Monday, 16 January 2017

भारत को दुनिया का पर्यटन हब बनाने की कोशिश

 'अतुल्य भारत" केवल शब्द भर नहीं बल्कि इसमें भारतीय संस्कृति, संस्कार व देश का वैशिष्टय एवं भव्यता की आभा अवलोकित होती है। 


         'अतुल्य भारत" के परिप्रेक्ष्य में भारत को विश्व का 'पर्यटन हब" बनाने की कोशिशें आयाम लेते दिख रहीं हैं क्योंकि चाहे विश्वविख्यात धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी 'काशी" हो या शिपिंग मंत्रालय के लाइट हाउस हों... सभी को नया आयाम-नया इन्द्रधनुषी रंग देने की कोशिशें हो रही हैं। भारत सरकार की कोशिश है कि शिपिंग मंत्रालय के प्रकाश स्तम्भ (लाइट हाउस) की श्रंखला को पर्यटन स्थल-केन्द्र के रुप-रंग में तब्दील करें। पर्यटन दिवस पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के विशिष्टजनों को भारत भ्रमण के लिए आमंत्रित किया था। 

            प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को भारत आने का न्योता दिया था। फेसबुक संस्थापक जुकरबर्ग शायद इसी परिप्रेक्ष्य में भारत आये भी आैर आगरा के ताजमहल  का दीदार किया। ताजमहल के सौन्दर्य से इतना अधिक प्रभावित हुये कि उन्होंने यहां तक कहा कि शीघ्र ही पत्नी को साथ लेकर ताजमहल देखने आयेंगे। केन्द्रीय पर्यटन मंत्री डा. महेश शर्मा का कथन है कि भारत को विश्व का पर्यटन हब बनायेंगे। भारत के विशिष्ट स्थलों, धरोहरों व सौन्दर्य से लबरेज वास्तुशिल्प की कलाकृतियों की वास्तविकता को बरकरार रखते हुये इन्द्रधनुषी आयाम देने की कोशिश हो रही है।

             इसके लिए भारत व कंबोडिया ने पर्यटन विकास पर 'हम साथ साथ" के सिद्धांत पर सहमति दी है। इससे भारत व कंबोडिया के पर्यटन स्थलों के विकास एवं प्रबंधन से लेकर सांस्कृतिक मेलों-प्रदर्शनियों के आदान-प्रदान के अवसर भी खुलेंगे। पर्यटन क्षेत्र को सेवाओं-सुविधाओं से परिपूर्ण बनाने की दिशा में भारत सरकार रीति-नीति का भी निर्धारण कर रही है। पर्यटन को चाहे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से जोड़ने की बात हो या फिर सुरक्षा एवं स्वच्छंदता की राह हो, भारत सरकार का संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय सार्थक आयाम-परिणाम देने वाली रीति-नीति पर मंथन कर रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर्यटन बोर्ड को अस्तित्व में लाया गया।   

           शासकीय रीति-नीति में पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता में है क्योंकि पर्यटन को बढ़ावा तभी मिलेगा, जब पर्यटक सुरक्षित होंगे। खास तौर से महिला पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना-कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुुनौती है। पर्यटक सुरक्षित होंगे तो व्यवसाय से लेकर रोजगार के अवसर बनते-विकसित होते रहेंगे। स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को ध्यान में रख कर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अतुल्य भारत हेल्पलाइन चालू की है। 'अतुल्य भारत" हेल्पलाइन के टोल फ्री नम्बर 1800111363 एवं 1363 पर्यटकों को सुविधा-सहूलियत के लिए जारी किये गये हैं। 

            अब सरकार के सामने इसकी उपयोगिता एवं सार्थकता की चुनौती है। अब चाहे  स्वास्थ्य की बात हो या सुरक्षा की बात हो हेल्पलाइन समय पर पर्यटकों को पर्याप्त सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवायें समय पर उपलब्ध हो सकें, यह एक बड़ी चुनौती है। फिलहाल मंत्रालय ने हेल्पलाइन पर हिन्दी व अंग्रेजी भाषा की सुविधा दी है लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो शीघ्र ही मंत्रालय एक दर्जन अंतरराष्ट्रीय भाषाओं से हेल्पलाइन को जोड़ेगा। यह अंतरराष्ट्रीय भाषायें दुनिया के पर्यटकों की दिक्कत व परेशानी समझने व उनके निदान में सहायक व मददगार साबित होंगी। पर्यटक सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रख कर मंत्रालय ने पर्यटक पुलिस का गठन किया है।            

           पर्यटन क्षेत्र में पर्यटक सुरक्षा व उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखना केन्द्र व प्रांतीय सरकारों के लिए एक बड़ी व गम्भीर चुनौती से कम नहीं क्योंकि कश्मीर से कन्याकुमारी हो या उडीसा से उत्तराखण्ड हो.... कहीं लालित्य, सौन्दर्य व माधुुर्य से परिवेश लबरेज दिखता है तो प्राकृतिक सौन्दर्य अपनी आभा से परिवेश को आलोकित करता है। देश के इन सभी पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को पर्याप्त सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध करना-कराना नीति-नियंताओं के लिए आसान नहीं होगा। वन अभ्यारणों के भ्रमण की बात हो या गोवा में समुद्र तटीय आनन्द लेने की बात हो, पर्यटक सुरक्षा कदम-कदम पर उपलब्ध करना-कराना अत्यन्त मुश्किल कार्य है। 

           सरकार के सामने एक ओर पर्यटक सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवायें एक गम्भीर चुनौती के रुप में है तो वहीं पर्यटन विकास की लम्बी योजनायें आकार लेती दिख रही हैं। शिपिंग मंत्रालय एवं प्रकाशस्तम्भ एवंं प्रकाशपोत महानिदेशालय देश में पौन सैकड़ा से अधिक करीब 78 प्रकाशस्तम्भ (लाइट हाउस) को पर्यटन केन्द्र या पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने की योजना पर कार्य कर रहा है। फिलहाल गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुंडुचेरी, आंध्र प्रदेश, ओडिसा, अण्डमान निकोबार एवं पश्चिम बंगाल शामिल हैं। प्रकाशस्तम्भ को पर्यटन स्थल या केन्द्र के रुप मे विकसित करने से आसपास के इलाकों का भी विकास होगा। पर्यटकों को आकर्षित करने की इस योजना के तहत होटल-मॉल्स, रिजॉर्टस, समुद्री संग्रहालय, विरासत संग्रहालय, साहसिक खेल सुविधायें, यादगार वस्तुओं की बिक्री व प्रदर्शनी, लेजर शो, स्पा एवं कायाकल्प केन्द्र, रंगभूमि-थियेटर व अन्य पर्यटन आकर्षण की कलाकृतियां सहित बहुत कुछ विकसित होंगे।

            विशेषज्ञों की मानें तो गोवा के अगुवाड़ा, ओडिसा के चन्द्रभागा, महाबलीपुरम, कन्याकुमारी, तमिलनाडु के मुत्तोम, केरल में कडालुर प्वाइंट, महाराष्ट्र के कई इलाकों में परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल भी रहा है। गौरतलब है कि प्रकाशस्तम्भों का उपयोग सदियों से जहाज चलाने वालों के आवागमन के संकेत दीपों के रुप में रहा। व्यापक बदलाव के क्रम में अब इनकी उपयोगिता देखी जा रही है। प्रबंधन व नीति-नियंता दुनिया के प्रकाशस्तम्भ व उसके आसपास सुन्दर व शांत वातावरण व समृद्ध समुद्री विरासत की बदौलत पर्यटकों को आकर्षित करने में कामयाब रहे। प्रकाशस्तम्भ क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुये देश के शिपिंग मंत्रालय ने प्रकाशस्तम्भों को पर्यटन केन्द्र में तब्दील करने की नीति अपनायी है।

            विशेषज्ञों की मानें तो देश की करीब 7517 किलोमीटर लम्बी विशाल तयीय रेखा पर 189 प्रकाशस्तम्भ संचालित हैं। बंगाल की खाड़ी में स्थित अण्डमान एवं निकोबार द्वीप तथा अरब सागर स्थित लक्षद्वीप इनमें शामिल हैं। देश के समृद्ध समुद्री विरासत से युक्त प्रत्येक प्रकाशस्तम्भ की अपनी विशिष्ट गाथा है। जहाज चलाने वालों के लिए इनकी विशिष्टता अलग ही है। विशेषज्ञों की मानें तो इन प्रकाशस्तम्भ में पर्यटन की अपार संभावनायें हैं। देश को इनका लाभ लेना चाहिए।

             तमिलनाडु में चेन्नई एवं महाबलीपुरम, केरल में अलेप्पी एवं कन्नानूर प्रकाशस्तम्भ को पर्यटन केन्द्र के रुप में विकसित किया जा चुका है। देश-दुनिया के लाखों पर्यटकों की आवाजाही से चकाचौंध दिखती है। केन्द्र व प्रांत सरकारों को चाहिए पर्यटकों की सेवाओं-सुविधाओं का विशेष ख्याल रखें क्योंकि इससे क्षेत्र का विकास होगा तो वहीं रोजगार के अपार अवसर भी विकसित होंगे। 'अतिथि देवो भव:" की भावना सभी में होनी चाहिए। चाहे वह देश का सामान्य नागरिक हो या शासकीय व्यवस्थाओं से ताल्लुक रखने वाला नौकरशाह हो। राष्ट्र बढ़ेगा तो आप भी आगे बढ़ेंगे।

Sunday, 15 January 2017

बच्चों को गोद लेने के लिए अब नया कानून


          किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 68 (सी) के तहत अधिदेशित 'केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण' (सीएआरए) द्वारा तैयार किया गया दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017 को अधिसूचित कर दिया गया है। 

         दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017 दत्तक ग्रहण की जगह लेंगे। दत्तक ग्रहण विनियमन की रूप रेखा दत्तक ग्रहण एजेंसियों और भावी दत्तक माता पिता (पीएपी) सहित सीएआर, अन्य हितधारकों के सामने आ रहे। मुद्दों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बनायी गयी है। यह भविष्य में गोद लेने की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के द्वारा देश में गोद लेने के कार्यक्रम को और मजबूत बनाएगा। पारदर्शिता, बच्चों के प्रारंभिक विसंस्थागतकरण, माता-पिता के लिए सुविज्ञ विकल्प, नैतिक प्रथाओं और गोद लेने की प्रक्रिया में सख्ती से परिभाषित समयसीमा दत्तक ग्रहण विनियमन के प्रमुख पहलू हैं।

            दत्तक ग्रहण के विनियमन 2017 की मुख्य विशेषताएं, विनियमनों में देश के भीतर और विदेशों में रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया से संबंधित प्रक्रियाओं को परिभाषित किया गया है। गृह अध्ययन रिपोर्ट की वैधता दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। निर्दिष्ट बच्चे को आरक्षित करने के बाद मिलान और स्वीकृति के लिए घरेलू पीएपी को उपलब्ध समयसीमा को वर्तमान पंद्रह दिनों से बढ़ाकर बीस दिन कर दिया गया है। जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) के पास व्यावसायिक रूप से योग्य या प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक पैनल होगा। 

           न्यायालय में दायर किए जाने वाले मॉडल दत्तक ग्रहण आवेदनों समेत विनियमनों से संलग्न 32 अनुसूचियां हैं। यह न्यायालय के आदेश प्राप्त करने में वर्तमान में लगने वाली  देरी में काफी हद तक कमी लाएंगी। नया दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

‘एसईजेड इंडिया’ एप लॉन्च, ट्रेड-ट्रांजेक्शन ऑनलाइन


          वाणिज्य सचिव ने ‘एसईजेड इंडिया’ मोबाइल एप लॉन्च किया है। वाणिज्य विभाग के एसईजेड प्रभाग ने अपनी व्यापक ई-गवर्नेंस पहल अर्थात एसईजेड ऑनलाइन सिस्टम द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) के लिए मोबाइल एप का विकास किया है।

          वाणिज्य सचिव ने एप लॉन्च किया। कहा कि यह एप एसईजेड इकाईयों और डेवलपरों को सूचनाओँ को आसानी से प्राप्त करने तथा एसईजेड ऑनलाइन सिस्टम पर उनकी लेनदेन को ट्रैक करने में सहायता प्रदान करेगा। अब एसईजेड डेवलपर और इकाईयां एसईजेड ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से अपने लेनदेनों को डिजिटल तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। एसईजेड इंडिया मोबाइल एप के जरिए उसकी स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। यह एप एसईजेड डेवलपरों, इकाईयों, अधिकारियों एवं अन्य लोगों के लिए इस्तेमाल में लाए जाने हेतु एंड्रायड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इस एप के एसईजेड इनफॉरमेशन, एसईजेड ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, ट्रेड इनफॉरमेशन एवं कॉन्टेक्ट डिटेल्स चार खंड हैं। 

           इन चारों खंडों की मुख्य विशेषताएं एसईजेड इनफॉरमेशन-यह एसईजेड अधिनियम 2005, एसईजेड नियम 2006, एमओसीआई परिपत्र, एसईजेड एवं इकाईयों के विवरण आदि का एक सार-संग्रह है। सभी पहलुओं पर व्यापक ताजा विवरण प्रस्तुत करता है। ट्रेड इनफॉरमेशन-यह प्रावधान विदेश व्यापार नीति, प्रक्रियाओं की लघु पुस्तिका, ड्युटी कैलकुलेटर, सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क अधिसूचनाएं एवं एमईआईएस दरों जैसी महत्वपूर्ण सूचना - टूल्स तक पहुंच प्रदान करता है। कॉन्टेक्ट डिटेल्स - इस खंड में सभी विकास आयुक्त कार्यालयों, डीजीएफटी, डीजी प्रणाली, डीजीसीआई एवं एस तथा एसईजेड ऑनलाइन के संपर्क विवरण दिए गए हैं। एसईजेड ऑनलाइन ट्रांजेक्शन - यह एक गतिशील उपविकल्प सूची है जो एंट्री बिल-शिपिंग बिल प्रोसेसिंग स्टेटस को ट्रैक करता है। उनका सत्यापन भी करता है। यह एप आईसीईजीएटीई की ईडीआई प्रणाली में ‘एंट्री बिल-शिपिंग बिल’ के समेकन तथा प्रोसेसिंग के स्टेटस को ट्रैक करने में आयातकों-निर्यातकों की मदद भी करता है।

भारत में खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा


         युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वाधान में खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का आयोजन 15 से 21 जनवरी, 2017 के बीच किया जाएगा। 

       युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वाधान में तैराकी, साईकिलिंग और कुश्ती के लिए खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का आयोजन 15 से 21 जनवरी, 2017 के बीच किया जाएगा। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल नई दिल्ली के डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्विमिंग पूल परिसर में इन प्रतिस्पर्धाओं का शुभारंभ करेंगे। इन राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में 25 से ज्यादा राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों के भाग लेने की उम्मीद है। भारतीय खेल प्राधिकरण के द्वारा आयोजित होने जा रही खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में करीब 1,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। विजय गोयल ने कहा कि खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के आयोजन का अभिप्राय मात्र जमीनी स्तर पर खेलों को प्रोत्साहन देना ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए नवोदित प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करना है।

             कहा कि इस प्रतिस्पर्धा के दौरान प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पहचान कर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट बनाने की प्रक्रिया भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया योजना खेलों के लिए महत्वपूर्ण रूप से परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे न सिर्फ खेल बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद मिलेगी बल्कि नवोदित प्रतिभाओं को अपनी क्षमताएं साबित करने का अवसर भी मिलेगा। खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में साईकिलिंग, कुश्ती, तैराकी है।

गणतंत्र दिवस परेड में देश  की गौरवशाली ‘विविधता में एकता’


         गणतंत्र दिवस परेड समारोह में तीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय और नागपुर के दक्षिण, मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र से 600 से अधिक छात्र एवं छात्राएं भाग ले रहे हैं।

        ‘तिरंगा साक्षी है’ विषय के साथ राष्ट्रीय तिरंगे पर आधारित एक नृत्य का प्रदर्शन दिल्ली के प्रीतमपुरा स्थित केंद्रीय विद्यालय के 162 छात्र और छात्राएं करेंगे। नृत्य प्रस्तुति से अपार आनंद और उत्साह का अनुभव होगा। साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवशाली वीरगाथाओं, भारतीय लोकतंत्र के गठन, भारतीयों के अपार स्नेह, महिला सशक्तिकरण और ऐसी ही अनगिनत उपलब्धियों के साक्षी रहे राष्ट्रीय ध्वज का संदेश भी देंगे। चिराग दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय के 150 छात्र हमारे देश के युवाओं को समर्पित एक गीत और नृत्य का प्रदर्शन करेंगे, जिन्होंने देश को सफलता और विकास के पथ पर ले जाने का अटूट प्रयास किया है।

             युवा सहभागी इस प्रस्तुति से नागरिकों को वैश्विक मंच पर राष्ट्र को अग्रणी बनाने और प्रगति के पथ पर नेतृत्व करने और राष्ट्र के उत्थान में युवा शक्ति की सेवाओं को समर्पित करने का संदेश देंगे। नृत्य प्रदर्शन के दौरान ‘विविधता में एकता’ जैसी भारत की अनूठी विशेषता को भी प्रदर्शित किया जाएगा। नागपुर के दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के 165 छात्र मध्य प्रदेश में लोकप्रिय ‘सैला कर्मा’ नृत्य की प्रस्तुति देंगे, जिसका शुभारंभ भगवान सूर्य देव की उपासना से होता है। सैला नृत्य मध्यप्रदेश में डिंडोरी जिले की गोंड जनजाति का लोकप्रिय नृत्य है।

             दिल्ली के रोहिणी में सेक्टर-5 स्थित माउंट आबू पब्लिक स्कूल के 150 छात्र असमी नृत्य शैली पर आधारित एक नृत्य प्रस्तुति देंगे।  यह प्रस्तुति प्रसिद्ध असमी नृत्य शैली ‘सत्त्रिया’ पर आधारित है। इस नृत्य के माध्यम से माउंट आबू पब्लिक स्कूल के ऊर्जावान छात्र सर्वशक्तिमान ईश्वर और उनकी विशिष्ट संरचना के प्रति सकारात्मक जीवन शक्ति के भाव को प्रस्तुत करेंगे।

‘मृतक’ पार्थिव शरीर इंडिगो में निःशुल्क


           केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास, युवा मामले, पीएमओ, परमाणु उर्जा एवं अंतरिक्ष, कार्मिक, लोक शिकायत पेंशन राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने पूर्वोत्तर के विभिन्न स्थलों पर ‘मृतक’ पार्थिव शरीर को हवाई जहाज के माध्यम निःशुल्क ले जाने के इंडिगो के फैसले की सराहना की है।

         उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सक्रिय सभी एयरलाइनों से एक अपील की गयी थी। इंडिगो ने इस पर शीघ्र ही अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इंडिगो एयरलाइन्स के उपाध्यक्ष विक्रम चोना ने व्यक्तिगत रूप से डॉ. जिंतेन्द्र सिंह से मुलाकात की। इस पहल को ‘आखिरी आहूति’ के रूप में वर्णित करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र के उन सभी हवाई अड्डों पर ‘मृतक’ पार्थिव शरीर को हवाई जहाज के माध्यम से निःशुल्क ले जाने का फैसला किया है। जहां इंडिगो संचालनरत है।

           कहा गया कि वर्तमान में इंडिगो दिल्ली से गोवाहटी, अगरतला, डिब्रूगढ़, दीमापुर और इंफाल के लिए उड़ाने संचालित कर रही है। विक्रम चोना ने डॉ. जिंतेन्द्र सिंह को यह जानकारी दी कि जब कभी इंडिगो पूर्वोत्तर के अन्य स्थलों पर अपनी उड़ान संचालित करेगा ऐसी ही निःशुल्क सुविधा उन हवाई मार्गों पर भी प्रदान की जाएगी। जानकारी दी कि ऐसी पहली निःशुल्क सुविधा दिल्ली में रह रहे मणिपुर के निवासी को दी गयी थी, जिनका दुर्भाग्य से निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को हवाई जहाज से इंफाल भेजा गया था। चोना ने इस पहल में दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त और दिल्ली में पूर्वोत्तर के लोगों के नोडल ऑफिसर की ओर से मिले सहयोग की भी जानकारी दी। 

           डॉ. जितेंन्द्र सिंह ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की ओर से इंडिगो एयरलाइन्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली में रह रहे पूर्वोत्तर के लोगों को अक्सर दुर्भाग्य की स्थिति का सामना करना पड़ता है, जब कभी उनके परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि वित्तीय समस्याओं के कारण मृतक के रिश्तेदार अक्सर मृतक के पार्थिव शरीर को पूर्वोत्तर ले जाने में असमर्थ होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मजबूरीवश ऐसे मृतकों का अंतिम संस्कार दिल्ली में ही करना पड़ता है।  डॉ. जितेंन्द्र सिंह ने कहा कि इंडिगो के द्वारा प्रकट किया गया यह भाव न केवल मानव चिंता का प्रतिबिंब है बल्कि सरकार और निजी क्षेत्रों के बीच सार्वजनिक निजी साझेदारी की दिशा में विभिन्न स्तरों और विभिन्न स्थितियों में नागरिकों को प्रदान की जा रही सेवाओं का भी विस्तार है। 

Saturday, 14 January 2017

भारत  में भूतपूर्व सैनिकों को  एक रैंक एक पेंशन 

       रक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने कहा कि सरकार ने एक रैंक एक पेंशन (ओआरओपी) योजना  लागू कर दी ।  यह  मांग  40 से अधिक वर्षों से लंबित थी ।  प्रथम किस्त के रूप में 3,994.49 करोड़ रुपये 19,69,385 भूतपूर्व सैनिक को वितरित कर दिये गये हैं, जबकि दूसरी किस्त के तौर पर 2,290.72 करोड़ रुपये की राशि 15,54,849 भूतपूर्व सैनिकों को वितरित कर दी गयी है । 

      रक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने कहा  कि सरकार भूतपूर्व सैनिकों के मुद्दों और चिंताओं के प्रति संवेदनशील है ।उनकी शिकायतों का समाधान करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भूतपूर्व सैनिकों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं को व्यक्त करने और उनके निवारण की मांग के लिए आर्मी वेटरन पोर्टल जैसे उपलब्ध अधिकारिक माध्यमों का उपयोग करें । दिल्ली छावनी में सशस्त्र बल सेवानिवृत्त सैनिक दिवस समारोह को संबोधित करते हुए डॉ भामरे ने कहा,  सेवानिवृत्त सैनिक सशस्त्र बल परिवार का एक अनिवार्य हिस्सा है जो हमारे मूल्यों और संस्कृति के पालक हैं  ।   यह हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें पूर्ण सम्मान दें क्योंकि वे वर्तमान और अतीत के मध्य की एक अटूट कड़ी हैं। 

        उन्होंने सेवानिवृत्त सैनिकों उनकी विधवाओं को यह आश्वासन दिया कि केंद्र, राज्य सरकारें और सभी सेवा मुख्यालय उनकी देखभाल के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं । डॉ भामरे ने अपने संबोधन के दौरान सरकार द्वारा सेवानिवृत्त सैनिकों के कल्याण के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी दी। पिछले वर्ष दिल्ली छावनी में भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए निदेशालय की स्थापना और प्रत्येक क्षेत्र और उप-क्षेत्र स्तर पर उनकी देखभाल के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उन्होंने उल्लेख किया।

         मंत्री  ने कहा कि पेंशन अनुदान, सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके आश्रितों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की देखभाल के लिए प्रत्येक वर्ष भूतपूर्व सैनिकों के लिए रैलियों का आयोजन किया जाता है  । मंत्री  ने विशेष रूप से सेवानिवृत्त सैनिकों के कौशल विकास पर बल दिया ताकि वे अपने कैरियर में एक नई पारी की शुरूआत करके राष्ट्र के विकास में प्रभावी ढंग से योगदान कर सकें। उऩ्होंने यह भी कहा कि पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए संपूर्ण भारत और नेपाल में ईसीएचएच अपने पॉलीक्लिनिकों के माध्यम से प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है।

Friday, 13 January 2017

देश में 156 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन


             केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश के लगभग 70 मिलियन ग्रामीण परिवार दुग्ध उत्पादन में लगे हुए हैं। छोटे और सीमांत किसान तथा भूमिहीन श्रमिक, व्यक्तिगत रूप से प्रतिदिन लगभग एक से तीन लीटर दुग्ध का उत्पादन करते हैं।

        भारत के लगभग 78 प्रतिशत किसान, छोटे तथा सीमांत हैं। जिनके पास लगभग 75 प्रति‍शत मादा गौजातीय पशु हैं, परंतु केवल 40 प्रतिशत फार्म भूमि है। दूध, ग्रामीण परिवारों की सकल आय में लगभग एक तिहाई का तथा भूमिहीन लोगों के मामले में उनकी सकल आय के लगभग आधे हिस्से तक का योगदान करता है। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि गांव के परिवारों में दूध उत्पादन एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि बन गया है। किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए खेती - बाड़ी के साथ इसे भी अपना रहे हैं। सिंह ने यह बात आज कृषि मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की अंतर-सत्रीय बैठक में कही।

            सिंह ने कहा कि भारत 1998 से विश्व के दुग्ध उत्पादक राष्ट्रों में पहले स्थान पर बना हुआ है। यहां विश्व की सबसे अधिक बोवाईन आबादी (18.4 प्रतिशत हिस्सा) है। भारत में दूध का उत्पादन 1970 के लगभग 22 मिलियन टन से बढ़कर 2015-16 में 156 मिलियन टन हो गया, जो पिछले 46 वर्षों में 700 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसकी बदौलत  भारत में 299 ग्राम प्रतिदिन विश्व औसत के मुकाबले दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धतता 337 ग्राम प्रतिदिन है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों, 2014-16 से दूध के उत्पादन ने 6.28 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की लगभग 4 प्रतिशत की विकास दर से अधिक है। 2.2 प्रतिशत के विश्व  विकास औसत के मुकाबले तीन गुना अधिक है। यदि चावल तथा गेहूं दोनों को भी मिला दिया जाए तो भी 2014-15 में 4.92 करोड़ रूपए के सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में दूध का 37 प्रतिशत से भी अधिक का योगदान है।

             देश में उत्पादित दूध का लगभग 54 प्रतिशत अधिशेष है। जिसमें लगभग 38 प्रतिशत संगठित सेक्टर द्वारा हैंडल किया जाता है। जिसमें सहकारिताओं तथा निजी डेयरी संगठनों की बराबर की भागीदारी होती है। सिंह ने बताया कि डेयरी व्यवसाय में महिलाओं की लगभग 70 प्रतिशत भागीदारी है। राधा मोहन ने कहा कि दूध  उत्पादन में वृद्धि करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए यह जरूरी है कि दूध इकट्ठा करने की सुविधाओं में सुधार किया जाए। किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए लाभकारी मूल्य दिया जाए। यह तभी संभव है, जब दूध उत्पादकों को बाज़ार से जोड़ने के लिए एक प्रभावी प्रबंधन प्रणाली स्थापित हो। 

            केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बीपीएल परिवारों, लघु और सीमान्त किसानों को डिस्क्रिप्ट देशी नस्लें रखने के लिए प्रेरित किया जायेगा। सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय बोवाईन प्रजनन और डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीबीबीडीडी) को 2014-15 में चार विद्यमान योजनाओं का मिला कर प्रारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य दूध की बढ़ती मांग पूरा करने के लिए व्यापक और वैज्ञानिक कार्यक्रम तैयार करना है। योजना के दो घटक हैं, राष्ट्रीय बोवाईन प्रजनन कार्यक्रम (एनपीबीबी) और राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी)। एनपीबीबी कृत्रिम गर्भाधान नेटवर्क के फील्ड कवरेज बढ़ाने, प्रजनन क्षेत्र में देशी नस्लों के विकास और संरक्षण कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग पर ध्यान केन्द्रित करता है। एनपीडीडी उत्पादन, खरीद प्रसंस्करण और दुग्ध के विपणन के लिए दुग्ध संघों-परिसंघों के लिए अवसंरचना का निर्माण और सुदृढ़ीकर, डेयरी किसानों के प्रशिक्षण तथा विस्तार पर ध्यान दे रहा है।

दस वर्ष बाद अब बनेगी “राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति”


            कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा, पारम्परिक मछुवारो को गहरे-समुद्र मे फिशिंग की ट्रेनिंग देने की दिशा मे प्रयास शुरू कर दिये गये हैं। राधा मोहन ने तटीय राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के फिशरीज मंत्रियों के साथ “राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति, 2016” पर आयोजित बैठक को सम्बोधित किया। 

       कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि तट से दूर गहरे समुद्र में मौजूदा समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग और लाखों मछुआरों की आजीविका को सुगम बनाने के लिए जरूरी है कि केन्द्र और तटीय राज्य सरकारें मिलकर राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति पर गंभीरता के साथ अमल करें। कृषि मंत्री ने यह बात कृषि मंत्रालय में तटीय राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के फिशरीज मंत्रियों के साथ ‘राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति – 2016” पर हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद कही। कृषि मंत्री ने कहा कि देश मे समुद्री मात्स्यिकी मे मौजूदा असंतुलन दूर करने में, इसका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने में तथा इससे जुड़े लाखों मछुवारों की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति में प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति 2016’ एक अहम मार्गदर्शक की भूमिका निभायेगा। 

            उन्होंने कहा कि देश में निकटवर्ती समुद्री संसाधनों का पिछले दो तीन दशकों में अधिक दोहन हुआ है। यह सिलसिला अगर इसी प्रकार से जारी रहा तो आने वाले कुछ वर्षों मे समुद्री आजीविका पर संकट आ सकता है। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति’ के मसौदे मे वर्तमान मे गहरे-समुद्र मे फिशिंग करने पर पारम्परिक मछुवारों को गहरे-समुद्र में फिशिंग की ट्रेनिंग और कौशल विकास द्वारा सशक्तिकरण करने सम्बंधी सिफारिश की गयी है। 

          उन्होंने कहा कि पारम्परिक मछुवारो को गहरे-समुद्र मे फिशिंग की ट्रेनिंग देने की दिशा मे प्रयास शुरू कर दिये गये हैं। मछुवारों द्वारा गहरे-समुद्र मे फिशिंग को बढावा देने के लिये विशेष योजना शुरू करने के प्रयास भी किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति’ के मसौदे मे यह प्रस्ताव भी है कि सरकार-मंत्रालय द्वारा इस ‘नीति’ के मसौदे की औपचारिक स्वीकृति के बाद मसौदे मे निहित प्रत्येक सिफारिश पर कार्रवाई के लिये, आगामी दस वर्षो के लिये एक विस्तृत ‘रोड-मैप’ बनाया जायेगा। 

         इस ‘रोड-मैप’ मे विभिन्न सिफारिशो पर कार्रवाई के लिये न केवल जिम्मेदार एजेंसियों को चिन्हित किया जायेगा, बल्कि कार्यान्वयन की समय-अवधि भी तय की जायेगी। कृषि मत्री ने कहा कि इसके अलावा नीति के कार्यान्वयन के लिये जरूरी धन के सम्भावित स्रोत निर्दिष्ट करने के सुझाव भी ‘रोड-मैप’ मे दिये जायेंगे।

भारत में 80 करोड़ से ज्यादा युवा  


          प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत के 80 करोड़ से ज्यादा लोगों की आयु इस समय 35 वर्ष से कम है।   उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलकर के भारत में एक ऐसे युग की शुरुआत करने की क्षमता है, जो विश्वगुरू बन सकता है। राष्ट्रीय युवा महोत्सव की बधाई।

      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति के असीम प्रेरक हैं। स्वामी विवेकानंद कहते थे- हमारे देश को इस समय आवश्यकता है लोहे की तरह ठोस मांसपेशियों और मजबूत स्नायु वाले शरीरों की। आवश्यकता है इस तरह की दृढ़ इच्छा-शक्ति-संपन्न युवाओं की। स्वामी विवेकानंद ऐसे युवाओं का निर्माण करना चाहते थे जिनमें बिना भेद-भाव के एक दूसरे के प्रति प्रेम व विश्वास हो। युवा वह होता है, जो बिना अतीत की चिंता किए अपने भविष्‍य के लक्ष्‍यों की दिशा में काम करता है। देश में युवा जो काम आज करते हैं, वही तो कल जाकर देश का भविष्य बन जाता है। उन्होंने कहा कि देश के 80 करोड़ से ज्यादा लोगों की आयु इस समय 35 वर्ष से कम है। इस महोत्सव के माध्यम से युवाओं को रोजमर्रा की जिंदगी में डिजिटल तरीके से लेन-देन की ट्रेनिंग दी जाएगी। 

              प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मेरी इस महोत्सव में ट्रेनिंग लेने वाले हर युवा से अपील है कि जब वो यहां से ट्रेनिंग लेकर जाएं तो अपने आसपास के कम से कम 10 परिवारों को डिजिटल ट्रांजेक्शन करना सिखाएं।  अर्थव्यवस्था बनाने में सभी युवाओं की बहुत बड़ी भूमिका है। देश को कालेधन और भ्रष्टाचार से मुक्त कराने की लड़ाई में युवा शक्ति का महत्वपूर्ण योगदान होगा। राष्ट्रीय युवा महोत्सव का शुभांकर बेटी के रूप में चुना गया है। दुलार से इसे नाम दिया गया है ‘‘म्हारी लाडो’’। इस महोत्सव के माध्यम से ‘‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’’ अभियान के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास बहुत ही सराहनीय है। हरियाणा से ही केंद्र सरकार ने ‘‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’’ अभियान की शुरुआत की थी। हरियाणा के भविष्य को संवारने में यहाँ का युवा वर्ग एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। हरियाणा के युवा खिलाड़ियों ने अनेक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक हासिल कर सदा-सर्वदा पूरे देश का मान बढ़ाया है। पूरे देश में विकास की नई बुलंदियों को छूने के लिए युवा शक्ति के और अधिक योगदान की आवश्यकता है। 

            उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्‍य अपने युवकों को, इस सदी को भारत की सदी बनाने के लिए क्षमताएं एवं कौशल प्रदान करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत एक प्रयास है, देश की सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोने का। हमारे देश में भाषाएं भले अलग-अलग हों, खान-पान अलग-अलग हों, रहने का तरीका अलग-अलग हो, रीति-रिवाज अलग-अलग हों, लेकिन आत्मा एक ही है। उस आत्मा का नाम है - भारतीयता। इस भारतीयता के लिये सब गर्व करते हैं। एक भारत-श्रेष्ठ भारत सिर्फ एक योजना नहीं है। इसे एक जनआंदोलन की तरह आगे बढ़ाया जा रहा है, ये तभी कामयाब होगी, जब देश के युवाओं का भरपूर साथ मिलेगा।

            प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि “हमें अनेक रूढ़ियां खत्म करनी होंगी। बहुत से सुधार करने होंगे। जो हमारे मानव का विकास और राष्ट्र की एकात्मता की वृद्धि में पोषक हों, वह हम करेंगे और जो बाधक हो, उसे हटाएंगे। ईश्वर ने जैसा शरीर दिया है, उसमें मीनमेख निकालकर अथवा आत्मग्लानि लेकर चलने की आवश्यकता नहीं है। पर शरीर में फोड़ा होने पर उसका ऑपरेशन तो आवश्यक है। सजीव और स्वस्थ अंगों को काटने की जरूरत नहीं है। आज यदि समाज में छुआछूत और भेदभाव घर कर गए हैं, जिसके कारण लोग मानव को मानव समझकर नहीं चलते और जो राष्ट्र की एकता के लिए घातक सिद्ध हो रहे हैं, हम उनको खत्म करेंगे”।

                देश में ऊर्जा से भरे हुए ऐसे नौजवान हर कोने में हैं। कोई पहाड़ों से निकलने वाले छोटे झरनों से बिजली बना रहा है, कोई कूड़े से घर निर्माण की चीजें बना रहा है, कोई टेक्नोलॉजी के माध्यम से दूर-दराज वाले इलाके में मेडिकल सुविधा उपलब्ध करा रहा है, कोई सूखाग्रस्त इलाके में किसानों के लिए पानी बचाने के संसाधन जुटा रहा है। ऐसे लाखों युवा राष्ट्र निर्माण के लिए दिन रात एक कर रहे हैं।  युवा शक्ति देश की बौद्धिक ताकत के तौर पर मौजूद है। आवश्कता है युवाओं की उर्जा का रचनात्मक प्रयोग करने की।

‘जल क्रांति’ को ‘जन क्रांति’ बनाने की जरूरत

         
           केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने ‘जल क्रांति’ को ‘जन ‘क्रांति’ बनाने का आह्वान किया है।

      केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री भारती ने ‘जल मंथन-3’ समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पानी बचाने की जिम्मेदारी अकेले सरकारी तंत्र की नही हो सकती बल्कि इस कार्य के लिए जन भागीदारी बहुत जरूरी है। साथ ही गैर सरकारी संगठनों के सहयोग की भी जरूरत है। सुश्री भारती ने कहा कि मंत्रालय जल के प्रयोग एवं गंगा संरक्षण पर नया कानून लाने पर विचार कर रहा है।‘‘राज्यसभा और लोकसभा में जल को समवर्ती सूची में लाने की मांग उठी है। क्या संविधान की मर्यादाओं के अंतर्गत इस का कोई निदान निकाला जा सकता है? इस पर विचार चल रहा है।’’केद्रीय मंत्री ने कहा ‘‘केन- बेतवा परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। लेकिन एआईबीपी के तहत इसकी फंडिंग का अनुपात 60-40 निर्धारित हो गया है। हमारी जददोजहद है कि यह अनुपात या तो 100 प्रतिशत हो या 90-10 प्रतिशत हो।’’

           उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस परियोजना पर 2017 के प्रारंभ में ही काम शुरू हो जायेगा। इसे सात साल के अंदर पूरा कर लिया जायेगा। सुश्री भारती ने कहा कि मानस-संकोष-तीस्ता-गंगा-महानदी-गोदावरी देश की नदी जोडो परियोजनाओं का ‘मदर लिंक’ है।इस परियोजना से ओडिशा, बिहार एवं बंगाल की सुखाड़ तथा बाढ़ की समस्याओं का समाधान होगा।’’ केंद्रीय मंत्री ने ‘पार-तापी नर्मदा’ एवं ‘दमनगंगा पिंजल’ नदी जोड़ो परियेाजनाओं से होने वाले लाभों का जिक्र करते हुए कहा  कि ‘दमनगंगा पिंजल’ मुम्बई के लिए 2060 तक पीने के पानी की व्यवस्था करेगी। ‘पार-तापी नर्मदा’ महाराष्ट्र और गुजरात के उन आदिवासियों की प्यास बुझाएगी जो वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। 

           सुश्री भारती ने कहा कि गंगा पर तेजी से कार्य चल रहा है। जो गंगा विश्व की दस सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल होती थी, वह आऩे वाले समय में निश्चित ही दुनिया की 10 स्वच्छ नदियों में शामिल होगी। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि ‘जल उपभोक्ता संगठन’ कई राज्यों में ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि जल के जो प्राकृतिक संसाधन हमें अतीत में मिले हैं वह भविष्य में भी उपलब्ध हों।

                केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने दूषित जल प्रबंधन पर और अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उऩ्होंने कहा कि हमारे देश में बड़ी संख्या में जल का दुरूपयोग हो रहा है यदि इसका समुचित प्रबंधन कर लिया जाए तो इस बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा को बचाया जा सकता है। इस एक दिवसीय सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, नदी घाटी प्रबंधन, नदी संरक्षण और  पारिस्थितिकी, बाढ़ प्रबंधन जल प्रयोग कुशलता और सहभागिता सिंचाई प्रबंधन जैसे विषयों पर व्‍यापक विचार-विमर्श हुआ। सम्‍मेलन में राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों के सिंचाई/जल संसाधन मंत्री, जल प्रबंधन क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि और केंद्र एवं राज्य सरकारों के सभी संबंधित विभागों के वरिष्‍ठ अधिकारियों समेत करीब 700 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 

            उल्‍लेखनीय है कि जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने जल संसाधन विकास और प्रबंधन में जुड़े विभिन्‍न पक्षों के बीच व्‍यापक विचार विमर्श की आवश्‍यकता पर समय-समय पर बल दिया है ताकि जल संसाधन विकास को पर्यावरण, वन्‍य जीवों और विभिन्‍न सामाजिक एवं सांस्‍कृतिक पद्धतियों के साथ बेहतर ढ़ंग से जोड़ा जा सके। जल मंथन कार्यक्रमों का आयोजन इसी उद्देश्‍य से किया जाता है। 

Thursday, 12 January 2017

विमुद्रीकरण से आतंक, हवाला कारोबार, मानव तस्‍करी में कमी


            केंद्रीय विधि, न्‍याय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकार के विमुद्रीकरण के फैसले से आतंक, धन पोषण, हवाला कारोबार, सुपारी हत्‍या और मानव तस्‍करी विशेषकर नेपाल तथा पूर्वोत्‍तर की युवतियों की योण शोषण के लिए जैसी तस्‍करी की घटनाओं में कमी आई है। 

केंद्रीय विधि, न्‍याय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद नेकहा कि सरकार टैक्‍स आधार को व्‍यापक बनाने के लिए कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएगी। टैक्‍स आधार बढ़ाए बिना विकास संभव नहीं है। अरुण जेटली के पास विकास कार्यों के लिए सिर्फ पांच लाख करोड़ रुपए हैं। यह बढ़ना चाहिए। 

           नई दिल्‍ली में प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया, इंडियन वोमेन प्रेस कोर और सुप्रीम कोर्ट लायर्स कॉंफ्रेंस द्वारा आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रसाद ने कहा कि एकता और अखंडता की दृष्‍टि से पहले से अधिक मजबूत नया भारत उभर रहा है। यह भारत जाति, पंथ और धर्म की सीमा को पार करते हुए उभर रहा है।  रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकारें आती-जाती रहती हैं। हमारी सरकार परिवर्तनकारी सरकार है। टैक्‍नोलॉजी उपकरण सुशासन में सक्रिय रूप में भूमिका निभा रहे हैं। आज 110 करोड़ आधार कार्ड और 104 करोड़ मोबाइल कनेक्‍शन हैं। डिजिटल गवर्नर का अर्थ तेजी से कार्य संपादित करना है। आज ग्रमीण क्षेत्रों में गरीब और अशिक्षित लोग भी नए विश्‍वास के साथ टैक्‍नोलॉजी अपना रहे हैं।

          उन्‍होंने राजस्‍थान में अलवर के स्‍कूल में गणित शिक्षक इमरान खान का उदाहरण दिया। इमरान खान के मोबाइल एप से 40 लाख बच्‍चों को फायदा हुआ। प्रसाद ने तेलंगना की बीड़ी कर्मी सतामा देवी द्वारा दुबई में अपने पोते से बातचीत करने के लिए स्‍काइप के उपयोग के बारे में सीखने का भी उदाहरण दिया। प्रसाद ने कहा कि वर्तमान सरकार में ऐसे नेता हैं जो आपातकाल के दिनों में छात्र गतिविधियों में शामिल रहे हैं। 

कहा कि सरकार न्‍यायापालिका की स्‍वतंत्रता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्‍होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 1999 के बाद उच्‍च न्‍यायापालिका में सबसे अधिक 126 नियुक्‍तियां हुई हैं। उच्‍च न्‍यायालय के 131 न्‍यायाधीशों की पुष्‍टि की गई है।

बिहार में नारियल खेती के लिए 50000 हेक्टेयर भूमि


            बिहार में नारियल से जुड़ी योजनाओं को लागू करने के लिए 2014 से लेकर कुल 409.06 लाख रुपए नारियल विकास बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए हैं। 

            केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह  ने कहा कि किसान प्रशिक्षण केन्‍द्र राज्‍य में नारियल की खेती और उद्योग को मज़बूत बनाने में मदद करेगा। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार बिहार में नारियल की खेती और इससे जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने लिए कटिबद्ध है। बिहार में नारियल से जुड़ी योजनाओं को लागू करने के लिए 2014 से लेकर कुल 409.06 लाख रुपए नारियल विकास बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए हैं। 

           केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात  नारियल विकास बोर्ड के 37 वें स्थापना दिवस के अवसर पर पटना के वेटरेनरी कॉलेज में नारियल विकास बोर्ड के ‘किसान प्रशिक्षण केन्‍द्र एवं क्षेत्रीय कार्यालय भवन’ के शिलान्यास के मौके पर कही। नारियल विकास बोर्ड की स्थापना 12 जनवरी 1981 को हुई थी। राधा मोहन सिंह ने कहा कि वर्ष 2009 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश के आधार पर नारियल विकास बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय पटना, बिहार से गुवाहटी, असम में अंतरित कर दिया गया। 

           केन्द्रीय सरकार बनने के बाद बिहार की नारियल उत्पादन क्षमता को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय टीम गठित की गयी। इस टीम ने पटना में बोर्ड का नया एवं चौथा क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने की संस्तुति की, जिस पर नारियल विकास बोर्ड ने 119 वीं बोर्ड बैठक में सहमति व्यक्त की । सिंह ने कहा कि भारत नारियल के उत्पादन और उत्पादकता में विश्व में अग्रणी देश हैं। देश में 16 राज्यों और तीन संघ शासित क्षेत्रों में 21.4 लाख हेक्टर क्षेत्र में नारियल की खेती की जाती है। नारियल की खेती, प्रसंस्करण, विपणन और व्यापार संबंधी गतिविधियों से एक करोड से अधिक परिवार अपनी आजीविका चलाते हैं। 

           केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में 14,900 हेक्टर में नारियल की खेती होती है। नारियल का उत्पादन 14.138 करोड है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर बिहार का कोसी क्षेत्र जिसमें कोसी नदी के दोनों तरफ के इलाके आते हैं, नारियल की खेती के लिए उपयुक्त है। अनुमान है कि बिहार में विशेषकर उत्तर बिहार में तकरीबन 50000 हेक्टर क्षेत्र में सिंचित स्थिति में नारियल की खेती की जा सकती है। राधा मोहन सिंह कहा कि नारियल विकास बोर्ड का लक्ष्य है कि नारियल किसानों को नारियल के उत्पादन, प्रसंकरण, विपणन और नारियल एवं मूल्यवर्धित  उत्पादों के निर्यात में सहायता देकर भारत को नारियल के उत्पादन, उत्पादकता, प्रसंस्करण एवं निर्यात में अग्रणी बनाना। बिहार नारियल की खेती के गैर पारंपरिक क्षेत्रों में आता है। राज्य में नारियल क्षेत्र के विकास को बोर्ड विशेष ध्यान देता है।

      केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पटना में क्षेत्रीय कार्यालय भवन के निर्माण के साथ ही किसान प्रशिक्षण केन्‍द्र की स्‍थापना की भी पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान प्रशिक्षण केन्‍द्र किसानों को कौशल विकास दिलाने के लिए है। यह केन्‍द्र राज्‍य में नारियल की खेती और उद्योग को मज़बूत बनाने में मदद करेगा।

पनडुब्बी ‘खंदेरी’ बनेगी भारतीय नौसेना की शान


            रक्षा राज्यमंत्री डॉ सुभाष भामरे ने भारतीय नौसेना की स्कार्पीन क्लास स्टेल्थ पनडुब्बी श्रृंखला की दूसरी पनडुब्बी खंदेरी का उद्घाटन किया। इससे इसके समुद्री परीक्षणों का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 

         मझगांव गोदी शिपयार्ड लिमिटेड में नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लाम्बा और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। यह पनडुब्बी इस वर्ष के अंत तक नौसेना को सौंपे जाने की संभावना है। मझगांव डाक शिपयार्ड लिमिटेड (एमडीएल) में वर्तमान में प्रोजेक्ट 75 के अंतर्गत 6 स्कार्पीन पनडुब्बियों का निर्माण प्रगति पर है। इसके लिए फ्रांस की सहयोगी कम्पनी मैसर्स डीसीएनएस ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरित की है। स्कार्पीन वर्ग की प्रथम कलवरी के वर्तमान में समुद्री परीक्षण चल रहे हैं। 2017 के मध्य में इसे नौसेना में शामिल कर लिए जाने की संभावना है। 

        ये पनडुब्बियां नौसेना में शामिल होने के बाद उसके परम्परागत पनडुब्बी विभाग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएंगी। डॉ सुभाष भामरे ने कहा कि प्रोजेक्ट 75 कलवरी देश के लिए आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण की दिशा में मील का पत्थर है। नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लाम्बा ने कहा कि यह एक तथ्य है कि ‘‘खंदेरी’’ की तुलना दुनिया की श्रेष्ठतम पनडुब्बियों से की जा सकती है। 

           हमारे जहाज निर्माताओं ने पिछले वर्षों में इसके निर्माण में उच्च अनुभव और विशेषज्ञता अर्जित की है। कहा कि 2017 में नौसेना का पनडुब्बी विभाग अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। ऐसे में प्रोजेक्ट 75 की पनडुब्बियां नौसेना के बेड़े में शामिल होने से देश की पनडुब्बी क्षमताओं में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।

 

Wednesday, 11 January 2017

20 लाख से अधिक आबादी वाले 31 शहरों में रेल परियोजनाएं

        शहरी विकास, आवास, शहरी गरीबी उपशमन, सूचना और प्रसारण मंत्री वेकैंया नायडू ने कहा कि भारत में शहरी पुनर्जागरण का दौर चल रहा है। 20 लाख से अधिक आबादी वाले 31 शहरों में रेल परियोजनाएं लागू की जा रही हैं ।

           नायडु गांधीनगर में वाइब्रेंट गुजरात समिट में स्मार्ट और रहने योग्य शहरों में आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस शहरी विकास पर है क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद का 65 प्रतिशत शहरों से प्राप्त होता है। शहर विकास के इंजन हैं। शुरूआती चरण में सरकार ने 100 शहरों को चिन्हित किया है। इनमें से 60 शहरों में तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। इन 60 शहरों में अहमदाबाद और सूरत शामिल हैं। अहमदाबाद को एए रेटिंग मिली है। सूरत भी ऊंची रेंकिंग के साथ स्पेशल पर्पस व्हेकिल के माध्यम से विकास कार्य कर रहा है। गांधीनगर और बडोदरा सहित गुजरात के चार शहरों में शीघ्र ही कार्य शुरू होगा। अहमदाबाद में 32 किलोमीटर की मेट्रों रेल परियोजना का काम तेजी से चल रहा है जिसमें 11000 करोड़ रूपये का निवेश हुआ है। परियोजना के 2018 तक पूरी हो जाने की आशा है। 

         नायडू ने कहा कि 20 लाख से अधिक आबादी वाले 31 शहरों में रेल परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। बाद में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में परियोजना शुरू की जाएगी। नायडू ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखी गई अमृत योजना और विरासत शहरों का भी जिक्र किया। नायडु ने कहा कि प्रधानमंत्री कोई लोकलुभावन कार्य नहीं करना चाहते। प्रधानमंत्री लोगों के बेहतर जीवन के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने गुजरात के विकास मॉडल को अनूठा बताते हुए कहा कि बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आन्ध्र प्रदेश तथा तेलंगाना इस विकास मॉडल को अपना रहे हैं। 

      नायडु ने कहा कि प्रधानमंत्री व्यापक बदलाव के लिए जनसाधारण को तैयार कर रहे हैं। आवासीय ऋणों पर ब्याज दरों में रियायत की प्रधानमंत्री की घोषणा और बैंकों द्वारा हाल में घटाई गई ब्याज दरों से आशा है कि 2022 तक सबका अपना घर होगा। 



 

सड़क सुरक्षा में शामिल स्वयंसेवी संगठनों को 2 लाख


          सड़क परिवहन, राजमार्ग और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि मंत्रालय सड़क सुरक्षा गतिविधि में शामिल होने वाले स्वयंसेवी संगठनों को 2 लाख रूपये तक अनुदान देगा। 

        गडकरी नई दिल्ली में सड़क सुरक्षा पर काम करने वाले स्वयंसेवी संगठनों की राष्ट्रीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। गडकरी ने कहा कि सड़कों को सुरक्षित बनाने में सबसे अधिक जरूरत नागरिकों की भागीदारी की है। उन्होंने स्वयंसेवी संगठनों से कहा कि वे यातायात के नियमों तथा सड़क सुरक्षा से संबंधित अन्य विषयों के प्रति जनसाधारण को जागरूक बनाए। वे स्थानीय सांसद को दुर्घटना वाले क्षेत्रों की पहचान करने और निदान के उपाय करने में सहायता दें। इस राष्ट्रीय बैठक में लगभग 170 स्वयंसेवी संगठनों ने सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। देश में सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति को दिखाने के लिए प्रजेंटेशन दिया गया। सड़क सुरक्षा के इंजीनियरिंग समाधान के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई और इस संबंध में उठाए जा रहे कदमों पर विचार किया गया।

दिव्‍यांगजन (विकलांग) सशक्तिकरण के लिए ‘सुगम्‍य भारत अभियान’


          सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत की अध्‍यक्षता में ‘‘सुगम्‍य भारत अभियान’’ की योजना पर दिव्‍यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति बैठक का आयोजन किया गया। 

            गहलोत ने कहा कि दिव्‍यांगजन सशक्तिकरण विभाग की स्‍थापना 12 मई, 2012 को की गई थी। विकलांग व्‍यक्तियों को अब दिव्‍यांगजन के रूप में संबोधित किया जाता है। यह विभाग दिव्‍यांगजन प्रशासन (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 95 के लिए उत्तरदायी है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल 2.68 करोड़ दिव्‍यांगजन हैं जो कुल जनसंख्‍या का 2.21 प्रतिशत हैं। 

         प्रधानमंत्री ने 3 दिसम्‍बर, 2015 को पर्यावरण, परिवहन प्रणाली और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) पारिस्थितिकी में दिव्‍यांगजनों के लिए सार्वभौमिक पहुंच बनाने हेतु ‘सुगम्‍य भारत अभियान’ का शुभारंभ किया था। इस अभियान के पीछे का दर्शन दिव्‍यांगजनों का एक सामाजिक मॉडल है। लक्ष्‍यों को अभियान की रणनीति के दस्‍तावेज तैयार कर लिये गये हैं। अभियान में देश के 50 शहरों में 25 से 50 सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण सरकारी भवनों की सुगम्‍यता जांच को पूर्ण करना, राष्‍ट्रीय राजधानी और राज्‍य की सभी राजधानियों के सभी सरकारी भवनों के 50 प्रतिशत को पूर्ण सुगम्‍य बनाना, सरकारी भवनों के 50 प्रतिशत सुगम्‍यता परीक्षण को पूर्ण करना।:अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डों के सुगम्‍यता परीक्षण को पूर्ण करना और उन्‍हें पूरी तरह सुगम्‍य बनाना। सभी घरेलू हवाई अड्डों के सुगम्‍यता परीक्षणों को पूर्ण करना और उन्‍हें पूरी तरह सुगम्‍य बनाना।

           रेलवे स्‍टेशनों की ए और बी श्रेणियों को पूर्ण सुगम्‍य बनाया जायेगा और सभी रेलवे स्‍टेशनों के 50 प्रतिशत को मार्च, 2018 तक पूर्ण सुगम्‍य बनाया जायेगा। केंद्र और राज्‍य सरकार की कम से कम 50 प्रतिशत वेबसाइटों को सुगम्‍यता मानक पूरे करने होंगे। सार्वजनिक दस्‍तावेजों के कम से कम 50 प्रतिशत को सुगम्‍यता मानक पूरे करने होंगे।

भारत की धरती पर 1,62,250 विदेशी पर्यटकों की मौज-मस्ती 


            ई-पर्यटक वीजा पर देश में कुल मिलाकर 1,62,250 विदेशी पर्यटकों का आगमन हुआ, जबकि दिसंबर 2015 में 1,03,617 विदेशी पर्यटक आए थे। इस तरह दिसंबर, 2016 में ई-पर्यटक वीजा पर आए विदेशी पर्यटकों की संख्‍या में दिसंबर, 2015 की तुलना में 56.6 प्रतिशत वृद्धि है। दिसंबर, 2016 के दौरान ई-पर्यटक वीजा सुविधा का लाभ उठाने वाले देशों में ब्रिटेन (22.4 प्रतिशत) लगातार शीर्ष स्‍थान पर डटा रहा।

         इसके बाद क्रमश: अमेरिका (16.4 प्रतिशत) और रूसी संघ (7.7 प्रतिशत) रहे। भारत सरकार देश में 16 अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डों पर 150 देशों के नागरिकों को ई-पर्यटक वीजा सुविधा उपलब्‍ध कराई गई है। दिसंबर, 2016 के दौरान ई-पर्यटक वीजा सुविधा का लाभ उठाने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्‍या में दिसंबर, 2015 की अवधि की तुलना में वृद्धि हुई। दिसंबर, 2016 के दौरान और दिसंबर 2016 तक की अवधि के दौरान ई-पर्यटक वीजा की मुख्य बातें रहीं। ई-पर्यटक वीजा पर कुल मिलाकर 1,62,250 विदेशी पर्यटक आए, जबकि दिसंबर 2015 में 1,03,617 विदेशी पर्यटक आए थे। जनवरी-दिसंबर, 2016 के दौरान ई-पर्यटक वीजा पर कुल मिलाकर 10,79,696 विदेशी पर्यटक आये, ज‍बकि जनवरी-दिसंबर, 2015 में यह संख्‍या 4,45,300 थी। यह 142.5 प्रतिशत वृद्धि है।  

           यह बढ़ोतरी 161 देशों के लिए ई-पर्यटक वीजा सुविधा की पेशकश करने से हो पाई , जबकि पहले यह संख्या केवल 113 ही थी। दिसंबर, 2016 के दौरान ई-पर्यटक वीजा सुविधाओं का लाभ उठाने वाले शीर्ष 10 स्रोत देशों की हिस्सेदारी रही। इनमें  ब्रिटेन 22.4 प्रतिशत, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका 16.4 प्रतिशत, रूसी संघ 7.7 प्रतिशत, चीन 5.3 प्रतिशत, ऑस्‍ट्रेलिया 4.6 प्रतिशत, फ्रांस 4.1 प्रतिशत, जर्मनी 4.0 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका 3.7 प्रतिशत, कनाडा 3.7 प्रतिशत, कोरिया गणराज्‍य 2.0 प्रतिशत रही। दिसंबर, 2016 के दौरान ई-पर्यटक वीजा पर आए विदेशी पर्यटकों के मामले में शीर्ष 10 हवाई अड्डों की हिस्सेदारी रही।

           इनमें नई दिल्ली हवाई अड्डा 36.6 प्रतिशत, मुंबई हवाई अड्डा 23.1 प्रतिशत, डाबोलिम (गोवा) हवाई अड्डा 13.6 प्रतिशत, चेन्नई हवाई अड्डा 6.0 प्रतिशत, बेंगलुरू हवाई अड्डा 5.1 प्रतिशत, कोच्चि हवाई अड्डा 4.7 प्रतिशत, कोलकाता हवाई अड्डा 2.5 प्रतिशत, हैदराबाद हवाई अड्डा 2.4 प्रतिशत, तिरुअनंतपुरम हवाई अड्डा 1.9 प्रतिशत और अहमदाबाद हवाई अड्डा 1.7 प्रतिशत रही ।

Tuesday, 10 January 2017

भारतीय रेल पर हर दिन 22.3 मिलियन यात्रियों का बोझ

     
            भारतीय रेल रेलों से प्रतिदिन करीब 22.3 मिलियन आरक्षित और अनारक्षित यात्रियों को उनके गंतव्य पर पहुंचाती है। इन यात्रियों से प्राप्त होने वाला दैनिक राजस्व करीब 130 करोड़ रुपये है। जिसमें से 80 करोड़ रुपये आरक्षित से, 42 करोड़ रूपये गैर उपनगरीय से और 8 करोड़ रुपये उपनगरीय से होते हैं।

        रेलमंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने डिजिटल लेन-देन के माध्यम से गैर किराया राजस्व में वृद्धि के लिए नीति पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों में आउट ऑफ होम विज्ञापन, मांग पर सामग्री, रेलों की ब्रॉंडिंग, गैर किराया राजस्व नीति, एटीएम नीति और आसान टिकट प्रक्रिया को प्रोत्साहन देना शामिल है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर रेल नेटवर्क पर एक वृत्तचित्र फिल्म भी जारी की। रेलमंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। भारतीय रेल में गैर-किराया राजस्व वृद्धि के लिए बहुत से नए सृजनात्मक अभिनव विचारों और गैर किराया राजस्व में कई नीति पहलों को शामिल कर लिया गया है। 

         डिजिटल लेन-देन से टिकिट प्रक्रिया को आसान बनाने की भी कई पहलें की गई हैं। इनमें आईआरसीटीसी कनेक्ट एप के अलावा मोबाइल एप पर यूटीएस पर अतिरिक्त भुगतान विकल्प शामिल है। वर्तमान में सिर्फ आर-वॉलेट के माध्यम से ही भुगतान विकल्प हैं। निजी वॉलेट्स (पेटीएम और मोबिक्विक) के माध्यम से नकदी रहित भुगतान सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त भविष्य में और अधिक वॉलेट्स (जैसे एसबीआई बडी) को भी समाकलित किया जाएगा। अप्रैल से नवम्बर, 2016 की अवधि के दौरान नकदी रहित आय का प्रतिशत आरक्षित वर्ग में 58 प्रतिशत था, गैर उपनगरीय में 7 प्रतिशत और उपनगरीय में 4 प्रतिशत था। 

        भारतीय रेल में नकदी रहित भुगतान को प्रोत्साहन देने के क्रम में आईवीआरएस के माध्यम से आरक्षित और अनारक्षित दोनों ही मामलों में टिकटिंग और कार्डों के द्वारा भुगतान की सुविधा के लिए पवाइंट और सेल मशीनें (पीओएस), स्टेशनों पर टिकट वेंडिंग मशीनें, इंटरनेट और मोबाइल एप्लीकेशन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ वॉलेट के माध्यम से अतिरिक्त नकदी रहित भुगतान विकल्पों की सुविधा प्रदान की जा रही है। 

           करीब 2084 स्थलों पर 2967 पीओएस मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं । इसके अलावा उपनगरीय स्टेशनों (483 स्टेशन) और ए1, ए और बी श्रेणी के स्टेशनों (709 स्टेशन) के सभी आरक्षण केंद्रों (3300) पर पीओएस मशीनें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। महत्वपूर्ण गैर-उपनगरीय स्टेशनों को भी पीओएस मशीनें प्रदान की जायेंगी। पीआरएस केंद्रों पर पीओएस मशीनों से कुल दैनिक आय का 3.5 से 4 प्रतिशत के करीब है। आरक्षित वर्ग में नकदी रहित लेनदेन के प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की गई है। यह वर्ष 2015-16 के औसत 58 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 68 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अनारक्षित वर्ग में भी वृद्धि दर्ज की गई है। यह 6.5 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

पशुओं के लिए भारत में अभी तक कोई समग्र कानून नहीं !

           
        पशुओं की रक्षा-सुरक्षा के लिए भारत में अभी तक कोई समग्र कानून नहीं है। हालांकि अब भारत सरकार पशु कल्याण, रक्षा-सुरक्षा के लिए कानून बनाने की दिशा में संवेदनशील है।

           कानून का मसौदा तैयार है। अब देश के बाशिंदों से सुझाव मांगे गये हैं। नए कानून के तहत पशुओं खास तौर कुत्ता आदि की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त की जा सकेगी। पशुओं को अनावश्यक दर्द से मुक्ति दिलाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता (स्वान प्रजनन और विपणन) निवारण नियम, 2016 की अधिसूचना पर सुझाव आमंत्रित किए है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पशु क्रूरता (स्वान प्रजनन और विपणन) निवारण नियम, 2016 की अधिसूचना पर सुझाव आमंत्रित किए हैं।

             मंत्रालय सार्वजनिक जानकारी के लिए भारत के राजपत्र में प्रस्तावित मसौदा नियम अधिसूचित करेगा। कोई भी इच्छुक व्यक्ति नियमों के प्रकाशित होने के 30 दिनों के भीतर केन्द्र सरकार को प्रारूप के लिए अपने लिखित सुझाव भेज सकता है। सुझाव उप सचिव, पशु कल्याण प्रभाग, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली को भेज सकते हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा कि अब तक देश में स्वान के प्रजनन, बिक्री और खरीद पर कोई नियम नहीं थे। मंत्री ने उम्मीद जताई कि स्वान की खरीद और बिक्री को ऑनलाइन बना दिया जाएगा। 

        नियमों का उद्देश्य स्वान प्रजनकों और उनके विपणकों को जवाबदेह बनाना और इस प्रक्रिया में किसी भी क्रूरता की सजा से बचाना है। इसमें प्रजनकों और प्रतिष्ठानों के अनिवार्य पंजीकरण से संबधित कोई विशेष नियम या दिशा- निर्देश भी नहीं हैं। स्वान के प्रजनन और उनके विपणन व्यापार नियमों में भी तेजी से विकास किया जाएगा। 

          प्रस्तावित नियमों में, सभी स्वान प्रजनकों और स्वान प्रजनन प्रतिष्ठानों को संबंधित राज्य सरकारों के राज्य पशु कल्याण बोर्ड के साथ खुद को अनिवार्य रुप से पंजीकृत कराना होगा। स्वान प्रजनकों के लिए यह अनिवार्य है कि वह नर और मादा स्वान के नस्लों, ब्रिकी, खरीद, मौत की संख्या, पुनर्वास आदि का समुचित रिकॉर्ड बनाए रखें। हर स्वान प्रजनक को प्रतिवर्ष स्वान की ब्रिकी, व्यापार या अन्य जानकारी की वार्षिक रिपोर्ट राज्य बोर्ड को प्रस्तुत करनी आवश्यक होगी।

चौबीस घंटे बिजली’का रोडमैप

           
         भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने दिल्‍ली में तमिलनाडु के साथ उज्‍ज्‍वल डिस्‍कॉम आश्‍वासन योजना (उदय) के लिए एक सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर किये। 

         यही नहीं, इस राज्‍य के साथ ‘सभी के लिए चौबीस घंटे बिजली रोडमैप के दस्‍तावेज पर हस्‍ताक्षर करने के साथ ही देश में एक को छोड़ सभी 28 राज्‍यों और सभी सातों केन्‍द्र शासित प्रदेशों के लिए रोडमैप को अब अंतिम रूप दे दिया गया है। इसका क्रियान्‍वयन शुरू कर दिया गया है। यह सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर आधारित इस पहल की दिशा में सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण मील का पत्‍थर है। वर्ष 2019 तक सभी नागरिकों, प्रतिष्‍ठानों को विश्‍वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुलभ कराना भारत के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के राष्‍ट्रीय विजन के मूल में है। 

          विद्युत मंत्रालय का लक्ष्‍य इसे मूर्त रूप प्रदान करना है। पीएफए से कई राज्‍यों को निवेश से संबंधित खाई को पाटने में भी मदद मिली है, जो सभी के लिए चौबीस घंटे बिजली सुनिश्चित करने हेतु अत्‍यंत आवश्‍यक है। चूंकि विद्युत एक समवर्ती विषय है। सरकार का फोकस सहकारी संघवाद पर है, इसलिए पहला मुख्‍य काम प्रत्‍येक राज्‍य के लिए रोडमैप तैयार करना, उस पर सहमति प्राप्‍त करना था।

          विद्युत मंत्रालय और केन्‍द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के  तहत हर राज्‍य के लिहाज से विशिष्‍ट रोडमैप तैयार किये गये। पीएफए’ पहल के तहत राज्‍यों के प्रयासों में और वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय अब उन सभी घरों में अंतिम छोर तक बिजली मुहैया कराने के लिए आवश्‍यक निवेश का वित्त पोषण करने हेतु विशेष योजना तैयार कर रहा है। जिन्‍हें अब तक दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) और अन्‍य राज्‍य स्‍तरीय योजनाओं के दायरे में नहीं लाया जा सका है।
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फिल्‍म सह-निर्माण के लिए भारत व पुर्तगाल के बीच समझौता !

             भारत के सूचना और प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौड़ और पुर्तगाल के संस्‍कृति मंत्री लुईस फिलीप कास्‍त्रो मेंडेस के बीच बैठक में फिल्‍म सह-निर्माण की चर्चा की गई। 

       भारत और पुर्तगाल ने फिल्‍म क्षेत्र में सह-निर्माण समझौते के तौर तरीके तैयार करने पर सहमति व्‍यक्‍त की है। ऐसे समझौतों के वैधानिक पहलुओं को ध्‍यान में रखते हुए इस समझौते को समय सीमाबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा। दोनों देशों के सरकारी प्रसारकों के बीच समझौता की संभावनाओं और बेहतरीन तरीकों तथा तकनीकी एवं सामग्री से संबंधित मुद्दों पर सहयोग के बारे में भी चर्चा की गई। सूचना और प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौड़ और पुर्तगाल के संस्‍कृति मंत्री लुईस फिलीप कास्‍त्रो मेंडेस के बीच के हुई बैठक में यह चर्चा की गई। 

              विचार-विमर्श के दौरान कर्नल राठौड़ ने पुर्तगाल के मंत्री को देश में फिल्‍म सुविधा कार्यालय के जरिए विदेशी फिल्‍म निर्माताओं को मंजूरी के लिए एकल खिड़की उपलब्‍ध कराने की सूचना और प्रसारण मंत्रालय की पहल के बारे में जानकारी दी। उन्‍होंने देश की समृद्ध फिल्‍मी धरोहरों का डिजीटीकरण और उन्‍हें संरक्षित करने के सरकार के प्रतिष्ठित राष्‍ट्रीय फिल्‍म विरासत अभियान के बारे में भी बताया। 

          इस अवसर पर मंत्री ने पुर्तगाल के मंत्री को देश में पत्रकारिता और फिल्‍म निर्माण के प्रमुख शैक्षिक संस्‍थानों क्रमश: भारतीय जनसंचार संस्‍थान (आईआईएमसी) और भारतीय फिल्‍म और टेलीविजन संस्‍थान (एफटीआईआई) के बारे में भी बताया। दोनों देशों के शैक्षिक संस्‍थानों के छात्रों का एक दूसरे के संस्‍थानों में पढ़ने की संभावनाओं पर भी दोनों मंत्रियों ने चर्चा की। दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा,सूचना और संचार प्रौद्योगिकी तथा स्‍टार्ट-अप के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी बातचीत की। मंत्रियों ने पहुंच बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया के बेहतर तरीकों और अनुभवों को साझा करने पर भी दिलचस्‍पी दिखाई।   

आर्थिक, व्यापार-उद्योग विकास में सहभागी बनेंगे जापान एवं भारत


          वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने जापान के आर्थिक, व्‍यापार एवं उद्योग मंत्री हीरोशिगे सीको की अगुवाई में आये जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्‍वागत किया। 

             इस बात को स्‍मरण किया कि नवम्‍बर, 2016 में भारत के प्रधानमंत्री की जापान यात्रा दोनों देशों के आपसी भागीदारी को और मजबूत करने के लि‍हाज से अत्‍यंत सफल रही थी। उन्‍होंने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्‍मेलन के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ सार्थक चर्चाएं होने की उम्‍मीद जताई। कहा कि भारत-जापान व्‍यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के क्रियान्‍वयन की गति कमोबेश स्थिर रही है। इसकी गति तेज करने की जरूरत है, ताकि भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार की व्‍यापक संभावनाओं का दोहन किया जा सके। 

            जापान के आर्थिक, व्‍यापार एवं उद्योग मंत्री हीरोशिगे सीको ने ‘मेक इन इंडिया’ के लिए भारत सरकार द्वारा उठाये गये विभिन्‍न कदमों और भारत के विकास के लिए की गई अन्‍य पहलों का स्‍वागत करते हुए कहा कि भारत-जापान सहयोग बढ़ाने की काफी गुंजाइश हैं। उन्‍होंने इस बात का उल्‍लेख किया कि 25 जापानी कंपनियां बड़े ही उत्‍साह के साथ वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्‍मेलन में शिरकत कर रही हैं। 

        जापानी प्रतिनिधिमंडल ने यह आग्रह किया कि भारत में जापान के वाणिज्‍य एवं उद्योग मंडलों (जेसीसीआईआई) द्वारा समय-समय पर उठाये जाने वाले ट्रांसफर प्राइसिंग आकलन के मुद्दे के साथ-साथ अन्‍य मसलों को भी सुलझाये जाने की जरूरत है, ताकि भारत में और ज्‍यादा जापानी निवेश आकर्षित किया जा सके। जापान के व्‍यावसायिक प्रतिनिधियों ने भारत में अपने कारोबार के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही यह भी बताया कि वे भारत में विभिन्‍न क्षेत्रों में अपने व्‍यवसाय का विविधीकरण करना चाहते हैं। इनमें कृषि, वि‍द्युत, रेलवे व लॉजिस्टिक क्षेत्र और एटीएम का निर्माण इत्‍यादि शामिल हैं। 

            उन्‍होंने कहा कि वे भारत के विकास में अपनी ओर से योगदान करना चाहते हैं। श्रीमती सीतारमण ने भारत से जापान को होने वाले विभिन्‍न उत्‍पादों के नि‍र्यात में वृद्धि के लिए जापानी प्रतिनिधिमंडल से आवश्‍यक कदम उठाने का अनुरोध किया। इनमें तिल के बीज, सुरिमी फिश और भारतीय जेनेरिक दवाएं शामिल हैं।  दोनों पक्षों ने यह उम्‍मीद जताई कि वचनबद्धता के निरंतर जारी रहने से दोनों देशों के बीच साझेदारी और ज्‍यादा बढ़कर नये स्‍तर पर पहुंच जायेगी। 

 

Monday, 9 January 2017

सड़क दुर्घटना स्थलों के सुधार पर खर्च होंगे 11000 करोड़


               भारत सरकार के सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में इंडिया गेट से सड़क सुरक्षा दौड़ को झंड़ी दिखाई। गडकरी ने कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं और उससे जुड़ी मृत्यु की संख्या को 50 प्रतिशत तक घटाने में मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया। 

          मंत्रालय सड़क सुरक्षा हेतु इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपातकालीन देखभाल जैसे मुद्दों पर कार्य कर रहा था। कहा कि पहचाने गए सर्वाधिक दुर्घटना वाले स्थलों को सुधारने पर 11,000 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे ऐसे स्थलों की रिपोर्ट मंत्रालय से करें जहां बहुत अधिक दुर्घटनाएं होती रहती हैं ताकि सड़कों के इंजीनियरिंग दोषों को दूर करने के लिए कदम उठाए जा सकें। गडकरी ने कहा कि फ्लाईओवर, अंडरपास, क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप्स, यातायात चिन्हों को उचित तरीके से लगाया गया था ताकि आदि दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। 


          गडकरी ने उम्मीद जाहिर की कि मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, जांच के लिए परिवहन, पर्यटन और संस्कृति विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति के पास है। इसे संसद के अगले सत्र में पारित कर दिया जाएगा। यह विधेयक कड़े दंड, इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन की अनुमति देने,  फिटनेस प्रमाण पत्र और लाइसेंसिंग व्यवस्था में सुधार लाने और अच्छी तथा मान्य आईटी सक्षम प्रवर्तन प्रणालियां उपलब्ध कराकर सड़क सुरक्षा के मुद्दों का निपटान करेगा। यह विधेयक सार्वजनिक परिवहन में सुधार लाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा जिससे सड़क सुरक्षा सुधारने में मदद मिलेगी। इस विधेयक में दुर्घटना के शिकार लोगों का जीवन बचाने के लिए महत्वपूर्ण समय के दौरान इलाज का प्रावधान है जिससे मूल्यवान जीवन बचाने में मदद मिलेगी।
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अब पैन से जुडे़गा बैंक खाता

जी हां, भारत सरकार आर्थिक लेन-देन को आयकर विभाग से जोड़ने की कोशिश में लगी है। इसके लिए अब देश के बाशिंदों को बैंक खातों में पैन कार्ड-पैन संख्या दर्ज करानी होगी। 

           इसके लिए उपभोक्ताओं को बैंक में आवश्यक अभिलेख दाखिल करने होंगे। आयकर नियमों में संशोधन कर यह प्रावधान किया गया है कि बैंक सभी वर्तमान बैंक खातों में पैन या फॉर्म नं. 60 प्राप्त करेंगे। उन्हें पैन के साथ जोडेंगे, अगर पहले से ऐसा नहीं किया गया है। 

            इस संबंध में उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने  अदेशित किया है कि वैसे खातों से नकदी की निकासी की अनुमति नहीं दी जाएगी जिनमें भारी मात्रा में क्रेडिट शेष/जमाएं हैं, अगर ऐसे खातों के संबंध में पैन या फॉर्म नं. 60 उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए ऐसे व्यक्तियों को, जिनके पास बैंक खाते हैं लेकिन जिन्होंने पैन या फॉर्म नं. 60 जमा नहीं किए हैं, वे बैंक में पैन या फॉर्म नं. 60 उपलब्ध करा दें।

Sunday, 8 January 2017

भारत में  दलित, आदिवासी, पिछड़े व महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता

          भारत में  दलित, आदिवासी, पिछड़े व महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता मिलेगी । इसकी हलचल भारत सरकार के मंत्रालयों में दिख रही। 

            शासकीय योजनाओं के तहत अब किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध करने के लिए नाबार्ड के कोष में 20,000 करोड़ रूपये दिये गये हैं। इसी तरह रबी की फसल के लिए 60 दिन का बिना ब्याज का ऋण, 3 करोड़ किसान क्रेडिट कार्डों को रूपे डेबिट कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ग्रामीण आवासों में 33 प्रतिशत की वृद्धि, दलित आदिवासी, पिछड़े और महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 10 साल की सावधि जमा पर 8 प्रतिशत ब्याज, 12 लाख के गृह निर्माण ऋण पर ब्याज में छूट, संस्थागत प्रसव पर 6000 रूपये की सहायता राशि सीधे प्रसूता के खाते में, छोटे और मंझोले उद्योगों के ऋणों की गारंटी 20 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत की होगी। 

        मध्यम छोटे एवं लघु व्यापारियों के लिए ऋण प्रवाह में वृद्धि होगी क्‍योंकि इतनी अधिक मात्रा में नकद जमा होने के बाद बैंक आसानी से उधार दे सकेंगे। इससे आर्थिक कार्यकलापों रोजगार सृजन में तेजी आएगी। पिछले कुछ वर्षों से पूंजी के अधिक प्रवाह के कारण रियल स्टेट के मूल्यों में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही थी। अधिक मात्रा में नगद जमा होने के कारण बैकों को ब्याज दर घटाने का अवसर मिलेगा, जिससे सामान्यत: ऋण की मांग और विशेष रूप से आवास ऋण में वृद्धि होगी। इससे आवास की मांगों में भी वृद्धि होगी तथा रियल स्टेट के मूल्यों में कमी होगी। 

            विमुद्रीकरण से बैंकों के पास उपलब्‍ध जमा राशि में वृद्धि होगी। देश में 100 करोड़ से ज्यादा फोन हैं जिसमें से 30-40 करोड़ स्मार्टफोन हैं एवं करीब 50 करोड़ इंटरनेट के उपभोक्ता हैं। अगर इनका सही से इस्तेमाल किया जाए तो क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं है। 147 करोड़ बैंक अकाउंट में से 117 करोड़ सेविंग अकाउंट एवं 25 करोड़ जनधन अकाउंट हैं। कुल आधार कार्ड 107 करोड़, 40 करोड़ बैंक अकाउंट आधार कार्ड से जुड़े हैं, 75 करोड़ से ज्यादा डेबिट कार्ड भारत की डिजिटल कारोबारी व्यवस्था के विकास हेतु एक सक्षम प्लेटफार्म है। देश भर में 20 करोड़ लोगों के पास रूपे कार्ड है जिसका इस्तेमाल वर्तमान में 40 प्रतिशत बढ़ा है।

भारत की आबादी सवा अरब, आयकर रिटर्न सिर्फ 3.7 करोड़ ! 

            केन्द्रीय वित्त् मंत्री अरुण जेटली ने इस आशय के संकेत दिये हैं कि वर्ष 2015-16 में कुल जनसंख्या 125 करोड़ में केवल 3.7 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया। इनमें 99 लाख लोगों ने 2.5 लाख रुपये से अपनी आय कम दिखाई। 

        इन्होंने कोई कर का भुगतान नहीं किया, 1.95 करोड़ लोगों ने अपनी आय पांच लाख रुपये से कम दिखाई, 52 लाख लोगों ने अपनी आय पांच से दस लाख रुपये के बीच दिखाई। केवल 24 लाख लोगों ने अपनी आय दस लाख रुपये से अधिक दिखाई। इसके लिए कोई ठोस प्रमाण की जरूरत नहीं कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यकक्ष कर दोनों के मामले में भारत अभी भी कर अदा करने के मामले में बड़ा गैर- अनुपालना वाला समाज बना हुआ है। गरीबी उन्मूलन, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए जरूरी व्यय के मामले पर कर अदा न करने के कारण समझौता करना पड़ा है।

              सात दशक तक एक सामान्य भारतीय नकदी और चेक द्वारा लेन-देन करता रहा है। ‘पक्का ’ और ‘कच्चा ’ खाता व्यापार की भाषा है। कर चोरी न तो गलत माना जाता है और न ही अनैतिक। यह जीने का एक रास्ता था। कई सरकारों ने सार्वजनिक हितों से समझौते के बाद भी इसे ‘सामान्य’ रूप से चलने दिया। प्रधानमंत्री के निर्णय का इरादा एक नया ‘सामान्य’ बनाने का है। यह भारत और भारतीयों के खर्च करने की रुपरेखा में परिवर्तन चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उच्चतर मूल्य वर्ग के करेंसी नोटों के लीगल टेंडर होने की समाप्ति के निर्णय को दो महीने बीत चुके हैं। परिणामस्वरूप उन नोटों का विमुद्रीकरण हो गया है। जब किसी देश की 86 प्रतिशत करेंसी जो कि उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 12.2 प्रतिशत है, को बाजार से निचोड़कर बाहर फेंका जाएगा। इसके स्थान पर नई मुद्रा लाई जाएगी तो स्पष्ट तौर पर इस निर्णय के महत्वपूर्ण परिणाम होंगे।

          नरेंद्र मोदी सरकार का पहले दिन से ही यह एकदम स्पष्ट था कि वह छाया अर्थ व्यवस्था और काले धन के खिलाफ कदम उठाएगी। इस दिशा में सरकार का सर्वोच्‍च न्यायलय के आदेश पर एसआइटी का गठन करना पहला कदम था। प्रधानमंत्री ने ब्रिसबेन में जी-20 देशों के सम्मेलन में इसका प्रस्ताव दिया था कि आधार के अपक्षरण और लाभ के हस्तांरतरण की दिशा में सूचना साझेदारी के अंतरराष्ट्रीय सहयोग की गति तेज की जानी चाहिए। इस उद्देश्य को अमेरिका के साथ की गई व्यवस्था ने आगे बढ़ाया। राजग सरकार ने स्विटजरलैंड के साथ 2019 से लागू होने वाली व्यववस्था को भी पूरा किया। इसके तहत स्विटजरलैंड में रखे गए भारतीय नागरिकों के धन का विस्तृत विवरण और इसी तरह भारत में स्विस नगरिकों के धन के बारे में एक-दूसरे को सूचना देने का प्रावधान है। 

           वर्ष 1996 से मॉरिशस के साथ चली आ रही दोहरा कर बचाव संधि पर फिर बातचीत की जा रही है। संधि प्रभावी ढंग से वापसी (राउंड ट्रिपिंग) को बढ़ावा देने वाली है। इसी तरह की संधियों पर साइप्रस और सिंगापुर के साथ भी फिर से बातचीत हुई। भारत के बाहर अवैध संपत्ति से संबंधित काले धन कानून ने एक खिड़की खोली है जिसके तहत ऐसे खुलासों के लिए 60 प्रतिशत कर के साथ दस साल की कैद का प्रावधान है। 45 प्रतिशत कर वाली आयकर खुलासा घोषणा स्कीम (आईडीएस)-2016 सफल रही। काले धन के जरिये खर्च करने पर दो लाख से अधिक के खर्च पर पैन कार्ड अनिवार्य करने से बाधा पैदा हुई है। सन् 1988 में बना बेनामी कानून कभी भी लागू नहीं किया गया। अब इसमें संशोधन किया गया है। इसे क्रियान्वित किया गया है।

भारत में 12 अरब अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा दक्षता      


          भारत में 12 अरब अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा दक्षता है। इस आशय के संकेेत भारत सरकार के केन्‍द्रीय बिजली,कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान मंत्रालय से मिले।  राष्‍ट्रीय स्‍ट्रीट लाइट  सिस्टम दक्षिणी दिल्‍ली में चल रहा है।

         यह दुनिया का सबसे बड़ा स्‍ट्रीट लाइट सिस्टम है। इसका क्रियान्‍वयन ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।  ईईएसएल भारत सरकार का बिजली मंत्रालय के तहत काम करने वाला एक संयुक्‍त उपक्रम है। इस समय एसएलएनपी कार्यक्रम पंजाब, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, झारखंड, छत्‍तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल,गोवा महाराष्‍ट्र ,गुजरात और राज्‍स्‍थान में चल रहा है। अब तक पूरे देश में 15.36 लाख स्‍ट्रीट लाइटस एलईडी बल्‍बों द्वारा लगाये जा चुके हैं।

              परिणाम स्‍वरूप 20.35 करोड़ मेगावाट बिजली की बचत हुई है। इस कारण 50.71 मेगावाट क्षमता को टाले जाने से प्रति वर्ष 1.68 लाख टन ग्रीन हाउस गैस के उत्‍सर्जन में कमी आई है। भारत में 12 अरब अमेरिकी डॉलर के ऊर्जा दक्षता बाजार के होने का अनुमान है। इससे वर्तमान उपभोग में अभिनव व्‍यापार और क्रियान्‍वयन के माध्‍यम से 20 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होने की संभावना है। एसएलएनपी के तहत दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र में अकेले दो लाख से अधिक स्‍ट्रीट लाइट प्रतिस्‍थापित किए गए हैं। इस कार्यक्रम के माध्‍यम से दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र में प्रतिवर्ष 2.65 करोड़ मेगावाट बिजली की बचत होती है। 

          इससे 6.6 मेगावाट क्षमता को टालने में मदद मिली है जिस कारण प्रति दिन 22,000 टन ग्रीन हाउस गैस को कम करने में मदद मिली है। इसके साथ ही दिल्‍ली में इस र्काक्रम के अगले चरण-क्ष्क्ष् में पार्कों को ध्‍यान में ध्‍यान में रखते हुए 75,000 और स्‍ट्रीट लाइट लगाने के लिए ईईएसएल ने बीएसईएस और दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

           दक्षिणी  दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र की इस परियोजना में ईईएसएल विभिन्‍न स्रोतों से शिकायतों को दूर कर रहा है। उदाहरण के लिए बीएसईएस हेल्‍पलाइन से पंजीकृत, ईईएसएल के रात्रि गश्‍त दल, मोबाइल वैन, सोशल मीडिया और पार्षदों सहित अन्‍य स्रोतों से प्राप्‍त शिकायतों के जरिये। ईईएसएल के पास दूर- दराज के स्‍ट्रीट लाइटस के  संचालन और निगरानी के लिए ईईएसएल सख्‍त शिकायत निवारण प्रणाली और केन्‍द्रीकृत नियंत्रण एंव निगरानी प्रणाली(सीसीएमएस) भी है।