Thursday, 23 March 2017

राज्‍यों को 5020.64 करोड़ की सहायता

           केन्‍द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 राज्‍यों आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, राजस्‍थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्‍तर प्रदेश को केन्‍द्रीय सहायता देने के लिए यहां आयोजित उच्‍च स्‍तरीय समिति (एचएलसी) की बैठक की अध्‍यक्षता की।

         समिति ने उस अंतर-मंत्रालय केन्‍द्रीय टीम (आईएमसीटी) की रिपोर्टों पर आधारित प्रस्‍ताव पर गौर किया, जिसने बाढ़/भूस्खलन, बादल फटने, ओलावृष्टि, चक्रवात और सूखे (खरीफ) से प्रभावित उपर्युक्‍त राज्‍यों का दौरा किया था। 5020.64 करोड़ रुपये की सहायता को मंजूरी दी गई है, जिसमें राष्‍ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से 4979.97 करोड़ रुपये और राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्‍ल्‍यूपी) से 40.67 करोड़ रुपये की सहायता शामिल है। 

          एचएलसी ने आंध्र प्रदेश के लिए 584.21 करोड़ रुपये, असम के लिए 269.40 करोड़ रुपये, बिहार के लिए 822.96 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश के लिए 152.28 करोड़ रुपये और कर्नाटक के लिए 171.69 करोड़ रुपये की सहायता को मंजूरी दी। समिति ने मणिपुर के लिए 19.11 करोड़ रुपये, राजस्‍थान के लिए 370.27 करोड़ रुपये, तमिलनाडु के लिए 2014.45 करोड़ रुपये, तेलंगाना के लिए 314.22 करोड़ रुपये और उत्‍तर प्रदेश के लिए 303.05 करोड़ रुपये की सहायता को भी स्‍वीकृति दी।

            केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधा मोहन सिंह, केन्‍द्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि और नीति आयोग, गृह मंत्रालय, कृषि मंत्रालय एवं वित्‍त मंत्रालय के वरिष्‍ठ प्रतिनिधियों ने भी इस बैठक में भाग लिया।

स्‍वच्‍छ भारत मिशन के लिए युवा प्रोफेशनलों को प्रशिक्षण

            प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 25 सितंबर, 2016 को अपने ‘मन की बात’ संबोधन के दौरान कॉरपोरेट जगत से ऐसे युवा प्रोफेशनलों को प्रायोजित करने की अपील की थी, जो स्‍वच्‍छ भारत मिशन के क्रियान्‍वयन के लिए देश भर में जिला प्रशासनों को आवश्‍यक सहायता प्रदान करेंगे।

            प्रधानमंत्री की अपील को ध्‍यान में रखते हुए देश के एक प्रमुख परोपकारी संगठन टाटा ट्रस्‍ट्स ने पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय के सहयोग से एक साल की अवधि के लिए 600 जिला स्‍वच्‍छ भारत प्रेरक (जेडएसबीपी) उपलब्‍ध कराने की पेशकश की थी। इनमें से एक जिला स्‍वच्‍छ भारत प्रेरक देश के प्रत्‍येक जिले में अपनी सेवाएं देगा। इस पहल की घोषणा 15 दिसम्‍बर, 2016 को केन्‍द्रीय पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने की थी।

              इन युवा प्रोफेशनलों में से 50 प्रोफेशनलों के पहले बैच को प्रशिक्षण देने का शुभारंभ राजधानी में किया गया। जिलाप्रेरकों से बातचीत करते हुए केन्‍द्रीय मंत्री तोमर ने यह विश्‍वास जताया कि जेडएसबीपी पहल ग्रामीण भारत में स्‍वच्‍छ भारत मिशन के लक्ष्‍यों की प्राप्ति में गेम चेंजर साबित होगी। उन्‍होंने कहा कि इससे जिला कलेक्‍टर/सीईओ को और ज्‍यादा उत्‍साह एवं गति के साथ इस मिशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्‍होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि जिलाप्रेरकों की भूमिका सुनिश्चित करके इन लोगों ने वर्ष 2019 तक स्‍वच्‍छ भारत का मार्ग प्रशस्‍त करने की दिशा में अगुवाई करते हुए प्रभावकारी ढंग से शपथ ली है। 

            इसके साथ ही इन लोगों ने प्रधानमंत्री के इस सपने को साकार करने में अपनी ओर से योगदान करने की शपथ ली है। मंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि प्रशिक्षित किये जा रहे जिलाप्रेरकों के प्रथम बैच में महिलाओं की भी अच्‍छी-खासी संख्‍या है। तीन दिन के इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जिलाप्रेरकों को स्‍वच्‍छ भारत मिशन (एसबीएम) के दिशा-निर्देशों पर तैयार विशेष मॉडयूल, एसबीएम में धनराशि के प्रवाह, एसबीएम की प्रगति की एमआईएस आधारित निगरानी, केन्‍द्र–राज्‍य तालमेल, स्‍वच्‍छता के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, लीडरशिप एवं प्रबंधन प्रशिक्षण मॉडयूल के बारे में जानकारी दी जायेगी।

भारतीय सीमेंट उद्योग : वैश्विक आवश्यकता का 7 फीसदी उत्पादन

            सीमेंट उद्योग में वैकल्पिक ईंधन एवं कच्चा माल -स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने की दिशा में कदम पर तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। 

          औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग में संयुक्त सचिव सुश्री रवनीत कौर ने ताप प्रतिस्थापन दर (टीएसआर) को बढ़ाने के लिए एएफआर के उपयोग में वृद्धि हेतु सीमेंट उद्योग द्वारा किये गये प्रयासों एवं पहल के लिए उसकी सराहना की। ताप प्रतिस्थापन दर (टीएसआर) बेहद कम 1 फीसदी है, जबकि विश्वा भर में यह औसतन 60 फीसदी है। उन्होंने कहा कि भारतीय सीमेंट उद्योग फिल्हाल वैश्विक सीमेंट आवश्यकता के 7 फीसदी का उत्पादन करता है। 

            उन्होंने यह भी कहा कि देश में प्रति व्य्क्ति सीमेंट खपत को बढ़ाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है, जो अब भी निराशाजनक स्त्र पर ही टिकी हुई है। उन्होंकने समग्र (कम्पोजिट) सीमेंट पर बीआईएस मानकों को हाल ही में जारी किये जाने के कदम की सराहना की। सुश्री कौर ने सीमेंट उद्योग को यह आश्वासन दिया कि सीमेंट उद्योग में इस तरह के एएफआर उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए अनुकूल नीतियां तैयार करने हेतु सरकार अपनी ओर से भरसक सहायता करेगी।

             सीएमए के अध्यक्ष डॉ. एस. चौकसी ने संबोधन में वैकल्पिक ईंधनों, फ्लाई ऐश, धातु की तलछट इत्यादि के कारगर उपयोग के लिए भारतीय सीमेंट उद्योग द्वारा उठाये गये विभिन्न कदमों पर रोशनी डाली। उन्होंने उद्योग के समक्ष मौजूद चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार को बढ़ावा

            वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने सेवाओं के व्‍यापार को सुविधाजनक बनाने की प्रासंगिकता को रेखांकित किया है, जैसा कि वस्‍तुओं के व्‍यापार के मामले में किया गया है। 

          नई दिल्‍ली में सेवाओं के व्‍यापार को सुविधाजनक बनाने पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उन्‍होंने सेवाओं के अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार को बढ़ावा देने के लिए सेवाओं के सक्षम एवं उचित प्रवाह की जरूरत पर विशेष बल दिया। उन्‍होंने कहा कि बाजार पहुंच का मुद्दा कोई सुविधा नहीं, बल्कि एक मसला है। उन्‍होंने कहा कि ज्ञान अब उत्‍पादन का एक कारक बन गया है। ऐसे में यह जानना आवश्‍यक है कि इसे कैसे नियंत्रण में रखा जाए। 

             भारत सरकार के वाणिज्‍य मंत्रालय के वाणिज्‍य विभाग के साथ मिलकर विश्‍व बैंक उन मुद्दों पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित कर रहा है जिन्‍हें सेवा व्‍यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए सुलझाना आवश्‍यक है। सेवाओं के अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार को बढ़ावा देने एवं इसे सुविधाजनक बनाने के उद्देश्‍य से भारत ने फरवरी 2017 में डब्‍ल्‍यूटीओ में सेवा व्‍यापार को सुविधाजनक बनाने (टीएफएस) से संबंधित समझौते के लिए एक मसौदा कानूनी मूलपाठ तैयार करने की पहल की। 

           इसके तहत आपूर्ति के समस्‍त साधनों के मार्ग में मौजूद उन अनगिनत सीमा संबंधी बाधाओं के साथ-साथ सीमा से पीछे अवस्थित बाधाओं को भी व्‍यापक तौर पर दूर करने का तरीका सुझाया गया है जिनका सामना सेवा व्‍यापार का पूर्ण दोहन करते समय उद्योग जगत को करना पड़ता है। इससे पहले भारत ने अक्‍टूबर 2016 में सेवा व्‍यापार को सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक पहल के रूप में एक ‘अवधारणा प्रपत्र’ पेश किया था। भारत के प्रस्‍तावों में डब्‍ल्‍यूटीओ के भीतर एवं बाहर काफी रुचि दिखाई गई है। इसके अनेक सदस्‍यों ने भारत के इस अनोखे विचार को सामने रखे जाने का स्‍वागत किया है। हालांकि, कुछ सदस्‍यों ने कई विशेष मुद्दों पर चिंता भी जताई है। 

         भारत अपनी इस पहल को आगे ले जाने के लिए सभी हितधारकों के साथ रचनात्‍मक विचार-विमर्श किये जाने को लेकर आशान्वित है। यह माना गया कि इस कार्यशाला का आयोजन ऐसे उचित समय पर किया जा रहा है जब दुनिया भर में संरक्षणवाद को बढ़ावा देने की आवाजें उठ रही हैं। ऐसे अहम समय में विश्‍व बैंक जैसे संस्‍थानों को मुक्‍त एवं निष्‍पक्ष व्‍यापार को बढ़ावा देने के लिए निष्‍पक्ष एवं न्‍यायसंगत तौर-तरीकों की पहचान करके उनका प्रचार-प्रसार करने में विशेष भूमिका निभानी है।

बाल मज़दूरी पर पूरी तरह से प्रतिबंध

             श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय से संबद्ध परामर्श समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में चर्चा का मुख्य बिन्दु “बाल मज़दूरी (बाल मज़दूर अधिनियम में संशोधन एवं आईएलओ सम्मेलन संख्या 138 एवं 182 का समर्थन सहित)” था। 

            बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्रम एवं रोज़गार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बंडारु दत्तात्रेय ने बैठक में मौजूद सदस्यों को एजेंडा के बारे में जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि सरकार हमारे देश से बाल मज़दूरी को खत्म करने के प्रति वचनबद्ध है। संसद द्वारा 26 जुलाई 2016 को बाल मज़दूरी (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 को पारित किया जा चुका है। बंडारु दत्तात्रेय ने कहा कि इस अधिनियम के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को बाल मज़दूरी अथवा अन्य किसी संबंधित प्रक्रिया में संलिप्त करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। 

            हालांकि, अधिनियम के अंतर्गत घरेलू स्तर के गैर खतरनाक उद्यमों में इन बच्चों को मदद करने की कुछ हद तक छूट दी गई है, मगर स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह मदद विद्यालय के बाद अथवा अवकाश के दौरान ही की जा सकती है।

            इसके अतिरिक्त, किसी भी किशोर (14 से 18 वर्ष की आयु के बीच) किसी भी अधिसूचित खतरनाक व्यवसाय अथवा प्रक्रिया में रोज़गार पाने अथवा इससे जुड़ने की अनुमति नहीं दी गई है। किसी भी तरह से उपर्युक्त नियमों के उल्लंघन के संबंध में कड़ी से कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है। ऐसे बालकों के पुनर्वास के लिए अलग से अनुदान का सृजन किया गया है।

राष्ट्रीय वयोश्री योजना : 5,20,000 वरिष्ठ नागरिकों को फायदा

             गरीबी रेखा से संबद्ध वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता एवं जीवन यापन के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करने वाली ‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’ का शुभारंभ आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले में 01 अप्रैल 2017 को किया जाएगा।

           केन्द्रीय सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए शारीरिक सहायता एवं जीवन यापन के लिए आवश्यक उपकरणों को शिविरों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। इस योजना को भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्रालय के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम) नामक एकमात्र कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा लागू किया जाएगा। यह एजेंसी सहायता एवं जीवन यापन के लिए आवश्यक उपकरणों की एक वर्ष तक निःशुल्क देखरेख करेगी। ये उपकरण वरिष्ठ नागरिकों को आयु संबंधी शारीरिक दिक्कतों से निपटने में मदद करेंगे। परिवार के अन्य सदस्यों के ऊपर उनकी निर्भरता को कम करते हुए उन्हें बेहतर जीवन जीने का अवसर देंगे। 

                  इस दौरान केन्द्रीय सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर एवं विजय सांपला भी मौजूद थे। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 10.38 करोड़ है। वरिष्ठ नागरिकों की 70 फीसदी से भी अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा प्रतिशत वृद्धावस्था में होने वाली अक्षमताओं से पीड़ित है। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2026 तक उम्रदराज़ लोगों की आबादी बढ़कर करीब 173 मिलियन हो जाएगी। केन्द्र सरकार ने वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों से पीड़ित, गरीबी रेखा से संबंध रखने वाले वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता एवं जीवन यापन के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की एक केन्द्रीय योजना का प्रस्ताव किया है।

              गरीबी रेखा से संबंध रखने वाले वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता एवं जीवन यापन के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करने की योजना तैयार करने के प्रस्ताव की घोषणा 2015-16 के बजट में की गई थी। इसके लिए ‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’ को तैयार किया जा चुका है। इसका उद्देश्य आयु संबंधी बीमारियों (कम दृष्टि, सुनने में परेशानी, दांतों का टूट जाना एवं गतिरोध विकलांगता आदि) का सामना कर रहे है। बीपीएल श्रेणी से संबद्ध बुज़ुर्गों को जीवन यापन के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन को सामान्य अथवा सामान्य के करीब लेकर आना है। ये सहायक उपकरण उच्च गुणवत्ता से युक्त होंगे। जहां कहीं भी लागू होगा वहां इन उपकरणों को भारत मानक ब्यूरों द्वारा तय मापदंडों के अनुसार तैयार किया जाएगा। 

              यह सार्वजनिक क्षेत्र की केन्द्रीय योजना है, जिसके लिए पूर्ण रूप से केन्द्र सरकार द्वारा अनुदान दिया जाएगा। इस योजना के कार्यान्वयन के लिए अनुदान ‘वरिष्ठ नागरिक’ कल्याण कोष से मिलेगा। इस योजना के अंतर्गत, योग्य बुज़ुर्ग लाभार्थियों को उनकी बीमारी एवं अक्षमता के आधार पर निम्नलिखित सहायता एवं जीवन जीने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। चलने की छड़ियां, कोहनी बैसाखियां, वाकर (चलने का उपकरण)/बैसाखी, तिपाई/क्वाडपोड, सुनने की मशीन, पहिये वाली कुर्सी (व्हील चेयर), कृत्रिम दांत एवं जबड़ा, चश्मा, योग्य वरिष्ठ नागरिकों को उनकी विकलांगता/दुर्बलता के अनुरूप निःशुल्क उपकरणों का वितरण। एक ही व्यक्ति में अनेक विकलांगता/दुर्बलता पाए जाने की स्थिति में, प्रत्येक विकलांगता/दुर्बलता के लिए अलग-अलग उपकरण प्रदान किए जाएंगे। ये उपकरण वरिष्ठ नागरिकों को आयु संबंधी शारीरिक दिक्कतों से निपटने में मदद करेंगे और परिवार के अन्य सदस्यों के ऊपर उनकी निर्भरता को कम करते हुए उन्हें बेहतर जीवन जीने का अवसर देंगे।

                    योजना को भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्रालय के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम) नामक एकमात्र कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा लागू किया जाएगा। भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम बुज़ुर्गों को दी जाने वाली इस सहायता एवं जीवन जीने के लिए आवश्यक उपकरणों की एक वर्ष तक निःशुल्क देखरेख करेगा। प्रत्येक ज़िले में लाभार्थियों की पहचान राज्य/केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासनों द्वारा उपायुक्त/ज़िलाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी के ज़रिए की जाएगी। जहां तक संभव होगा, प्रत्येक ज़िले में 30 फीसद लाभार्थी बुज़ुर्ग महिलाएं होंगी। 

            बीपीएल श्रेणी के बुज़र्गों की पहचान करने के लिए राज्य सरकार/केन्द्रशासित प्रदेश प्रशासन/ज़िलास्तरीय कमेटी एनएएसपी अथवा किसी अन्य योजना के अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रहे बीपीएल लाभार्थियों के आंकड़ें एवं जानकारियों का सदुपयोग भी कर सकते हैं। ये सभी उपकरण शिविरों के माध्यम से वितरित किए जाएंगे। 

           इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए आगामी तीन वर्षों (वित्तीय वर्ष 2019-20 तक) के लिए अनुमानित वित्तीय खर्च 483.6 करोड़ रुपये है। देश में अपनी तरह की पहली महत्वाकांक्षी योजना से आगामी तीन वर्षों में करीब 5,20,000 वरिष्ठ नागरिकों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

टीबी भारत की प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक

           राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विश्व क्षयरोग दिवस की पूर्व संध्या पर टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को जल्‍दी प्राप्‍त करने के लिए सभी हितधारकों से अपने प्रयासों को दोगुना करने के लिए कहा है।

            ग्लोबल कोएलिशन अगेंस्ट ट्यूबरकुलोसिस को भेजे गए अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा है कि उन्‍हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि 24 मार्च, 2017 को विश्‍व क्षयरोग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इसी तारीख को वर्ष 1882 में डॉ रॉबर्ट कोच ने टीबी बेसिलस की खोज की थी। यह दिवस इसी खोज की याद में मनाया जाता है। टीबी भारत की प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है।

             देश आज पहले की तुलना में टीबी से लड़ने के लिए बेहतर रूप से तैयार है। देश प्रभावी रूप से इस रोग को रोकने के लिए इसके  निदान, उपचार और देखभाल की आधुनिक तकनीकों से लैस है। वर्ष 2012-2017 की अवधि के दौरान, संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम ने 42 मिलियन से अधिक व्यक्तियों की जांच की और 7 मिलियन से अधिक रोगियों का उपचार किया गया।

          विश्व क्षयरोग दिवस के अवसर पर राष्‍ट्रपति ने टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को जल्‍दी से जल्‍दी  प्राप्‍त करने के लिए सभी हितधारकों से अपने प्रयासों को दोगुना करने के लिए कहा है।

भारत में 286 मिलियन टन बागवानी उत्‍पादन

              केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कि बागवानी क्षेत्र के विकास के लिएबहुत अच्छी संभावना है। वर्तमान कार्यकलापों को अपस्‍केल करके उपलब्‍ध क्षमता के दोहन के लिए हमें ध्‍यान केन्‍द्रित करने की आवश्‍यकता है। 

           केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री  राधा मोहन सिंह ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक में कही। सिंह ने कहा कि इस सत्र मेंन सिर्फसमेकित बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) यथा एनएचएम, एचएमएनइएच, सीडीबी, एनएबीएम, एनएचबी,सीआईएच उप-स्‍कीमों सहित बागवानी क्षेत्र की उपलब्‍धियों और बागवानी क्षेत्र मे आने वाली चुनौतियों पर विचार करेंगे बल्‍कि अनुसंधान संस्‍थानों, राज्‍य बागवानी मिशनों, आजीविका कार्यक्रमों और उद्यमियता के बीच अभिसरण सुनिश्‍चित करके भारत के खेत मैदानों को परिवर्तित कर इस क्षेत्र कोविकास का मुख्य आधार बनाने के लिए रणनीतियों पर भी विचार करेंगे। 

             कृषि मंत्री ने कहा कि देश में बागवानी क्षेत्र में फलों, सब्‍जियों और कंद फसलों, मशरुम, तराशे गए फूलों सहित सजावटी पौधों, मसालों, रोपण फसलों, औषधीय और सुगंधित पौधों की व्‍यापक किस्‍में शामिल हैं। यह क्षेत्र बहुत से राज्‍यों में आर्थिक विकास के लिए मुख्य आधार बन गया है। भारत वर्तमान में लगभग 24.4 मिलियन हैक्‍टेयर क्षेत्र से लगभग 286 मिलियन टन बागवानी उत्‍पादकों का उत्‍पादन कर रहा है, जो फलों के कुल विश्‍व उत्‍पादन का लगभग 13 प्रतिशत है। आम, केला, पपीता,चीकू, अनार, नींबू तथा आंवला के उत्‍पादन में विश्‍व में अग्रणी है। 

               सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि भारत, चीन के बाद सब्‍जियों के उत्‍पादन में दूसरे स्‍थान पर है। मटर व भिण्‍डी जैसी फसलों के उत्‍पादन में अग्रणी है। इसके अलावा भारत बैंगन, गोभी और प्‍याज के उत्‍पादन में विश्‍व में दूसरे स्‍थान पर है। आलू व टमाटर के उत्‍पादन में तीसरे स्‍थान पर है। समेकित बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के अंतर्गत संरक्षित खेती के तहत सब्‍जी उत्‍पादन पर विशेष बल दिया जा रहा है। कृषि मंत्री ने कहा कि बागवानी के अंतर्गत सफलता की बहुत सी कहानियां है उदाहरण के लिए महाराष्‍ट्र और तमिलनाडु में केला,छत्‍तीसगढ़ में अमरुद और टमाटर, गुजरात में अनार व आम,नागालैड में अनानास, अरुणाचल में किवी, सिक्‍किम में आरकिड और उत्‍तराखंड में बेमौसमीय सब्‍जियां आदि। खाद्य प्रसंस्‍करण,शीत श्रृंखला कृषि लाजिस्‍टिक, कृषि व्‍यापार, कृषि संबंधित सेवाएं, कृषि ऋण, बीमा और मूल्‍य श्रृंखला संबंधित सेवाओं का अनुपूरण करना इत्यादि प्रमुख चुनौतिया है। 

           सिंह ने कहा कि बागवानी के मामले में शीत श्रृंखला पूरी मूल्‍य श्रृंखला प्रणाली को मजबूत करती है। किसानों का सामाजिक-आर्थिक सुधार करती है। किसानों की आय को दोगुणा करने के लिए शीत श्रृंखला यह सुनिश्‍चित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है कि किसान लाभप्रद आर्थिक उत्‍पादकता के लिए उत्‍पाद मूल्‍य प्राप्‍त कर सकें। प्रशिक्षित और कुशल श्रम के विकास और स्‍थानीय कृषि जलवायु स्‍थितियों के अनुकूल गुणवत्‍तायुक्त रोपण सामग्री की उपलब्‍धता को सुनिश्‍चित करना भी अनिवार्य है। मानव संसाधन विकास के लिए किसानों,बागवानी उद्यमियों/पर्यवेक्षकों और क्षेत्र कर्मियों के क्षमता निर्माण के लिए बल दिये जाने की आवश्‍यकता है। 

                  सिंह ने कहा कि रोपण सामग्री की आपूर्ति और किसानों के लिए प्रौद्योगिकी प्रसार हेतु हब के रुप में कार्य करने के लिए प्रत्‍येक राज्‍य में फसल आधारित उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्रों (सेंटर ऑफ एक्सलेन्स) की स्‍थापना को प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। अब तक इंडो-इजरायल सहयोग से 27 उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्रों की स्‍थापना की गई है। अन्‍य देशों के सहयोग से ओर केन्‍द्रों को खोलने की प्रक्रिया जारी है। कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई, कि अंतरसत्रीय परामर्शदात्री समिति के विचार-विमर्श से बागवानी द्वारा किसानों के आजिविकों विकल्‍पो के सुधार, कृषि के विविधीकरण और किसानों को अधिक आय सुनिश्चित करने मे मदद मिलेगी। 

                 केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्यमंत्री परषोत्तम रुपाला, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्यमंत्री, सुदर्शन भगत, संसद सदस्यों, चिंतामण नवशा वनागा (लोकसभा), श्रीमती कमला देवी पटेल (लोकसभा), मनशंकर निनामा (लोकसभा), कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल (लोकसभा), रोडमल नागर (लोकसभा), संजय शामराव धोत्रे (लोकसभा), सुमेधानंद सरस्वती (लोकसभा) और डॉ तापस मंडल (लोकसभा) ने परामर्शदात्री समिति की अन्‍तरसत्रीय बैठक में हिस्सा लिया।

भारत विश्‍व का सबसे बड़ा दूध उत्‍पादक

               केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश के दुग्ध उत्पादन में हुई प्रगति, ग्रामीण डेरी सहकारी समितियों की मेहनत का नतीजा है।

         उन्होंने यह बात कृषि मंत्रालय में एनडीडीबी की स्‍वर्ण जयंती कॉफी टेबल बुक शीर्षक ‘’50 इयर्स – द ग्रेट इंडियन मिल्‍क रिवोल्‍यूशन’’ के विमोचन के अवसर पर कही। कृषि मंत्री ने कहा कि छोटे ओर सीमांत दूध उत्‍पादकों ने मिलकर 1998 से देश को विश्‍व का सबसे बड़ा दूध उत्‍पादक बनाने में योगदान दिया है । सभी सफलताएं रातोंरात नहीं प्राप्‍त हुईं हैं, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्‍पादकों के लगातार श्रम, प्रतिबद्ध पेशेवरों द्वारा प्राप्‍त सहायता तथा राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की दूर दृष्टि तथा विशेषज्ञता के परिणामस्‍वरूप हासिल हुई हैं। 

               कृषि मंत्री इस मौके पर बताया कि आपरेशन फ्लड तथा वर्तमान राष्‍ट्रीय डेरी योजना के माध्‍यम से एनडीडीबी के निरंतर प्रयासों के परिणामस्‍वरूप, भारतीय डेरी क्षेत्र ने निरंतर विकास बनाए रखने में सफलता प्राप्‍त की है। कृषि जीडीपी में पशुधन का योगदान तथा डेरी उद्योग में पशुधन की हिस्‍सेदारी में पिछले कई वर्षों से निरंतर वृद्धि हुई है। मूल्‍य की दृष्टि से, दूध भारत का सबसे बड़ा कृषि उत्पाद है। सिंह ने कहा कि भारत का दूध उत्‍पादन 155 करोड़ टन के स्‍तर को पार कर चुका है। इसके परिणामस्‍वरूप भारत में प्रति व्‍यक्ति दूध की उपलब्‍धता में 337 ग्राम/दिन की वृद्धि हुई है। 

            पिछले 10 वर्षों में दूध उत्‍पादन में प्रति वर्ष लगभग 4.5ऽ की तुलना में पिछले 2 वर्षों में दूध उत्‍पादन में वार्षिक लगभग 6.5ऽ की वृद्धि हुई है जो कि विश्‍व दूध उत्‍पादन वृद्धि की तुलना में लगभग दुगुनी वृद्धि है। देशभर की लगभग 1.7 लाख डेरी सहकारिताएं लगभग 1.58 करोड़ दूध उत्‍पादकों की सेवा में कार्यरत हैं, जिनमें से एक तिहाई महिलाएं हैं। यह उन्‍हें बाजार की पहुंच उपलब्‍ध कराकर तथा इनपुट सेवाएं प्रदान करके उनकी आजीविका सुदृढ़ बना रही हैं। 

             कृषि मंत्री ने कहा कि साथ एनडीडीबी के प्रयासों ने देश में पोषण सुरक्षा लाने,दूध की आत्‍मनिर्भरता लाने तथा उपभोक्‍ताओं को किफायती दर पर सुरक्षित तथा पौष्टिक दूध एवं दूध उत्‍पाद उपलब्‍ध कराने में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है। एनडीडीबी ने देश में डेरी उद्योग के भावी विकास हेतु अनुकूल परिस्थिति का निर्माण करने के लिए पिछले कई वर्षों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा व्‍यवस्थित प्रक्रियाओ को स्‍थापित किया है। एनडीडीबी के प्रयासों का लक्ष्‍य हमेशा से उत्‍पादकता में सुधार, लाभप्रदता, स्थिरता लाने पर केंद्रित है जिसके द्वारा लघु धारक दूध उत्‍पादकों की आजीविका में सुधार होगा। 

               सिंह ने कहा कि यह पुस्‍तक एनडीडीबी की 50 वर्षों की उल्‍लेखनीय यात्रा की झलक दिखाती है। साथ-साथ इसमें देश के लाखों डेरी किसानों के लिए सृजित मूल्य का वर्णन है। यह पुस्‍तक एनडीडीबी की उन मान्यताओं के बारे में मिसाल प्रस्‍तुत करती है कि सहकारी सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है। जितना पहले था तथा जो संस्थाएं इन मान्यताओं का पालन करेंगी वे भविष्‍य में डेरी उद्योग को संचालित करने के लिए संरचनात्मक ढांचे का निर्माण करेंगी। यह पुस्‍तक ग्रामीण भारत में सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाने में डेरी बोर्ड के प्रयासों को भी रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि हम सभी का यह सामूहिक उत्‍तरदायित्‍व है कि हम सफल व्‍यावसायिक उद्यम के रूप में सहकारी डेरी उद्योग की विशेषताओं के बारे में जागरूकता फैलाएं। 

           हमें लघुतम तथा दूरतम दूध उत्‍पादकों तक पहुंचने का कठोर प्रयास करना चाहिए ताकि वे आत्‍म निर्भर बन सकें। एनडीडीबी की स्‍थापना सहकारिता के माध्‍यम से किसानों को सेवा प्रदान करने के लिए हई थी।

भारत में अब रचनात्मक विचारों के साथ संपत्ति का निर्माण हो

             शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि जब तक हम ज्यादा संपत्ति पैदा नहीं करते हैं तो हम सिर्फ गरीबी ही वितरित कर सकते हैं। 

           आल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) द्वारा यहां आयोजित तीसरी नेशनल लीडरशिप कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और चीन जैसे राष्ट्र पहले संपत्ति के वितरण में विश्वास करते थे, लेकिन अब उनका ध्यान ज्यादा से ज्यादा संपत्ति के निर्माण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि एशिया विशेषकर भारत को अब रचनात्मक विचारों के साथ सामने आना है, जिससे संपत्ति का निर्माण हो। नायडू ने कहा कि भारत में पर्याप्त मात्रा में प्रतिभा है, लेकिन इसे मान्यता देने और उन्नत करने की जरूरत है।

              उन्होंने कहा कि भारत सहित एशिया के कुछ भाग अल्पविकसित हैं। जब तक इन्हें शामिल नहीं किया जाता, तब तक विकास का कोई मतलब नहीं है। मंत्री ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में गरीबों को शामिल किए जाने की जरूरत है। नायडू ने कहा कि आज हर कहीं नई तरह की भूख है, जैसे विकास की भूख, प्रगति की भूख। एम वेंकैया नायडू ने भारत में प्रबंधन, शिक्षा और व्यावसायिकता के लिहाज से मूल्यवान सेवाएं देने के लिए एआईएमए की सराहना की। उन्होंने कहा कि अच्छा नेतृत्व और प्रबंधन किसी भी क्षेत्र के लिए अहम होता है। उन्होंने कहा कि 90 के दशक में ‘शासन’ शब्द काफी चर्चा में था और सुशासन के लिए सुधार, प्रदर्शन, बदलाव और सूचना की जरूरत है।

             नायडू ने कहा कि 2008 से वैश्विक मंदी की स्थिति बनी हुई है। अब से 10 साल के भारत चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया के एशिया के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बनने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ साल के दौरान एशिया के तीन देश चीन, जापान और भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएंगे। 

           भारत तो जल्द ही जापान को पीछे छोड़ देगा। उन्होंने कहा कि चीन ने सस्ते विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसका उसके जीडीपी में खासा योगदान है, लेकिन भारत ने सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे भारत प्रमुख बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेवाओं वाले देश के तौर पर उभरा है। भारत को अंग्रेजी भाषा का भी खास फायदा मिला। नायडू ने कहा कि भारत को निवेश स्थल और विनिर्माण व डिजाइन हब के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के तौर पर के तौर पर आगे बढ़ाने मेक इन इंडिया पहल शुरू की गई थी।

            नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि भारत का विकास मितव्ययी रहा है, क्योंकि हम एक उत्पाद के निर्माण में कम कार्बन, कम पूंजी और कम प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उत्पाद भी सस्ते बनते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का विकास का मॉडल एशिया और दुनिया के लिए अच्छा है।

राष्ट्रीय फोटोग्राफ़ी पुरस्कार : रघु राय को लाइफ टाइम अचीवमेंट

          सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि फोटोग्राफी जागरूकता फैलाने और सुशासन सुनिश्चित करने के एक महत्‍वपूर्ण माध्‍यम के रूप में एक संचार उपकरण थी। आज की डिजीटल दुनिया में सामाजिक मीडिया के साथ फोटोग्राफ एक शक्तिशाली संयोजन बन गया है। 

           प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘सेल्‍फी विद डॉटर्स’ अभियान सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली साधन बन गया है। इस तरह से फोटो पोस्‍ट करने के तरीके ने सामाजिक व्‍यवहार और गहरी सांस्‍कृतिक परंपराओं पर सशक्‍त प्रभाव पैदा किया है। नायडू ने ऐसा छठे राष्‍ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्‍कार समारोह के उद्घाटन के अवसर पर कहा। सूचना एवं प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौर और सूचना एवं प्रसारण सचिव अजय मित्‍तल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

            नायडू ने संचार के सशक्‍त माध्यम के रूप में फोटोग्राफ की भूमिका के बारे में कहा कि "एक तस्वीर एक हजार शब्दों के बराबर होती है"। फोटोग्राफ कलात्‍मक बयान के माध्‍यम का सृजन करते है, जो संचारक के विचार और मानसिक स्थिति के बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। उन्‍हें लिखी या बोली जाने वाली भाषा के भाषा विज्ञान की परिधि और सीमाओं को पार करने में सक्षम बनाती है। नायडू ने कहा कि फोटोग्राफ एक सशक्‍त भाषा रहे हैं, जो हमारी भावनाओं को व्‍यक्‍त करके हमारी विरासत का हिस्सा बन गए हैं। सीरिया के एक तीन वर्षीय मृत बच्चे के समुद्र तट पर तैरते शव ने शरणार्थी संकट के बारे में पूरी दुनिया की राय को बदल दिया था तथा मानवता के प्रति सामूहिक चेतना को हिला दिया था। 

             फोटोग्राफी के बुनियादी सार के बारे में नायडू ने कहा कि अच्‍छा फोटो लेने के कोई निर्दिष्‍ट नियम नहीं थे। कोई फोटोग्राफर किसी तकनीक या सिद्धांत से बंधा हुआ नहीं था। वे अपनी इच्‍छानुसार अपने विषय को समझने और उसी के अनुसार फोटो लेने के लिए स्‍वतंत्र थे। फोटो खींचने और उसकी प्रोसेस के लिए कला, कोण और एपर्चर का सही संयोजन बहुत जरूरी था, जो अनेक वर्षों के अभ्‍यास के बाद ही आता है। संचार के क्षेत्र में तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी की भूमिका के बारे में नायडू ने कहा कि हमारे दैनिक संचार में इंटरनेट ने दृश्‍य प्रतिरूप का पुर्नरूथान किया है। डिजीटल कैमरा और एकीकृत कैमरों वाले सेलफोन सभी लोगों के जीवन में फोटो की भरमार ला दी है।

             सामाजिक मीडिया ने फोटोग्राफ के माध्‍यम से लोगों को अपनी बात साझा करने, संवाद करने और जानकारी देने के लिए एक नया मंच उपलब्‍ध कराया है। नायडू ने  रघु राय को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्‍कार से नवाजा , जबकि के के मुस्‍तफा को इस वर्ष के लिए पेशेवर फोटोग्राफर तथा रविन्‍द्र कुमार को एमेच्‍योर फोटोग्राफर पुरस्‍कार प्रदान किया गया। वेंकैया नायडू और कर्नल राठौर ने छठे राष्‍ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्‍कार के ब्रोशर को भी  जारी किया। डी ए वी पी तथा फोटो डिवीजन द्वारा आयोजित फोटो प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। पेशेवर श्रेणी में इस वर्ष के पुरस्‍कार का विषय कौशल भारत था जबकि एमेच्‍योर श्रेणी में विषय स्‍वच्‍छ भारत था। 

            ज्‍यूरी समिति के अध्‍यक्ष, हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स के पूर्व फोटो संपादक एस एन सिन्‍हा थे, जबकि डी मुखर्जी पेशेवर वाइल्‍ड लाइफ फोटोग्राफर, के एन संथ कुमार फोटो जर्नलिस्‍ट, कन्‍नड़ दैनिक प्रजवानी समिति के सदस्‍य थे। फोटो डिवीजन के फोटोग्राफिक ऑफिसर संजीव मिश्रा इस समिति के सदस्‍य सचिव थे। रघुराय ने अपने फोटोग्राफर के रूप में अपने करियर की शुरूआत 1965 में 23 वर्ष की उम्र में की थी। वह स्‍टेटसमैन के मुख्‍य फोटोग्राफर और संडे पत्रिका के फोटो संपादक रहे। इसके अलावा वे इंडिया टुडे के विजुअलाइजर फोटोग्राफर भी रहे। उन्‍हें 1992 में संयुक्‍त राष्‍ट्र में वर्ष के फोटोग्राफर पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया। 

            उन्‍होंने कई विषयों पर लगभग 55 पुस्‍तकें लिखी हैं। पुरस्‍कार विजेताओं में रघु राय, नई दिल्ली- लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार, के.के. मुस्तफा, त्रिशूर, केरल- वर्ष का पेशेवर फोटोग्राफर, रविंदर कुमार, शकरपुर, दिल्ली- वर्ष का एमेच्योर फोटोग्राफर, अतुल चौबे, ठाणे महाराष्ट्र- वर्ष का विशेष उल्लेख पुरस्कार, पेशेवर श्रेणी में, सी नारायण राव, विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश- दिपायन भर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल, जी नागाश्रीनिवासु, तिरुवनंतपुरम, केरल, ओ.पी. सोनी, इंदौर, मध्य प्रदेश, दीपक भाउ कुंभार, कोल्हापुर, विशेष उल्‍लेख पुरस्कार, एमेच्योर श्रेणी में सुश्री प्रभा जयेश पटेल, अहमदाबाद, गुजरात, रवींद्र मवी, इंदौर, मध्य प्रदेश,  सुदीपता मौलिक, साल्ट लेक सिटी, कोलकाता, पश्चिम बंगाल, सुमित गुलाटी, पीतम पुरा, दिल्ली है। 

             राष्ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्‍कार एक वार्षिक आयोजन है। जिसका सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन एक मीडिया इकाई फोटो डिवीजन द्वारा आयोजन किया जाता है। यह आयोजन फोटोग्राफी की कला तकनीक को बढ़ावा देने और पूरे देश के पेशेवर और एमेच्‍योर फोटोग्राफरों को प्रोत्‍साहित करने के लिए किया जाता है। कुल 13 फोटो पुरस्कारों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इन पुरस्कारों में लाइफ टाइम पुरस्कार अचीवमेंट पुरस्‍कार, पेशेवर और एमेच्योर श्रेणी में वर्ष का फोटोग्राफर पुरस्कार तथा दोनों श्रेणियों में ही 5 – 5 विशेष उल्‍लेख पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।