Friday, 30 June 2017

सावधानीपूर्वक जल का संरक्षण करना भी एक उत्तरदायित्व

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सावनी योजना के अधीन राजकोट के निकट अजी डैम की भराई का शुभारंभ किया। 

      इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दिनों की तुलना में गुजरात काफी आगे बढ़ा है जब यह पानी की अत्यधिक कमी की समस्या का सामना कर रहा था।
         उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में गुजरात की विकास यात्रा में काफी सकारात्मक बदलाव हुए हैं। जल्द से जल्द जल उपलब्ध करने के कार्य को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जितनी अधिक संख्या में लोगों को पानी मुहैया होगा, प्रगति के और भी अधिक द्वार खुलेंगे।
        उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक जल का सावधानीपूर्वक संरक्षण करना एक उत्तरदायित्व भी है। उन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का आह्वान किया।

कश्‍मीर को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए 345 किलोमीटर रेलवे लाइन

    रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने काजीगुंड-बारामूला के बीच पांच नये हॉल्ट स्टेशनों की आधारशिला रखी। कश्‍मीर घाटी क्षेत्र में जनता की नये हाल्‍ट स्‍टेशन बनाने की मांग को पूरा करने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने बारामूला-काजीगुंड रेल सेक्‍शन पर पांच नये हॉल्‍ट स्‍टेशनों-संगदान, मंगहल, रतनिपोर, नादिगाम और रजवान के निर्माण की आधारशिला रखी।

     इस बारे में श्रीनगर के शेर-ए-कश्‍मीर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन केन्‍द्र में एक समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में जम्‍मू कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री सुश्री महबूबा मुफ्ती, उप मुख्‍यमंत्री डॉ. निर्मल कुमार सिंह, राज्‍यसभा के सांसद नजर अहमद लॉय विशिष्‍ट अतिथि थे। उत्‍तर रेलवे के महाप्रबंधक आर.के. कुलश्रेष्‍ठ और वरिष्‍ठ रेलवे अधिकारी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। 
      बारामुला-काजीगुंड रेल सेक्‍शन के नये स्‍टेशन इस प्रकार हैं, संगदान (क्वाजीगुंड-सदुरा), मंगहॉल (सदुरा-अनंतनाग), रतनिपोरा (अवंतीपुरा-काकापोरा), नादिगाम और रजवान स्टेशन (बडगाम-मैजोम)।ये हॉल्‍ट स्‍टेशन इन क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों की परिवहन जरूरतों को पूरा करेंगे। कश्मीर घाटी में सभी मौसमों के लिए चलाई गई विशेष डेमू ट्रेन यहां के निवासियों के लिए वास्‍तविक जीवन रेखा बन गई हैं। इन डेमू ट्रेनों में रोजाना औसतन 25,000 यात्री सफर करते हैं और इनसे समतुल्‍य टिकट बिक्री आय लगभग साढ़े तीन लाख रुपये प्रतिदिन है।
          जम्मू-कश्मीर में एक वैकल्पिक और विश्वसनीय जन परिवहन सेवा उपलब्‍ध कराने के दृष्टिकोण से भारत सरकार ने कश्‍मीर घाटी को भारतीय रेलवे के नेटवर्क से जोड़ने के लिए 326 किलोमीटर (बाद में इसे बढ़ाकर 345 किलोमीटर कर दिया गया) रेलवे लाइन की योजना बनाई थी। स्‍थानीय जनता और पूरे देश के लिए एक महत्‍वपूर्ण परियोजना जम्मू-उधमपुर-कटरा-काजीगुंड-बारामूला रेल लाइन परियोजना को राष्‍ट्रीय परियोजना के रूप में घोषित किया गया है। 
        यह परियोजना भारतीय उपमहाद्वीप में बनाई जाने वाली शायद सबसे मुश्किल नई रेल लाइन परियोजना है। यह परियोजना हिमालय से गुजरती है, जो अपेक्षाकृत युवा पर्वत हैं और भौगोलिक आश्‍चर्यों से भरे तथा उच्‍च टेकटोनिक गतिविधि और बेहद ठंडे मौसम की परिस्थितियों से ग्रस्‍त हैं। 2005 में जम्मू-उधमपुर रेलवे लिंक का कार्य पूरा होने से रेल संपर्क में नए युग की शुरुआत हुई। 
     कश्‍मीर घाटी में रेलवे लाइन का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया गया। रेलवे ने 2 अक्‍टूबर, 2008 में अनंतनाग-मजहोम, फरवरी 2009 में मजहोम-बारामूला सेक्‍शन और अक्‍टूबर 2009 में काजीगुंड-अनंतनाग के मध्‍य बकाया 18 किलोमीटर लंबे सेक्‍शन के कार्य की शुरूआत की। इस प्रकार कश्‍मीर घाटी में 119 किलोमीटर लम्‍बी काजीगुंड-बारामूला रेलवे लाइन का निर्माण पूरा हुआ। 
        रेलवे तभी से 345 किलोमीटर लम्‍बी रेलवे लाइन के बकाया हिस्‍से को पूरा करने के लिए कार्य कर रहा है। उधमपुर-कटरा रेलवे लाइन का 25 किलोमीटर सेक्‍शन जुलाई, 2014 में शुरू हुआ और कटरा-बनिहाल की 111 किलोमीटर लम्‍बी लाइन का कार्य प्रगति पर है, जिसका मार्च, 2021 तक पूरा होने का लक्ष्‍य है। उत्‍तर रेलवे, केआरसीएल और आईआरसीओएन द्वारा निर्मित किये जा रहे इस सेक्‍शन में 97.34 किलोमीटर लम्‍बी सुरंगें, 27 बड़े और 10 छोटे पुल तथा 203 किलोमीटर की पहुंच सड़क होंगी।
      इस परियोजना का 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है, जिस पर 9419 करोड़ रुपये का खर्च आया है। यूएसबीआरएल परियोजना में बड़ी संख्‍या में सुरंगें और पुल बनाए जाएंगे। इनमें सबसे महत्‍वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य सलाल पन विद्युत बांध के पास चिनाब नदी की गहरी घाटी में निर्माण करना है। इससे भूकंप जोन पांच में लांग स्‍पेन पुल के निर्माण की जरूरत सामने आई है।
       चिनाब पुल की कुल लम्‍बाई 1315 मीटर है और 100 किलोमीटर की डिजाइन स्‍पीड है। यह पुल 266 किलोमीटर प्रति घंटे चलने वाली हवा के वेग को भी सहन कर सकता है और इसका जीवन काल 120 वर्ष होगा। स्‍टील मेहराब से बना यह पुल स्‍थानीय विशेषज्ञता और निर्माण सामग्री का उपयोग करके खूबसूरती से डिजाइन किया गया है। इस पुल की ऊंचाई 359 मीटर है, जो पेरिस के एफिल टॉवर से करीब 35 मीटर ऊंचा है। पूरा होने पर यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल होगा। 
       पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला जम्‍मू और कश्‍मीर घाटी को अलग करती है। इन्‍हें आपस में जोड़ने की परियोजना के रूप में भारतीय रेलवे ने पहले 11.21 किलोमीटर लम्‍बी सुरंग टी-80 का निर्माण किया था, जो एशिया में सबसे लम्‍बी परिवहन सुरंग है। 
        बनिहाल-बारामूला रेलवे सेक्‍शन के मौजूदा स्‍टेशनों में बनिहाल, शाहबाद हॉल्ट, काजीगुंड, सदुरा, अनंतनाग, बिजबेहरा, पंजगाम, अवंतिपुरा, काकापोरा, पंपोर, श्रीनगर, बडगाम, मझहोम, पट्टन, हामरे, सोपोर और बारामूला शामिल हैं। इस रेलवे सेक्‍शन में 15 जोड़े डेमू सेवाएं परिचालित हैं, जो इस क्षेत्र में सभी मौसम में कनेक्टिविटी उपलब्‍ध कराती हैं। 
      जुलाई 2015 में अतिरिक्‍त डेमू सेवाएं शुरू की गईं और उसके बाद कार्यालय जानेवालों तथा छात्रों की सुविधा के लिए फास्‍ट डेमू बनिहाल-बारामूला और बारामूला-बडगाम के बीच मई 2016 में शुरू की गई। वाडी की सायर-ए बच्‍चों की विशेष रेलगाड़ी है, जो 26 नवम्‍बर, 2016 को बनिहाल और बारामूला के बीच शुरू की गई थी, अब यह हर माह के दूसरे तथा चौथे रविवार को चलती है।

इतिहास की जड़ों से जुड़ें रहें नए इतिहास रचने के लिए

    गुजरात में साबरमती आश्रम शताब्दी समारोह के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि
इतिहास भूला देने की कितनी बडी कीमत चुकानी पड़ती है, क्या कुछ खोना पड़ता है? क्या कुछ गवाना पडता है? अगर इस बात को समझना है, मैं समझता हूं कि श्रीमद राजचन्द्र जी के व्यक्तित्व से, हम बहुत भली भांति समझ सकते हैं कि उनको भुलाकर हमने कितना गंवाया है क्या कुछ खोया है और आज यह बहुत ही सुभव योग है कि श्रीमद राजचन्द्र जी, पूज्य बापू उनको कविश्री के रूप में भी संबोधित करते थे। उनके 150 वर्ष और जिस तपोभूमि से सदियों की गुलामी के बाद भारत की अंतर चेतना को जगाने का एक पवित्र कार्य हुआ, वो साबरमति आश्रम का शताब्दी पर्व है।

     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 2017 का साल अनेक रूप से महत्वपूर्ण है, यही वर्ष था जब देश में पहला सत्याग्रह का बिगुल बजा। चंपारण की धरती पर और उसका भी यह शताब्दी का वर्ष है। पूज्य बापू 1915 में भारत वापिस आए थे अफ्रीका से और 2015 में जब उनका शताब्दी का वर्ष था तो भारत सरकार ने पूज्य बापू के भारत आगमन की उस शताब्दी को भी इसी गुजरात में, गांधीनगर में, महात्मा मंदिर में, दुनिया भर के प्रवासी भारतीयों को बुलाकर के उस अवसर को मनाने का प्रयास किया है। 
        इस कार्यक्रम से देश के बहुत लोगों को जो गांधी से जुडे हैं, जो गांधी के अभ्यासु हैं उनके लिए श्रीमद राज चन्द्र का नाम परिचित है। लेकिन एक पूरी पीढी है जिनके लिए श्रीमद राजचन्द्र जी का नाम नया है। दोष हम लोगों का है कि हमें इन महापुरूषों को पीढ़ी दर पीढ़ी याद रखते रहना चाहिए लेकिन हम कुछ न कुछ ऐसे गलत रास्ते पर चल दिए कि हमने उन्हें भुला दिया। 
        इस सरकार की कोशिश है कि इस महान राष्ट्र के महान सपुतों का, महान परंपराओं का, महान इतिहास का निरंतर स्मरण बनता रहे, इतिहास की जड़ों से हम जुड़ें रहें और नए इतिहास रचने के लिए पराक्रम के लिए तैयार रहे, इस मकसद से हमें आगे चलना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि साबरमती आश्रम की शताब्दी कभी-कभी मुझे लगता है कि विश्व को जिस रूप में गांधी से परिचित करवाने की जरूरत है, आग के समुद्र से गुजर रही मानवता को गांधी से संबल मिल सकता है, राह मिल सकती है। 
        प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अभी मैं नीरदलैंड से आया, परसों में नीदरलैंड में था। दो चीजें मेरे लिए बड़ी ही नई थी मेरी जानकारी के लिए। भारत में जितने मार्ग महात्मा गांधी के नाम पर है उसके बाद दुनिया में सबसे अधिक मार्ग के नाम गांधी पर किसी के होंगे तो वो नीदरलैंड के है। मेरे लिए यह नया अनुभव, नई जानकारी है। दूसरा वहां सुरीनाम के लोग आकर के बसे हुए हैं।
            प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 2019 में हम पूज्य बापू के 150 वर्ष मनाएंगे। ऐसे ही मनाएंगे क्या? जी नहीं, पूज्य बापू के 150 साल ऐसे ही मनाने का, किसी हिंदुस्तानी को हक नहीं है। पूज्य बापू के 150 साल मनाना मतलब गांधी की तरह कोई संकल्प लेकर के 150वीं जयंती तक उसको पूरा करके रहना और यह हर हिंदुस्तानी…। अप्रतीम संकल्प शक्ति के धनी थे वो। हमारे भीतर भी वो संकल्प शक्ति हो जिस संकल्प शक्ति को लेकर के हम भी निकल पड़े आज से और जब गांधी के 150 मनाएंगे तब हम इसको परिपूर्ण करके रहेंगें ये हर हिंदुस्तानी के दिल में…। 
         साबरमती आश्रम आजादी के आंदोलन का कलेवर जहां तैयार हुआ, पिंड तैयार हुआ वहां से ये करते हुए आजाद हिंदुस्तान पूज्य बापू के सपनों का हिंदुस्तान बनाने के लिए हम भी कुछ जिम्मेवारी निभा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गाय की रक्षा, गऊ की भक्ति महात्मा गांधी और विनोबा भावे से बढकर कोई हो नहीं सकता है। अगर गाय की भक्ति करनी है, गाय की रक्षा करनी है तो गांधी जी और विनोबा भावे जी ने हमें उत्तम राह दिखाई। उसी रास्ते पर देश को चलना ही पड़ेगा। 
        उसी में देश का कल्याण है। विनोबा जी जीवन भर गऊ रक्षा के लिए अपने आप को आहुत करते रहे। मेरा सौभाग्य था मैं एक बार वर्धा गया, विनोबा जी के दर्शन के लिए। मैं उनसे मिला, प्रणाम किया, बैठा। विनोबा जी शब्दों की बड़ी ताकत रखते थे। मैं बैठा, परिचय हुआ, मैं बैठा सामने देख रहा था। वे मुझे कह रहे कि मर जाओ, मर जाओ। मैं हैरान था कि विनोबा जी कह रहे हैं मर जाओ-मर जाओ। मैं चुपचाप बैठा रहा। फिर धीरे से कहे गाय के लिए, गाय माता के लिए। 
       आप कल्पना कर सकतें हैं कि विनोबा जी उस समय की सरकार के खिलाफ जीवन के अंत तक वो लड़ते रहे, अनेक बार अनशन किये गौरक्षा के लिए किए, गौभक्ति के लिए किए। भारत का संविधान भी हमें उसका महात्मय समझाता है लेकिन, क्या किसी इंसान को मारने का हम मिल जाता है? क्या ये गौभक्ति है, क्या ये गौरक्षा है? पूज्य बापु का रास्ता ये नहीं हो सकता।
        विनोबा भावे का जीवन हमें ये सन्देश नहीं देता है। और इसलिए साबरमती आश्रम की शताब्दी पर्व पर और पूज्य श्रीमद राजचन्द्र जी का 150वां जन्मवर्ष मनाने तब, हर हिंदुस्तानी के दिलो-दिमाग में, ये हमारे मूलभूत संस्कार हैं, हमारे मूलभूत पंरपरा है-अहिंसा। ये हम लोगों का जीवन धर्म रहा है। हम कैसे आपा खो रहे हैं। डॉक्टरों को मार रहे हैं। अकस्मात हो जाए ड्राइवरों को मार रहे हैं। गाय के नाम पर इंसानों को मार रहे हैं।

Thursday, 29 June 2017

2022 तक भारतीय पावर ग्रिड में 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा

केंद्रीय विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने यहां आयोजित एक समारोह में भारत के इलेक्ट्रिक ग्रिड में 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा एकीकृत करने के बारे में एक अध्ययन रिपोर्ट का पहला भाग जारी किया। रिपोर्ट का दूसरा खंड जुलाई में जारी किया जाएगा जिसमें दक्षिणी तथा पश्चिमी क्षेत्रों में प्रणाली संचालन के बारे में विस्तृत व्याख्या है। 

        अमेरीका-भारतीय द्विपक्षीय कार्यक्रम ग्रिनिंग द ग्रिड कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित यह अध्ययन 2022 तक भारतीय पावर ग्रिड में 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा एकीकृत करने के तकनीकी तथा आर्थिक संभावनाओं की पुष्टि करता है। अध्ययन में ऐसे एकीकरण के लिए आगे की कार्यवाई चिन्हित की गई हैं। 
       भारत सरकार ने 2015 में ग्रिड में 100 गीगावाट सौर ऊर्जा तथा 60 गीगावाट पवन ऊर्जा का महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था। अध्ययन में इस चिंता के समाधान रूप में यह बताया गया है कि भारत के इलेक्ट्रिक ग्रिड द्वारा काफी अधिक नवीकरणीय ऊर्जा एकीकृत करने के काम में भिन्नता तथा अनिश्चितता का प्रबंधन कैसे किया जाएगा।
        अध्ययन के परिणाम के अनुसार 100 गीगावाट सौर ऊर्जा तथा 60 गीगावाट पवन ऊर्जा में संतुलन 15 मिनट के समय में नवीकरणीय ऊर्जा आउटपुट में न्यूनतम कमी के साथ बनाया जा सकता है। भारत की वर्तमान कोयला विद्युत प्रणाली में लक्षित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ मेल की भिन्नता को समाहित करने का लचीलापन है। 
       बड़े स्तर पर ईधन की बचत तथा बढ़ाए गए नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के कारण प्रदूषण में कमी, वर्तमान अवसंचरना ग्रिड संतुलन बनाए रखने में सक्षम, 175 गीगावाट के बाद के स्वच्छ ऊर्जा के परिदृश्य में कोयला संयंत्रों को लचीलापन के लिए प्रोत्साहन की आवश्यकता। 
          भारत का पावर सिस्टम कॉरपोरेशन (पोस्को) तथा अमेरीकी ऊर्जा विभाग की राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रयोगशाला (एनआरईएल) तथा लारेंस बर्फले नेशनल लेब्रोलेटरी (एलबीएनएल) ने यह रिपोर्ट तैयार किया। विद्युत मंत्रालय तथा अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए अमेरीकी एजेंसी (यूएसएड) के नेतृत्व में इसमें अग्रिम मौसम तथा विद्युत प्रणाली मॉडलिंग का उपयोग किया गया। 
          अध्ययन के महत्व और स्वच्छ ऊर्जा में अमेरीका-भारत सहयोग की चर्चा करते हुए यूएसएड-भारत के निदेशक माइकल सैटिंग ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत सरकार के साथ यूएसएड काफी समय से सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा विकास का एक प्रमुख तत्व है और भारत को 7-8 प्रतिशत की दर से वार्षिक वृद्धि करने के लिए सतत ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता है।
        उन्होंने कहा कि स्थापित ऊर्जा प्रणाली में नवीकरणीय ऊर्जा समाधान को शामिल करने में स्थापित नीति, संस्थान तथा बाजार ढांचे में परिवर्तन की आवश्यकता होती है। यह अध्ययन भारत में नवीकरणीय ऊर्जा को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। 
       इस अवसर पर विद्युत मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समय भारत के लोगों द्वारा न्यू ग्रिड, न्यू इंडिया की नई सोच के साथ परिवर्तन को अपनाने का समय है।प्रधानमंत्री की अमरीका के राष्ट्रपति से मुलाकात से भारत-अमेरीका ऊर्जा साझेदारी को बल मिला है। 
       इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों में विद्युत सचिव पी. के. पुजारी, सीईए के अध्ययन आर. के. वर्मा, पोस्को के सीईओ के. वी. एस. बाबा, पीजीसीआईएल के सीएमडी आई. एस. झा तथा एमएनआरई तथा विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

जेल बंदियों को कानूनी सेवाएं देने के लिए वेब एप्लीकेशन

      राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) को जेल में कैद बंदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है। 

       भारतीय विधि संस्थान में आयोजित सम्मेलन में एनएएलएसए ने जेल बंदियों को निशुल्क कानूनी सेवाएं देने के लिए वेब एप्लीकेशन लांच और एनआईसी के माध्यम से विकसित कानूनी सेवा प्रबंधन प्रणाली लांच किया। वेब एप्लीकेशन के माध्यम से राज्य कानूनी सेवा प्राधिकार तथा जिला कानूनी सेवा प्राधिकार अपने–अपने क्षेत्राधिकार के जेलों में प्रत्येक बंदी के लिए डाटा भरेंगे ताकि अदालत में वकील के जरिये उनका प्रतिनिधित्व किया जा सके।
        यह साफ्टवेयर अपनी रिपोर्ट में कैदियों की कुल संख्या, बिना वकील वाले कैदियों की कुल संख्या, कानूनी सेवा अधिवक्ताओं द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए बंदियों की संख्या और अपने निजी वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व कैदियों की संख्या का पता लग जायेगा। 
        सभी सूचनाएं राज्यवार, जिलेवार, और प्रत्येक जेल के संबंध में उपलब्ध होंगी। रिपोर्ट में कैदी के बंद रहने की अवधि की जानकारी मिलेगी और इससे यह सूचना प्राप्त होगी कि अपराध प्रक्रिया संहिता के सेक्शन 436 (ए) के तहत बंदी जमानत का पात्र है या नहीं। 
     यह वेब एप्लीकेशन कानूनी सेवा प्रणाली को और पारदर्शी बनाएगा और कहीं से भी सभी सक्षम पदाधिकारी कैदियों को दी जाने वाली कानूनी सहायता की अनुमति पर नजर रख सकेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अदालत में पेशी के पहले दिन से सभी बंदियों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
          वेब एप्लीकेशन उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश और एनएएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने लांच किया। इस अवसर पर 18 राज्यों के कानूनी सेवा प्राधिकार के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सदस्य सचिव शामिल हुए।

देश में वक्फ संपत्तियों की संख्या 512556, डिजिटल रिकॉर्ड शीघ्र

      अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि वक्फ सम्पत्तियों पर वक्फ माफियाओं के कब्जे एवं वक्फ बोर्डों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़े स्तर पर कार्यवाही के तहत तीन वर्षों में दो हजार से अधिक आपराधिक मुकदमे एवं कई वक्फ बोर्ड के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। 

      नई दिल्ली में सेंट्रल वक्फ कौंसिल की 76 वी बैठक के दौरान नकवी ने कहा कि देश भर में वक्फ सम्पत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कर उनका इस्तेमाल समाज के सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए करना केंद्र सरकार का लक्ष्य है। विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर वक्फ संपत्तियों पर शैक्षिक, सामाजिक, कौशल विकास कार्यक्रमों को शुरू किया जा रहा है।
           नकवी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि सभी वक्फ बोर्ड एवं वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड डिजिटल हो जाएँ। अल्पसंख्यक मंत्रालय इस सन्दर्भ में राज्य वक्फ बोर्डों को हर संभव मदद दे रहा है। कंप्यूटराईज़ेशन से वक्फ बोर्ड एवं वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड पारदर्शी हो सकेंगे। वक्फ बोर्डों को पारदर्शी एवं प्रभावशाली बनाने पर काम चल रहा है। नकवी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों की शिकायतों-विवादों के निपटारे हेतु केंद्र स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय बोर्ड ऑफ़ एडजूडिकेशन का गठन किया गया है। 
         इसी तरह सभी राज्यों में 3 सदस्यीय न्यायाधिकरण की स्थापना की जा रही है। लगभग 21 राज्यों में इनका गठन किया जा चुका है। नकवी ने कहा कि अन्य राज्यों को भी इसका गठन शीघ्र करना चाहिए। पंजीकृत और गैर-पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की संख्या लगभग 5,12,556 है। रिकॉर्डों के कंप्यूटराईजेशन के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है। 
      नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों-मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिक्ख, पारसी और जैन के सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक सशक्तिकरण के संकल्प के साथ एक मिशन के रूप में काम कर रहा है। अल्पसंख्यक मंत्रालय की सभी कल्याणकारी योजनाओं का असर जमीन पर साफ दिख रहा है। नकवी ने कहा कि बिना तुष्टिकरण के सशक्तिकरण का प्रमाण है, पिछले तीन वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास का बेहतरीन काम।
          नकवी ने कहा कि एजुकेशन (शिक्षा), एम्प्लॉयमेंट (रोजगार), एम्पावरमेंट (सशक्तिकरण) के माध्यम से अल्पसंख्यक मंत्रालय ने गरीब, पिछड़े एवं कमजोर वर्ग के अल्पसंख्यकों को प्रगति की मुख्यधारा का हिस्सेदार-भागीदार बनाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है।
            नकवी ने कहा कि बिना तुष्टिकरण के सशक्तिकरण की नीति से अल्पसंख्यकों में विश्वास के साथ विकास का माहौल तैयार हुआ है। पिछले तीन वर्षों के दौरान अल्पसंख्यक मंत्रालय ने अल्पसंख्यकों की बेहतर शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार पर केंद्रित योजनाओं-कार्यक्रमों को जरूरतमंद लोगों तक ईमानदारी के साथ पहुँचाया है।
           गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र, उस्ताद, नई मंजिल, नई रौशनी, सीखो और कमाओ, पढ़ो परदेस, प्रोग्रेस पंचायत, हुनर हाट, बहुउद्देशीय सद्भाव मंडप, प्रधानमंत्री का नया 15 सूत्रीय कार्यक्रम, बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम, बेगम हजरत महल छात्रा छात्रवृति सहित अन्य विभिन्न योजनाओं-कार्यक्रमों से हर जरूरतमंद अल्पसंख्यक की आँखों में खुशी और जिंदगी में खुशहाली सुनिश्चित करने का प्रभावी प्रयास किया गया है। 
          नकवी ने कहा कि टीचर, टिफिन, टॉयलेट से पिछले तीन महीनों में ही हजारों स्थानीय अल्पसंख्यक स्कूलों एवं मदरसों को जोड़ा गया है। इन अल्पसंख्यक संस्थानों में गुरुद्वारों, जैन संस्थानों, बौद्ध संस्थानों, पारसी संस्थानों एवं मुस्लिम इदारों द्वारा चलाये जा रहे संस्थान शामिल हैं।

कर्नाटक को राष्ट्रीय आपदा राहत निधि से 795.54 करोड़ की सहायता

        केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2016-17 के लिए कर्नाटक में रबी की फसल के लिए सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय सहायता के मुद्दे पर उच्च स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता की। 

      बैठक में केंद्रीय वित्त, कॉरपोरेट मामले और रक्षा मंत्री अरूण जेटली और केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने भाग लिया। 
      समिति ने कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने वाली केंद्रीय मंत्रियों की समिति की रिपोर्ट पर आधारित प्रस्ताव का निरीक्षण किया। 
         उच्च स्तरीय समिति ने कर्नाटक को राष्ट्रीय आपदा राहत निधि से 795.54 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करने की अनुमति प्रदान की।

Wednesday, 28 June 2017

देश को मादक पदार्थों व अवैध तस्करी से मुक्त करायें

           सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने मादक पदार्थों के दुरूपयोग और अवैध तस्करी के विरूद्ध अंतराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर यहां एक समारोह आयोजित किया। 

          सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर और विजय सांपला के अलावा भारत में यूएनओडीसी के प्रतिनिधि सरगी कैपीनोस, मंत्रालय में सचिव श्रीमती जी.लता कृष्ण राव और अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
       इस अवसर पर थावर चन्द गहलोत ने युवाओं और जनता का आह्वान किया कि वे देश को मादक पदार्थों और अवैध तस्करी से मुक्त करायें। उन्होंने कहा कि केवल सरकार के प्रयासों से इस उद्देश्य को पूरा नहीं किया जा सकता। इस बुराई को समाप्त करने के लिए लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी है। 
        उन्होंने मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए अनेक व्यक्तियों और इस क्षेत्र में काम कर रहे एनजीओ के प्रयासों की सराहना की और जानकारी दी की उनका मंत्रालय नशा करने वालों की पहचान करने, उनके इलाज और पुनर्वास के लिए स्वयं सेवी संगठनों के जरिए समुदाय आधारित सेवायें प्रदान करता है। कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए सरकार ने अनेक पहल की हैं और परिवार के सदस्य तथा समाज बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
           विजय सांपला ने कहा कि लोगों को मादक पदार्थों की बुराइयों के प्रति जागरूक करना चाहिए और अनेक संगठन इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी देखी। भारत में यूएनओडीसी के प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव का संदेश पढ़ा।
         इस अवसर पर एक नृत्य नाटिका दिखाई गयी। मंत्रालय मादक पदार्थों के दुरूपयोग की निगरानी करता है जिसमें नशा करने वालों की समस्या का आकलन, एहतियाती उपाय, इलाज और पुनर्वास, सूचना का प्रसार और जनजागरण शामिल है।
          मंत्रालय नशा मुक्ति केन्द्र चलाने के लिए देश भर के करीब 400 एनजीओ को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। मंत्रालय ने नशा मुक्ति के लिए 24 घंटे की एक टोल फ्री सेवा भी स्थापित की है। इससे पहले सुबह नई दिल्ली स्थित इंडिया गेट पर ‘मादक पदार्थ के दुरूपयोग के विरूद्ध दौड़’ आयोजित की गयी जिसमें 4000 लोगों ने भाग लिया। 
          थावर चंद गहलोत ने इस दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर गुर्जर, सांपला, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और मंत्रालय की सचिव जी. लता के अलावा अनेक अन्य लोग उपस्थित थे।

पेट्रोलियम व्यवसाय 3,000 करोड़ से 30,000 करोड़ करने का लक्ष्य

          केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और तेल और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में संयुक्त रूप से स्वस्थ सारथी अभियान (एसएसए) का उद्घाटन किया।

      स्वस्थ सारथी अभियान (एसएसए) दो महीने का मेगा अभियान है और इसका फोकस क्षेत्र के ऑटो, टैक्सी तथा बस चालकों को रोग बचाव स्वास्थ्य सुविधा देने पर है। इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) की पहल स्वस्थ सारथी अभियान का उद्घाटन संसद सदस्यों, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक अतिथियों की उपस्थिति में हुआ। एसएसए का आयोजन क्षेत्र के सार्वजनिक परिवहन चालकों की समस्याओं के समाधान के लिए किया गया। अधिकतर चालक सीएनजी वाहन चलाते है।
           धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि राजधानी क्षेत्र के चालक गैस वृद्धि में सहयोगी है। सीएनजी का इस्तेमाल परिवहन, घरेलू उपयोग, ऑटो आदि में किया जाता है। उन्होंने बताया कि 4.5 लाख वाहन सीएनजी ईंधन से चलती हैं और उससे आईजीएल का कारोबार 3,000 करोड़ रुपये का होता है। उन्होंने कहा कि नया लक्ष्य कारोबार 3,000 करोड़ से बढ़ाकर 30,000 करोड़ रुपये होना चाहिए।
           प्रधान ने कहा की स्वस्थ सारथी अभियान सभी चालकों को बुनियादी जांच स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की पहल है। उन्होंने बताया कि राजधानी के विभिन्न आईजीएल स्टेशनों पर दो महीने के चिकित्सा शिविर में निशुल्क स्वस्थ जांच होगी। इसमें खून की जांच, शूगर जांच, आंख जांच शामिल हैं। सेंट स्टीफन अस्पताल के डॉक्टरों का दल इस कार्य में सहायता देगा।
        उन्होंने कहा कि वाहन चालकों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि आईजीएल स्वास्थ्य बीमा देने पर विचार कर रहा है। इसमें राजधानी के वाहन चालकों के लिए मृत्यु लाभ शामिल होगा। पेट्रोलियम मंत्री ने स्वस्थ सारथी वेब एप्लीकेशन लांच किया। इससे अभियान के दौरान स्वास्थ्य जांच कराने वाले वाहन चालकों का स्वास्थ्य रिकोर्ड कहीं से भी ऑन-लाइन प्राप्त किए जा सकेंगे।
            ईंधन संरक्षण कार्यशाला के बारे में प्रधान ने चालकों से ईंधन बचाने की अपील की और कहा कि कार्यशाला में ईंधन बचाने के तरीकों से चालक लाभान्वित होंगे। डॉ. हर्षवर्धन ने पेट्रोलियम मंत्री तथा एसएसए की पहल करने वाले हितधारकों को धन्यवाद दिया। 
         उन्होंने प्रधानमंत्री के विजन ‘सबका साथ सबका विकास’ का स्मरण दिलाते हुए कहा कि सभी नागरिकों के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता। चालकों के लिए ईंधन संरक्षण कार्यशाला का आयोजन सक्षम-2017 के हिस्से के रूप में पेट्रोल संरक्षण अनुसंधान एसोसिएशन (पीसीआरए) द्वारा किया गया। 
           इस अभियान को दिल्ली पुलिस भी समर्थन दे रही है ताकि सड़क सुरक्षा और चालकों के जिम्मेदार व्यवहार का संदेश दिया जा सके। इस अवसर पर एक मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजन किया गया। इसमें ऊंचाई-भार मापन, बीएमआई, ब्लड-प्रेशर, विजन और आंख जांच, ब्लड ग्रुप जांच, काउंसिलिंग, स्वास्थ्य शिक्षा तथा प्रथम स्वास्थ्य सहायता के तरीकों को बताया गया।
            यह अभियान 31 अगस्त, 2017 तक आईजीएल के विभिन्न सीएनजी स्टेशनों पर स्वास्थ्य शिविर के रूप में जारी रहेगा। ईंधन संरक्षण कार्यशाला में ईंधन बचाने और अच्छा वाहन चालन के बारे में उपस्थित वाहन चालकों को जानकारी दी गई। सक्षम-2017 के हिस्से के रूप में इस तरह की कार्यशाला पीसीआरए द्वारा विभिन्न शहरों में आयोजित की गई है। दिल्ली में तीसरी कार्यशाला हो रही है। इससे पहले कार्यशाला मुंबई तथा विशाखापत्त्न में हुई थी।

निर्वाचन आयोग का मतदाता पंजीकरण अभियान अब फेसबुक पर

        भारत का निर्वाचन आयोग एक जुलाई 2017 से एक विशेष अभियान शुरू कर रहा है जिसके अंतर्गत छूटे हुए मतदाताओं का पंजीकरण किया जाएगा। 

      अभियान के दौरान पहली बार मतदान करने वालों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि आयोग के आदर्श वाक्य कोई मतदाता नहीं छूटे की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। 
       अधिकतम पात्र मतदाताओं तक पहुंचने के लिए, आयोग फेसबुक के साथ सहयोग कर रहा है ताकि जुलाई 2017 को पहला राष्ट्रव्यापी मतदाता पंजीकरण स्मरण अभियान शुरू किया जा सके।
      भारत में 18 करोड़ से ज्यादा लोग फेसबुक पर हैं। अभी पंजीकरण करें बटन भारतीय नागरिकों को निर्वाचन आयोग के साथ पंजीकृत करने के लिए तैयार किया गया है। 1 जुलाई को मतदाता पंजीकरण स्मरण की एक अधिसूचना उन लोगों को भारत में फेसबुक पर भेजी जाएगी जो मतदान करने के योग्य हैं। 
          याद दिलाने का कार्य 13 भारतीय भाषाओं- अंग्रेजी, हिन्दी, गुजराती, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड, पंजाबी, बांग्ला, उर्दू, असमी, मराठी और उड़िया में किया जाएगा। यह पहला मौका है जब फेसबुक के मतदाता पंजीकरण स्मरण को भारत में शुरू किया जाएगा। 2016-2017 में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने सम्बद्ध राज्य के चुनावों के दौरान राज्य स्तर पर इस तरह के प्रयास किये थे।
         फेसबुक पर अभी पंजीकरण करें बटन पर क्लिक करके लोग नेशनल वोटर्स सर्विसेस पोर्टल पर पहुंचेगे जो उन्हें पंजीकरण की प्रक्रिया के जरिए निर्देश देगा। मतदाता पंजीकरण स्मरण की राष्ट्रव्यापी शुरूआत के बारे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ नसीम जैदी ने कहा मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत का निर्वाचन आयोग छूटे हुए मतदाताओं को पंजीकृत करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है, इसमें पहली बार मतदान करने वालों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
       यह आयोग के आदर्श वाक्य कोई मतदाता नहीं छूटे को पूरा करने कि दिशा में एक कदम है। इस अभियान के अंतर्गत 1 जुलाई 2017 को फेसबुक भारत में फेसबुक का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों को अनेक भारतीय भाषाओं में मतदाता पंजीकरण की याद दिलायेगा। मैं सभी पात्र नागरिकों से आग्रह करता हूं कि वे पंजीकरण कराएं और मतदान करें। यानि अपने अधिकार पहचानें और कर्तव्य का पालन करें।

र्स्‍टाटअप से रोजगार सृजन में मदद, सांसद करें पहल

      वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने सभी सांसदों को एक पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे अपनी स्‍थानीय क्षेत्रीय विकास निधि (एमपीएलएडीएस) से क्षेत्र में स्‍टार्टअप के लिए सह-कार्यस्‍थल- इन्‍क्‍यूबेटर स्‍थापित करने पर विचार करें। 

     उन्‍होंने कहा कि इस कदम से देश में र्स्‍टाटअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा और सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में र्स्‍टाटअप की मदद से तेजी से रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। 
      श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत सरकार को र्स्‍टाटअप इंडिया की पहल से देश में नवाचर को बढ़ावा देने और डिजाइन के माध्‍यम से एक मजबूत पारिस्थितिकीय तंत्र स्‍थापित होने की उम्‍मीद है। 
        उन्‍होंने कहा कि सरकार र्स्‍टाटअप इंडिया मिशन को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मंत्री ने कहा कि हम विभिन्‍न र्स्‍टाटअपों से बातचीत कर रहे हैं, ताकि उनके व्‍यापार की जरूरतों के बारे में जानकारी मिल सके और उन्‍हें सरकार से अपेक्षित मदद दी जा सके।
          उन्‍होंने कहा कि इस संबंध में सभी महत्‍वपूर्ण पहलुओं को जानना जरूरी है।श्रीमती सीतारमण ने कहा कि वित्‍तीय बाधाओं के चलते र्स्‍टाटअप कार्य स्‍थलों का चुनाव खुद नहीं कर सकते, इसलिए यह सुझाव मिला है कि यदि सरकार सहकारी स्‍थलों के निर्माण में सहयोग करती है तो इससे उन्‍हें अपने विचारों को एक सफल व्‍यवसाय में तब्दील करने में मदद मिलेगी।

देश की ग्राम पंचायतों को करीब 2,00,292 करोड़ की भारी वित्तीय सहायता

      केन्द्रीय पंचायती राज, ग्रामीण विकास और पेयजल तथा स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतें अच्छा काम कर रही हैं। 

     उन्होंने पंचायतों द्वारा प्रशिक्षण की गुणवत्‍ता और टेक्‍नोलॉजी के इस्‍तेमाल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान और पंचायती राज तथा राज्य ग्रामीण विकास संस्थान को निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायतों के पदाधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के लिए अन्य संस्थानों के साथ समन्वय कायम करना चाहिए। 
         तोमर भोपाल में राज्य पंचायती राज मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। तोमर ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में ग्राम पंचायतों को करीब 2,00,292 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय हस्तांतरण किया गया है। चौदवें वित्त आयोग के निर्णय के अनुसार हाल के वर्षों में स्वच्छता, नागरिक सुविधाओं आदि के क्षेत्रों में पंचायतों के जरिये सार्वजनिक खर्च में काफी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। 
           उन्होंने लोगों की भागीदारी के महत्व बताते हुए सलाह दी कि पंचायतों को गरीबी, सामाजिक मुद्दों और संवेदनशील समूहों की जरूरतों को पूरा करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। हालांकि ग्राम पंचायतों के स्थानीय नेतृत्व के जरिये अनेक गांव पानी की उपलब्धता, कनेक्टीविटी, खुले में शौच, सभी के लिए शिक्षा जैसी कठिन समस्याओं का समाधान करने में सफल रहे हैं और उन्होंने संवेदनशील समूहों के गरीब लोगों के जीवन में जबरदस्त बदलाव किया है।
          उन्होंने सम्मेलन में भाग लेने के लिए राज्य के पंचायती राज मंत्रियों को धन्यवाद दिया और आश्वासन दिया कि उनके सभी सुझावों पर विचार किया जाएगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश द्वारा की गयी प्रगति को उजागर किया और सम्मेलन भोपाल में आयोजित करने के लिए नरेन्द्र सिंह तोमर को धन्यवाद दिया। 
        उन्होंने कहा कि पंचायतों के जरिए किये जाने वाले फैसले हमेशा उपयोगी रहते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वे स्वयं सम्बद्ध साझेदारों के साथ पंचायतें करके विभिन्न योजनाओं के संबंद्ध में फैसले लेते हैं। दस राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों ने सम्मेलन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अपने अनुभव बांटे और पंचायती राज प्रणाली के भविष्य में विकास के लिए सुझाव दिये।
         सम्मेलन में देश के विभिन्न भागों से आये पंचायतों के 40 से अधिक सरपंचों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। सम्मेलन के दौरान जल संरक्षण, नये भारत के लिए स्मार्ट गांव और स्थायी विकास के लक्ष्य को हासिल करने में पंचायतों की भूमिका विषयों पर चर्चा की गयी। 
         इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय द्वारा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय, यूनीसेफ और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस की सामूहिक परियोजनाओं के अंतगर्त प्रकाशित 20 पुस्तकों के एक सेट का विमोचन भी किया गया। 
        पंचायत राज और कृषि तथा किसानों के कल्याण राज्य मंत्री पुरूषोत्तम रूपाला, पंचायती राज मंत्रालय में सचिव जितेन्द्र शंकर माथुर और मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने मौजूद प्रतिनिधियों को संबोधित किया। 
          दस राज्यों के पंचायती राज मंत्री, राज्यों के पंचायती राज विभाग के प्रभारी अधिकारी, राष्ट्रीय ग्रामीण और विकास और पंचायती राज संस्थान के प्रतिनिधि, राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक और विभागीय सदस्य, सामाजिक क्षेत्र मंत्रालयों के अधिकारी. यूएनडीपी, यूनीसेफ, इस क्षेत्र में कार्य कर रहे प्रमुख एनजीओ के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने सम्मेलन में भाग लिया।

Tuesday, 27 June 2017

बिलासपुर-मनाली-लेह की नई बड़ी लाइन के लिए आधारशिला

       जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य में रेल लाइन बिछाने के काम में महत्‍वपूर्ण प्रगति के बाद भारतीय रेल परिवहन के सामाजिक, आर्थिक लाभों का विस्‍तार कर उन्‍हें पर्वतीय राज्‍यों (हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू-कश्‍मीर) के दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाना चाहता है।

    देश में विभिन्‍न सामाजिक रूप से वांछित परियोजनाओं के बीच बिलास-मंडी-लेह रेल लाइन (मार्ग की लंबाई 498 किलोमीटर) का बहुत महत्‍व है। परियोजना रणनीतिक तथा आर्थिक विकास और पर्यटन महत्‍व की है। 
          इसकी विशेषता यह है कि यह रेल लाइन विश्‍व में सबसे ऊंचे मार्ग पर है। रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने लेह में बिलासपुर-मनाली-लेह नई बड़ी रेल लाइन के अंतिम स्‍थान सर्वे के लिए आधारशिला रखी। 
        इस अवसर पर महत्‍वपूर्ण अतिथि तथा उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आर के कुलश्रेष्‍ठ तथा अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित थे। जम्‍मू-कश्‍मीर के लद्दाख शहर में लेह महत्‍वपूर्ण शहर है। इसकी आबादी लगभग 1.5 लाख है।
            यहां हर वर्ष बड़ी संख्‍या में भारतीय एवं विदेशी पर्यटक आते हैं। व्‍यापक रक्षा प्रतिष्‍ठानों के साथ लेह जिला देश का दूसरा सबसे बड़ा जिला है और 14 कोर का यह मुख्‍यालय भी है। इस क्षेत्र में शीतकाल में तापमान शून्‍य से भी नीचे चला जाता है।
          भारी बर्फबारी के कारण देश के दूसरे हिस्‍सों के साथ इस क्षेत्र का सड़क संपर्क टूट जाता है ऐसे में सामरिक तथा सामाजिक, आर्थिक आवश्‍यकताओं के लिए सभी मौसम के अनुकूल रेल संपर्क आवश्‍यक है। देश के दूसरे हिस्‍सों के साथ लेह को एक बड़ी लाइन से जोड़ने के लिए भारतीय रेल ने अंतिम स्‍थल सर्वेक्षण का काम लिया है। 
          यह मनाली होते हुए बिलासपुर से लेह तक वास्‍तविक निर्माण शुरू होने से पहले की प्रक्रिया है। इससे मंडी, कुल्‍लू, मनाली, कीलांग तथा हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू-कश्‍मीर के महत्‍वपूर्ण शहरों से संपर्क कायम होगा। बिलासपुर से लाइन को आनंदपुर साहेब और नांगल बांध के बीच भानूपाली से जोड़ा जायेगा। 
         यह लाइन शिवालिक, ग्रेट हिमालय तथा जानसकर क्षेत्र होते हुए जाएगी। इन क्षेत्रों में ऊंचाई को लेकर अंतर है (एमएसएल से ऊपर 600 एम से 5300 एम) और यह भूकंपीय में आता है। इसलिए बड़ी संख्‍या में सुरंग, छोटे और बड़े पुल की जरूरत होगी। 
            अंतिम स्‍थल सर्वेक्षण का काम रेल मंत्रालय ने राइट्स लिमिटेड को दिया है। 157 करोड़ रुपये की लागत से यह लाइन 2019 तक पूरी कर ली जायेगी। निर्माण योग्‍य, आर्थिक रूप से लाभकारी, सुरक्षित तथा सभी मौसम के अनुकूल रेल लाइन में अत्‍याधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग किया जायेगा। 
           उन्‍नत डिजिटल मॉडल का उपयोग करते हुए गलियारों का विकास तथा भूगर्भीय मानचित्र, हिमपात और हिमस्खलन अध्ययन, जल विज्ञान और भूकंपीय डेटा के लिए नवीनतम सॉफ्टवेयर का उपयोग इष्टतम कॉरिडोर के चयन के साथ। 
        ऐसे कठिन और दुर्गम इलाके में रेलवे लाइन का निर्माण भारतीय रेलवे के लिए चुनौतीपूर्ण होगा और विश्‍व का बेजोड़ रेल मार्ग होगा।

दुनिया के उद्योग में सबसे तेजी से बढ़ता क्रूज पर्यटन

          केन्द्रीय शिपिंग, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि क्रूज पर्यटन दुनिया भर में पर्यटन उद्योग के सबसे तेजी से बढ़ते घटकों में से एक है। यह बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर जुटाकर भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास करने वाला एक प्रमुख चालक हो सकता है।

          गडकरी नई दिल्ली में "भारत में क्रूज पर्यटन के विकास के लिए कार्य योजना" पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में बोल रहे थे। इस कार्यशाला में संस्कृति और पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री डॉ महेश शर्मा और क्रूज पर्यटन को प्रभावित करने वाले मुद्दों से निपटने वाली नियामक एजेंसियों सहित सरकारी और निजी क्षेत्र के सभी हितधारक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 
          गडकरी ने कहा कि औसत रूप से, क्रूज जहाज पर रोज़गार का सृजन 3-4 यात्रियों के लिए एक नौकरी का है। भारत में प्रति वर्ष 700 क्रूज जहाजों के रख-रखाव की क्षमता है जबकि इस साल केवल 158 जहाजों का रख-रखाव हुआ। क्रूज उद्योग दस लाख क्रूज यात्रियों के लिए 2.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकता है और यह देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहा हैं। 
           उन्होंने आगे बताया कि क्रूज टर्मिनलों का पांच मुख्य बंदरगाहों- मुंबई, गोवा, कोचीन, मैंगलोर और चेन्नई में विकास किया जा रहा है। इसके अलावा 111 अंतर्देशीय जलमार्गों की परिवहन क्षमता का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इस वर्ष के अंत तक दस अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए कार्य शुरू हो जाएगा। इसमें गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ शामिल हैं जिन पर पहले से ही काम चल रहा है। 
          गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से यह अनुरोध किया कि वे अधिक से अधिक पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग द्वारा क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायें। शिपिंग मंत्रालय देश में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सभी सम्बंधित मंत्रालयों और सरकारी संगठनों के साथ सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। 
      शिपिंग सचिव और पर्यटन सचिव के नेतृत्व में इस कार्य के लिए एक संयुक्त कार्य बल का किया गया था। कार्य योजना तैयार करने के लिए एक वैश्विक सलाहकार भी नियुक्त किया गया था। कार्यशाला का उद्देश्य इस कार्य योजना के बारे में विचार विमर्श करना था जिसमें देश में क्रूज पर्यटन के विकास के लिए एक समर्थ व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र का सृजन करने के लिए सरकार के विभिन्न भागों द्वारा कार्य करने की जरूरत है। 
           इस अवसर पर डॉ महेश शर्मा ने कहा की भारत तेजी से बढ़ता हुआ एक आकर्षक पर्यटक गंतव्य है। देश में क्रूज पर्यटन की पूरी क्षमता प्राप्त करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा आपस में सहयोग करके मिलजुल काम करने की जरूरत है ताकि विकास के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा सके।
          क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिपिंग मंत्रालय द्वारा किये गये प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए शिपिंग मंत्रालय में विशेष सचिव (शिपिंग) डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने बताया की इ-वीजा, इ-लैंडिंग तथा सभी क्रूज जहाज सम्बंधित प्रभारों पर न्यूनतम 30 प्रतिशत छूट और तटीय क्रूज आवाजाही पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट जैसे प्रोत्साहन पहले ही लागू किये जा चुके हैं।
          इसके अलावा शिपिंग और पर्यटन मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त कार्य बल की स्थापना की गई है तथा मानक परिचालन प्रक्रिया के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है जिसे विभिन्न हितधारकों के साथ विचार विमर्श करने के बाद समयबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। 
         पर्यटन सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा ने कहा कि देश में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिपिंग और पर्यटन मंत्रालयों द्वारा एक साथ मिलकर काम करने से इस क्षेत्र से अधिकतम लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
         कार्यशाला में हितधारकों ने सुरक्षा, अप्रवास, कस्टम और बंदरगाह जैसे क्रूज बंदरगाह परिचालन के विभिन्न पहलुओं से सम्बंधित अनेक नियामक मुद्दों पर विचार विमर्श किया। उन्होंने क्रूज जहाज रख-रखाव के लिए सभी सरकारी संगठनों हेतु मानक परिचालन प्रक्रियाओं को तैयार करने के लिए कार्य किया।

क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग एक नई अवधारणा, आईटी बुनियादी ढांचे की तुलना में किफायती एवं लाभप्रद

      राष्‍ट्रीय एमएसएमई पुरस्‍कार समारोह 2015 यहां आयोजित किया गया। केन्‍द्रीय सूक्ष्‍म, लघु एवं मझौले उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने एमएसएमई पुरस्‍कार 2015 प्रदान किये। 

      संयुक्‍त राष्‍ट्र ने जब से 27 जून को संयुक्‍त राष्‍ट्र एमएसएमई दिवस घोषित किया है, तब से लेकर अब तक सूक्ष्‍म, लघु एवं मझौले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय इस दिन का चयन एमएसएमई को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार प्रदान करने के लिए करता आया है। एमएसएमई को ये पुरस्‍कार उनके उल्‍लेखनीय प्रदर्शन के लिए दिये जाते हैं। 
          इस पुरस्‍कार समारोह का आयोजन एमएसएमई क्षेत्र में उल्‍लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले उन उद्यमों के प्रति आभार व्‍यक्‍त करने के लिए किया जाता है जो राष्‍ट्रीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं। राज्‍य मंत्री गिरिराज सिंह और हरिभाई पी.चौधरी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
         सचिव के.के. जालान, विकास आयुक्‍त सुरेन्‍द्र नाथ त्रिपाठी, केवीआईसी के अध्‍यक्ष विनय कुमार सक्‍सेना और कॉयर बोर्ड के अध्‍यक्ष सी.पी. राधाकृष्‍णन भी इस अवसर पर मौजूद थे। इस अवसर पर केन्‍द्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने ‘डिजिटल एमएसएमई योजना’ का भी शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्‍होंने एसएपी इंडिया, इंटेल और एचएमटी को तीन सहमति पत्र (एमओयू) सौंपे। 
           इन कदमों से डिजिटल इंडिया मिशन को सफल बनाने की दिशा में मंत्रालय द्वारा किये जा रहे प्रयासों को नई गति मिलेगी। डिजिटल एमएसएमई योजना क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग पर केन्द्रित है, जो एमएसएमई द्वारा अपने यहां स्‍थापित किये गये आईटी बुनियादी ढांचे की तुलना में एक किफायती एवं लाभप्रद विकल्‍प के रूप में उभर कर सामने आई है।
          क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग के तहत एमएसएमई अपनी कारोबारी प्रक्रियाओं के समुचित प्रबंधन के लिए साझा एवं खुद के लिए स्‍थापित किये गये सॉफ्टवेयर सहित आईटी बुनियादी ढांचे तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने हेतु इंटनेट का इस्‍तेमाल करते हैं। क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग के तहत हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं पर कुछ भी निवेश नहीं करना पड़ता है। अत: ‘कैपेक्‍स’ ऐसी स्थिति में ‘ओपेक्‍स’ में परिवर्तित हो जाता है।
           इस योजना से एमएसएमई अपने यहां सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) को उपयोग में लाने के लिए इस नई अवधारणा अर्थात क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। केन्‍द्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र ने इस अवसर पर यह जानकारी दी कि वर्ष 2015 में विभिन्‍न श्रेणियों के तहत राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं की कुल संख्‍या 56 है, जिनमें एमएसएमई के लिए 50 और बैंकों के लिए 6 पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ता शामिल हैं।
            उन्‍होंने यह भी कहा कि एमएसएमई मंत्रालय प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप अथक प्रयास कर रहा है। उन्‍होंने विभिन्‍न क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍ट उपलब्धियां हासिल करने वाले पुरस्‍कार विजेताओं को बधाई दी और उम्‍मीद जताई कि इस क्षेत्र के अन्‍य उद्यम भी पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं द्वारा स्‍थापित किये गये उदाहरणों का अनुकरण करेंगे। 
          केन्‍द्रीय एमएसएमई राज्‍य मंत्री हरिभाई पी.चौधरी ने कहा कि एमएसएमई की अहमियत और भारत के आर्थिक-सामाजिक विकास में उनके उल्‍लेखनीय योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती है। खादी एवं ग्रामीण उद्योगों और कॉयर क्षेत्र सहित एमएसएमई सेक्‍टर कृषि के बाद सबसे बड़ा नियोक्‍ता है।
           हाल के वर्षों में एमएसएमई ने 10 फीसदी से भी ज्‍यादा की वृद्धि दर दर्शाई है, जो बड़ी कंपनियों द्वारा दर्ज की गई वृद्धि दर से भी ज्‍यादा है। केन्‍द्रीय एमएसएमई राज्‍य मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप ‘कारोबार करने में आसानी’ और डिजिटल इंडिया मिशन को ध्‍यान में रखते हुए अनेक कदम उठाये हैं। 
         सितम्‍बर, 2015 में लांच किये गये उद्योग आधार ज्ञापन को कुछ ही मिनटों में बगैर किसी शुल्‍क के दाखिल किया जा सकता है। एमएसएमई इसके अलावा इस मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जा रही सभी योजनाओं के बारे में विभिन्‍न जानकारियां एकल खिड़की अर्थात मोबाइल एप ‘माईएमएसएमई’ पर प्राप्‍त कर सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिये डॉ. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में समिति

        राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने के लिये सरकार ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक पद्म विभूषण डॉ के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।

    समिति के अन्य सदस्य है। डॉ. वसुधा कामत शिक्षा तकनीक के क्षेत्र की एक सुप्रसिदध विद्वान है जिन्होंने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक योगदान दिया है।वे एसएनडीटी विश्वविद्यालय मुंबई की कुलपति भी थीं।
       के.जे. अलफोन्से को स्कूली शिक्षा के सुधार में आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों से निपटने का प्रशासनिक अनुभव है। केरल के कोट्टायम और अरनाकुलम जिलों में 100ऽ साक्षरता हासिल करने में उनकी अहम भूमिका थी। 
         डॉ. मंजुल भार्गवा अमेरिका के पिन्सटन विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर रहे हैं। गौस नंबर सिद्धान्त के क्षेत्र में उनके योगदान के लिये उन्हें बहुत ही कम आयु में गणित का फील्ड मेडल प्रदान किया गया था। डॉ. राम शंकर कुरील, मध्य प्रदेश के महू स्थित बाबा साहेब अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति हैं और वंचित वर्ग को शिक्षा एवं विकास की मुख्य धारा में लाने के विषय पर उनके अनेक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं। 
           डॉ. टी.वी. काट्टीमानी अमरकंटक स्थित आदिवासी विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। वे भाषा शिक्षा और जनसंचार क्षेत्र से हैं। कृष्ण मोहन त्रिपाठी को सर्व शिक्षा अभियान को लागू करने का व्यापक अनुभव है और वह उत्तर प्रदेश हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं। डॉ. मज़हर आसिफ गौहाटी विश्वविद्यालय में फारसी भाषा के प्रोफेसर हैं। उनके शोध निर्देशन में फारसी-असमी-अंग्रेजी भाषा का पहला शब्दकोष संकलित किया गया था। 
           डॉ. एम. के. श्रीधर कर्णाटक नवाचार परिषद और कर्णाटक ज्ञान आयोग के पूर्व सदस्य सचिव हैं। एक दिव्यांग विद्वान, डॉ. एम. के. श्रीधर, सीएबीई के सदस्य भी हैं। समिति तत्काल प्रभाव से काम करना शुरू कर देगी। 
          एक व्यापक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत, जो कि पिछले 30 महीनों से चल रही थी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय को देश भर से शिक्षा शास्त्रियों, शिक्षकों, विशेषज्ञों, छात्रों एवं अन्य हितधारकों से हजारों सुझाव प्राप्त हुये थे। इसके लिये तहसील, जिला एवं राज्य स्तर पर चर्चा की गयी थी।
            राज्य सरकारों ने क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में अपने व्यापक सुझाव दिये थे। राज्य सभा में भी इस विषय पर चर्चा की गयी और शिक्षा पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें 48 सांसदों ने भाग लिया। कई सांसदों ने अपने विचार लिखित रूप से दिये।
           सरकार के माय गव प्लेटफॉर्म पर 26,000 लोगों ने इंटरनेट के जरिये अपनी राय रखी। टीएसआर सुब्रमण्यिन सिति ने भी विस्तार से अपनी सिफारिशें दी। समिति इन सभी सुझावों और सिफारिशों पर विचार करेगी। 

आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतिओं से समाज की सुरक्षा भारत व अमेरिका की प्राथमिकता

        प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाशिंगटन डी सी में कहा, भारत व अमेरिका का आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतिया से अपने समाज की सुरक्षा प्राथमिकताओं मे से एक है।

      समाज का चौमुखी आर्थिक विकास तथा इन की सांझी प्रगति भारत व अमेरिका का मुख्य लक्ष्य था और आगे भी रहेगा। अमेरिका का परस्पर सहयोग तथा सहभागिता की चरम सीमाओं की उपलब्धि पर केन्द्रित है। क्योंकि भारत तथा अमेरिका विश्व की दो विशाल साँझा सशक्तिकरण हमारा उद्देश्य है। भारत व अमेरिका ने मानव प्रयासों के लगभग सभी क्षेत्रों को छुआ है।
        प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, भारत के सामाजिक-आर्थिक बदलाव के लिए हम अमेरिका को प्रमुख मानते हैं। मुझे विश्वास है कि अमेरिका का सहयोग भारत मे नए आयाम पैदा करेगी । मेरा यह स्पष्ट मत है कि एक मजबूत और सफल अमेरिका में ही भारत का हित है। 
           इसी तरह, भारत का विकास और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भारत की भूमिका अमेरिका के हित में है। निवेश का भरपूर विकास हमारे प्रयासों की सांझी प्राथमिकता होगी। भारत व अमेरिका के सभी क्षेत्रो में सहयोग का विस्तार और उनमें गहनता हमारे मुख्य लक्ष्यों मे से एक होगा। इसके लिए हमारी सफलता को और सुदृढ़ करने के लिए हम कदम उठायेंगे।

Monday, 26 June 2017

अधिक संख्‍या में सवारी रेलगाडि़यां चलाने की संभावनाओ की भी तलाश

        रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने रेलवे बोर्ड के सदस्‍यों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में वैकल्पिक प्रबंधों की समीक्षा की। 

       इस बैठक में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ए.के. मित्तल, रेलवे बोर्ड के सदस्य ट्रैफिक मोहम्मद जमशेद और रेलवे बोर्ड के सदस्य इंजीनियरिंग आदित्य कुमार मित्तल और सीएमडी, राइट्स (रेलवे का सार्वजनिक उपक्रम) राजीव मेहरोत्रा ने भी भाग लिया।
      रेल मंत्री ने इस क्षेत्र में यात्री और मालगाड़ी परिचालन में होने वाली समस्या को कम करने के उपाय करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि रेल यात्रियों के लाभ के लिए एक कार्य योजना बनाई जाए और इसे शीघ्रता से लागू किया जाए। 
       रेल मंत्री के निर्देशों के अनुसार रेलवे बोर्ड ने गोमो रेलवे स्‍टेशन पर आधारभू‍त सुविधाओं को बढ़ाने और उन्‍हें उन्‍नत करने का निर्णय लिया, क्‍योंकि इस स्‍टेशन से अत्‍यधिक रेल आवागमन होने वाला है। रेलवे बोर्ड ने निर्णय किया कि पहले से स्‍वीकृत 250 करोड़ रूपये की लागत से गोमो में बनने वाले फ्लाईओवर में मतारी स्‍टेशन से दो और रेल सम्पर्क जोड़े जाएंगे (रेल के ऊपर रेल), ताकि धनबाद की तरफ से आने वाली रेलों को गोमो स्‍टेशन पर वापस भेजने से बचा जा सकें। 
          इससे रेल यातायात अधिक सुचारू हो जाएगा। दो अतिरिक्‍त रेल सम्‍पर्कों के साथ गोमो फ्लाईओवर निर्माण की कुल लागत 500 करोड़ रूपये होगी, जिसकी स्‍वीकृति दी जा चुकी है। गोमो स्‍टेशन पर इस फ्लाईओवर नेटवर्क के निर्माण कार्य को तेजी से करने का भी निर्णय लिया गया।
            इसके अतिरिक्‍त तत्‍कालिक उपाय के रूप में रेल पीएसयू, राइट्स को केवल प्रभावित भागों का मार्ग परिवर्तित करने की संभावनाओं का अध्‍ययन करने और रिपोर्ट शीघ्र प्रस्‍तुत करने के लिए भी कहा गया। इसके बाद नई आधारभूत संरचनाएं बनाने और लागू करने की उपयुक्‍त रणनीति बनाई जाएगी। 
           स्‍थानीय मार्ग परिवर्तनों के कारण माल ढुलाई के व्‍यय की पूर्ति के लिए कोयला मंत्रालय से सम्‍पर्क किया जाएगा। यात्री तथा मालगाडि़यों के आवागमन हेतु स्‍थायी उपाय किये जाएंगे। 
         शीघ्र भूमि अधिग्रहण और कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए जोनल रेल कार्यालय राज्‍य सरकार के साथ सम्‍पर्क करेगा।
          रेल प्रशासन रेलों के अंतिम स्‍टेशनों की दूरी घटाने और मार्ग परिवर्तन द्वारा और अधिक संख्‍या में सवारी रेलगाडि़यां चलाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। 
         रेलवे बोर्ड, पूर्व मध्‍य रेलवे जोन और धनबाद रेल प्रभाग, रेल प्रयोगकर्ताओं की समस्‍याएं कम करने के लिए निरंतर स्थिति की निगरानी कर रहा है और किये जाने वाले उपायों के लिए कार्य कर रहा है।

योग से जोड़ने के लिए सेलेब्रेटिंग योगा मोबाईल ऐप

          विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने नई दिल्ली में सेलेब्रेटिंग योगा नाम से एक मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया।

        यह ऐप विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विकसित किया गया है। इस मोबाईल ऐप को डीएसटी द्वारा विकसित किया गया है। इस ऐप का उद्देश्य स्वस्थ्य जीवन के लिए लोगों के मध्य योग को लोकप्रिय बनाने तथा योग में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। 
        स्वस्थ्य नागरिक उत्पादन बढ़ाते हैं तथा इस प्रकार देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। योग, प्रकृति के साथ जुड़कर एक स्वस्थ समाज को बनाने और विकास की आकांक्षाओं को पूरा करने का एक साधन है। जीवन की गुणवत्ता के इस प्रयास को भारत सरकार के राष्ट्रीय मिशन "स्वस्थ्य भारत" से जोड़ा गया है।
           विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने "योग और ध्यान का विज्ञान व प्रौद्योगिकी" (सत्यम) पर आधारित एक अनुसंधान कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। योग और ध्यान एक दूसरे से संबंधित हैं जो तंत्रिका विज्ञान, चिकित्सा, मनोविज्ञान, इंजीनियरिंग, दर्शन आदि में एकीकृत लाभ प्राप्त करने के लिए योगदान कर सकते हैं। सेलेब्रेटिंग योगा एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां लोग योग पर जानकारियां और विचार साझा कर सकते हैं, जागरूकता बढ़ा सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन के लिए एक-दूसरे को प्रोत्साहित कर सकते हैं। 
         यह ऐप देशभर में सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और कार्यालय परिसरों के योग कार्यक्रमों के साथ-साथ व्यक्तिगत योगाभ्यासों को भी साझा करने का एक मंच उपलब्ध कराएगा। इस ऐप को गूगल मैप से जोड़ा जाएगा जहां उपयोगकर्ता साझा जानकारियों को देख सकता है। 
           इसके बाद इन जानकारियों को डीएसटी वेबसाइट पर भी देखा जा सकता है। सेलेब्रेटिंग योगा डीएसटी को गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है, ऐप को इंस्टाल करके खोलें, अपने योग कार्यक्रम को शेयर करके सबमिट करें, गूगल मैप पर अपनी फोटो और लोकेशन देखें, इस ऐप के द्वारा संग्रह की गई जानकारियों को बाद में आयुष मंत्रालय के साथ साझा किया जाएगा। 
         इससे आयुष मंत्रालय को अपने प्रयासों में सहायता मिलेगी।

Sunday, 25 June 2017

भारत की विविधता ही विशेषता, भारत की विविधता ही भारत की शक्ति

       आकाशवाणी के मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भगवान जगन्नाथ जी की रथ-यात्रा देश के कई भागों में बहुत ही श्रद्धा और उल्लासपूर्वक देशवासी मनाते हैं। 

     अब तो विश्व के भी कुछ भागों में भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा का उत्सव सम्पन्न होता है। और भगवान जगन्नाथ जी के साथ देश का ग़रीब जुड़ा हुआ है। जिन लोगों ने डॉ0 बाबा साहेब आम्बेडकर का अध्ययन किया होगा, उन्होंने देखा होगा कि भगवान जगन्नाथ जी का मन्दिर और उसकी परंपराओं की वो बड़ी तारीफ़ करते थे, क्योंकि उसमें सामाजिक न्याय, सामाजिक समरसता अंतर्निहित थे। भगवान जगन्नाथ ग़रीबों के देवता हैं। 
          प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की विविधता ये इसकी विशेषता भी है, भारत की विविधता ये भारत की शक्ति भी है। रमज़ान का पवित्र महीना सब दूर इबादत में पवित्र भाव के साथ मनाया। अब ईद का त्योहार है। ईद-उल-फ़ितर के इस अवसर पर मेरी तरफ़ से सबको ईद की बहुत-बहुत शुभकामनायेंप्र् रमज़ान महीना पुण्य दान का महीना है, ख़ुशियों को बाँटने का महीना है और जितनी खुशियाँ बाँटते हैं, उतनी खुशियाँ बढ़ती हैं। आइए, हम सब मिलकर के इन पवित्र उत्सवों से प्रेरणा लेकर के ख़ुशियों के ख़ज़ानों को बाँटते चलें, देश को आगे बढ़ाते चलें। 
          प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि रमज़ान के इस पवित्र महीने में उत्तर प्रदेश के बिजनौर के मुबारकपुर गाँव की एक बड़ी प्रेरक घटना मेरे सामने आयी। क़रीब साढ़े तीन हज़ार मुसलमान भाई-बहनों के परिवार वहाँ उस छोटे से गाँव में बसते हैं, एक प्रकार से ज़्यादा आबादी हमारे मुस्लिम परिवार के भाइयों-बहनों की है। इस रमज़ान के अन्दर गाँववालों ने मिलकर के शौचालय बनाने का निर्णय लिया। इस व्यक्तिगत शौचालय के अन्दर सरकार की तरफ़ से भी सहायता मिलती है और उस सहायता की राशि क़रीब 17 लाख रुपये उनको दी गई। जानकर सुखद आश्चर्य भी होगा, आनंद होगा। 
          रमज़ान के इस पवित्र महीने में सभी मुसलमान भाइयों-बहनों ने सरकार को ये 17 लाख वापस लौटा दिए। और ये कहा कि हम हमारा शौचालय, हमारे परिश्रम से, हमारे पैसों से बनाएँगे। ये 17 लाख रुपये आप गाँव की अन्य सुविधाओं के लिए खर्च कीजिए। मैं मुबारकपुर के सभी ग्रामजनों को रमज़ान के इस पवित्र अवसर को समाज की भलाई के अवसर में पलटने के लिए बधाई देता हूँ। उनकी एक-एक चीज़ भी बड़ी ही प्रेरक है। और सबसे बड़ी बात है, उन्होंने मुबारकपुर को खुले में शौच से मुक्त कर दिया।
           प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हम जानते हैं कि हमारे देश में तीन प्रदेश ऐसे हैं सिक्किम, हिमाचल और केरल, वो पहले ही खुले में शौच से मुक्त घोषित हो चुके हैं। इस सप्ताह उत्तराखण्ड और हरियाणा भी घोषित हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र के प्रेमियों ने बड़ी लड़ाई लड़ी और भारत जैसा देश, इतना बड़ा विशाल देश, जब मौका मिला तो भारत के जन-जन की रग-रग में लोकतंत्र कैसा व्याप्त है, चुनाव के माध्यम से उस ताक़त का प्रदर्शन कर दिया। 
           जन-जन की रग-रग में फैला हुआ ये लोकतंत्र का भाव ये हमारी अमर विरासत है। इस विरासत को हमें और सशक्त करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हर हिंदुस्तानी आज विश्व में सिर ऊँचा कर गौरव महसूस कर रहा है। 21 जून, 2017 - पूरा विश्व योगमय हो गया। पानी से पर्वत तक लोगों ने सवेरे-सवेरे सूरज की किरणों का स्वागत योग के माध्यम से किया। कौन हिंदुस्तानी होगा, जिसको इस बात का गर्व नहीं होगा।
           ऐसा नहीं है कि योग पहले होता नहीं था, लेकिन आज जब योग के धागे में बंध गए हैं, योग विश्व को जोड़ने का कारण बन गया है। दुनिया के क़रीब-क़रीब सभी देशों ने योग के इस अवसर को अपना अवसर बना दिया। इस बार फिर एक बार योग ने विश्व रिकॉर्ड का भी काम किया। गुजरात में अहमदाबाद में क़रीब-क़रीब 55 हज़ार लोगों ने एक साथ योग करके एक नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया। मुझे भी लखनऊ में योग के कार्यक्रम में शरीक़ होने का अवसर मिला। लेकिन पहली बार मुझे बारिश में योग करने का सद्भाग्य प्राप्त हुआ।

दुनिया का 7वां सबसे ऊंचा माउंट धौलागिरी, पर्वतारोहण

      पर्वतारोहियों की एक आईएएफ टीम सफलतापूर्वक 20 मई 2017 को माउंट धौलागिरी पहुंची। 

    टीम को सीएएस, एयर चीफ मार्शल बीएस धनोओ पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, वीएम, एडीसी ने फ्लैग्ड-इन किया। 12 अप्रैल 2017 को ग्रुप कैप्‍टन आर.सी.त्रिपाठी के नेतृत्व में रवाना हुई भारतीय वायु सेना के पर्वतारोही की यह टीम 26 अप्रैल, 2017 को धौलागिरी बेस कैम्‍प पहुंची थी। 
        बेस कैंप में खुद को स्थापित करने के बाद टीम ने अनुकूलन चरण के दौरान कैंप-2 तक चढ़ाई की।टीम के सदस्य आखिरकार 20 मई 2017 को शिखर पर पहुंचे और आईएएफ का ध्वज फहराया। 8167 मीटर (26795 फीट) की ऊंचाई वाले धौलागिरि को दुनिया का 7वां सबसे ऊंचा और पर्वतारोहियों के लिए चौथा सबसे मुश्किल पर्वत माना जाता है।  

Friday, 23 June 2017

116 शहरों में जीवन गुणवत्‍ता का मूल्‍यांकन, 16 शहरों को 500 करोड़ की प्रोत्‍साहन राशि

         शहरी विकास मंत्रालय ने एक और बड़ी पहल करते हुए 116 बड़े शहरों में जीवन गुणवत्‍ता को मापने के लिए ‘शहरी जीवन क्षमता सूचकांक’ का शुभारंभ किया। 

    इनमें स्‍मार्ट सिटी, राजधानियां और 10 लाख से ज्‍यादा की आबादी वाले शहर सम्मिलित हैं। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने शहरी रूपांतरण पर आधारित राष्‍ट्रीय कार्यशाला में सूचकांक जीवन गुणवत्‍ता का शुभारंभ किया। यह सूचकांक इन शहरों के लिए उनकी स्थिति को जानने और उसे बेहतर करने के लिए आवश्‍यक हस्‍तक्षेप की सामान्‍य न्‍यूनतम संदर्भ रूपरेखा है। 
          शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने पिछले तीन वर्षों के दौरान नवीन शहरी मिशन के अंतर्गत सोच समझकर शुरू किये गए आधारभूत अवसंरचना विकास के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए शहरों की ओर इंगित करते हुए कहा, अब समय आ गया है कि शहरों की जीवन गुणवत्‍ता का आकलन करके उसके अनुरूप उनको सूचीबद्ध किया जाए।
         देश में इस तरह के पहले सूचकांक को लागू करके शहरों के आधारभूत ढांचे को 79 व्‍यापक मानदंडों पर मूल्‍यांकित किया जाएगा। इन मानदंडों में सड़कों की उपलब्‍धता, शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख, गति‍शीलता, रोजगार के अवसर, आपातकालीन अनुक्रिया, शिकायत निवारण, प्रदूषण, खुले और हरे-भरे वातावरण की उपलब्‍धता, सांस्‍कृतिक और मनोरंजन के अवसरों इत्‍यादि शामिल हैं। 
          अगले महीने इस कार्य को करने वाली एजेंसी का चुनाव करने के बाद लगभग अगले 6 महीने में आंकडे संकलित करने का काम पूरा कर लिया जाएगा। शहरी विकास मंत्रालय ने वर्ष 2016-17 के दौरान शहरी सुधारों के कार्यांवयन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 16 राज्‍यों को 500 करोड़ रूपये की प्रोत्‍साहन राशि वितरित की। 
        इसका निर्धारण ई-गवर्नेंस, लेखा परीक्षण, कर राजस्‍व संचयन और कर संशोधन नीति, ऊर्जा और जल लेखा परीक्षा, संसाधन गतिशीलता के लिए राज्‍य स्‍तरीय वित्‍तीय मध्‍यस्‍थ स्‍थापित करना, ऋण मूल्‍यांकन जैसे सुधारों की प्रगति के आधार पर किया गया। आध्रप्रदेश इस सूची में 96.06 प्रतिशत अंको लेकर शीर्ष पर रहा। 
          योग्‍यता सूची के क्रम के आधार पर जिन अन्‍य राज्‍यों को प्रोत्‍साहन राशि प्राप्‍त हुई उनमें ओडिशा (95.38 प्रतिशत), झारखंड (91.98 प्रतिशत), छत्‍तीसगढ़ (91.37 प्रतिशत), मध्‍य प्रदेश (90.20 प्रतिशत), तेलंगाना (86.92 प्रतिशत), राजस्‍थान (84.62 प्रतिशत), पंजाब (77.02 प्रतिशत), केरल (75.73 प्रतिशत), गोवा (75.38), मिजोरम (75.00 प्रतिशत), गुजरात (73.80 प्रतिशत), चंडीगढ़ (72.73 प्रतिशत), उत्‍तर प्रदेश (70.67 प्रतिशत) और महाराष्‍ट्र (70.52 प्रतिशत) शामिल हैं। 
            इन राज्‍यों द्वारा प्राप्‍त किये गए अंकों के आधार पर प्रोत्‍साहन राशि प्रदान की गई। अधिक अंक हासिल करने वाले राज्‍यों को अंकों के अनुरूप अधिक प्रोत्‍साहन राशि दी गई। 
           शहरी विकास मंत्रालय के सचिव राजीव गाबा ने कहा कि भावी पी‍ढ़ी के सुधारों के लिए वर्तमान में आवंटित 900 करोड़ रूपये की सुधार प्रोत्‍साहन राशि को अगले 3 वित्‍तीय वर्षों में बढ़ाकर 1000 करोड़ रूपये किया जाएगा। इससे शहरी निकायों के प्रशासन और सेवाओं के वितरण और संसाधनों की गतिशीलता संतोषजनक अंतर आएगा।

देश के दो लाख से ज्‍यादा गांव खुले में शौच मुक्‍त घोषित

       स्‍वच्‍छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत उत्‍तराखंड और हरियाणा ने खुद को देश का चौथा और पांचवां खुले में शौच मुक्‍त राज्‍य घोषित किया है। 

     ये दोनों राज्‍य सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और केरल की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जो पहले ही खुले में शौच मुक्‍त राज्‍य घोषित हो चुके हैं। स्‍वच्‍छ भारत मिशन ग्रामीण शुरू होने के ढ़ाई महीने के भीतर ही राष्‍ट्रीय स्‍तर पर स्‍वच्‍छता का दायरा 42 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है। 
         उत्‍तराखंड में 13 जिले, 95 ब्‍लॉक, 7256 ग्राम पंचायतें और 15751 गांव हैं, जबकि हरियाणा में 21 जिले, 124 ब्‍लॉक और 6083 ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी ने क्रमश: देहरादून और चंडीगढ़ में खुद को खुले में शौच मुक्‍त घोषित किया। 
       इस अवसर पर पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने देहरादून में कहा कि 2 अक्‍टूबर, 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वच्‍छ भारत मिशन की शुरूआत की थी। आज यह वास्‍तव में जन आंदोलन बन चुका है। इस मील के पत्‍थर तक पहुंचने में उत्‍तराखंड और हरियाणा की जनता, सरकारी अधिकारियों और अन्‍य संस्‍थानों के प्रतिनिधियों ने योगदान दिया।
            इस उपलब्धि को हासिल करने के बारे में टिप्‍पणी करते हुए उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री त्रिवेन्‍द्र सिंह रावत ने कहा कि सहयोगपूर्ण सामुदायिक भागीदारी के कारण उत्‍तराखंड खुले में शौच मुक्‍त राज्‍य का दर्जा हासिल कर सका। प्रधानमंत्री के स्‍वच्‍छ भारत के आह्वान के परिणामस्‍वरूप यह विशेष उपलब्धि हासिल हुई। 
         उन्‍होंने उत्‍तराखंड को खुले में शौच मुक्‍त बनाने के लिए ग्राम प्रधानों की भूमिका की सराहना की। खुले में शौच मुक्‍त घोषित राज्‍य को बधाई देते हुए पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय के सचिव परमेश्‍वरन अय्यर ने कहा कि देशभर में खुले में शौच मुक्‍त की दिशा में जबरर्दस्‍त प्रगति के बाद स्‍वच्‍छ भारत ग्रामीण के लिए अगला कदम इस स्थिति को लम्‍बे समय तक बनाए रखने के साथ ही ग्रामीण भारत में ठोस और कचरा प्रबंधन की नियमित व्‍यवस्‍था करना होगी। पांच राज्‍यों के खुले में शौच मुक्‍त होने के साथ ही देशभर में दो लाख से ज्‍यादा गांवों और 147 जिलों को खुले में शौच मुक्‍त घोषित किया जा चुका है। 

सर्वे ऑफ इंडिया : भारत विश्‍व का सबसे बेहतर सर्वे किये जाने वाला देश

         संचार मंत्री मनोज सिन्‍हा ने कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया दुर्गम हिमालय, गर्म रेगिस्‍तान और जानवरों से परिपूर्ण जंगलों के सर्वे करने की चुनौतियों का सामना करने में सफल रहा है। 

   यह विभाग नई प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहा है और अब यह डिजिटल मैपिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के क्षेत्र में भी सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है। सिन्‍हा सर्वे ऑफ इंडिया की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर दो स्‍मारक डाक टिकटों तथा एक लघु चित्र जारी करते हुए अपने संबोधन में यह जानकारी दी।
          सिन्‍हा ने कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया को इसके सदस्‍य सहृदयता से ‘विभाग’ बुलाते है। उन्‍होंने यह भी कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया मजबूत नींव, शक्तिशाली परम्‍पराओं और गहरे जड़ों पर आधारित है, जो भारत को विश्‍व के सबसे बेहतर रूप से सर्वे किये जाने वाला देश बनाना चाहता है।
          इसके लिए संगठन नये तकनीकों का उपयोग करते हुए नई चुनौतियों का सामना करने में सफल रहा है। इसने अपने लक्ष्‍य ‘ए सेतु हिमाचलम्’ (अर्थात् सेतु से हिमालय तक, सम्‍पूर्ण भारत) के प्रति हमेशा प्रतिबद्धता जताई है। सिन्‍हा ने कहा कि डाक विभाग उन संस्‍थाओं के लिए स्‍मारक डाक टिकट जारी करता है, जिसे राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर ख्‍याति मिली हो या जिसने राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर योगदान दिया हो। 
            उन्‍होंने जानकारी देते हुए कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया का इतिहास 1767 ई. से प्रारम्‍भ होता है, जब मेजर जेम्‍स रीनेल को बंगाल का सर्वेअर जनरल नियुक्‍त किया गया था। यह भारत का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है और साथ ही यह विश्‍व के सबसे पुराने सर्वे विभागों में से एक है। 
           सर्वे ऑफ इंडिया को भारत के पहले डाक टिकट की छपाई करने तथा भारतीय संविधान की पहली प्रति छापने का विशिष्‍ट सम्‍मान प्राप्‍त है। मंत्री ने कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी व कर्मचारी अपने कार्यों के लिए दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचे है। यह दूसरों के लिए अनुकरणीय है। उन्‍हें घने जंगल, मरूस्‍थल और ऊंचे बर्फीले पहाड़ों तक जाना पड़ता है।
           वास्‍तव में ये लोग देश के अछूते व निर्जन क्षेत्रों तक पहुंचने वाले पहले व्‍यक्तियों में थे। सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मी निरंतर प्रयत्‍नशील होकर, विश्‍वास के साथ और बाधाओं को दूर करते हुए मानचित्र बनाने का कार्य करते है, जो विकास, प्रतिरक्षा और प्रशासन के लिए अत्‍यंत आवश्‍यक है।
          सर्वे ऑफ इंडिया भारत सरकार के सभी सर्वे से संबंधि‍त कार्यों जैसे भूगणित, फोटोग्रैमेट्री, मानचित्र बनाना और मानचित्र का पुन: प्रस्‍तुतिकरण आदि के लिए सलाहकार के रूप में कार्य करता है।

स्‍मार्ट सिटी की कुल संख्‍या 90 हुई, 30 नए शहर स्‍मार्ट सिटी घोषित

       केन्‍द्र सरकार ने स्‍मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए 30 और शहरों का चयन किया है। इन्‍हें मिलाकर 25 जून, 2015 को घोषित स्‍मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शहरों की कुल संख्‍या 90 हो गई है।

      नए शहरों के नामों की घोषणा यहां श‍हरी रूपांतरण के बारे में आयोजित एक राष्‍ट्रीय कार्यशाला में आवास और श‍हरी गरीबी उपशमन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने की। उन्‍होंने कहा कि स्‍मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत अभी 40 शहर और शामिल किए जाने थे, जिनके लिए 45 शहरों से प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए, लेकिन केवल 30 का चयन किया गया, क्‍योंकि इस मिशन की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने निर्देश दिया था कि नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुरूप सुविधाएं जुटाने के लिए यह सुनिश्चित किया जायेगा कि केवल व्‍यवहार्य और साध्‍य योजनाएं इसमें शामिल की जाएं।
            घोषित 30 शहरों में त्रिवेन्‍द्रम (केरल), नया रायपुर (छत्‍तीसगढ़), राजकित (गुजरात), अमरावती (आंध्रप्रदेश), पटना (बिहार), करीमनगर (तेलंगाना), मुजफ्फरपुर (बिहार), पुदुचेरी (पुदुचेरी), गांधी नगर (गुजरात), श्रीनगर (जम्‍मू-कश्‍मीर), सागर (मध्‍यप्रदेश), करनाल (हरियाणा), सतना (म.प्र), बेंगलूरू (कर्नाटक), शिमला (हिमाचल प्रदेश), देहरादून (उत्‍तराखंड), तिरुप्पुर (तमिलनाडू), पिम्‍परी चिंचवाड (महाराष्‍ट्र), बिलासपुर (छत्‍तीसगढ़), पासीघाट (अरुणाचल प्रदेश), जम्‍मूकश्‍मीर (जम्‍मू-कश्‍मीर), दाहोद (गुजरात), तिरुनेलवेलि (तमिलनाडू), थूटुक्‍कुडी (तमिलनाडू), तिरुचिरापल्‍ली (तमिलनाडू), झांसी (उत्‍तरप्रदेश), आइजौल (मिज़ोरम), इलाहाबाद (उत्‍तरप्रदेश), अलीगढ़ (उत्‍तरप्रदेश), गंगटोक (सिक्किम) है। 
          नायडू ने बताया कि घोषित 30 शहरों की स्‍मार्ट सिटी योजना के लिए रू. 46,879 करोड़ के व्‍यय का प्रस्‍ताव है। उन्‍होंने बताया कि शेष 10 स्‍लॉटों के लिए 20 शहरों के बीच प्रतिस्‍पर्धा है।
           नायडू ने बताया कि स्‍मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के कार्यक्रम के अंतर्गत शहरों का चयन सही वक्‍त पर किया जा रहा है और शेष शहर खाली स्‍लॉटों के लिए शीघ्र ही अपनी संशोधित स्‍मार्ट सिटी योजनाएं प्रस्‍तुत करेंगे।

Thursday, 22 June 2017

विश्‍व में तीसरा सबसे बड़ा वन्‍य जीव सामग्रियों का व्‍यापार

         केन्‍द्रीय पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि विश्‍व में तीसरा सबसे बड़ा व्‍यापार वन्‍य जीव सामग्रियों का है। 

       उन्‍होंने कहा कि जानवर के अंगों का अवैध व्‍यापार तथा अन्‍य वन्‍य जीव अपराध को गंभीरता से लिया जा रहा है और ऐसे अपराधियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। नोएडा में ‘वाइल्‍ड नेट’ ऑरेशन में वन्‍य जीव सामग्रियों की जब्‍ती की सराहना करते हुए डॉ. वर्धन ने इसे समय पर चलाया गया ऑपरेशन बताया। 
          उन्‍होंने बताया कि यह ऑपरेशन वेबसाइटों की निगरानी पर आधारित था। जब्‍त सामग्रियों में 25 हथा जोड़ी, 25 सियार सिंघी, 24 सी फैन, 1 ट्रोचर्स 6 घोंघा, 91 काली कौड़ी, 130 सफेद कौड़ी, 27 समुद्री घोघे शामिल हैं, ये सभी वन्‍य जीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्‍न अनुसूचियों के अंतर्गत संरक्षित हैं। 
         इसके अतिरिक्‍त 18 लाख से अधिक नकद राशि भी जब्‍त की गई। नोएडा में एक व्‍यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। उत्‍तर प्रदेश के नोएडा वन डिविजन के अंतर्गत दादरी रेंज द्वारा वन्‍य जीव (संरक्षण) कानून 1972 के सेक्‍शन 9,39,48 ए, 49बी तथा 50 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। 
        पर्यावरण मंत्री ने बताया कि मध्‍य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा में सफल ऑपरेशन के बाद नोएडा में ऑपरेशन चलाया गया। ऐसे ऑपरेशन संकेत देते हैं कि वन्‍य जीव अपराध से लडने के प्रति मोदी सरकार गंभीर है।