Friday, 30 December 2016

नेपाल को 80 मेगावाट अतिरिक्त बिजली 

         नेपाल को 80 मेगावाट अतिरिक्त बिजली हस्तांतरण की आशा है। इस के साथ, भारत से नेपाल को बिजली की कुल आपूर्ति 400 मेगावाट हो जाएगी। 

      नेपाल के ऊर्जा मंत्री जनार्दन शर्मा ने भारत यात्रा के दौरान केंद्रीय विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल के साथ विचार-विमर्श किया। विद्युत/ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों के विस्तार और सहयोग की समीक्षा के अलावा, नेपाल के ऊर्जा मंत्री ने सर्दियों के महीनों में घरेलू पनबिजली परियोजनाओं से मौसम के कारण बिजली आपूर्ति में कमी को दूर करने के लिए भारत से 80 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली आपूर्ति का अनुरोध किया था। 

        इस अनुरोध पर त्वरित प्रतिक्रिया करते हुए 20 दिन की अवधि के भीतर, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (पीजीसीआईएल) ने भारत के मुजफ्फरपुर में एक अतिरिक्त 220/132 किलोवॉट,  100 एमवीए का ट्रांसफार्मर स्थापित किया। इस ट्रांसफार्मर के माध्यम से मुजफ्फरपुर (भारत) से  धालकेबार (नेपाल) पारेषण लाइन से 80 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली आपूर्ति नेपाल को दी जाएगी। इस वृद्धि के साथ, इस ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से अब नेपाल के लिए कुल 160 मेगावाट की आपूर्ति की जा सकती है। फ़रवरी 2016 में, भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियों ने भारत के मुजफ्फरपुर से नेपाल के धालकेबार के लिए 400 केवी की प्रथम उच्च क्षमता की सीमा पार लाइन का उद्घाटन किया गया है।

चीनी का 66 लाख मीट्रिक टन उत्पादन  


चीनी उत्पादन करीब 22.5 मिलियन मीट्रिक टन तक रहने की आशा है। वर्तमान चीनी सीजन 2016-17 के दौरान, देश की चीनी मिलों ने पेराई आरंभ कर दिया है।

          अब तक चीनी का करीब 66 लाख मीट्रिक टन उत्पादन किया है। इस सीजन के अंत तक चीनी का उत्पादन करीब 22.5 मिलियन मीट्रिक टन रहने की आशा है। 7.71 मिलियटन मीट्रिक टन भंडार के साथ करीब 25 मिलियन मीट्रिक टन की अनुमानित घरेलू मांग को पूरा करने के लिए चीनी की कुल उपलब्धता पर्याप्त है। वर्तमान चीनी सीजन (सितंबर, 2017) की समाप्ति पर भंडार की स्थिति के 5.21 मिलियन मीट्रिक टन रहने की संभावना है। इसे अगले चीनी सीजन 2017-18 में आगे ले जाया जाएगा। इसके अलावा अगले चीनी सीजन (2017-18) में चीनी उत्पादन के अच्छा होने की उम्मीद है।

         इसके जल्द ही शुरू होने की भी संभावना है इसलिए भारत में घरेलू स्तर पर उत्पादित चीनी की कोई कमी नहीं होगी। नवंबर, 2017 तक, शीघ्र पेराई से 2 मिलियन मीट्रिक टन चीनी उपलब्ध होगी। सरकार देश में चीनी के पर्याप्त भंडार बनाए रखने और इसके मूल्यों को नियंत्रण में रखने के लिए आवश्यक कदम उठा चुकी है।

भारत का निर्यात लक्ष्य 900 बिलियन यूएस डॉलर


     भारत का लक्ष्य 2020 तक भारत को वैश्विक स्तर पर मुख्य निर्यात हिस्सेदार बनाना और साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संगठनों के स्तर पर भारत के बढ़ते महत्व के अनरूप नेतृत्वकारी भूमिका में लाना है। लक्ष्य भारत के उत्पाद निर्यात और सेवाओं को मौजूदा 465.9 बिलियन यूएस डॉलर (2013-14) से बढ़ा कर 2019-20 तक 900 बिलियन यूएस डॉलर बढ़ाना है।

     विश्व निर्यात के स्तर पर भारत की हिस्सेदारी को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। दिसंबर 2014 के बाद से 18 महीनों तक नकारात्मक बढ़ोतरी के बाद जून 2016 में निर्यात आंकड़ों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के महीने में निर्यात में सकारात्कम वृद्धि देखी गई। अप्रैल से नवंबर 2016 के दौरान 174.9 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ जबकि इसी अवधि के दौरान 2015 में 174.7 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों और सोने के निर्यात में अहम गिरावट से जनवरी 2016 के शुरुआत से ही व्यापार घाटा एक अंकों में रहा।

      वर्तमान में जीईएम पीओसी पोर्टल के जरिये 86 श्रेणियों में 4000 से अधिक उत्पाद और परिवहन सेवाएं उपलब्ध हैं। फिलहाल, जीईएम में 1600 उत्पाद विक्रेता और सेवा प्रदाता तथा करीब 1500 सरकारी अधिकारी पंजीकृत हैं। जीईएम से 45 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हो चुका है। जीईएम के जरिये खरीदारी में दामों में 10-20 प्रतिशत की कमी और कुछ मामलों में तो 56 प्रतिशत तक की कमी आई है। जीईएम अधिकतम सुशासन, न्यूनतम सरकार, मेक इन इंडिया, व्यापार में सुगमता व डिजीटल इंडिया को प्रोत्साहित करने का माध्यम है। विक्रेताओं को समय से भुगतान कर जीईएम न केवल प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित कर रहा है बल्कि लघु व्यापारिक ईकाइयों/व्यापारियों को भी सरकारी संगठनों के साथ व्यापार करने को भी प्रोत्साहित कर रहा है। डब्ल्यूटीओ का व्यापार सुविधा समझौता एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार कर व्यापार में लागत को कम करने की दिशा में मील का पत्थर है।

    व्यापार सुविधा समझौता (टीएफए) में सामानों की आवाजाही, उनकी निकासी और पारगमन की प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रावधान हैं। इस समझौते में व्यापार सुविधा और कस्टम के अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर कस्टम एवं अन्य उपयुक्त प्राधिकरणों में कारगर सहयोग के लिए विभिन्न उपायों का भी उल्लेख किया गया है। ये उद्देश्य भारत की ‘कारोबार में सुगमता’ वाली पहल के अनुरूप हैं। विशेष और अलग व्यवहार के अनुरूप विकासशील व कम विकसीत देशों को अलग श्रेणियों “ए” “बी” “सी” में बांटा गया है। “ए” श्रेणी में उन वचनबद्धताओं को रखा गया है जिसे अधिसूचित देश को टीएफए के लागू होने के साथ ही पूरा करना होता है। ‘बी’ श्रेणी में उन वचनबद्धताओं को शामिल किया गया है जिसे पूरा करने के लिए अधिसूचित देश थोड़ा समय मांग सकता है जबकि श्रेणी ‘सी’ में शामिल वचनबद्धताओं के लिए विकासशील व कम विकसित देश तकनीकी सहायता पाने के हकदार होंगे। फरवरी, 2016 में मंत्रीमंडल से मंजूरी मिलने के बाद भारत ने मार्च, 2016 में डब्ल्यूडीओ को टीएफए के अंतर्गत ‘ए’ श्रेणी की वचनबद्धातओं को अधिसूचित कर अप्रैल, 2016 में इसे मंजूरी दे दी। टीएफए के अंतर्गत कुल प्रावधानों का तकरीबन 70 प्रतिशत ‘ए’ श्रेणी में अधिसूचित किया गया है। भारत ने ‘सी’ श्रेणी में किसी भी प्रावधान को नहीं रखा है। 

       मंत्रीमंडल ने इन प्रावधानों को लागू करने व घरेलू समन्वय के लिए मंत्रीमंडल सचिव की अध्यक्षता में व्यापार सुविधा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीटीएफ) के गठन को भी मंजूरी दे दी है। डीजीएफटी ने 27 अक्टूबर, 2016 को विदेशी मुद्रा प्राप्ति और आयात निर्यात कोड से जुड़े आंकड़ों को साझा करने के लिए वस्तु एवं सेवा नेटवर्क (जीएसटीएन) के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए। इससे जीएसटी के तहत करदाताओं के निर्यात लेन-देन की प्रोसेसिंग के मजबूत होने, पारदर्शिता बढ़ने और मानवीय हस्तक्षेप कम होने की उम्मीद है। डीजीएफटी ने 14 राज्यों, 2 केंद्र सरकार की एजेंसियों व जीएसटीएन के साथ आंकड़ों को साझा करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। राज्यों के स्तर पर 14 राज्यों के वाणिज्य कर विभाग ने डीजीएफटी के साथ वैट वापसी के लिए ई-बीआरसी प्राप्त करने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। ये राज्य महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, गोवा, बिहार हैं।इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्रालय, परवर्तन निदेशालय, कृषि व खाद्य प्रसंस्करण निर्यात विकास प्राधिकरण और जीएसटीएन ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

    भारत ने 12-14 अक्टूबर, 2016 को नई दिल्ली के भारत व्यापार प्रोत्साहन संगठन, प्रगति मैदान  में ब्रिक्स देशों के पहले व्यापार मेले का आयोजन किया। ब्रिक्स व्यापार मेले में 397 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया और 14,612 व्यापारिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। मेले में प्रमुख क्षेत्रों जैसे कि कृषि व कृषि प्रसंस्करण, ऑटो और ऑटो उपकरणों, रसायनों, स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और औषधि, कपड़ा तथा परिधान, बुनियादी ढांचा, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग सामान, पर्यटन, रत्न एवं आभूषणों का प्रतिनिधित्व रहा। ब्रिक्स व्यापार मेले में 1601 बिजनेस टू बिजनेस (बीटूबी) बैठकों का आयोजन हुआ। ब्रिक्स व्यापार मेले के दौरान ब्रिक्स व्यापार मंच की बैठक भी हुई जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, ढांचागत विकास व वित्त जैसे मसलों पर चर्चा की गई। भारतीय गणराज्य के वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय तथा रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच द्विपक्षीय व्यापार व आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए।

         भारत और भूटान के बीच व्यापार, वाणिज्य व पारगमन पर प्रस्तावित सहमति पर को हस्ताक्षर हुए। भारत-ग्रीस जेईसी का सत्र हुआ। जीईसी के मिनट्स पर सहमति हस्ताक्षर हेलेनिक गणराज्य के विदेश मामलों के अतिरिक्त मंत्री जॉर्ज कत्रोग्लोस ने किया। इननोप्रोम, रूस के येकातेरिनबर्ग में हर साल होने वाला सबसे बड़ा व्यापार मेला है। जुलाई, 2016 तक चले इननोप्रोम-2016 में भारत ने ‘साझेदार देश’ के रूप में 117 भारतीय कंपनियों के साथ हिस्सा लिया। महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश व झारखंड राज्य सहित कई सारे मंत्रालय विभाग सार्वजनिक उपक्रम जैसे कि भारी उद्योग मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक व आईटी विभाग, पर्यटन मंत्रालय, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, एनटीपीसी, एनएचपीसी, नीपको व पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने इसमें हिस्सा लिया। मेले में 95 देशों के 700 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। इननोप्रोम 2016 में प्रतिभाग से वैश्विक व रूसी उत्पादकों के साथ सीधे संवाद करने, अपने आप में सर्वोत्तम उत्पादन तकनीकों से परिचित होने व अंतरराष्ट्रीय तथा अंतर-औद्योगिक नेटवर्क बनाने का मौका मिला।
  
         

Thursday, 29 December 2016

बीपीएल परिवारों को 1.5 करोड़ एलपीजी कनेक्‍शन 


प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत चालू वित्त वर्ष के लिए तय 1.5 करोड़ कनेक्‍शनों का लक्ष्‍य 8 माह से भी कम अवधि के भीतर ही हासिल कर लिया गया है। यह योजना 35 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों में क्रियान्वित की जा रही है।

देश में गरीब परिवारों को स्‍वच्‍छ रसोई ईंधन मुहैया कराने संबंधी प्रधानमंत्री के विजन को प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (पीएमयूवाई) के क्रियान्‍वयन के जरिए साकार किया जा रहा है। सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़ों के जरिए चिन्हित बीपीएल परिवार की एक वयस्‍क महिला सदस्‍य को डिपॉजिट (जमानत राशि) मुक्त एलपीजी कनेक्शन दिया जाता है, जिसके लिए भारत सरकार की ओर से प्रति कनेक्‍शन 1600 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। केंद्रीय बजट में 8000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ तीन वर्षों की अवधि के दौरान बीपीएल परिवारों को 5 करोड़ एलपीजी कनेक्‍शन जारी करने की घोषणा 29 फरवरी, 2016 को की गई थी।

        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 1 मई, 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से पीएमयूवाई का शुभारंभ किया था। इस योजना के क्रियान्‍वयन के लिए प्राथमिकता वाले राज्‍यों के रूप में राष्‍ट्रीय औसत से कम एलपीजी कवरेज वाले 14 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों, जम्‍मू-कश्‍मीर, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी राज्‍यों और सभी पूर्वोत्तर राज्‍यों की पहचान की गई है। अधिकतम कनेक्‍शनों वाले शीर्ष 5 राज्‍य उत्‍तर प्रदेश (46 लाख), पश्चिम बंगाल (19 लाख), बिहार (19 लाख), मध्‍य प्रदेश (17 लाख) और राजस्‍थान (14 लाख) है। अब तक जारी किये गये कुल कनेक्‍शनों में लगभग 75 फीसदी हिस्‍सा इन् पांचों राज्‍यों का है। लाभार्थियों में बड़ी संख्‍या एससी/एसटी परिवारों की ही है। 35 फीसदी कनेक्‍शन इन्‍हीं परिवारों को जारी किये जा रहे हैं।  यह भी उल्‍लेखनीय है कि पीएमयूवाई के क्रियान्‍वयन के परिणामस्‍वरूप राष्‍ट्रीय एलपीजी कवरेज 61 फीसदी (1 जनवरी 2016 को) से बढ़कर 70 फीसदी (1 दिसंबर 2016 को) हो गई है।


भारतीय वस्त्र उद्योग में 30 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश


        वस्त्र मंत्रालय ने वस्त्र क्षेत्र के विकास के लिए अनेकानेक ठोस कदम उठाये, जिनके तहत रोजगार सृजन, निवेश एवं उत्पादन बढ़ाने और निर्यात संवर्धन पर ध्यान केन्द्रित किया गया। विभिन्न कदमों के क्षेत्रवार अवलोकन और उपलब्धियों का उल्लेख  किया गया है। कपड़ा मंत्रालय ने विभिन्न उपायों का एक विशेष पैकेज पेश किया, ताकि परिधान क्षेत्र को आवश्यक सहायता सुलभ हो सके ।

         विश्व स्तर पर इसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बेहतर हो सके। एक करोड़ लोगों, ज्यादातर महिलाओँ के लिए रोजगार; 30 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश और 74,000 करोड़ रुपये का निवेश – ये सभी उपलब्धियां तीन वर्षों में हासिल की जानी हैं। पैकेज को केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 22 जून, 2016 को मंजूरी दी गई थी। यह पैकेज एक रणनीतिक निर्णय है जिससे भारतीय वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र मजबूत एवं सशक्त होगा। यह विश्व बाजार में लागत के लिहाज से भारतीय वस्त्र क्षेत्र की प्रतिस्पर्धी क्षमता बेहतर होने से संभव हो पाएगा। यह कदम इस वजह से भी विशेष अहमियत रखता है कि इसमें महिला सशक्तिकरण के जरिये सामाजिक बदलाव लाने की अपार संभावनाएं हैं। दरअसल, वस्त्र उद्योग में 70 फीसदी कामगार महिलाएं ही हैं और सृजित होने वाले ज्यादातर नये रोजगार महिलाओं को ही मिलने की संभावना है। विशेष पैकेज में कामगार अनुकूल ऐसे अनेक उपाय शामिल हैं जिनसे रोजगार सृजन, व्यावसायिक स्तर और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

     कर्मचारी भविष्य निधि योजना से जुड़े सुधारः प्रति महीने 15,000 रुपये से कम कमाई करने वाले वस्त्र उद्योग के नये कर्मचारियों के लिए भारत सरकार प्रथम तीन वर्षों तक कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत नियोक्ताओं के समूचे 12 फीसदी योगदान को वहन करेगी। यही नहीं, प्रति माह 15,000 रुपये से कम करने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) को वैकल्पिक बनाया जाएगा। ओवरटाइम की सीमा बढ़ानाः आईएलओ के मानकों के अनुरूप कामगारों के लिए ओवरटाइम के घंटे प्रति सप्ताह आठ घंटे से ज्यादा नहीं होंगे। नियत अवधि वाले रोजगार की शुरुआत करनाः उद्योग के विशेष सीजन संबंधी स्वरूप को ध्यान में रखते हुए वस्त्र क्षेत्र के लिए नियत अवधि वाले रोजगार की शुरुआत की जाएगी। संशोधित टफ्स के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहनः संशोधित टफ्स के तहत वस्त्र इकाइयों को दी जाने वाली सब्सिडी को 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी किया जा रहा है।

     इससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। मेड-अप क्षेत्र की विशेष स्थिति और क्षमता को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इस क्षेत्र के लिए 7 दिसंबर, 2016 को एक विशेष पैकेज को मंजूरी दी थी। परिधान पैकेज के लिए 6,006 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट के भीतर समयबद्ध कदमों को मंजूरी दी गई है, ताकि मेड-अप क्षेत्र में अगले तीन वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर 11 लाख तक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन हो सके। तीन वर्षों की अवधि के बाद अतिरिक्त उत्पादन एवं रोजगार के आधार पर मेड-अप के लिए अतिरिक्त 10 फीसदी की बढ़ी हुई प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (टफ्स) सब्सिडी के जरिये उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन देना। यह वस्त्रों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी के समान ही है। प्रधानमंत्री परिधान रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमपीआरपीवाई) (परिधानों के लिए) का विस्तारीकरण मेड-अप क्षेत्र में करना, ताकि ईपीएफओ में नामांकित होने वाले सभी नये कर्मचारियों के लिए उनके रोजगार के प्रथम तीन वर्षों में नियोक्ता योगदान का अतिरिक्त 3.67 फीसदी हिस्सा प्रदान किया जा सके, जो प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) के तहत पहले से ही कवर किये जाने वाले 8.33 फीसदी के अलावा है। यह मेड-अप क्षेत्र के लिए एक विशेष प्रोत्साहन के रूप में है।

     श्रम कानूनों का सरलीकरणः मेड-अप निर्माण क्षेत्र में अनुमति योग्य ओवरटाइम को बढ़ाकर प्रति तिमाही 100 घंटे तक करना और प्रति माह 15,000 रुपये से कम कमाई करने वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफ में कर्मचारियों के अंशदान को वैकल्पिक बनाना। इस पैकेज से वस्त्र क्षेत्र में रोजगार सृजन बढ़ने और 11 लाख लोगों तक के लिए रोजगार सृजित होने की आशा है। इससे निर्यात में 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर की संचयी वृद्धि होगी, लगभग 6000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा और वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में कामागारों को अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ हासिल होंगे। कोष योजना 30 दिसंबर, 2015 को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद मंत्रालय ने 13 जनवरी, 2016 को संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (ए-टफ्स) की शुरुआत की थी। संशोधित पुनर्गठित प्रौद्योगिकी कोष योजना (आरआर-टफ्स) के स्थान पर शुरू की गई ए-टफ्स का उद्देश्य वस्त्र उद्योग में प्रौद्योगिकी उन्नयन को सुविधाजनक बनाना है। संशोधित योजना के दिशा-निर्देश 29 फरवरी, 2016 को अधिसूचित किये गये थे। नई योजना के विशेष लक्ष्य वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहन देकर रोजगार सृजन एवं निर्यात को बढ़ावा देना, जिससे विशेषकर महिलाओं को रोजगार मिलेंगे और वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा बढ़ेगा।

     निर्यात एवं रोजगार के लिए तकनीकी वस्त्रों को प्रोत्साहन देना, जो तेजी से विकसित हो रहा है।  प्रसंस्करण उद्योग में बेहतर गुणवत्ता को प्रोत्साहन देना और वस्त्र क्षेत्र द्वारा फैब्रिक के आयात की जरूरत पर रोकथाम सुनिश्चित करना। संशोधित योजना से वस्त्र क्षेत्र में “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा मिलेगा, एक लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की आशा है और 30 लाख से ज्यादा रोजगार सृजित होंगे। 17,822 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 12,671 करोड़ रुपये पुरानी योजना के तहत प्रतिबद्ध देनदारियों के लिए और 5,151 करोड़ रुपये ए-टफ्स के तहत नये मामलों के लिए हैं। एकीकृत कौशल विकास योजना 25 दिसंबर, 2014 को सुशासन दिवस पर एकीकृत कौशल विकास योजना (आईएसडीएस) का स्तर 12वीं योजना के दौरान बढ़ाया गया है। इस दिशा में 15 लाख व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने के लिए 1,900 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। आईएसडीएस का उद्देश्य उद्योग उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिये वस्त्र उद्योग में कुशल श्रमशक्ति की अहम कमी को पूरा करना है। 86 क्रियान्वयनकारी एजेंसियों द्वारा तीन घटकों के जरिये यह क्रियान्वित की जा रही है।

Wednesday, 28 December 2016

आंध्र प्रदेश की पोलावरम समेत गुजरात और महाराष्‍ट्र के लिए 3274 करोड़ 

       केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय की मंत्री उमा भारती ने घोषणा की है कि केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की अंतिम अड़चन खत्‍म हो गई है। उन्‍होंने कहा कि परियोजना को वन्‍य जीव बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। इसके वित्‍तीय प्रबंधन को अंतिम रूप देने के बाद इसका औपचारिक निर्माण कार्य शुरू होगा। मंत्री ने आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडु को पोलावरम सिंचाई परियोजना के लिए नाबार्ड की तरफ से जारी 1981 करोड़ रुपये की वित्‍तीय सहायता का चेक प्रदान किया। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने इस परियोजना को राष्‍ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है । इस पर आने वाला सारा खर्चा केंद्र सरकार वहन करेगी। सुश्री भारती ने कहा कि पोलावरम समेत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और त्‍वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत सभी सिंचाई परियोजनाओं को 2019 तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे देश में 80 लाख हेक्‍टेयर अतिरिक्‍त भूमि की सिंचाई की जा सकेगी। 
     
       केंद्रीय जल संसाधन मंत्री ने इस अवसर पर महाराष्‍ट्र के सिंचाई मंत्री गिरीश दत्‍तात्रेय महाजन को नाबार्ड की तरफ से जारी 830 करोड़ रुपये और गुजरात के उप मुख्‍यमंत्री और सिंचाई मंत्री नितिन भाई पटेल को 463 करोड़ रुपये की वित्‍तीय सहायता का चेक जारी किया।  इस अवसर पर सुश्री भारती ने कहा कि केंद्र सरकार त्‍वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत महाराष्‍ट्र की 26 परियोजनाओं को वर्ष 2018 तक पूरा कर लेगी। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और त्‍वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन से संबंधित मुद्दे तथा परियोजनाओं की प्राथमिकता पर विचार-विमर्श के लिए, छत्तीसगढ़ के जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था क्ष् 



         समिति को संबंधित राज्यों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार 99 परियोजनाओं की 2019-20 तक पूरा करने के लिए पहचान की गई है। 23 परियोजनाओं (प्राथमिकता-क्ष्) के 2016-17 तक और 31 परियोजनाओं (प्राथमिकता क्ष्क्ष्) के 2017-18 तक पूरा होने की संभावना हैक्ष् 45 परियोजनाओं (प्राथमिकता-क्ष्क्ष्क्ष्) के  दिसम्बर, 2019 तक पूरा होने का अनुमान हैं। इन परियोजनाओं पर 77595 करोड़ रूपये (48546 करोड़ रुपये परियोजना कार्य तथा 29049 करोड़ रूपये क्ॠक़् ) खर्च होने का अनुमान हैं जिसमे से 31342 करोड़ रूपये की अनुमानित केंद्रीय सहायता होगी। वर्ष 2016 के दौरान अपने बजट भाषण में, केंद्रीय वित्त मंत्री ने इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए नाबार्ड के साथ लंबी अवधि के सिंचाई कोष  के निर्माण की घोषणा की थी। उसके लिए 20,000 करोड़ रुपये  भी आवंटित किए। 12517 करोड़ रूपये की राशि वर्ष 2016-17 के दौरान बजटीय संसाधनों और बाजार उधारी के रूप में प्रदान की गई। पोलावरम परियोजना जो की इंदिरा सागर (पोलावरम) परियोजना के नाम से भी जानी जाती हैं वह 2.91 लाख हेक्टेयर के सिंचाई कमान क्षेत्र और 960 मेगा वाट की बिजली उत्पादन क्षमता वाली एक  बहुउद्देश्यीय परियोजना है।

 

         इस परियोजना के तहत, विशाखापत्तनम शहर एवं अन्य क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति के रूप में कुल 23.44 सौ करोड़ घन फीट (टीएमसी) तथा  विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र  के लिए औद्योगिक पानी की आपूर्ति का भी प्रावधान है। इस परियोजना में कृष्णा नदी बेसिन से 80 टीएमसी पानी सालाना, अंतर बेसिन हस्तांतरण की भी परिकल्पना की गई है। इस परियोजना पर 2009 में 10,151.04 करोड़ रुपये (2005-06 के मूल्य स्तर पर) के निवेश को योजना आयोग द्वारा मंजूरी दी गयी थी। वित्त वर्ष 2010-11 के स्तर पर, इस परियोजना की  वर्तमान लागत 16010.45 करोड़ रूपये  है। इस परियोजना को त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) के तहत केंद्रीय सहायता प्रदान की जा रही हैं। 


         इस परियोजना में दिनाक 31.03.2014. तक कुल 5135.87 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं जिसमे से एआईबीपी के तहत 562.469 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता प्रदान की गयी हैंक्ष् वर्ष 2014 में पोलावरम को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने के बाद, 950 करोड़ रुपये पोलावरम परियोजना प्राधिकरण को जारी किये जा चुके है। राज्य सरकार द्वारा दी गई सूचना के आधार पर चालू वर्ष के दायित्व के फलस्वरूप इस साल की  आवश्यकता को पूरा करने के लिए, 2981.54 करोड़ रुपये की  नाबार्ड से व्यवस्था की गई है। इस वर्ष की कुल केंद्रीय सहायता के दायित्व 2981.54 करोड़ रुपये में से, राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यय के लिए 1981.54 करोड़ आज जारी किये गए।

अनुसूचित जनजाति को 55.43 लाख एकड वन भूमि  


        केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि मंत्रालय के वर्ष 2016-17 के बजट आवंटन का 70 प्रतिशत हिस्‍सा खर्च किया जा चुका है।

     कहा कि मंत्रालय ने वन अधिकार अधिनियम के समुचित कार्यान्‍वयन पर विशेष ध्‍यान दिया है। अक्तूबर, 2016 तक राज्य सरकारों से प्राप्त सूचना के अनुसार, लगभग 16.78 लाख व्यक्तिगत (वन अधिकार) अधिकार पत्र 55.43 लाख एकड़ की वन भूमि क्षेत्र के लिए दिए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्‍त 48,192 सामुदायिक (वन अधिकार) अधिकार पत्र लगभग 47 लाख एकड़ वन भूमि क्षेत्र के लिए वितरित किए जा चुके हैं। मंत्री ने बताया कि पुदुचेरी में इरूलर (विल्‍ली और वेट्टईकरण सहित) जनजाति को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल किया गया है। असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, तमिलनाडु और त्रिपुरा में अनुसूचित जनजातियों की सूची संशोधित करने के लिए, संविधान (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन), विधेयक 2016 संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोक सभा में पेश किया गया। ओराम ने कहा कि मंत्रालय जनजातीय लोगों की आवश्यकता तथा जरूरतों के अनुसार ढांचें के निर्माण के लिए कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय के साथ सहयोग कर रहा है। 163 प्राथमिकता (जनजातीय बहुल) वाले जिलों में से प्रत्येक में एक बहु-कौशल संस्थान स्थापित करने की योजना है। अवसंरचनात्मक ढाँचे के निर्माण पर खर्च, जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के बीच आधा-आधा बांटा जाएगा।  


      उन्‍होंने कहा कि ‘’वनजीवन’’ जनजाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए शोध एवं तकनीकी केन्द्र के रूप में कार्य करने हेतु जनजातीय कार्य मंत्रालय के भीतर शीर्ष कन्द्रीय संस्थान के रूप में कार्य करेगा। संसाधन केन्द्र, उद्यमशीलता तथा कौशल उन्नयन के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में सतत् आजीविका केन्द्रों के विकास एवं प्रसार का पोषण करेगा। ‘’वनजीवन’’, कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय आदि जैसे अन्य केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों के साथ कौशल निर्माण के प्रयास करेगा। लघु वन उत्पाद (एमएफपी) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का उल्‍लेख करते हुए जुएल ओराम ने कहा कि पिछले महीने इस योजना के कार्य क्षेत्र का विस्‍तार अनुसचूी- 5 वाले राज्‍यों से बढ़ाकर देश के सभी राज्‍यों में लागू कर दिया गया है। उन्‍होंने कहा कि एमएफपी की मौजूदा 12 वस्‍तुओं की सूची में 14 अन्‍य वस्‍तुएँ भी शामिल की गईं हैं। इसके अलावा जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य की दर से 10ऽ अधिक या कम न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए भी राज्यों को छूट दी गई है।
 

       केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय ने इसका प्रसार रोकने के लिए कई पहल किए हैं ताकि सिकल सेल वाहक (मरीज) की देखभाल की जा सके तथा आगे की पीढ़ियां इस बीमारी से बच सकें। इस बीमारी के प्रसार पर नियंत्रण के उद्देश्य से सिकल सेल प्रबंधन के लिए एक प्रोटोकॉल मार्च, 2015 में जारी किया गया था। ओराम ने कहा कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के साथ परामर्श के बाद नवम्बर, 2016 में राज्यों को एक संशोधित प्रोटोकॉल जारी किया गया है। इसक अनुसार, बच्चों तथा युवाओं की जांच के अलावा, गर्भवती महिलाओं की भी जांच की जानी है तथा परिवार में किसी के रोगग्रस्त पाये जाने के मामले में, परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच की जाएगी। कार्यक्रम में सिकल सेल वाहकों को परामर्श तथा सिकल सेल के मरीज के उपचार का भी प्रावधान है।

Friday, 23 December 2016

भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी को 2100 करोड की सौगात

            देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वास्थ्य सेवाओं-सुविधाओं सहित विभिन्न परियोजनाओं के लिए यह सौगात दी है।  प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 2100 करोड़ रुपयों के भिन्न प्रोजेक्ट काशी को मिले हैं। प्रधानमंत्री ने  काशी विश्वविद्यालय में कैंसर रीसर्च इंस्टिट्यूट का शिलान्यास किया। 

           प्रधानमंत्री ने कहा इस पूरे क्षेत्र में कैंसर की बीमारी है तो मुंबई जाना पड़ता है। मुंबई के अंदर अस्पताल में इतनी देर के बाद नंबर लगता है। क्यों न मुंबई में जो कैंसर अस्पताल है। वैसा ही वैसी ही सुविधाओं वाला उत्तम से उत्तम सारवार करने वाला अस्पताल उत्तर प्रदेश में हो। खासकर के पूर्वी उत्तर प्रदेश में हो। जिसका लाभ पड़ोस में झारखंड और बिहार के लोगों को भी मिले। एक बहुत बड़ा प्रकल्प जिसका शिलान्यास काशी विश्वविद्यालय में किया है। 500 बेड का इतना बड़ा अस्पताल काशी में बनना ये काशी को बहुत बड़ा नजराना है। गरीब बीमार लोगों के लिए 500 में से 200 बेड वो पूरी तरह गरीबों के लिए समर्पित होंगे। काशी की एक वैश्विक पहचान बनाने का एक बहुत बड़ा आधार बन सकता है। अब काशी में जो भी लोग आए उनको वहां ले जाना चाहिए। यहां के रिक्शा वाले होंगे, यहां के टैक्सी वाले होंगे उनको भी पता होना चाहिए। वहां वो देख भी सकता है कि इस क्षेत्र के लोगों के हाथों में कैसा हुनर है। कैसी कैसी चीजें निर्माण करते हैं। और उसका एक ग्लोबल पहचान बने प्रोडक्ट की भी पहचान बने, प्रोसेस की भी पहचान बने। 

               भारत की इस महान विरासत काशी के लोगों ने कैसे संभाल कर के रखी है। इसका दुनिया को परिचय हो वैसा एक उत्तम काम ये ट्रेड सेन्टर, म्यूजियम जिसके कारण बना है। लग रहा था कि काशी की धरती पर ऐसा भी निर्माण कार्य हो सकता है और इतने कम समय में हो सकता है। इस प्राचीन शहर के साथ इस आधुनिक इमारत प्राचीन कलाकारी के साथ आधुनिक पहचान। ऐसा एक शुभ योग के साथ आज टैक्टाइल की दुनिया जो काशी की विशेष पहचान है। हस्तकला जो काशी की विशेष पहचान है। उंगलियों के बल पर नजाकत के साथ एक पूरी नई चीज निर्माण करने का जो सामर्थ इस धरती में है इसे दुनिया भली भांति देखेगी, पहचानेगी। 

          पुराने परम्परा के साधन रहे हैं उसमें बदलाव जरूरी होता है। आज कुछ साथियों को मुझे हथकर्घा उसकी सहायता देने का अवसर मिला। अलग-अलग निर्माण कार्य में हथकर्घे का जो उपयोग होता है। उसमें से आधुनिक टैक्नॉलॉजी के कारण आधुनिक व्यवस्था के कारण उनकी सरलता भी बढ़ेगी, आमदनी भी बढ़ेगी। उन चीजों में उसमें बल देने का प्रयास किया है। पूरे देश में इस क्षेत्र में काम करने वालों को एक पहचान कार्ड देने का अभियान चला है। हमारे देश के पास इतना बड़ा सामर्थ है। लेकिन बिखरा पड़ा हुआ है। न कभी उसके रिकॉर्ड उपलब्ध होती है न कभी उसकी पहचान होती है। उसकी एक ब्रांड बन जाती है। क्यूं न भारत का गरीब से गरीब व्यक्ति जिसके पास कौशल्य है, हुनर है, काम कनरे का जज़्बा है उसकी एक अपनी पहचान हो। वो स्वयं एक ब्रांड है। हमारे देश में ऐसा काम करने वाले कोटी कोटी जन स्वयं में अपने आप में एक ब्रांड है। ये ब्रांड दुनिया को अभी तक हम परिचित नहीं करवा पाए हैं। 

          इस पहचान के माध्यम से उनके सामर्थ को जानना उनके सामर्थ को बल देना इसी क्षेत्र में विकास करना है तो तुरंत कर सकते हैं कि चलो भई ये पहचान में इतने लोग हैं। इनके लिए योजना बनाइए। उनके लिए अवसर दीजिये। एकदम से उस काम को बढ़ावा मिल सकता है। तो आधुनिक टैक्नॉलॉजी के द्वारा व्यक्तियों की पहचान करते हुए उनके सामर्थ को टटोलते हुए उसका ब्रांडिंग करते हुए। ये जो पहचान कार्ड देने की योजना है उस का भी मुझे आज अवसर मिला है। जो लोग कार्पेट बनाने वाले हैं, उनको आधुनिक नई लूम जिसके साथ कारण क्वालीटी प्रोडक्शन एक इंटनेशनेल लेवल का प्रोडक्शन जिसके कारण हमारी कालीन को एक्सपोर्ट करने की सुविधा बढ़ेगी।

Thursday, 22 December 2016

67.54 लाख लोगों ने आयकर विभाग की आंखों में झोंकी धूल


आयकर रिटर्न न भरने वाले लोगों की पहचान के लिए नॉन-फाइलर मॉनीटरिंग सिस्‍टम शुरू किया गया था। केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड के प्रणाली निदेशालय द्वारा कराये गये डेटा विश्‍लेषण से आयकर रिटर्न न भरने वाले लोगों की पहचान की गई है।  
 
आयकर विभाग ने डेटा मिलान के तहत आयकर रिटर्न न भरने वाले ऐसे 67.54 लाख और लोगों की पहचान की गई है, जिन्‍होंने वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान बड़ी राशि वाले लेन-देन तो किये हैं, लेकिन कर निर्धारण आयकर रिटर्न नहीं भरे हैं। यह सूचना केवल विशिष्‍ट पैन (स्‍थायी खाता संख्‍या) धारकों को ही नजर आयेगी, जब वे ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करेंगे। पैन धारक इलेक्‍ट्रॉनिक ढंग से अपना जवाब पेश कर सकेंगे और इसके साथ ही वे अपने द्वारा पेश किये गये जवाब की एक प्रति अपने पास रख सकेंगे, जिससे कि इसका रिकॉर्ड उनके पास मौजूद रहे। चूंकि सरकार ने समस्‍त करदाताओं से अपनी वास्‍तविक आय का खुलासा करने और तदनुसार टैक्‍स अदा करने का आग्रह किया है, अत: इसके मद्देनजर आयकर विभाग आयकर रिटर्न न भरने वालों का पता लगाने का क्रम काफी तेजी से तब तक जारी रखेगा, जब‍ तक कि आयकर रिटर्न न भरने वाले समस्‍त संभावित लोगों को इसके दायरे में न ला दिया जायेगा।

देश में 27,81,883 शौचालयों का निर्माण


            शहरी क्षेत्रों में व्यक्तिगत और सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की रफ्तार बढ़ने से स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) एक नए स्तर पर पहुंच गया है। 

शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पांच शहरों और मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में उपयोग के लिए सार्वजनिक शौचालय का पता लगाने के लिए 'गूगल मैप्स शौचालय लोकेटर ऐप' का शुभारंभ किया। नायडू ने कहा कि अब यह सुविधा दिल्ली, गुरूग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा तथा मध्य प्रदेश के दो शहरों में उपलब्ध है जिससे खुले में पेशाब और खुले में शौच की समस्या का समाधान करने में मदद मिलेगी।

          'स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय' कीवर्ड का उपयोग करके उपयोगकर्ता एनसीआर के पांच शहरों में बस और रेलवे स्टेशनों, मॉल, अस्पतालों, ईंधन स्टेशन, मेट्रो स्टेशन के आसपास स्थित 5162 शौचालयों तथा इंदौर 411 और भोपाल में 703 शौचालयों तथा सार्वजनिक तथा सामुदायिक शौचालय परिसरों का पता लगा सकते हैं। एप यह भी जानकारी उपलब्ध कराएगा कि शौचालय मुफ्त है या इसके लिए भुगतान करना होगा। इस सुविधा का आने वाले समय में अन्य शहरों में भी विस्तार किया जाएगा, शहरी विकास मंत्रालय ने इस सेवा के लिए गूगल के साथ भागीदारी की है।        

             वेंकैया नायडू ने टॉलस्टाय मार्ग मेट्रो स्टेशन के पास, कॉपरनिकस मार्ग पर, हरियाणा भवन के सामने, शेरशाह रोड पर, राष्ट्रीय कला गैलरी में पीपीपी मॉडल के तहत निःशुल्क स्मार्ट शौचालयों का भी शुभारंभ किया है। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने गेट नम्बर 2, पालिका बाजार, नई दिल्ली में 'रिवर्स वेंडर मशीन' की शुरुआत की है। जब इस मशीनों में एक प्लास्टिक की बोतल डाली जाती है तो यह एक रुपये तक के क्रेडिट की रसीद देती है। एनडीएमसी ऐसी 20 मशीनें लगा रही है। जिससे प्लास्टिक की बोतलों का कचरा रोकने में मदद मिलेगी। 502 शहरों और कस्बों ने खुले में शौच से मुक्त घोषित किया। 

            अगले साल मार्च तक 237 अन्य शहर खुले में शौच से मुक्त हो जायेंगे। 66 लाख व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण के लक्ष्य की तुलना 27,81,883 शौचालयों का निर्माण हो चुका है और 21,43,222 का निर्माण कार्य प्रगति पर है। पांच लाख से अधिक सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय सीटों का निर्माण होना है, जबकि 1.07 लाख सीटों का पहले ही निर्माण हो चुका है तथा 1.30 लाख अन्य शौचालय सीटें निर्माणाधीन हैं। आंध्र प्रदेश, सिक्किम को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है। इसके अलावा केरल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड, कर्नाटक तथा केंद्र शासित क्षेत्रों में चंडीगढ़ और पुडुचेरी शौचालयों के निर्माण में शीर्ष पर हैं। देश में वर्तमान में अपशिष्टों से कंपोस्ट खाद बनाने के 95 संयंत्र काम कर रहे हैं जिनसे प्रतिवर्ष 2.88 लाख टन कंपोस्ट खाद का निर्माण हो रहा है। ऐसे कर्नाटक में 17, गुजरात में 16, महाराष्ट्र में 15, तमिलनाडु में 9 और उत्तर प्रदेश में 7 संयंत्र काम कर रहे हैं। दिल्ली में प्रतिमाह 3,000 मीट्रिक टन कंपोस्ट खाद का निर्माण हो रहा है।

             अपशिष्ट से कंपोस्ट खाद बनाने के 313 अन्य संयंत्रों का पुनरुद्धार और उन्नयन किया जा रहा है इनकी कुल उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 22 लाख टन होगी। अपशिष्ट ऊर्जा बनाने वाले 7 संयंत्र देश में परिचालित हैं। इनमें से दिल्ली में 3, महाराष्ट्र में 2 और मध्य प्रदेश और तेलंगाना में एक-एक संयंत्र कार्यरत हैं जो नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट से 88.40 मेगावाट की बिजली का उत्पादन कर रहे हैं।

दलहन उत्पाद बढ़ाने के लिए 'बोनस" की रणनीति

         केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि देश में पहली बार किसानों के लिए समर्थन मूल्यों पर दलहन फसलों की बिक्री सुनिश्चित करवाने की व्यवस्था की गई है। 

इस व्यवस्था के तहत जहां भी दलहन फसलों का बाजार भाव समर्थन मूल्य से कम होगा, वहाँ भारत सरकार की संस्थाएं किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करेंगीं। इसके अतिरिक्त दालों का 20 लाख टन बफर स्टाक बनाए रखने का निर्णय भी लिया गया है, ताकि लोगों को दाल के मंहगे बाजार भाव से छुटकारा दिलाया जा सके। राधा मोहन सिंह ने आगरा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय दलहन वर्ष 2016 के समापन समारोह में कही। विश्व में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की प्राप्ति एवं दालों के पोषण संबंधी लाभों के बारे में जन मानस में जागरूकता बढाने के उददेश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

          केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश के किसानों को दलहन उत्पादन के लिए बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2016-17 में दालों के न्यूनतम समर्थक मूल्य में सरकार ने उल्लेखनीय वृद्धि की है। सरकार ने वर्ष 2016-17 में अरहर के लिए 4625 रूपए तथा उरद के लिए 4575 रूपए व मूंग के लिए 4500 रूपए प्रति कुन्तल का न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है, जो अब तक का अधिकतम समर्थन मूल्य है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ दलहन उत्पादन के लिए 425 रूपए प्रति कुन्टल की दर से सरकार द्वारा अतिरिक्त बोनस भी तय किया गया है। सिंह ने कहा कि देश में दलहनी फसलों के उत्पादन और उत्पादकता में बढ़ोत्तरी के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष 2016 में कई कदम उठाए। इसके तहत  कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के दो विभाग- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने वर्ष 2016-17 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन परियोजना के तहत एक व्यापक कार्य-योजना का संयुक्त रूप से क्रियान्वयन किया। 

           इस कार्य-योजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 में 200 लाख टन, वर्ष 2017-18 में 210 लाख टन और वर्ष 2020-21 में 240 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। सिंह ने बताया कि भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के साथ 10 कृषि विश्वविद्यालयों के क्षेत्रीय केन्द्रों पर 20.39 करोड़ रू. की लागत के साथ अतिरिक्त “प्रजनक बीज” उत्पादन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इन केंद्रों द्वारा वर्ष 2016-17 के अंत तक 3717 कुन्तल अतिरिक्त प्रजनक बीज तथा वर्ष 2018-19 के अंत तक इन केन्द्रों द्वारा वर्तमान में किए जा रहे 7561 कुन्तल प्रजनक बीज के अतिरिक्त 5801 कुन्तल अतिरिक्त प्रजनक बीज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

           केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि दलहनी फसलों के औपचारिक बीज तंत्र को मजबूत करने और देश में उन्नत प्रजातियों के बीजों की उपलब्धता बढाने के लिए यह कदम उठाया गया है। सिंह ने कहा कि देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, परिषद के संस्थानों व कृषि वैज्ञानिक केन्द्रों में ‘’दलहन सीड-हब’’ की स्थापना की जा रही है। दलहन के गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए वर्ष 2016-17 से तक कुल 150 ‘’दलहन सीड-हब’’ स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके लिए 225.31 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 

     इस परियोजना के अन्तगर्त प्रति वर्ष 1.50 लाख कुन्तल अतिरिक्त बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक ‘’दलहन सीड-हब’’ वर्ष 2018-19 के अंत तक दलहनी फसलों का न्यूनतम 1000 कुन्तल गुणवत्तायुक्त बीजों का प्रति वर्ष उत्पादन तथा आपूर्ति करेगा।

Wednesday, 21 December 2016

गरीबों के लिए 72781 करोड़ खर्च होंगे, बनेंगे 13.43 लाख आवास  

       भारत सरकार शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए 72781 करोड़ खर्च करेगी जिससे 13.43 लाख आशियाने बनेंगे। उत्तर प्रदेश के 34 शहरों में 11286 आवास बनाये जायेंगे। 

उत्तर प्रदेश ने पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए आवास निर्माण हेतु पहला प्रस्ताव भेजा है। पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए अब तक 72,781 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 13.43 लाख मकानों को मंजूरी दी गई है। उत्तर प्रदेश शहरी गरीबों के लिए किफायती मकानों के निर्माण हेतु आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय को प्रस्‍ताव भेजने वाला 29वां राज्‍य बन गया है। उत्तर प्रदेश के 34 शहरों में शहरी गरीबों के लिए 11,286 मकानों के निर्माण हेतु इस तरह के पहले प्रस्‍ताव को आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी गई। इन मकानों के निर्माण में कुल मिलाकर 384 करोड़ रुपये का निवेश निहित है। मंत्रालय ने इस संबंध में 160 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता को मंजूरी दी है।

 उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) (शहरी) के लाभार्थी की अगुवाई वाले निर्माण घटक के तहत इन मकानों के निर्माण का प्रस्‍ताव रखा। इस घटक के तहत पात्र लाभार्थियों को उनकी भूमि पर नए मकानों के निर्माण अथवा मौजूदा मकानों की बेहतरी के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की केन्‍द्रीय सहायता दी जाती है।

         पीएमएवाई (शहरी) का शुभारंभ पिछले साल जून महीने में किया गया था। उत्तर प्रदेश के जिन-जिन शहरों/कस्‍बों में नये मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है उनमें ये शामिल है। बरवार-925 मकान, इल्तिफातगंज-910, महोली-602, रानीपुर-574, सुरियावन-506, चुघुली-501, सिकंदरा-447, कथेरा-415, कोरा जहानाबाद-413, महरोनी-411, रानीपुर मारीहरन-367, चुर्क घुरमा-357, सरसावन-343 और बहुआ-316 मकान। जिन तीन शहरों/कस्‍बों के मौजूदा मकानों की बेहतरी को मंजूरी दी गई है, उनमें ये शामिल हैं: माघर-489 मकान, घुगुहुली-299 और शोहरतगढ़-73 मकान। इसके साथ ही आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय ने पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए अब तक कुल मिलाकर 13,43,805 मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है, जिनमें 72,781 करोड़ रुपये का निवेश और 19,633 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता निहित है।

ई-भुगतान को प्रोत्साहन, लाखों के ईनाम  

       भारत सरकार डिजिटल एवं क्रेडिट कार्ड सहित अन्य ई-लेन-देन को हर संभव प्रोत्साहन देगी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस आशय की घोषणा की है। 

भारत सरकार की इस प्रोत्साहन योजना में पचास रुपये से लेकर तीन हजार की छोटी खरीद-फरोख्त को पुरस्कार-ईनाम योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत प्रतिदिन पन्द्रह हजार उपभोक्ताओं को एक-एक हजार रुपये की धनराशि सीधे बैंक खातों में भेजेगी। इसके अलावा अन्य ढ़ेरों प्रोत्साहन एवं पुरस्कार इस योजना में शामिल होंगे। इसके पीछे ई-भुगतान को बढ़ावा देना है। डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्त् मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से जनता के हित को ध्यान में रखते हुए लेन-देन के लिए फीस चार्ज नहीं करने को कहा है। नकदी के बजाय कार्ड और डिजिटल साधनों से भुगतान को बढ़ावा देने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक ने 1000 रूपये तक के तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस), एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) से लेन-देन को तर्कसंगत बनाते हुए 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक चार्जेज में छूट दी है। 

भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक डेबिट कार्ड से 2000 रूपये तक के लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को भी तर्कसंगत बनाया है। इससे आगे बढ़ते हुए डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), वित्त मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को जनता के हित में तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) से भुगतान करने पर चार्ज नहीं लेने को कहा है। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी सिर्फ सेवा कर ही लेने को कहा है। इसके साथ असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी पचास पैसे की छूट देने को कहा है। यह 31.03.2017 तक के सभी लेनदेन के लिए लागू होगा।

Tuesday, 20 December 2016

दुनिया के 50 शीर्ष देशों में कारोबार स्‍थान पाने के लिए रैंकिंग में सुधार के उपाय


भारत सरकार देश में कारोबार के माहौल में सुधार लाने के प्रयासों और विश्‍व बैंक की रिपोर्ट में कारोबार करने में आसान करने के दर्जे में सुधार लाने के लिए केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की अध्‍यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शहरी विकासमंत्री एम. वेंकैया नायडू, विधि एवं न्‍याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद, वाणिज्‍य एवं उद्योग राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीमती निर्मला सीतारमण , बिजली, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री पीयूष गोयल, वित्‍त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों के सचिव सहित डीईए, डीआईपीपी, एमसीए, न्‍याय, शहरी विकास, नागरिक उड्डयन मंत्रालय , राजस्‍व , भूमि संसाधन विभाग , सीबीईसी के अध्यक्ष एवं वरिष्‍ठ अधिकारी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के मुख्‍य सचिव तथा महाराष्‍ट्र सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने हिस्‍सा लिया। 

नोडल विभाग ने देश के रैंकिंग में सुधार करने वाले 10 सूचकों में प्रत्‍येक सूचक की पहचान की गई है जो देश में सुधार प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाएगा। विभागों ने इस बैठक में हाल में किए गए सुधारों का संक्षिप्‍त अवलोकन पेश किया गया वर्ष 2017 में सुझावों को क्रियान्वित करने पर सहमति व्‍यक्‍त की। इस बात पर भी सहमति व्‍यक्‍त की गई कि विभाग हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श करेगा और सुधार पर उठाए गए कदम पर उनका फीडबैक प्राप्‍त करेगा। विभाग फीडबैक देने वालों के साथ बातचीत करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि सुधार जमीनी स्‍तर पर महसूस किए जाएं। इस संदर्भ में प्रत्‍येक विभाग आवश्‍यक सुधार करने के लिए इस दिशा में होने वाली प्रगति की हर सप्‍ताह समीक्षा करेगा। इस बैठक में प्रमुख निर्णय लिए गए।  कारोबार शुरू करने के लिए ई बिज पेार्टल आवश्‍यक होगा। इनमें कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के तीनों सेवाएं पैन और टैन के लिए पंजीकरण, ईपीएफओ और ईएसआईसी का पंजीकरण भी शामिल है। 

कारोबार शुरू करने के लिए कारपोरेट मामलों के मंत्रालय सीबीडीटी, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय प्रक्रियाओं की संख्‍या कम करने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसमें प्रक्रियाओं की संख्‍या 4 की जाएगी । इसके लिए दिन भी चार तय किए गए हैं। रिर्टन दाखिल करने, चालान,ऑनलाइन भुगतान,और ईपीएफओ और ईएसआईसी के अंशदान के लिए केवल श्रम सुविधा पोर्टल का प्रयोग किया जा सकेगा। राजस्‍व विभाग और जहाजरानी मंत्रालय प्रत्‍यक्ष वितरण के खेप की संख्‍या इस महीने तक बढ़ाकर 40 प्रतिशत तक करने के लिए काम करेंगे। विभाग इस बात को भी सुनिश्चित करेगा कि निर्यात और आयात की लागत में ठोस कमी आए जिससे भारत दुनिया के 50 शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो सके। कारपोरेट मामलों के मंत्रालय संबंधित हितधारकों के साथ मिलकर एनसीएलटी के माध्‍यम से हाल ही में बने तालाबंदी और दीवालिया संहिता के प्रावधानों को लागू करेगा। सुधार में होने वाली प्रगति की समीक्षा के लिए अगले साल जनवरी में फिर बैठक होगी ताकि स्‍वीकृत समय सीमा के भीतर इनका क्रियान्‍वयन सुनिश्चित हो सके।

Monday, 19 December 2016

देश का खनिज उत्पादन 11 प्रतिशत घटा

देश में खनिज उत्पादन और उत्खनन क्षेत्र का सूचकांक 129.4 पर रहा, जो अक्टूबर 2015 की तुलना में 1.1 प्रतिशत कम था।

 अक्टूबर-2016 के महीने में देश में खनिज (परमाणु और लघु खनिजों को छोड़कर) उत्पादन का कुल मूल्य रुपये 19359 करोड़ था। इसमें सर्वाधिक योगदान कोयला का रुपये 7536 करोड़ (39 प्रतिशत) का रहा। इस क्रम में अगला स्थानः पैट्रोलियम (खनिज) रुपये 5545 करोड़, प्राकृतिक गैस (प्रयुक्त) रुपये 2206 करोड, लौह अयस्क रुपये 2047 करोड, लिग्नाइट रुपये 547 करोड, और लाइम स्टोन रुपये 548 करोड़ का रहा। कुल खनिज उत्पादन के मूल्य में इन छह खनिजों का सम्मिलित योगदान करीब 95 प्रतिशत रहा।

           महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन का स्तर इस प्रकार रहा: कोयला 522 लाख टन, लिग्नाइट 29 लाख टन, प्राकृतिक गैस (प्रयुक्त) 2868 मिलियन क्यूबिक घन मीटर, पैट्रोलियम (खनिज) 31 लाख टन, बाक्साइट 1868 हजार टन, क्रोमाइट 211 हजार टन, तांबा ग़ार 11 हजार टन, सोना 121 कि.ग्रा., लौह अयस्क 159 लाख टन, सीसा ग़ारा 21 हजार टन, मैग्नीज अयस्क 188 हजार टन, जिंक ग़ारा 135 हजार टन, ऐप्टाइट और फास्फेट 48 हजार टन, लाइम स्टोन 259 लाख टन और डायमंड 2506 कैरेट। अक्टूबर 2015 की तुलना में अक्टूबर 2016 के दौरान डायमंड, सोना, मैग्नीज अयस्क और क्रोमाइट सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन में रचनात्मक वृद्धि हुई।


                          


Sunday, 18 December 2016

भारत बनेगा कौशल विकास की वैश्विक राजधानी

प्रधानमंत्री कानपुर में भारत के पहले भारतीय कौशल संस्‍थान की आधारशिला रखेंगे। युवकों को अधिक रोजगार पाने योग्‍य एवं स्‍वनिर्भर बनने के लिए उन्‍हें अधिकार संपन्‍न बनाने के द्वारा भारत को विश्‍व की कौशल राजधानी बनाने के अपने विजन के अनुरूप प्रधानमंत्री उत्‍तर प्रदेश के कानपुर में देश के अब तक पहले ‘भारतीय कौशल संस्‍थान’ की आधारशिला रखेंगे। इस संस्‍थान की संकल्‍पना नरेन्‍द्र मोदी द्वारा सिंगापुर के इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍निकल एजुकेशन की यात्रा के दौरान की गई थी। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय ने सिंगापुर के इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍निकल एजुकेशन की साझेदारी में देश में अपनी तरह के ऐसे पहले संस्‍थान की स्‍थापना करने का फैसला किया है। 


 यह संस्‍थान प्रशिक्षण के सिंगापुर मॉडल से प्रेरित है। यह देश के विभिन्‍न सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों को अंगीकार करेगा। मंत्रालय ने ऐसे 6 संस्‍थान खोलने का निर्णय किया है। प्रधानमंत्री उत्‍तर प्रदेश के युवाओं के लिए कौशल प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे। इस प्रदर्शनी में विभिन्‍न क्षेत्रों के अत्‍याधुनिक स्‍वरोजगार प्रशिक्षण प्रचलनों को प्रदर्शित किया जाएगा।  मोदी प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों (पीएमकेके) एवं चालकों के प्रशिक्षण संस्‍थानों समेत देश के युवाओं के लिए कई प्रकार की कौशल विकास पहलों को लांच करेंगे।  ‘भारतीय कौशल संस्‍थान’ तीन वर्षों के दौरान लगभग 4 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करेगा, उन्‍हें रोजगार देगा।
समारोह के दौरान राज्‍य में ‘राष्‍ट्रीय शिक्षु संवर्धन योजना ’ की भी घोषणा की जाएगी, जिसके सफल कार्यान्‍वयन में राज्‍य सरकार की एक बड़ी भूमिका है। ऐसी केवल 23000 नीजि कंपनियां हैं, जो देश भर में प्रशिक्षुता से जुड़ी हुई है। एमएसडीई की कोशिश राज्‍य सरकार के समर्थन को प्रोत्‍साहित करने तथा शिक्षु प्रशिक्षणों पर अधिक कंपनियों के साथ भागीदारी सुनिश्‍चित करने की है। यह संभावित कर्मचारियों एवं नियोक्‍ता के बीच की खाई को कम करने का एक प्रत्‍यक्ष तरीका है। प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के तहत इसके मॉडल ने कई देशों की अर्थव्‍यवस्‍थाओं को लाभ पहुंचाया है। 2016-17 के लिए वित्‍तीय वर्ष लक्ष्‍य देश भर में कम से कम 5 लाख शिक्षुओं का नामांकन सुनिश्‍चित करने का है। 


केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्‍य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने बताया ‘हमारे लिए यह बहुत ही गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा कानपुर एवं अन्‍य नगरों के युवाओं के लिए इस प्रकार की कई पहलों की शुरूआत की जा रही है। उन्‍होंने बताया कि ‘उत्‍तर प्रदेश के 65 जिलों में अभी तक 400 सक्रिय कौशल विकास केंद्र हैं, जिनका संचालन साझीदारों द्वारा किया जाता है। लगभग 3 लाख युवकों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है और उनमें से 50 प्रतिशत युवकों को उनकी पसंद का रोजगार प्राप्‍त भी हो चुका है। चाहे कृषि क्षेत्र हो, परिधान क्षेत्र, ऑटो कम्‍पोनेंट क्षेत्र हो, बैंकिंग और वित्‍तीय सेवा, हॉस्‍पीलिटी या चमड़ा क्षेत्र हो, हमने देखा है कि युवक सभी क्षेत्रों में दिलचस्‍पी प्रदर्शित करते हैं और अपनी पसंद का कौशल सीखते हैं।’

अब सीनियर सिटीजन सीखेंगे डिजीटल भुगतान के तौर-तरीके


सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत के निर्देश पर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सभी नागरिकों विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए नकदी रहित लेनदेन को बढ़ावा देने और जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए गुवाहाटी में एक क्षेत्रीय बैठक का आयोजन किया। 

इस बैठक में अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों के कल्‍याण एवं नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम की दिशा में कार्यरत पूर्वोत्‍तर राज्यों और पश्चिम बंगाल के विभागों के सचिवों ने भाग लिया। बैठक में, उड़ीसा राज्य सहित इन क्षेत्रों के क्षेत्रीय संसाधन और प्रशिक्षण केंद्रों (आरआरटीसी) और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।  नीति आयोग द्वारा नकदी रहित लेनदेन के विभिन्न प्रकारों पर बनाई गयी अनेक वीडियो फिल्मों को भी प्रदर्शित किया गया। प्रचार-प्रसार के लिए इनको व्यापक स्‍तर पर वितरित करने को किया गया। 

बेहतर समझ बनाने के लिए इन फिल्मों का अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं में करने का अनुरोध भी किया गया। कहा गया कि राज्यों/गैर सरकारी संगठनों को नकदी रहित लेनदेन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इसमें सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। उन्होंने ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को अक्सर डिजिटल भुगतान तंत्र से संबंधित नवीनतम जानकारी नहीं है लेकिन उनकी भागीदारी अर्थव्यवस्था के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्‍होंने गैर सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों से नकदी रहित लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सभी लोगों के बीच इसके संदेश को आगे ले जाने का अनुरोध किया।

Friday, 16 December 2016

पशुओं का दु:ख-दर्द समझेंगे, बनेगा संरक्षण कानून
केंद्र ने पशु क्रूरता निवारण (पालतू पशु की दुकान) नियम, 2016 की अधिसूचना की घोषणा की है। सरकार ने पशु क्रूरता निवारण (पालतू पशु की दुकान) नियम, 2016 की अधिसूचना की घोषणा कर दी है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्‍य मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा कि यह पालतू पशुओं की दुकान (पैट शॉप्स) को विनियमित करने के लिए है। यह एक ऐसा क्षेत्र था जो कि अनियंत्रित था। मंत्री ने यह भी कहा कि सभी हितधारकों और राज्यों से सुझाव भी मांगे जाएंगे।

मंत्रालय सार्वजनिक सूचना के लिए भारतीय राजपत्र में प्रस्तावित मसौदा नियम अधिसूचित करेगी। कोई भी व्यक्ति इन नियमों के प्रकाशित होने के बाद 30 तीनों के भीतर संबंधित समौदे पर लिखित रूप से विचार के लिए उप सचिव, पशु कल्याण प्रभाग, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली को अपने सुझाव भेजे सकता है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास जानवरों का अनावश्यक दर्द या पीड़ा रोकने के लिए और पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम के लिए पशु क्रूरता निवारण (पीसीए) अधिनियम, 1960 लागू करने का अधिकार है।

उद्देश्य: इन नियमों का उद्देश्य पालतू पशुओं की दुकानों को जवाबदेह बनाना और इन दुकानों में पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकना है। प्रस्तावित नियम इस प्रकार है: प्रत्येक पालतू पशु दुकान के मालिक को अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के पशु कल्याण बोर्ड में खुद को पंजीकृत कराना होगा। 

राज्य बोर्ड, एक वेटरिनेरी प्रैक्टिशनर और पशु क्रूरता निवारण सोसायटी के एक प्रतिनिधि द्वारा निरीक्षण के बाद ही दुकान पंजीकृत हो पाएगी। इस नियम में दुकान में पक्षियों, बिल्लियों, कुत्तों, खरगोश, गिनी पिग, हम्सटर, चूहों के लिए स्थान को परिभाषित किया गया है। इसके अलावा इसमें बुनियादी सुविधाओं, बिजली बैक-अप, सामान्य देखभाल, पशु चिकित्सा देखभाल और पशुओं के रखरखाव के लिए अन्य आवश्यकताओं को भी परिभाषित किया गया है।

पशुओं की दुकान में उनकी बिक्री, उनकी मृत्य, उनके बीमार होने का पूरा रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य बनाया गया है। प्रत्येक पालतू पशु की दुकान के मालिक को पिछले वर्ष के दौरान पशुओं की खरीद, बिक्री व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का ब्योरा और राज्य बोर्ड द्वारा पूछी गई अहम जानकारी को पूरी सालाना रिपोर्ट के रूप में जमा कराना होगा।

नियमों का उल्लंघन: प्रस्तावित नियमों के पूरा न होने पर दुकान का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही पशुओं की जब्त कर पशु कल्याण संगठन या फिर बोर्ड से मान्यता प्राप्त रेस्क्यू सेंटर को सौंप दिया जाएगा। प्रकाशन तिथि 16.12.2016+


ओडिशा में 2400 मेगावाट बिजली परियोजना

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र प्रधान और बिजली, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने एनटीपीसी और नाल्‍को के बीच होने वाले समझौते पर आयोजित एक कार्यक्रम की अध्‍यक्षता की।

इस समझौते के तहत गजमारा, धनकनाल, ओडिशा में 2400 मेगावाट ताप बिजली परियोजना लगाई जाएगी। गोयल ने कहा कि उत्‍पादित बिजली का उपयोग नाल्‍को करेगा। इन सभी परियोजनाओं में लगभग 36000 करोड़ रूपए की लागत आएगी। गोयल ने कहा कि यह संयुक्‍त उपक्रम दोनों कंपनियों के लिए बहुत फायदेमंद है। परियोजना शुरू हो जाने पर एनटीपीसी, नाल्‍को को बिजली आपूर्ति करने में सफल होगा। दूसरी तरफ एल्‍युमिनियम में उत्‍पादन के लिए नाल्‍को को सुविधा हो जाएगी। इस अवसर पर धर्मेंद्र प्रधान ने बिजली मंत्रालय को बधाई दी और कहा कि इस बिजली संयंत्र के शुरू हो जाने पर ओडिशा के कम विकसित क्षेत्रों को वहां उपलब्‍ध खनिज संपदा का इस्‍तेमाल करने की सुविधा मिलेगी। समझौते पर हस्‍ताक्षर के अवसर पर ओडिशा के धनकनाल निर्वाचन क्षेत्र के लोकसभा सदस्‍य तथागत सतपथी, ओडिशा के श्रम एवं रोजगार, बीमा, इस्‍पात एवं खान मंत्री प्रफुल्‍ल कुमार मलिक, एनटीपीसी के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह, नाल्को के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. टी.के. चांद तथा बिजली और खान मंत्रालयों के वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्‍थित थे।




Thursday, 15 December 2016

ई-पर्यटक वीजा का लाभ उठाने वाले देशों में ब्रिटेन लगातार शीर्ष पर रहा
नवंबर, 2016 के दौरान ई-पर्यटक वीजा सुविधा का लाभ उठाने वाले देशों में ब्रिटेन लगातार शीर्ष पर, इसके बाद क्रमश: अमेरिका और रूस का स्‍थान रहा। नवंबर, 2016 में ई-पर्यटक वीजा पर कुल मिलाकर देश में 1,36,876 पर्यटकों का आगमन हुआ, जबकि नवंबर, 2015 में 83,501 पर्यटक आए थे। इस तरह नवंबर, 2016 में ई-पर्यटक वीजा पर आए पर्यटकों की संख्‍या में नवंबर, 2015 की तुलना में 63.9 प्रतिशत की वृद्धि है।

पर्यटक वीजा सुविधा का लाभ उठाने में ब्रिटेन (22.3 प्रतिशत) लगातार शीर्ष स्‍थान पर रहा। उसके बाद अमेरिका (12.9 प्रतिशत) और रूस (8.7 प्रतिशत) रहे। ई-पर्यटक वीजा सुविधा भारत में 16 हवाई अड्डों पर 155 देशों के नागरिकों के लिए उपलब्‍ध है। नवंबर, 2016 के दौरान ई-पर्यटक वीजा सुविधा का लाभ उठाने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्‍या में नवंबर, 2015 की अवधि की तुलना में वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी 150 देशों के लिए ई-पर्यटक वीजा की पेशकश करने से ही संभव हुई है।

ई-पर्यटक वीजा सुविधाओं का लाभ उठाने वाले शीर्ष 10 स्रोत देशों की हिस्सेदारी रही। ब्रिटेन (22.3 प्रतिशत), संयुक्त राष्ट्र अमेरिका (12.9 प्रतिशत), रूस (8.7 प्रतिशत), फ्रांस (6.3 प्रतिशत), चीन (6.1 प्रतिशत), जर्मनी (4.6 प्रतिशत), ऑस्‍ट्रेलिया (4.1 प्रतिशत), कनाडा (3.6 प्रतिशत), नीदरलैंड (1.8 प्रतिशत) और यूक्रेन (1.8 प्रतिशत)। ई-पर्यटक वीजा पर आए पर्यटकों के मामले में शीर्ष 10 हवाई अड्डों की हिस्सेदारी रही। नई दिल्ली हवाई अड्डा (44.99 प्रतिशत), मुंबई हवाई अड्डा (18.53 प्रतिशत), डाबोलीन (गोवा) हवाई अड़डा (14.19 प्रतिशत), चेन्नई हवाई अड्डा (5.26 प्रतिशत), बेंगलुरू हवाई अड्डा (5.23 प्रतिशत), कोच्चि हवाई अड्डा (2.99 प्रतिशत), कोलकाता हवाई अड्डा (2.32 प्रतिशत), हैदराबाद हवाई अड्डा (1.94 प्रतिशत), त्रिवेंद्रम (1.32 प्रतिशत) और अमृतसर हवाई अड्डा (1.11 प्रतिशत) रहा।




Wednesday, 14 December 2016



स्थानीय सरकार की प्रबंधकीय क्षमता बढ़ाएंगे : नायडू

समावेशी, सुरक्षित, लचीले एवं टिकाऊ शहरों के निर्माण के जरिये न्यायसंगत शहरी विकास के सपने को साकार करने हेतु अगले 20 वर्षों के लिए क्रियान्वयन योजना विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 68 देशों ने नई दिल्ली में अपने तीन दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन और शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने ‘आवास एवं शहरी विकास संबंधी एशिया-प्रशांत मंत्रिस्तरीय सम्मेलन’ का उद्घाटन किया।

 नायडू ने कहा कि शहरी विकास के लाभों से किसी भी व्यक्ति का वंचित न रहना सुनिश्चित करने और शहरों को समावेशी, सुरक्षित, लचीला (प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य जोखिमों का सामना करने की क्षमता) और टिकाऊ बनाने में गवर्नेंस ही कुंजी है। इस क्षेत्र के ज्यादातर देशों में गवर्नेंस से जुड़ी संरचनाओं के अत्यंत कमजोर रहने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान सरकार ने भारत में शहरों की स्थानीय सरकारों की तकनीकी, नियोजन एवं प्रबंधकीय क्षमताएं बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न नए शहरी मिशनों के तहत ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने, क्षमता निर्माण, शहरों के संसाधन आधार में वृद्धि, इत्यादि के जरिये इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। नायडू ने यह भी कहा कि सतत विकास के तीन सिद्धांतों अर्थात न्याय संगतता, अर्थव्यवस्था एवं पर्यावरण में चौथे आयाम के रूप में गवर्नेंस को भी जोड़ने की जरूरत है। नायडू ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र का वैश्विक शहरी आबादी में 55 फीसदी हिस्सा है। एक अरब से भी अधिक लोग झुग्गियों में रहते हैं और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पूरी दुनिया में होने वाली मौतों में 75 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र का है।

नायडू ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि इस क्षेत्र में हो रहे त्वरित शहरीकरण से उपजी चुनौतियों का सामना करने के लिए वे एकजुट होकर प्रयास करें। मंत्री ने कहा कि दुनिया के 15 सबसे बड़े शहरों में से 10 शहर इसी क्षेत्र में हैं, जिनमें से टोक्यो, नई दिल्ली और शंघाई की गिनती शीर्ष 3 शहरों में होती है। इस तथ्य के मद्देनजर अगले दो वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में व्यापक शहरीकरण तय है। अगले 20 वर्षों के लिए भारत की शहरी विकास रणनीतियों का विवरण देते हुए नायडू ने कहा कि नए शहरी एजेंडे के उद्देश्यों में सहकारी संघवाद के अनुरूप एकीकृत शहरी नीतियां तैयार करना, पूंजी के प्रवाह, भूमि एवं श्रम से संबंधित बाधाओं को हटाना और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में परस्पर तालमेल बैठाते हुए इनका विकास करना भी शामिल हैं।

Monday, 12 December 2016

वैज्ञानिक किसानों की जरूरत की तकनीक विकसित करें: राधा मोहन 
 
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों से अपील की है कि वे देश में छोटी जोत वाले किसानों की विशाल संख्या देखते हुए उनकी जरूरतों के हिसाब से तकनीक विकसित करें। उनके प्रसार पर जोर दें। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कासरगोड, केरल स्थित केन्‍द्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्‍थान के शताब्दी समारोह समापन कार्यक्रम में कहा। राधा मोहन सिंह ने इस अवसर पर किसान मेला का उद्घाटन किया और नारियल अनुसंधान एवं विकास पर अन्तर्राष्ट्रीय परिसंवाद तथा रोपण फसल परिसंवाद में हिस्सा लिया। सिंह ने कहा कि केरल में कृषि जोत, राष्ट्रीय औसत 1.15 हेक्टेयर के मुकाबले 0.22 हेक्टेयर है, इसलिए खेती को लाभकारी बनाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली फसलें अपनाने की जरूरत है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि नारियल के साथ काली मिर्च, केला, जायफल, अनानास, अदरक, हल्‍दी, जिमीकंद को शामिल कर बहु फसलचक्र प्रणाली अपनाने से प्रदेश के किसानों का लाभ होगा। सिंह ने कहा कि सीपीसीआरआई ने अपने 100 वर्ष के सफर में खेती में नई - नई तकनीक विकसित कर देश को आगे बढ़ाया है।

राधा मोहन सिंह ने कहा कि भारत, दुनिया के अग्रणी नारियल उत्पादक राष्ट्रों में शामिल है। इसमें केरल का योगदान उल्लेखनीय है । वर्ष 2014-15 में केरल का 32 प्रतिशत क्षेत्रफल और 24 प्रतिशत उत्पादन देश में अंकित किया गया है। कोकोनट डेवलेपमेन्ट बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 में नारियल उत्पा‍दों का कुल 1450 करोड़ रूपये का निर्यात किया गया है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्‍य की जैव विविधता नीति बनाने में केरल अग्रणी रहा है। केरल राज्य का पशुधन एवं मात्स्यिकी सेक्टर भी महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। राज्‍य की कृषि क्षमताओं को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने राज्‍य में 5 अनुसंधान संस्‍थान (केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्‍थान , भारतीय मसाला फसल अनुसंधान संस्‍थान , केंद्रीय कंदीय फसल अनुसंधान संस्‍थान, केंद्रीय समुद्र मात्स्यिकी अनुसंधान संस्‍थान , केन्‍द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्‍थान ) और 14 कृषि विज्ञान केन्‍द्र स्‍थापित किए हैं। इसके अलावा केन्द्र सरकार, राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों को भी करती रही है।
सिंह ने कहा कि कृषि मंत्रालय ने किसानों के हित में कई योजनाएं शुरू की है। केरल में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना  के तहत प्रदेश में कारपुझा एवं मुवात्तुपुझा स्थानों पर मार्च 2018 तक सिंचाई योजना पूरा करने का लक्ष्य है। 

सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के तहत केरल में जहां 7,05,420, सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित करने का लक्ष्य था उसमें से अभी तक केवल 1,32,828 सॉयल हेल्थ कार्ड ही वितरित किए गये हैं। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत कुल 119 कलस्टर काम कर रहे हैं जिन्हें 382.22 लाख रुपये की राशि जारी की जा चुकी है जिसके संदर्भ में प्रदेश सरकार दवारा उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रतीक्षित है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक क्रांतिकारी बीमा योजना है लेकिन केरल में अब तक यह योजना लागू नहीं हो पायी है। राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई नैम) में अब तक ई पोर्टल के माध्यम से 250 मंडियों को जोड़ा गया है और मार्च 2018 तक कुल 585 मंडियों को जोड़े जाने का लक्ष्य है परंतु केरल में ई मंडी स्कीम लागू नहीं की जा सकी है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं को पूरी तरह लागू करे।


Sunday, 11 December 2016



बच्चों को दासता से निकालेंगे
शिक्षित करेंगे,दक्षता का विकास
मिलियन अभियान चलेगा          
राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्‍ट्रपति भवन में कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘100 मिलियन के लिए 100 मिलियन’ अभियान आरंभ कर अपना 81 वां जन्‍म दिन मनाया।

 राष्‍ट्रपति ने कहा कि राष्‍ट्रपति भवन से नोबल शांति पुरस्‍कार विजेता कैलाश सत्‍यार्थी के नेतृत्‍व में उन्‍हें अभियान आरंभ करने पर प्रसन्‍नता हो रही है। यह संस्‍थान भारत गणराज्‍य के लोकतंत्र, बहुलवाद एवं धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि विश्‍व ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास एवं मानव प्रयासों के अन्‍य क्षेत्रों में भले ही प्रगति की हो, लेकिन अभी भी ऐसे 100 मिलियन से अधिक बच्‍चे हैं, जो ‘विद्यालयों से बाहर’ हैं। उन्‍हें उनके बचपन से वंचित रखा जा रहा है। उन्‍हें विभिन्‍न प्रकार के शोषणों का सामना करना पड़ रहा है।

दुनिया को निश्चित रूप से अविलंब यह महसूस करना चाहिए कि जब तक हमारे बच्‍चे सुरक्षित और हिफाजत से नहीं हैं, और जब तक उन्‍हें मानवता के व्‍यापक हितों के लिए बदलाव का कारक बनने की आजादी और अवसर उपलब्‍ध नहीं कराया जाता, कोई भी प्रगति संभव नहीं है। उन्‍हें गरीबी, हिंसा और अभाव से दूर एक प्रकाशमय, उन्‍मुक्‍त और सुरक्षित भविष्‍य सुनिश्चित करना हमारी महत्‍ती जिम्‍मेदारी है।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि वंचित वर्गों के 100 मिलियन बच्‍चों के बेहतर भविष्‍य को आकार देने के लिए 100 मिलियन युवकों को प्रेरित करने का यह वैश्विक प्रयास बदलाव की ऐसी शुरुआत है जो लंबे समय से विलंबित था। 100 मिलियन के लिए 100 मिलियन’ अभियान का लक्ष्‍य अगले पांच वर्षों में बाल श्रम, बाल दासता, बच्‍चों के खिलाफ हिंसा और सुरक्षित, उन्‍मुक्‍त एवं शिक्षित होने के प्रत्‍येक बच्‍चे के अधिकार को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के वंचित वर्गों के 100 मिलियन बच्‍चों के लिए 100 मिलियन युवकों एवं बच्‍चों को प्रेरित करना है।

Tuesday, 6 December 2016


जल दिवस बनेगा डॉ.अम्बेडकर का जन्मदिन 
परियोजनाओं से लगभग 80 लाख हैक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित होगी
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए घोषणा की है कि उनके जन्म दिवस 14 अप्रैल को ‘‘जल दिवस’’ के रूप में मनाया जायेगा। सुश्री भारती केंद्रीय जल आयोग की ओर से समावेशी विकास के लिए जल संसाधन प्रबंधन पर डॉ.अम्बेडर के विचारों पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहीं थीं।
मंत्री ने कहा, ‘‘आने वाले दिनों में पानी भारत सरकार का महत्वपूर्ण एजेंडा बनने वाला है।’’ सुश्री उमा भारती ने आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब हम विचार करें कि क्या हर कार्य के लिए स्वच्छ जल का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संशोधित और गैर संशोधित जल का किस प्रकार से बेहतर इस्तेमाल हो। विभिन्न प्रकार की योजनाओं में पानी की भूमिका को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि देश में पानी की व्यवस्था में सुधार और उसका दुरूपयोग करने वालों को दंडित किये जाने की जरूरत है। 

केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूजल बोर्ड के पुनर्गठन के बारे में डॉ.मिहीर शाह समिति की रिपोर्ट का चर्चा करते हुए सुश्री भारती ने कहा ‘‘हमें रिफोर्म तो लाना है, लेकिन वह सर्वसम्मत होना चाहिए। ’’ त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) 99 परियोजनाओं का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से लगभग 80 लाख हैक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित हो पायेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजनाओं को वर्ष 2020 तक पूरा करने के लिए जरूरी रूपरेखा तैयार करने के लिए केंद्रीय जल आयोग के युवा वैज्ञानिकों की टीमें देश भर में भेजी गयी हैं, जो शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट पेश कर देंगीं।

 बाढ़ प्रबन्धन की चर्चा करते हुए सुश्री भारती ने कहा ‘‘बाढ़ प्रबन्धन को नये सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है, ताकि उसे सार्थक दिशा में ले जाया जा सके।’’ उन्होंने कहा कि हमें सुनिश्चित करना होगा कि ‘बाढ प्रबन्धन’, ‘भ्रष्टाचार प्रबन्धन’ में न बदल जाये। बाढ़ प्रबन्धन में राज्य सरकारों एवं स्थानीय प्रशासन कि भूमिका का उल्लेख करते हुए जल संसाधन मंत्री ने कहा कि उनकी भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे नदियों के बाढ संभावित इलाकों को पहले से चिन्हित करें और यह सुनिश्चित करें कि वहां बसावट न हो। यदि फिर भी उन क्षेत्रों में कोई रहता है तो उसे बराबर यह चेतावनी दी जाये कि वह कभी भी बाढ़ से प्रभावित हो सकता है।

Monday, 5 December 2016

मैजिक ट्रेन ऑफ इंडिया’
रेल मंत्री सुरेश प्रभु और केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जेपी नड्डा पांच डिब्‍बों वाली ‘लाइफ लाइन एक्‍सप्रेस’ में मौखिक, स्‍तन और सर्विकल कैंसर ,हृदय आघात की रोकथाम तथा परिवार कल्‍याण सेवाओं के लिए दो अतिरिक्‍त डिब्‍बे जोड़ने का उद्घाटन करेंगे।  ये अतिरिक्‍त सेवाएं लाइफ लाइन एक्‍सप्रेस द्वारा दृष्टि ,श्रवण, भंजन, जलन, आर्थेपेडिक त्रुटियों ,मिरगी के इलाज तथा दांतों संबंधित समस्‍याओं के लिए किए जा रहे मौजूदा शल्‍य चिकित्‍सा को और मजबूती प्रदान करेंगी।

इसके तहत देश भर के गरीब ग्रामीण इलाकों के लिए बिना किसी तरह के शुल्‍क के तीन पूर्ण रूप से सुसज्जित ऑपरेशन थियेटर उपलब्‍ध होंगे। प्रत्‍येक परियोजना स्‍थल पर इससे कुल 10,000 लोगों को लाभ मिलेगा। बढ़ाए गए सात डिब्‍बों वाली लाइफ लाइन एक्‍सप्रेस सतना (मप्र) से अपनी 178 वीं परियोजना की शुरुआत 15 दिसंबर,2016 से करेगी जो 5 जनवरी ,2017 तक चलेगी। वर्ष 2017 में अन्‍य एलएलई परियोजनाएं तेलांगना, छत्‍तीसगढ़ ,मध्‍य प्रदेश, गुजरात और अन्‍य स्‍थलों पर शुरू की जाएंगी।

यह विश्‍व के दो लाख चिकित्‍सकों द्वारा दी गई सेवाओं की अनुपम परियोजना है जिसके कारण भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में 10 लाख से अधिक दिव्‍यांगों का मुफ्त इलाज संभव हो पाया है। पूरे देश में 177 परियोजनओं के तहत लाइफ लाइन एक्‍सप्रेस द्वारा एक लाख से अधिक दृष्टि ,श्रवण तथा मौखिक विकृति सर्जरी के माध्‍यम से किए गए। लाइफ लाइन एक्‍सप्रेस द्वारा मिरगी तथा दांतों से संबंधित रोगों का भी इस दौरान इलाज किया गया।
विश्‍व भर में ‘लाइफ लाइन एक्‍सप्रेस’ को ‘मैजिक ट्रेन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। इस अनुपम परियोजना का अनुसरण मॉडल के रूप में कई देशों में अस्‍पताल रेलगाड़ी और नदी नाव अस्‍पताल के रूप में किया है।

Sunday, 4 December 2016

आभूषण क्षेत्र का रोजगार सृजन पर सीधा प्रभाव : निर्मला

वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि दूसरे क्षेत्रों के विपरीत रत्न और आभूषण क्षेत्र रोजगार निर्माण पर सीधा प्रभाव डालता है। वाराणसी में विस्तार परिसर में भारतीय रत्न और आभूषण संस्थान के शिलान्यास समारोह के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह एकमात्र ऐसा क्षेत्र है।जिसमें रत्न और आभूषण जैसे उपक्षेत्रों के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को उचित प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकतम रोजगार प्रदान किया जाता है। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि इस पवित्र शहर में मानव सभ्यता का सबसे लंबा इतिहास है। इस शहर ने सदियों पूर्व भी शिल्प कौशल का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद, जीजेईपीसी यहाँ इस व्यवस्था को भी देखता है कि वर्षों पहले सामने आई प्रतिभाएं अभी तक खोई नहीं है।यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम न सिर्फ उनकी पहचान करें बल्कि इस प्रक्रिया को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में उनकी पूरी सहायता करें।

रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अभिकल्पित परियोजनाओं में से एक स्किल इंडिया को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अपनी तरह के प्रथम भारतीय रत्न और आभूषण संस्थान (आईजीजे) की स्थापना कर रही है। देश के आईआईजीजे परिसरों में मुंबई, नई दिल्ली, जयपुर और कोलकाता के बाद वाराणसी पांचवा केंद्र है।

जीजेईपीसी के अध्यक्ष प्रवीण शंकर पांड्या ने कहा कि भारत में रत्न और आभूषण का सर्वोच्च निकाय जीजीईपीसी हमेशा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि से कौशल भारत सहित अनेक पहलों के माध्यम से भारत को विकास के पथ पर शीघ्रता से आगे बढ़ाने का हमेशा से समर्थन करता रहा है। भारत में रत्न और आभूषण उद्योग ने 1966-67 में 28 मिलियन अमरीकी डॉलर से 2015-16 तक 38 बिलियन अमरीकी डॉलर तक की वृद्धि दर्ज की है। यह उल्लेखनीय है कि यह उद्योग संपूर्ण भारत में करीब 3 मिलियन लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।