Friday, 5 January 2018

सुरक्षा : ट्रेनों में 100 फीसदी लिंक हॉफमैन्न बुश कोच लगाने का फैसला

    नई दिल्ली। रेलवे के कामकाज में सुधार करने के लिए रेलवे बोर्ड द्वारा काम करने के व्यापक स्पेक्ट्रम को कवर करने वाली पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों को जनरल मैनेजर (जीएम), डिवीजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) और क्षेत्रीय अधिकारियों को सौंपा गया। 

   यात्री सुविधाएं और सेवाएं : ट्रेन संचालन में विलंब होने पर यात्रियों को मैसेज (एसएमएस) के जरिये इसकी सूचना देने की शुरुआत 3 नवंबर 2017 से की गई। शुरू में सभी राजधानी, शताब्दी, तेजस और गतिमान ट्रेनों के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई। 15 नवंबर 2017 से सभी जनशताब्दी, दुरंतो और गरीब रथ ट्रेनों के लिए भी विलंब होने पर यात्रियों को एसएमएस के जरिये सूचना देने की शुरुआत कर दी गई। अभी यह सेवा करीब 250 ट्रेनों के लिए उपलब्ध है। 
     रेल यात्रा के लिए पहचान के निर्धारित प्रमाणों में से एक के रूप में एम-आधार को अनुमति दी गई है। सभी मेल/ एक्सप्रेस ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची के यात्रियों के लिए अल्टरनेट ट्रेन एकमोडेशन सिस्टम यानी विकल्प की व्यवस्था 1 अप्रैल 2017 से शुरू कर दी गई। वरिष्ठ नागरिकों, विकलांग व्यक्तियों के लिए पहल- भारतीय रेलवे ने एसी 3 क्लास में दो बर्थ दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोटा की शुरुआत की है। शयनयान क्लास में यह कोटा 4 बर्थ का होगा।
     भारतीय रेलवे के 497 रेलवे स्टेशनों पर ऑनलाइन रिटायरिंग रूम बुकिंग की सेवा शुरू की गई है। रिटायरिंग रूम और शयनगृह में उपलब्ध आवास का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के साथ, रात्रि बुकिंग को छोड़कर रिटायरिंग रूम की बुकिंग के साथ-साथ शयनगृह की बुकिंग के लिए पश्चिमी रेलवे को निर्देश जारी किए गए हैं, जहां बुकिंग को 21.00 बजे रात से लेकर सुबह 9.00 बजे तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा। 
    यह सेवा अभी मुंबई, अहमदाबाद, वड़ोदरा और सुरत रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध है। रेलवे में नई खानपान नीति का शुभारंभ किया गया है। इस नीति के तहत सभी श्रेणी के स्टेशनों पर प्रत्येक श्रेणी के छोटे खानपान इकाइयों के आवंटन में महिलाओं के लिए 33ऽ उप कोटा प्रदान किया गया है। पीएसयू आईआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवा के जरिए स्थानीय व्यंजन उपलब्ध कराने के लिए स्व-सहायता समूह को तैयार किया गया। बेहतर प्रकाश और यात्री सुरक्षा के लिए स्टेशनों पर 100ऽ प्रतिशत एलईडी प्रकाश व्यवस्था के लिए कार्यक्रम शुरू किया गया। मार्च 2018 तक सभी रेलवे स्टेशनों को कवर करने के लक्ष्य साथ तक अब तक 3,500 से अधिक स्टेशन पर इसे पूरा कर लिया गया है।
      सभी रेलवे प्लेटफार्मों पर मोबाइल / लैपटॉप चार्जिंग प्वाइंट की व्यवस्था। रेलवे स्टेशनों पर कीट पकड़ने वालों का प्रावधान। आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट ने एक नया मोबाइल एप लॉन्च किया। आधार जुड़े यूजर आईडी को एक महीने में 12 ई-टिकट बुक करने की अनुमति दी गई है, जबकि गैर आधार यूजर आईडी के लिए 6 टिकट बुक करने का प्रावधान है।
    एक नया इंटीग्रेटेड मोबाइल एप 'रेल सुरक्षा' का शुभारंभ किया गया है, जो विभिन्न सेवाओं को मुहैया करता है। इसके तहत रेल ई-टिकट बुकिंग, अनारक्षित टिकट, शिकायत प्रबंधन, क्लीन कोच, यात्री पूछताछ आदि की व्यवस्था है। यूपीआई / बीएचआईएम ऐप का उपयोग कर टिकट का भुगतान आरक्षण काउंटर पर और साथ ही ई-टिकटिंग वेबसाइट पर भी लागू किया गया है। प्रोजेक्ट स्वर्ण- 14 राजधानी और 15 शताब्दी ट्रेनों की "परियोजना स्वर्ण" के तहत यात्री सुविधा में सुधार करने के लिए पहचान की गई थीं।
     इस परियोजना के तहत उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए 'कर्मचारी व्यवहार' को एक महत्वपूर्ण पैरामीटर के रूप में पहचाना गया था। इन प्रमुख ट्रेनों के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को खानपान, प्रबंधन और सफाई जैसे विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित किया गया था। हाई स्पीड रेलवे/मोबिलिटी : रेलवे के मुख्य मार्गों पर स्वर्णिम चतुर्भुज (जीक्यू) (दिल्ली - मुंबई, दिल्ली - हावड़ा, हावड़ा - चेन्नई, चेन्नई - मुंबई, दिल्ली - चेन्नई और हावड़ा - मुंबई) पर मौजूदा बाधाओं को दूर करने के लिए एक सड़क का नक्शा विकसित किया गया है।
    यह कदम स्थाई बुनियादी ढांचा, चल ढांचे और संचालन प्रथाओं के कारण उठाया गया है। दो मार्गों के लिए परियोजनाएं यानी नई दिल्ली-मुंबई सेंट्रल (वड़ोदरा-अहमदाबाद सहित) और नई दिल्ली-हावड़ा (कानपुर-लखनऊ सहित) 160/200 किमी प्रति घंटे की गति बढ़ाने के लिए डब्ल्यूपी 2017-18 में शामिल किया गया है। 
    इस पर लगभग 18,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। गति संवर्धन परियोजना जैसे कि बाड़ लगाने, लेवल क्रॉसिंग हटाने, ट्रेन सुरक्षा चेतावनी प्रणाली (टीपीडब्लूएस), मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार (एमटीआरसी), स्वचालित और मैकेनाइज्ड डायग्नोस्टिक सिस्टम इत्यादि के रूप में कार्य करता है, जो सुरक्षा और विश्वसनीयता में काफी वृद्धि करेगा। परियोजनाओं के कार्यान्वयन की वजह से गाड़ियों की अधिकतम गति 160/200 किमी प्रति घंटे में बढ़ गई है।
     इससे प्रीमियम राजधानी प्रकार की ट्रेनों हावड़ा राजधानी के लिए यात्रा का समय 17 घंटे के बजाय 12 घंटा हो जाएगा और साथ ही मुंबई राजधानी के 15 घंटे 35 मिनट की जगह कम होकर 12 घंटे की यात्रा अवधि हो जाएगी। लोको के प्रतिस्थापना से एमईएमयू / डीईएमयू ट्रेनों के साथ ही लोकल ट्रेनों की तुलना में एमईएमयू ट्रेनों की गति में 20 किमी प्रति मील की औसत वृद्धि की क्षमता बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सितंबर 2017 में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना(एमएएचएसआर) की आधारशिला रखी।
     एमएएचएसआर परियोजना के कार्यान्वयन के लिए गठित राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) में प्रबंध निदेशक और अन्य निदेशकों को नियुक्त किया गया है। अर्ध हाई स्पीड पर अध्ययन जारी है। दिल्ली-चंडीगढ़ (244 किमी): 200 किमी प्रति घंटे की गति से यात्रियों की ट्रेनों की गति बढ़ाने को लेकर एसएनसीएफ / फ्रांस द्वारा नई दिल्ली-चंडीगढ़ कॉरिडोर की व्यवहार्यता और कार्यान्वयन अध्ययन की अंतिम रिपोर्ट सौंप दी गई है। 
      इस रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। नागपुर - सिकंदराबाद (575 किमी): व्यवहार्यता और कार्यान्वयन अध्ययन के लिए रेल मंत्रालय और रूसी रेलवे के बीच सहयोग प्रोटोकॉल के तहत एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसे लेकर जून 2016 में काम शुरू कर दिया गया था और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह अभी जारी है।
    जर्मन रेलवे द्वारा चेन्नई-काजीपेट पर काम जारीः 50:50 लागत साझाकरण के आधार पर मौजूदा मार्ग पर 200 किमी मील प्रति की गति बढ़ाने के लिए दोनों पार्टियों के बीच 10/10/17 को संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। एक अलग समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद व्यवहार्यता अध्ययन किया जा रहा है, जो अंतिम दौर में है। मैसूर-बेंगलुरु पर हाई स्पीड रेल के लिए व्यवहार्यता अध्ययन- बेंगलुरु-चेन्नई, सरकार सरकार से (जी 2 जी) जर्मनी की सरकार के साथ शुरू हो गई है।
    सुरक्षा : पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले चालू वर्ष में 1 अप्रैल 2017 से 30 नवंबर 2017 के दौरान ट्रेन हादसों की संख्या 85 से घटकर 49 रह गई। जनवरी से दिसंबर 2017 तक सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर जोर देने के लिए, दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी क्षेत्रीय रेलवे पर सुरक्षा मुहिम चलाई गई थी। रात के निरीक्षणों और अधिकारियों और पर्यवेक्षकों द्वारा नियमित रूप से घात जांच, अस्थिभंग प्रवण दरार वाले स्थानों की समीक्षा, बार-बार और गहन फुटप्लेट निरीक्षण आदि पर जोर। लोको पायलट द्वारा एसपीएडी को ध्यान में रखते हुए चालक दल के बुकिंग, परामर्श, प्रशिक्षण, पीएमई, प्रदर्शन मूल्यांकन आदि से संबंधित निगरानी व्यवस्था पर ध्यान देना। 
    पैसेंजर ट्रेन (लोकोमोटिव को संरचना से पृथक करना) में कोच के अलग होने की घटनाओं की जांच के लिए पंद्रह दिनों की अवधि के लिए - "संचालित लाइन पर कार्य करना" और "कार्यस्थल पर सुरक्षा" के बारे में एक विशेष सुरक्षा अभियान। सुरक्षा को बढ़ाने के लिए चिहिन्त यूएमएलसी के बजाय ब्रॉड गेज पर सभी मानव रहित स्तर क्रॉसिंग (यूएमएलसी) पर गेट मित्र तैनात किए गए। राष्ट्रीय रेल सुरक्षा परिषद (आरआरएसके) के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर आवश्यक कार्यों को निधि देने के लिए 'आरआरएसके' में से 2017-18 में ठ20,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
      उच्च स्तर की सुरक्षा समीक्षा समिति (एचएलएसआरसी): देश में रेल सेवाएं चलाने के संबंध में सभी तकनीकी और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा के लिए 16.09.2011 को परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्षता में डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा समिति का गठन किया गया। इस समिति ने 17-02-2012 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। समिति के सभी 106 सिफारिशों पर विचार-विमर्श किया गया है और 87 सिफारिश पूरी तरह से / आंशिक रूप से स्वीकार्य पाए गए हैं जबकि 19 सिफारिशें रेल मंत्रालय को स्वीकार्य नहीं हुए हैं।
   स्वीकृत सिफारिशों में से 65 को पूरी तरह से या आंशिक रूप से लागू किया गया है। शेष सिफारिशें कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। 2018 के लिए सभी मानव रहित क्रॉसिंग(यूएमएलसी) को बंद करने का लक्ष्य निर्धारितः जब तक यह हासिल किया जाता है तब तक भारतीय रेलवे ने मानव रहित क्रॉसिंग पर गेट मित्र तैनात करने का फैसला किया है। गेट मित्रा एक पहल है जहां यूएमएलसी में एक व्यक्ति को तैनात किया जाएगा, और गाड़ियों के आने के बारे में सड़क उपयोगकर्ताओं को सतर्क करेगा। नवंबर 2017 तक ब्रॉड गेज पर सभी यूएमएलसी पर गेट मित्र को तैनात कर दिया गया। ट्रैक नवीकरण तेजः नवबंर 2017 तक 2,148 किमी पुरानी पटरियों को बदल दिया गया। अप्रैल से नवबंर 2016 की इसी अवधि के दौरान 1,624 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण का काम चल रहा था। 
    सेल्फ प्रोपेल्ड अल्ट्रासोनिक रेल टेस्टिंग(स्पूर्ट्ज कार) के खरीद की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही अल्ट्रासोनिक रेल डिटेक्शन सिस्टम का ट्रायल भी जारी है। रेल सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली (टीपीडब्लूएस) उपनगरीय / उच्च घनत्व वाले मार्गों पर कार्यान्वित की जा रही है। सभी ट्रेनों में 100 फीसदी लिंक हॉफमैन्न बुश(एलएचबी) कोच लगाने का फैसला किया गया है। इसके कई फायदे है जिनमें ट्रेन के बेपटरी होने या पलटने के दौरान कोच सुरक्षित रहते हैं। सभी कोच को 2018-19 के दौरान पूरी तरह एलएचबी कोच में तब्दील कर दिया गया है।
    प्रणाली में सुधार और नवाचार : विभिन्न रेलवे स्टेशनों की व्यापक संशोधित श्रेणियां तैयार की गई हैं। स्टेशनों के श्रेणीकरण को लेकर नई योजना के तहत, यहां तक कि छोटे स्टेशऩों को भी श्रेणीकरण से यात्रियों के लिए सहूलियतें होगी। 'फॉग पास डिवाइस' आधारित ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) को शुरू किया गया है जो ट्रेन संचालन के दौरान आने वाले स्थलों का नाम और दूरी को संकेत के साथ प्रदर्शित करता है। फिलहाल कुल 7,263 फॉग पास डिवाइस खरीदे गए हैं और इन्हें एनआर, एनईआर, एनसीआर, ईसीआर, एनएफआर व एनडब्ल्यूआर में इस्तेमाल किया जा रहा है जो सबसे अधिक कोहरे प्रभावित रेलवे क्षेत्र हैं। 
   आरडीएसओ द्वारा प्रमुख पारदर्शिता उपाय : आरडीएसओ द्वारा “न्यू ऑनलाइन वेंडर रजिस्ट्रेशन सिस्टम” शुरू किया गया है जो 8 नवंबर 2017 से प्रभावी है। वेंडर आरडीएसओ के साथ ऑनलाइन पंजीकरण फीस, दस्तावेज जमा कर सकते हैं। साथ ही तकनीकी चित्र और विनिर्देशों को डाउनलोड करने के साथ किसी प्रकार की जानकारी भी ऑनलाइन हासिल की जा सकती है। सभी आरडीएसओ नियंत्रित वस्तुओं को आरडीएसओ वेबसाइट पर सूचीबद्ध किया गया है, जिसमें प्रत्येक व्यक्तिगत मद के लिए विक्रेता पंजीकरण प्रक्रिया के लिए विशिष्ट समयसीमा है। 
    आरडीएसओ उस पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने का प्रयास करेगा जिसके लिए विक्रेता निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन करता है।  इनोवेश चुनौती: नवाचार विधियों के जरिये भारतीय रेलवे के परिचालन में सुधार करने के मकसद से नवाचार संबंधी विचार आमंत्रित किए गए हैं। इनोवेशन चैलेज के तहत काफी प्रतिक्रियाएं मिली हैं और इसके तहत 4,683 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं हैं। आरडीएसओ को स्क्रीनिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया का कार्य को सौंपा गया है।
     पारदर्शिता : एकल वेबसाइट पर ऑनलाइन ट्रैकिंग ऑफ क्रॉट्रैक्टर बिल-बिल भुगतान की निगरानी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम एक वेब सिस्टम विकसित किया गया है। यह प्रणाली पंजीकृत विक्रेता / ठेकेदार को बिलों की स्थिति को ट्रैक करने के लिए, जब तक अंतिम भुगतान नहीं किया जाता है तब तक रेलवे को प्रस्तुत किए जाने से सक्षम बनाता है। रसीद नोट के 100ऽ डिजिटलीकरण का कार्यान्वयन निविदाओं का डिजिटल तरीके अंतिम रूप देना- इस साल डिजिटली रूप से भारतीय रेलवे ई-प्रोक्योर्मेंट पोर्टल के माध्यम से कुल 54700 निविदाएं पूरी की गईं। पिछले 1 साल के दौरान भारतीय रेल वेब पोर्टल पर 1000 से अधिक ई-रिवर्स नीलामी निविदाएं खोली गईं। 
    नई ट्रेनें : मुंबई और करमली के बीच भारत का पहला तेजस एक्सप्रेस का उद्घाटन, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में किरणुल के लोगों की "एक्सप्रेस" ट्रेन की तीन दशक से अधिक पुरानी मांग पूरा किया। ट्रेन नं 08152 विशाखापट्टनम-जगदलपुर को किरदुल तक विस्तारित किया गया। भारत के प्रधानमंत्री और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के साथ संयुक्त रूप से कोलकाता से "कोलकाता-खुल्लना बंधन एक्सप्रेस" भारत और बांग्लादेश के बीच न्यू क्रॉस-बॉर्डर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। 
    दिल्ली-मुंबई मार्ग के बीच 16 अक्टूबर, 2017 से त्रिकोणीय साप्ताहिक नई विशेष राजधानी शुरू की गई। भारत का पहली स्वदेश निर्मित 12 कोच की ब्रॉड गेज वातानुकूलित ईएमयू मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में शुरू की गई। 22 सितंबर, 2017 को वाराणसी और वडोदरा के बीच तीसरी महामना एक्सप्रेस की शुरूआत। विशाखापट्टनम और अराकु घाटी के बीच चलने वाली विशाखापत्तनम में कांच की दीवारों वाली विशालतम पर्यटक कोच की शुरुआत की गई। 
    विस्टाडोम के कोच में कांच की छत, एलईडी रोशनी, घुमने वाली सीटें, जीपीएस आधारित सूचना प्रणाली आदि जैसी सुविधाएं हैं, यह न केवल गंतव्य तक बल्कि यात्रा के दौरान भी सुंदरता का आनंद लेने के लिए पर्यटकों का आकर्षित कर रही है। बुनियादी ढांचा : भारतीय रेलवे के स्टेशन पुनर्विकास कार्यक्रम के पहले चरण में 23 प्रमुख रेलवे स्टेशनों को शामिल किया गया है। यात्री कोच में सुधार करने के लिए मिशन रेट्रो-फ़िमेंट को शुरू किया गया है ताकि यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ाई जा सके। यह 45,000 कोच को कवर करेगा।
    उत्तराखंड में स्थित चारधाम तक रेलवे कनेक्विटी बढ़ाने के लिए सर्वे अंतिम चरण में है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर अनुभागों का रिकॉर्ड शुरू किया गया: कैलेंडर वर्ष 2017 के दौरान, 2367 मार्ग किलोमीटर के इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की रिकॉर्डिंग सभी समय प्राप्त की गई थी। वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान उपलब्धि के लिए 4,000 मार्ग किलोमीटर के विद्युतीकरण के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 
     डिजिटल इंडिया पहल : लोगों को डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए, भारतीय रेलवे ने ई-टिकट की बुकिंग से सर्विस चार्ज वापस ले लिया है। ई-टिकट पर 10 लाख रुपये का मुफ्त बीमा और डिजिटल माध्यमों से खरीदे गए सीजन टिकट पर 0.5ऽ छूट की पेशकश की है। डेबिट/क्रेडिट कार्ड से भुगतान स्वीकार करने के लिए विभिन्न टिकट बुकिंग काउंटर पर लगभग 9,500 पीओएस मशीन स्थापित की गई हैं।
     टिकट काउंटर पर डेबिट कार्ड के माध्यम से बुकिंग के लिए कोई एमडीआर शुल्क नहीं लिया जाता है। पीआरएस काउंटर पर यूपीआई / बीएचआईएम के माध्यम से भुगतान की सुविधा प्रदान की गई है। भारतीय रेलवे के लिए एकल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रेल क्लाउड प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया। रेलसेवर एप विकसित किया है और इसे रेलवे के लिए लोकप्रिय बनाया जा रहा है। 
   रेलवे-बोर्ड में ई-ऑफिस का कार्यान्वयन : भारतीय रेलवे के अधिकारियों के लिए स्पार्रो द्वारा वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) के ऑन-लाइन सबमिशन और मूल्यांकन का कार्यान्वयन। भारतीय रेलवे के समूह-ए के पुराने वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) का डिजिटाइजेशन। राष्ट्रीय रेल संग्रहालय (एनआरएम), नई दिल्ली में (एनआरएम) वाई-फाई की सुविधा का शुभारंभ। इस सुविधा लैस भारत का पहला संग्रहालय है।
     रेलवे हेरिटेज के डिजिटलीकरण के लिए गूगल सांस्कृतिक संस्थान (जीसीआई) के साथ समझौता किया गया है। इसकी सार्वभौमिक पहुंच के लिए ऑनलाइन करने और पीढ़ियों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए यह समझौता किया गया है। गूगल सांस्कृतिक संस्थान के सहयोग से, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई में वीडियो स्क्रीन के माध्यम से रेलवे यात्रियों के लिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रसार के लिए एक अभिनव कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 
     इसरो के सहयोग से भारतीय रेल में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में विभिन्न परियोजनाओं जैसे रियल टाइम ट्रेन सूचना प्रणाली, मानव रहित लेवल क्रॉसिंग गेट्स पर अग्रिम चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए, उन यात्रियों को उन्नयन में वरीयता, जिन्होंने भुगतान के डिजिटल मोड के माध्यम से टिकट बुक किया है, कार्यान्वित किया गया है। 
    माल भाड़ा : पहले की टीईएफडी योजना को संशोधित करके उदारीकृत स्वचालित मालभाड़ा छूट योजना 01.01.2017 को जारी की गई। माल भाड़ा ग्राहकों के साथ दीर्धकालीन शुल्क निविदा पर नीति 30-03-207 को जारी की गई। इसके लिए कुल 24 प्रस्ताव आए जिसमें से 21 प्रस्तावों/ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इस योजना के तहत समझौते में क्षेत्रीय रेलवे के साथ  टाटा स्टील, अल्ट्रा टेक सीमेंट, इंडिया सीमेंट, जींदल स्टील एंड पावर, अंबुजा, एसीसी आदि बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
    माल उठाने की क्षमता बढ़ाने के लिए इसके तहत नए यातायात को आकर्षित करने के लिए डबल स्टैक छोटे कंटेनर को एक नया वितरण मॉडल के रूप में पेश किया। 14.07.2017 को दोहरे स्टैक छोटे कंटेनर ट्रेनों के लिए 17ऽ छूट प्रदान करने वाली नई टैरिफ नीति भी जारी की गई है। माल गाड़ियों के लिए राइट पावरिंग- माल गाडियों के लिए उच्च गति प्रदान करने और माल की गतिशील गति सुनिश्चित करना को लेकर औसत गति में सुधार के लिए 1.5-2.0 के भार अनुपात के लिए हार्स पावर के साथ माल गाड़ियों के लिए राइट पावरिंग व्यवस्था की नई नीति की शुरुआत की गई। 
     भारतीय डाक के साथ बिजनेस पार्सल के लिए नई साझेदारी की शुरुआत : मिशन हंड्रेड- 2016-17 के दौरान पीएफटी / सिडिंग -45 टर्मिनलों की कमीशनिंग की गई है। शेष 55 टर्मिनलों में से अभी तक 13 टर्मिनलों को 2017-2018 में चालू किया गया है।
    वित्त : गैर किराया राजस्व के लिए निम्नलिखित नीतिगत पहल किए गए, जिसमें जैसे गैर-किराया राजस्व की नीतिगत पहल, गृह विज्ञापन, मांग पर सामग्री, गाड़ियों के ब्रांडिंग, गैर किराया राजस्व नीति, एटीएम नीति और पहल जो डिजिटल लेनदेन के माध्यम से टिकट की आसानी (आरक्षित और अनारक्षित यात्रियों के लिए) शामिल है। 512 करोड़ रुपये (अनुमानित) बजट जुलाई 2017 के बाद से इसे सर्वश्रेष्ठ खरीद नीतियों / प्रथाओं जैसे डिजाइन संशोधन, विनिर्देशन में परिवर्तन, चुनौतीपूर्ण उपभोग, दीर्घकालिक करार, रिवर्स नीलामी, विक्रेता आधार आदि में सुधार के द्वारा प्राप्त किया गया है।
     मेक इन इंडिया की पहल : सार्वजनिक खरीदारी को भारत में प्राथमिकता बनाने की नीति 15-06-2017 के लागू की गई। घरेलू स्तर पर उत्पादित आयरन एंड स्टील उत्पाद (डीएमआई और एसपी) को प्राथमिकता देने के लिए नीति लागू की गई है। अक्टूबर, 2017 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा घरेलू उत्पादित इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए प्राथमिकता नीति जारी की गई। पूर्व कारोबार की स्थिति और स्टार्टअप एवं मध्यम लघु उद्यमों के लिए पूर्व छूट की व्यवस्था।
     स्वदेशी फर्मों के विकास पर विशेष जोर देने के साथ, अक्टूबर और नवंबर 2017 के दौरान एमएसएमई और सिडबी के साथ मिलकर देश भर में 12 प्रमुख स्थानों पर विक्रेता बैठकआयोजित किए गए। सुरक्षा : ट्रेनों में अनुरक्षण टीमों के सुरक्षा कर्मियों के लिए सीटें निर्धारित की गईं। एसए 1 में बर्थ नं. 63, सुरक्षा कार्मिक के लिए निर्धारित की गई ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आसानी बुलाया जा सके। 
     रेलवे सुरक्षा बल ने 47 अतिरिक्त रेलवे स्टेशनों में बाल आरक्षण अभियान का विस्तार करने का निर्णय लिया और इसका कुल 82 रेलवे स्टेशनों पर आयोजन किया गया। यह अभियान 35 मौजूदा रेलवे स्टेशनों में सफलतापूर्वक लागू किया गया। आरपीएफ ने पिछले तीन सालों में 21,000 बच्चों को बचाया है।
      पर्यावरण अनुकूल कार्यक्रम : मालदा डिवीजन के भागलपुर-बांका खंड (बिहार) में समर्पित ग्रीन कॉरिडोर। मधुपुर-गिरिडीह खंड का आसनसोल खंड में समर्पित ग्रीन कॉरिडोर। मैसूरू वर्कशॉप पर 500 किलोवाट का सौर रूफ टॉप सिस्टम की व्यवस्था। वैकल्पिक ईंधन के लिए भारतीय रेलवे संगठन (आईआरएएएफ) ने डेमू ट्रेनों पर पर्यावरण के अनुकूल और लागत बचत ड्यूल ईंधन 1400 एचपी डीजल इंजन को पेश करने के लिए वर्ष 2017 में पर्यावरण के लिए अभिनव पुरस्कार के लिए स्वर्ण मयूर पुरस्कार जीता।
     सौर शक्ति वाले कोच के साथ पहला डेमू ट्रेन को राष्ट्र की सेवा में शामिल किया गया। रेलवे में उपभोग और उपयोग के संबंध में नई जल प्रबंधन नीति जारी की गई। सीआईआई द्वारा विकसित ग्रीनको सर्टिफिकेट भारतीय रेलवे के तीन इकाइयों डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (वाराणसी), पेरामबूर कैरिएज वर्क्स (चेन्नई), लालगुड़ा कैरिज वर्कशॉप (हैदराबाद) को दिए गए थे। ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए कई नई पहल की गईं- रेलवे स्टेशनों पर सभी विद्युत उपकरणों की रिप्लेसमेंट और ऊर्जा कुशल बीईई स्टार रेटेड उपकरणों के साथ ईएससीओ मॉडल, सभी रेलवे स्टेशनों पर 100ऽ एलईडी प्रकाश व्यवस्था, सेवा भवन, कार्यशालाएं, शेड और अन्य प्रतिष्ठान आदि में व्यवस्था की गई। 
    इस पहल के साथ 125 करोड़ रुपये की बचत की गई औऱ इससे इस वर्ष लगभग 7ऽ ऊर्जा की बचत हुई। बिल्डिंग मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (बीएमआईएस) को रेल भवन पर लगाया गया है जिसमें एलईडी लाइट भी शामिल है और यह बिजली बिल में प्रतिवर्ष 30 लाख रुपये बचाएगा। सभी विक्रेताओं के लिए कुशल ऊर्जा उपकरणों के उपयोग के लिए रेलवे की नीति जारी। 60 से अधिक मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों को पहले से ही 270 स्टेशनों, 120 प्रशासनिक भवनों और अस्पतालों को कवर करने के लिए स्थापित किया गया है जबकि रेलवे भवन के छत पर 150 मेगावाट का सौर संयंत्र स्थापित किया गया है। अक्टूबर 2017 में ग्रीन इनिशिएटिव्स और रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन। 
   मानव संसाधन : सक्षम परियोजना शुरू- भारतीय रेलवे के सभी कर्मचारियों को कौशल और डोमेन ज्ञान में एक सप्ताह के लंबे प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया गया था। इस तरह के सभी प्रशिक्षण का फोकस 'कुछ अलग करने' पर किया गया। बड़े स्टेशनों में स्टेशन निदेशकों को अब विभागों में शाखा अधिकारियों की शक्तियां दी गई हैं ताकि वे सुचारु संचालन के लिए निर्णय ले सकें। कर्मचारी चार्टर जारी- रेलवे कर्मचारियों के समयबद्ध निवारण, बकाया, पात्रता और शिकायतों से संबंधित मुद्दों के निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों के चार्टर को अधिसूचित किया गया है।
     निवारण-रेलवे कर्मचारियों की शिकायत निवारण के लिए पोर्टल शुरू किया गया था। रेलवे कर्मचारियों के लिए आपातकाल में नकद रहित योजना (सीटीएसई) शुरू की गई है। डीआरएम / चीफ वर्कशॉप मैनेजर्स (सीडब्ल्यूएम) को रिटायर हुए रेलवे कर्मचारियों को 62 वर्ष की उम्र तक रिक्त पदों के लिए फिर से शामिल करने की शक्ति दी गई है।
      सुधार : रेलवे के कामकाज में सुधार के लिए, रेलवे बोर्ड द्वारा काम करने के व्यापक स्पेक्ट्रम को कवर करने वाली पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों को जनरल मैनेजर (जीएम), डिवीजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) और फील्ड ऑफिसर्स को सौंप दिया गया है। बेहतर पर्यवेक्षण के लिए सभी रेलवे डिवीजन कार्यालयों में अतिरिक्त मंडल रेल प्रबंधक (एडीआरएम) की पदों की संख्या निर्धारित। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों की पांच सदस्यीय समितियां कार्यस्थलों में पर्याप्त सुधार करने के लिए सभी भारतीय रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय सुझाती हैं।

निवेशकों का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 13.56 अरब डॉलर निवेश का इरादा

     नई दिल्ली। भारत ने वर्ल्ड फूड इंडिया 2017 ‘भारतीय व्यजनों का कुंभ मेला’ का आयोजन किया जिसमें 61 देश, तमाम वैश्विक सीईओ के साथ 800 वैश्विक व घरेलू प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया।

  इस मेले में 75000 बिजनेस विजिटर्स भी आए। केंद्रीय मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में 2017 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने प्रमुख कदम उठाए।
  इसमें वर्ल्ड फूड इंडिया 2017 : मंत्रालय ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भारत की निवेश क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली में 3 से 5 नवंबर तक विश्व खाद्य भारत 2017 का आयोजन किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए तीन दिवसीय आयोजन ने भारतीय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अधिकतम निवेश प्रतिबद्धताओं को बढ़ावा देने के अवसरों का प्रदर्शन किया।
   इस कार्यक्रम ने खाद्य सुरक्षा हासिल करने की पृष्ठभूमि में नवाचार, प्रौद्योगिकी, विकास और स्थिरता का लाभ उठाने को लेकर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का प्रदर्शन करते हुए अभिनव उत्पादों और विनिर्माण प्रक्रियाओं के प्रदर्शन के लिए एक मंच मुहैया कराया। 27 राज्यों और 800 वैश्विक व घरेलू प्रदर्शनकारियों के साथ ही 61 देशों और ग्लोबल सीईओ ने मेले में भाग लिया। प्रदर्शनी में 75000 बिजनेस विजिटर्स ने हिस्सा लिया। जर्मनी, जापान और डेनमार्क विश्व खाद्य भारत में भागीदार देश थे जबकि इटली और नीदरलैंड फोकस देश थे।  विश्व खाद्य भारत 2017 के समापन समारोह में भारत के राष्ट्रपति ने इसे "भारतीय खाद्य का कुंभ मेला" का नाम दिया।
     निवेशक पोर्टल : निवेश बंधु की शुरुआत-वर्ल्ड फूड इंडिया के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निवेश बंधु -निवेशक के पोर्टल की शुरुआत की। इस अनूठे पोर्टल का उद्देश्य केंद्रीय और राज्य सरकार की नीतियों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए प्रदान किए जाने वाले प्रोत्साहन के बारे में जानकारी एकत्र करना है। प्रसंस्करण आवश्यकताओं के साथ स्थानीय स्तर पर पोर्टल मानचित्र संसाधन से लैस है। यह किसानों, प्रोसेसर, व्यापारियों और रसद ऑपरेटरों के लिए व्यापार नेटवर्किंग के लिए एक मंच भी है।
     खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सात प्रकाशनों को, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सूचित निर्णय लेने में मदद करने के लिए पोर्टल में शामिल किया गया है। पोर्टल में फूड मैप ऑफ इंडिया को भी शामिल किया गया है। खाद्य मानचित्र ने निवेशक को अपनी परियोजनाओं का पता लगाने के संबंध में निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाता है क्योंकि खाद्य मानचित्र ने अधिशेष उत्पादन क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण की क्षमता का मानचित्रण दिखाया है।
    प्रधानमंत्री ने कॉफी टेबल बुक के साथ भारतीय व्यंजनों पर स्मारक टिकट भी जारी किया। भारत को पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में प्रदर्शित किया-वर्ल्ड इंडिया फूड 2017 में भारत को पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में प्रदर्शित किया गया। डब्लूएफआई 2017 के दौरान घरेलू और विदेशी निवेशकों के साथ 56 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इन मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए इंवेस्ट इंडिया में एक विशेष शाखा की स्थापना की गई है। 
     खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित अपव्यय को कम करने, अधिक उत्पादन करने और अधिक प्रक्रिया करने के लिए सुनिश्चित करना है। फोर्क टू फोर का उनका मंत्र है और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का लक्ष्य किसानों और उपभोक्ताओं के बीच पुल बनना है।
    वर्ल्ड फूड इंडिया ने ग्लोबल फूड फैक्ट्री के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने में मदद की। देश में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्लोबल सीईओज के हिस्सा लेने से इज ऑफ डोइंग की रैंकिंग में काफी सुधार हुआ।इन सीईओज की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली के साथ राउंटटेबल बैठकें हुईं। बी2बी/बी2जी बैठकों में बैठकों में 15 देशों के 200 से अधिक सदस्यों के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंत्रिस्तरीय और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। 
    इस कार्यक्रम के दौरान 8 सेक्टोरल कॉन्फरेंस आयोजित किए गए। साथ ही दो खाद्य मानक और भारत के सुरक्षा प्राधिकरण के सहयोग से पूर्ण सत्र "भारतः पसंदीदा गंतव्य" और "एक राष्ट्र, एक खाद्य कानून-खाद्य क्षेत्र में निवेश के लिए एक सक्षम नियामक वातावरण तैयार करना" जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। देश और दुनिया भर की 800 से ज्यादा कंपनियों के साथ इंडिया गेट के समीप स्थित मैदान में 40,000 वर्ग मीटर में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। 
   प्रदर्शनी के दौरान फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन एंड वोमेन एंत्रप्रोन्सर्स पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया था ताकि वे देशी भारतीय व अंतरराष्ट्रीय संभवाओं से जुड़ सकें जिससे नए अवसरों के रास्ते खुलें। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के थीम पैलेलियन में उत्साहजनक दृश्य देखने को मिला था जहां, भारतीय उत्पादों की दृष्टि से दुनिया के लिए पेशकश की गई थी। 
     साथ ही स्मार्ट शेल्फ, ओएलईडी स्क्रीन, ट्विटर वॉल, आभासी और संवर्धित वास्तविकता आदि जैसे कई प्रौद्योगिकियों के माध्यम से, मेगा फूड पार्कों को एक भू मानचित्रण आदि के जरिये दर्शाया गया था। फूड स्ट्रीट-वर्ल्ड फूड इंडिया के आयोजन के दौरान मशहूर शेफ संजीव कपूर द्वारा स्ट्रीट फूड का आयोजन किया गया जो इस कार्यक्रम में लोगों को ज्यादा आकर्षित कर रहा था। फूड स्ट्रीट को प्रायोगिक मंच के तौर पर तैयार किया गया था, ताकि वहां दुनिया की पाक कलाओं का सामूहिक प्रदर्शन किया जा। साथ ही दुनिया के व्यंजनों का स्वाद, खूशबू, भोजन बनाने की भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अपने उत्पादन की विविध विशिष्टता के प्रदर्शन के उद्देश्य से इसका आय़ोजन किया गया था। 
   इस दौरान शेफों द्वारा तैयार की गई 918 किलो की पौष्टिक और स्वास्थवर्धक खिचड़ी ने गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज कराया। इस कार्यक्रम के दौरान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती बादल ने प्रत्येक व्यक्ति से भारत खाद्य सुरक्षित सुनिश्चत करने के लिए'मेरे प्लेट का भोजन बर्बाद नहीं होगा' का प्रतिज्ञा करने की अपील की। एमओएफपीआई की अंतर्राष्ट्रीय भागीदार-एमओएफपीआई ने अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी में फ्रांस की सैलोन इंटरनेशनल डी लाईमेंटेशन (एसआईएएल) ने हिस्सा लिया और जर्मनी की ऑलगेमीन नहरंग्स एंड जेनुस्मिट्टल औसलेलंग (एएनयूजीए) की भागीदार ने भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की ताकत का प्रदर्शन किया। 
     अक्टूबर 2017 में कोलोन, जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम एएनयूजीए में भारत के लिए एक साझेदार देश होना एक सम्मान की बात थी। मतभेदों को दूर करने और किसानों के जीवन को बदलने के लिए खाद्य कूटनीति के विचार से उत्साहित, श्रीमती बादल ने दोहराया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विकास 2022 तक किसानों की आय दोहरीकरण के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। न केवल खाद्य प्रसंस्करण में बल्कि खेती प्रौद्योगिकियों में भी हमारी खेती तकनीक और निवेश का उन्नयन को लेकर पश्चिम से सीखने की आवश्यकता है कि कैसे फसल और अपशिष्ट स्तर पर अपव्यय को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लेने में मार्गदर्शक उद्देश्य साबित हो सकते हैं।
    प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना : 23 अगस्त, 2017 को मंत्रालय की योजनाओं का पुनर्गठन किया गया और नई योजनाओं को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी और जिसे प्रधानमंत्री किसान सम्पादा योजना के रूप में शुरू किया। सम्पदा योजना का उद्देश्य अवसंरचना के निर्माण और कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र की संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला में प्रसंस्करण और संरक्षण की बढ़ती क्षमता को कृषि गेट से खुदरा दुकानों तक को लक्षित करना है। 
    नई योजना खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और खाद्य व्यापार को एकीकृत करने के साथ ही किसानों के लिए बड़े पैमाने पर अवसरों के नए द्वार खोलेगी और इससे उनके लिए रोजगार बढ़ने के साथ ही उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। पीएमकेएसवाई एक प्रमुख योजना है जिसमें मेगा फूड पार्क, एकीकृत कोल्ड श्रृंखला और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य सुरक्षा और क्वालिटी एश्योरेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि की चल रही योजनाएं शामिल हैं और साथ ही एग्री प्रोसेसिंग क्लस्टर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, पिछड़ा और अग्रेषण संबंधों का निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण तथा संरक्षण क्षमता का निर्माण / विस्तार जैसी नई योजनाएं भी इसमें शामिल हैं। 
    अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय : खाद्य एवं कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाई और कोल्ड चेन का बुनियादी ढांचे को ऋण देने के लिए प्राथमिकता क्षेत्र तौर पर कृषि गतिविधियों के तहत वर्गीकृत किया गया है। खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के लिए अतिरिक्त ऋण की उपलब्धता। पूर्व-कंडीशनिंग, प्री-कोडिंग, खुदरा पैकेजिंग और फलों व सब्जियों के लेबलिंग पर सेवा कर कोल्ड शृंखला परियोजनाओं में छूट दी गई। यह कोल्ड चेन ऑपरेटरों को कर छूट के मामले में एक बड़ी राहत है क्योंकि यह सुविधा केवल किसानों को फार्म गेट पर उपलब्ध थी, लेकिन कोल्ड चेन ऑपरेटरों के लिए नहीं थी।
      इसने शीत श्रृंखला परियोजनाओं की व्यवहार्यता को बढ़ाया, जिससे क्षेत्र में अधिक निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके। पारदर्शिता को बढ़ाने और मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए ऑन-लाइन सॉफ़्टवेयर का निर्माण किया गया ताकि बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के दावों को दर्ज किया जा सके। यह अन्य योजनाओं के लिए भी विस्तारित किया जा रहा है। 
     मंत्रालय में इंवेस्ट इंडिया को लेकर इंवेस्टमेंट ट्रैकिंग एवं फैसलिटी डेस्क की स्थापना की गई है। डेस्क नए संभावित निवेशकों की पहचान और निवेश के लिए एक केंद्रित और संरचित तरीके से उनसे संपर्क करेगा और साथ ही हाथों हाथ सेवाएं प्रदान करके निवेश के मामलों का अनुवर्तीकरण करेगा। यह डेस्क भारत और विदेशों में दोनों रोडशोज के आयोजन में मंत्रालय की सहायता और निवेश बैठक आयोजित करेगा।  नाबार्ड में 8000 करोड़ रुपये का डेयरी प्रसंस्करण और विकास निधि की स्थापना की गई है।
     सहकारी क्षेत्र में विशेष रूप से पुराने और अप्रचलित दूध प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए फंड का उपयोग किया जाएगा और इसके परिणामस्वरूप दूध प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि होगी जिससे किसानों के उत्पाद को अधिक मूल्य मिले और उनकी आय में वृद्धि होगी। शॉलट्स के लिए पेरांबलुर में आम खाद्य प्रसंस्करण इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। 
     अतिरिक्त राजकोषीय रियायतों : 2016-17 के बजट में प्रावधान रेफ्रिजेरेटेड कंटेनरों पर उत्पाद शुल्क में 5ऽ से 6ऽ तक की कमी। रेफ्रिजेरेटेड कंटेनरों पर मूल कस्टम ड्यूटी में कमी 10ऽ से 5ऽ तक। शीत भंडारण के लिए परियोजना के आयात के तहत वर्तमान में उपलब्ध 5ऽ बेसिक कस्टम ड्यूटी, शीत कक्ष के लिए पूर्व शीतलन इकाई, पैक हाउस, सॉर्टिंग और ग्रेडिंग लाइनों और पकने वाले कक्षों सहित शीत श्रृंखला के लिए भी विस्तार किया गया। मशीनरी पर एक्साइज ड्यूटी 10ऽ से घटाकर 6ऽ कर दी गई।
     मेगा फूड पार्क्स : खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने में जुटा हुआ है ताकि कृषि तेजी आगे बढ़ जिससे कृषकों की आय दोगुनी करने में मददगार साबित हो सके। साथ ही इसका उद्देश्य ‘मेक इंड इंडिया’ पहल को मदद पहुंचाना थी है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने के साथ खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मूल्यवान बनाकर और आपूर्ति श्रृंखला के प्रत्येक चरण में खाद्य अपव्यय को कम करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय देश में मेगा फूड पार्क योजना को लागू कर रहा है।
    खाद्य प्रसंस्करण के लिए मेगा फूड पार्क के तहत आधुनिक ढांचे का निर्माण कर किसानों और बाजार के बीच एक श्रृंखला बना दी जाएगी ताकि कलस्टर आधारित व्यवस्था बन सके और लिंकेज को रोका जा सके। सामान्य सुविधाएं और बुनियादी सुविधाओं को सक्षम करने से केन्द्रीय प्रसंस्करण केंद्र में बनाया जाता है। प्राथमिक प्रसंस्करण और भंडारण के लिए सुविधाएं प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र (पीपीसी) और संग्रह केंद्र (सीसी) के रूप में खेत के पास बनाए जाते हैं। 
     इस योजना के तहत भारत सरकार मेगा फूड पार्क के लिए 50 करोड़ रुपये तक का आर्थिक मदद मुहैया करा रही है। 
     इस वर्ष मेगा फूड पार्कों का संचालन शुरू या उनका उद्घाटन किया गया। पतंजली खाद्य और हर्बल पार्क, हरिद्वार (उत्तराखंड); सिंधु मेगा फूड पार्क, खरगोन (मध्य प्रदेश), झारखंड मेगा फूड पार्क रांची (झारखंड), जंगीपुर बंगाल मेगा फूड पार्क, मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल), श्रीनिना खाद्य पार्क, चित्तूर, (आंध्र प्रदेश), उत्तर पूर्व मेगा फूड पार्क, नलबारी, (असम), अंतर्राष्ट्रीय मेगा फूड पार्क, फजिलका, (पंजाब), एकीकृत खाद्य पार्क, तुमकुर, (कर्नाटक), एमआईटीएस मेगा फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड, रायगड़ा, (ओडिशा)। निम्नलिखित मेगा फूड पार्कों का सिलान्यास किया गया।
       पंजाब कृषि उद्योग निगम मेगा फूड पार्क परियोजना, लुधियाना, केरल में पलक्कड़ में किनाफ्रा द्वारा विकसित मेगा फूड पार्क, केएसआईडीसी द्वारा केरल के अलाप्पुझा में विकसित मेगा फूड पार्क, कपासथला, पंजाब में मक्का आधारित मेगा फूड पार्क, एक मेगा फूड पार्क से5000 लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रोज़गार मिलने के अलावा लगभग 25000 किसानों के लाभान्वित होने की संभावना है। चालू वित्त वर्ष के अंत तक संचालन के लिए सातारा (महाराष्ट्र), अजमेर (राजस्थान), और अगरतला (त्रिपुरा) में मेगा फूड पार्क परियोजनाएं उन्नत स्तर पर हैं।
      नाबार्ड ने 10 मेगा फूड पार्क परियोजनाओं के लिए'फूड प्रोसेसिंग फंड' के अंतर्गत 2000 करोड़ में से 6 9 करोड़ का ऋण और 2 प्रसंस्करण इकाइयों को 81.10 करोड़ की राशि वितरित की गई है। नाबार्ड के साथ विशेष फंड से सस्ती ऋण प्राप्त करने के उद्देश्य से मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों में 157 नामित खाद्य पार्कों को अधिसूचित किया है। एकीकृत शीत श्रृंखला और मूल्य वृद्धि बुनियादी सुविधा : 2017 में 16 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन संचालनों के साथ, मंत्रालय ने 2.44 लाख मीट्रिक टन शीत भंडारण की एक अतिरिक्त क्षमता, व्यक्तिगत त्वरित फ्रीजिंग (आईक्यूएफ) के प्रति घंटे 72.70 मीट्रिक टन प्रति वर्ष, 34.55 लाख लीटर प्रति दिन दूध / प्रसंस्करण / भंडारण और 472 रियर व्हान को 2014-2017 के दौरान बनाया है।
    पिछले साढ़े तीन वर्षों में, 74 एकीकृत शीत श्रृंखला परियोजनाओं को चालू कर दिया गया है, जिससे कुल शीत श्रृंखला परियोजनाओं को 111 में ले लिया गया है। मंत्रालय ने अभी तक 238 कोल्ड चेन परियोजनाओं (पूर्ण और चल रही परियोजनाओं सहित) की क्षमता 7.38 लाख मीट्रिक टन की शीत भंडारण क्षमता, 210.75 मीट्रिक टन प्रति व्यक्ति व्यक्तिगत त्वरित फ्रीजिंग (आईक्यूएफ), 106.9 9 लाख लीटर प्रति दिन दूध प्रोसेसिंग / भंडारण और 1371 रिफर वैन शूरू किए हैं। 
     इस मंत्रालय के फीडबैक और अनुभव के आधार पर योजना के दिशानिर्देशों को संशोधित किया गया है ताकि उन्हें निवेशक के अनुकूल बनाया जा सके। औसतन, प्रत्येक शीत शृंखला परियोजना फल और सब्जियों के लगभग 500 किसानों को लाभ देती है और लगभग 5000 किसान डेयरी क्षेत्र में काम करती हैं और 100 लोगों के लिए रोज़गार पैदा करती हैं। बूचड़खानों की स्थापना / आधुनिकीकरण की योजना के तहत पणजी (गोवा) में एक परियोजना को लागू किया गया है। 
     10खाद्य परीक्षण लैब्स पूरा हो चुके हैं। 31 अगस्त 2017 को,इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी (आईआईएफपीटी) के सहयोग से पेरामबलुर में लॉन्च किए जाने वाले शॉलट्स के लिए एक कॉमन फूड प्रोसेसिंग इनक्यूबेशन सेंटर शुरू किया गया।पेरांबलूर जिले के किसानों की खेती में बढ़ती हुई कठिनाई के बावजूद, 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती के क्षेत्र में प्रति वर्ष 700,000 टन उथले का उत्पादन किया जा रहा है, क्योंकि इनकी कीमतों में वृद्धि, अप्रत्याशित मौसम, रोग फैलने और बाजार में पर्याप्त कीमत नहीं मिल रही है।
     इस प्रकार पेरामबलुर में शॉलट्स के लिए केन्द्रीय प्रसंस्करण केंद्र को यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था कि कोई भी शॉलट्स बर्बाद नहीं हो, साथ ही इससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है और उपभोक्ताओं के लिए शॉलट्स की उपलब्धता सुनिश्चित भी हो रही है। जीएसटी सुविधा केंद्र-खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने अपने कार्यालय में एक चार सदस्यीय जीएसटी सुविधा केंद्र स्थापित किए हैं ताकि उद्योग को नए कर व्यवस्था के बारे में निर्देशित किया जा सके।
    मंत्रालय ने कार्यान्वयन के उद्देश्य के लिए जीएसटी सेल बनाया है और तत्काल प्रभाव से जीएसटी को सुगम बनाने में मदद की है। जीएसटी सुविधा केंद्र, एमओएफपीआई से संबंधित प्रमुख उद्योग और व्यापार संघों के लिए लेवी के रोलआउट के लिए सभी संभव समर्थन प्रदान करता है। यह सेल मंत्रालय से संबंधित किसी भी मुद्दे का समाधान करने के लिए पहले संपर्क के रूप में कार्य करता है। जीएसटी सेल प्रासंगिक जीएसटी अधिनियम, नियम, दर संरचना आदि के पूर्ण ज्ञान से लैस होगा। 
     जीएसटी सुविधा केंद्र के सदस्यों से टोल फ्री नंबर 1800111175 के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की सहायता के लिए, एफएसएसएआई ने उत्पाद की स्वीकृति को सरल बनाया। अंतर्राष्ट्रीय आचार मानकों के साथ मिलकर नए एडिटिव्स की एक बड़ी संख्या को स्वीकृति दी गई। विनियमों में एक संशोधन के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप गैर-मानक खाद्य उत्पादों को स्वामित्व वाले खाद्य पदार्थ (अच्छे खाद्य और न्यूट्रास्युटिकल को छोड़कर) को, जो नियमों में अनुमोदित सामग्री और एडिटिव्स का उपयोग करने के बाद अब उत्पाद अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।
     इसने उद्योग को काफी राहत प्रदान की है। हरियाणा के सोनीपत, कुंडली में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान, उद्यमशीलता और प्रबंधन (एनआईएफटीईएम) और तमिलनाडु के तंजावूर में भारतीय खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएफपीटी) को उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा है।इन संस्थानों से पढ़कर निकलने वालों को 100ऽ प्लेसमेंट मिल चुके हैं।
      एफएसएसएआई, भारत में खाद्य सुरक्षा के लिए सर्वोच्च विनियामक निकाय ने'फूड रेगुलेटरी पोर्टल' नामक एक शक्तिशाली नए उपकरण की घोषणा की। खाद्य व्यवसायों के लिए घरेलू कारोबार और खाद्य आयात दोनों को पूरा करने के लिए एकल इंटरफेस के रूप में योजना बनाई गई, यह पोर्टल देश के खाद्य सुरक्षा कानूनों के प्रभावी और पारदर्शी कार्यान्वयन के लिए मददगार साबित होगा।
      व्यवसायों के संचालन के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने के लक्ष्य साथ यह पोर्टल “एक राष्ट्र, एक खाद्य कानून” के सरकार के मिशन के साथ रणनीतिक रूप से काम करेगा।राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति : राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति पर दृष्टिकोण पत्र एमओएफपीआई वेबसाइट पर अपलोड किया गया है और सुझाव सभी हितधारकों व आम जनता से आमंत्रित किए गए हैं।
      राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति, भारत के राष्ट्रीय खाद्य ग्रिड और राष्ट्रीय शीत श्रृंखला ग्रिड के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगी और देश के हर जगह और कोने में खुदरा बाजार तैयार करेगी।

फिल्म महोत्सव में क्षेत्रीय फिल्मों को अधिक प्रतिनिधित्व

    नई दिल्ली। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी ने आज भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) 2017 आयोजित करने में किए गए प्रयासों और आईएफएफआई के अगले संस्करण में सुधार करने संबंधी विषयों पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की।

   श्रीमती इरानी ने समिति के सदस्यों को मंत्रालय द्वारा आईएफएफआई 2017 में मंत्रालय द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों औऱ पहलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस समय सभी समितियों का पुनर्गठन किया गया और संचालन और पूर्वावलोकन समितियों का विस्तार किया गया।
     उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पहली बार आईएफएफआई ने आधिकारिक तौर पर टोरंटो और वेनिस फिल्म समारोह के साथ गठबंधन किया। अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में नौ मास्टर क्लास का आयोजन,197 फिल्मों का प्रदर्शन और 493 प्रतिनिधियों को आमंत्रण दिया गया। 
    बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 आयोजन करने के प्रयासों की सराहना की और कहा कि फिल्म महोत्सव में क्षेत्रीय फिल्मों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। 
     उन्होंने इस वर्ष फिल्मों के चयन और फिल्म जगत से जुड़ी हस्तियों के अधिक भागीदारी की भी सराहना की। उन्होंने सामाजिक रूप से जागरूक मुद्दों जैसे किसान फिल्म समारोह आदि आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा।
     इस अवसर पर मंत्रालय की ओर से श्री अशोक कुमार परमार ने फिल्म महोत्सव, 2017 पर एक प्रस्तुति भी दी। समिति के सदस्यों को भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 आयोजित करने में संबंधित प्रयासों की जानकारी भी दी गई। 
    बैठक में सांसद मनोज कुमार तिवारी, विवेक गुप्ता, श्रीमती देव (मुनमुन सेन) वर्मा, मधुसूदन मिस्त्री, डॉ. संजय जयसवाल ने भाग लिया। इस अवसर पर केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव एन.के.सिन्हा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।