Friday, 8 September 2017

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्‍यूरो के नए मुख्‍यालय भवन का उद्घाटन

      केन्‍द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यहां पुलिस अनुसंधान व विकास ब्‍यूरो के नए मुख्‍यालय भवन का उद्घाटन किया। उद्घाटन के अवसर पर राजनाथ सिंह ने बीपीआर एंड डी एवं एनबीसीसी की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि दोनों के सम्मिलित प्रयासों से इस परियोजना को समय से पूरा करने में सफलता मिली है।

     उन्‍होंने ब्‍यूरो के नए मुख्‍यालय भवन के माहौल और सकारात्‍मक वातावरण की प्रशंसा की और कहा कि इससे यहां काम करने वालों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलेगी। उन्‍होंने स्‍वीकार किया कि डेपुटेशन पर कार्य कर रहे कुछ रैंकों के वेतन ढांचे में अनियमितता है, इसे ठीक किए जाने की आवश्‍यकता है। 
   केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने इस बात पर सहमति व्‍यक्‍त की की बीपीआर एडं डी के अनुरोध पर गृह मंत्रालय विचार कर रहा है। बीपीआर एंड डी ने अन्‍य प्रशिक्षण संस्‍थानों की तरह 30 प्रतिशत भत्‍तों की मांग की ताकि और अधिकारी इस संगठन को स्‍वेच्‍छा से अपना सकें। केन्‍द्रीय गृहमंत्री ने सर्वश्रेष्‍ठ पुलिस प्रशिक्षक के लिए उत्‍तर प्रदेश के डीजीपी सुलखान सिंह को सर्वश्रेष्‍ठ पुलिस प्रशिक्षक के लिए केन्‍द्रीय गृहमंत्री पदक से सम्‍मानित किया।
      उन्‍होंने बीपीआर एंड डी के अधिकारियों एनपीएम के इंस्‍पेक्‍टर जनरल डॉ. निर्मल कुमार आजाद, पीएसओ(डब्‍ल्‍यू) के संजय शर्मा, आरएंडसीए के सहायक निदेशक डॉ. एस कार्तिकेयन, सीडीटीएस जयपुर के उप पुलिस अधीक्षक रनवीर सिंह गहलौत, सीडीटीएस हैदराबाद के सहायक सुधाकर देशमुख को पुलिस पदक से सम्‍मानित किया। बीपीआर एंड डी के महानिदेशक डॉ. मीरन सी. बोरवांकर ने भारतीय पुलिस के आधुनिकीकरण और अनुसंधान कार्यों के लिए बीपीआर एंड डी की उपलब्धियों की जानकारी दी। प्रशासन के निदेशक वी एच देशमुख ने बीपीआर एंड डी की विभिन्‍न पहलों के बारे में बताया।
      उन्‍होंने यह भी बताया कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ई-उस्‍ताद प्रशिक्षण ई-पोर्टल का उद्घाटन किया था। एनबीसीसी के महाप्रबंधक डॉ. ए के मित्‍तल ने नवनिर्मित भवन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस पर लगभग सौ करोड़ रुपए की लागत आई है। इस भवन में अत्‍याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई गई है। इसके आर्ट ऑडिटोरियम में ढाई सौ लोगों के बैठने की व्‍यवस्‍था है। 
    यहां नौ छोटे और बड़े सम्‍मेलन कक्ष और हॉल बनाए गए हैं। भवन में साढे तीन लाख पुस्‍तकों से सज्जित आधुनिक पुस्‍तकालय का निर्माण किया गया है। हॉस्‍टल सुविधा मुहैया कराई गई है जिसमें बड़ा रसोईघर और 52 दो सीटों वाले कमरों की व्‍यवस्‍था की गई है। बीपीआर एंड मुख्‍यालय पूरी तरह से वातानुकूलित है और हरित भवन के प्रतिमानों के अनुसार बनाया गया है। 
    यहां पर वर्षा के पानी के संग्रहण की प्रणाली लगाई गई है। इस परिसर में पर्याप्‍त हरियाली है। बीपीआर एंड डी में एनसीआरबी ब्‍लॉक सहित पांच सौ कर्मचारियों से भी अधिक लोग हैं। इनके लिए आधुनिक वर्क स्‍टेशन बनाए गए हैं। इस अवसर पर पुद्दुचेरी की उपराज्‍यपाल डॉ. किरण बेदी, गुप्‍तचर ब्‍यूरो के निदेशक राजीव जैन, सीपीओ सीएपीएफ के प्रमुख एवं अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति उपस्थित थे।

झारखंड को 2019-20 तक पूर्ण साक्षर बनाने का संकल्प

        उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि बहुत हर्ष की बात है कि आज अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस है। मैं सबसे पहले मुख्यमंत्री रघुवर दास को इसकी बधाई देता हूं जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के इस पावन अवसर पर नवसाक्षर बहनों एवं भाईयों के इस अभूतपूर्व समागम का आयोजन किया है। 

   उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है कि इस अवसर पर मैं आप सब के बीच उपस्थित हूं। मुझे यह जानकर बहुत प्रसन्नता हो रही है कि मुख्यमंत्री झारखंड के नेतृत्व में स्कूली साक्षरता विभाग, झारखंड द्वारा सघन अभियान चलाया गया है, जिसके फलस्वरूप विगत दो-तीन वर्षों में 32 लाख से भी अधिक निरक्षर भाई-बहनों को पूर्ण साक्षर बनाने का काम किया गया। साथ ही झारखंड के लगभग पाँच सौ पंचायतों के साथ-साथ कई प्रखंडों को पूर्ण साक्षर बनाने की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। इन कार्यों ने संपूर्ण साक्षर भारत के सपने को पूरा करने में भारत सरकार के संकल्प को एक नई दिशा दी है। 
      उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि मुझे यह भी बताया गया है कि संपूर्ण साक्षरता की दिशा में झारखंड सरकार ने यह संकल्प लिया है कि वर्ष 2019-20 तक झारखंड राज्य को पूर्ण साक्षर बनायेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री झारखंड की अगुवाई में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग अपने इस लक्ष्य को अवश्य हासिल करेगा। इस कार्य में शिक्षा जगत से जुड़े सभी लोगों, चाहे वो सरकारी पदाधिकारी, प्रेरक या स्वयंसेवी शिक्षक हों, उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। 
      उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि मैं उन्हें शुभकामना देता हूं कि संपूर्ण साक्षरता के इस कार्य में वे तन-मन से सम्मिलित हों। निरक्षरता एक अभिशाप है। किसी भी राष्ट्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा निरक्षरता ही है। निरक्षरता के कारण जनता अपने अधिकार एवं कर्त्तव्यों को ठीक से नहीं समझ पाती है। जिसके कारण उन्हें सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास की सभी योजनाओं का पूरा-पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
         उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है एवं सर्वाधिक आबादी आदिवासी जनता की ही है। जब तक राज्य का प्रत्येक नागरिक साक्षर नहीं हो जाता है तब तक विकास की योजनायें समुचित रूप से हर एक नागरिक तक नहीं पहुंचेंगी। सबका साथ सबका विकास तभी सुनिश्चित हो सकता है जब पूरा झारखंड प्रदेश साक्षर हो। 
        उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि इसलिये भाईयों एवं बहनों, भारत के संपूर्ण विकास के लिये भारत की जनता का साक्षर होना बहुत जरूरी है। पुरुषों के साथ साथ महिलाओं को भी साक्षर होना होगा। यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि झारखंड सरकार ने भी महिला साक्षरता को प्राथमिकता दी है और जिसके परिणामस्वरूप नवसाक्षर, बनने वालों में 70 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है। मुझे विश्वास है कि झारखंड सरकार के प्रयासों से अगले एक दो वर्षों में पुरुष एवं महिला साक्षरता दर के अंतर को 10 प्रतिशत से भी कम कर दिया जायेगा। 
     उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि साक्षरता एक सामाजिक अभियान के रूप में चलाना चाहिए। सरकार के नेतृत्व में हर गांव और नगरपालिकाओं में जो प्रजा प्रतिनिधि हैं, समाजसेवी है, प्राइवेट संस्था है, अध्यापकगण हैं, माता-पिता है - सबसे मैं आग्रह करता हूं कि इस अभियान में सक्रिय रूप से सम्मिलित हों। आप एक नये भारत का निर्माण करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
     उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आज की इस सभा में जो हमारे नवसाक्षर भाई-बहन उपस्थित हैं, उन्हें मैं साक्षर होने के लिये बहुत बधाई देता हूं। आपको जिन्होंने साक्षर बनाया है या आपको साक्षर बनाने में सरकार तथा समाज के प्रतिनिधियों ने जो भूमिका निभाई है, वे भी मेरी हार्दिक बधाई के पात्र हैं। 
           उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि मेरा सभी नवसाक्षर भाईयों और बहनों से अनुरोध होगा कि जिस प्रकार आप साक्षर बनें हैं, उसी प्रकार अपने आसपास के निरक्षर भाईयों और बहनों को भी साक्षर बनने की प्रेरणा दें और इसके लिए उनको पूरा सहयोग प्रदान करें, तभी आपका साक्षर होना सार्थक होगा। अक्षरज्ञान एक नाव है जो विकास के उस पार तक हमें ले जा सकती है। यह नींव है समृद्ध भारत, स्वच्छ भारत, सशक्त भारत और समरस भारत के भव्य भवन की। अंत में, मैं मुख्यमंत्री, झारखंड, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, नवसाक्षर भाइयों एवं बहनों तथा साक्षरता से जुड़े सभी कर्मियों को पुन बहुत-बहुत बधाई एवं धन्यवाद देता हूँ।

जीवंत व समावेशी लोकतंत्र बनाने की दिशा में साक्षरता आवश्‍यक

     उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि एक सहभागी, जीवंत व समावेशी लोकतंत्र में सारक्षता आवश्यक कदम है। उपराष्ट्रूपति अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा, मानव संसाधन विकास तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉक्टर सत्यपाल सिंह, स्कूल शिक्षा व साक्षरता विभाग के सचिव अनिल स्व्रूप और अन्य गणमान्य् व्यक्ति उपस्थित थे।

      उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश के विकास में साक्षरता का महत्व पूर्ण योगदान होता है। साक्षर व्यक्ति, संविधान में प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करता है और राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक लाभों को प्राप्त करने में सक्षम होता है। उन्होंने सार्वभौमिक साक्षरता प्राप्त करने के लिए सुझाव दिए। जैसे– प्राथमिक व स्कूली शिक्षा में सुधार तथा उन लोगों को सीखने का अवसर प्रदान करना, जो कभी स्कूल गये ही नहीं या किन्हीं कारणों से उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। नये साक्षर होने वालों में अधिकांश महिलाएं हैं। साक्षर भारत ही सक्षम भारत बनेगा।
     उन्होंने शिक्षा में तकनीक के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि 51वें अन्तररराष्ट्रीसय साक्षरता दिवस के अवसर पर मैं आप लोगों के बीच आकर अत्याधिक प्रसन्न हूं। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि साक्षरता ने सभी देशों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दिन हम अपने स्वतंत्रता संघर्ष और महात्मा गांधी को याद करते हैं। गांधी जी ने कहा था कि बड़ी संख्या में लोगों की निरक्षरता एक पाप है और एक शर्मनाक स्थिति है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। 
     उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि इस दिन हम अपनी उपलब्धियों को भी रेखांकित करते हैं। 1947 में मात्र 18 प्रतिशत लोग ही पढ़-लिख सकते थे। आज लगभग 74 प्रतिशत आबादी साक्षर है। 95 प्रतिशत बच्चे स्कूल जाते हैं और 86 प्रतिशत युवा साक्षर हैं। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। लेकिन हमें लम्बा रास्ता तय करना है। लगभग 35 करोड़ युवा साक्षर नहीं हैं और इस प्रकार देश के विकास में वे प्रभावी रूप से सहभागी नहीं बन पा रहे हैं। लेकिन इन उपलब्धियों के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं।
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 सितम्बर को चीन में ब्रिक्स सम्मेलन के अपने सम्बोधन में कहा ‘सबका साथ-सबका विकास’। अगले पांच वर्षों में भारत न्यू इंडिया बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हम लोग 2030 के समावेशी विकास के एजेंडे के प्रति प्रतिबद्ध हैं। इस एजेंडे में पूरे विश्व में सार्वभौमिक साक्षरता की बात कही गई है और इसे 2030 तक प्राप्त करन है। सार्वभौमिक साक्षरता एक सामुदाय आधारित प्रयास होना चाहिए और सरकार को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
      इस अवसर पर मुझे विख्यात तेलुगू कवि गुरज़दा अप्पा राव की पंक्तियां याद आती है, जिसमें उन्होंने कहा था ‘देश हमारे पैरों के नीचे की जमीन नहीं है बल्कि हम लोग इस धरती के ऊपर रहते हैं’ हमें गरीबों में भी सबसे गरीब तक पहुंचना होगा। यही अंत्योदय दृष्टिकोण है। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि जीवन में साक्षरता को देखते हुए देश में साक्षर भारत और सर्वशिक्षा अभियान जैसे कार्यक्रम चल रहे हैं। साक्षर भारत कार्यक्रम का कार्यक्षेत्र ग्रामीण भारत है, जहां महिलाओं में साक्षरता दर काफी कम है। यह कार्यक्रम ग्राम पंचायत स्तरर पर लागू किया गया है।
      उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि मार्च 2017 तक लगभग 6.66 करोड़ लोगों ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय द्वारा आयोजित मूल्यांकन परीक्षा में सफलता प्राप्त की है, जिनमें से 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। महिलाएं साक्षरता कार्यक्रम की दूत हैं। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि मैं राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की उपलब्धियों से प्रसन्न हूं। मिशन ने लोगों को मूलभूत साक्षरता के साथ-साथ आर्थिक साक्षरता भी प्रदान की है। मिशन ने लोगों को प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अन्त्र्गत खाते का संचालन करना सिखाया है। 
     प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अन्तर्गत लोगों को सुरक्षा बंधन में सहभागी बनाया है। शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मिशन ने सांसद आदर्श ग्राम योजना को भी जोड़ा है।
     उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि साक्षरता कार्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ जाती है जब इसे स्वच्छ भारत, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों से जोड़ दिया जाता है।
    मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि भारत यूनेस्को के कार्यक्रम ‘ग्लोबल एलायंस फॉर लिटरेसी विदिन दॅ फ्रेमवर्क ऑफ लाइफलॉंग लर्निंग’ का एक प्रमुख सहभागी है। अगले 15 वर्षों में विश्विस्तर पर साक्षरता बढ़ाने के कार्यक्रम में भारत महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान कर सकता है।