Thursday, 7 December 2017

सरकार का सभी को 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्‍य

    नई दिल्‍ली। केन्‍द्रीय बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री राजकुमार सिंह ने आज यहां राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों के बिजली और ऊर्जा मंत्रियों के सम्‍मेलन की अध्‍यक्षता की।

  कुल 17 राज्‍यों और एक संघ शासित प्रदेश ने सम्‍मेलन में हिस्‍सा लिया और राज्‍य स्‍तर पर केन्‍द्र सरकार की शीर्ष योजनाओं की प्रगति सहित विभिन्‍न मुद्दों और उन सुधार उपायों पर चर्चा की जिनसे केन्‍द्र और राज्‍यों के स्‍तर पर सभी के लिए 24 घंटे सस्‍ती और गुणवत्‍तापूर्ण बिजली सुनिश्‍चित की जा सके। मीडिया को संबोधित करते हुए सिंह ने सम्‍मेलन आयोजित करने के बारे में सरकार की कल्‍पना स्‍पष्‍ट रूप से सामने रखी। 
   उन्‍होंने कहा कि 24 घंटे बिजली देश के प्रत्‍येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और सभी राज्‍यों को यह निश्‍चित करना होगा। राज्‍यों के बीच एक सर्वसम्‍मत रोडमैप तैयार करने की सहमति बनी जिससे राज्‍यों के बिजली/वितरण कंपनियों के घाटे को 15 प्रतिशत से कम पर लाया जा सके और इस सीमा के बाद उनके द्वारा किसी प्रकार की अनावश्‍यक लोड शेडिंग करने पर दंड की व्‍यवस्‍था हो। 
     उन्‍होंने कहा कि अपनी अक्षमता का बोझ उपभोक्‍ता पर डालने को न्‍यायोचित नहीं ठहराया जा सकता और मार्च, 2019 के बाद इसकी इजाजत नहीं दी जाएगी। सम्‍मेलन के उद्घाटन सत्र के बाद श्री सिंह ने कहा है कि बिजली देश के आर्थिक विकास का सबसे महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। बिजली के बिना विकास नहीं हो सकता। हम विकसित देश बनने की दिशा की ओर बढ़ रहे हैं और बिजली सुधार सर्वोच्‍च प्राथमिकता है।
      सभी को सस्‍ती और गुणवत्‍तापूर्ण बिजली प्रदान किए बिना औद्योगिकीकरण और नौकरियों का सृजन संभव नहीं है। हमारे साथ दिसम्‍बर, 2018 तक 40 मिलियन नए उपभोक्‍ता जुड़ जाएंगे और अगले 5 वर्षों में आर्थिक विकास की दर 8 से 9 प्रतिशत होने की संभावना है, बिजली की मांग कई गुना बढ़ जाएगी। इसके अलावा आने वाले समय में विद्युत ऊर्जा के अन्‍य रूपों को समाप्‍त कर देगी क्‍योंकि यह अधिक कार्यसाधक है और इसे आसानी से पहुंचाया जा सकता है। 
     बिजली गतिशीलता के लिए जीवाश्‍म ईंधनों, खाना पकाने आदि का स्‍थान लेगी और पेट्रोलियम उत्‍पादों का महत्‍व कम कर देगी। वैश्‍विक मंच पर हमारी रणनीतिक स्‍वायत्‍ता के लिए बिजली के क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर होना आवश्‍यक है। उन्‍होंने कहा कि इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा निकट भविष्‍य में जीवाश्‍म ईंधनों का स्‍थान लेगी।
      केन्‍द्र सरकार की वर्तमान योजनाओं के अंतर्गत राज्‍यों को उनके बिजली बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 85 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि प्रदान की जा रही है। चूंकि देश में इस समय अतिरिक्‍त बिजली है, राज्‍य सभी को 24 घंटे बिजली प्रदान करने की स्‍थिति में है, बशर्ते उपभोक्‍ता खर्च की गई बिजली के लिए भुगतान करें।
     श्री सिंह ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि कुछ राज्‍य उपभोक्‍ताओं को प्रभावी तरीके से बिल नहीं दे पा रहे हैं और वसूली में उन्‍हें अनुमानत: करीब 50 प्रतिशत का घाटा हो रहा है। जहां उपभोक्‍ताओं को सही तरीके से बिल दिए जा रहे हैं वहां वसूली 95 प्रतिशत है।
    सुधारों के प्रस्‍ताव रखते हुए श्री सिंह ने कहा कि वितरण कंपिनयों का घाटा कम करने और उन्‍हें व्‍यवहार्य बनाने के लिए सरकार का मीटर रीडिंग में श्रम बल समाप्‍त करने का प्रस्‍ताव है। प्रत्‍येक राज्‍य में भविष्‍य में छोटे उपभोक्‍ताओं के लिए प्रीपेड मीटर और बड़े उपभोक्‍ताओं के लिए स्‍मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य करने से भ्रष्‍टाचार को रोका जा सकेगा और बिलों के भुगतान का पालन करने में वृद्धि होगी। 
     प्रीपेड मीटरों के सफल कार्यान्‍वयन का एक उदाहरण देते हुए श्री सिंह ने कहा कि मणिपुर ने अपने सभी शहरी इलाकों में प्रीपेड मीटर लगाकर अपना घाटा 50 प्रतिशत से अधिक कम किया है। कैरेज और कंटेंट को अलग करने के बारे में श्री सिंह ने कहा कि विद्युत कानून में एक संशोधन के जरिए इसका प्रस्‍ताव है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों के बारे में श्री सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने की कार्य योजना के रूप में भारत का 2022 तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा से 40 प्रतिशत स्‍थापित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्‍य है।
     इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए राज्‍य सरकारों द्वारा यह अनिवार्य करना जरूरी है कि नवीकरणीय खरीद दायित्‍व को पूरा किया जाए। 
    उन्‍होंने कहा कि केन्‍द्र सरकार पनबिजली पर भी ध्‍यान केन्‍द्रित कर रही है और जल्‍द ही नई पनबिजली नीति तैयार की जाएगी। बिजली के क्षेत्र में निकट भविष्‍य में सुधार उपायों के बारे में श्री सिंह ने कहा कि सरकार मेक इन इंडिया और भविष्‍य में होने वाले औद्योगिकीकरण पर विशेष ध्‍यान दे रही है। देश में रोजगार सृजन अपने बलबूते पर होना चाहिए।
    श्री सिंह ने कहा कि गरीब बिजली उपभोक्‍ताओं की मदद के लिए सरकार बिजली क्षेत्र में सब्‍सिडी के सीधे लाभ हस्‍तांतरण पर जोर दे रही है। इससे उद्योग को अधिक प्रतिस्‍पर्धात्‍मक बनाया जा सकेगा और उच्‍च दरों का बोझ उपभोक्‍ताओं से लिया जा सकेगा।
     सम्‍मेलन के दौरान आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और संघ शासित पुडुचेरी के मंत्री और वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित थे। बिजली सचिव अजय कुमार भल्‍ला और मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी भी सम्‍मेलन में मौजूद थे।

भारत-क्यूबा के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता

    नई दिल्‍ली। भारत और क्यूबा के बीच आज स्वास्थ्य क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हुए।

   स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा एवं क्यूबा के स्वास्थ्य मंत्री डॉ रोबर्टो टोमस मोरल्स ओजेदा ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और क्यूबा का एक प्रतिनिधि मंडल भी उपस्थित था। 
   समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए जे पी नड्डा ने कहा कि भारत और क्यूबा के बीच साझा समानता के मूल्यों और न्याय पर आधारित ऐतिहासिक संबंध हैं। दोनों ही देश कई वैश्विक मुद्दों पर समान राय रखते हैं। 
    नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य एवं दवाईयों के क्षेत्र में सहयोग के लिए यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे दोनों ही देशों के बीच स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग का बढ़ावा मिलेगा। फार्मा और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
      क्यूबा ने बायोटेक्नोलॉजी और फार्मा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। हमें संयुक्त रूप से व्यापारिक स्तर पर दवाईयों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत सहयोग को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। नड्डा ने कहा कि उन्होंने समझौते को लागू करने के लिए एक संयुक्त कार्य दल के गठन का सुझाव दिया है।

प्रधानमंत्री ने डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर राष्‍ट्र को समर्पित किया

    नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्‍ली में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर राष्‍ट्र को समर्पित किया। 

   उन्‍होंने इस संस्‍थान की आधारशिला अप्रैल, 2015 में रखी थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने विश्‍वास जताया कि डॉ. अंबेडकर की दृष्टि और शिक्षा के प्रसार में केंद्र एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
     इस बात पर गौर करते हुए कि डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर फॉर सोसियो-इकनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन भी इस परियोजना का हिस्‍सा है, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दों पर अनुसंधान के लिए एक महत्‍वपूर्ण केंद्र होगा। 
    उन्‍होंने कहा कि यह सेंटर समावेशी विकास एवं संबंधित सामाजिक-आर्थिक मामलों के लिए एक थिंक-टैंक (विचारक) के रूप में काम करेगा।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि विचारकों एवं दूरदर्शी नेताओं ने समय-समय पर हमारे देश की दिशा निर्धारित की है। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्र निर्माण में बाबा साहब के योगदान के लिए देश उनका ऋणी है। उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक लोगों और विशेष तौर पर युवाओं को उनकी दृष्टि और विचारों से अवगत कराया जाए। 
     उन्‍होंने कहा कि यही कारण है कि डॉ. अंबेडकर के जीवन से संबंधित महत्‍वपूर्ण जगहों को तीर्थस्‍थल के रूप में विकसित किया गया है। इस संदर्भ में उन्‍होंने दिल्‍ली में अलीपुर, मध्‍य प्रदेश में महू, मुंबई में इंदु मिल, नागपुर में दीक्षा भूमि और लंदन में उनके मकान का उल्‍लेख किया। 
      उन्‍होंने कहा कि यह 'पंचतीर्थ' आज की पीढ़ी द्वारा डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि देने का तरीका है। उन्‍होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन के लिए भीम ऐप केंद्र सरकार द्वारा डॉ. अंबेडकर की आर्थिक दृष्टि को श्रद्धांजलि है। दिसंबर, 1946 में संविधान सभा में डॉ. अंबेडकर के संबोधन का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तमाम संघर्षों के बावजूद राष्‍ट्र को उसकी समस्‍याओं से उबारने के लिए डॉ. अंबेडकर के पास एक प्रेरणादायक दृष्टिकोण था। 
     उन्‍होंने कहा कि हम अभी भी डॉ. अंबेडकर की दृष्टिकोण को पूरा नहीं कर पाए हैं। उन्‍होंने कहा कि आज की पीढ़ी में सामाजिक बुराइयों को खत्‍म करने की क्षमता और ताकत मौजूद है। प्रधानमंत्री ने डॉ. अंबेडकर के शब्‍दों को याद किया कि हमें अपने राजनीतिक लोकतंत्र के साथ-साथ एक सामाजिक लोकतंत्र का भी निर्माण करना चाहिए।
       उन्‍होंने कहा कि पिछले तीन से साढ़े तीन वर्षों के दौरान केंद्र सरकार ने सामाजिक लोकतंत्र की उस दृष्टि को पूरा करने के लिए काम किया है। इस संदर्भ में उन्‍होंने जनधन योजना, उज्‍ज्‍वला योजना, स्‍वच्‍छ भारत मिशन, बीमा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और हाल में शुरू की गई सौभाग्‍य योजना जैसे सरकारी कार्यक्रमों का उल्‍लेख किया। 
      प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार योजनाओं और परियोजनाओं को उनके निर्धारित समय के भीतर पूरा करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है और डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर इसका एक उदाहरण है।
      उन्‍होंने लोक कल्‍याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने में केंद्र सरकार की गति एवं उसकी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड, मिशन इंद्रधनुष सहित अन्‍य योजनाओं का उल्‍लेख किया और ग्रामीण विद्युतीकरण लक्ष्‍य की ओर हुई प्रगति के बारे में विस्‍तार से बताया।
     प्रधानमंत्री ने स्‍वरोजगार सृजन के लिए स्‍टैंडअप इंडिया योजना का भी उल्‍लेख किया। 
    प्रधानमंत्री ने कहा 'नए भारत' के लिए उनका आह्वान एक ऐसे भारत के लिए है जिसकी परिकल्‍पना डॉ. अंबेडकर ने की थी। एक ऐसा भारत जहां सभी के लिए समान अवसर और अधिकार मौजूद हो, जातिगत उत्‍पीड़न से मुक्‍त हो और तकनीक की ताकत के जरिये प्रगति कर रहा हो।
      उन्‍होंने बाबासाहब अंबेडकर के सपनों को पूरा करने के लिए सभी से काम करने का आह्वान किया और उम्‍मीद जताई कि हम उसे 2022 तक पूरा कर लेंगे।