Monday, 5 June 2017

आंध्र प्रदेश में भारत की पहली ग्रामीण एलईडी स्‍ट्रीट लाइटिंग परियोजना

           विद्युत मंत्रालय के अधीनस्‍थ एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड के माध्‍यम से भारत सरकार आंध्र प्रदेश के सात जिलों की ग्राम पंचायतों में 10 लाख परंपरागत स्‍ट्रीट लाइट के स्‍थान पर एलईडी लाइट लगायेगी। 

       यह भारत सरकार की स्‍ट्रीट लाइटिंग राष्‍ट्रीय परियोजना (एसएलएनपी) के तहत देश में ग्रामीण एलईडी स्‍ट्रीट लाइटिंग से जुड़ी पहली परियोजना है। प्रथम चरण में गुंटूर, प्रकाशम, नेल्लोर, कुरनूल, कडप्पा, अनंतपुर और चित्तूर जिलों की ग्राम पंचायतों में यह बदलाव सुनिश्चित किया जायेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में इस बदलाव अभियान से ग्राम पंचायतों को हर साल कुल मिलाकर लगभग 147 मिलियन यूनिट बिजली की बचत करने में मदद मिलेगी और इससे 12 करोड़ टन कार्बन डाई ऑक्‍साइड (सीओ2) की रोकथाम संभव हो पायेगी। 

           इस परियोजना पर आने वाली कुल पूंजीगत लागत का वित्त पोषण एजेंसे फ्रांकेइसे डे डेवलपमेंट (एएफडी) नामक फ्रांसीसी विकास एजेंसी द्वारा किया जायेगा। इस परियोजना के तहत ईईएसएल अगले 10 वर्षों तक इन ग्राम पंचायतों में समस्‍त वार्षिक रख-रखाव और वारंटी प्रतिस्‍थापन का कार्य करेगी। इससे पहले आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि वर्ष 2018 तक राज्‍य के समस्‍त गांवों में लगभग 30 लाख परंपरागत स्‍ट्रीट लाइट के स्‍थान पर एलईडी स्‍ट्रीट लाइट्स लगाई जायेंगी। 

        ईईएसएल ने राज्‍य सरकार को आश्‍वासन दिया है कि 10 लाख एलईडी स्‍ट्रीट लाइट लगाने से बिजली में लगभग 59 प्रतिशत की बचत होगी जो 88.2 करोड़ रुपये की वार्षिक मौद्रिक बचत के बराबर है। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भारत के 21 राज्‍यों में 23 लाख से भी ज्‍यादा परंपरागत स्‍ट्रीट लाइट के स्‍थान पर एलईडी स्‍ट्रीट लाइट्स लगाई गई हैं।

हरिद्वार, ऋषिकेश, वृंदावन, वाराणसी, इलाहाबाद और दिल्ली में मैला प्रबंधन के वास्ते 1900 करोड़

       नमामि गंगे कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने उत्तर प्रदेश, बिहार और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में मल प्रवाह पद्धति (सीवेज) प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने के वास्ते 1900 करोड़ रुपये लागत की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 

      इन परियोजनाओं से हरिद्वार, ऋषिकेश, वृंदावन, वाराणसी, इलाहाबाद और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शत-प्रतिशत सीवेज प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। पिछले महीने दिल्ली में आयोजित एनएमसीजी की कार्यकारी समिति की तीसरी बैठक में इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। लगभग 767.59 करोड़ रुपये लागत से इलाहाबाद के नैनी, फाफामऊ और झूंसी सीवेज क्षेत्र में सीवेज रोकने, दिशा मोड़ने और प्रबंधन की व्यापक परियोजना के लिए मंजूरी दी गई है। 

          नैनी में 42 एमएसडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के अतिरिक्त इस परियोजना के अन्य कार्यों में आठ सीवेज पम्पिंग स्टेशन स्थापित करना भी शामिल है। तीन क्षेत्रों में से किसी में भी अभी सीवरेज योजना या कोई एसटीपी आवंटित नहीं है। मौजूदा परियोजनाओं के साथ ही इन अनुमोदित परियोजनाओं से गंगा और यमुना नदियों से घिरे इलाहाबाद शहर में सीवेज का प्रबंधन किया जाएगा। इन परियोजनाओं से 18 नालों से नदियों में अपशिष्ट पानी डालने से रोका जाएगा, ताकि अर्धकुंभ मेला 2019 के दौरान संगम पर स्नान के लिए प्रदूषण मुक्त जल उपलब्ध हो। इन परियोजनाओं की मंजूरी से इलाहाबाद में शत-प्रतिशत सीवेज प्रबंधन क्षमता हासिल की जा सकती है।
 

          बिहार के पटना शहर में पहाड़ी सीवेज क्षेत्र में सीवेज प्रबंधन बुनियादी ढांचे के लिए तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें लगभग 744 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज लाइन में पड़ने वाले क्षेत्र में 60 एमएलडी क्षमता के एसटीपी के निर्माण शामिल हैं। इससे अब पटना की सीवेज प्रबंधन क्षमता 200 एमएलडी हो जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ‘मैली से निर्मल यमुना’ के अंतर्गत लगभग 344.81 करोड़ रुपये की लागत से नजफगढ़ क्षेत्र में कुल 94 एमएलडी क्षमता के सात वरियता प्राप्त एसटीपी के निर्माण की मंजूरी दी गई है। शहर के कुल गंदे पानी का लगभग 70 प्रतिशत नजफगढ़ नाले से यमुना में डाला जाता है, जिसमें काफी मात्रा में गैर-प्रबंधित सीवेज होता है। 

        ताजपुर खुर्द (36 एमएलडी), जाफरापुर कलां (12 एमएलडी), खेरा डाबर (5 एमएलडी), हसनपुर (12 एमएलडी), ककरौला (12 एमएलडी), कैर (5 एमएलडी) और टिकरी कलां (12 एमएलडी) स्थानों पर एसटीपी स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही दिल्ली में सभी नियोजित परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है। वनीकरण के मोर्चे पर गंगा के गुजरने वाले पांच प्रमुख राज्यों- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में लगभग 61.5 करोड़ रुपये के सभी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। इनमें नर्सरी में पौधे तैयार करने, मृदा कार्य, वृक्षारोपण और उनकी देखभाल शामिल है। इसके अलावा एनएमसीजी ने पिछले तीन महीनों के दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 4100 करोड़ रुपये से अधिक लागत की परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई।

    गौरतलब है कि केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरूद्धार मंत्री सुश्री उमा भारती वर्तमान में नमामि गंगे की प्रगति की निजी तौर पर निगरानी के लिए गंगा सागर से गंगोत्री तक तीन सप्ताह के गंगा निरीक्षण अभियान पर हैं। मंत्री उत्तर प्रदेश में नरोरा पहुंच गई हैं और भृगु आश्रम तथा नजीबाबाद होते हुए वे आज हरिद्वार जाएंगीं।