Thursday, 3 August 2017

आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए आर्थिक सहायता

        सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण के लिए वर्ष 2014-15 से निम्नलिखित दो योजनाएं संचालित की जा रही हैं। 

    आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए केन्द्र प्रायोजित डॉ. अंबेडकर मैट्रिक उपरांत (पोस्ट मैट्रिक) छात्रवृत्ति योजना, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए विदेश में जाकर अध्ययन करने के लिए डॉ. अंबेडकर केन्द्रीय क्षेत्र की शिक्षा ऋण पर ब्याज सब्सिडी योजना। आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए केन्द्र प्रायोजित डॉ. अंबेडकर मैट्रिक उपरांत (पोस्ट मैट्रिक) छात्रवृत्ति योजना, यह एक केन्द्र प्रायोजित योजना है। जिसे राज्य सरकारों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा लागू किया जा रहा है। 
        योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के मैट्रिक उपरांत अथवा माध्यमिक स्तर के उपरांत पढ़ने वाले छात्रों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत पात्र होने के लिए माता-पिता-अभिभावक की आय की अधिकमत सीमा प्रति वर्ष एक लाख रुपये है। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए विभिन्न मैट्रिक उपरांत पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति दर 750 रुपये प्रतिमाह और 260 रुपये प्रतिमाह के बीच है। जबकि स्थानीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की यह दर 160 रुपये प्रतिमाह से लेकर 350 रुपये प्रतिमाह है। 
       इस छात्रवृत्ति में 900 रुपये प्रति वर्ष की दर से शिक्षा यात्रा भत्ता (वास्तविक व्यय के अनुरूप), 1000 रुपये प्रतिवर्ष (अधिकतम) शोध टंकण एवं मुद्रण शुल्क, दूरवर्ती पाठ्यक्रमों के लिए 900 रुपये प्रतिवर्ष पुस्तक भत्ता और दृष्टिहीन छात्रों के लिए सहायक भत्ता 90 रुपये से लेकर 175 रुपये प्रतिमाह तक शामिल है। अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए विदेश में जाकर अध्ययन करने के लिए डॉ. अंबेडकर केन्द्रीय क्षेत्र की शिक्षा ऋण पर ब्याज सब्सिडी योजना।
           इस योजना का उद्देश्य अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के मेधावी छात्रों को विदेशों में उच्च शिक्षा के प्राप्त करने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और उनमें रोज़गार क्षमता का विकास करने के लिए ब्याज सब्सिडी प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत पात्रता के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की सालाना आय अधिकतम 3 लाख रुपये और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों की वार्षिक आय अधिकतम 1 लाख रुपये होनी चाहिए।
        योजना के तहत 50 फीसदी राशि छात्राओं के लिए निर्धारित की गई है। यह जानकारी केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब के रूप में दी है।

भारतीय प्रकृति व संस्‍कृति के लिए वन हमेशा से ही विशेष

        इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय वन अकादमी के भारतीय वन सेवा के 89 परिवीक्षाधीन अधिकारियों (2016 बैच) के एक समूह ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से राष्‍ट्रपति भवन में भेंट की। 

 वन सेवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि उन्‍होंने एक नेक पेशा का चुनाव किया है। भारतीय प्रकृति और संस्‍कृति के लिए वन हमेशा से ही विशेष रहे हैं। हमारी सभ्‍यता ने अपनी बौद्धिकता और आध्‍यात्मिकता की शक्ति वन से ही प्राप्‍त की है। इसलिए हमारे लिए वन मात्र संसाधन नहीं हैं बल्कि ये सांस्‍कृतिक, बौद्धिक और आध्‍यात्मिक विरासत समेटे हुए हैं। 
    अब इस विरासत को सुरक्षित रखने की जिम्‍मेदारी वन सेवा अधिकारियों पर है। पर्यावरण सुरक्षा और देश के सतत विकास से सामंजस्‍यता की जिम्‍मेदारी वन अधिकारियों पर निर्भर है। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि पिछले कुछ दशकों से मानव जाति अपने अस्तित्‍व के खतरों के प्रति जागरूक हुई है जिनमें पर्यावरण प्रदूषण, वन क्षेत्र में कमी और सबसे बढ़कर वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।
         जटिल जलवायु परिवर्तन के मामलों में भारत वैश्विक नेतृत्‍व प्रदान कर रहा है। वन सेवा अधिकारियों को ऐसे तरीके और साधन ढूंढने होंगे जिससे प्राकृतिक वनों मे वृद्धि की जा सके तथा गैर वन क्षेत्रों में वृक्ष लगाए जा सकें। उन्‍होंने लोक सेवा का चुनाव किया है और वे पर्यावरण तथा पारिस्थितिक संरक्षण के विशेष क्षेत्र में देश के सैनिक हैं।
       राष्‍ट्रपति ने उन्‍हें प्रेरित करते हुए कहा कि उन्‍हें अपनी सेवा न्‍यायपूर्ण तरीके से, ईमानदारी से, बिना भय के तथा ऐसे तरीके से करनी चाहिए जिससे देश और सामान्‍य नागरिक दोनों ही लाभान्वित हो सकें। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेज गति वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक है और हम लोगों ने कठिन लक्ष्‍य निर्धारित किए हैं। वन सेवा अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण की जरूरतों और विकास की आवश्‍यकताओं के बीच संतुलन स्‍थापित करना होगा। उनका कार्य समस्‍याओं को सामने लाना नहीं बल्कि उनका समाधान प्रस्‍तुत करना है।

प्रधानमंत्री के पत्र ने उनके दिल को छू लिया....

       पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने राष्‍ट्रपति कार्यकाल के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मिले पत्र को लोगों से साझा किया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री के लिखे पत्र ने उनके मन को छू लिया है। पत्र के अंग्रेजी मूलपाठ का हिन्‍दी अनुवाद इस प्रकार है:

 नई दिल्‍ली.... 24 जुलाई, 2017.....
 प्रिय प्रणब दा,...... 
 अब जबकि आप अपनी एक नयी यात्रा के दौर की शुरुआत कर रहे हैं तो मैं राष्‍ट्र को समर्पित आपके योगदान खासतौर पर पिछले पांच सालों में देश के राष्‍ट्रपति के रूप में किये गए आपके योगदान के लिए सराहना और कृतज्ञता का भाव व्‍यक्त करता हूं। आपकी सरलता, ऊंचे सिद्धांतों और असाधारण नेतृत्‍व ने हम सबको प्रेरित किया है। 
       तीन साल पहले मैं एक बाहरी व्‍यक्ति के तौर पर नई दिल्‍ली आया था। मेरे सामने विशाल और चुनौतीपूर्ण काम थे। इस दौर में आप हमेशा मेरे लिए एक पितातुल्‍य मार्गदर्शक रहे। आपकी बुद्धिमत्‍ता, आपके मार्गदर्शन और व्‍यक्तिगत स्‍नेह ने मुझे आत्‍मविश्‍वास और शक्ति दी है। यह सर्वविदित है कि आप ज्ञान का एक भंडार हैं। नीति से राजनीति, आर्थिक मामले से विदेशी मामले, सुरक्षा के विषयों से राष्‍ट्रीय और वैश्विक महत्‍व के विषयों सहित विभिन्‍न मामलों पर आपकी विद्वता से मैं हमेशा आश्‍चर्यचकित होता रहा हूँ. आपके बौद्धिक कौशल ने निरन्‍तर मेरी सरकार और मेरी मदद की है।
          आप मेरे लिए अत्‍यन्‍त स्‍नेही और ध्‍यान रखने वाले व्‍यक्ति रहे हैं। दिनभर चलने वाली बैठकों या प्रचार अभियान यात्रा के बाद आपका ऐसा एक फोन कॉल मुझमें ताजगी और ऊर्जा भर देने के लिए पर्याप्‍त होता था, जिसमें आप कहते थे, ‘मैं आशा करता हूं कि आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रख रहे हैं’। प्रणब दा, हमारी राजनीतिक यात्राओं ने अलग-अलग दलों में आकार लिये. समय-समय पर हमारी विचारधाराएं भिन्‍न रही हैं। हमारे अनुभव भी अलग-अलग हैं। मेरा प्रशासनिक अनुभव मेरे राज्‍य से था जबकि आपने दशकों तक राष्‍ट्रीय नीति और राजनीति को देखा है। 
      इसके बावजूद, आपकी बौद्धिकता और बुद्धिमत्‍ता में ऐसी ताकत है कि हम तालमेल के साथ मिलकर काम करने में समर्थ थे। अपनी राजनीतिक यात्रा और राष्‍ट्रपति काल के दौरान, आपने राष्‍ट्र की खुशहाली को अन्य सभी चीजों से ऊपर रखा। आपने उन पहलों और कार्यक्रमों के लिए राष्‍ट्रपति भवन के दरवाजे खोल दिए, जो नवीन खोजों और भारत के युवाओं की प्रतिभा के लिए महत्‍वपूर्ण थे। आप नेताओं की उस पीढ़ी से हैं जिसके लिए राजनीति समाज की नि:स्‍वार्थ सेवा का एक माध्यम है। भारत की जनता के लिए आप प्रेरणा का एक महान स्रोत हैं।
         भारत हमेशा आप पर गर्व करेगा कि आप एक ऐसे राष्‍ट्रपति रहे, जो एक विनम्र जनसेवक और असाधारण नेता भी हैं। आपकी विरासत हमारा निरंतर मार्गदर्शन करेगी। हम आपके सबको साथ लेकर चलने वाले लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से निरंतर शक्ति प्राप्‍त करते रहेंगे, जिसे आपने अपने लम्‍बे और उत्‍कृष्‍ट सार्वजनिक जीवन में संजोया है। अब जबकि  आप अपने जीवन के एक नये चरण में प्रवेश कर रहे हैं, आपके भविष्‍य के प्रयासों के लिए मेरी ओर से शुभकामनाएं हैं। 
      आपके समर्थन, प्रोत्‍साहन, मार्गदर्शन और प्रेरणा के लिए मैं आपको एक बार फिर धन्‍यवाद देता हूं। मैं आपके उन अत्‍यंत प्यारे शब्‍दों के लिए भी आपको धन्‍यवाद देता हूं, जो आपने कुछ दिन पूर्व संसद में विदाई कार्यक्रम में मेरे बारे में बोले थे। राष्‍ट्रपति जी, आपके प्रधानमंत्री के रूप में आपके साथ काम करना मेरे लिए एक सम्‍मान की बात रही है। जय हिन्‍द.....
  आपका.... (नरेन्‍द्र मोदी)........ श्री प्रणब मुखर्जी, भारत के राष्‍ट्रपति.....