Wednesday, 14 February 2018

100 आदर्श स्मारकों में विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्‍ध

     नई दिल्ली। भारत की गौरवशाली संस्कृति और विरासत के उन्नयन के लिए अपने अथक प्रयासों को जारी रखते हुए भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक जीवंतता से रू-ब-रू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    आज नई दिल्‍ली में बजट 2018-19 के साथ-साथ संस्कृति मंत्रालय की उपलब्धियों पर भी मीडिया को संबोधित करते हुए संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने आज कहा कि एक राष्‍ट्र के रूप में भारत की विशेष अहमियत को ध्‍यान में रखते हुए देश के नागरिकों विशेष रूप से युवाओं को अपनी स्वदेशी संस्कृति, देश के बहु-आयामी स्वरूप, वैभव, समृद्धि और ऐतिहासिक महत्व से पुनः जोड़ने की अविलंब आवश्यकता है। 
   डॉ. महेश शर्मा ने यह जानकारी दी कि वर्ष 2018-19 में संस्कृति मंत्रालय के बजट आवंटन में लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2018-19 में संस्कृति मंत्रालय के बजट आवंटन में पिछले बजट (अर्थात् 2,738.47 करोड़ रुपये) की तुलना में 104 करोड़ रुपये (अर्थात् 2483 करोड़ रुपये) की वृद्धि हुई है। कुल वित्तीय आवंटन में से 974.56 करोड़ रुपये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आवंटित किए गए है जो वर्ष 2017-18 के आवंटन से 5.42 प्रतिशत अधिक है।
     संस्‍कृति मंत्री ने बताया कि विशेषकर युवाओं के बीच भारतीय संस्‍कृति को लोकप्रिय एवं बहुप्रिय बनाने के लिए संस्‍कृति मंत्रालय द्वारा कई कार्य किए गए हैं जैसे कि 100 आदर्श स्मारक, टिकट वाले सभी स्मारकों हेतु ई-टिकट सुविधा, भारत का सांस्कृतिक मानचित्रण, राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव, गंगा महोत्सव, 8वां थिएटर ओलंपियाड, विदेशों में फेस्टिवल ऑफ इंडिया का आयोजन, डिजिटलीकरण इत्‍यादि। 
    डॉ. महेश शर्मा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित प्रतिष्ठित स्मारकों में विश्व स्तरीय सुविधाओं के सृजन पर विशेष बल देने के लिए वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली के प्रति आभार प्रकट किया। आदर्श स्मारकों पर केंद्रीय वित्त मंत्री के बजट भाषण के उद्धरण नीचे दिए गए हैं। बजट घोषणाः भारत में पर्यटन स्थलों की प्रचुरता है। यह प्रस्ताव है कि दस प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों को आधारभूत सुविधाओं व कौशल विकास से युक्‍त व्यावहारिक दृष्टिकोण, प्रौद्योगिकी के विकास, निजी निवेश आकर्षित करके, ब्रांडिंग व विपणन का अनुसरण करते हुए आदर्श पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित किया जाए।
     इसके अतिरिक्त, आंगुतकों का अनुभव बढ़ाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के 100 आदर्श स्मारकों में पर्यटक सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा। डा. महेश शर्मा ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 10 स्मारकों के संरक्षण और उन्में विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य पहले ही शुरू कर दिया है।
      शेष स्मारकों (अजंता और एलोरा गुफाएं और गोलकोंडा किला) में सुविधाओं के डिजाइन की तैयारी (डिजाइन, प्राक्कलन आदि) पूरे ज़ोरों पर है जिसे मार्च, 2018 तक पूरा किया जाएगा। ताज महलः भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सुविधाओं से संबंधित सभी प्रस्तावों को मंजूर कर दिया है। मुख्य चालू कार्यों में यह शामिल है, उन्नत टिकटिंग और लाइन प्रबंधन प्रणाली और ताज परिसर के पूर्वी और पश्चिमी प्रवेश द्वारों के साथ घुमने वाले दरवाजे लगाना, ऊंचे मू्ल्य के टिकट धारकों के लिए विशेष सुविधाएं। आगंतुकों के प्रवेश के लिए स्लॅाट बनाना (3 घंटा प्रत्येक), दक्षिण गेट को प्रवेश के लिए बंद करना, बाहर निकलने की अनुमति होगी। टिकट शुल्क रु. 40 से बढाकर रु. 50 करना, नीरी रिपोर्ट की सिफारिशों के बाद मुख्य समाधियों में प्रवेश के लिए रु. 200 की विशेष टिकट शीघ्र ही शुरु की जाएगी।
    इसका तात्पर्य पैसा कमाना नहीं है अपितु निर्मित भवनों की सुरक्षा और बेहतर जन प्रबंधन सुनिश्चित करना है। ताज कॅारिडोर क्षेत्र में ताज महल और आगरा किले के बीच हरियाली को विकसित करना, महताब बाग से रात्रि दर्शन; और लपका संस्कृति से निपटने के लिए पर्यटन मंत्रालय, एडीए और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय।
      लाल किलाः स्मारकों के संरक्षण (26 कार्य) से संबंधित तकरीबन 48 चालू कार्य, 6 संग्रहालयों और प्रदर्शनियों को शामिल करने के लिए ब्रिटिश काल के बैरक भवनों का नवीकरण, बगीचों और भूदृश्यों (7 कार्य) का विकास और छाता बाजार की सीलिंग से पेंटिंग्स की वापसी सहित स्मारकों की वैज्ञानिक सफाई (9 कार्य)। प्रमुख कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं, मुगल कालीन भवनों का संरक्षण, भूदृश्यों का विकास, सीपीडब्ल्यूडी को किले के अंदर पूरा इलेक्ट्रीकल सोलूसन को विकसित करने तथा लाहोरी गेट पर प्रोजेक्शन मैपिंग का कार्य सौंपा गया है।
    लाल किले में चार प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। 1857-भारत के स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई, विश्वयुद्ध-क्ष् में भारत का योगदान, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आईएनए, और सरदार बल्लभ भाई पटेल पर प्रदर्शनी, पुराना किलाः झील के सामने सुविधाएं विकसित करने तथा उनमें सुधार करने के लिए एनबीसीसी का प्रस्ताव। कार्य शीघ्र ही शुरू होना है। भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण ने स्‍मारक के अंदर  संरक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया है। 
    हुमायुं का मकबराः एककेटीसी के सहयोग से सुविधाएं मुहैया कराने का कार्य जिसमें एक व्याख्या केंद्र, जलपान गृह, पार्किंग, स्मारिका बिक्री पटल आदि शामिल हैं, पूरे जोरों पर है। खुजराहो मंदिर समूहः राष्ट्रीय संस्कृति निधि योजना के तहत इण्डियन ऑयल फाउण्डेशन के सहयोग से प्रदान की जाने वाले सुविधाओं से संबंधित कार्य।
     इस प्रस्ताव में निम्नलिखित शामिल हैं, सूर्य मंदिर, कोणार्क, ओडिशा: राष्‍ट्रीय संस्‍कृति निधि योजना के तहत इण्‍डियन ऑयल फाउण्‍डेशन के सहायोग से प्रदान की जाने वाले सुविधाओं से संबंधित कार्य। इस प्रस्‍ताव में निम्‍नलिखित शामिल हैं। आगरा किला, हम्‍पी स्‍मारक समूह, तटीय मंदिर महाबलिपुरम और गोलकोंडा किला: प्रथम चरण का कार्य संबंधित अधीक्षण पुरातत्‍वविदों द्वारा पहले ही शुरू कर दिया गया है।
   प्रथम चरण के कार्य में स्‍मारक के अन्‍दर संकेतक, कूड़ेदान रैम्‍प और रास्‍ते, पेयजल सुविधाएं और सफाई शामिल हैं। डा. महेश शर्मा ने प्रेस को 100 आदर्श स्मारकों में विश्व स्तरीय सुविधाएं जैसे शौचालय खण्‍ड, संकेतक, पेय जल सुविधाएं, रास्‍ते और रैंप (दिव्‍यांगों के लिए), बैठने के लिए बेंच, कूड़ेदान, बेहतर पार्किंग सुविधाएं, टिकिट काउंटर और बेहतर पंक्ति प्रबंधन, भूदृश्‍य निर्माण आदि के बारे में भी बताया।
    इसके अलावा, उन्होंने यह भी सूचित किया कि भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण ने 27 आदर्श स्‍मारकों में (प्रथम चरण में) सुविधाएं (पेयजल, बेंच, कूड़ेदान, रैम्‍प और रास्‍ते तथा साफ-सफाई) प्रदान करने का कार्य शुरू कर दिया है। शेष 73 आदर्श स्‍मारकों के लिए प्रस्‍तावों को अनुमोदन प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि सभी 100 स्‍मारकों में डिजाइनिंग और सुविधाओं (शौचालय, जलपान गृह, स्‍मारिका बिक्री पटल, भोजनालय, प्रदीप्‍तीकरण और पार्किंग) के निष्‍पादन के कार्य वापकोस, एन पी सी सी और एन बी सी सी को सौंपने का प्रस्‍ताव है।
  वापकोस और टीसीआईएल ने 218 संरक्षित स्‍मारकों में निर्माण/शौचालय खंडो का नवीकरण शुरू कर दिया है। स्‍मारक परिसरों में किसी प्रकार के अतिक्रमण और अवैध कब्‍जे को विफल करने के लिए अहाता दीवार द्वारा स्‍मारकों और पुरातत्‍वीय स्‍थलों की सुरक्षा करना। करीब 200 स्‍मारकों में अहाता दीवार का कार्य वापकोस और टीसीआईएल को दिया गया है।
   संस्‍कृति मंत्री ने सांस्‍कृतिक मानचित्रण की योजना के बारे में भी विस्‍तार से बताया जिसे 490 करोड़ रुपये के परिव्‍यय के साथ अगले तीन वर्षों के दौरान 622 जिलों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके तहत देश के हर कोने में मौजूद सभी कलाकारों को केन्‍द्रीय पोर्टल पर पंजीकृत कराया जा रहा है और एक प्रतिस्‍पर्धी प्रक्रिया के जरिए इन कलाकारों को विभिन्‍न श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा।
    इससे न केवल इन कलाकारों को सहायता प्रदान करने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे विभिन्‍न कलाओं और शिल्प को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी। संस्‍कृति मंत्री ने बताया कि इस तरह के लगभग 1 करोड़ कलाकार पहले ही इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। संस्‍कृति मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि तीन नए संग्रहालय खोले जाएंगे।
   इसमें से एक संग्रहालय कुंभ मेले की थीम पर इलाहाबाद में खोला जाएगा। इसी तरह अयोध्या में भगवान राम पर एक आभासी (वर्चुअल) संग्रहालय खोला जाएगा। इसी तरह स्थानीय संस्कृति को पर‍लक्षित करने वाला एक संग्रहालय गोरखपुर में खोला जाएगा।

वस्‍त्र क्षेत्र के लिए 6000 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्‍साहन की घोषणा

    नई दिल्ली। केन्‍द्रीय वस्‍त्र मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन ईरानी ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु व मझौले उद्यमों के पुनर्वर्गीकरण तथा 250 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर वाली कम्‍पनियों को कर में 5 प्रतिशत की छूट से विनिर्माण क्षेत्र को सहायता मिलेगी व कपड़ा क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

  आज मीडिया को जानकारी देते हुए उन्‍होंने कहा कि रेशम और कृत्रिम धागों पर सीमा शुल्‍क में वृद्धि से बाजार में सस्‍ते चीन निर्मित परिधान उत्‍पाद की बाढ़ को कम करने में मदद मिलेगी। इससे पावरलूम क्षेत्र के घरेलू विनिर्माताओं को लाभ मिलेगा। 
  वस्‍त्र क्षेत्र के लिए 2016 में 6000 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्‍साहन की घोषणा की गई थी। 1800 करोड़ रुपया पहले ही जारी किया जा चुका है। वर्तमान वित्‍तवर्ष में 300 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। 
     मंत्री ने कहा कि वस्‍त्र उद्योग में कौशल विकास के लिए हुए आवंटन में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हस्‍त निर्मित और मशीन द्वारा निर्मित परिधानों के सदंर्भ में जीएसटी में किए गए सुधार से व्‍यापार करने में आसानी हुई है। धागों पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई है। परिधान क्षेत्र के लिए व्‍यापारिक योजना का समर्थन 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है।
     श्रीमती ईरानी ने परिधान क्षेत्र में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर का श्रेय सब्सिडी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्‍वयन को दिया। मुद्रा ऋण योजना के तहत 28000 बुनकरों को 138 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई। परिधान क्षेत्र में काम करने वाले 1.8 लाख लोगों ने औपचारिक रूप से कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) में खाता खोला है।
     मंत्री ने कहा कि हस्‍तकला शिविरों का दूसरा दौर देश के विभिन्‍न भागों में आयोजित किया जाएगा। इस महीने 19 से 24 तारीख तक आयोजित होने वाले इन शिविरों का विशेष फोकस पूर्वोत्‍तर क्षेत्र होगा। उन्‍होंने बुनकरों को प्रोत्‍साहन देने के उद्देश्‍य से संसद सदस्‍यों को इन शिविरों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह करते हुए पत्र लिखा है।
     वस्‍त्र मंत्री तथा मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी इन शिविरों में भाग लेंगे। पहले दौर में पिछले वर्ष 7 से 17 अक्‍तूबर तक देश के 247 जिलों में 394 शिविर आयोजित किए गए थे।

भारत दूध का प्रमुख उत्‍पादक

   मोतिहारी। केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधामोहन सिंह ने आज मोतिहारी में पूर्वी चंपारण जिले के प्रथम डेयरी संयंत्र की आधारशिला रखी। श्री सिंह ने इस अवसर पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है कि वह अब अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी उद्यमियों को बड़ी संख्‍या में अवसर प्रदान करने लगा है।

   कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा की गई विभिन्‍न पहलों से ही डेयरी क्षेत्र में उल्‍लेखनीय विकास संभव हो पाया है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने दुधारू पशुओं की उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित की हैं।
    श्री सिंह ने कहा कि भारत दूध का प्रमुख उत्‍पादक है और वह पिछले दो दशकों से वैश्विक स्‍तर पर नंबर वन पायदान पर विराजमान है। दूध उत्‍पादन साठ के दशक के लगभग 17-22 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2016-17 में 165.4 मिलियन टन के अत्‍यंत उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया है। वर्ष 2013-14 के मुकाबले वर्ष 2016-17 में दूध उत्‍पादन में 20.12 प्रतिशत की उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। 
     श्री सिंह ने कहा आगे कहा कि 2016-17 के दौरान प्रति व्‍यक्ति दुग्‍ध उपलब्‍धता में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2013-14 में प्रति व्‍यक्ति दुग्‍ध उपलब्‍धता 307 ग्राम थी, जो 2016-17 में बढ़कर 355 ग्राम हो गई है। इसी तरह 2014-17 के दौरान डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों की आय में 2011-14 की तुलना में 23.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले 3 वर्षों के दौरान भारत में दुग्‍ध उत्‍पादन में 6.3 प्रतिशत प्रति वर्ष की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वैश्विक वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत से अधिक है। 
     कृषि मंत्री ने कहा कि विशेषकर भूमिहीन और सीमांत किसानों के लिए डेयरी उद्योग आजीविका के साधन और खाद्य सुरक्षा के रूप में विकसित हुआ है। लगभग 8 करोड़ किसान डेयरी व्‍यापार से जुड़े हुए हैं और ये कुल दुधारू पशुओं के 80 प्रतिशत का पालन-पोषण करते हैं। पशुपालन, डेयरी और मत्‍स्‍य पालन विभाग ने कई योजनाएं प्रारंभ की हैं, जिनका उद्देश्‍य डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों की आय को दोगुना करना है। भारत के 75वें स्‍वतंत्रता दिवस (2022) के अवसर पर किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए इन योजनाओं को लागू किया गया है। डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों की आय दोगुनी करने के लिए दो तरीके अपनाये जा सकते हैं- पहला, उत्‍पादकता बढ़ाकर दुग्‍ध उत्‍पादन में वृद्धि और दूसरा, दूध की प्रति किलोग्राम कीमत बढ़ाकर। 
    श्री सिंह ने कहा कि दुधारू पशुओं की देसी नस्‍लों के संरक्षण और विकास के लिए दिसंबर 2014 में पहली बार देश में राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन शुरू किया गया। इस योजना के तहत 28 राज्‍यों से प्राप्‍त प्रस्‍तावों के लिए 1350 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें से 503 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि गोकुल ग्राम की स्‍थापना राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन का एक प्रमुख हिस्‍सा है। 
     उन्‍होंने कहा कि गोकुल ग्राम दुधारू पशुओं की देसी नस्‍लों के विकास में मुख्‍य भूमिका निभाएंगे। इन केन्‍द्रों में विकसित किए गए देसी नस्‍ल के पशु किसानों को पशु प्रजनन के लिए उपलब्‍ध कराए जाएंगे। देश में इस समय 12 अलग-अलग राज्‍यों में 18 गोकुल ग्राम स्‍थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा सरकार ने आंध्र प्रदेश में नेल्‍लौर के चिंतालादेवी में तथा मध्‍य प्रदेश में होशंगाबाद के इटासी में देसी नस्‍ल के दुधारू पशुओं के संरक्षण और विकास के लिए दो प्रजनन केन्‍द्र बना रही है।
    इसमें से चिंतालादेवी केन्‍द्र का काम पूरा हो चुका है। इन केन्‍द्रों को राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केन्‍द्र का नाम दिया गया है। नई योजना के तहत गायों की 41 और भैंसो की 13 प्रजातियों को संरक्षित किया जाएगा। केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि दुधारू पशुओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए नवम्‍बर 2016 में 825 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन के तहत राष्‍ट्रीय पशु उत्‍पादकता मिशन की शुरूआत की गई।
      इसका उद्देश्‍य देश में दुग्‍ध उत्‍पादन में बढ़ोतरी के साथ इस व्‍यवसाय को ज्‍यादा लाभकारी बनाना है। इस बीच, पशु संजीवन के तहत देश में विशिष्‍ट पहचान पत्र के जरिए 9 करोड़ दुधारू पशुओं की पहचान की जा रही है। सरकार ने इस योजना के लिए धन आवंटित कर दिया है। इस योजना के तहत सभी पशुओं को नकुल स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड जारी करने की भी व्‍यवस्‍था की गई है।