Wednesday, 31 January 2018

खेलो इंडिया को सफल बनाने की अब तक 10 लाख शपथ

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के खेलो इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए अब तक 10 लाख से अधिक लोग शपथ ले चुके हैं।

  केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बीते दिनों खेलो इंडिया शपथ को लांच किया था। इसके अलावा खेलो इंडिया एंथम अपने लांच के दो दिनों के भीतर 20 करोड़ लोगों द्वारा पसंद किया जा चुका है।
    अब तक 11 लाख लोग खेलो इंडिया शपथ ले चुके हैं। खेलो इंडिया शपथ को इन खेलों को सफल बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। खेलो इंडिया के माध्यम से भारत सरकार कम उम्र में ही प्रतिभाओं को तलाश कर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्म पर भारत के चैम्पियन के तौर पर तैयार करना चाहती है।
    खेलो इंडिया शपथ जैसे और जितना हो सके, लोगों को देश की खेल भावना को बनाए रखने और उसे बढ़ाने का संदेश देता है। यह उस क्रांतिकारी अभियान के प्रति भारत का शपथ है, जिसके तहत जमीनी स्तर से खिलाड़ियों को चुनकर उन्हें वैश्विक स्तर पर चमकने के लिए तैयार किया जाएगा।
        खेलो इंडिया अभियान के तहत पहले खेलो इंडिया स्कूल गेम्स का आयोजन 31 जनवरी से 8 फरवरी तक राष्ट्रीय राजधानी के पांच आयोजन स्थलों पर होगा। इसके तहत 16 खेलों में 3200 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे और 199 पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
     खेलो इंडिया को सफल बनाने के लिए अगर आप भी शपथ लेना चाहते हैं तो आपको खेलोइंडिया डॉट जीओवी डॉट इन पर लॉग इन करना होगा या फिर 902-900-1431पर मिस्ड कॉल देकर भी आप यह शपथ ले सकते हैं।

राष्‍ट्रपति भवन, नार्थ व साउथ ब्‍लॉक में गतिशील प्रकाश व्‍यवस्‍था

   नई दिल्ली। केन्‍द्रीय लोक निर्माण विभाग और आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय ने इस वर्ष अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रसिद्ध विरासत भवनों-राष्‍ट्रपति भवन तथा नॉर्थ और साउथ ब्‍लॉक- में शक्तिशाली व गतिशील प्रकाश व्‍यवस्‍था की स्‍थापना की है।

  पहले जीएलएस/मैटल हेलाइड/सोडियम वेपर के माध्‍यम से प्रकाश व्‍यवस्‍था की जाती थी। इसकी रोशनी वर्तमान के एलईडी लाइट की तुलना में बहुत मंद थी।
  राष्‍ट्रपति ने राष्‍ट्रपति भवन पर की गई नई प्रकाश व्‍यवस्‍था का उद्घाटन किया। नई एलईडी लाइटों की जीवन अवधि एक लाख घंटे है जबकि पहले उपयोग में लाई जा रही लाइटों की जीवन अवधि 10,000 घंटे थी। आसानी से निर्माण और रख-रखाव के लिए नई प्रकाश व्‍यवस्‍था में एकीकृत ऊर्जा और डेटा केबल पर कम्‍प्‍यूटरीकृत नियंत्रण की प्रणाली है।
    इस नई प्रणाली में बल्‍बों का रंग संयोजन, समय का निर्धारण, रोशनी को कम करना, एक या अनेक बल्‍बों/संयोजनों पर नियंत्रण आदि की व्‍यवस्‍था इथरनेट आधारित नियंत्रक के माध्‍यम से की गई है। इस प्रकाश प्रणाली में बहुरंग-संयोजन की सुविधा है।
   राष्‍ट्रपति भवन और नॉर्थ व साउथ ब्‍लॉक की गुम्बदों, छतरियों, स्‍तंभों व अन्‍य भागों पर प्रकाश के रंग संयोजन से इन भवनों की वास्‍तुकला की विशेषता उभरकर सामने आती है। यह प्रणाली ऊर्जा कुशल के साथ-साथ सस्‍ती भी है। नई प्रकाश व्‍यवस्‍था से इन भवनों का मूल्‍य संवर्धन हुआ है।

अब मछलियों में रासायनिक छिड़काव का पता लगाने वाली जांच किट

   नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने आज सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नालॉजी (क्क्ष्क़च्र्) कोच्चि द्वारा विकसित मछलियों में रासायनिक मिलावट या छिड़काव का पता लगाने वाली किट - त्‍वरित परीक्षण किट (सिफ्टेस्‍ट) को लांच किया।

   मछलियों को जल्दी खराब होने से रोकने और बर्फ में फिसलन खत्म करने के लिए अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड का इस्तेमाल किया जाता है। जांच किट मछिलयों में दोनों रसायनों की उपस्थिति का पता लगाता है।
  राधा मोहन सिंह ने बताया कि अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड के सेवन से मनुष्यों में अनेक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याऐं जैसे, पेट दर्द, वमन, बेहोशी जैसी समस्याएं उत्‍पन्‍न हो जाती हैं, और यहां तक कि व्यक्ति की मृत्‍यु भी हो सकती है। 
    केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात आज नई दिल्ली में त्‍वरित परीक्षण किट (सिफ्टेस्‍ट) के लांच के अवसर पर कही। श्री सिंह ने कहा कि मछली का सेवन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अत्‍यंत लाभकारी होता है । मछलियां जल्दी खराब हो जाती हैं इसलिए उनका लंबे समय तक भंडारण नहीं किया जा सकता है। भारतीय घरेलु मत्‍स्‍य बाज़ार में फॉर्मेल्‍डहाइड तथा अमोनिया युक्‍त मत्‍स्‍य के व्रिकय होने की सूचनाऐं आए दिन प्राप्‍त प्राप्त हो रही हैं, विशेषत उन बाज़ारों में जो उत्‍पादन केंद्रों से दूरदराज स्थानों में स्थित हैं।
     राष्‍ट्रीय एवं अंर्तराष्‍ट्रीय विनियमों के अनुसार मत्‍स्‍य उत्पादों को सिर्फ बर्फ के माध्‍यम से संरक्षित किया जाना चाहिए तथा मत्‍स्‍य परिरक्षण के लिए किसी भी रसायन का उपयोग पूर्णत: वर्जित है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भोजन में दूषित पदार्थों की नियमित जांच एक दीर्घकालिन प्रक्रिया है परन्तु कुछ व्यक्ति दूषित पदार्थों के रूप में अनेक विषैले रसायनों का प्रयोग करने लगे हैं। आज का उपभोक्‍ता भोजन की गुणवता की सुरक्षा को लेकर बहुत सजग है।
      उपभोक्‍ता को दूषित पदार्थों की जांच के लिए ऐसी तकनीक की जरूरत है, जो संवेदनशील सुवाद्य होने के साथ-साथ शीघ्रता से दूषित पदार्थों का पता लगा सके । इन पहलुओं को ध्‍यान में रखकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - के मा प्रौ सं, कोच्चि ने अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड की त्‍वरित जांच हेतु परीक्षण किटों को विकसित किया है।
       इन किटों का प्रयोग उपभोक्‍ता सरल तरीकों से कर सकता है। किट के भीतर कागज़ की पट्टियॉं, रसायनिक द्रव्‍य तथा परिणाम जानने के लिए एक मानक चार्ट दिया गया है। फॉर्मेल्‍डहाइड एक कैंसर उत्‍प्रेरित करने वाला रसायन है, इसलिए मत्‍स्‍य परिरक्षण में इसका उपयोग चिंतनीय है। 
  अतः मछलियों में अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरा है तथा जिसे रोकना आवश्यक है। मत्‍स्‍य परिरक्षण के लिए मात्र मानकीकृत मत्‍स्‍य प्रसंस्‍करण, संग्रहण, परिवहन एवं विपणन के कोल्‍ड चेन का यथोचित प्रयोग करना चाहिए।

Monday, 29 January 2018

किसानों के लिए 20,339 करोड़

      नई दिल्‍ली। केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 प्रस्‍तुत किया।

  उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में उच्च उत्पादकता और समग्र उत्पादन प्राप्त करने के लिए क्रेडिट एक महत्वपूर्ण आगत है। लघु अवधि फसल ऋण पर किसानों को प्रदान की जाने वाली ब्याज सहायता से उत्पन्न होने वाली विभिन्न देयताओं को पूरा करने के लिए 2017-18 में भारत सरकार द्वारा 20,339 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गई है।
    इसके साथ ही फसल कटाई के बाद भंडारण संबंधी ऋण देश में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आगत अपेक्षा को पूरा करता है। विशिष्टया छोटे और सीमांत किसान जो कि मुख्य उधार लेने वालों में से है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक यह संस्थागत क्रेडिट किसानों को क्रेडिट के गैर-संस्थागत स्रोत से अलग करने में मदद करेगी। जहां पर यह ब्याज की ऊंची दरों पर उधार लेने के लिए मजबूर होते हैं।
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल बीमा, फसलों के ऋण से जुड़ा है। लिहाजा किसान फसल ऋणों का फायदा उठाते हुए सरकार की दोनों किसानों के अनुकूल पहलों से लाभ ले सकेंगे। आर्थिक सर्वे के मुताबिक यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि किसान बाजार में अपने उत्पादन के संबंध में लाभदायक कीमतों का लाभ उठाएं, सरकार सुधार को लेकर कदम उठा रही है।
    इलेक्ट्रानिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) जो सरकार द्वारा अप्रैल 2016 से आरंभ किया गया था, का उद्देश्य इलेक्ट्रोनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिखरे हुए एपीएमसी को एकीकृत करना और किसानों को ऑनलाइन व्यापार करने की सलाह दी जाती है, यह भी अहम है कि वे मान्यता प्राप्त गोदामों में अपने उत्पादन का भंडारण करके फसल की कटाई के बाद ऋण का फायदा उठाएं। यह ऋण ऐसे छोटे और सीमांत किसानों जिनके पास किसान क्रेडिट कार्ड है, को 6 माह की अवधि के संबंध में ऐसे भुगतान पर 2 प्रतिशत की ब्याज सहायता उपलब्ध है। 
   इसमें किसानों को बाजार में उछाल आने के समय अपनी बिक्री करने और मंदी के दौरान बिक्री से बचने में मदद मिलेगी। अतः छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए आवश्यक है कि वे अपने केसीसी को बनाए रखें। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना चाहती है। इसके लिए बीज से लेकर बाजार तक सरकार ने तमाम तरह की पहल की है। संस्थानात्मक स्रोतों से क्रेडिट, सभी ऐसे सरकारी प्रयासों जैसे सायल हेल्थ कार्ड, इनपुट प्रबंध, प्रधानमन्त्री कृषि सिंचाई योजना इत्यादि में पर ड्रापमोरक्रॉप को विभुषित करेगा।

Sunday, 28 January 2018

विश्व में नारियल उत्पादन में भारत अग्रणी

    पटना। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि बिहार में नारियल विकास बोर्ड की प्रमुख योजनायें नारियल के उत्पादन, उत्पादकता, नारियल उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, विपणन एवं निर्यात बढ़ाने में ज़ोर दे रही हैं।

  कृषि मंत्री ने यह बात आज पटना में केंद्र सरकार के अधीन नारियल विकास बोर्ड के किसान प्रशिक्षण केंद्र एवं क्षेत्रीय कार्यालय भवन के लोकार्पण के अवसर पर कही।
    श्री सिंह ने बताया कि विश्व में नारियल उत्पादन और उत्पादकता में भारत अग्रणी देश है। हमारा वार्षिक नारियल उत्पादन 20.82 लाख हेक्टर से 2395 करोड़ नारियल है और उत्पादकता प्रति हेक्टर 11505 नारियल है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में नारियल का योगदान करीब 27900 करोड़ रुपए है।
    वर्ष 2016-17 में हमारे देश से 2084 करोड़ रुपए मूल्य के नारियल उत्पादों का निर्यात किया गया है। हमारे देश में एक करोड़ से अधिक लोग अपनी जीविका चलाने के लिए इस फसल पर निर्भर करते हैं। नारियल विकास बोर्ड का लक्ष्य है कि नारियल किसानों को नारियल के उत्पादन, प्रक्रमण, विपणन और नारियल एवं मूल्य वर्धित उत्पादों के निर्यात में सहायता देकर भारत को नारियल के उत्पादन, उत्पादकता, प्रसंस्करण एवं निर्यात में अग्रणी बनाना।
    कृषि मंत्री ने कहा कि देश मे नारियल उत्पादन मे वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013-15 मे 42,104 मिलियन नट्स का उत्पादन हुआ जबकि वर्ष 2015-17 के दौरान 44,405 मिलियन नट्स का उत्पादन हुआ। यह बड़ी उपलब्धि है कि नारियल के उत्पादों का निर्यात वर्ष 2011-14 में 3017.30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2014-17 में 4846.36 करोड़ रुपये हुआ जोकि 60.62ऽ की वृद्धि है। वर्ष 2016 की शुरुआत में ही भारत से मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका को नारियल तेल का निर्यात करने लगा है जहां से हम पिछले वर्षों में आयात कर रहे थे।
     डेसिक्केटड नारियल का भी भारत से यह पहली बार वर्ष 2016 से बडी मात्राओं में यूएस और यूरोप में निर्यात हो रहा है। श्री सिंह ने कहा कि बिहार में वास भूमि में भी अच्छी तरह देखभाल करके नारियल की खेती की जा सकती है। अभी बिहार में 14,900 हेक्टेयर में नारियल की खेती होती है। लेकिन बोर्ड के अनुमान के मुताबिक बिहार में तकरीबन 50 हजारहेक्टेयर क्षेत्र में सिंचित स्थिति में नारियल की खेती हो सकती है।ऐसे में किसान प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग लेने वाले किसान नारियल की खेती की ओर उन्मुख हो सकेंगे। 
   साथ ही नारियल के उत्पादन में बढ़ोतरी होने पर राज्य में लोगों को रोजगार मिल सकेगा। नारियल आधारित विभिन्न उत्पाद जैसे नारियल चिप्स, नारियल दूध, नारियल शक्कर, नारियल नीरा, डाब, नारियल शहद नारियल गुड़, नारियल दूध शेक, नारियल स्नैक्स विर्जिन नारियल तेल, नारियल नेचुरल क्रीम, नीरा कुकीज समेत अन्य उत्पादों के बनाने में काफी लोगों को रोजगार मिलेगा।
     कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में नारियल से जुडी योजनाओं को लागू करने के लिए वर्ष 2014 से वर्ष 2017 तक कुल 409.01 लाख रुपए नारियल विकास बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए हैं। बिहार में नारियल की खेती के विस्तारण के लिए ‘नारियल के अधीन क्षेत्र विस्तार’ योजना के लिए प्राथमिकता दे रहे हैं। इस योजना के अधीन नारियल के नए रोपण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
     नारियल खेती के वैज्ञानिक तरीकों का निदर्शन करने के लिए ‘निदर्शन प्लाटों की स्थापना’ योजना के लिए वर्ष 2017-18 के दौरान 46.25 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं।

Friday, 26 January 2018

अब मनरेगा के तहत क्षमता सृजन पर बल

     नई दिल्‍ली। महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना का उद्देश्‍य सतत विकास के लिए उत्‍पादक और टिकाऊ परिसम्‍पत्ति का सृजन करके ग्रामीण आजीविका संसाधन आधार को मजबूत बनाना है। यह सुनिश्चित करने के लिए पिछले तीन वर्षों में समय पर कार्य सम्‍पन्‍न करने तथा कार्य की गुणवत्‍ता सुधारने पर काफी बल दिया गया है।

   कार्यक्रम को गुणवत्‍ता सम्‍पन्‍न तरीके से सुधारने के लिए समर्पित मनरेगा कर्मियों तथा सामुदायिक संसाधन व्‍यक्तियों के कौशल को उन्‍नत करने पर समान बल दिया गया है। मनरेगा के अंतर्गत अधूरे कार्य को पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
     इसलिए मंत्रालय कार्यक्रम प्रारंभ होने के बाद से कुल 4.54 करोड़ कार्यों में से 61.39 लाख अधूरे कार्यों को पूरा करने पर बल दे रहा है। कड़ी निगरानी और राज्‍यों के साथ सक्रिय सहयोग के साथ मंत्रालय वित्‍त वर्ष 2016-17 तथा चालू वित्‍त वर्ष में 1.02 करोड़ कार्य की पूर्णता सुनिश्चित करने में सफल रहा है। 
     कारगर निगरानी के जरिये कार्य पूरा होने में हमें सुधार की आशा है। कार्य के अलग-अलग स्‍वभाव और आकार तथा शामिल हितधारकों की अलग-अलग क्षमताओं को देखते हुए लक्षित समूह की आवश्‍यकताओं के अनुकूल अलग ट्रेनिंग मोड्यूल डोमेन विशेष शीर्ष संगठनों के समर्थन से विकसित किये गये है। ये प्रशिक्षण मोड्यूल सक्षम बैनर के अंतर्गत तकनीकी कर्मियों को प्रशिक्षित करने के आधार पर बनाये गये है। यह कार्यक्रम 19 जून, 2017 को माननीय ग्रामीण विकास मंत्री ने लांच किया था और 65,000 तकनीकी कर्मियों को कवर करते हुए 15 मार्च, 2018 को पूरा किया जाएगा। 
  लगभग 57,000 - (राज्‍य 521), (जिला 6669) तथा (ब्‍लॉक स्‍तर पर 48,934 तकनीकी) कर्मियों को जलसंभर, भूजल विज्ञान, पौधरोपण तथा एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे विषयों के साथ परियोजना नियोजन तथा निगरानी के लिए दूरसंवेदी और जीआईएस उपायों के इस्‍तेमाल के बारे में क्षमता सम्‍पन्‍न बनाया गया है। इस व्‍यापक कार्य में राष्‍ट्रीय दूरसंवेदी केन्‍द्र हैदराबाद तथा केन्‍द्रीय भूजल बोर्ड ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ सहयोग किया।
    मनरेगा श्रमिकों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना महत्‍वपूर्ण क्षेत्र है। कार्य नियोजन तथा कार्य की समय से निगरानी और ग्राम पंचायत स्‍तर पर तकनीकी संसाधनों की उपलब्‍धता की खाई को पाटकर परिसम्‍पत्ति की गुणवत्‍ता और टिकाऊ अवधि सुधार के लिए 6,367 अकुशल कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। यह स्‍थानीय युवा (10वीं पास) हैं और मनरेगा श्रमिक परिवार से आते है।
      सुपरवाइजरों की भी पहचान की गई है और उन्‍हें 90 दिन का आवासीय प्रशि‍क्षण प्रदान किया गया है, उनका मूल्‍यांकन किया गया है और 150 रुपये दैनिक वजीफे सहित 62,040 रुपये प्रति व्‍यक्ति की लागत से प्रशिक्षित करने के बाद उन्‍हें प्रमाणित किया गया। मंत्रालय ने लागत में एकरूपता लाने, चोरी रोकने और कार्य की गुणवत्‍ता सुधारने के लिए रोजगार के लिए ग्रामीण दरों का उपयोग करते हुए अनुमान गणना के लिए सॉफ्टवेयर (सिक्‍योर) अपनाकर तकनीकी विशेषता कार्य और कार्य प्रवाह की बारीकियों के माध्‍यम से अनुमानों को मानक रूप देने के लिए कदम उठाये हैं।
     मंत्रालय ने सिक्‍योर पर राज्‍य जिला तथा ब्‍लॉक स्‍तर पर संसाधन व्‍यक्तियों पर प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया है। 01 अप्रैल, 2018 से मनरेगा के अंतर्गत सभी अनुमान कार्यक्रम प्रबंधन सूचना प्रणाली से सिक्‍योर सॉफ्टवेयर को इस्‍तेमाल करके लगाया जाएगा। प्रशासकीय और वित्‍तीय रूप से स्‍वतंत्र सामाजिक लेखा इकाइयों की स्‍थापना और समर्पित संसाधन व्‍यक्तियों के प्रशिक्षण के जरिये अधिसूचित लेखा मानकों के अनुरूप सामाजिक लेखा के लिए संस्थागत व्‍यवस्‍था को मजबूत बनाना सुनिश्चित किया गया। 
     राज्‍य, जिला तथा ब्‍लॉक स्‍तर पर इन स्‍वतंत्र सामाजिक लेखा इकाइयों के 3760 व्‍यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया है, उनका मूल्‍यांकन किया गया है और सामाजिक लेखा पर 30 दिन का सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने पर टाटा समाज विज्ञान संस्‍थान द्वारा प्रमाणित किया गया है। सामाजिक लेखा कार्य के लिए ग्रामीण संसाधन व्‍यक्ति के रूप में महिलाओं के स्‍वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाये गये हैं। अब तक ग्राम पंचायत स्‍तर पर सामाजिक लेखा कार्य करने के लिए चार दिनों के प्रशिक्षण मोड्यूल के अंतर्गत 4700 महिला स्‍वयं सहायता समूहों के सदस्‍यों को प्रशिक्षित किया गया है।
     पारदर्शिता लाने और कार्यक्रम की व्‍यापकता बनाने के लिए मंत्रालय मनरेगा सम्‍पत्ति संबंधी आंकड़ों को देखने, उनका विश्‍लेषण करने तथा उनकी संभावनाओं के लिए जीआईएस आधारित जियो मनरेगा समाधान लागू कर रहा है। पूरे देश में अभी तक 2.34 करोड़ सम्‍पत्तियों को जियोटैग किया गया है। मंत्रालय अब 01 नवम्‍बर, 2017 से 31 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों में जियोमनरेगा चरण-3 प्रारंभ किया है।
    जियोमनरेगा चरण-2 के अंतर्गत तीन चरणों पर जियोटैगिग का कार्य किया जा रहा है। ये चरण हैं – (1) कार्य प्रारंभ होने से पहले, (2) कार्य के दौरान, (3) कार्य पूरा होने पर। 21-22 अगस्‍त, 2017 को राज्‍य संसाधन व्‍यक्तियों के लिए राष्‍ट्रीय ओरिएंटेशन कार्यशाला तथा प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसके बाद अब तक राज्‍य, जिला, ब्‍लॉक तथा ग्राम पंचायत के 2,69,075 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। 
    मनरेगा के अंतर्गत राष्‍ट्रीय संसाधन प्रबंधन कार्यों के प्रभाव का जायजा लेने के लिए नई दिल्‍ली के आर्थिक विकास संस्‍थान द्वारा किये गये अध्‍ययन में प्रभाव दिखने लगे हैं। 21 राज्‍यों के 30 जिलों से प्राप्‍त प्राथमिक और द्वितीयक डाटा बताते है कि मनरेगा के अंतर्गत  फसल में तेजी और‍ विविधता से ग्रामीण परिवार की आय बढ़ी है। 76 प्रतिशत परिवारों का कहना है कि मनरेगा के अंतर्गत बनाई गई सम्‍पत्तियां बहुत अच्‍छी/अच्‍छी हैं। केवल 0.5 प्रतिशत लाभार्थियों ने माना कि सम्‍पत्तियों की गुणवत्‍ता संतोषजनक नहीं है।

जन केन्द्रित नीतियां बनाने के लिए कठिन प्रयोग आधारित शोध की जरूरत

      नई दिल्‍ली। उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि हमें अच्‍छी जन केन्द्रित नीतियां बनाने के लिए कठिन प्रयोगआधारित शोध की आवश्‍यकता है।

  उपराष्‍ट्रपति नई दिल्‍ली में डॉ. साधना पांडे द्वारा लिखित पुस्‍तक ‘स्‍थानीय स्‍वशासन में आधी आबादी’ का लोकार्पण करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे।
    उपराष्‍ट्रपति ने ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए चुनी गई महिला प्रतिनिधियों के बारे में किये गये सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला दिया। 
 उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि इन पदों पर निर्वाचित अधिकतर महिलाएं 26-36 वर्ष की आयु की हैं, विवाहित है, छोटे परिवारों में रह रही हैं। उन्‍होंने माध्‍यमिक शिक्षा पूरी की है और मध्‍यम आय वर्ग से आती है। सभी उम्र और आयु समूह की महिलाओं ने राजनीति सहित सभी क्षेत्रों में महिलाओं के आगे बढ़ने के लिए शिक्षा को सबसे महत्‍वपूर्ण माना।
    उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि युवा पीढ़ी स्‍वास्‍थ्‍य, पर्यावरण, नियोजित मातृत्‍व तथा आर्थिक स्‍वतंत्रता जैसे विकास के विषयों पर फोकस करने की आवश्‍यकता पर जागरूक दिखी। युवा पीढ़ी ने आधुनिकता के प्रति अधिक खुलापन दिखाया, लेकिन साथ ही साथ यह भी कहा कि अतीत को नहीं भूलना चाहिए। अधिकतर महिलाओं ने माना कि समाज में पुरूषों का प्रभुत्‍व बना हुआ है। अधिकतर महिलाओं ने जागरूकता बढ़ाने के लिए रेडियो और टेलीविजन के महत्‍व को स्‍वीकार किया, लेकिन यह महसूस भी किया कि कुछ फिल्‍में युवा दर्शकों के लिए उचित नहीं हैं। 
     उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि महिलाओं में पुरूष के साथ-साथ आगे बढ़ने की नई संभावनाओं को लेकर जागरूकता दिखी। सामान्‍य धारणा यह थी कि अधिकारियों और राजनीतिक लोगों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए और अधिक काम किया जाना चाहिए। 
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि प्रयोग आधारित अध्‍ययन में स्‍थानीय स्‍तर पर अधिकार के पदों पर पहुंची ग्रामीण महिलाओं की आवाज सुनाई देती है। उन्‍होंने नीति निर्माताओं से कहा कि वे महिला प्रतिनिधियों की सोच को समझें तथा शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, पोषाहार, सूचना आदान-प्रदान, आर्थिक स्‍वतंत्रता तथा सशक्तिकरण जैसी महत्‍वपूर्ण समस्‍याओं का समाधान निकालें। 
   उपराष्‍ट्रपति ने डॉ. साधना पांडे के प्रयासों की सराहना की और आशा व्‍यक्‍त की वह और उनके जैसे अन्‍य शोधकर्ता देश के अन्‍य भागों में इसी तरह का सर्वेक्षण करेंगे।

Thursday, 25 January 2018

प्रधानमंत्री श्रम पुरस्‍कार घोषित, 50 श्रमिकों को श्रम पुरस्‍कार

    नई दिल्ली। सरकार ने आज वर्ष 2016 के लिए प्रधानमंत्री श्रम पुरस्‍कारों की घोषणा की है। ये पुरस्‍कार विभागीय उपक्रमों, केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र की इकाइयों में कार्यरत 50 श्रमिकों को प्रदान किए जाएंगे।

   इन पुरस्‍कारों हेतु चयन उन्‍हीं उपक्रमों से किया जाता है जिनमें 500 या उससे ज्‍यादा श्रमिक कार्यरत हों। हालांकि इस वर्ष प्रदान किये जाने वाले श्रम पुरस्‍कारों की कुल संख्‍या 32 है, लेकिन 3 महिलाओं सहित 50 श्रमिक ये पुरस्‍कार प्राप्‍त करेंगे। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के 34 श्रमिक और निजी क्षेत्र के 16 श्रमिक शामिल हैं।
     श्रम पुरस्‍कार चार श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं। इनमें ‘श्रम रत्‍न पुरस्‍कार’, ‘श्रम भूषण पुरस्‍कार’, ‘श्रम वीर/श्रम वीरांगना’ और ‘श्रम श्री/श्रमदेवी पुरस्‍कार’ शामिल हैं। इस वर्ष प्रतिष्ठित श्रम रत्‍न पुरस्‍कार के लिए किसी भी नामांकन को उपयुक्‍त नहीं पाया गया। सेल/भेल और टाटा स्‍टील लिमिटेड के 12 श्रमिकों को श्रम भूषण पुरस्‍कार देने की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत 1,00,000 रुपये का नकद पुरस्‍कार और एक सनद दिया जाता है। 
     नेवल डाकयार्ड, आयुध फैक्‍ट्री, राष्‍ट्रीय इस्‍पात निगम, टाटा स्‍टील, हिन्‍डालको इंडस्‍ट्रीज, पारादीप फॉस्‍फेट लिमिटेड, ब्रह्मोसएयर स्‍पेस के 18 श्रमिक श्रम वीर/श्रम वीरांगना पुरस्‍कार के रूप में 60 हजार रुपये नकद और एक सनद प्राप्‍त करेंगे। 
    सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, नेवल शिप रिपेयर यार्ड, टाटा मोटर, सूरत लिग्‍नाइट पॉवर प्‍लांट, लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड आदि के 20 श्रमिकों को श्रम श्री/श्रम देवी पुरस्‍कार के रूप में 40,000 रुपये नकद और एक सनद प्रदान किया जाएगा। 
     श्रम और रोजगार मंत्रालय हर वर्ष प्रधानमंत्री श्रम पुरस्‍कारों की घोषणा करता है।ये पुरस्‍कार 500 या ज्‍यादा संख्‍या वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, केन्‍द्र और राज्‍य सरकार के विभागीय उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र की इकाइयों से श्रमिकों का चयन करके उनके असाधारण कार्यों, नवोन्‍मेष क्षमता, उत्‍पादकता के क्षेत्र में उनके उल्‍लेखनीय योगदान और अत्‍यधिक साहस दिखाने तथा चौकस रहने के लिए दिए जाते हैं।

अंतरिक्ष, सूचना एवं प्रसारण के क्षेत्र में आसियान-भारत सहयोग

    नई दिल्ली। भारत-आसियान सहयोग की 25वीं वर्षगांठ के उत्सव के अवसर पर आयोजित आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन (एआईसीएस) की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यामार की स्टेट कॉउंसलर डॉ ऑंग सान सू ची, वियतनाम के प्रधानमंत्री न्यूयेन शुआन फुक और फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो रोआ डुटरेट के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें की।

    आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन में भाग लेने और इस वर्ष 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनना स्वीकार करने के लिये भारत आगमन पर प्रधानमंत्री ने तीनों नेताओं का स्वागत किया। 
   म्यामार की स्टेट कॉउंसलर ऑंग सान सूची के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठक में परस्पर हित के विभिन्न विषयों, द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ प्रधानमंत्री मोदी की सितंबर 2017 में म्यामार यात्रा के दौरान लिये गये महत्वपूर्ण निर्णयों को आगे बढ़ाने के विषय पर बातचीत हुई।
    प्रधानमंत्री फुक के साथ बैठक में दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग के तहत द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के साथ भारत-प्रशान्त क्षेत्र में सामुद्रिक सहयोग, रक्षा,तेल एवं गैस, व्यापार एवं निवेश जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। दोनों नेता इस बात पर सहमत थे कि इस यात्रा के दौरान मंजूर किये गये दो समझौते - सूचना एवं प्रसारण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने एवं आसियान-भारत अंतरिक्ष सहयोग के तहत वियतनाम में डेटा रिसेप्शन एवं ट्रैकिंग सेंटर और डेटा प्रोसेसिंग केंद्र की स्थापना भारत-वियतनाम संबंधों को और मजबूती प्रदान करेंगे। 
     उन्होंने 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के कर्ज की व्यवस्था के काम करना शुरू करने पर भी संतोष जताया जिसके अन्तर्गत ख्र्ःच्र् को अपतटीय गश्त नौकाओं (ओपीवी) के उत्पादन का ठेका दिया गया है। उन्होंने फैसला लिया कि 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की एक और लॉइन ऑफ क्रेडिट भी जल्द ही चालू कर दी जायेगी। राष्ट्रपति डुटरेट के साथ बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा के साथ दोनों नेताओं की मनीला में नवंबर 2017 में हुई बैठक के बाद वैश्विक एवं क्षेत्रीय परिस्थितियों में आये बदलावों की भी समीक्षा की।
    इस बात पर भी सहमति बनी की दोनों देशों के संबंधों में आयी गतिशीलता को और बढ़ाया जायेगा विशेषकर के आधारभूत सुविधाओं के विकास के क्षेत्र में। दोनों नेता इस बात पर भी सहमत हुये कि भारत की एक्ट-ईस्ट पॉलिसी और फिलीपींस के बिल्ड-बिल्ड-बिल्ड कार्यक्रम के तहत दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने के अनेकों अवसर हैं। 
     दोनों नेताओं की उपस्थिति में भारत-निवेश और फिलीपींस के निवेश बोर्ड के बीच एक सहमति पत्र का भी आदान-प्रदान किया गया। इन तीनों ही बैठकों में मेहमान नेताओं ने भारत-प्रशान्त क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिये आसियान-भारत संबंधों के महत्व पर जोर दिया और एआईसीएस में होने वाली चर्चा के प्रति आशान्वित दिखे।

Wednesday, 24 January 2018

कर अदा करना कर्तव्‍य समझना चाहिए

    हैदराबाद। उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि प्रत्‍येक नागरिक को कर अदायगी को अपना पावन कर्तव्‍य समझाना चाहिए।

  उन्‍होंने कहा कि अगर सरकार को पर्याप्‍त राजस्‍व प्राप्‍त नहीं होगा,तो विकास तथा कल्‍याणकारी योजनाओं को नुकसान पहुंचेगा। वे आज वित्‍त, विपणन और कराधान के क्षेत्र में मौजूदा चुनौतियां विषय पर हैदराबाद में केशव मेमोरियल कॉलेज में एक राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी को संबोधित कर रहे थे।
   इस अवसर पर तेलंगाना के उपमुख्‍यमंत्री मोहम्‍मद महमूद और अन्‍य गणमान्‍य नागरिक भी उपस्थित थे। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि कर चोरी के मामलों में कड़ाई बरतनी चाहिए, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी कर्मचारी करदाताओं का अनावश्‍यक शोषण ना करें। उन्‍होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता से जिम्‍मेदारी तय होगी और सरकार के राजस्‍व में वृद्धि होगी।
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि वस्‍तु एवं सेवा कर का लागू होना स्‍वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा कर सुधार है और अब भारत ‘एक देश एक बाजार’ है। उन्‍होंने कहा कि जीएसटी ने देश में अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली के स्‍वरूप को बदला है और अब राज्‍य सरकारों तथा केन्‍द्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले कई करों की जगह एकल कर ने ले ली है। इससे व्‍यापार सुगमता को बढ़ावा मिला है और ये देश में आपसी साझेदारी की विजय है।
      भारत में सकल घरेलू उत्‍पाद तथा कर का अनुपात वित्‍त वर्ष 2017 में 16.6 प्रतिशत था, जबकि इसी अवधि में अमरीका में 26 प्रतिशत, चीन में 20.1 प्रतिशत और ओईसीडी देशों में 34.3 प्रतिशत था। भारत को सकल घरेलू उत्‍पाद की तुलना में कर संग्रहण को बढ़ावा देने की आवश्‍यकता है, ताकि 21वीं शताब्‍दी की सरकार को पर्याप्‍त निधि उपलब्‍ध हो सके और सरकार नागरिकों को बुनियादी सार्वजनिक सेवाएं तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर सके।
      वित्‍त वर्ष 2018 में प्रत्‍यक्ष कर संग्रहण बढ़कर 18.2 प्रतिशत हो गया है। यह बढ़ोतरी प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष करदाताओं की संख्‍या बढ़ने के कारण हुई है। 5.9 मिलियन करदाताओं ने वस्‍तु एवं सेवा कर के तहत पंजीकरण करवाया है और वित्‍त वर्ष 2017 में 28.2 मिलियन लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया। विमुद्रीकरण, काले धन पर विशेष जांच दल का गठन और बेनामी लेनदेन अधिनियम 1988 की अधिसूचना जैसे कई कदमों के कारण बड़ी संख्‍या में आर्थिक गतिविधियां कर के दायरे में आई हैं।
     उन्‍होंने कहा कि काले धन के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहनी चाहिए। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भविष्‍य में मौजूदा बढ़ता हुआ मध्‍यवर्ग भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्‍वपूर्ण साबित होगा। अ‍ब समय आ गया है कि हमें जनसांख्यिकीय लाभ लेने के लिए युवाओं के लिए अधिक से अ‍धिक रोजगार सृजन करना चाहिए। 
     उन्‍होंने कहा कि लाखों की संख्‍या में छात्रों का डिग्री हासिल करना पर्याप्‍त नहीं है। हमें उनको सिर्फ जीविकोपार्जन के लिए ही कौशल नहीं देना बल्कि उन्‍हें इस योग्‍य बनाना है कि वे दैनिक जीवन में आने वाली चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपट सकें। उन्‍होंने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली में युवाओं को नैतिकता और मूल्‍यों के प्रति प्रतिबद्ध बनाने की क्षमता होनी चाहिए।
   छात्रों की शिक्षा का विषय कुछ भी हो, लेकिन उन्‍हें देश की प्राचीन संस्‍कृति और मूल्‍यों के प्रति सजग रहना चाहिए तथा वसुधैव कुटुम्बकम्में विश्‍वास रखना चाहिए।

भारत की वैश्विक रोडमैप की खोज

   दावोस। केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास(स्वतंत्र प्रभार),प्रधानमंत्री कार्यालय,कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अतंरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि विश्व आज विभिन्नता और विविधता की जगह एक-रूप मानकों के साथ नए वैश्विक रोडमैप को खोज रहा है।

  श्री सिंह स्विटजरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच के अवसर पर कमजोर शहरो से नवीनीकरण तक पर पैनल वार्ता में संबोधन रहे थे।
   उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में स्थानीय परिदृश्य को दृष्टिगोचर बनाना संभव नहीं है, उदाहरण के लिए स्विटजरलैंड की जनसंख्या केवल 8 मिलियन है जो दिल्ली की जनसंख्या से भी कम है किन्तु सरकार और नागरिकों की प्रतिभागिता के साथ प्रगतिशील विश्व में अधिकतम समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
   पैनल के अन्य सदस्यों में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति बेरसेट शामिल थे। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अन्य कारणों के अलावा विश्व में 239 से अधिक शहरों को,प्रदूषण, टकराव, आतंकवाद, बेरोजगारी और बिजली की कमी की वजह से कमजोर श्रेँणी में वर्गीकृत किया गया था। उन्होंने कहा शहरी क्षेत्रो में सुधार और जनसंख्या को बेहतर सुविधाएं देने की आवश्यकता है।
      भारत के पूर्वोत्तर राज्यो में कमजोर शहरों के अनुभव के बारे में पूछे जाने पर उन्होने बताया कि मोदी सरकार के गत साढे तीन साल के कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में स्थायित्व आया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा आतंकवाद और कमजोरवाद का विकास में कमी और असक्षम राजनीतिक नेतृत्व से पारस्परिक संबंध है। 
      उन्होंने कहा भ्रष्टाचार न सिर्फ राज्य के नेतृत्व नुकसान पहुंचाता है बल्कि राजकोष में भी सेंध लगाता है। इसका बेहतर वातावरण के निर्माण में प्रयोग किया जा सकता है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आगे कहा कि युवाओं में आकांक्षा की वृद्धि एक स्वागत योग्य विकास है। सर्वाधिक आदर्श स्थितियों में भी बेहतर करने की आशा हमेशा बनी रहती है। कोई भी स्थिति स्थायी नहीं होती।

लाल किले पर 26 से 31 जनवरी, 2018 तक भारत पर्व

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस-2018 समारोह के एक भाग के रूप में दिल्ली स्थित लाल किले पर 26 से 31 जनवरी, 2018 तक भारत पर्व कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। 

   कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में देश भक्ति की भावना जागृत करना, देश के विविधता पूर्ण सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना और जनभागीदारी को बढ़ाना सुनिश्चित करना है। भारत पर्व कार्यक्रम के लिए पर्यटन मंत्रालय नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करेगा।
   कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणो में गणतंत्र दिवस परेड की झांकियां और सशस्त्र बलो के बैंड का प्रदर्शन, कई राज्यों का खाना, हस्तशिल्प मेला, देश के विभिन्न भागो से सांस्कृतिक प्रदर्शन और विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय(डीएवीपी) द्वारा फोटो प्रदर्शनी का आयोजन सम्मिलित है। 
   कार्यक्रम में दौरान सांस्कृतिक प्रदर्शन में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा परंपरागत और आदिवासी नृत्य और संगीत के प्रदर्शन के साथ-साथ देशभर से विभिन्न सांस्कृतिक मंडलियों का प्रदर्शन सम्मिलित होगा। फूड कोर्ट में राज्यों और संघ शासित प्रदेशों,नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वैंडर्स ऑफ इंडिया द्वारा भारत के विभिन्न क्षेत्रों के परंपरागत खाने के साथ-साथ होटल प्रबंधन संस्थान और आईटीडीसी द्वारा भी स्टॉल लगाए जाएगे।
      हस्तशिल्प मेले में 50 स्टॉल द्वारा देश की विविध हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया जायेगा। इस प्रबंधन राज्य सरकारों और वस्त्र मंत्रालय द्वारा हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय के द्वारा किया जायेगा। इसके साथ ही थीम स्टेट मंडप में प्रत्येक राज्य द्वारा अपनी-अपनी क्षमताओं के प्रदर्शन के साथ-साथ पर्यटन उत्पादों का प्रदर्शन भी किया जायेगा। कार्यक्रम में डीएवीपी नया भारत हम करेके रहेंगे पर एक प्रदर्शनी का आयोजन भी करेगा।
    भारत के विभिन्न राज्यो के खान-पान को प्रोत्साहित करने के लिए सजीव कुकरी प्रदर्शन क्षेत्र भी लगाया जायेगा। भारत पर्व कार्यक्रम का उद्घाटन 26 जनवरी 2018 को शाम 5 बजे किया जायेगा और यह जनता के लिए रात 10 बजे तक खुला रहेगा। 27 से 31 जनवरी 2018 तक कार्यक्रम का आयोजन दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक होगा। कार्यक्रम में प्रवेश निशुल्क है,हांलाकि कार्यक्रम में प्रवेश के लिए पहचान का प्रमाण प्रदर्शित करना होगा।

Tuesday, 23 January 2018

उद्यमिता बढ़ाने के लिए एसएमई आर्थिक प्रणाली को प्रोत्‍साहन

    नई दिल्ली। वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने आसियान देशों के मंत्रियों तथा विदेश राज्‍य मंत्री जनरल (डॉ.) (सेवानिवृत्त) वी के सिंह के साथ संयुक्‍त रूप से आसियान-भारत व्‍यवसाय तथा निवेश सम्‍मेलन और एक्‍सपो का उद्घाटन किया।

   आसियान देशों के मंत्रियों में ब्रुनेइ के प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री तथा द्वितीय विदेश और व्‍यापार मंत्री लिम जॉक सेंग, इंडोनेशिया के व्‍यापार मंत्री इनगैरसियास्‍तो लुकिता, म्‍यांमार के उद्योग मंत्री उ खिन माउंग चो, कंबोडिया के विदेश मंत्रालय में से‍क्रेट्री ऑफ स्‍टेट छुओन दारा, फिलीपींस के व्‍यापार और उद्योग विभाग की अंडर सेक्रेट्री सुश्री नौरा काकिलाला तेरादो, थाइलैंड की वाणिज्‍य उपमंत्री सुश्री चुटीमा बिनयाप्रफसारा, वियतनाम के उद्योग और व्‍यापार उपमंत्री कावो क्‍योक हुंग तथा आसियान के महासचिव लिम जॉक होइ इस अवसर पर उपस्थित थे। 
   उद्घाटन सत्र में साझी समृद्धि के लिए परस्‍पर व्‍यवसाय और निवेश को प्रोत्‍साहन देने के विषय पर संवाद में पूर्व के देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों का उद्देश्‍य क्षेत्र में द्विपक्षीय व्‍यापार और निवेश को बढ़ाना है। सत्र में विनिर्माण क्षेत्र में भारत और आसियान देशों के व्‍यापार को प्रोत्‍साहित करने, क्षेत्र में उद्यमिता बढ़ाने के लिए एसएमई आर्थिक प्रणाली को प्रोत्‍साहित करने तथा नए विचार पैदा करने के लिए स्‍टार्ट अप संस्‍कृति प्रोत्‍साहित करने के लिए व्‍यापार सहायता कदमों पर बल दिया गया।
    वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने आसियान देशों के मंत्रियों को उनकी उपस्थिति के लिए धन्‍यवाद देते हुए कहा कि भारत और आसियान देशों के संबंध गहरे और मजबूत हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत आसियान देशों के साथ भविष्‍य में सहयोग बढ़ाने की ओर देख रहा है और अगले चार दिनों के लिए सभी कार्यक्रम साझे मूल्‍यों और समान नियति का उत्‍सव मानने के लिए तैयार हैं।
    उन्‍होंने कहा कि इस आयोजन से अगले 25 वर्षों के भारत-आसियान संबंधों का खाका तैयार करने में मदद मिलेगी। आसियान-भारत एक्‍सपो में भारत के व्‍यापार और सेवा क्षेत्र तथा आसियान क्षेत्र की श्रेष्‍ठता प्रदर्शित की गई है।
      एक्‍सपो में अवसंरचना, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और इंजीनियरिंग, आईसीटी, स्‍वास्‍थ्‍य, पर्यटन, पर्यावरण, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, वित्त और बैंकिंग, लॉजिस्टिक तथा रिटेल क्षेत्र के खरीदार और प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। एक्‍सपो में आसियान देशों के व्‍यवसाय तथा कार्यकारी अधिकारी भाग ले रहे हैं, आसियान देश के पैवेलियन, भारतीय राज्‍य तथा निर्यात संवर्धन परिषद के पैवेलियन हैं।
      आयोजन के दूसरे दिन यानी 23 जनवरी, 2018 को सेवा क्षेत्र, क्षेत्रीय वैल्‍यू चेन और कनेक्टिविटी, कृषि, व्‍यापार तथा निवेश जैसे पारस्‍परिक हित के विषयों पर चर्चा की जाएगी। तकनीकी सत्र की अध्‍यक्षता इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स तथा सूचना प्रौद्योगिकी और विधि और न्‍याय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद, खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर द्वारा की जाएगी और वित्त तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्री अरुण जेटली समापन सत्र को संबोधित करेंगे।

धर्म और अध्यात्म का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण

    वडोदरा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वडोदरा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 66वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। 

  इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि महाराजा सयाजीराव गायकवाड ने इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उच्चतर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की थी।
  उन्होंने डॉ. बी आर अंबेडकर सहित समाज के वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली लोगों को समर्थन एवं प्रोत्साहन दिया था। उस वक्त ऐसी व्यापक दृष्टि रखने वाले बहुत कम लोग थे।
  राष्ट्रपति ने आर्थिक रूप से निर्बल वर्ग के छात्रों के लिए अध्यावृत्तियों को संस्थागत बनाने के लिए महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित एवं पिछड़े वर्गों के विकास की दिशा में इस विश्वविद्यालय के छात्रों का योगदान सयाजीराव के आदर्शों के अनुरूप बना रहेगा। बाद में राष्ट्रपति ने गोंडल में अक्षर डेरी की 150वीं जयंती के समारोह में भी भाग लिया। 
    राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे पहले भी ‘अक्षर देरी’ आने का अवसर मिला है। राष्ट्रपति के रूप में यहां पहली बार आकर और इस समारोह में शामिल होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश का यह सौभाग्य रहा है कि, समय-समय पर, अनेक संतों ने समाज सेवा और मानव कल्याण को ही धर्म और अध्यात्म का मुख्य उद्देश्य बनाया है। उन्होने अपने श्रद्धालुओं में सेवा भावना का प्रसार किया है। कई संतों ने ऐसी संस्थाएं बनाई हैं, जो लोक-कल्याण के लिए अनेक क्षेत्रों में निरंतर काम कर रही हैं।
   राष्ट्रपति ने कहा कि मानवता की नि:स्वार्थ सेवा के लिए सभी श्रद्धालुओं को प्रेरित करने वाली स्वामीनारायण संस्था द्वारा आयोजित ‘अक्षर देरी’ के 150वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर, मैं इस संस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को बधाई देता हूं। देश-विदेश के कोने-कोने से इतनी बड़ी संख्या में आये हुए श्रद्धालुओं के इस समूह को मैं मानव-कल्याण के लिए तत्पर एक सेना के रूप में देखता हूं।राष्ट्रपति ने कहा कि यह स्थान श्री गुणातीतानन्द स्वामी का समाधि स्थल है। मैं स्वामीजी के प्रगतिशील विचारों और कार्यों का प्रशंसक रहा हूं। उन्होंने अंध-श्रद्धा का हमेशा विरोध किया। उन्होंने जाति, वर्ग और ऊंच-नीच से हमेशा परहेज किया, और सबके कल्याण के लिए काम किया।
   राष्ट्रपति ने कहा कि अध्यात्म की बुनियाद पर समाज सेवा करना इस संस्था का उद्देश्य है, यह जानकर, मुझे बहुत खुशी होती है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति ‘भारतरत्न’ डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम भी इस संस्था की आध्यात्मिकता और मानव-कल्याण के कार्यों से बहुत प्रभावित थे।
    राष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात की धरती ने, व्यावहारिकता और अध्यात्म के समन्वय के कई उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। महात्मा गांधी ने इसी समन्वय के साथ अध्यात्म की बुनियाद पर आधारित राजनीति की मिसाल पेश की। इसी कड़ी में दूसरा बड़ा उदाहरण है, गांधी जी को अपना पथ-प्रदर्शक मानने वाले, और भारत को वर्तमान स्वरुप प्रदान करने वाले लौहपुरुष, सरदार वल्लभभाई पटेल का। देश के भूतपूर्व प्रधानमन्त्री मोरारजी देसाई का अनुशासित और नैतिकतापूर्ण जीवन भी इसी समन्वय का एक और उदाहरण है।
  राष्ट्रपति ने कहा कि समाज सेवा और अध्यात्म का समन्वय करते हुए, स्वामीनारायण संस्था ने, मानव कल्याण के अनेकों प्रकल्प चलाए हैं। इस संस्था ने सैकड़ों मंदिर और केंद्र दुनियां भर में स्थापित किए हैं। लेकिन इन मंदिरों की एक खासियत है, जो इन्हे अलग पहचान देती है। ये सभी मंदिर, व्यक्ति और समाज के बहु-आयामी विकास के लिए काम करते हैं। इन मंदिरों में चरित्र-निर्माण और नि:स्वार्थ समाज सेवा पर ज़ोर दिया जाता है।
   राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे बताया गया है कि पूरी दुनियां में इस संस्था के लगभग दस लाख अनुयायी हैं और लगभग पचपन हजार कर्मठ स्वयं-सेवी हैं। सभी स्वयंसेवी नियमित रूप से मानव सेवा में अपना समय लगाते है। ये सभी लोग मिलकर, पूरी दुनियां में, लाखों लोगों को हमारे देश की संस्कृति और नैतिक आदर्शों से जोड़ रहे हैं।
      राष्ट्रपति ने कहा कि व्यक्ति के चरित्र से परिवार बनता है, परिवार से समाज बनता है और समाज से राष्ट्र बनता है। स्वामी नारायण संस्था द्वारा पवित्रता, नैतिकता और सेवा भाव पर आधारित शिक्षा देकर लोगों का चरित्र निर्माण किया जाता है। उन्हे जमीन से जुड़े प्रकल्पों में काम करने का अवसर दिया जाता है, मानव कल्याण के कार्यों में लगाया जाता है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि कमजोर वर्गों में शिक्षा का प्रसार करने के लिए इस संस्था द्वारा कई माध्यमों से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसी प्रकार, लोगों के कल्याण के लिए, स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंध किया जाता है। यह जानकर मुझे खुशी हुई है कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आप सब प्रयासरत हैं। सामुदायिक विकास के कार्यक्रमों द्वारा लोगों को सशक्त बनाने के लिए भी इस संस्था द्वारा योगदान दिया जा रहा है। अनेक प्राकृतिक आपदाओं के बाद, उन आपदाओं से प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाने में आप सबने सराहनीय योगदान दिया है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे बताया गया है कि दस दिनों तक चलने वाले इस समारोह में, विश्व-शान्ति के लिए एक महा-यज्ञ किया जायेगा। विश्व-शान्ति पर, आतंकवाद समेत, बहुत से खतरे मंडरा रहे हैं। अस्थिरता और तनाव से भरे हुए इस दौर में, विश्व-शांति के लिए किया जा रहा आप सबका यह संकल्प, सराहनीय है। मैं प्रत्येक भारत-वासी की ओर से इस संकल्प के सिद्ध होने की शुभकामनाएं देता हूं।
    राष्ट्रपति ने कहा कि इस समारोह में स्वच्छ भारत अभियान के विषय पर प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में योगदान देने के लिए मैं आप सबकी प्रशंसा करता हूं। राष्ट्रपति ने कहा कि इस समारोह के ज़रिये आप सब प्रेम, सौहार्द, समानता और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों का प्रसार कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों के लिए मैं आप सबकी विशेष सराहना करता हूं।
   राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे विश्वास है कि स्वामीनारायण संस्था, मानव कल्याण के अपने अभियानों में, निरंतर आगे बढ़ती रहेगी। आप सभी, आध्यात्मिक विकास और सेवा के अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हों, यही मेरी शुभकामना है।

Friday, 19 January 2018

सुगम्यता की 100 वेबसाइटों का लोकार्पण

   नई दिल्ली। दिव्यांगजनों के अधिकारिता के लिए एक अभूतपूर्व कदम के तहत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने आज यहां विभिन्न राज्य सरकारों/ केंद्र शासित प्रदेशों की 100 सुगम्य वेबसाइटों का सुगम्य भारत अभियान के अंतर्गत लोकार्पण किया।

   इसका लोकार्पण ‘सुगम्यता के विकास पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ के अवसर पर किया गया। सम्मेलन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री विजय सांपला और कृष्ण पाल गुर्जर भी उपस्थित थे। दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग की सचिव श्रीमती शकुंतला डी. गामलिन और सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय, इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नागरिक विमानन मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, रेल मंत्रालय, आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सम्मेलन में अपने विचार रखे तथा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सुगमता के कार्यान्वयन संबंधी अमूल्य सुझाव दिये।
   सुगम्य वेबसाइटें इस तरह की वेबसाइटें हैं, जहां दिव्यांगजन उनके आसान उपयोग से सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं, जानकारियों को समझ सकते हैं और वेबसाइटों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा दिव्यांगजन वेबसाइट में योगदान भी कर सकते हैं। दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग ने राज्य सरकारों/ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ‘वेबसाइट सुगम्यता परियोजना’ की शुरूआत की है।
    यह परियोजना इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन स्वायत्तशासी वैज्ञानिक सोसाइटी इआरएनईटी के जरिये सुगम्य भारत अभियान के तहत शुरू की गई है। इस प्रकार कुल 917 सुगम्य वेबसाइटें तैयार की जाएंगी और उनका वित्त पोषण किया जाएगा। परियोजना के तहत 100 सुगम्य वेबसाइटें तैयार कर ली गई हैं।
    सम्मेलन का उद्देश्य हाल में लागू हुए दिव्यांगजन अधिकार, 2016 के संदर्भ में राज्य सरकार के अधिकारियों सहित विभिन्न हितधारकों को सुगम्यता के संदर्भ में संवेदनशील और जागरुक बनाना है। सुगम्य भारत अभियान के तीन घटक हैं – पर्यावरण निर्माण, यातायात और सूचना एवं संचार ईको-प्रणाली सुगम्यता। मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि दिव्यांगजन हमारे समाज के अभिन्न अंग हैं और उनके कल्याण के लिए हमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। 
   उन्होंने कहा कि सुगम्य भारत अभियान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग का एक प्रमुख देशव्यापी कार्यक्रम है। अभियान का उद्देश्य देशभर के दिव्यांगजनों के लिए ऐसा माहौल करना है, जहां वे बाधारहित, सुरक्षित और सम्मानित जीवन व्यतीत कर सकें। श्री गहलोत ने कहा कि दिव्यांगजनों को सहायता उपकरण प्रदान करने के लिए उनके मंत्रालय ने देशभर में लगभग 5800 शिविरों का आयोजन किया था। 
   उन्होंने कहा कि इस तरह की सुगम्य वेबसाइटें दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए सरकारी नीतियों और योजनाओं की समुचित जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री विजय सांपला ने कहा कि आज हम आगे बढ़े हैं और सुगम्य भारत अभियान के तहत विभिन्न राज्य सरकारों/ केंद्र शासित प्रदेशों की 100 सुगम्य वेबसाइटों का लोकार्पण करके हमने सुगम्य भारत अभियान की तरफ कदम बढ़ाए हैं।
   उन्होंने कहा कि इस संबंध में दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग सराहनीय काम कर रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग ने कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं।
   उन्होंने कहा कि हमें दिव्यांगजनों को अधिकार-सम्पन्न बनाना होगा, ताकि वे सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें। श्रीमती शकुंतला डी. गामलिन ने राज्य सरकारों के विभागों से आग्रह किया कि वे भौतिक, संरचनात्मक और सूचना प्रौद्योगिकी इत्यादि सेवाएं प्रदान करते समय सुगम्यता मानकों को अपनाएं। दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती डॉली चक्रबर्ती ने कहा कि ग्रामीण सुगम्यता सुनिश्चित करना जरूरी है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में सुगम्यता आयोजना में बहुत अंतर होता है। 
  इसके अलावा बढ़ते शहरीकरण के युग में इस विषय पर बहुत कम चर्चा होती है। इआरएनईटी इंडिया परियोजना का संचालन कर रहा है, जिसका सुगम्य भारत अभियान के तहत दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग वित्त पोषण कर रहा है।
    वेबसाइटों की सूची में से 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अब तक 917 वेबसाइटें चुनी गई हैं। इस सूची को दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग के जरिये राज्य सामाजिक कल्याण विभागों ने उपलब्ध कराया है।
 सुगम्य वेबसाइट डिजाइन सिद्धांत :- उचित वैकल्पिक टेक्स्ट, कैपशन वीडियो, ऑडिया ट्रांसक्रिप्ट, सभी दस्तावेजों की सुगम्ता, अर्थ के लिए रंग पर निर्भर न रहें, विवरण सटीक हो और साफ तरीके से लिखा हो तथा आसानी से पढ़ने योग्य हो। सुगम्य वेबसाइटों की मौजूदा स्थिति :- वेबसाइटों की कुल संख्या - 917, विकास के अधीन - 244, विकसित – 208 और लाइव – 100 वेब कंटेंट सुगम्यता दिशा-निर्देश-डब्ल्यूसीएजी 2.0 :- वेबसाइटों को डब्ल्यूसीएजी 2.0 के अनुरूप सुगम्य बनाया गया है।
   इसे वर्ल्ड वाइड वेब के लिए मुख्य अंतर्राष्ट्रीय मानक संगठन वर्ल्ड वाइड वेब कंसर्टियम (डब्ल्यू3सी) के वेब सुगम्यता पहल के तहत तैयार किया गया है। दिशा-निर्देश के तहत सुगम्यता के तीन स्तर तय किये गए हैं, जिनके आधार पर वेबसाइटों को डिजाइन किया गया है।

सुरक्षित गर्भावस्‍था एक सामाजिक आंदोलन

   नई दिल्ली। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान (पीएमएसएमए) के जबरदस्‍त समर्थन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का दिल से आभार व्‍यक्‍त किया क्‍योंकि यह कार्यक्रम प्रसवपूर्ण जांच के संदर्भ में एक करोड़ के स्‍तर को पार कर चुका है। 

   केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री की परिकल्‍पना यह थी कि 9 महीने की गर्भावस्‍था के प्रतीक के तौर पर हर महीने की 9 तारीख गर्भवती महिलाओं को समर्पित होना चाहिए। उनके दृष्टिकोण को पूरा करने और देश भर में गर्भवती महिलाओं को व्‍यापक एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित करने के लिए पीएमएसएमए कार्यक्रम को 2016 में शुरू किया गया था। 
   श्री नड्डा ने कहा, 'प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत एक करोड़ से अधिक प्रसवपूर्व जांच की गई और इस महत्‍वाकांक्षी योजना के तहत हर महीने 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तायुक्‍त प्रसवपूर्व जांच की सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है। सुरक्षित गर्भावस्‍था अब हमारे देश में एक सामाजिक आंदोलन बन चुकी है।' 
    श्री नड्डा ने संतोष व्‍यक्‍त करते हुए आगे कहा कि यह कार्यक्रम भारत के दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने में सफल रहा है क्‍योंकि देश भर में की गई 1 करोड़ से अधिक जांच में से 25 लाख से अधिक जांच उच्‍च प्राथमिकता वाले जिलों में आयोजित किए गए। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा अधिक ध्‍यान देने के लिए पहचान इन जिलों की पहचान की गई है।
   श्री नड्डा ने कहा, 'हालांकि सभी राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने गर्भवती महिलाओं तक पहुंचने के लिए उल्‍लेखनीय प्रयास किए लेकिन नॉन-एम्‍पावर्ड एक्‍शन ग्रुप (ईएजी) राज्‍यों में महाराष्‍ट्र और एम्‍पावर्ड एक्‍शन ग्रुप राज्‍यों में राजस्‍थान ने सबसे अधिक जांच दर्ज की है। पीएमएसएमए केंद्र पर आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की जांच एक प्रसूति रोग विशेषज्ञ/चिकित्‍सक द्वारा उचित तरीके से की गई।' 
    जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री के आह्वान पर तत्‍पर होने और इस उल्‍लेखनीय उपलब्धि को हासिल करने के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के सभी डॉक्‍टरों के लिए भी हृदय से आभार व्‍यक्‍त किया। साथ ही उन्‍होंने सभी डॉक्‍टरों से आग्रह किया कि वे'आईप्‍लेजफॉर9' के लिए अपनी प्रतिबद्धता जारी रखें और देश में मातृ एवं शिशु मृत्‍यु दर को घटाने के प्रयास को बढ़ावा दें।
    गौरतलब है कि मन की बात के 31 जुलाई 2016 के एपिसोड में प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों से आग्रह किया था कि वे साल में 12 दिन इस कार्यक्रम को समर्पित करें और हर महीने की 9 तारीख को पीएमएसएमए के तहत स्‍वैच्छिक सेवाएं प्रदान करें। विभिन्‍न राज्‍यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 12,800 से अधिक सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर हर महीने की 9 तारीख को पीएमएसएमए सत्र आयोजित किए जा रहे हैं और इससे गर्भवती महिलाओं को उनके दूसरे और तीसरे तैमासिक के दौरान निर्धारित तिथि को व्‍यापक एवं गुणवत्तायुक्‍त प्रसवपूर्ण देखभाल की सुविधा मिल रही है।
     निजी क्षेत्र के 4,800 से अधिक डॉक्‍टरों ने पीएमएसएमए के तहत स्‍वैच्छिक सेवा प्रदान करने का वचन दिया है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जैसे उच्‍च प्राथमिकता वाले जिलों में 385 से अधिक निजी क्षेत्र के स्‍वयंसेवकों ने सेवाएं प्रदान की हैं। पिछले कुछ महीनों के दौरान इनमें से कई स्‍वयंसेवकों ने आसपास के सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर 10 बार से अधिक मुफ्त सेवाएं प्रदान की हैं। ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जहां निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों ने दूरदराज के क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए उम्‍मीद से कहीं अधिक उत्‍साह दिखाया।
   उदाहरण के लिए, रायपुर की जानीमानी स्‍त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा उपाध्‍याय ने सरकार द्वारा पेश की गई यात्रा सुविधा को ठुकराते हुए अपने खर्च पर पीएमएसएमए के तहत सेवाएं देने के लिए वामपंथी उग्रवाद प्रभावित नारायणपुर जिले तक पहुंची। व्‍यापक एवं गुणवत्तायुक्‍त एएनसी और उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था की पहचान एवं उस पर लगातार निगरानी रखना इस अभियान का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था की समय रहते पहचान के लिए इस कार्यक्रम के तहत 84 लाख हीमोग्‍लोबिन जांच, 55 लाख एचआईवी जांच, गर्भावस्‍था के दौरान होने वाले मधुमेह की 41 लाख जांच, सिफिलिस के लिए 33 लाख जांच और 15 लाख से अधिक अल्‍ट्रासाउंड किए गए जो गर्भवती महिलाओं की व्‍यक्तिगत जरूरतों पर आधारित थीं।
     नैदानिक दशाओं और जांच के आधार पर 5.50 लाख गर्भवती महिलाओं को उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था के तौर पर पहचान की गई और उन्‍हें उचित देखभाल के लिए किसी विशेषज्ञ अथवा उच्‍चतर स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर भेजा गया। उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था की पहचान माताओं और शिशुओं को रोके जाने वाली मृत्‍यु से बचाने की ओर उठाया गया पहला कदम है।
     श्री नड्डा ने कहा, 'भारत ठोस प्रसायों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिये रोजे जाने योग्‍य शिशुओं और माताओं की मृत्‍यु की रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध है। पीएमएसएमए कार्यक्रम राज्‍यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में सरकारी डॉक्‍टरों और बड़ी तादाद में स्‍वैच्छिक सेवाएं देने के लिए वचनबद्ध निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों की मदद से एक करोड़ के स्‍तर के पार पहुंच गया है।'

Thursday, 18 January 2018

अब भारत के घर-घर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी !

     हैदराबाद। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने हैदराबाद में ‘जियोस्पेशल वर्ल्ड फोरम’ के अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन में प्रमुख व्याख्यान दिया।

  सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत को विश्व समुदाय में अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सराहना की। उन्होंने कहा कि इसरो ने मोदी सरकार के विजन के अनुरूप अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का शानदार विकास किया है और उसे भारत के प्रत्येक घर तक पहुंचा दिया है।
    मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निजी पहल और सर्मथन के बदौलत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में विकसित हुई है और उसने ‘न्यू इंडिया’ के निर्माण में अभूतपूर्व काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के प्रतिनिधियों के बीच अपने तरह का पहला विमर्श आयोजित किया गया है। इसके तहत उन क्षेत्रों के विषय में चर्चा की गयी जहां अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल संभव है।
     डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में टीम इसरो और अंतरिक्ष विभाग ने कई मंत्रालयों के साथ सहमति-ज्ञापनों को अंतिम रूप दिया, जिनमें रेल मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय इत्यादि शामिल हैं। स्मार्ट सिटी कार्यक्रम, शहरी एवं आवासीय योजनाओं, मानव रहित रेलवे क्रांसिंगों की निगरानी, मनरेगा की जियो-टैगिंग, सड़कों और अन्य परियोजनाओं के लिए प्रमाणपत्र और कृषि मृदा जांच जैसे प्रमुख कार्यकमों के क्रियान्वयन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 
   डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि नव वर्ष के आरंभ में 12 जनवरी को 28 विदेशी उपग्रहों को लांच किया गया, जो हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह डॉ विक्रम साराभाई के सपनों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने कई वर्षों पहले अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किये थे, वे भी हमारी क्षमता देखकर अपने उपग्रहों को भारत से लांच करवा रहे हैं।
    पिछले वर्ष भारत ने एक साथ 104 उपग्रह लांच करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था। ‘जियोस्पेशल वर्ल्ड फोरम’ का उल्लेख करते हुए डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों का विस्तार कर रहा है, जिनमें अन्य साझेदार भी हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ बडे औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति से यह साबित होता है कि ये सभी भारत के साथ सहयोग करने के आकांक्षी हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परिधान मेले में 200 मिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापार

   नई दिल्ली। कपड़ा राज्य मंत्री अजय टमटा ने यहां प्रगति मैदान में 60वें भारत अंतर्राष्ट्रीय परिधान मेले (आईआईजीएफ) का उद्घाटन किया। मंत्री ने कहा कि परिधान क्षेत्र रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि आईआईजीएफ एक ऐसा विशाल मंच है, जहां विदेशी परिधान क्रेता और परिधान निर्यातक, दोनों हिस्सा लेते हैं। मेले में भारत के लगभग आधे राज्य हिस्सा ले रहे हैं।

  श्री टमटा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ‘टैक्सटाइल पैकेज’ से कपड़ा क्षेत्र को बहुत फायदा पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पिछली बार 200 मिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापार हुआ था। उन्होंने मेले में हिस्सा लेने वाले खरीददारों और निर्यातकों को शुभकामनाएं दीं। 3 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिधान मेला प्रगति मैदान के हॉल नम्बर 11, 12 और 12 ए में आयोजित किया जा रहा है।
   मेले के इस संस्करण में यूरोपीय संघ, अमरीका और अन्य पश्चिमी बाजारों के शरदकालीन परिधानों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस अवसर पर एईपीसी के अध्यक्ष एचकेएल मागू ने मेले और उद्योग में आने वाले भारी बदलाव के लिए संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मेले का बड़े पैमाने पर विकास हुआ है और वह एशिया में सबसे बड़ा और लोकप्रिय मंच बन गया है।
    उन्होंने कहा कि यहां विदेशी परिधान क्रेता उत्पादों और भारत के निर्माताओं के साथ कारोबारी सहयोग प्राप्त कर सकते हैं। गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुल 294 निर्यातक मेले में भाग ले रहे हैं। ये निर्यातक महिलाओं, पुरूषों और बच्चों के परिधान और अन्य वस्त्रों का प्रदर्शन कर रहे हैं। 95 देशों के क्रेता इसमें हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें से ब्राजील, स्पेन, जापान, उरुग्वे, इंग्लैंड, हांगकांग और अमरीका के खरीददारों ने मेले में हिस्सा लेने के लिए पंजीकरण करवा लिया है। 
     आईआईजीएफ सभी तीन दिनों के दौरान दिन में दो बार फैशन-शो का आयोजन कर रह है। इसके अलावा सबसे सुंदर स्टॉलों को 18 जनवरी 2018 को एक पुरस्कार समारोह में स्वर्ण, रजत और कांस्य ट्राफियां प्रदान की जाएंगी।

अब 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सौर विकास निधि

    नई दिल्ली। 6 दिसंबर 2017 को 15 देशो से अनुमोदन होने पर अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए)ढांचा अनुबंध की शुरूआत हुई।

  इसने अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को एक विधि सम्मत संधि आधारित अन्तर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन बना दिया। अभी तक 19 देशों ने इसे स्वीकृति दी है और 48 देशों ने आईएसए ढांचा अनुबंध पर हस्ताक्षऱ किये हैं। अपनी तरह की पहले कार्यक्रम में आईएसए ने विश्व ऊर्जा भविष्य शिखर सम्मेलन-2018 (डब्लयूएफई एस) के अवसर पर 17 से 18 जनवरी, 2018 के दौरान दो दिवसीय ‘अन्तर्राष्ट्रीय ऊर्जा गठबंधन मंच’ की मेजबानी की। 
    डब्लयूएफईएस वैश्विक स्तर का अनूठा कार्यक्रम है। आबूधाबी (यूएई) में 18 जनवरी, 2018 को आबूधाबी निरंतरता सप्ताह का आयोजन मसदर द्वारा किया गया। आईएसए कार्यक्रम के दौरान आईएसए के बारे में सूचना के प्रसार और इसकी गतिविधियों और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी के लिए आईएसए मंडप स्थापित किया गया।
    अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन मंच के पहले दिन 17 जनवरी,2018 को आईएसए मंत्रियों का पूर्ण मंत्रीस्तरीय सत्र का आयोजन किया गया। आईएसए सदस्य देशों के सात ऊर्जा मंत्रियो ने मंत्रीस्तरीय सत्र में भाग लिया। उन्होंने सार्वभौमिक ऊर्जा, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सौर ऊर्जा के सहयोग, ज्ञान के लाभ और शुरूआती सत्रों में सौर परियोजनाओं के लिए नवोन्मेष प्रौद्योगिकी और अनुसंधान और विकास में निवेश पर अपने विचार रखे।
     इस अवसर पर अपने मुख्य भाषण में केन्द्रीय ऊर्जा एवं नवीन और नवीनकरणीय ऊर्जा(स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री राजकुमार सिंह ने अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन मंच के आयोजन के लिए आईएसए को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा सस्ती हो गई है और परंपरागत ऊर्जा को बदलने के लिए तैयार है और यह एक स्वस्थ विकास है।
    उन्होंने कहा भारत के पास विश्व में तीव्र गति से बढ़ना वाला नवीनकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम हैं और वर्ष 2020 से पूर्व 175 जीडब्लयू के स्थापित नवीनकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। आर के सिंह ने कहा आईएसए सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक निधि एकत्र करने में सहायता करेगा। अपने संबोधन के दौरान श्री सिंह ने सौर परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए भारत सरकार द्वारा 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सौर विकास निधि की स्थापना की घोषणा की।
   आईएसए के अंतरिम महानिदेशक उपेन्द्र त्रिपाठी ने मंत्रीस्तरीय सत्र का औपचारिक उद्घाटन और कार्यक्रम में भाग लेने वाले भागीदारों का स्वागत करते हुए कहा विभिन्न कंपनियों और बैंको द्वारा सौर ऊर्जा से संबंधित नौ परियोजनाओं के लिए अनुमति पत्र आदान–प्रदान के संबंध में जानकारी दी। उन्होने कहा कि आईएसए को अब कार्य को आदान प्रदान में बदलने के रूप में जाना जायेगा। 
   उन्होंने कहा कि अप्रैल 2018 तक आईएसए के अंतर्गत 100 से अधिक परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किये जायेगे। उन्होने सदस्य देशों और विभिन्न भागीदारको का बेहद कम समय में आईएसए को स्थापित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने भारत सरकार के अंतर्गत नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 19 से 21 अप्रैल 2018 तक आयोजित दूसरे रि-इन्वेस्ट बैठक के संबंध में बताया और इसका निमंत्रण दिया। मंत्री स्तरीय बैठक के बाद तीन तकनीकी समूह परिचर्चा का आयोजन किया गया।
    इसमें ऊर्जा मंत्रियों, नीतिनिर्धारकों,बहुस्तरीय बैंक और वित्तीय संस्थान, अनुसंधान और विकास संगठन एवं नवाचार,सौर ऊर्जा विकासक और निर्माता, निवेशक और अन्य भागीधारकों ने भाग लिया। आईएसए मंत्री स्तरीय सत्र की समाप्ति पर यस बैंक ने पांच बिलियन अमेरिकी ड़ॉलर से अधिक की राशि सौर परियोजनाओं को वित्तीय मदद के रूप में देने की घोषणा की।
     इसके साथ ही मैसर्स सीएलपी और मैसर्स एनटीपीसी लिमिटेड ने आईएसए के साथ भागीदारी गठित करने की घोषणा की और दोनों ने आईएसए निधि के लिए एक–एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का स्वैच्छिक योगदान देने का ऐलान भी किया। 
   आईए और जीसीएफ ने भी आईएसए के साथ भागीदारी में प्रवेश करने की घोषणा की। कार्य आधारित संगठन होन के कारण आईएसए सौर परियोजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रारंभ में सहयोग प्रदान करता है।इसलिए दिन के पहले हिस्से में नौ कंपनियों ने सौर ऊर्जा संबंधी परियोजनाओं के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये।

Wednesday, 17 January 2018

भारत में 30 करोड़ बोवाईन

     नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि भारत में 30 करोड़ बोवाईन है, जो विश्व की बोवाईन आबादी का 18 प्रतिशत हैं। पारंपरिक तथा वैज्ञानिक ज्ञान के माध्यम से सैकड़ो वषों की मेहनत के बाद देश के देशी बोवाईन आनुवंशिक संसाधन विकसित हुए हैं और आज हमारे पास गोपशुओं की 42 नस्लों के साथ-साथ याक और मिथुन के अलावा भैंसों की 13 नस्लें हैं।

   केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात आज नई दिल्ली में पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग द्वारा सामूहिक भ्रूण अंतरण संबंधी काफी टेबल पुस्तक के विमोचन के मौके पर कही।
   राधा मोहन सिंह ने आज 20वें लाइव स्टॉक सेंसस के लिए डाटा इकट्ठा करने के लिए सॉफ्टवेयर लांच किया। श्री सिंह ने कहा कि 20वें लाइव स्टॉक सेंसस में प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया इनेशियेटिव के हिस्से के रूप में टेबलेट कम्प्यूटर का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया है। सॉफ्टवेयर में सभी प्रकार के एनालिटिकल रिपोर्ट्स तैयार करने और सेंसस ऑपरेशन के रियल टाइम निगरानी की भी व्यवस्था होगी।
    श्री सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डेयरी क्षेत्र की अहम भूमिका है। इस काम को पूरा करने के लिए पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग ने नेशनल एक्शन प्लॉन ऑन डेयरी डेवलपमेंट तैयार किया है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने आज नेशनल एक्शन प्लॉन के आधार पर बने विजन 2022 दस्तावेज को जारी किया।
    विजन डाक्यूमेंट में डेयरी के विकास की रूपरेखा बनायी गयी है और किसानों की आय दोगुनी करने के उपाय भी सुझाए गये है। विजन डाक्यूमेंट में दूध और दूध के उत्पाद को शुद्ध और सुरक्षित बनाने की भी बात कही गयी है।
    राधा मोहन सिंह ने कहा है कि देशी नस्लों के सरंक्षण एवं संवर्धन के लिए एक नयी योजना राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत दिसम्बर २०१४ में की गयी। इसी क्रम में देशी नस्लों के उत्पादन एवं उत्पादकता में तेजी से वृद्धि के लिए राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन की शुरुआत नवम्बर 2016 मे की गयी। देशी नस्लों में तेजी से वृद्धि के लिए पशुपालन, डेयरी एवं मत्य्य पालन विभाग द्वारा कई महत्व पूर्ण सामूहिक कार्यक्रम राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत किये गये।
   श्री सिंह ने कहा कि एसतरस सिनक्रोनाइजेसन, जो अक्टूबर 2016 को किया गया, प्रमुख है। देश में पहली बार एसतरस सिनक्रोनाइजेसन के जरिये 124000 पशुओं का देशी नस्लों के उच्च गुणवता वाले वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान किया गया। इन सभी पशुओं को छक्ष्क़् के द्वारा चिन्हित किया गया तथा इनाफ डाटा बेस पर रजिस्टर भी किया गया। इन देशी गायों का बियाने तक अनुसरण किया गया। राज्यों से आई रिपोर्ट के अनुसार 41353 बछडे-बछडी उत्पन्न हुए। इन बछडे-बछडीयों का अनुसरण भी विभाग द्वारा किया जा रहा है।
    केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि विभाग ने देश भर के 12 ईटीटी केंद्रों में 2 से 14 अक्तूबर, 2017 के दौरान, राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत 10 राज्यों के सहयोग से देशी नस्लों में सामूहिक भ्रूण अंतरण का महत्वपूर्ण कार्यक्रम देश में पहली बार किया गया।
   इस कार्यक्रम के तहत सरोगेट गायों में उच्चम आनुवंशिक गुणता वाली ६ देशी गोपशु नस्लों जैसे साहीवाल, गिर, रेड सिंधी, ओंगोल, देवनी तथा वेचुर के 391 भ्रूणों को अंतरित किया गया। इन गायों को छक्ष्क़् के द्वारा चिन्हित किया गया है तथा इनके ब्याने तक अनुसरण किया जायेगा। इस कार्यक्रम से उत्पन्न उच्च गुणवता वाले बछडो का उपयोग वीर्य केन्द्रों पर वीर्य उत्पादन के लिए किया जायेगा।
     राधा मोहन सिंह ने बताया कि ईटीटी के प्रयोग से एक किसान उच्च. आनुवंशिक गुणवता वाली संतति में 5-6 गुना वृद्धि कर सकते हैं, जो रोगों से मुक्त होंगीं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 50 भ्रूण अंतरण प्रोद्योगिकी लैबों को स्थापित किया जा रहा है। इन लैबों से देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन को एक नयी दिशा मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी और इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्‍याहू ने आई क्रिएट सुविधा राष्‍ट्र को समर्पित की

     अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू ने आज अहमदाबाद के बाहरी इलाके में आई क्रिएट सुविधा राष्‍ट्र को समर्पित की।

   आई क्रिएट एक स्‍वतंत्र केंद्र है, जिसका उद्देश्‍य खाद्य सुरक्षा, जल, संपर्क, साइबर सुरक्षा, आईटी और इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, ऊर्जा, बायो मेडिकल उपकरण तथा यंत्रों जैसे प्रमुख मुद्दों से निपटने के लिए सृजनात्‍मकता, नवोन्‍मेष, इंजीनियरिंग, उत्‍पाद डिजाइन और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के जरिए उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
   आई क्रिएट का उद्देश्‍य गुणवत्‍तापूर्ण उद्यम सृजित करने के लिए भारत में एक पारिस्थितिकी प्रणाली विकसित करना है। दोनों नेताओं ने उन विभिन्‍न स्‍टॉलों का दौरा किया, जो विविध क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी और नवोन्‍मेष को उजागर करते हैं।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि नये अविष्‍कारों की भारत और इस्राइल के लोगों को एक दूसरे के करीब लाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका है। उन्‍होंने कहा कि समूचे विश्‍व में इस्राइल के प्रौद्योगिकी कौशल और सृजनात्‍मकता की ख्‍याति है। उन्‍होंने कहा कि भारत के युवाओं में ऊर्जा और उत्‍साह है। युवाओं को केवल थोड़े से प्रोत्‍साहन और संस्‍थागत सहायता की जरूरत है।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार समूची प्रणाली को नवोन्‍मेष अनुकूल बनाने के लिए कार्य कर रही है, ताकि इस प्रयोजन से नई योजनाएं सामने आएं, नई योजनाओं से अविष्‍कार होते हैं और नये अविष्‍कारों से नये भारत का निर्माण करने में मदद मिलेगी।
     उन्‍होंने कहा कि इस सफलता की पहली पूर्व शर्त साहस है। उन्‍होंने आई क्रिएट में नवोन्‍मेष कार्यों में लगे साहसी युवाओं को बधाई दी। कालिदास का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने परिपाटी और नवोन्‍मेष के बीच कश्‍मकश का जिक्र किया।
      उन्‍होंने भारत के युवाओं से आग्रह किया कि वे राष्‍ट्र के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए नये अविष्‍कार करें और कम से कम लागत पर आम आदमी के जीवन में सुधार करें। प्रधानमंत्री ने भारत और इस्राइल के बीच खाद्य, जल, स्‍वास्‍थ्‍य और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नये अविष्‍कारों की दिशा में सहयोग की चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि 21वीं शताब्‍दी में मानवता के इतिहास में दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया अध्‍याय लिखा जाएगा।

3547 करोड़ की असाल्‍ट राइफलों एवं कार्बाइन की खरीद

     नई दिल्ली। रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन की अध्‍यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की यहां बैठक हुई और उसमें ‘मेक क्ष्क्ष्’ प्रक्रिया, जो भारतीय उद्योग जगत के जरिये रक्षा उपकरण के विकास एवं विनिर्माण के लिए अनुसरण किए जाने वाले दिशानिर्देशों को निर्धारित करती है, को सरल बनाया गया।

  डीएसी ने सीमाओं पर तैनात टुकडि़यों की तात्‍कालिक आवश्कता की पूर्ति हेतु रक्षा बलों को सक्षम बनाने के लिए 3547 करोड़ रुपये में त्‍वरित आधार पर 72,400 असाल्‍ट राइफलों एवं 93,895 कार्बाइनों की खरीद की मंजूरी दी।
   रक्षा डिजाइन एवं उत्‍पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्‍साहित करने एवं ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए, परिषद ने आज रक्षा खरीद प्रक्रिया के ‘मेक क्ष्क्ष्’ वर्ग में उल्‍लेखनीय बदलाव लागू किया। 
  इस तथ्‍य पर विचार करते हुए कि ‘मेक क्ष्क्ष्’ परियोजना में कोई भी सरकारी वित्‍त पोषण शामिल नहीं है, डीएसी ने न्‍यूनतम सरकारी नियंत्रण के साथ इसे उद्योग के अनुकूल बनाने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया। संशोधित प्रक्रिया के प्रमुख पहलू अब रक्षा मंत्रालय को अब स्‍वयं प्रेरित प्रस्‍तावों को स्‍वीकार करने में समर्थ बनाएंगे तथा स्‍टार्टअप कंपनियों को भी भारतीय सशस्‍त्र बलों के लिए उपकरण विकसित करने की अनुमति प्रदान करेंगे ‘मेक क्ष्क्ष्’ परियोजनाओं में भाग लेने के लिए न्‍यूनतम योग्‍यता मानदंड में भी क्रेडिट रेटिंग तथा वित्‍तीय नेटवर्थ मानदंड में कमी लाने से संबंधित शर्तों को हटाने के द्वारा छूट दी गई है।
     पहले की ‘मेक क्ष्क्ष्’ प्रक्रिया के अनुसार, प्रोटोटाइप उपकरणों के विकास के लिए केवल दो वेंडरों का चयन किया गया था। अब आर्हर्ता के छूट प्राप्‍त मानदंडों को पूरा करने वाले सभी वेंडरों को प्रोटोटाइप विकास प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी। वेंडरों से विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट प्राप्‍त करने की आवश्‍यकता नहीं होगी। परिषद द्वारा ‘मेक क्ष्क्ष्’ परियोजना की मंजूरी प्राप्‍त होने के बाद सेवा मुख्‍यालय (एसएचक्‍यू) स्‍तर पर सभी मंजूरियां प्रदान की जाएंगी। 
   उद्योग एवं स्‍टार्टअप कंपनियों को आरंभिक स्‍तर पर सहायता प्रदान करने के लिए एसएचक्‍यू डिजाइन एवं विकास चरण के दौरान एसएचक्‍यू एवं उद्योग के बीच प्राथमिक संयोजक के रूप में कार्य करने के लिए परियोजना सुगमीकरण टीमों का गठन करेगा। ये टीमें वेंडर की आवश्‍यकता के अनुरूप तकनीकी इनपुट, परीक्षण अवसंरचना तथा अन्‍य सुविधाएं प्रदान करेंगी।
     अगर कोई एकल व्‍यक्ति या कंपनी भी कोई नवोन्‍मेषी समाधान प्रस्‍तुत करती है तो अब एसएचक्‍यू के पास वेंडर की विकास पहल को स्‍वीकार करने तथा प्रसंस्‍करण का विकल्‍प होगा। एसएचक्‍यू को पहुंच बढ़ाने तथा उद्योग के बीच जागरुकता फैलाने के लिए निजी क्षेत्र से इस क्षेत्र के विशेषज्ञों/ सलाहकारों की सेवाएं लेने की अनुमति होगी। 
    इससे भी महत्‍वपूर्ण बात यह है कि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि सफल वेंडर के पास एश्‍योर्ड ऑडर हैं, केवल वेंडर द्वारा डिफॉल्‍ट किए जाने के मामले को छोड़कर, परियोजना के मंजूर हो जाने के बाद इसे पुरोबंध नहीं किया जाएगा।

उपराष्ट्रपति की नसीहत, अंग दान एक राष्ट्रीय आंदोलन होना चाहिए

     चेन्नई। भारत के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैय्या नायडू ने देश के लोगों से अंग दान को राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन बनाने का आग्रह किया। अच्छे अवसरों की तलाश में देश छोड़कर जाने वाले लोगों से उन्होंने मातृभूमि की सेवा करने का अनुरोध किया। 

  इस संदर्भ में तमिलनाडु में 1,000 सफल लीवर प्रत्यारोपण समारोह को चेन्नई में आयोजित किया गया, जिसमें इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सी. विजय भास्कर और स्वास्थ्य सचिव डॉ. जे. राधाकृष्णन भी उपस्थित थे।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंग दान मृत्यु के बाद भी जीवित रहने का एक अच्छा तरीका है। हमें अंग दान के महत्व और ऐसे कल्याणकारी कार्य के लिए भागीदारी करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद जीवित रहने का यह सर्वोत्तम तरीका है। गैर-अल्कोलिक फैटी लीवर रोग (एनएएफएलडी) विशेषतर युवाओं में यह रोग बढ़ने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली इस रोग को और अधिक बढ़ावा दे रही है। जंक फूड और मद्यपान से बचना, संतुलित आहार लेना, निष्क्रिय जीवन शैली छोड़ना और नियमित व्यायाम या योग-आसन करना लोगों के लिए विशेषतः युवाओं के लिए बहुत जरूरी है ताकि वे स्वस्थ रहें और विभिन्न बीमारियों से बचे रहें।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि लीवर प्रत्यारोपण जैसी जटिल प्रक्रियाएं आम आदमी की पहुंच में होनी चाहिए। इसे और अधिक किफायती बनाने के लिए तमिलनाडु की तरह सरकारी चिकित्सालयों में आवश्यक विशेषज्ञता और सुविधाएं जुटाना इसका एक तरीका है। 
     उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में अधिकतम जनसंख्या को शामिल करना चाहिए और इनमें लीवर तथा हृदय प्रत्यारोपण जैसी प्रक्रियाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि अधिक खर्चीला होने के कारण अपेक्षित उपचार के लिए किसी भी व्यक्ति को मना न किया जा सके। आम आदमी को श्रेष्ठ और किफायती उपचार सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच भागीदारी किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता होने पर सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जानी चाहिए।

Tuesday, 16 January 2018

मोटापा व कुपोषण देश की समस्याएं

      नई दिल्‍ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के 45 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘एम्स गुणवत्ता, प्रतिबद्धता और समृद्ध अनुभव का दूसरा नाम बन गया है। संकाय व चिकित्सकों साथ-साथ छात्र भी हमारे राष्ट्र और चिकित्सीय बिरादरी के गौरव हैं।’ 

   राष्ट्रपति ने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों को डॉक्टरों पर अत्यधिक भरोसा हैं। यह आप लोगों पर निर्भर है कि आप इस भरोसे को उचित सम्मान दें और करूणा व उचित देखभाल के साथ उन्हें चिकित्सकीय सेवा प्रदान करें।
    केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री जे.पी.नड्डा तथा एम्स, नई दिल्ली के अध्यक्ष भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कार्यक्रम में 572 स्नातक छात्रों को डिग्री प्रदान की गई।
  स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रयासों की सरहाना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए इन्द्रधनुष कार्यक्रम की मदद से स्वास्थ्य मंत्रालय प्रतिरक्षण-अंतर को समाप्त करने तथा सभी बच्चों को जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास कर रहा है। हमारे देश में दोनों ही तरह की समस्याएं हैं- मोटापा और कुपोषण। इसके साथ ही हमारे देश में बच्चों तथा बुजुर्गों की बहुत बड़ी जनसंख्या है। ये दोनों समूह हमारी चिकित्सा प्रणाली के समक्ष चुनौतियां पेश करते हैं।
     केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि प्रभावी, किफायती और कम लागत वाली चिकित्सा प्रणाली आज की जरूरत हैं। इस चुनौती का सामना करने के लिए एम्स अपने संकायों का विस्तार कर रहा है और सरकार इसे पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।
    उन्होनें कहा कि एम्स को पूरे विश्व में सम्मान के साथ पहचाना जाता है। श्री नड्डा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे के प्रतिरक्षण के लिए 2014 में मिशन इन्द्रधनुष की शुरूवात की गई थी। अब तक 3.2 करोड़ बच्चों को प्रतिरक्षण की दवाई दी गई है। 5 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों की शिशु मृत्यु दर 2013 में 49 से घटकर 2016 में 39 हो गई है। 
    जे.पी.नड्डा ने चिकित्सा क्षेत्र में लाईफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी प्रदान किया। डा. पुरषोत्तम उपाध्याय, प्रोफेसर ललित मोहन नाथ, प्रोफेसर उषा नायर, डा. मेहरबान सिंह, प्रोफेसर इन्दिरा नाथ तथा प्रोफेसर एम.सी. माहेश्वरी ने पुरस्कार प्राप्त किया।

22 सालों में 12 लाख किसानों की मौत !

    नई दिल्‍ली। देश में 22 सालों में 12 लाख किसानों की मौतें हुयीं। किसानों की यह मौतें आर्थिक तंगहाली एवं कर्ज के कारण हुयीं। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने यह दावा नई दिल्ली में किया।

   समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों की लगातार उपेक्षा कर रही है। किसान पेंशन बिल लोकसभा में लम्बित है।
   उन्होंने महाराष्ट्र सदन में बातचीत के दौरान कहा कि किसानों एवं श्रमिकों के हित तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए 23 मार्च से सत्याग्रह किया जायेगा। सत्याग्रह की कोई भी धारा राजनीति या सत्ता की ओर नहीं जायेगी।
   सत्याग्रह में शामिल होने वाले सत्याग्रही शपथ-पत्र देंगे कि न राजनीतिक दल बनायेंगे, न राजनीतिक दल में शामिल होंगे। साथ ही कोई भी सत्ता का लाभ नहीं लेंगे। यदि इसके बाद वह कोई ऐसा कार्य करते हैं जिससे शपथ-पत्र का उल्लंघन हो तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जायेगी। ऐसे लोंगों को फिर न्यायालय में खींचेंगे।
    उन्होंने कहा कि किसानों को उपज खर्च से अधिक मूल्य मिलना चाहिए। किसान पेंशन बिल पास किया जाये। आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसान को जीवकोपार्जन देना उसका संवैधानिक अधिकार है। संवैधानिक अधिकार किसान को मिलना चाहिए।

अब हज पर सब्सिडी नहीं !

    नई दिल्ली। अब हज पर सब्सिडी नहीं ! केंद्र सरकार ने इस वर्ष से हज यात्रियों को यात्रा पर मिलने वाले सब्सिडी खत्म करने का फैसला किया है। 

    अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि हज यात्रियों को 2018 से यात्रा सब्सिडी नहीं मिलेगी। 
  सरकार ने यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के 2012 के फैसले के मद्देनजर किया है जिसमें हज सब्सिडी 2022 तक धीरे-धीरे खत्म करने का निर्देश दिया गया था।
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लगातार दूसरे वर्ष भारत का हज कोटा बढ़ाने में सफलता मिली है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार हज 2018 के लिए एक लाख 75 हजार और 25 श्रद्धालु भारत से जाएंगे।
   अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और सऊदी अरब मक्का सम्राज्य के हज और उमरा मंत्री द्वारा भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय वार्षिक हज 2018 समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद सऊदी अरब सरकार द्वारा 2018 के लिए भारत का हज कोटा बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
    अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि 3 वर्ष पहले भारत का हज कोटा 1,36,020 था। यह पिछले दो वर्षों में बढ़कर रिकार्ड 1 लाख 75 हजार और 25 हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता के कारण और श्री मोदी के नेतृत्व में सऊदी अरब तथा अन्य अरब देशों के साथ भारत के मित्रतापूर्ण और मजबूत संबंधों के कारण हुआ है।
     श्री नकवी ने बताया कि पिछले वर्ष भी सऊदी अरब ने भारत का हज कोटा 35 हजार बढ़ाया था। भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से श्री नकवी ने दो पवित्र मस्जिदों के कस्टोडियन महामहिम शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सउद तथा सऊदी अरब सरकार को भारत के हज कोटे में वृद्धि के लिए धन्यवाद दिया। 
    उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त सऊदी अरब ने समुद्री मार्ग से हज श्रद्धालुओं को भेजने के विकल्प को जीवित करने के भारत के निर्णय को हरी झंडी दी है। दोनों देशों के अधिकारी आवश्यक औपचारिकताओं और तकनीकों पर बातचीत करेंगे ताकि आने वाले वर्षों में समुद्री मार्ग से श्रद्धालु हज के लिए जा सकें।
  अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने बताया कि हज 2018 के लिए 3 लाख 55 हजार आवेदन प्राप्त किए गए। श्री नकवी ने कहा कि पहली बार भारत से कोई मुस्लिम महिला मेहरम (पुरूष साथी) के बिना हज यात्रा पर जाएगी। 1300 से अधिक महिलाओं ने मेहरम के बिना हज यात्रा का आवेदन किया है और इन सभी महिलाओं को लॉटरी प्रणाली से छूट दी जाएगी तथा हज यात्रा पर जाने की अनुमति दी जाएगी। 
     नई भारतीय हज नीति के अनुसार 45 वर्ष से अधिक आयु की हज यात्रा करने की इच्छुक वैसी महिलाओं को जिनका कोई पुरूष साथी नहीं है उन्हें चार या उससे अधिक महिलाओं के समूह में हज यात्रा पर जाने की अनुमति होगी।