनिधियों ने भारत में चुनाव प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं, चल रहे विधानसभा चुनाव में चुनाव तैयारियों की मुख्य विशेषताएं आदि से संबंधित व्यापक ब्रीफिंग में शामिल होने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) का भी दौरा किया।

               इस ब्रीफिंग सत्र के दौरान दक्षिण-दक्षिण सहयोग के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को इन चुनावों में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के उपयोग और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) के उपयोग के साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रबंधन की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विस्तृत रूप से बताया गया। 

            इसके अलावा उन्हें चुनाव प्रबंधन, आईटी के उपयोग, चुनावी कानूनों, व्यय निगरानी, ईवीएम / वीवीपीएटी, और स्वीप के बारे में भी जानकारी दी गई। ये प्रतिनिधि देहरादून के लिए रवाना हो जाएंगे जहां वे चुनावी तैयारियों, मतदान केन्द्रों पर सामान भेजे जाने वाले स्थलों तथा 15 फरवरी 2017 को संपन्न हो रहे चुनाव के मतदान केन्द्रों का भी दौरा करेंगे। 

            अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए चुनाव आगंतुकों कार्यक्रम (ईवीपी) को भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के साथ साझेदारी द्वारा आयोजित किया है। दक्षिण-दक्षिण सहयोग पहल के तहत ईसीआई और यूएनडीपी मिलकर पिछले कई वर्षों से चुनावी प्रबंधन के क्षेत्र में एक साथ काम कर रहा है।

4.19 करोड़ आयकर रिटर्न्स, 1.62 करोड़ रिफंड

               बैंगलुरू स्थित आयकर विभाग के केंद्रीयकृत प्रोसेसिंग केंद्र (सीपीसी) ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 10 फरवरी, 2017 तक 4.19 करोड़ से भी अधिक आयकर रिटर्न्स (आईटीआर) प्रोसेस कर लिये हैं। 

       आयकर विभाग ने 1.62 करोड़ रिफंड जारी किये हैं। जारी की गई 1.42 लाख करोड़ रुपये की रिफंड राशि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 41.5 प्रतिशत अधिक है। रिफंड राशि के काम को तेजी से निपटाने पर जोर देने के परिणामस्वरूप 60 दिनों के अंदर सभी आयकर रिटर्न्स प्रोसेस किये गए जो तेज गति से और अधिक प्रभावी रूप से करदाता सेवा उपलब्ध कराने के लिए सीबीडीटी की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। 

              छोटे कर दाताओं की रिफंड राशियों को तेजी से जारी करने के काम को उच्च प्राथमिकता दिए जाने के कारण जारी किए गए रिफंड में से 92 प्रतिशत मामले 50 हजार रूपये से कम राशि के हैं। 50 हजार रूपये से कम राशि के बकाया मामले 2 प्रतिशत से भी कम हैं। ऐसे अधिकांश मामले अभी हाल में दाखिल किए गए आईटीआर के हैं या विभाग को करदाता का जवाब प्रतीक्षित होने से संबंधित हैं। करदाताओं ने 10 फरवरी, 2017 तक 4.01 करोड़ की संख्या में इलेक्ट्रानिक रूप से आईटीआर दाखिल करके सीबीडीटी के ई-गर्वेनेंस में विश्वास व्यक्त किया है।

                   आईटीआर की यह संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा 60 लाख से भी अधिक अन्य ऑनलाइन फार्म दाखिल किए गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 41 प्रतिशत अधिक हैं। सीबीडीटी अपने कार्यक्रम ई-गर्वेनेंस के माध्यम से यथा संभव श्रेष्ठ करदाता सेवाएं सुनिश्चित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रपति का सर्बिया के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर संदेश

               राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सर्बिया गणराज्य के राष्ट्रीय दिवस पर वहां की सरकार और लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। 

      सर्बिया गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम तोमिस्लाव निकोलिक को भेजे अपने संदेश में श्री मुखर्जी ने कहा है, “महामहिम मैं अपनी, भारत के लोगों और यहां की सरकार की ओर से आपको, सर्बिया गणराज्य के मित्रवत लोगों को उनके राष्ट्रीय दिवस पर बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। भारत और सर्बिया के बीच पुरानी दोस्ती है। दोनों गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक रहे हैं। 

                 मुझे पूरा विश्वास है कि दोनों देशों के बीच आपसी संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होंगे। इस दिशा में दोनों देश मिलकर काम भी कर रहे हैं। महामहिम मैं इस मौके पर आपके अच्छे स्वास्थ्य, बेहतरी और सर्बिया के मित्रवत लोगों की समृद्धि और तरक्की की कामना करता हूं।”