Thursday, 8 February 2018

पर्यटन मंत्रालय का सोशल मीडिया पर अभियान "द ग्रेट इंडिया ब्लॉग ट्रेन"

    नई दिल्ली। पर्यटन मंत्रालय का सोशल मीडिया पर प्रभावकारी अभियान द ग्रेट इंडिया ब्लॉग ट्रेन, जिसमें दुनिया भर के यात्रा ब्लॉगर्स को शामिल किया गया, को आज पर्यटन मंत्रालय में सचिव रश्मि वर्मा ने सफदरजंग रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली से शुरूआत की। 

  सचिव ने पर्यटन और पर्यटन से संबंधित अन्य पहलुओं को बढ़ावा देने और उन्हें अपनी यात्रा को देखने के मुद्दे पर ब्लॉगरों से बातचीत की। इन ब्लॉगरों को विभिन्न राज्यों में चलने वाली लक्जरी ट्रेनों पर देश के विभिन्न स्थलों की यात्रा के लिए आमंत्रित भी किया है।
   पर्यटन मंत्रालय ब्रांडिंग और विपणन को एक प्रभावी उपकरण के रूप में सोशल मीडिया के महत्व को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया पर प्रभावकारी अभियान "द ग्रेट इंडिया ब्लॉग ट्रेन" का आयोजन कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य घरेलू और विदेशी बाजारों में भारत की लक्जरी ट्रेनों को एक अनूठे पर्यटन उत्पाद के रूप में प्रस्तुत करना है।
   इस अभियान के अंतर्गत लक्जरी ट्रेनों के साथ-साथ जिन स्थानों के ये ब्ल़ॉगर दौरा करेंगे उन्हें भी ये ब्लॉग, वीडियो और फोटो के माध्यम से ब्लॉगरों/ इन्स्टाग्राम के जरिए अपने अनुभव साझा कर प्रचारित ही करेंगे।ये कहने की जरूरत नहीं है कि इस पहल से रेलवे और लक्जरी ट्रेन ऑपरेटरों को काफी हद तक लाभ ही होगा। 
     भारत सहित 23 देशों के 60 ब्लॉगर 15-15 के ग्रुप (दल) में चार लग्जरी ट्रेनों जैसे पैलेस ऑन व्हील्स, महाराजा एक्सप्रेस, दक्कन ओडिशी और गोल्डन चैरिअट पर यात्रा का आनन्द लेंगे। 15 ब्लॉगरों का प्रथम दल आज पैलेस ऑन व्हील्स पर यात्रा के लिए सफदरजंग रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली से रवाना हुआ।
     दूसरा दल महाराजा एक्सप्रेस से दिल्ली से 10 फरवरी 2018 को रवाना होगा जबकि तीसरा दल 10 फरवरी 2018 को ही मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से दक्कन ओडिशी में यात्रा के लिए निकलेगा और चौथा एवं ब्लॉगरों का अंतिम दल 19 फरवरी 2018 को बेंगलूरू से गोल्डन चैरिअट में एक सप्ताह की यात्रा पर निकलेगा।
   रेलवे बोर्ड, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक की राज्य सरकारें और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) इसे घरेलू और विदेशी बाजारों में विलासिता की श्रेणी में लगातार सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं तथा ट्रेनों पर ब्लॉगरों की मेजबानी करके सक्रिय रूप से इस अभियान का समर्थन भी कर रहे हैं।

रेल मंत्रालय का विरासत के संरक्षण को प्रोत्साहन

     नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने विरासत के संरक्षण के लिये कई सुधारों की पहचान की है। रेलवे की एक दशक से पुरानी समृद्ध विरासत के संरक्षण के लिये रेलवे बोर्ड ने हाल ही में रेलवे जोनों एवं उत्पादन इकाइयों के विरासत अधिकारियों के साथ एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया।

    रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने बैठक की अध्यक्षता की। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुये रेलवे बोर्ड के सचिव रजनीश सहाय ने भारतीय रेलवे में विरासत के संरक्षण पर जोर दिया।
    श्री सहाय ने कहा कि रेल मंत्रालय के इतिहास में पहली बार इस तरह की मंथन बैठक आयोजित की गयी है। फेयरी क्वीन स्टीम लोकोमोटिव को पुन: चालू करने और रेवाड़ी भाप केंद्र की स्थापना की तर्ज पर रेलवे बोर्ड रेलवे की ऐसी विरासत संबंधी चीजों की पहचान के लिये विशेष अभियान शुरू करने वाला है जो अभी अलग-अलग जगहों पर उपेक्षित पड़ी हैं।
    बोर्ड की योजना है कि ऐसी विरासत संबंधी चीजों का ठीक से संरक्षण और प्रदर्शन किया जाये; राष्ट्रीय रेल संग्रहालय एवं सभी क्षेत्रीय रेलवे दोनों ही स्तरों पर रेलवे के इतिहास का समयबद्ध ब्योरा तैयार किया जाये और सभी अहम आयोजनों का ब्योरा रखा जाये; विरासत के संरक्षण वाले इन प्रयासों में भाप चालित रेलगाड़ियों का अलंकरण एवं भाप वाली लाइनों पर नियमित अंतराल पर भाप वाली गाड़ियों को चलाना भी शामिल है। 
   इस प्रयास में पर्वतीय रेलवे के संरक्षण एवं उसे विश्व स्तरीय बनाने के प्रयास को विशेष महत्व मिलेगा। इस बैठक में रेलवे बोर्ड के कई सेवानिवृत्त सदस्यों और रेलवे के प्रति उत्साही लोगों के अलावा विभिन्न क्षेत्रीय रेलवेज और उत्पादन इकाइयों के 40 से ज्यादा वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये। इस सत्र का आयोजन राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में किया गया था।
     इस सत्र का उद्देश्य संरक्षण प्रक्रिया के विभिन्न आयामों एवं तकनीक के बारे में जागरूकता बढ़ाना था जिसमें विशेषकर के संग्रहालय प्रबंधन, विरासत भवनों का संरक्षण जिसमें स्टेशन, पुल भी शामिल हैं साथ ही मीटर गेज, नैरो गेज वाले हिस्से, रेलवे आर्काइव का संरक्षण एव डिजिटाइजेशन, विश्व विरासत माने जाने वाले स्थानों का प्रबंधन साथ ही उपकरणों, सिगनल और पटरियों से संबंधित सामग्री, डिजिटल इंडिया - डिजिटल रेल अभियान, रेलवे विरासत का इंटरनेट के जरिये विश्व में प्रचार-प्रसार।
    इंटैक, सी-डैक (सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय), गूगल आर्ट एवं कल्चर, यूनेस्को, अहमदाबाद विश्वविद्यालय का संरक्षण प्रबंधन केंद्र इत्यादि प्रतिष्ठित संस्थाओं के विशेषज्ञ इस कार्यक्रम में विभिन्न पहलुओं की जानकारी देने के लिये मौजूद थे। रेलवे के अधिकारी जो कि संरक्षण प्रबंधन के लिये विशेष तौर पर प्रशिक्षित नहीं होते हैं 
     उन्होंने इस सत्र को जानकारी बढ़ाने वाले सत्र के तौर पर सराहा। विजयनगरम स्टेशन के 117 वर्ष पुराने प्रतीक्षालय का विरासत संरक्षण तरीके से पुनरुद्धार मात्र 4 महीनों में...सफेद चूना हटाकर और पत्थरों को साफ कर पालिश किया गया साथ ही विरासत वाले दीपदानों और ग्रिल का भी काम किया गया।

5632 करोड़ की लागत वाली पांच परियोजनाओं की आधारशिला

  इलाहाबाद। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग और जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने आज उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के आसपास 5632 करोड़ रुपये की लागत वाली एवं 137 किलोमीटर लंबी राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन किया/आधारशिला रखी।

  राष्ट्रीय राजमार्गों को चौड़ा करने के अलावा इलाहाबाद के फाफामऊ में गंगा नदी पर एक नए छह लेन वाले पुल का निर्माण करना भी शामिल है। 
   इलाहाबाद स्थित परेड ग्राउंड में संबोधित करते हुए श्री गडकरी ने कहा कि उनके मंत्रालय ने अगले वर्ष सरकार का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले उत्तर प्रदेश में 2 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले राजमार्गों का निर्माण करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि इसके लिए भूमि अधिग्रहण करने और पर्यावरण मंजूरी पाने के लिए राज्य सरकार के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। 
   उन्होंने यह भी कहा कि नौवहन के लिए गंगा नदी को विकसित करने के लिए जारी कार्य से राज्य में किसानों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी। मंत्री ने विद्यार्थियों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ-साथ राज्य के लोगों से आगे आने और नदी तथा पर्यावरण के संरक्षण के लिए गंगा नदी के आसपास पेड़ लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नदी के आसपास घाटों को विकसित करने के लिए कंपनियों और विभिन्न लोगों से आवश्यक धनराशि जुटाई जा रही है।
    श्री गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-27 के 41.34 किलोमीटर लंबे खंड का उद्घाटन किया, जो पहले चार लेन का था और इस पर 775 करोड़ रुपये की लागत आई है। उन्होंने तीन परियोजनाओं की आधारशिला रखी जिनमें 1813 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-2 के 53.15 किलोमीटर लंबे हंदिया-औरई खंड को छह लेन का बनाना, 830 करोड़ रुपये की लागत से 15 किलोमीटर लंबी एवं चार लेन वाली पुरामुफ्ती-कौधिहर अंदरूनी रिंग रोड के प्रथम चरण का निर्माण करना और 314 करोड़ रुपये की लागत से इलाहाबाद बाईपास से लेकर इलाहाबाद शहर तक एनएच-96 के 17.77 किलोमीटर लंबे खंड का निर्माण करना शामिल है।
    श्री गडकरी ने इलाहाबाद के फाफामऊ में गंगा नदी पर एक नए छह लेन वाले पुल के निर्माण कार्य के शुभारंभ समारोह में भी भाग लिया, जिसके निर्माण पर 1900 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

दिल्ली-मुंबई राजमार्ग पर टोलिंग : जितना करें इस्तेमाल, उतना ही करें भुगतान

     नई दिल्ली। भारत में टोल के लिए "जितना आप इस्तेमाल करें उतना ही भुगतान करें" से संबंधित बजट में की घोषणा के कार्यान्वयन के लिए मार्ग प्रशस्त करते हुए, भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने प्रणाली की कार्यान्वयन क्षमता का अध्ययन करने के लिए एक पायलट परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है।

   इस पायलट परियोजना के अंतर्गत दिल्ली-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 500 वाणिज्यिक वाहनों के लिए जीपीएस / जीएसएम तकनीक पर चल रहे उपग्रह आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को लागू करना शामिल है।
  यह परियोजना एक वर्ष तक चलेगी। मोबाइल दूरसंचार प्रौद्योगिकी (जीएसएम) और उपग्रह आधारित ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम के संयोजन पर कार्य करने वाली यह परियोजना, प्रस्तावित टोलिंग सिस्टम के अंतर्गत पैसा वाहन के खाते से ही कट जायेगा, और एक दिन के अंदर रियायत राशि फिर उसी खाते में जमा हो जाएगी तथा फिर टोल गेट को खोल सकता है।
    यदि लेनदेन असफल हो जाता है तो यह टोल ऑपरेटर को मैन्युअल रूप से भुगतान एकत्र करने के लिए सचेत कर सकता है और फिर गेट को नहीं खोला जा सकता है। यह पायलट परियोजना एफएटीएएजी कार्यक्रम के तहत एनएचएआई द्वारा प्रस्तावित मौजूदा प्री-पेड वॉलेट अकाउंट के साथ नए समाधान को एकीकृत करने के तरीकों को भी देखेगा।
    यह दूरी आधारित टोलिंग और मौजूदा टोलिंग सिस्टम के बीच की तुलना भी करेगा जैसे वर्चुअल टोलिंग बनाम सामान्य टोलिंग में भी किया जाता है। इस परियोजना के लिए आरएफपी 25 जनवरी 2018 को शुरू किया गया था। पूर्व-बोली बैठक 9 फरवरी को है और बोली की तारीख 26 फरवरी, 2018 है।

स्वायत्तशासी निकायो को युक्तिसंगत बनाने की मंजूरी

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायो को युक्तिसंगत बनाने को मंजूरी दी। इन निकायों में राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) और जनसंख्या स्थिरता कोष (जेएसके) शामिल हैं।

   इनके कामकाज को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत करने का भी प्रस्ताव है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायों को युक्तिसंगत बनाने में अंतर-मंत्रालयी परामर्श तथा इन निकायों के मौजूदा उप-नियमों की समीक्षा शामिल है।
   राष्ट्रीय आरोग्य निधि का गठन एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में किया गया था, ताकि केन्द्रीय सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने वाले निर्धन मरीजों को वित्तीय चिकित्सा सहायता दी जा सके। अग्रिम धन राशि इन अस्पतालों को चिकित्सा निरीक्षकों को दी जाएगी, जो हर मामले को देखते हुए सहायता प्रदान करेंगे। चूंकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अस्पतालों को धनराशि प्रदान करता है इसलिए विभाग द्वारा अस्पतालों को सीधे अनुदान दिया जा सकता है।
    इस तरह आरएएन का कामकाज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन लाया जाएगा। आरएएन, सोसायटी की प्रबंध समिति सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के प्रावधानों के तहत स्वायत्तशासी निकायों को रद्द करने के लिए बैठक करेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री के कैंसर रोगी निधि को भी विभाग को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
     इसके लिए एक वर्ष का समय रखा गया है। जनसंख्या स्थिरता कोष वर्ष 2003 में 100 करोड़ रुपये की निधि के साथ स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों को प्रति जागरूकता बढ़ाना था। जेएसके लक्षित आबादी के मद्देनजर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करता है। मंत्रालय द्वारा जेएसके का कोई लगातार वित्तपोषण नहीं किया जाता। जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों के निजी और कार्पोरेट वित्तपोषण की जरूरत होती है, जो जेएसके के जरिए संभव है।
    यद्यपि जेएसके जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों में अहम भूमिका निभाता रहेगा, लेकिन एक स्वायतशासी निकाय के रूप में उसका अस्तित्व आवश्यक नहीं होगा। इस प्रकार एक स्वायशासी निकाय के रूप में जेएसके को बंद किया जा सकता है क्योंकि निधि के तौर पर उसका कामकाज विभाग द्वारा संभव है।
    पृष्‍ठभूमि : व्यय प्रबंधन आयोग कि सिफारिशों के आधार पर नीति आयोग ने 19 स्वायतशासी निकायों की समीक्षा की थी। ये सभी निकाय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन थे और उन्हें सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत कायम किया गया था। नीति आयोग ने समीक्षा समिति को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें इन निकायों को युक्तिसंगत बनाने की सिफारिशें की गयी हैं।
     सरकार का मुख्य प्रयास यह है कि स्वायशासी निकायों की समीक्षा की जाए और उन्हें युक्तिसंगत बनाया जाए, ताकि उनके कामकाज, प्रभाव और कार्यकुशलता में सुधार हो, वित्तीय और मानव संसाधनों का उचित इस्तेमाल हो, मौजूदा निति में उनकी प्रासंगिकता एवं प्रशासन में इजीफा हो और उनकी निगरानी उचित तरीके से हो सके।
  समिति ने आरएएन और जेएसके को बंद करने की तथा उनके कामकाज को मंत्रालय के अधीन लाने की सिफारिश की है।

शांति, अहिंसा और करुणा के प्रतीक भगवान बाहुबली

     श्रवणबेलागोला। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने गोमातेश्वर भगवान श्री बाहुबली स्वामी के महामस्तक अभिषेक महोत्सव 2018 का श्रवणबेलागोला में उद्घाटन किया। 

 इस अवसर पर राष्ट्रपति ने महामस्तक अभिषेक महोत्सव 2018 को सफलता पूर्वक संपन्न कराने के लिए आयोजकों और तीर्थ यात्रियों को अपनी शुभकामनाएं भी दीं। 
   उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र - जैन दर्शन के तीन रत्न के रूप में जाने जाते हैं। ये पूरी दुनिया के लिए आज भी प्रासंगिक हैं। सार्वभौमिक कल्याण के मार्ग को शांति, अहिंसा, भाईचारे, नैतिकता और बलिदान द्वारा ही प्रेषित किया जा सकता है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश के विभिन्न हिस्सों से और साथ ही दुनिया भर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में श्रवणबेलागोला आकर विश्व शांति की प्रार्थना कर रहे हैं।यह हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने सभी भक्तों को उनके कल्याण के प्रयासों में सफल होने की कामना की। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर आप सब के बीच आकर तथा शांति, अहिंसा और करुणा के प्रतीक भगवान बाहुबली की इस भव्य प्रतिमा को देखकर मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है। यह क्षेत्र धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति का केंद्र रहा है और सदियों से मानवता के कल्याण का संदेश देता रहा है।
     उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में आने के लिए मुख्यमंत्री जी ने आग्रह कियाऔर निमंत्रण भेजा। केंद्रीय मंत्री श्री अनंतकुमार जी ने भी यहां आने का अनुरोध किया। इस महोत्सव के आयोजकों ने भी राष्ट्रपति भवन आकर आमंत्रण दिया। कर्नाटक के लोगों की सदाशयता में कुछ ऐसा विशेष आकर्षण है जो मुझे यहां बार-बार आने के लिए प्रेरित करता है।
     राष्ट्रपति बनने के बाद, पिछले लगभग छ: महीनों के दौरान, कर्नाटक की यह मेरी तीसरी यात्रा है। उन्होंने कहा कि हमसभी जानते हैं, आदिनाथ ऋषभदेव के पुत्र भगवान बाहुबली चाहते तो अपने भाई भरत के स्थान पर राजसुख भोग सकते थे। लेकिन उन्होने अपना सब कुछ त्याग कर तपस्या का मार्ग अपनाया और पूरी मानवता के कल्याण के लिए अनेक आदर्श प्रस्तुत किये। लगभग एक हजार वर्ष पहले बनाई गई यह प्रतिमा उनकी महानता का प्रतीक है। इस प्रतिमा के कारण यह स्थान आज देश-विदेश में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 
     उन्होंने कहा कि यह स्थान हमारे देश की सांस्कृतिक और भौगोलिक एकता का एक बहुत ही प्राचीन केंद्र रहा है। कहा जाता है कि आज से लगभग तेइस सौ वर्ष पूर्व, मध्य प्रदेश के उज्जैन क्षेत्र से जैन आचार्य भद्रबाहु यहां पधारे थे। बिहार के पटना क्षेत्र से उनके शिष्य, विशाल मौर्य साम्राज्य के संस्थापक, सम्राट चन्द्रगुप्त यहां आए थे।वह अपनी शक्ति के शिखर पर रहते हुए भी, सारा राज-पाट अपने पुत्र बिन्दुसारको सौंपकर यहां आ गए थे।यहां आकर उन्होने एक मुनि का जीवन अपनाया और तपस्या की। यहीं चंद्रगिरि की एक गुफा में, अपने गुरु का अनुसरण करते हुए, सम्राट चन्द्रगुप्त ने भी सल्लेखना का मार्ग अपनाया और अपना शरीर त्यागकिया। उन राष्ट्र निर्माताओं ने शांति, अहिंसा,करुणा और त्याग पर आधारित परंपरा की यहां नींव डाली। धीरे-धीरे पूरे देश के अनेक क्षेत्रों से लोग यहां आने लगे।इस प्रकार इस क्षेत्र का आकर्षण बढ़ता गया।
     उन्होंने कहा कि जैन परंपरा की धाराएं पूरे देश को जोड़ती हैं। मैं जब बिहार का राज्यपाल था, तो वैशाली क्षेत्र में भगवान महावीर की जन्मस्थली, और नालंदा क्षेत्र में उनकी निर्वाण-स्थली,पावापुरी में कई बार जाने का मुझे अवसर मिला। आज यहां आकर, मुझे उसी महान परंपरा से जुड़ने का एक और अवसर प्राप्त हो रहा है।
     उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया है कि लगभग एक हजार वर्ष पहले इस विशाल और भव्य प्रतिमा का निर्माण हुआ था। इस प्रतिमा का निर्माण कराने वाले गंग वंश के प्रधानमंत्री चामुंडराय और उनके गुरु ने सन 981 में यहां पहला अभिषेक किया था। उसके बाद हर बारह वर्ष पर अभिषेक की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है।
    उन्होंने कहा कि भगवान बाहुबली की यह विशाल प्रतिमा जो हम सब देख रहे हैं, यह भारत की विकसित संस्कृति,स्थापत्य कला, वास्तुशिल्प और मूर्तिकला का बेजोड़ उदाहरण है।शिल्पकारों ने अपनी श्रद्धा और भक्ति से एक विशाल, निर्जीव ग्रेनाइट के पत्थर की शिला में,जान डाल दी है। ‘अहिंसा परमो धर्म:’ का भाव इस प्रतिमा के मुख-मण्डल पर अपने पूर्ण रूप में दिखाई देता है।
     उन्होंने कहा कि भगवान बाहुबली की यह दिगंबर प्रतिमा और इस पर माधवी लताओं की आकृतियां,उनकी गहन तपस्या के बारे में बताने के साथ-साथ यह भी स्पष्ट करती हैं कि,वे किसी भी प्रकार के बनावटीपन सेमुक्त थे, और प्रकृति के साथ पूरी तरह एकाकार थे।जैन मुनियों नें यह परंपरा आज भी कायम रखी है। जैन धर्म के आदर्शों में हमें प्रकृति का संरक्षण करने की सीख मिलती है।
    उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को जैन दर्शन के तीन रत्नों के रूप में जाना जाता है। लेकिन यह तीनों बातें पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी हैं। शांति,अहिंसा, भाईचारा,नैतिक चरित्र और त्याग के द्वारा ही विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
    उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया है कि विश्व-शांति हेतु प्रार्थना करने के लिए कई देशों से तथा हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों से,भारी संख्या में श्रद्धालु आज यहां आए हैं। हमारे सामने विद्यमान गोम्मटेश्वर की प्रतिमा के चेहरे पर भी पीड़ित मानवता के कल्याण के लिए सहानुभूति का भाव दिखाई देता है। आप सब की प्रार्थना में निहित विश्व कल्याण की भावना,आतंकवाद और तनाव से भरे इस दौर में,सभी के लिए शिक्षाप्रद है। मैं सभी देशवासियों की ओर से, विश्व-शांति के लिए प्रतिबद्ध आप सभी श्रद्धालुओं को, इस कल्याणकारी प्रयास में सफलता की शुभकामनाएं देता हूं। 
    उन्होंने कहा कि मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि यहां के ट्रस्ट के प्रयासों से इस क्षेत्र में मोबाइल अस्पताल, बच्चों के अस्पताल, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक और नर्सिंगकॉलेजकी स्थापना कराई गई है और एक ‘प्राकृत विश्वविद्यालय’ के निर्माण पर भी काम चल रहा है।उन्होंने कहा कि मैं सभी आयोजकों और श्रद्धालुओं को पंच कल्याणक तथा महामस्तक-अभिषेक से जुड़े सभी समारोहों के अत्यंत सफल आयोजन की शुभकामनाएं देता हूं।