Friday, 24 February 2017

भारत को वैश्‍विक ताकत बनाना लक्ष्‍य

             केंद्रीय युवा मामले और खेल राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने यहां नेहरू युवा केंद्र संगठन के अंतर्गत 9वें यूथ एक्‍सचेंज प्रोग्राम का उद्घाटन किया।

            इस एक्‍सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत झारखंड और छत्‍तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों के युवा राजधानी के विभिन्‍न क्षेत्रों का दौरा करेंगे। यहां की संस्‍कृति और जीवनशैली के बारे में जानेंगे। इस अवसर पर गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के विजन के तहत सरकार की बहुत सी ऐसी योजनाएं हैं, जिनका लक्ष्‍य युवाओं को सशक्‍त बनाना। भारत को एक वैश्‍विक ताकत बनाना है। इस अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए उन्‍होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे किसी एक अच्‍छे कार्य का दायित्‍व ग्रहण करें, जो न केवल समाज की सहायता करें, बल्‍कि उनके भीतर भी नेतृत्‍व के गुणों का विकास करें। 

             उन्‍होंने कहा, ‘’स्‍वच्‍छ भारत अभियान से लेकर स्‍टार्ट-अप इंडिया तक, सरकार की अनेक ऐसी पहलें हैं, जिनसे युवाओं को जुड़ना चाहिए और ‘एक भारत श्रेष्‍ठ भारत’ के निर्माण में सहायता प्रदान करनी चाहिए।‘’ गोयल के साथ बातचीत के दौरान प्रतिभागी युवाओं ने अपने करियर की प्रगति की राह में बाधा उत्‍पन्‍न कर रहे नक्‍सली आतंक और उचित शिक्षण संस्‍थानों के अभाव जैसे मामलों से जुड़ी अपनी चिंताओं के बारे में उन्‍हें अवगत कराया।

              गोयल ने भरोसा दिलाया कि उनका मंत्रालय खेल, शिक्षा या कौशल विकास जैसे विभिन्‍न क्षेत्रों में उनके सपनों को साकार करने में उनकी सहायता करेगा। नेहरू युवा केंद्र संगठन पहले भी 8 राज्‍यों में सफल एक्‍सचेंज प्रोग्राम का आयोजन कर चुका है। लगभग 250 विद्यार्थियों वाला मौजूदा बैंच राजधानी की अपनी इस यात्रा के दौरान राष्‍ट्रपति से भी मुलाकात करेगा।

खरीफ की फसल : रिकॉर्ड 297 मिलियन टन

            राजग सरकार ने लोगों को एक व्‍यवहार्य कैरियर विकल्‍प के रूप में कृषि को अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित करने के वास्‍ते स्‍थायी ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए योजनाएं शुरू की है।

   सरकार की योजना देश के सबसे पिछड़े जिलों में बदलाव कर इसे भारत में परिवर्तन का मॉडल बनाना है। इसमें कच्‍छ में गुजरात प्रयोग उपयोगी साबित हो रहा है। इस समय ध्‍यान देश के 100 सबसे पिछडे जिलों पर है, जिनमें से अधिकतर तीन राज्‍यों - बिहार, उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश में है। इन तीन राज्‍यों में ही पूरे देश के 70 सबसे अधिक पिछड़े जिले हैं। पूर्ववर्ती सरकारों ने कई योजनाएं विशेष रूप से सबसे पिछड़े जिलों के लिए शुरू की। वे शायद इसलिए असफल रही, क्‍योंकि उनमें अधिक ध्‍यान गरीबी उन्‍मूलन और अस्‍थायी रोजगार सृजन पर दिया गया था।

             उन्‍होंने ग्रामीण बुनियादी ढांचा तैयार नहीं किया था और सड़क‍ सिंचाई तथा संपर्क के अभाव में कृषि क्षेत्रों को भी लाभदायक नहीं बना सके। प्रधानमंत्री बनने से पहले मुख्‍यमंत्री के तौर पर नरेन्‍द्र मोदी ने भूकंप से तबाह हुए और निराश कच्‍छ के रन को आशावादी भूमि में परिवर्तित कर दिया। नरेन्‍द्र मोदी ने 2003 से 2014 तक गुजरात में दहाई के आंकड़े की कृषि वृद्धि का युग बनाने का नाबाद रिकॉर्ड कायम किया है, जबकि उस समय राष्‍ट्रीय औसत दो प्रतिशत से कम पर था। मोदी ने अगले चार वर्षों में भारतीय किसानों की आय को दोगुना करने की भी प्रतिज्ञा ली है। 

               गुजरात के कृषि क्षेत्र की इस सफल दास्‍तां से प्रेरित होकर मध्‍य प्रदेश छत्‍तीसगढ़ और महाराष्‍ट्र जैसे कई अन्‍य राज्‍यों ने एक ऐसे राज्‍य की तकनीकों को अपनाया है, जिसे कभी भी कृषि प्रधान राज्‍य नहीं माना जाता था। इसका सबसे बड़ा कारण राज्‍य का विशाल सौराष्‍ट्र क्षेत्र है जहां प्रतिवर्ष सूखा पड़ने से लोगों और जानवरों का पलायन होता था। कृषि क्षेत्र की वृद्धि की कार्यनीति बेहतर सिंचाई, खेती के आधुनिक उपकरण, किफायती कृषि ऋण की आसानी से उपलब्‍धता 24 घंटे बिजली और कृषि उत्‍पादों का तकनीक अनुकूल विपणन पर तैयार की गई थी। इन प्रत्‍येक पहलों में बड़ी संख्‍या में नवीन योजनाएं बनाई। उनका कार्यान्‍वयन किया गया था। 

            केंद्र की राजग सरकार उनके अनुभव को पूरे देश में दोहराने की कोशिश कर रही है। कृषि भूमि की स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति का पता लगाने के लिए मृदा जांच कृषि क्रांति की दिशा में एक प्रमुख कदम है, जबकि नीम लेपित यूरिया दूसरा कदम है। इस दिशा में अन्‍य कदम बांध निर्माण, जलाशयों और अन्‍य जल संरक्षण विधियों के जरिए जल संरक्षण, भू-जल स्‍तर बढ़ाना, टपक सिंचाई को बढ़ावा देकर पानी की बर्बादी कम करना, मृदा की उर्वरकता का अध्‍ययन कर फसलों के तरीकों में बदलाव करना, पानी की उपलब्‍धता और बाजार की स्थिति है।

           विद्युतीकरण, पंचायतों में कंप्‍यूटरीकरण, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के जरिए सड़क निर्माण के माध्‍यम से प्रौद्योगिकी उपलब्‍ध कराने से जमीनी स्‍तर पर विकास सुनिश्चित होगा। सड़क निर्माण से प्रत्‍येक गांव के लिए बाजार और इंटरनेट संपर्क उपलब्‍ध कराने में भी मदद मिलेगी। पहली बार देश के इतनी अधिक संख्‍या में गरीब बैंक खाताधारक बने है। जनधन योजना के अंतर्गत लगभग 35 करोड़ नए खाते खोले गए है। यह वित्‍तीय समावेशन गतिशील कृषि अर्थव्‍यवस्‍था का केंद्र है। वित्‍तीय वर्ष में सरकार ने सीधे नकद हस्‍तांतरण के जरिए 50,000 करोड़ रूपये की बचत की है। 50 मिलियन गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए नि:शुल्‍क रसोई गैस प्रदान करने से लाखों परिवारों के जीवन में बदलाव आ रहा है। 

             सबसे अधिक वार्षिक आवंटन और कृषि श्रमिकों की उपलब्‍धता सुनिश्चित कर ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को दोबारा तैयार किया गया है। इनसे श्रमिकों द्वारा अपनी पारंपरिक कृषि श्रम को छोड़कर शहरों की ओर पलायन भी कम होगा। कृषि क्षेत्र लाभदायक कैसे बन सकता है? इस दशक के अंत तक कृ‍षकों की आय दोगुनी कैसे हो सकती है? क्‍या इससे ग्रामीण ऋणग्रस्‍तता और किसानों की आत्‍म हत्‍या को  रोकना सुनिश्चित किया जा सकता है?  हां ये सब संभव हो सकता है अगर प्रधानमंत्री ने जो गुजरात में हासिल किया है उसे राष्‍ट्रीय स्‍तर पर दोहराने में सक्षम होते है तो। मोदी ने आम आदमी को अपने आर्थिक गाथा में महत्‍वपूर्ण स्‍थान पर रखा है। उन्‍होंने भारतीय किसानों के प्रति काफी विश्‍वास व्‍यक्‍त किया है। 

            अपनी वृद्धि की परिकल्‍पना में कृषि को केंद्रीय मंच पर लाये हैं। कृषि क्षेत्र में परिवर्तन के लिए आवंटन की नई योजनाओं से इस आकर्षक कहानी का पता लगता है। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए अगले वर्ष 1.87 लाख करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है। इसके लिए प्रमुख क्षेत्र मनरेगा तथा सरल कृषि ऋण और बेहतर सिंचाई की उपलब्‍धता है। सिंचाई कोष और डेयरी कोष में काफी वृद्धि की गई है। कृषि ऋण योजना के साथ फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल बीमा के लिए दस लाख करोड़ दिए गए है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। 

          अधिक ऋण से कृषि निवेश को बढ़ावा मिलेगा। खाद्य प्रसंस्‍करण औद्योगिकीकरण के लिए प्रेरणा मिलेगी। इससे किसानों को स्‍थायीत्‍व और बेहतर लाभ प्राप्‍त होगा। इससे ग्रामीण भारत  में रोजगार के अवसर भी बढ़ेगे। इस मौसम में रबी की आठ प्रतिशत से अधिक फसल लगाई गई है। खबरों में कहा गया है कि बेहतर वर्षा के कारण इस बार खरीफ की फसल रिकॉर्ड 297 मिलियन टन हो सकती है।

            बेहतर सड़क निर्माण, 2000 किलेमीटर की तटीय संपर्क सड़क और भारत नेट के अंतर्गत 130,000 पंचायतों को उच्‍च गति के ब्राडबैंड प्राप्‍त होने से निश्चित रूप से कृषि उत्‍पादों की मार्केटिंग में सुधार और बेहतर कीमतें मिलेंगी, जिसके कारण यह एक लाभदायक कैरियर विकल्‍प हो सकता है। इन नीति संचालित, लक्ष्‍य आधारित उपायों के कार्यान्‍वयन से कृषि उत्‍पादन में काफी उछाल आयेगा और सभी के लिए भोजन तथा देश से गरीबी पूर्ण रूप से समाप्‍त करने का सपना साकार होगा।

उद्यमिता शिक्षा को प्रोत्‍साहन: 15 लाख युवाओं को उद्यमिता

           कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा वधवानी ऑपरेटिंग फाउंडेशन (डब्‍ल्‍यूओएफ) ने प्रधानमंत्री युवा योजना के साथ देश में उद्यमिता और कौशल विकास पहलों को संयुक्‍त रूप से विकसित और कार्यान्‍वित करने के लिए प्रारंभिक समझ को पूर्ण करने के लिए इस दिशा में प्रथम संयुक्‍त प्रयास के रूप में यहां दो समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए। 

            इन समझौतों पर मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव सुश्री ज्‍योत्‍सना सित्लिंग और डब्‍ल्‍यूओएफ के कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय केला ने हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री युवा योजना का शुभारंभ मंत्रालय द्वारा 2016 में देश भर के लगभग 15 लाख विद्यार्थियों को 3050 परियोजना संस्‍थाओं के माध्‍यम से ऑनलाइन उद्यमिता शिक्षा प्रदान करने के लक्ष्‍य के साथ किया गया था। इन संस्‍थाओं में उच्‍च शिक्षण संस्‍थान, स्‍कूल, आईआईटी और उद्यमिता विकास केंद्र, सरकारी और निजी दोनों, शामिल हैं। ऑनलाइन उद्यमिता मॉड्यूल्‍स को क्‍लासरूम आधारित प्रायोगिक शिक्षण कार्यकलापों और प्रेक्‍टिकम्‍स के साथ विधिवत सहायता दी जाएगी, जिन्‍हें शैक्षिक संस्‍थाओं के विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा सुगम बनाया जाएगा। मंत्रालय योजना के अंतर्गत विविध गतिविधियों को संचालित करने के लिए इन संस्‍थाओं को वित्‍तीय सहायता भी उपलब्‍ध कराएगी।

               पांच वर्षों की इस योजना के दौरान 23,000 से ज्‍यादा उद्यम स्‍थापित किए जाने की संभावना है। इसके परिणामस्‍वरूप देश में 2.30 लाख से ज्‍यादा रोजगार के प्रत्‍यक्ष और परोक्ष अवसरों का सृजन हो सकता है। इस योजना में उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में इच्‍छुक छात्रों को विशेष रूप से विकसित किए गए सामाजिक उद्यमिता मॉड्यूल प्रदान किए जाने की भी परिकल्‍पना की गई है। 

             ज्ञान साझेदार (नॉलेज पार्टनर) के रूप में डब्‍ल्‍यूओएफ योजना के अंतर्गत नि:शुल्‍क सॉफ्टवेयर, विषय-वस्‍तु तथा शिक्षक और फील्‍ड स्‍टाफ के प्रशिक्षण और कार्यक्रम परामर्श सेवाओं का योगदान दे रहा है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने इस अवसर पर अपने संबोंधन के दौरान विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि यह योजना एक उद्यमी भारत का निर्माण करने के वर्तमान केंद्र सरकार के विजन को साकार करने में सफल होगी। उन्‍होंने कहा, ‘निश्‍चित रूप से यह एक महान पहल है। 

            अब हम कौशल और उद्यमिता के लिए स्कूलों को साथ जोड़ रहे हैं। हम शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास उद्यमिता पाठ्यक्रम हैं। यह पहल इन्‍हें और ज्‍यादा उपयोगी बनाएगी।’

कुवैत के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश

            राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कुवैत के राष्ट्रीय दिवस (25 फरवरी, 2017) की पूर्व संध्या पर वहां के अमीर और जनता को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। 

           कुवैत के अमीर महामहिम शेख सबाह अल-अहमद अल-जबेर अल-सबाह को भेजे अपने संदेश में राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत सरकार, यहां की जनता और अपनी तरफ से, मुझे आपको और कुवैत की जनता को आपके देश के राष्‍ट्रीय दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए अपार हर्ष हो रहा है।  हमारे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्‍कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान और जनता के बीच आपसी संबंधों पर आधारित ऐतिहासिक, करीबी और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं।

             मुझे विश्‍वास है कि आने वाले वर्षों में विभिन्‍न क्षेत्रों में हमारी परस्‍पर लाभकारी सहभागिता और ज्‍यादा विविधतापूर्ण और मजबूत होगी।  महामहिम इस अवसर पर मैं आपकी सेहत और कल्‍याण की कामना के साथ ही साथ, कुवैत की मित्रवत् जनता की प्रगति और खुशहाली के लिए शुभकामनाएं देता हूं।‘’

आईएनएस बेतवा का परिचालन अप्रैल 2018 से  

           नौसेना गोदी, मुंबई और मैसर्स रिसोल्‍व मरीन द्वारा किए गए प्रयासों से पी-16ए वर्ग के पोत- आईएनएस बेतवा को दोबारा परिचालन के लिए खड़ा किया गया है। 

          रिसोल्‍व मरीन को इसके परिचालन का विशेष अनुबंध दिया गया था। 5 दिसंबर, 2016 से इस पोत की मरम्‍मत की जा रही है। युद्ध स्‍तर पर पोत को बचाने का काम किया जा रहा था। 29 दिसंबर, 2016 को पोत की शुरूआती स्थि‍रता हासिल कर ली गई थी। अप्रैल 2016 से पोत पर कई सुधार और आधुनिक उपकरण लगाए जा रहे थे।

 भारतीय नौसेना को विश्‍वास है कि अपने विशेषज्ञों और सतत प्रयासों से पोत को निर्धारित तिथि यानी अप्रैल 2018 तक दोबारा पूरी तरह से परिचालन के लिए तैयार हो जाएगा।

भारत सदैव ज्ञान व खोज का भंडार रहा

                 राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नई दिल्‍ली में ‘भारत बोध’ पर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। इसका आयोजन इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्‍त विश्‍वविद्यालय (इग्‍नू) और भारतीय शिक्षण मंडल की ओर से किया गया है।

             इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने अपने उद्गार व्‍यक्‍त करते हुए इस सम्‍मेलन का आयोजन करने और ‘भारत बोध’ के विभिन्‍न पहलुओं को स्‍पष्‍ट करने के लिए बुद्धिजीवियों, शिक्षाविद्, और शोधकर्ताओं को एक साथ लाने के लिए इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्‍त विश्‍वविद्यालय का भारतीय शिक्षण मंडल की सराहना की। उन्‍होंने इस बात पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि तीन दिन के इस महत्‍वपूर्ण सम्‍मेलन में ये दोनों सहयोगी अपनी-अपनी विशेषज्ञता और विद्वता को संजो कर लाए हैं। 

               राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत सदैव ज्ञान का खोज के भंडार के रूप जाना जाता रहा है। ऐसा ज्ञान जो मुक्ति प्रदान करता है। खोज जो मानवता और सह-‍अस्तित्‍व के गहन चिंतन की थाह लेती है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि सम्‍मेलन में होने वाला विचार विमर्श हमारे देश के बारे में हमारी धारणाओं को समृद्ध बनाएगा। 

           उन्‍होंने कहा कि भारत का विचार हमारी समृद्ध बौद्धिक परम्‍पराओं के शाश्‍वत विवेक से प्रवाहित होता है। हमारे मूल नागरिकता के मूल्‍य- जो आज भी उतने ही प्रासांगिक हैं। मातृभूमि के लिए प्रेम, कर्तव्‍य निवर्हन, सभी के लिए करुणा, बहुलवाद के लिए सहनशीलता, महिलाओं के लिए सम्‍मान, आचरण में आत्‍मसंयम, कार्य में उत्‍तरदायित्‍व और अनुशासन की बात कहते हैं। भारतीय विश्‍व दर्शन का निर्माण करते हैं।

एस्तोनिया के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश



            राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एस्‍तोनिया गणराज्य के राष्ट्रीय दिवस (24 फरवरी, 2017) की पूर्व संध्या पर वहां की सरकार और लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। एस्‍तोनिया गणराज्‍य की राष्‍ट्रपति महामहिम सुश्री केरस्‍ती कालजुलेद को भेजे अपने संदेश में राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत सरकार, भारत की जनता और अपनी तरफ से, मुझे आपको और एस्‍तोनिया गणराज्‍य की जनता को आपके देश के राष्‍ट्रीय दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए अत्‍यंत हर्ष हो रहा है। भारत और एस्‍तोनिया के बीच सदैव सौहार्दपूर्ण एवं मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं।

             मुझे पूरा विश्‍वास है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों की जनता के परस्‍पर लाभ के लिए हमारे संबंध निरंतर मजबूत और व्‍यापक होंगे। महामहिम इस अवसर पर मैं आपकी सेहत और कल्‍याण के साथ ही साथ, एस्‍तोनिया की मित्रवत् जनता की प्रगति और खुशहाली के लिए शुभकामनाएं देता हूं।‘’