Friday, 31 March 2017

आर्थिक गलियारा विकास में लगभग 9.2 अरब डॉलर की लागत

            एशियाई विकास बैंक (एडीबी) भारत में यातायात, व्‍यापार सुविधा, ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और आर्थिक गलियारा विकास में लगभग 9.2 अरब डॉलर की लागत वाली 46 परियोजनाओं को समर्थन दे रहा है। 

           एडीबी भारतीय कस्‍टम्‍स को कारगर तरीकों और तकनीकी विशेषज्ञता के लिए मदद दे रहा है। ये गतिविधियां दक्षिण एशिया उप-क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग (एसएएसईसी) के तहत चलाई जा रही हैं। उल्‍लेखनीय है कि एसएएसईसी विभिन्‍न परियोजनाओं के जरिए उप-क्षेत्र में ‘व्‍यापार सुविधा रणनीतिक संरचना (2014-2018)’ जैसी गतिविधियों का संचालन कर रहा है। याद रहे कि बांग्‍लादेश, भूटान, भारत और नेपाल के बीच यातायात व्‍यवस्‍था को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जो एक महत्‍वपूर्ण कदम है। 

               इसके जरिए सीमापार वाहनों का आवागमन संभव होगा, जिन्‍हें चिह्नित गलियारों के जरिए संचालित किया जाएगा। एसएएसईसी कार्यक्रम की स्‍थापना 2001 में की गई थी। यह परियोजना आधारित साझेदारी मंच है, जिसके जरिए सीमापार संपर्कता, सदस्‍य देशों के बीच व्‍यापार में बढोतरी और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाकर क्षेत्रीय समृद्धि को प्रोत्‍साहित करना है। एडीबी इस कार्यक्रम का सचिवालय और वित्‍तीय सहायता देने वाला प्रमुख संगठन है।

झारखंड के देवघर में राष्‍ट्रीय कौशल प्रदर्शनी

             राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी एक राष्‍ट्रीय कौशल प्रदर्शनी तथा धनबाद और गोड्डा में दो नए विशाल वाहन चालक प्रशिक्षण संस्‍थानों एवं 31 प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों का उद्घाटन करेंगे।

            वे देवघर और रांची में दो नए वाहन चालक प्रशिक्षण संस्‍थानों की आधारशिला भी रखेंगे। राष्‍ट्रपति इन पहलों का उद्घाटन देवघर में 2 अप्रैल को करेंगे। कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) राजीव प्रताप रूडी ने कहा है कि राष्‍ट्रपति ने अपने एक भाषण में यह उल्‍लेख किया था कि हमें शिक्षा और कौशल विकास में भरपूर तेजी लानी होगी। रूडी ने कहा कि उनका मंत्रालय इस दिशा में काम कर रहा है। झारखंड में वाहन और वाहन पुर्जों का उद्योग तेजी से पनप रहा है। 

              इसके मद्देनजर वाहन चालक प्रशिक्षण कौशल विकास का महत्‍वपूर्ण अंग बन गया है। झारखंड के वाहन उद्योग में लगभग 70 हजार लोगों को रोजगार मिला है और भारत के सकल घरेलू उत्‍पाद में उसका योगदान मोटे तौर पर 7 प्रतिशत है। 31 बहु-कुशलता प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों की स्‍थापना एक ऐतिहासिक कदम है जिससे झारखंड, मध्‍य प्रदेश, बिहार, असम, पश्‍चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्‍थान, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्‍तीसगढ़, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश के युवाओं की आवश्‍यकताएं पूरी होंगी।  

 

गर्मियों के मौसम के लिये ऊर्जा आपूर्ति की तैयारी

            केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने आगामी गर्मियों के मौसम में देश में विशेष रूप से उत्तरी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की स्थिति और विभिन्न सुविधाओं की तैयारी की समीक्षा की है।

         विद्युत सचिव पी.के. पुजारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य सरकारों, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), सीईए, पोसोको, विभिन्न क्षेत्रीय और राज्य लोड प्रेषण केंद्र (आरएलडीसी/एसएलडीसी) के प्रतिनिधि शामिल हुये। आईएमडी की रिपोर्ट के अनुसार मार्च से मई 2017 के दौरान तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

             हाल ही में आईएमडी की 27 मार्च 2017 को जारी विज्ञप्ति में कहा गया था कि मार्च के आखिरी सप्ताह में तापमान सामान्य से 4-6डिग्री अधिक था, जिस कारण कई क्षेत्रों में लू की स्थिति बनी है। प्रत्‍येक राज्‍य, क्षेत्र और अखिल भारतीय स्‍तर पर बिजली की मौजूदा मांग और भावी मांग की समीक्षा की गई। देखा गया है कि उत्‍तरी क्षेत्र में बिजली की मांग अप्रैल से सितंबर, 2017 की अवधि में 56जीडब्‍ल्‍यू तक बढ़ गई। दक्षिण क्षेत्र में बिजली की मांग 42जीडब्‍ल्‍यू तक हो चुकी है जबकि पश्‍चिमी क्षेत्र में इसने 50जीडब्‍ल्‍यू का स्‍तर छू लिया है।

             संभावना है कि अप्रैल-जून के बीच इसमें 46जीडब्‍ल्‍यू की गिरावट आएगी। पूरे भारत में गर्मी के दौरान बिजली की सर्वाधिक मांग 165जीडब्‍ल्‍यू तक पहुंचने की संभावना है। उल्‍लेखनीय है कि उत्‍पादन संबंधी संसाधन इस दौरान उचित मात्रा में उपलब्‍ध है और कोयला आधारित क्षमता देश में कारगर रही। पिछले वर्ष की तुलना में दक्षिणी क्षेत्र में भंडारण स्‍तर में गिरावट आई जिससे अद्यतन 700 एमयू ऊर्जा कटौती हो गई। कुछ राज्‍यों में पारेषण और वितरण नेटवर्क के सीमित होने के कारण अड़चनें पैदा हुईं। इससे निपटने के लिए राज्‍य सुविधा संयंत्रों को सलाह दी गई कि वे पारेषण प्रणालियों को जल्‍द पूरा कर लें। 

             उत्‍तरी क्षेत्र के राज्‍य सुविधा संयंत्रों के सामने धूल भरी आंधी और बवंडर की समस्‍या आती है, जिसके कारण अप्रैल से जून के समय के दौरान बिजली के ग्रिड में बाधा उत्‍पन्‍न होती है। इसके कारण 6-7जीडब्‍ल्‍यू की कमी आ जाती है। इन सुविधा संयंत्रों को सुझाव दिया गया है कि ऐसे मामलों में वे पैदावार की कटौती में समन्‍वय स्‍थापित करें ताकि ग्रिड की समस्‍या कम हो सके। इसके अलावा पिछली कुछ ट्रांसमिशन टावर गिरने की घटनाओं के देखते हुए इमरजेंसी रिस्टोरेशन सिस्टम (ईआरएस) तैयार रखने के लिए भी कहा गया है। सीईए विभिन्न राज्यों और पारेषण लाइसेंसधारियों के पास ईआरएस की उपलब्धता पर निगरानी रखेगी। यह भी निर्णय लिया गया था कि पोसोको और एसएलडीसी बेहतर योजना और आपूर्ति की विश्वसनीयता के लिए टेलर मेड मौसम का पूर्वानुमान/वेब आधारित मौसम की जानकारी पाने के लिए आईएमडी के साथ मिलकर काम करेंगे।

              उत्तर प्रदेश को इंट्रा स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को तेजी से बढ़ाने की सलाह दी गई थी। राज्य में आवश्यक पारेषण और वितरण आधारभूत संरचना की कमी बताई गई थी। प्रधान सचिव, ऊर्जा, दिल्ली सरकार ने बताया है कि दिल्ली प्रणाली के भीतर पारेषण की कमी हल हो रही है। हालांकि बदरपुर टीपीएस में जनरेशन बनाए रखने और तब तक दिल्ली के भीतर ही गैस स्टेशनों को गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। जम्मू एवं कश्मीर को भी राज्य के भीतर योजनाबद्ध सब-ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था अपनाने की सलाह दी गई थी।

पूर्वी भारत व दक्षिण पूर्व एशिया के आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा असम

                राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने असम के गुवाहाटी में 'नमामि ब्रह्मपुत्र' महोत्‍सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि असम पूर्वी भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

             यह प्रधानमंत्री के एक्‍ट ईस्‍ट पॉलिसी को लागू करने का गेटवे और सबसे प्रभावी स्थान है। उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया भारत के निवेश और व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। भारत जल्द ही आसियान के साथ अपने सहयोग के 25 वर्षों का जश्न मनाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि असम के पास विशाल क्षमता है। यह प्राकृतिक संसाधनों में समृद्ध है। यहां के लोग बहुत मेहनती होते हैं। प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सही नीतियों का होना बेहद जरूरी है। 

              असम की विविध और विशिष्ट संस्कृति का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की विविधता का प्रबंधन इसकी योग्‍यता है, जिसमें विविधता में एकता बनाए रखने की क्षमता है। यह न केवल अभिजात वर्ग पर निर्भर है, बल्कि उन सामान्य लोगों पर भी निर्भर है, जो दृढ़ विश्वास, आपसी समझ और सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने कहा कि भारतीयों को तर्कसंगत माना जाता है, लेकिन असहिष्णु कभी नहीं माना जाता। असम के महान विद्वान और सामाजिक सुधारक शंकरदेव की शिक्षाओं सहित हमारी परंपराओं ने कभी भी असहिष्णुता की अनुमति नहीं दी। 

               राष्‍ट्रपति ने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी असम और इस क्षेत्र की जीवन रेखा है। इस क्षेत्र के लोगों की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और हर दिन की दिनचर्या इसके आसपास ही घूमती है। उन्होंने असम की संस्कृति के साथ-साथ इसकी क्षमता को प्रदर्शित करने हेतु 'नमामि ब्रह्मपुत्र' जैसे वार्षिक महोत्‍सव की शुरूआत के लिए राज्य सरकार की सराहना की।

डिजिटल भुगतान को जन आंदोलन बनाने की मुहिम

              भारत को कैश-लेस अर्थव्यवस्था बनाने के लिए डिजिटल भुगतान को लेकर चलाई गई मुहिम अब एक जन आंदोलन का हिस्सा बनती जा रही है।

              डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग की ओर दो योजनाओं को लोगों से भारी समर्थन मिल रहा है। 25 दिसंबर 2016 को डिजिटल पेमेंट्स के लिए दो प्रोत्साहन योजनाएं लकी ग्राहक योजना और डिजिधन व्यापार योजना शुरू की गई थीं। इन योजनाओं के शुरू होने के बाद से 14 लाख लोगों और 77,000 व्यापारियों को प्रोत्साहन के तौर पर पुरस्कार धन राशि मिली है। दोनों प्रोत्साहन योजनाओं के तहत अब तक कुल 226,45,40,000 रुपए (इसमें 176,95,00,000 रुपये ग्राहकों को जबकि 49,50,00,000 रुपये व्यापारियों को) मिले हैं। 

              इन योजनाओं का लाभ लेने वालों में सभी विभिन्न आयु वर्ग, लिंग और आर्थिक स्तर के लोग शामिल हैं। बिहार में आजमगढ़ गांव के 27 वर्षीय मकैनिक देविंदर ने लकी ग्राहक योजना के तहत एक लाख रुपये जीते हैं। 12 के एक परिवार में छह भाइयों के बीच सबसे बड़े होने के नाते उन्होंने काफी लेनदेन की। अब उनका मानना है कि डिजिटल भुगतान करना बहुत आसान है। इससे पहले वह लेनदेन के लिए भाई के बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे लेकिन अब वह जल्द ही अपना बैंक खाता खोलेंगे। महाराष्ट्र के पचवाड़ा गांव के 22 वर्षीय सुनील विश्वास चौहान एक नौजवान किसान हैं। वह स्थानीय बाजार में दूध और खेत की उपज बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। सुनील बताते हैं, ‘मैं खुश हूं कि डिजिटल भुगतान का सिस्टम मुझ तक पहुंच चुका है। पहले सारा पैसा बिचौलिया खा जाता था लेकिन अब पूरा पैसा सीधे मेरे बैंक खाते में जाता है और अलर्ट मैसेज भी मिल जाता है।’

                  चालीस वर्षीय नाहिद ने कुछ ही दिन पहले अपना एक दुकान खोलीं और अपने दुकान में डिजिटल भुगतान के लिए सिस्टम लगवाया। वह बताती हैं, ‘मेरा 80 फीसदी भुगतान डिजिटल के माध्यम से होता है। इससे छुट्टा की समस्या खत्म हो गई है और मेरा मानना है कि यह सबसे सुरक्षित है।’वह कहती हैं कि वह और उनके छह कर्मचारी अपने ग्राहकों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करते हैं। डिजिटल लेनदेन को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकारी पहल के हिस्से के रूप में 100 दिन से ज्यादा तक 100 शहरों में डिजिधन मेला का आयोजन किया गया। 30 मार्च (90 दिन) तक 26 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों में इस मेले का आयोजन किया गया। 

            इस मेला के जरिये 5000 वित्तीय संस्थान 15 लाख नागरिकों तक पहुंचे और कम से कम 16,000 सरकारी और निजी संस्थानों ने अपने को कैश-लेस घोषित किया। 100 दिन तक चलने वाला डिजिधन मेला मेगा ड्रा के साथ 14 अप्रैल को समाप्त होगा। शेष बचे 10 दिन में गंगटोक, इम्फाल, हरिद्वार, नेल्लोर जैसे अन्य शहरों में इस मेला को आयोजित करने की योजना है। विमुद्रीकरण की शुरुआत से यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन में 584 प्रतिशत (0.3 से 4.5 मिलियन) की वृद्धि हुई है। इसी दौरान आधार का उपयोग करने वाले भुगतानों में भी 1352 प्रतिशत (0.7 से 2.7 मिलियन) की बढ़ोतरी हुई है।

             प्रधानमंत्री द्वारा 30 दिसंबर 2016 को यूपीआई पेमेंट ऐप भीम ऐप को लांच करने के बाद से अब तक रिकॉर्ड स्तर पर अभूतपूर्व इसे 18 मिलियन बार डाउनलोड किया गया है। इसके अलावा अक्टूबर 2016 से बेची गई पीओएस मशीनों की संख्या में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि पूरे देश में व्यापारियों की अधिक से अधिक संख्या स्वेच्छा से डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रही है। आज लगभग 8 अरब लेनदेन डिजिटल भुगतान विधियों के माध्यम से प्रतिवर्ष होता है। सरकार इस वर्ष के अंत तक 25 अरब के लेनदेन को बढ़ाने की योजना बना रही है ताकि इस प्रणाली से बहते हुए काले धन को कम कालेधन की अर्थव्यवस्था का खात्म हो जाए।

             नीति आयोग ने प्रोत्साहित करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने को लेकर 25 दिसंबर 2016 को ग्राहकों के लिए लकी ग्राहक योजना (एलजीवाई) और व्यापारियों के लिए डिजिधन व्यापार योजना (डीवीवाई) की शुरुआत की थी। यह दोनों योजनाएं 14 अप्रैल 2017 तक जारी रहेंगी। इन योजनाओं के जरिये रोजाना 15,000 विजेता बन रहे हैं जो कि कुल पुरस्कार राशि के रूप में 1.5 करोड़ रुपये उन्हें हर दिन मिल रहे हैं। 

           इसके अलावा, इसके तहत 14,000 साप्ताहिक विजेता बन रहे हैं जो प्रत्येक सप्ताह 8.3 करोड़ रुपये जीत रहे हैं। ग्राहक और व्यापारी रुपे कार्ड, भीम या यूपीआई (भारत इंटरफेस फॉर मनी या यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस),यूएसएसडी आधारित ।99# सेवा एवं आधार सक्षम भुगतान सेवा (एईपीएस) के जरिये रोजना और साप्ताहिक लकी ड्रा पुरस्कार जीत सकते हैं।

देश के 91 प्रमुख जलाशयों में दो प्रतिशत की कमी

                   देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 52.632 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 33 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 133 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 102 प्रतिशत है।

            इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं।

                  इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.13 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 23 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 25 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 30 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।
 

                 पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धक संग्रहण 10.19 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 54 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 36 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 40 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
 

               पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 11.59 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 43 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 22 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 42 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
 

                   मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धक संग्रहण 19.54 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 46 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 32 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 31 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
 

                 दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धण संग्रहण 7.18 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 14 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 17 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 27 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कमतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है। 

            पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), तेलंगाना शामिल हैं। इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम भंडारण वाले राज्य हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक  और तमिलनाडु हैं।

13,002 गांवों में बिजली

             दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत अब तक 13,002 गांवों में बिजली पहुंचाई गई। शेष 5450 गैर विद्युतीकृत गांवों में से 835 गांवों में बसावट नही है। शेष बचे सभी 4615 गैर विद्युतीकृत गांवों में 01 मई 2018 तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्‍य रखा गया है।

            स्‍वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के राष्‍ट्र को दिए संबोधन पर अमल करते हुए भारत सरकार ने 1000  दिन के भीतर यानी  01 मई, 2018 तक शेष  18,452 गैर-विद्युतीकृत गांवों में विद्युतीकरण करने का फैसला किया है। इस परियोजना को अभियान के रूप में शुरू किया गया है। विद्युतीकरण की रणनीति में कार्यान्‍वयन की अवधि 12 महीनों में सीमित करना तथा गांवों के विद्युतीकरण की प्रक्रिया को निगरानी के लिए निश्चित समयावधि सहित 12 स्‍तरों में विभाजित किया गया है। 

                  इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ग्राम विद्युत अभियंता  (जीवीए) के जरिए नजदीकी से नजर रखी जा रही है। नियमित अंतराल पर कई अन्‍य कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे आरपीएम बैठक के दौरान  मासिक आधार पर प्रगति की समीक्षा और उन गांवों की सूची को भी राज्‍य की बिजली कंपनियों से साझा किया जा है जहां विद्युतीकरण की प्रकिया जारी है। साथ ही ऐसे गांवों की भी पहचान की जाती है, जहां विद्युतीकरण की प्रक्रिया देरी से चल रही है। 

Thursday, 30 March 2017

राष्ट्रपति नमामि ब्रह्मपुत्र महोत्सव का उद्घाटन करेंगे



राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 31 मार्च, 2017 असम गुवाहाटी के दौरे पर जायेंगे। जहां वे ‘नमामि ब्रह्मपुत्र’ महोत्सव का उद्घाटन करेंगे। 5 दिनों तक चलने वाले इस ‘नमामि ब्रह्मपुत्र’ महोत्सव का आयोजन असम के विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से असम सरकार द्वारा किया जाता है। 

हाई-स्पीड निःशुल्क वाईफाई की सुविधा

           केन्द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने “इंडियन रेलवे- द वैविंग ऑफ ए नेशनल टैपेस्ट्री” नाम पुस्तक का विमोचन किया।

          इस पुस्तक को संयुक्त रूप से बिबेक देबरॉय (सदस्य, नीति आयोग), संजय चड्ढा (संयुक्त सचिव, वाणिज्य मंत्रालय) और सुश्री विद्याकृष्णमूर्ति ने लिखा है। इसके अतिरिक्त, रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में आने वाले आगंतुकों के लिए हाई-स्पीड निःशुल्क वाईफाई की सुविधा का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ए.के. मित्तल, पुस्तक के तीनों लेखक, एयर इंडिया के मुख्य प्रबंध निदेशक अश्वनी लोहानी और रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्यों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस अवसर पर रेल मंत्री ने कहा कि बिबेक देबरॉय एवं उनके साथियों द्वारा लिखी पुस्तक का विमोचन करना मेरे लिए वास्तव में एक सम्मान है। बिबेक देबरॉय द्वारा लिखित यह पुस्तक भारतीय रेलवे के लिए बड़ा योगदान है। 

              रेल मंत्री ने कहा कि  हम इस पुस्तक के जरिए इतिहास को जोड़कर भारतीय रेलवे के बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। किसी भी संगठन की रुचि को अनदेखा नहीं किया जा सकता। हम संगठन को फिर से पुनर्जीवित करने और उसमें ऊर्जा का संचार करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। हम रेलवे को एक दक्ष, अत्याधुनिक एवं तकनीक आधारित संगठन बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। ऐसे में हमें, एक ही समय पर कई कदम एकसाथ उठाने की ज़रूरत है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, मानव संसाधन, पर्यावरण, वित्त, तकनीक उन्नयन आदि तमाम मुद्दों पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

            रेल मंत्री ने कहा कि  इतिहास से सीखना और भविष्य का निर्माण करना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यह पुस्तक महत्वपूर्ण दिशा में भारतीय रेलवे की तमाम यादों को जोड़ने का काम करेगी। राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में उपलब्ध कराई गई तीव्र गति आधारित निःशुल्क वाईफाई सुविधा की चर्चा करते हुए सुरेश प्रभु ने कहा कि यह सुविधा इस रेल संग्रहालय में आगंतुकों की संख्या को बढ़ाने में मदद करेगी। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय ने कहा कि इस पुस्तक में वर्ष 1830 से 1947 तक की तमाम बाते हैं। यह पुस्तक कहानी शैली में लिखी गई है। यह पुस्तक भारतीय रेलवे के इतिहास की छोटी-छोटी घटनाओं का विस्तार से वर्णन करती है। 

          रेल मंत्री ने कहा कि  इस पुस्तक के आवरण पृष्ठ पर भाप वाला लोको इंजन है, जिसे राजपुताना मालवा क्षेत्र में मीटर गेज के लिए इस्तेमाल किया गया था। पाठक इस पुस्तक को पढ़ने से खुशी की अनुभूति कर सकते हैं। इस पुस्तक में भारतीय रेलवे के कुछ छिपे हुए पहलुओं को भी क्रमानुसार बताया गया है। ये वे पहलु हैं जिनके बारे में अब तक आम जनता को जानकारी नहीं थी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ए.के. मित्तल ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय रेलवे के इतिहास पर आधारित यह पुस्तक भारतीय रेलवे के बारे में अब तक अज्ञात रहे तथ्यों पर विस्तार से प्रकाश डालने में मदद करेगी। इस पुस्तक की मुख्य विषयवस्तु भारत में रेलवे का ऐतिहासिक विकास है।

            रेलवे के ऐतिहासिक विकास को विभिन्न अध्यायों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें विकास के विभिन्न कालों को क्रमानुसार बताया गया है। 1853 से पूर्व में शुरू हुई पहली वाणिज्यिक यात्री रेल का जिक्र भी इस पुस्तक में है और यही इस पुस्तक की नींव भी है। कहानी शैली में लिखी गई इस पुस्तक में सबसे पहले 1830 में भारतीय उप-महाद्वीप में रेलवे के निर्माण को लेकर बनाई गई शुरुआती योजना के बारे में बताया गया है। इसके बाद वर्ष 1940 एवं उसके आसपास इस विषय पर व्यापक स्तर पर हुई विभिन्न चर्चाओं के साथ-साथ 1850 एवं 1860 में भारत में रेलवे के आगमन तक की पूरी कहानी को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

             पुस्तक के अंतिम अध्याय में 20वीं सदी के शुभारंभ से लेकर स्वतंत्रता मिलने तक के कालक्रम को शामिल किया गया है। इस पुस्तक में भारतीय रेलवे इतिहास को बेहतर तरीके से चित्रित किया गया है। यह पुस्तक वास्तव में रेलवे के इतिहास पर लिखी गई अत्यंत प्रासंगिक पुस्तक है। राष्ट्रीय रेल संग्रहालय 30 मार्च 2017 को पूरी तरह से तीव्र गति आधारित निःशुल्क वाईफाई क्षेत्र में तब्दील हो गया। केन्द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने निःशुल्क वाईफाई की सुविधा आज राष्ट्रीय रेल संग्रहालय मे आने वाले आगंतुकों को समर्पित की। 

             यह सुविधा रेल संग्रहालय में आने वाले हज़ारों आगंतुकों को तीव्र गति आधारित वाईफाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेलटेल द्वारा गूगल के सहयोग से शुरू की गई है। रेलटेल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पांच अन्य पर्यटक स्थलों (लाल किला, हुमायुं का मकबरा, सफदरजंग मकबरा, कुतुब मीनार और राजपथ लॉन) पर निशुल्क वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। इन सभी पर्यटक स्थलों की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा की जाती है। रेलटेल निगम भारतीय रेलवे के अंतर्गत कार्यरत स्वायत्त संस्था है, जिसे मिनी रत्न संस्थान का दर्जा प्राप्त है।

अस्पतालों में आपदा निवारण

              राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएम) ने आपदा के दौरान एवं उसके बाद लोगों की जान के जोखिम को कम करने और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए अस्पतालों की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में आज एक बैठक का आयोजन किया।

        इस बैठक में विभिन्न हितधारक संगठनों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। एशियन डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस सेंटर (ओडीपीसी) के सहयोग से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) पहल की समग्र योजना में अस्पताल की सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता के तौर पर प्रासंगिक बनाने और हितधारकों को इस बारे में जागरूक करना है। अस्पतालों के संरचनात्मक और कार्यात्मक सुरक्षा के महत्व को बताने के लिए नेपाल में आए भूकंप के अनुभव को याद करते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य आर.के. जैन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे के जोखिम को कम करने के लिए सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। 

                 अस्पताल आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने के लिए एनडीएमए के अस्पताल सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का उपयोग करने की बारीकियों पर विस्तृत चर्चा की गई। पिछले वर्ष फरवरी माह में जारी किए गए दिशा-निर्देशों में देशभर के सभी अस्पतालों में आपदा निवारण, शमन, तैयारियां एवं प्रतिक्रिया गतिविधियों आदि के द्वारा संरचनात्मक एवं कार्यात्मक सुरक्षा की कल्पना की गई है।

‘क्यूब स्काउट्स’ पर डाक टिकट जारी

            केन्द्रीय संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा ने भारत एवं विदेश में क्यूब स्काउट्स के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘क्यूब स्काउट्स’ पर एक डाक टिकट जारी की। 

       इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि स्काउटिंग का उद्देश्य शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास में युवाओं की मदद करना है ताकि समाज के विकास में युवाओं द्वारा रचनात्मक भूमिका निभाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश के समग्र विकास में भारत स्काउट्स एवं गाइड ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। ये संगठन और इससे जुड़े लोग सड़क एवं रेल सुरक्षा, स्वच्छ भारत मिशन तथा प्राकृतिक आपदाओं सहित विकास की विभिन्न गतिविधियों में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। 

             सिन्हा ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि स्काउट्स भविष्य में समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कार्य को जारी रखेगा। क्यूब स्काउटिंग 08 से 11 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए है। क्यूबिंग में खेल, गेम, कहानियां, नाटक, अभिनय, हस्तशिल्प और स्टार परीक्षण एवं बैज के माध्यम से कार्य करना शामिल है। वहीं दूसरी ओर, स्काउटिंग 11 से 17 आयु वर्ग के युवाओं को सार्वजनिक पार्कों, खुले मैदानों आदि कार्यों में उन्हें संलिप्त करने के लिए विकसित किया गया था। 

        मनोज सिन्हा ने कहा कि स्काउटिंग मिशन का उद्देश्य बेहतर समाज का निर्माण करने के लिए स्काउट वादे एवं कानूनों पर आधारित मूल्य प्रणाली के जरिए युवा लोगों की शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देना है। इस प्रक्रिया में एक ऐसे समाज के निर्माण की कल्पना है, जहां व्यक्तिगत रूप से लोग खुद को स्वयंसेवक समझें और समाज में एक रचनात्मक भूमिका अदा करें।

एनएसएस के पुनर्गठन पर सम्मेलन

              केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय 31 मार्च 2017 को नई दिल्ली में ‘एनएसएस का पुनर्गठन’ विषय पर एक सम्मेलन का आयोजन कर रहा है।

           केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल सम्मेलन में उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्य वक्ता के तौर लोगों को सम्बोधित करेंगे। पिछले कई वर्षों के दौरान एनएसएस के ढांचे में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है। जबकि इसी कालक्रम के दौरान समाज की ज़रूरतें और युवा छात्रों की अपेक्षाओं सहित विभिन्न परिस्थितियां काफी तेज़ी से बदल रही हैं। 

           इस एकदिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य एनएसएस को अधिक मज़बूत और प्रभावी बनाने के क्रम में एनएसएस के पुनर्गठन के लिए नवीन विचारों का सृजन करना है। इस योजना से जुड़े सभी हितधारकों को सम्मेलन में आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा सके। कार्यशाला में भागीदारों की कुल संख्या करीब 100 होगी। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की शुरुआत वर्ष 1969 में हुई थी।

             इसका प्राथमिक उद्देश्य स्वैच्छिक रूप से समाज सेवा के जरिए युवा छात्रों के व्यक्तित्व एवं चरित्र का निर्माण विकास करना था। प्रारंभिक रूप से एनएसएस को 4000 स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं के साथ देशभर के 37 विश्वविद्यालयों में शुरू किया गया था। मार्च 2016 तक देशभर के 391 विश्वविद्यालयों एवं 2 परिषदों, 16,278 महाविद्यालयों/तकनीकी संस्थानों और 12,483 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित 39,695 एनएसएस इकाइयों में करीब 36.58 लाख स्वैच्छिक कार्यकर्ता थे।

स्मार्ट इंडिया हैकथॉन का ग्रैंड फिनाले गुवाहाटी में

            पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के साथ मिलकर स्मार्ट इंडिया हैकथॉन -2017 के ग्रैंड फिनाले की 1 से 2 अप्रैल, 2017 को गुवाहाटी के गिरिजानंद चौधरी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (जीआईएमटी) में मेजबानी करेगा।

            पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने स्‍मार्ट इंडिया हैकथॉन 2017 के बारे में अपने संदेश में कहा कि उपयुक्‍त प्रौद्योगिकियों के साथ डिजिटल समाधान में पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में विकास समाधानों को उत्प्रेरित करने की क्षमता है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय इस पहल में एक भागीदार है। इसने 11 समस्याओं की पहचान की है। जिन पर मंत्रालय द्वारा 31 टीमों का (प्रति टीम 6 छात्र और 2 सलाहकार) चयन किया है, जो जीआईएमटी गुवाहाटी में नवाचारी डिजिटल समाधान तैयार करेंगी। 

              जीआईएमटी गुवाहाटी को देश के 26 अन्य नोडल केंद्रों में पूर्वोत्‍तर क्षेत्र का एक मात्र नोडल केंद्र बनाया गया है। दो दिवसीय आयोजन में 10,000 से अधिक प्रतिभागी पूरे देश में स्‍थित 26 स्‍थानों पर विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों द्वारा पहचान की गई समस्‍याओं के बारे में उत्‍पाद/समाधान के निर्माण के लिए 36 घंटे तक लागातर काम करेंगे। विभिन्‍न श्रेणियों में विजेता को 1,00,000 रुपये, प्रथम रनर-अप को  75,000 रुपये और दूसरे रनर-अप को 50,000 रुपये के पुरस्‍कार दिए जाएंगे।

                  दूसरे रनर-अप को नैस्‍कॉम के 10,000 स्टार्टअप्स कार्यक्रम का हिस्सा बनने का मौका भी मिलेगा। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन -2017 का 9 नवंबर, 2016 को नई दिल्ली में शुभारंभ किया जाएगा। जिसका उद्देश्‍य छात्रों की रचनात्‍मकता और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के साथ-साथ 'स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया' अभियान के लिए तैयार करना, सुशासन में सुधार लाना और जीवन की गुणवत्‍ता के लिए भीड़ स्रोतों के समाधान जुटाना है। 

             यह भारत की चुनौतीपूर्ण समस्‍याओं के नवाचारी समाधानों को भी उपलब्‍ध कराता है। 29 मंत्रालय / विभागों द्वारा पहचान की गई 598 समस्‍याओं के लिए प्राप्‍त 7531 विचारों में से 1266 विचारों का ग्रांड फिनाले के लिए चयन किया गया है। इस प्रकार स्‍मार्ट इंडिया हैकथॉन 2017 भारत में पहली व्‍यापक स्‍तर की हैकथॉन पहल होगी।  

गरीबों के लिए मकानों के निर्माण में गुजरात आगे

          प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए किफायती मकानों के निर्माण के मामले में गुजरात अन्‍य राज्‍यों से काफी आगे है। 

           गुजरात में शहरी गरीबों के हित में अब तक 25873 मकानों का निर्माण किया गया है, जो पीएमएवाई (शहरी) के तहत 30 राज्‍यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में अब तक निर्मित किए गए इस तरह के कुल 82048 मकानों का 32 फीसदी है। आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्री वेंकैया नायडू द्वारा सदन में दी गई जानकारी के मुताबिक पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए निर्मित मकानों के मामले में गुजरात के बाद राजस्‍थान का नंबर आता है। 

           राजस्‍थान में अब तक इस तरह के 10805 मकान निर्मित किये गये हैं, जो कुल मकानों का 13.17 फीसदी है। इसी तरह कर्नाटक में 10447, तमिलनाडु में 6940, महाराष्‍ट्र में 5506, उत्‍तर प्रदेश में 3822, मध्‍य प्रदेश में 2666, बिहार में 2409, जम्‍मू-कश्‍मीर में 1986 और आंध्र प्रदेश में 1650 मकानों का निर्माण किया गया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान शहरी गरीबों के लिए 3.55 लाख किफायती मकानों का निर्माण किया गया है, जिनमें मार्च 2014 से पहले जेएनएनयूआरएम के तहत मंजूर किये गये मकान भी शामिल हैं।

Wednesday, 29 March 2017

कश्‍मीर की स्थिति के बारे में विमर्श

            जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलिस महानिदेशक एस. पी. वैद ने यहां केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह से मुलाकात की। 

          उन्‍होंने कल की हिंसा के बाद कश्‍मीर की मौजूदा स्थिति के बारे में विस्‍तृत विचार-विमर्श किया। हिंसा में तीन व्‍यक्ति की मौत हो गई थी। कई अन्‍यों लोगों के घायल होने के साथ-साथ सुरक्षा कर्मियों को भी चोट आई थीं। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि यह प्रशासन के साथ-साथ सिविल सोसायटी की भी जिम्‍मेदारी है कि वे कश्‍मीर के युवाओं को कुछ मुठ्ठी भर लोगों के झूठे प्रचारों में आकर भड़कने के बजाय वास्‍तविकता से अवगत करायें। 

                      सेना, अर्द्धसैनिक बल और जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस सहित सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि हमारे पास भी विश्‍व के सबसे अच्‍छे सुरक्षा बल मौजूद हैं। राष्‍ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

सभी को चौबीस घंटे गुणवत्‍तापूर्ण किफायती बिजली

             केन्‍द्रीय विद्युत, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने कहा, उदय देश में विद्युत क्षेत्र से जुड़ा अब तक का सर्वाधिक व्‍यापक सुधार है, जिसे नियोजित एवं क्रियान्वित किया गया है।

         पीयूष गोयल यहां विद्युत क्षेत्र, विशेषकर ‘उदय’ योजना की प्रगति को कवर करने वाले पत्रकारों और विश्‍लेषकों के एक प्रतिष्ठित समूह को संबोधित कर रहे थे। गोयल ने कहा कि उदय योजना व्यापक, सहकारी, सहयोगात्मक, प्रतिस्पर्धी, सहमति और करुणामय संघवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके तहत यह परिकल्‍पना की गई है कि राज्‍य सरकारें पूर्ण सहयोग दर्शाते हुए केन्‍द्र के साथ मिलकर काम करेंगी, ताकि देशवासियों की बिजली संबंधी जरूरतों की व्‍यापक पूर्ति पर ध्‍यान केन्द्रित किया जा सके। मंत्री ने यह भी कहा कि इस योजना के तहत राज्‍य सरकारों को आपस में रचनात्‍मक प्रतिस्‍पर्धा के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है, जिससे कि उनके विद्युत विभागों और डिस्‍कॉम की वित्‍तीय एवं परिचालन स्थिति में सुधार के लक्ष्‍य को हासिल किया जा सके। 

            गोयल ने ‘उदय’ के सभी हितधारकों के लिए जारी एक प्रेरणादायक वक्‍तव्‍य में कहा कि सरकार का लक्ष्‍य ‘सभी को चौबीस घंटे सुनिश्चित, गुणवत्‍तापूर्ण, किफायती और विश्‍वसनीय बिजली’ मुहैया कराना है। भारत सरकार और केरल राज्‍य एवं केरल राज्‍य विद्युत बोर्ड लिमिटेड ने विद्युत उपक्रम के परिचालन में सुधार के लिए उज्‍ज्‍वल डिस्‍कॉम आश्‍वासन योजना (उदय) के तहत सहमति पत्र (एमओयू) का आदान-प्रदान किया। 

             इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा भी अपने यहां के विद्युत वितरण विभागों के परिचालन में सुधार के लिए आज उदय में शामिल हो गए। इसके साथ ही उदय में शामिल होने वाले राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों की कुल संख्‍या बढ़कर 26 हो गई है। उदय में शामिल होने के परिणामस्‍वरूप केरल, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा को क्रमश: लगभग 4178 करोड़, 309 करोड़ और 810 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होगा। यह फायदा इन राज्‍यों के विद्युत निकायों की स्थिति में बेहतरी की तय अवधि के दौरान सस्‍ते फंड की प्राप्ति, कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक तथा पारेषण हानियों में कमी, ऊर्जा दक्षता से जुड़े कदमों इत्‍यादि से संभव हो पाएगा।

          इस अवसर पर विद्युत सचिव पी. के. पुजारी, कोयला सचिव सुशील कुमार, केन्‍द्रीय विद्युत मंत्रालय, मंत्रालय के अधीनस्‍थ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू) और राज्‍यों के विद्युत विभागों के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी शामिल थे।

नागपुर में स्‍मार्ट इंडिया हैकथॉन-2017 के ग्रांड फिनाले की मेजबानी

                सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय 1 और 2 अप्रैल, 2017 को नागपुर में स्‍मार्ट इंडिया हैकथॉन 2017 के ग्रांड फि‍नाले की मेजबानी करेगा। नागपुर 26 शहरों में से एक शहर है जहां यह आयोजन एक साथ आयोजित किया जा रहा है। 

             इसे 29 सरकारी विभागों की सहायता और समन्‍वय से आयोजित किया जा रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी 1 अप्रैल, 2017 को नागपुर के रामदेव बाबा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में इस आयोजन का उद्घाटन करेंगे। राष्‍ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लि. के निदेशक संजय जाजू मंत्रालय के नोडल अधिकारी हैं। स्‍मार्ट इंडिया हैकथॉन 2017 का 9 नवम्‍बर, 2016 को दिल्‍ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा शुभारंभ किया गया था। पहली बार विभिन्न सरकारी विभागों के छात्रों को सीधे तौर पर ऐसे कार्य में शामिल किया है और उन्‍हें इन विभागों की दक्षता, राजस्‍व हानि और भ्रष्‍टाचार के बारे में सुधार लाने के लिए डिजिटल समाधान तैयार करने की चुनौती दी है मानव संसाधन मंत्रालय को 29 सरकारी मंत्रालय एवं विभागों से 598 समस्‍याएं विवरण प्राप्‍त हुए हैं। जिसके सापेक्ष 7531 टीमों से विचार प्राप्‍त हुए और 672 युवाओं को शामिल करके 84 टीमों और 637 विचारों को फिनाले के लिये चुना गया है।

            ग्रांड फिनाले के दौरान ये टीमें अपने विचारों पर आधारित उत्‍पाद तैयार करने के लिए 36 घंटों तक लगातार काम करेंगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नागपुर में स्‍मार्ट इंडिया हैकथॉन-2017 के ग्रांड फिनाले की मेजबानी करेगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय 1 और 2 अप्रैल, 2017 को नागपुर में स्‍मार्ट इंडिया हैकथॉन 2017 के ग्रांड फि‍नाले की मेजबानी करेगा। नागपुर 26 शहरों में से एक शहर है जहां यह आयोजन एक साथ आयोजित किया जा रहा है। इसे 29 सरकारी विभागों की सहायता और समन्‍वय से आयोजित किया जा रहा है।

            स्‍मार्ट इंडिया हैकथॉन 2017 का 9 नवम्‍बर, 2016 को दिल्‍ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा शुभारंभ किया गया था। पहली बार विभिन्न सरकारी विभागों के छात्रों को सीधे तौर पर ऐसे कार्य में शामिल किया है। उन्‍हें इन विभागों की दक्षता, राजस्‍व हानि और भ्रष्‍टाचार के बारे में सुधार लाने के लिए डिजिटल समाधान तैयार करने की चुनौती दी है। मानव संसाधन मंत्रालय को 29 सरकारी मंत्रालय एवं विभागों से 598 समस्‍याएं विवरण प्राप्‍त हुए हैं। जिसके सापेक्ष 7531 टीमों से विचार प्राप्‍त हुए और 672 युवाओं को शामिल करके 84 टीमों और 637 विचारों को फिनाले के लिये चुना गया है। ग्रांड फिनाले के दौरान ये टीमें अपने विचारों पर आधारित उत्‍पाद तैयार करने के लिए 36 घंटों तक लगातार काम करेंगी।

सामुदायिक रेडियो को बढ़ावा, सब्सिडी अब 90 फीसदी

            सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने देश में सामुदायिक रेडियो के विकास के रोडमैप (खाका) पर विचार-विमर्श करने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। 

          इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण राज्य् मंत्री कर्नल राज्यतवर्द्धन राठौर भी उपस्थित थे। नायडू ने अपने आरंभिक संबोधन में देश में सामुदायिक रेडियो के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय द्वारा उठाये जा रहे विभिन्नु कदमों के बारे में समिति के सदस्यों को जानकारी दी। उन्होंलने कहा कि मंत्रालय ने हाल ही में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की स्थांपना के लिए सब्सिडी राशि को पूर्वोत्तर राज्यों में 50 फीसदी से बढ़ाकर 90 फीसदी और अन्या राज्यों में इसे बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया है, जिसके लिए अधिकतम सीमा 7.5 लाख रुपये तय की गई है। संचार के एक प्रभावकारी माध्यिम के रूप में सामुदायिक रेडियो के साधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही सब्सिडी में बढ़ोतरी की गई है। एक संचार माध्य्म के रूप में सामुदायिक रेडियो की अहमियत के बारे में जानकारी देते हुए नायडू ने कहा कि यह स्थांनीय भाषा/बोलियों में लोगों की सूचना संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिहाज से एक उपयोगी साधन है।         

               सामुदायिक रेडियो (सीआर) केंद्र विभिन्न मसलों पर ऐसे कार्यक्रमों का प्रसारण करते हैं जो समुदाय के लिए काफी प्रासंगिक माने जाते हैं। इसके साथ ही ये शिक्षा, ग्रामीण विकास, कृषि, पोषण से जुड़े माहौल, सामाजिक कल्यासण, पंचायती राज से जुड़े मुद्दों और सांस्कृतिक जरूरतों से संबंधित सूचनाओं का प्रचार-प्रसार करके विकास में सहायक साबित होते हैं। नायडू ने कहा कि सामुदायिक रेडियो में समुदाय स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव लाने की असीम क्षमता है। ये केंद्र ग्रामीण सशक्तिकरण के साथ-साथ दलितों एवं महिलाओं के उत्थान के लिए भी एक सशक्तण साधन के रूप में काम करते हैं। 

             नायडू ने ‘उगाडी’ के शुभ अवसर पर संसद के सम्मानित सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उगाडी वसंत के आगमन और गर्म मौसम की शुरुआत को रेखांकित करता है, जो दक्षिण भारत के अनेक हिस्सों में नव वर्ष के शुभारंभ का परिचायक होता है। खुशी का यह उत्सव विकास एवं समृद्धि को प्रतिबिंबित करता है। नव वर्ष से जुड़े समस्तो त्योहारों की भांति ही यह उत्सव भी नये उद्यमों की शुरुआत का अवसर प्रदान करता है। समिति के सदस्यों ने सामुदायिक रेडियो के विकास के लिए मंत्रालय द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए संचार के इस साधन की पहुंच के साथ-साथ इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी बहुमूल्य सुझाव दिए। 

              उन्होंने देश में सामुदायिक रेडियो केंद्रों की स्थापना की मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ इसे दुरुस्त करने की जरूरत को भी रेखांकित किया। मंत्रालय की ओर से अपर सचिव द्वारा एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें देश में सामुदायिक रेडियो क्षेत्र का अवलोकन पेश किया गया। समिति के सदस्योंन को देश में सामुदायिक रेडियो के विकास को सुविधाजनक बनाने में मंत्रालय की उपलब्धियों एवं इसके विभिन्नो कदमों के बारे में जानकारी दी गई। इस बैठक में अनेक सांसदों ने भी भाग लिया जिनमें मनोज कुमार तिवारी, विवेक गुप्ताअ, श्रीमती देव (मुनमुन सेन) वर्मा, हरिवंश, मधुसूदन मिस्त्री , प्रभात झा और नीरज शेखर शामिल हैं। सूचना एवं प्रसारण सचिव अजय मित्तल और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

फुटबाल से खेल संस्कृति को बढ़ावा

             संसद के सदस्यों ने देश में खेल संस्कृति, विशेषकर फुटबाल के खेल को बढ़ावा देने के लिए जन जागरुकता कार्यक्रम में यहां बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। 

          एक समारोह के दौरान लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने दोनों सदनों के सदस्यों को फुटबाल भेंट की। इस कार्यक्रम का आयोजन युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य इस वर्ष अक्तूबर में भारत में आयोजित की जाने वाली फीफा अंडर-17 फुटबाल विश्व कप प्रतियोगता के सिलसिले में फुटबाल को समूचे भारत में बढ़ावा देने के मिशन 11 मिलियन प्रोग्राम को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर युवा मामले और खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा कि फीफा अंडर 17 विश्व कप प्रतियोगिता का आयोजन आल इंडिया फुटबाल फेडरेशन-एआईएफएफ के साथ मिल कर किया जा रहा है। 

            उन्होंने कहा कि फुटबाल संस्कृति के निर्माण के लिए मिशन 11 मिलियन शुरू किया गया है, ताकि फुटबाल को 15 हजार स्कूलों के माध्यम से 1.1 करोड़ बच्चों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मार्च, 2017 को मन की बात कार्यक्रम के अंतर्गत कहा था कि फीफा अंडर-17 विश्व कप प्रतियोगिता युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर है, जो देश में खेलों के प्रति एक क्रांति ला सकता है।

विद्युत का निर्यातक बना भारत

            बिजली के सीमा पार व्यापार के लिए भारत सरकार के निर्दिष्ट प्राधिकरण, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार भारत पहली बार बिजली के निवल आयातक की बजाए निवल निर्यातक बन गया है। 

            वर्ष 2016-17 (अप्रैल से फरवरी 2017) के दौरान भारत ने नेपाल, बांग्लादेश और म्यामां को 579.8 करोड़ यूनिट बिजली निर्यात की, जो भूटान से आयात की जाने वाली करीब 558.5 करोड़ यूनिटों की तुलना में 21.3 करोड़ यूनिट अधिक है। पिछली सदी में सीमा पार विद्युत व्यापार प्रारंभ होने के बाद से भारत, भूटान से विद्युत आयात करता रहा है। बिहार और उत्तर प्रदेश से 33 केवी और 132 केवी रेडियल मोड में नेपाल को मामूली विद्युत का निर्यात करता रहा है।

               भूटान औसत रूप में भारत को 500-550 करोड़ यूनिट विद्युत की आपूर्ति करता रहा है। भारत नेपाल को 11 केवी, 33 केवी और 132 केवी लेवल पर 12000 से अधिक सीमा पार इंटर कनेक्शनों के लिए करीब 190 मेगावाट विद्युत का निर्यात भी करता रहा है। 2016 में 400 केवी लाइन क्षमता (132 केवी क्षमता के साथ संचालित) मुजफ्फरपुर (भारत) - धालखेबर (नेपाल) के चालू हो जाने के बाद नेपाल को विद्युत निर्यात में करीब 145 मेगावाट का इजाफा हुआ। भारत से बांग्लादेश को किए जाने वाले विद्युत निर्यात में उस समय वृद्धि हुई, जब सितम्बर, 2013 में 400 केवी क्षमता का पहला सीमा पार इंटर-कनेक्शन चालू हुआ।

               इसी तरह भारत में सुर्जामणिनगर (त्रिपुरा) और बांग्लादेश में दक्षिण कोम्मिल्ला के बीच दूसरा सीमा पार इंटर-कनेक्शन चालू होने के बाद भारत के निर्यात में और बढ़ोतरी हुई। 132 केवी काटिया (बिहार) – कुसाहा (नेपाल) और 132 केवी रक्सौल (बिहार) – पार्वाणीपुर (नेपाल) सीमा पार इंटर-कनेक्शन चालू हो जाने के बाद नेपाल को किए जाने वाले विद्युत निर्यात में करीब 145 मेगावाट की वृद्धि होने का अनुमान है। पड़ोसी देशों के साथ कुछ और सीमा पार सम्पर्क स्थापित किए जा रहे हैं, जिनसे भारत के विद्युत निर्यात में इजाफा होगा।


 

प्रधानमंत्री ने नववर्ष की बधाई दी

             प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर के नागरिकों को अपनी ओर से नववर्ष की शुभकामनाएं दी हैं, जो नए वर्ष की शुरूआत का उत्सव मना रहे हैं ।

          अपने ट्वीट संदेशों में प्रधानमंत्री ने यह कामना की है कि यह वर्ष सभी के लिए शांति, उल्साह और समृद्धि लाए। प्रधानमंत्री ने कहा, “पूरे भारत में लोग नए वर्ष की शुरूआत का उत्सव मना रहे हैं । सभी को नव वर्ष की बधाइयां। यह वर्ष शांति, उल्साह और समृद्धि लाए। नववर्ष और नवरात्रि की देशवासियों को कोटि-कोटि बधाई। नवसंवत्सर हम सभी के जीवन में समृद्धि, खुशहाली और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आए। मणिपुर के बहनों और भाइयों के लिए साजिबू चेइराबा के अवसर पर मेरी ओर से शुभकामनाएं। 

             मेरी कामना है कि आने वाला वर्ष सकरात्मकता और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक हो। उगाडी का उत्सव मनाने वाले सभी लोगों को बधाइयां। मेरी कामना है कि आने वाले वर्ष में आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो और चारों ओर खुशहाली हो।

           सिंधी समुदाय के लोगों को चेति चंद के अवसर पर बधाइयां। मेरी कामना है कि भगवान झूलेलाल हमें आशीर्वाद दें और आने वाला वर्ष हमारे लिए खुशहाली लाए तथा यादगार वर्षों में शामिल हो। महाराष्ट्र के लोगों के लिए गुडी पडवा के विशेष अवसर पर शुभकामनाएं। मेरी कामना है कि आने वाला वर्ष खुशहाली, आरोग्य और समृद्धि लाए।

राष्ट्रीय जनजातीय व पूर्वोत्तर कला सम्मेलन

               केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ.महेश शर्मा ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित “राष्ट्रीय जनजातीय और पूर्वोत्तर कला सम्मेलन-2017” का उद्घाटन किया। 

          इस अवसर पर डॉ.महेश शर्मा ने जनजातीय समुदायो, पूर्वोत्तर के कलाकारो के साथ-साथ चुने हुए समकालीन कलाकारो की सृजनात्मकता की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन कलाकारो को  उनकी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अनूठा मंच प्रदान करेगा और इसमे महत्वपूर्व भारतीय जनजातीय कला के साथ कला की अन्य शैलियो को भी दर्शाया किया गया है। 

          उन्होंने कलाकारो को सृजनात्मकता प्रयासो के लिए अपनी शुभकामनाएं भी व्यक्त की। सम्मेलन में जनजातीय कला की 12 से अधिक शैलियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इनमें से अधिकतर कलाकारो ने विदेशो में आयोजित भारत महोत्सव और अन्य प्रतिष्ठित मंचो पर अपनी कला का प्रदर्शन किया है। कार्यक्रम के दौरान तेलंगाना के चेरियान चित्रकार, दक्षिण भारत की लघु चित्रकला, ओडिसा की पतचित्र कला, राजस्थान की फेस्क्रो चित्रकला के साथ-साथ भील, मीना व आंध्र प्रदेश के कलाकारो द्वारा चर्म चित्रकला का मुख्य रूप से प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान लोककला का प्रदर्शन भी किया जाएगा। 

           देश में कला की खोज, प्रोत्साहन और प्रचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासो के अनुरूप अकादमी ने इस 7 दिवसीय सम्मेलन का आयोजन 28 मार्च,2017 से 4 अप्रैल,2017 तक नई दिल्ली स्थित ललित कला अकादमी, रविन्द्र भवन लॉन, 35 फिरोजशाह रोड़ में किया है। समारोह की शानदार शुरूआत राजस्थान के लोकसंगीत पर आधारित भव्य लोकनृत्य की प्रस्तृति से की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

Tuesday, 28 March 2017

सांसदों को फुटबॉल पेश करेंगी सुमित्रा

           लोकसभा अध्‍यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन संसद भवन में महात्‍मा गांधी की प्रतिमा के निकट आयोजित किये जाने वाले एक समारोह में संसद के दोनों ही सदनों के सभी सांसदों को फुटबॉल पेश करेंगी। 

           केन्‍द्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा कि इस वर्ष अक्‍टूबर में भारत फीफा अंडर-17 फुटबॉल वर्ल्‍ड कप की मेजबानी करेगा। उन्‍होंने कहा कि देश में फुटबॉल संस्‍कृति को बढ़ावा देने के लिए ही यह कदम उठाया जा रहा है। गोयल ने सभी सांसदों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में खेलों विशेषकर फुटबॉल के बारे में जागरूकता सृजित करने का अनुरोध किया क्‍योंकि इससे प्रतिभाशाली लोगों को इससे जोड़ने और देश भर में इस खेल को आगे ले जाने में मदद मिलेगी। 

              उन्‍होंने कहा कि फीफा अंडर-17 विश्‍व कप का आयोजन अखिल भारतीय फुटबॉल संघ की साझेदारी में किया जा रहा है। फुटबॉल संस्‍कृति सृजित करने के उद्देश्‍य से ‘मिशन 11 मिलियन’ शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्‍य 15000 स्‍कूलों और जन संपर्क कार्यक्रमों के जरिये देश भर में 11 मिलियन बच्‍चों तक फुटबॉल को ले जाना है। 

            प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 26 मार्च, 2017 को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में फीफा अंडर-17 वर्ल्‍ड कप का उल्‍लेख किया था। कहा था कि यह फुटबॉल को सबसे आगे ले जायेगा। युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए प्रोत्‍साहित करेगा।

अजमेर-रतलाम एक्‍सप्रेस को क्‍यू-ट्रैक

            लोकसभा अध्‍यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन और रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्‍ली स्थित रेल भवन से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये नव-निर्मित बड़ी लाइन क्‍यू-ट्रैक के रास्‍ते ट्रेन संख्‍या 19653/19654 रतलाम-अजमेर एक्‍सप्रेस के इंदौर तक विस्‍तारीकरण को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 

          रेल भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिन गणमान्‍य व्‍यक्तियों ने भाग लिया उनमें स्‍थानीय क्षेत्र के सांसद एवं विधायक, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए. के. मित्तल, रेलवे बोर्ड के सदस्‍य (यातायात) मोहम्‍मद जमशेद और रेलवे बोर्ड के अन्‍य सदस्‍य तथा वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी शामिल थे। 

            इस अवसर पर लोकसभा अध्‍यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘आज का ट्रेन विस्तार मध्‍य प्रदेश क्षेत्र के प्रत्‍येक व्‍यक्ति के लिए लाभप्रद साबित होगा। सुरेश प्रभु के नेतृत्‍व में इंदौर क्षेत्र में रेल कनेक्‍टि‍विटी से संबंधि‍त ज्‍यादातर मांगें पहले ही पूरी कर दी गई हैं। इस क्षेत्र में अब और कोई मांग नहीं रह गई है। इंदौर-दाहौद पटरी का कार्य प्रगति पर है। औद्योगिक टाउनशिप पीथमपुर के साथ रेलवे कनेक्टिविटी पूरी हो गई है। कंटेनर सेवाएं भी शुरू कर दी गई हैं। महू स्टेशन का विकास सुनिश्चित किया गया है। सेना ने इसके लिए जमीन दी है। मध्‍य प्रदेश विकास में पीछे नहीं रहेगा। मैं सुरेश प्रभु जी के नेतृत्‍व की सराहना करती हूं जिनकी देख-रेख में जम्‍मू-कश्‍मीर क्षेत्र में सुरंग बनाने का दुष्‍कर कार्य पूरा किया गया। 

              इस अवसर पर रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा, ‘यह स्‍पष्‍ट है कि लोग अपने-अपने क्षेत्रों में रेलवे कनेक्टिविटी चाहते हैं। आज, हिंदू नव वर्ष एवं गुड़ी पड़वा के अवसर पर यह इंदौर और मध्‍य प्रदेश के लोगों के लिए शुभ शुरुआत है। मध्‍य प्रदेश हमारे लिए एक महत्‍वपूर्ण राज्‍य है। मध्‍य प्रदेश के लोगों ने बेहतर रेल संपर्क या कनेक्टिविटी के लिए सदा ही अभिवेदन दिया है। पिछले दो वर्षों में मध्‍य प्रदेश के लिए आवंटन को बढ़ाकर 2871 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पिछले साल यह राशि 632 करोड़ रुपये थी, जो 354 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। वर्ष 2017-18 के रेल बजट आवंटन में इसे और बढ़ाकर 750 प्रतिशत कर दिया गया।

          विकास प्रक्रिया में धनराशि कोई अवरोध नहीं है। मध्‍य प्रदेश में गेज परिवर्तन, दोहरीकरण और तिहरीकरण परियोजनाओं ने गति पकड़ ली है। 56,547 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। 7 नये सर्वेक्षण कराये गये हैं और इन्‍हें मंजूरी दी गई है। चित्तौड़गढ़, रतलाम, इंदौर से गेज परिवर्तन कार्य को पूरा कर लिया गया है। भारतीय रेलवे और मध्‍य प्रदेश सरकार जल्‍द ही संयुक्‍त उद्यम कंपनी का गठन करेंगी। राज्‍य सरकार ने मंजूरी दे दी है। अगले वर्ष गुड़ी पड़वा पर इसे मूर्त रूप दिया जायेगा।’

झारखंड के देवघर में हवाईअड्डे के विकास के लिए समझौता

            झारखंड के देवघर जिले में देवघर हवाईअड्डे के विकास के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और झारखंड सरकार ने त्रिपक्षीय समझौता दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। 

         मौजूदा देवघर हवाईअड्डे को विकसित करके उसे ए-320 और सी-130 विमानों के संचालन में सक्षम बनाया जाएगा। समझौते पर हस्ताक्षर संबंधी समारोह मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित हुआ। उल्लेखनीय है कि देवघर हवाईअड्डे के पास इस समय 53.41 जमीन है और झारखंड सरकार ने 600.34 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। इसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंप दिया जाएगा। हवाईअड्डे के विकास, संचालन और रख-रखाव के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, झारखंड सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण क्रमशः 200 करोड़ रुपए और 50 करोड़ रुपए प्रदान करेंगे। 

             देवघर हवाईअड्डे के विकास के लिए दो वर्ष की समयसीमा निर्धारित की गई है। इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास, नागारिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, झारखंड के यातायात मंत्री सी.पी. सिंह, सांसद राम टहल चौधरी और सांसद निशीकांत दुबे भी उपस्थित थे। इनके अलावा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. गुरू प्रसाद महापात्रा, झारखंड सरकार की प्रमुख सचिव सुश्री राजबाला वर्मा, झारखंड सरकार के विकास आयुक्त अमित खरे, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सदस्य आयोजना सुधीर रहेजा, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के आरईडी (ईआर) संजय जैन, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अपर निदेशक एच.एस. चौधरी, रांची के विमानपत्तन निदेशक अनिल विक्रम तथा झारखंड सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

             केन्द्रीय नागारिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री रघुबर दास, झारखंड के यातायात मंत्री सी.पी. सिंह और सांसद निशीकांत दुबे की उपस्थिति में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (ईआर) संजय जैन, झारखंड सरकार के उप सचिव यातायात (नागारिक उड्डयन) राम नारायण राम और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अपर निदेशक ग्रुप कैप्टन एच.एस. चौधरी, झारखंड के देवघर जिले में देवघर हवाईअड्डे के विकास संबंधी समझौता दस्तावेज का आदान-प्रदान करते हुए।

मणिपुर को 48 करोड़ का अनुदान

               मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह ने यहां पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह से मुलाकात की।

          राज्य में चलने वाली तमाम परियोजनाओं से संबंधित विस्तृत विषयों पर चर्चा की। मणिपुर के मुख्यमंत्री और पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री के बीच अकेले में मुलाकात हुई। उसके बाद राज्य सरकार तथा पूर्वोत्तर राज्य विकास मंत्रालय के अधिकारियो के साथ एक संयुक्त बैठक में दोनों नेताओं ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान इंफाल के पास खेल विश्वविद्यालय की स्थापना पर भी चर्चा की गई, जिसकी घोषणा लगभग दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी। 

            बहरहाल, कुछ प्रक्रिया और भू-अधिग्रहण संबंधी मुद्दों के कारण इसमें विलंब हो गया था। बैठक में फैसला किया गया कि खेल मंत्रालय के साथ बातचीत करके परियोजना को तेजी के साथ पूरा किया जाएगा। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि एनएलसीपीआर के जरिए पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय मणिपुर को 48 करोड़ रुपए का अनुदान देगा, ताकि खुमन-लाम्पक खेल परिसर के हॉकी स्टेडियम में फ्लड-लाईट लगाई जा सकें। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय राज्य के विभिन्न जिलों में महिलाओं के बाजार के निर्माण के लिए मणिपुर सरकार की मदद करेगा।

              मणिपुर के विभिन्न जिलों में मिनी-सचिवालयों के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया, जिस पर आगे चलकर अमल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कुछ महीने पहले ‘हवाई अस्पताल-एम्बुलेंस’ हैलीकॉप्टर सेवा शुरू करने का अभिनव विचार पेश किया था। इसे पूर्वोत्तर परिषद के जरिए पूरा किया जाएगा। इस सेवा के शुरू हो जाने से दूर-दराज के इलाकों में रहने वालों को बहुत लाभ होगा, जिन्हें आसानी से स्वास्थ्य केन्द्रों पर पहुंचने में कठिनाई होती है। हवाई अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहेंगे। 

            ओपीडी सुविधाओं से यह लैस रहेगा। हैलीकॉप्टर के जरिए आवश्यकता पड़ने पर बीमार व्यक्तियों को ले जाया जाएगा। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बिरेन सिंह को सुझाव दिया कि दिल्ली में मणिपुर के विभिन्न दस्तकारी और अन्य समृद्ध विरासत को पेश करने का आयोजन करें, ताकि पूरा देश उनसे लाभान्वित हो सकें।

जल क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत व बवेरिया  का संयुक्‍त दल

           केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने जल क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए भारत और बवेरिया के बीच संयुक्‍त दल के गठन का सुझाव दिया है। 

             सुश्री भारती ने यह सुझाव उस समय दिया जब जर्मनी के बवेरिया प्रांत की पर्यावरण मंत्री सुश्री उलरिक शाफ नई दिल्‍ली में उनसे मिलीं। दोनों नेताओं ने जल संसाधन क्षेत्र में पारस्‍परिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। सुश्री भारती ने कहा कि जर्मनी की डेन्‍यूब नदी की सफाई के बारे में बवेरिया प्रांत का बहुत अच्‍छा अनुभव है। 

          भारत गंगा संरक्षण कार्यक्रम में उसके इस अनुभव का लाभ उठा सकता है। मंत्री ने बवेरिया की मंत्री को भारत के न‍मामि गंगे कार्यक्रम की विस्‍तृत जानकारी देते हुए इस कार्यक्रम में बवेरिया के सहयोग की अपील की। 

          केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए बवेरिया की मंत्री ने कहा कि बवेरिया और भारत जल संसाधन के क्षेत्र में अपने अनुभवों और ज्ञान का आदान प्रदान करेंगे। सुश्री शाफ ने सुश्री उमा भारती को बवेरिया आने का भी निमंत्रण दिया।

राष्ट्रीय राइफल्स पर पुस्तक का विमोचन

            साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भारतीय सेना के उग्रवाद विरोधी दल (काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स) राष्ट्रीय राइफल्स के इतिहास पर लिखी पुस्तक “होम ऑफ द ब्रेव” का विमोचन किया। 

          यह पुस्तक नितिन ए गोखले, रक्षा एवं सुरक्षा विश्लेषक और ब्रिगेडियर एस के चटर्जी (सेवानिवृत्त) द्वारा लिखी गई है। इस पुस्तक के विमोचन के अवसर पर सेना प्रमुख (सीओएएस), राष्ट्रीय राइफल्स के महानिदेशक, राष्ट्रीय राइफल्स महानिदेशालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी समेत पुस्तक के लेखक भी शामिल हुए। “होम ऑफ द ब्रेव” पुस्तक में राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के शुरुआती इतिहास, इसके संगठन, इसकी स्थापना और पंजाब, उत्तर-पूर्व (पूर्वोत्तर) तथा जम्मू और कश्मीर में तैनाती के बारे में बताया गया है।

              राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) जो एक अभेद्य उग्रवाद विरोधी दल (काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स) है, ने ऑपरेशनों से कई ख्यातियां अर्जित की है।इसके साथ ही राष्ट्र की सुरक्षा के अपने प्रमुख जनादेश को पूरा करने के अलावा इस बल (फोर्स) ने लोगों के दिलों और दिमागों को जीतने के लिए कई नरम उपाय भी किए हैं- एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान अभ्यास जिसे भारतीय सेना ने भी सराहा और स्वीकार किया है। यह पुस्तक भारतीय सेना के पेशेवराना अंदाज और सैन्य नैतिकता तथा मूल्यों को मजबूत करने में राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) की भूमिका प्रतिबिंबित करती है। 

           “होम ऑफ द ब्रेव” पुस्तक सेना की सभी इकाइयों और सेना प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) की उपलब्धियों के एक प्रामाणिक रिकॉर्ड के रूप में भी कार्य करेगा। रक्षा नीति योजनाकारों, शोध विद्वानों और सैन्य इतिहासकारों के लिए यह पुस्तक तथ्यात्मक और अच्छी तरह से सिलसिलेवार जानकारी प्रदान करती है।

 

Monday, 27 March 2017

करीब 37,500 लोगों को रोज़गार

            भारत सरकार ने डिस्कवर्ड स्माल फील्ड बिड राउंड 2016 के अंतर्गत आवंटित अनुबंधों के आवंटियों के साथ नई दिल्ली में अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने की। 

           प्रधान के प्रतिनिधिमंडल में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डी.के. त्रिपाठी एवं मंत्रालय के कई अन्य अधिकारी शामिल थे। मंत्री ने भारत में व्यवसाय के माहौल को सरल बनाने की दिशा में डीएसएफ के लिए एक सह-क्रियात्मक (इंटरएक्टिव) पोर्टल का उद्घाटन भी किया, जिसे अनुबंध प्रबंधन और समस्या निवारण के लिए डीजीएच द्वारा विकसित किया गया है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि डीएसएफ की शुरुआत वर्ष 2022 तक भारत में ऊर्जा आयात को 10 फीसदी तक कम करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।

              उन्होंने कहा कि कम समय में पूरे हुए डीएसएफ बिड राउंड ने ई-बिडिंग व्यवस्था, इंटरएक्टिव मोबाइल एप, वर्चुअल डाटा केन्द्र की व्यवस्था, डेडिकेटेड सुविधा केन्द्र, अनुबंधकर्ताओं की सुविधा के लिए कार्यशालाओं का आयोजन आदि तमाम नई पहलों में मदद की है। मंत्री ने कहा कि आवंटित क्षेत्रों में संचित उत्पादन लगभग 15000 बीओपीडी तेल और गैस के 2 एमएमएससीएमडी होने की संभावना है। अनुमानित कुल राजस्व करीब 46,400 करोड़ रुपये होगा, जिसमें से रॉयल्टी और सरकार के राजस्व का हिस्सा क्रमशः करीब 5000 करोड़ एवं 9,300 करोड़ रुपये होगा। 

                यह भी अनुमान है कि आवंटित क्षेत्रों से करीब 37,500 लोगों को रोज़गार मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने यह उल्लेख किया कि, सरकार डीएसएफ आवंटन के दूसरे चरण की दिशा में भी कार्य कर रही है, और जल्द ही ओपन एक्रीज लाइसेंसिंग (ओएएल) के जरिए हाइड्रोकार्बन एक्स्प्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (एईएलपी) को अमलीजामा पहनाया जाएगा, जिससे ईएंडपी निवेश के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। प्रधान ने आवंटियों को बधाई दी और आश्वस्त किया कि उन्हें सरकार की ओर से पर्याप्त समर्थन एवं मदद दी जाएगी।

                उन्होंने अनुबंधों की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए अधिकारियों सहयोगी संगठनों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की। हाल ही में, केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री के साथ-साथ केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती निर्मला सीतारमण और केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री पोन. राधाकृष्णन ने तमिलनाडु के नेदुवसल गांव के प्रतिनिधिमंडल के प्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र में अन्वेषण संबंधी चिंताओं के बारे में मुलाकात की थी।

              मंत्रियों ने प्रतिनिधिंडल को आश्वासन दिया कि इस संबंध में कार्य तभी शुरु किया जाएगा, जब तमिलनाडु सरकार, केन्द्र सरकार के साथ चर्चा कर स्थानीय लोगों की परेशानियों का समाधान निकाल लेगी।

विशेष खिलाडि़यों का दल सम्‍मानित

               खेल और युवा मामलों के मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने 14 से 25 मार्च, 2017 तक ऑस्ट्रिया में आयोजित विश्‍व शीतकालीन खेलों के सफल दौरे के बाद भारत लौटे विशेष खिलाडि़यों, उनके कोच और अधिकारियों को सम्‍मानित किया। 

           विशेष ओलम्पिक भारतीय टीम ने 107 देशों से आये 2700 खिलाडि़यों के बीच 27 स्‍वर्ण, 10 रजत और 26 कास्‍य पदक जीतें। भारत को पांचवां स्‍थान मिला। इससे पहले खेल और युवा मामलों के मत्रालय ने 90 खिलाडि़यों, 23 कोचों तथा 3 अधिकारियों के इस दल को इन खेलों में भागीदारी करने के लिए पूरे खर्च के साथ मंजूरी दी थी। 

           इन खेलों में भाग लेने पर इस दल पर लगभग 1.50 करोड़ रूपये का खर्चा आया। इस अवसर पर गोयल ने कहा कि इन खिलाडि़यों ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ निश्‍चय और समर्पण के द्वारा एक व्‍यक्ति अपने जीवन में कुछ भी हासिल कर सकता है। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि इन विशेष खिलाडि़यों में से कई खिलाड़ी भविष्‍य के खेल सितारे बन जाएंगे और देश का नाम रोशन करेंगे। 

         उन्‍होंने टीम के हर सदस्‍य को बधाई दी और उनके बेहतरीन भविष्‍य की कामना की। गोयल ने कहा कि उनकी यह जीत युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और हम भविष्‍य में उनके प्रयासों के लिए अपना समर्थन जारी रखेंगे।

देश में करीब 50 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता

                  केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने नये भारत यानी न्यू इंडिया का आह्वान किया है जिसमें कालेधन और भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं है। 

           देश में डिजिधन और कैशलेस लेनदेन को आगे ले जाना भी प्रधानमंत्री की इसी सोच का हिस्सा है। सिंह ने यह बात मोतिहारी के में आयोजित डिजिधन मेले के उद्धघाटन के अवसर पर कही। मोतिहारी में आयोजित डिजिधन मेला पूरे दिन चला जहां बैंक, सामान्य सेवा केन्द्र (सीएससी), निजी डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाता आदि डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए उपभोक्ताओं और व्यापारियों को सेवाएं दीं।

                राधा मोहन सिंह ने डिजिधन मेले में लोगों को बताया कि कैशलेस लेने-देन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। देश में नकदरहित लेन-देन के लिए शिक्षित युवाओं की बढती संख्या देखते हुए पहली बार सरकार ने एक सरल भीम ऐप लांच किया है जो कि अत्यधिक लोकप्रिय है। अब तक 1.25 करोड़ लोग इस भीम ऐप से जुड चुके हैं और इसकी मदद से कुल 361 करोड़ रूपये का लेन-देन किया जा चुका है। सिंह ने कहा कि देश में 100 करोड़ से ज्यादा फोन हैं जिसमें से 30-40 करोड़ स्मार्ट फोन हैं एवं करीब 50 करोड़ इंटरनेट के उपभोक्ता हैं। 

               अगर इनका सही इस्तेमाल किया जाए तो क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कार्ड बैंकों द्वारा बनाई नई व्यवस्था है, जिसमें मोबाईल एप्प डाउनलोड करने के बाद किसी भी बैंक से फोन नम्बर के आधार पर लेन-देन किया जा सकता है। सिंह ने बताया कि रेल विभाग में कुल 2.15 करोड़ रेलवे टिकट बुक होते हैं जिसमें से 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा टिकट ऑनलाइन बुक होते हैं।

             सिंह ने जानकारी दी कि कुल बैंक अकाउंट 144 करोड़ हैं जिसमें से 117 करोड़ सेविंग्स अकाउंट हैं। कुल जन-धन अकाउंट 28.02 करोड़ हैं। 40 करोड़ बैंक अकाउंट आधार कार्ड से जुड़े हैं। कुल आधार कार्ड की संख्या है 113 करोड़। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि कुल मशीन की संख्या है 20.13 लाख एवं मार्च, 2017 तक इसमें 10 लाख नई मशीनें जोड़ी जायेंगी। देशभर में कुल 110.6 करोड़ क्रेडिट/डेबिट कार्ड हैं। 21.9 करोड़ लोगों के पास रूपये कार्ड हैं जिसका इस्तेमाल वर्तमान में 40 प्रतिशत बढ़ा है।

             सिंह ने कहा कि कृषि मंत्रालय कृषि से जुड़े हर लेनदेन में कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है और इसके लिए हर सुविधा मुहैया करवा रहा है। राधा मोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने विमुद्रीकरण की शुरुआत कर कालेधन के खिलाफ जंग छेड़ दी है। 500 शहरों में जानकारी एवं जागरूकता हेतु प्रयास किये जा रहे हैं।

आईटी उद्योग का प्रदर्शन अच्‍छा, भारत में बहुत अधिक संभावनाएं

             राष्‍ट्र‍ीय रेल संग्रहालय ऑडिटोरियम, चाणक्य पुरी, नई दिल्‍ली में ‘डिजिटल इंडिया के लिए आईआर-वन आईसीटीसी (वन इंफोर्मेशन एंड कम्‍युनिकेशन टैक्‍नोलॉजी) बिल्डिंग डिजिटल रेलवे की थीम पर एक सम्‍मेलन का आयोजन किया गया।

            सम्‍मेलन का उद्घाटन केन्‍द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने किया। इस अवसर पर रेल राज्‍य मंत्री राजेन गोहेन भी मुख्‍य रूप से उपस्थि‍त थे। सम्‍मेलन में रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष ए.के. मित्‍तल, रेलवे बोर्ड के सदस्‍य प्रदीप कुमार के साथ रेलवे बोर्ड के अन्‍य सदस्‍य, भारतीय रेल के अधिकारी गण और नेस्‍कॉम के प्रतिनिधि तथा आईटी उद्योग के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। 

               इस अवसर पर संबोधित करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, ‘यह बेहद दिलचस्‍प कार्यक्रम है। पिछले कई वर्षों से आईटी क्षेत्र में भारी वृद्धि देखी गई है। आईटी क्षेत्र में बहुत अधिक अवसर हैं। आईटी उद्योग चारों और व्‍यापार के रूप में फैल रहा है। यह उद्योग व्‍यापार के लिए अगले दरवाजे की तलाश नहीं करता है। आईटी उद्योग ने बहुत अच्‍छा प्रदर्शन किया है और भारत में बहुत अधिक संभावनाएं मौजूद है। भारतीय रेलवे व्‍यापक अवसर प्रदान करता है। भारतीय रेल का मतलब केवल संचालन से ही नहीं है। भारतीय रेलवे में चिकित्‍सा, शिक्षा, समाज, पर्यावरण जैसे विभिन्‍न क्षेत्रों की अन्‍य बहुत सी गतिविधियां शामिल हैं। 

               बजट भाषण में यह घोषणा की गई थी, कि भारतीय रेलवे को डिजिटलीकरण के लिए एकीकृत और समग्र दृष्टिकोण की आवश्‍यकता है। यह पता लगाया गया है कि भारतीय रेल नेस्‍कॉम के माध्‍यम से किस तरह से आईटी उद्योग के साथ भागीदारी कर सकती है। इस उद्यम के माध्‍यम से विक्रेता और रेलवे दोनों को बराबर फायदा होना चाहिए। यह एक महत्‍वपूर्ण बदलाव होगा। यदि रेलवे दो बिलियन डॉलर का निवेश कर छह बिलियन डॉलर की बचत कर सकता है, तो यह महत्‍वपूर्ण उपलब्धि होगी। डिजिटल प्‍लेटफॉर्म के दो मॉडल उपलब्‍ध हैं। पहला – केपेक्‍स प्‍लेटफॉर्म तथा दूसरा- ओपेक्‍स मॉडल है। छह बिलियन डॉलर के आंकड़े में गैर-किराया राजस्‍व शामिल नहीं है। गैर-किराया राजस्‍व लाभकारी हो सकता है, क्‍योंकि इससे रेलवे के राजस्‍व में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।’