Friday, 6 October 2017

गुजरात में 5825 करोड़ की चार राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाए

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी कल गुजरात में 5825 करोड़ रुपये की लागत वाली चार राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। 

     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल गुजरात के द्वारका में 5825 करोड़ रुपये की लागत वाली चार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग और जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग और रसायन एवं उर्वरक राज्‍य मंत्री मनसुख एल. मंडाविया भी इस अवसर पर प्रधानमंत्री के साथ होंगे। 
   प्रधानमंत्री एनएच-51 पर बेत द्वारका और ओखा के बीच केबल धारित सिग्‍नेचर ब्रिज के निर्माण की आधारशिला रखेंगे। इस पुल की परियोजना लागत 962 करोड़ रुपये है।
         इस दौरान जिन अन्‍य परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, उनमें 1600 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-51 के 116.24 किलोमीटर लम्‍बे पोरबंदर-द्वारका खंड को चार लेन का बनाना, 370 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-51 के 93.56 किलोमीटर लम्‍बे गडू-पोरबंदर खंड को 2/4 लेन का बनाना और 2893 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-47 एवं एनएच-27 के 201.31 किलोमीटर लम्‍बे अहमदाबाद-राजकोट खंड को छह लेन का बनाना शामिल हैं।

भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच विज्ञान एवं तकनीकी सहयोग के 20 वर्ष

     दक्षिण अफ्रीका। केन्‍द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की अगुवाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर है। 

   भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच विज्ञान एवं तकनीकी सहयोग के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोह में यह प्रतिनिधिमंडल भाग लेगा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल के दक्षिण अफ्रीका दौरे का उद्देश्‍य दोनों देशों के बीच विज्ञान संबंधी सहयोग को और सुदृढ़ करना तथा अंतरिक्ष शोध से लेकर जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग के अवसर तलाशना है।
   प्रतिनिधिमंडल इस दौरान दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करेगा। बैठक के दौरान ये वैज्ञानिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्‍न विषयों पर अपने गहन अनुभवों एवं अंतर्दृष्टि को साझा करेंगे। मंत्री ने स्क्वायर किलोमीटर एरे (एसकेए) का दौरा किया, जो एक विशाल मल्‍टी रेडियो टेलीस्‍कोप परियोजना है। 
      जिसका विकास ऑस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड तथा दक्षिण अफ्रीका में हो रहा है। इसमें रेडियो खगोल विज्ञान का उपयोग किया जा रहा है और इसके तहत न्‍यूनतम 3000 किलोमीटर की दूरी पर रिसीविंग स्‍टेशन स्‍थापित किये जा रहे हैं। इस परियोजना से खगोल भौतिकी के सबसे दिलचस्प वैज्ञानिक रहस्‍यों का पता लग पाएगा। 
       इसमें प्रारंभिक ब्रह्मांड की विशेषताओं से लेकर बुद्धिमान परग्रही जीवन की तलाश करने जैसे रहस्‍य इसमें शामिल हैं। ‘एसकेए’ एक वैश्विक परियोजना है, जिससे 12 सदस्‍य देश जुड़े हुए हैं। 
   भारत भी एक सदस्‍य देश है। भारत स्थित राष्‍ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केन्‍द्र इसमें हितधारक है, जो भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग से सम्‍बद्ध है।
      भारत ‘एसकेए’ के अनेक डिजाइन कार्य संबंधी पैकेजों में संलग्‍न है, जिसमें केन्‍द्रीय सिग्‍नल प्रोसेसिंग और टेलीस्‍कोप मैनेजर सिस्‍टम प्रमुख है। यह एसकेए वेधशाला के कामकाज के अंतर्गत तंत्रिका केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

दुनिया भर में सूचना प्रौद्योगिकी की क्रांति

    नई दिल्ली। उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि प्रबंधकीय उत्‍कृष्‍टता के साथ प्रौद्योगिकी एक नये पथ की रूपरेखा बना सकती है। 

  वह आज यहां रक्षा अवसंरचना योजना निर्माण एवं प्रबंधन परिषद, रेल मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय एवं नीति आयोग द्वारा आयोजित रेलवे एवं मेट्रो परियोजनाओं 2017 में अंतरराष्‍ट्रीय प्रौद्येगिकी उन्‍नति सम्‍मेलन का उद्घाटन करने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय रेल एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल, रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष अश्‍वनी लोहानी तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
      उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत में तेज गति से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए तीव्र गतिशीलता एवं टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी और किफायती परिवहन की आवश्‍यकता है। 
     उन्‍होंने यह भी कहा कि ‘पारगमन केंद्रित विकास’ जैसी नई अवधारणाओं का प्रयास किया जाना चाहिए तथा उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिससे कि मेट्रो स्‍टेशन के आसपास रहने वाले लोगों के जीवन में व्‍यापक स्‍तर पर सुधार आए।
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारतीय रेल को प्रगतिशील, दक्ष प्रौद्योगिकियों के साथ बहुत सुनियोजित तरीके से विस्‍तार की योजना बनानी चाहिए तथा वर्तमान में दुनिया भर में उपलब्‍ध नवप्रवर्तक प्रचलनों का अनुपालन करने के द्वारा अपने देश की आकांक्षी आबादी की सेवा करनी चाहिए।
      उन्‍होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में सूचना प्रौद्योगिकी की क्रांति आ चुकी है जिसमें भारत का भी काफी बड़ा योगदान रहा है। इससे सिगनल देने, संचार एवं सुरक्षा में दक्षता में बेहतरी आएगी तथा कुशल परिवहन प्रणाली जैसे क्षेत्रों में मदद मिलेगी। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारतीय लोकाचार में, हम मानते हैं कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जीवन की गुणवत्‍ता बढ़ाने के माध्‍यम हैं। हम कहते हैं कि ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ जिसका अर्थ यह है कि हमारा लक्ष्‍य व्‍यापक रूप से मानवता की भलाई है। हम इस ग्रह के समस्‍त लोगों की प्रसन्‍नता चाहते हैं। 
      उन्‍होंने कहा कि हमारा यह भी विश्‍वास है कि अगर हम नये विचारों एवं अवधारणाओं, जो या तो स्‍वदेशी हैं या बाहर से आई हुई हैं, के प्रति खुले हुए हैं तो यह संभव है।
     उपराष्‍ट्रपति ने उम्‍मीद जताई कि इस दो दिवसीय सम्‍मेलन में की गई चर्चाओं एवं विचार-विमर्शों से कई अत्‍याधुनिक रेल प्रणालियों के त्‍वरित निर्माण में सहायता मिलेगी जिससे अर्थव्‍यवस्‍था तथा भारत और शेष विश्‍व में लोगों के जीवन स्‍तर में बेहतरी आएगी।

इथियोपियाई संस्‍थानों में भारतीय अध्‍यापकों का योगदान

     इथियोपिया। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जिबूती और इथियोपिया की अपनी चार दिवसीय यात्रा की समाप्ति से पहले आज इथियोपिया के सबसे पुराने विश्‍वविद्यालय, अदीस अबाबा यूनिवर्सिटी में छात्र समुदाय को संबोधित किया। 

    राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग इथियोपिया के साथ भारत की वचनबद्धता का प्रमुख बिन्‍दु है। इथियोपिया ने जब अपने शिक्षा के क्षेत्र का विस्‍तार करने के प्रयास की शुरूआत की, प्रारम्भिक और सैकेंडरी स्‍कूल शिक्षा की पढ़ाई के लिए यहां भारतीय अध्‍यापकों को आमंत्रित किया गया। शुरूआत में जाने वाले अध्‍यापक देश के सूदूरवर्ती हिस्‍सों में पहुंचे और इन्‍होंने युवाओं को मूल्‍यों और आदर्शों की शिक्षा दी तथा अपना सम्‍पूर्ण जीवन अध्‍यापन कार्य में लगा दिया।
      राष्‍ट्रपति ने कहा कि आज भारत के 2,000 प्राध्‍यापक इथियोपिया के विश्‍वविद्यालयों में अध्‍यापन और शैक्षणिक अनुसंधान में योगदान दे रहे हैं। इथियोपिया के विश्‍वविद्यालयों में भारतीय शिक्षकों की संख्‍या सबसे अधिक हैं। ये सबसे अधिक सम्‍मानित प्रवासी अध्‍यापक है। हमें गर्व है कि वे हमारे संबद्ध शै‍क्षणिक समुदायों के बीच सेतु का काम कर रहे हैं।
       इन अध्‍यापकों ने दोनों देशों के विश्‍वविद्यालयों और शै‍क्षणिक संस्‍थानों के बीच सम्‍पर्क और अनुसंधान सहयोग कायम किया है। कहा कि हर वर्ष भारत अपने अफ्रीकी छात्रवृत्ति कार्यक्रम के अंतर्गत सैकड़ों इथोपियाई छात्रों का स्‍वागत करता है। ये छात्र पूरी छात्रवृत्ति पर आते है, ताकि अनुसंधान कर सकें अथवा उच्‍च डिग्री प्राप्‍त कर सके। दो उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं के बीच सहयोग का ये एक जीता-जागता उदाहरण है। 
     साथ ही पैन-अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना है, जो इथियोपिया और भारत सहित अफ्रीकी देशों के बीच शैक्षणिक और क्षमता निर्माण सहयोग में मील का पत्‍थर है। इसका गठन 2009 में अदीस अबाबा में किया गया था, यह अफ्रीका से भारत के 48 देशों को जोड़ता है। 
    उन्‍होंने कहा कि जैसे इथियोपियाई संस्‍थानों में भारतीय अध्‍यापकों ने योगदान दिया है, इथियोपियाई छात्रों ने भारत के विश्‍वविद्यालयों में छात्रवृत्ति और सांस्‍कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का काम किया है। ये हमारे लिए खुशी का मुद्दा है कि भारतीय शैक्षणिक संस्‍थान के एक पूर्व छात्र को इथियोपिया में महत्‍वपूर्ण पद मिला है। 
    उन्‍होंने कहा कि इस सूची में प्रथम महिला और कम से कम कैबिनेट के नौ मंत्री शामिल हैं। राष्‍ट्रपति ने कहा कि इथियोपिया और भारत की जनसांख्यिकी संबंधी रूपरेखा के अनुसार दोनों देश युवा है। भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है; इथियोपिया की 64 प्रतिशत आबादी 25 वर्ष से कम है। 
    हमारे सामने एक जैसी चुनौतियां है। हमें अपने युवाओं और छात्रों के बीच शिक्षा और कौशल को बढ़ावा देना होगा, ताकि हम 21वीं सदी की अर्थव्‍यवस्‍था से मुकाबला कर सके। इन सबसे ऊपर एक आर्थिक मॉडल को प्रोत्‍साहन देने की आवश्‍यकता है, जो स्‍थानीय समुदायों से लेने की बजाय उन्‍हें योगदान दे सकें। इस मामले में 
      इथियोपिया और यहां तक की सभी अफ्रीकी देश भारत को एक तत्‍पर और संवेदनशील सहयोगी पाएंगे। राष्‍ट्रपति ने कल शाम इथियोपिया के प्रधानमंत्री हैलीमरियम देसालेगन के साथ विस्‍तृत बातचीत की। इसके बाद वे इथियोपिया के राष्‍ट्रपति डॉ. मुलातु तेशोमे द्वारा राष्‍ट्रपति महल में उनके सम्‍मान में दिये गये रात्रि भोज में शामिल हुए।

2020 तक अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में 14 नये जहाज

    पोर्ट ब्‍लेयर। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह एवं केंद्रीय जहाजरानी, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने बाराटंग में समुद्री रास्‍ते का उद्घाटन किया। 

   अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में पोर्ट ब्‍लेयर में एक समारोह में पोर्ट ब्‍लेयर में सूखी गोदी के विस्‍तार, नील द्वीप में बर्थिंग जलबंधक के साथ होपटाउन में गोदी के विस्‍तार और एक अतिरिक्‍त सेतु के निर्माण परियोजनाओं का शिलान्‍यास किया‍।
       इस अवसर पर केंद्रीय गृह मामले मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्‍यपाल प्रो. जगदीश मुखी भी उपस्थित थे। 
   गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 6 महीनों के अवधि के भीतर अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की यह उनकी दूसरी यात्रा है। उन्‍होंने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह पर गृह मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की हाल ही में बैठक हुई थी जिसमें द्वीपसमूह से संबंधित विभिन्‍न समस्‍याओं और मुद्दों पर चर्चा की गई थी एवं उनके समाधान के उपयों पर विचार-विमर्श किया गया था।
     सिंह ने जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी के प्रयासों की सराहना की। कहा कि इस अवसर पर जिस प्रकार की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है, वे देश की अर्थव्‍यवस्‍था के विकास की दिशा में योगदान देते है। 
      उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के गतिशील नेतृत्‍व के तहत भारत अब विश्‍व की शीर्ष 10 अर्थव्‍यवस्‍थाओं में शुमार होने लगा है। यह 2025-30 तक विश्‍व की शीर्ष तीन अर्थव्‍यवस्‍थाओं में शामिल हो जाएगा। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि देश के विकास और सुरक्षा दोनों ही पहलू शीर्ष महत्‍व के हैं।
   उन्‍होंने कहा कि भारत में 7,300 किलोमीटर लम्‍बी तटीय रेखा है। देश की भौगोलिक स्थिति विशाल है, इसलिए सुरक्षा प्रबंधन बेहद महत्‍वपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि ‘दीवारों और चारदीवारियों के निर्माण से देश को सुरक्षा नहीं प्राप्‍त होगी, हमारी असली ताकत समुद्र और वायु में है जिसे मजबूत बनाए जाने की आवश्‍यकता है।’ 
    राजनाथ सिंह ने यह भी जिक्र किया कि पहले अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में केवल एक राष्‍ट्रीय राजमार्ग होता था, लेकिन पिछले तीन वर्षों के दौरान अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में 7 राष्‍ट्रीय राजमार्गों अस्तित्‍व में आ चुके हैं। उन्‍होंने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में फल-फूल रही ‘सामुद्रिक अर्थव्‍यवस्‍था’ देश की अर्थव्‍यवस्‍था में लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का योगदान देती है।
     इस अवसर पर गडकरी ने कहा कि नई परियोजनाओं से जहाजों को मरम्‍मत के लिए बहुत दूर और विदेशी स्‍थानों, जो बहुत खर्ची‍ली भी साबित होती है, पर भेजने के बजाय, अब इनकी मरम्‍मत अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में ही हो जाएगी। उन्‍होंने कहा कि इन द्वीपसमूहों में जहाज निर्माण एवं जहाज मरम्‍मत उद्योग की प्रचुर संभावना है। 
     उन्‍होंने कहा कि नवप्रवर्तन, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं उद्यमशीलता आज की अहम आवश्‍यकता है। उन्‍होंने द्वीपसमूह में जहाज निर्माण उद्योग के विकास के लिए निजी निवेश का भी आग्रह किया, जिसके लिए जहाजरानी मंत्रालय आवश्‍यक सहायता उपलब्‍ध कराने के लिए तैयार है। 
      उन्‍होंने कहा कि मंत्रालय सागरमाला परियोजना के तहत ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम पर ध्‍यान केंद्रित कर रहा है। देश में जहाजों के निर्माण के लिए नई प्रौद्योगिकी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जहाजरानी क्षेत्र के बारे में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में अधिकांश जहाज पुराने हैं। उनकी जगह नये जहाज लाए जाने की आवश्‍यकता है।
     उन्‍होंने घोषणा की कि 2020 तक अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में 14 नये जहाज लाए जाएंगे। मंत्री ने यह भी बताया कि सागरमाला परियोजना के तहत लगभग 4 लाख करोड़ रुपये बंदरगाह-सड़क संपर्क, बंदरगाह-रेल संपर्क, बंदरगाहों का आधुनिकीकरण एवं यांत्रिकीकरण के लिए निर्धारित किए गए हैं। 
      उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत की 7,300 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा और नदियों में किफायती जल मार्ग परिवहन के बड़े पैमाने पर विकास की संभावना है, जिससे लॉजिस्टिक लागत में उल्‍लेखनीय कमी आएगी। यह परिवहन का भी सुविधाजनक प्रकार है। 
     अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में बिजली उत्‍पादन के बारे में बोलते हुए उन्‍होंने कहा कि डीजल से उत्‍पादित बिजली से पर्यावरण में प्रदूषण पैदा होता है। इसे विस्‍थापित किए जाने की आवश्‍यकता है। इसकी जगह अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में पनबिजली, सौर ऊर्जा और पवन बिजली के विकास की संभावनाओं की तलाश की जानी चाहिए। 
    डीजल से उत्‍पादित बिजली द्वारा उत्‍पन्‍न प्रदूषण को कम करने के लिए द्वीपसमूह में एलएनजी एवं सीएनजी आधारित बिजली संयंत्र स्‍थापित किए जाएंगे। गडकरी ने यह भी कहा कि क्रूज टर्मिनलों के विकास से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा। उन्‍होंने निजी क्षेत्र के निवेशकों से द्वीपसमूह में क्रूज पर्यटन विकसित करने का आग्रह किया। 
       मंत्री ने कहा कि सागरमाला परियोजना के माध्‍यम से पर्यटन को और बढ़ावा दिया जाएगा जिससे अंततोगत्‍वा रोजगार सृजन होगा। उन्‍होंने क्रूज पर्यटन को सागरमाला परियोजना का एक हिस्‍सा बनाने की संभावनाएं तलाशने का भी आश्‍वासन दिया।
       इसके अतिरिक्‍त गडकरी ने कहा कि द्वीपसमूह के लिए स्‍थल एवं जल दोनों जगह उपयोग में आने वाले वाहनों की सेवाओं का विकास आदर्श रहेगा। उन्‍होंने इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया। गडकरी ने समुद्र में एवं गहरे समुद्र में मछली पालन, मात्स्यिकी प्रसंस्‍करण और मछली निर्यात के लाभ के लिए आरंभ की गई योजनाओं का भी जिक्र किया जो अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में फलने-फूलने वाली ‘सामु्द्रिक अर्थव्‍यवस्‍था’ को प्रोत्‍साहित करेगी। 
    उन्‍होंने कहा कि सरकार द्वीपसमूहों के बुनियादी ढांचे एवं समग्र विकास, रोजगार सृजन और कल्‍याण के लिए प्रतिबद्ध हैं जो देश की मुख्‍य भूमि से दूर स्थित है। केंद्रीय गृह राज्‍यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के विकास की दिशा में केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। 
     बाराटंग के लिए समुद्री रास्‍ते का आज उद्घाटन हुआ जो राष्‍ट्रीय राजमार्ग-4 रुट का एक विकल्‍प उपलब्‍ध कराएगा जो जारवा जनजातीय अभ्‍यारण्‍य से होकर गुजरता है। बाराटंग को पोर्ट ब्‍लेयर से जोड़ता है। इस प्रकार यह समुद्री रास्‍ता जनजातीय क्षेत्रों को असुविधा पहुंचाए बगैर पर्यटन को बढ़ावा देगा। होप टाउन में गोदी के विस्‍तार की परियोजना से फिलहाल बड़े पोतों की बर्थिंग की सुविधा मिलेगी।
    गोदी का उपयोग पेट्रोलियम उत्‍पादों की आवाजाही के लिए किया जाता है। बड़े पोतों की बर्थिंग से इन उत्‍पादों की उपलब्‍धता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। इस परियोजना के फरवरी 2018 तक संपन्‍न हो जाने की उम्‍मीद है।
     अतिरिक्‍त अप्रोच सेतु (जेट्टी) के निर्माण एवं नील द्वीपसमूह में वर्तमान सेतु के विस्‍तार से एक से अधिक जहाजों को समायोजित करने में मदद मिलेगी जो पहले संभव नहीं था। इस परियोजना के मार्च 2018 तक संपन्‍न हो जाने की उम्‍मीद है।
     पोर्ट ब्‍लेयर में सूखी गोदी-2 के विस्‍तार से उपलब्‍ध जहाज निर्माण एवं जहाज मरम्‍मत सुविधाओं के संवर्द्धन में सुविधा मिलेगी। इस परियोजना के सितंबर 2019 तक संपन्‍न हो जाने की उम्‍मीद है।

ग्रामीण भारत के छह करोड़ नागरिकों को डिजीटल साक्षर प्रशिक्षण

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 7 अक्‍तूबर, 2017 को आईआईटी गांधीनगर में डिजीटल साक्षरता अभिनंदन समारोह को संबोधित करेंगे। 

      प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजीटल साक्षरता अभियान (पीएमजीडीआईएसएचए) सरकार की डिजीटल इंडिया पहल का एक अभिन्‍न अंग है। इस योजना से ग्रामीण भारत में 6 करोड़ नागरिक डिजीटली साक्षर हो सकेंगे। 
 इस समारोह में डिजीटल इस्‍तेमाल डिजीटल वित्‍तीय कारोबार जैसे मुद्दों की ओर ध्‍यान दिलाकर डिजीटल साक्षरता के महत्‍व को उजागर किया जाएगा और लोगों को डिजीटली अधिकार सम्‍पन्‍न बनाकर सूचना, ज्ञान, और कौशल तक उनकी पहुंच प्रदान करने में सहायता दी जाएगी।
      पीएमजीडीआईएसएचए गांव के लोगों को भी समान अवसर प्रदान करना चाहता है ताकि वे राष्‍ट्र निर्माण में सक्रियता से भाग ले सकें और डिजीटल टेक्‍नोलॉजी, उपकरणों और सेवाओं के जरिये आजीविका तक पहुंच सकें। 
   प्रधानमंत्री के अलावा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, गुजरात के मुख्‍यमंत्री विजयभाई रूपानी, मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री सत्‍य पाल सिंह, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और आईटी और पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) के. जे. एल्‍फोंस, गुजरात के उप मुख्‍यमंत्री नितिनभाई पटेल, राज्‍य के शिक्षा और राजस्‍व मंत्री भूपेन्‍द्रसिंह चूड़ासामा समारोह की शोभा बढ़ाएंगे। 
     पीएमजीडीआईएसएचए योजना की शुरूआत सरकार ने फरवरी 2017 में की थी ताकि दो वर्ष के भीतर ग्रामीण भारत के छह करोड़ नागरिकों को डिजीटल साक्षर प्रशिक्षण दिया जा सके। सरकार का लक्ष्‍य प्रत्‍येक परिवार से कम से कम एक व्‍यक्ति को डिजीटली साक्षर बनाना है।
       पीएमजीडीआईएसएचए के अंतर्गत प्रशिक्षित नागरिकों को कम्‍प्‍यूटर, टेबलैट, स्‍मार्ट फोन जैसे उपकरण चलाना और दैनिक जीवन में इंटरनेट का इस्‍तेमाल सिखाया जाएगा ताकि उनके कौशल और ज्ञान को बढ़ाया जा सके और सरकारी से लेकर नागरिक सेवाओं, स्‍वास्‍थ्‍य सेवा और वित्‍तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच बन सके। 
     इस योजना में नागरिकों को डिजीटल कारोबार में सक्षम बनाने पर विशेष ध्‍यान दिया जाएगा। लाभान्वित के बैंक खाते में आधार संख्‍या भेजकर और उसकी विभिन्‍न सरकारी ऑनलाइन सेवाओं जैसे रेलवे टिकट की बुकिंग, पासपोर्ट आवेदन, आदि तक पहुंच बनाकर नागरिक को प्रौद्योगिकी का फायदा उठाने और शासन में सक्रिय रूप से भाग लेने योग्‍य बनाया जा सकेगा। 
     अब तक डिजीटल साक्षर प्रशिक्षण के लिए पीएमजीडीआईएसएचए पोर्टल में 55 लाख से अधिक नागरिकों को पंजीकृत किया जा चुका है, इनमें से 22 लाख नागरिकों सफलतापूर्वक आंकलन पूरा करने के बाद प्रमाणित किया जा चुका है। यह योजना प्रशिक्षण केन्‍द्र प्रत्‍येक पंचायत में एक (2.5 लाख प्रशिक्षण केन्‍द्र) के जरिये लागू की जाएगी।
      प्रशिक्षण कराने की सुविधा वाले सीएसआर और एनजीओ के जरिये कार्पोरेट भी डिजीटल साक्षरता कार्यक्रम में भाग लेंगे। करीब 7000 प्रशिक्षण केन्‍द्र ऑपरेटर (सीएससी-वीएलई) साझा सेवा केन्‍द्र देश भर के विभिन्‍न राज्‍यों के ग्राम स्‍तर के उद्यमी डिजीटल साक्षरता अभिनंदन समारोह में भाग लेंगे।
     पीएमजीडीआईएसएचए के अंतर्गत प्रशिक्षित और प्रमाणित करीब 500 नागरिक भी समारोह में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री ग्राम स्‍तर के पांच उद्यमियों और पांच डिजीटली साक्षर नागरिकों को समारोह में पुरस्‍कृत करेंगे। देश भर के सभी 2.6 लाख साझा सेवा केन्‍द्र स्‍थानीय नागरिकों को एकजुट कर, अपने केन्‍द्र के डिजीटली साक्षर उम्‍मीदवारों के साथ इस समारोह का गांधीनगर से सीधा प्रसारण करेंगे। 
     इस समारोह का दूरदर्शन के राष्‍ट्रीय चैनल से भी प्रसारण किया जाएगा। साझा सेवा केन्‍द्र (सीएससी) योजना डिजीटल इंडिया का अभिन्‍न अंग है जो इलैक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की पहल है।
      गांवों के स्‍तर पर सीएससी और आईसीटी सक्षम अग्रांत सेवा देने वाले स्‍थान सरकार की वित्‍तीय, सामाजिक और कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, मनोरंजन, एफएमसीजी उत्‍पादों, बैंकिंग, बीमा, पेंशन, जनोपयोगी भुगतान आदि जैसी निजी क्षेत्र की सेवाओं को पहुंचाने में सक्षम बनाते हैं।
     सीएससी का प्रबंधन और संचालन ग्राम स्‍तर के उद्यमी करते हैं। इस समय देश भर में 2.6 लाख सीएससी हैं। इनमें से 90 प्रतिशत का प्रबंधन और संचालन महिलाएं कर रही हैं। प्रत्‍येक सीएससी में औसतन 4 से 5 व्‍यक्ति कार्यरत हैं।

यूरोपियन यूनियन के साथ बहु-आयामी साझेदारी मूल्यवान

  नई दिल्ली। भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि 14वें शिखर सम्मलेन के अवसर पर हमें श्री टुस्क और श्री युंकर का स्वागत करने का सौभाग्य मिला।

     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि यूरोपियन यूनियन के साथ बहु-आयामी साझेदारी हमारे लिए बहुत मूल्यवान है, अहम महत्त्व रखती है। 1962 में स्थापना के बाद भारत संबंध स्थापित करने वाले सबसे पहले देशों में था। 
     दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के रूप में हम एक प्रकार से स्वाभाविक साझेदार हैं। हमारे घनिष्ठ संबंधों की नींव लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि अनुसार शासन यानि मूलभूत स्वतंत्रताओं और बहु-संस्कृतिवाद यानि जैसी साझा मान्यताओं पर रखी गई है। 
      साथ ही साथ हम दोनों के बीच विचारधारा भी साझा है।पिछले वर्ष ब्रसेल्स में 13द्यण् शिखर सम्मलेन के बाद हमारे संबंधों में काफी गति आई है। 
    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आज की हमारी मुलाकात में हमारे सहयोग के व्यापक एजेंडा पर हुए उपयोगी विचार-विमर्श के लिए मैं टुस्क और युंकर का ह्रदय से आभार प्रकट करता हूं। हम कई नए क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार करने में सफल हुए हैं। 
    हम इस बात पर सहमत हैं कि आपसी विश्वास और समझ पर आधारित इन संबंधों को हमें अधिकाधिक व्यापक और लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयास करते रहना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि 13वें शिखर सम्मलेन में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की आज हमने समीक्षा की। 
     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ़ मिल कर काम करने और इस विषय पर अपने सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर हम दोनों सहमत हैं। इस विषय पर हम न सिर्फ़ द्विपक्षीय स्तर पर अपना सहयोग मजबूत करेंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर भी हम अपना सहयोग और समन्वय बढ़ाएंगे।
        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपियन यूनियन को मजबूत करने में आप दोनों के नेतृत्व और योगदान के लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं। मेरी यह आशा और अपेक्षा रहेगी कि भारत की आपकी आगामी यात्रा इतनी कम अवधि की न हो।