Thursday, 2 November 2017

ड्रोन के नागरिक उपयोग हेतु नागरिक उड्डयन नियम ड्राफ्ट अधिनियम की घोषणा

  नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने दूरस्थ पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम अर्थात ड्रोन के नागरिक उपयोग हेतु नियमों के मसौदे की कल घोषणा की।

    केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गज़पति राजू और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने मसौदा अधिनियम की जानकारी मीडिया को दी। पायलेट रहित एयर क्राफ्ट सिस्टम मसौदे के अनुसार ड्रोन को अधिकतम वजन ले जाने के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।
   नैनो – 250 ग्राम से कम या बराबर, माइक्रो – 250 ग्राम से अधिक और 2 किलो से कम या बराबर, मिनी – 2 किलो से अधिक और 25 किलो से कम या बराबर, स्मॉल – 25 किलो से अधिक और 150 से कम या बराबर, लार्ज – 150 किलो से अधिक। 
   मसौदे के प्रारूप के अनुसार सभी तरह के ड्रोन दृश्य रेखा में और केवल दिन में ही उडाये जा सकेंगे जिसकी ऊंचाई 200 फीट से अधिक नहीं होगी। ड्रोन के माध्यम से किसी भी तरह की खतरनाक सामग्री, पशु अथवा मानव को लाने या ले जाने की अनुमति नहीं है। नैनो श्रेणी और सरकारी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संचालित ड्रोन के अलावा सभी तरह के व्यवसायिक ड्रोन का पंजीकरण आईसीएओ की प्रस्तावित नीति के अनुसार विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) के रूप में डीजीसीए द्वारा पंजीकृत कराना होगा। 
    मिनी और उससे ऊपर की श्रेणियों के लिए मानव रहित एयर क्राफ्ट संचालक अनुज्ञा पत्र (यूएओपी) की आवश्यकता होगी लेकिन शैक्षिक संस्थान परिसरों के भीतर 200 फीट से नीचे उड़ाये जाने वाले अधिकतम 2 किलो ग्राम वजन तक के मॉडल एयर क्राफ्ट के लिए यूआईएन/यूएओपी की आवश्यकता नहीं होगी। मसौदा अधिनियम में नैनो और माइक्रो श्रेणियों के अलावा ट्रीमोट पायलटों को अनिवार्य किया गया है।
    मसौदा अधिनियम के अनुसार माइक्रो और इससे ऊपर की श्रेणियों में आरएफआईडी/एसआईएम के साथ-साथ घर वापसी के विकल्प और दुर्घटना से बचने के लिए लाइटों का उपयोग करना होगा। मसौदा अधिनियम में कुछ विशेष निर्धारित क्षेत्रों में ड्रोन के संचालन को प्रतिबंधित किया गया है।
    ड्रोन को एआईपी में एएआई द्वारा अधिसूचित हवाई अड्डे से 5 किलो मीटर के क्षेत्र, स्थाई अथवा प्रतिबंधित क्षेत्र, जोखिम पूर्ण क्षेत्र के अलावा तटीय क्षेत्र से सटे समुद्र में 500 मीटर (क्षैतिज) से परे, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 50 किलो मीटर के क्षेत्र, आपातकालीन अभियानों से जुड़े क्षेत्र अथवा जनसुरक्षा को प्रभावित करने वाले क्षेत्र के निकट अथवा ऊपर और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिना पूर्व अनुमति के नहीं उड़ाया जा सकता।
      इसके अलावा दिल्ली में विजय चौक से 5 किलो मीटर के दायरे और चल वाहन, पोत अथवा वायुयान जैसे मोबाइल प्लेटफार्म से भी ड्रोन को संचालित नहीं किया जा सकता। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव आर एन चौबे ने जानकारी दी की मानव रहित विमान सिस्टम पर नागर विमानन नियमों का मसौदा एक माह की अवधि के लिए उपलब्ध है। इस मामले में आम लोगों से मसौदे पर सुझाव और प्रतिक्रियाऐं भी आमंत्रित हैं।

दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी की पहुंच बिजली तक नहीं

  बैंकॉक। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बैंकॉक में 7वें एशियाई मंत्री स्तरीय ऊर्जा गोलमेज सम्मेलन में कहा मैं इस महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति पर सम्‍मानित महसूस कर रही हूं, जहां ऊर्जा के क्षेत्र के लिये अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण देशों के मंत्रीगण एकत्रित हुये हैं।

 एशिया ऊर्जा का सबसे बड़ा उत्‍पादक होने के साथ ही सबसे बड़ा उपभोक्‍ता भी है। मुझे खुशी है कि आईईएफ नियमित रूप से एशियाई मंत्रि-स्तरीय ऊर्जा गोलमेज सम्मेलन आयोजित करता है। मैं पिछली बार 2015 में दोहा में एशियाई मंत्रि-स्तरीय ऊर्जा गोलमेज सम्मेलन में शामिल हुआ था। मुझे प्रसन्‍नता है कि इस महत्‍वपूर्ण चर्चा के लिये कई देशों के मेरे विभिन्‍न विशिष्‍ट मित्र भी आज यहां उपस्थित हैं। ऐसी बैठकों से ऊर्जा के परिदृश्‍य के महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों पर क्षेत्रीय ध्‍यान केंद्रीत होता है। 
   पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा मेरे विचार से आईईएफ ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व करने वाला अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, क्योंकि तेल और गैस की 90 प्रतिशत की वैश्विक आपूर्ति करने वाले इसके सदस्य हैं। इसके 72 सदस्य पूरे छह महाद्वीप में हैं। इसलिए आईईएफ वैश्विक ऊर्जा के मुद्दों पर चर्चा के लिए उत्पादकों और उपभोक्ताओं को सबसे बेहतरीन वैश्विक मंच प्रदान करता है। यह एक मात्र ऐसा संगठन है, जिसमें कोई भी देश निर्बाध शामिल सकता है। 
     गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा मैंने इसे ओपेक, आईईए और अंतर्राष्ट्रीय गैस यूनियन (आईजीयू) जैसे अन्य संगठनों के साथ नजदीक से कार्य करते देखा है। मैंने देखा है कि जी-20 के सदस्य देशों में से 18 आईईएफ के सदस्य हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आईईएफ जी-20 देशों के साथ अपने संबंधों में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
     पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा वैश्विक ऊर्जा बाजार में परिवर्तन के बारे में इस कार्यक्रम का विषय उचित और समय के अनुरूप है। मैंने 40 महीने पहले पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री का कार्यभार संभाला है। जब मैं इस अवधि के बारे में बताता हूं तो मुझे महसूस होता है कि हम बदलाव की कगार पर हैं।
   गैस मंत्री ने कहा पिछले कुछ वर्षों में हमने तेल की कीमतों में कमी, मिश्रित ऊर्जा में गैस की बढ़ती भूमिका, गैस की प्रचुर आपूर्ति, तेल और गैस बाजार में नये लोगों का प्रवेश और नवीकरणीय तथा ईवी की बढ़ोत्तरी देखी है। 
    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा जैसा कि उचित बाजार अर्थव्यवस्था होनी चाहिए, इसलिए विश्व भर के तेल और गैस के उत्पादक आज बड़ी संख्या में मुक्त बाजार मूल्य को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे तेल और गैस के क्षेत्र में परिवर्तन आया है। ओपेक की भूमिका धीरे-धीरे मूल्य निर्धारण से बदलकर मूल्य स्थिरीकरण की हो गई है। 
    गैस मंत्री ने कहा विश्व महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुजर रहा है, ऐसे में आपसी हित के लिए हम जिम्मेदार मूल्य निर्धारण, बुनियादी ढांचे के निर्माण, गैस और गंतव्य अनुच्छेद के लिए एशियाई प्रीमियम और गैस के लिए तेल मूल्य जोड़ना जैसी रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव पर चर्चा करते समय मैं यहां एकत्रित विद्वानों से अपने साझा उद्देश्यों के लिए प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार तथा सहयोग कैसे किया जाए, इस पर भी विचार करने का आग्रह करता हूं।
   गैस मंत्री ने कहा पिछले कुछ वर्षों में चौथी औद्योगिक क्रांति के बारे में काफी चर्चा की गई है। हम सबने पढ़ा और सुना है कि चौथी औद्योगिक क्रांति को भौतिक, डिजिटल और जैविक क्षेत्रों में विचारों, स्मार्ट सोच और प्रौद्योगिकियों के संयोजन से प्रेरित किया जाएगा और हम आज यह जानते हैं कि यह मौलिक रूप से हमारे जीवन को बदल देंगे। 
   गैस मंत्री ने कहा हमें बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट की बातें, मशीन लर्निंग, 3 डी प्रिंटिंग, नैनो सेंसर, एनर्जी स्टोरेज, बगैर चालक की कारें जैसी बहुत सारी तकनीकें हैं जिससे अंततः हमारी दुनिया का स्‍वरूप बदल जायेगा। मैं यह बताने से स्‍वयं को रोक नहीं सकता कि 17 वीं सदी तक दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद भारत मुख्यतः उपनिवेशवाद और उसके परिणामों के कारण पहली तीन औद्योगिक क्रांतियों में शामिल नहीं था। 
     गैस मंत्री ने कहा यहां तक ​​कि जब हम चौथी औद्योगिक क्रांति के बारे में बात करते हैं, तो यह याद रखना उचित है कि आज तक, दुनिया की लगभग 17 प्रतिशत आबादी या 1.3 बिलियन लोगों की पहुंच बिजली तक नहीं है, जो बड़े पैमाने पर दूसरी औद्योगिक क्रांति की ताकत थी। इसी प्रकार, यहां तक ​​कि आज भी विश्व स्तर पर लगभग 50 प्रतिशत लोग इंटरनेट से वंचित हैं जो कि तीसरी औद्योगिक क्रांति के प्रमुख चालकों में से एक है। 
   गैस मंत्री ने कहा इसलिए, जैसा कि भारत औद्योगिक क्रांति की चौथी लहर में दुनिया की अगुआई करने का आकांक्षा करता है, ऐसे एशिया के अन्य विकासशील देशों की तरह ही इसे उसकी आबादी के बड़े हिस्से को दूसरी और तीसरी औद्योगिक क्रांति का पूरा लाभ उठाना होगा। ऐसे में मेरा मानना है कि इस संवाद की निर्णायक भूमिका है। 
   गैस मंत्री ने कहा मुझे विश्वास है कि यह मंच ऊर्जा स्रोत, ऊर्जा क्षमता, ऊर्जा स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने के हमारे प्रयासों को दिशा देने का एक अवसर भी प्रदान करेगा, जैसा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किया गया है।
      पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा भारत 10-12 अप्रैल, 2018 को नई दिल्ली में अगले आईईएफ मंत्री स्‍तरीय बैठक की मेजबानी करेगा। सदस्य देशों से जानकारी प्राप्त करने के बाद, हम इस कार्यक्रम को समृद्ध और आकर्षक बनाने की प्रक्रिया में हैं।
   गैस मंत्री ने कहा मैं शीघ्र ही आपको औपचारिक आमंत्रण भेजूंगा। इस अवसर पर मैं आपको नई दिल्ली में होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक के लिये आमंत्रित करता हूं। मैं जल्द ही दिल्ली में आप सभी का स्‍वागत करने के लिए उत्सुक हूं।"

सागरमाला के तहत 2025 तक जल परिवहन का हिस्‍सा दो गुना हो जायेगा

  नई दिल्ली। केंद्रीय जहाज रानी, सड़क परिवहन व राजमार्ग, जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने वाइजेक पोर्ट से तटीय समुद्र रास्‍ते से अहमदाबाद मुम्‍बई व कोच्चि जाने वाले 230,000 टन स्‍टील कार्गो का डिजिटल शुभारंभ किया।

 इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि राष्‍ट्रीय इस्‍पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) अब तक सड़क और रेल परिवहन के माध्‍यम से 22 स्‍टॉक यार्ड को अपना उत्‍पाद भेज रहा था।
    तटीय समुद्र रास्‍ते से अब प्रतिवर्ष रेलमार्ग की तुलना में 380 मिलियन टन किलोमीटर की बचत होगी। इससे परिवहन खर्च में कमी आयेगी। यह महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि आरआईएनएल ने अपनी उत्‍पादन क्षमता दोगुनी (6.3 मिलियन टन) कर ली है। 
     मंत्री ने कहा कि सभी उत्‍पादकों को तटीय समुद्र रास्‍ते का उपयोग करना चाहिए। आरआईएनएल पोर्ट के समीप स्थित है। इसने विशाखापत्‍तनम से अहमदाबाद, मुम्‍बई और कोच्चि स्थित अपने यार्डों में स्‍टील भेजने के लिए एक वर्ष का समझौता किया है। 75 करोड़ रूपये का यह समझौता श्रेयस शिपिंग के साथ हुआ है जो दुबई के ट्रांस वर्ल्‍ड ग्रुप का सदस्‍य है।
    समुद्र के जरिए परिवहन के कई फायदे हैं। इसमें खर्च कम होता है, यह प्रदूषण कम करता है और बड़ी मात्रा में उत्‍पाद ले जाया जा सकता है। सागरमाला परियोजना के तहत भारतीय पोर्टो का आधुनिकिकरण किया जा रहा है ताकि ये पोर्ट आर्थिक विकास को गति प्रदान कर सके। चीन और नीदरलैंड में कुल परिवहन का 24 प्रतिशत समुद्र के जरिए होता है। 
  सागरमाला परियोजना के तहत कुल परिवहन के 6 प्रतिशत को बढ़ाकर 2025 तक 12 प्रतिशत का लक्ष्‍य रखा गया है।
    गडकरी ने कहा कि नये युग का यह परिवहन अर्थव्‍यवस्‍था व औद्योगिक उत्‍पादन को प्रोत्‍साहन प्रदान करेगा, रोजगार के अवसर सृजित करेगा और देश की जीडीपी को बढ़ायेगा। केन्‍द्रीय स्‍टील मंत्री चौधरी वीरेन्‍द्र सिंह वाइजेक पोर्ट पर उपस्थित थे।
    उन्‍होंने स्‍टील उद्योग की जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए जहाज रानी मंत्रालय द्वारा जल मार्ग के विकास करने की प्रशंसा की। उन्‍होंने कहा कि पोर्टो के विकास से स्‍टील उद्योग को अत्‍यधिक सहायता मिलेगी।