Tuesday, 17 October 2017

पर्यटन भारत के सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में एक

   नई दिल्ली। पर्यटन क्षेत्र भारत के सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में एक है। यह प्रक्षेत्र समाज के कमजोर तबकों के लिए समावेशी विकास को प्रोत्साहन देता है। 

  पर्यटन पर्व का एक प्रमुख उद्देश्य है, पर्यटन को आर्थिक विकास का एक प्रमुख स्तंभ मानना तथा लोगों को इस क्षेत्र के प्रति जागरूक बनाना और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी से रोजगार के अवसर सृजित करना तथा गरीबी का उन्मूलन करना। पर्यटन पर्व की थीम है पर्यटन : सभी के लिए। देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ पर्यटन क्षेत्र के सभी संगठित और असंगठित क्षेत्रों के हितधारकों को सहभागी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
       पर्यटन पर्व के दौरान कौशल विकास व प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। युवाओं के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र से जुड़े सभी सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया। इसके अतिरिक्त स्थानीय समुदायों को भी पर्यटन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें आय में वृद्धि, जीवन स्तर बेहतर होने, स्थानीय कला, संस्कृति, हस्तकला, खानपान आदि की लोकप्रियता में बढ़ोत्तरी के बारे में बताया गया। 
      स्थानीय समुदायों को आजीविका के नए अवसर सृजित होने के बारे में भी जानकारी दी गई। सेवा प्रक्षेत्र, प्रशिक्षित कार्यबल की कमी का सामना कर रहा है। पर्यटन पर्व के दौरान यह सुविधा दी गई कि जो भी पर्यटन क्षेत्र से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं वे अपने कौशल को प्रशिक्षण के द्वारा बेहतर बना सकते हैं। पर्यटन मंत्रालय की दो महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, स्वदेश दर्शन और प्रसाद। इन योजनाओं की महत्वपूर्ण विशेषता है, पर्यटन स्थलों और पर्यटन सर्किट के आस-पास के क्षेत्रों में आधारभूत संरचना का विकास।
     इसमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है तथा रोजगार के नए अवसरों का सृजन होता है। पूरे देश में पर्यटन पर्व का 13वां दिन, भूतपूर्व सैनिक कल्याण, ट्रेवल ट्रेड एसोसिएशन व राज्य सरकार के सहयोग से पर्यटन मंत्रालय द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन। उद्देश्य – पर्यटन क्षेत्र में भूतपूर्व सैनिकों की सेवा का उपयोग। संस्कृति मंत्रालय और आईजीएनसीए ने चेन्नई के ललित कला अकादमी में एमएस : ए लाइफ इन म्यूजिक विषय पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया। 
     झारखंड सरकार के सूचना व जनसंपर्क विभाग ने संस्कृति म्यूजियम के सहयोग से हजारीबाग में ट्राइबल हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों ने अपने छात्रों के लिए पर्यटन को ध्यान में रखते हुए कई छोटी यात्राओं का आयोजन किया। कोलकाता के इंडिया टूरिज्म ने ओडिशा सरकार की सहायता से पर्यटन और हस्तकला प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, क्विज प्रतियोगिता जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए।
   गुवाहाटी के इंडिया टूरिज्म ने राज्य सरकार की सहायता से राफ्टिंग, कयाकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग तथा टूर ऑपरेटरों, ट्रेवल एजेंटों तथा होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए पर्यटन कार्यशाला का आयोजन किया। आईएचएम और आईआईटीटीएम के सहयोग से इंडिया टूरिज्म, दिल्ली ने संजय पार्क, सरोजनी नगर तथा कुतुब मीनार में योग सत्रों का आयोजन किया।
  लाल किले में हस्तकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। महरौली पार्क में हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया। दुकानदारों, रिक्शा और ऑटो रिक्शा चालकों के लिए नई दिल्ली के इंद्रपूरी मार्किट तथा चंडीगढ़ के सेक्टर-42 में अतिथि देवो भव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
   महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, केरल, झारखंड व गुजरात राज्यों में विभिन्न  सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा प्रतियोगिताएं आयोजित की गई।
  माई गॉव वेबसाइट पर देखो अपना देश विषय पर फोटो प्रतियोगिता, क्विज प्रतियोगिता, ब्लॉग प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। दूरदर्शन पर स्माइल इंडिया स्माइल विषय पर फोटो प्रतियोगिता अभी जारी है। सफल प्रतियोगियों को आकर्षक इनाम दिए जाएंगे।

अमेरिका में लगभग एक मिलियन भारतीय मूल के वैज्ञानिक

    नई दिल्ली। केन्‍द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने प्रौद्योगिकी को सरकार का प्राथमिकता क्षेत्र बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्‍य विज्ञान को जन केन्द्रित बनाना है।

   डॉ. हर्षवर्धन अमेरिकी अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी समिति के अध्‍यक्ष लेमर स्थिम के नेतृत्‍व में आए अमेरिकी कांग्रेस के शिष्‍टमण्‍डल से बातचीत कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि भारत में टेक्‍नोलॉजी प्रेरक बल है। 
    उन्‍होंने शिष्‍टमण्‍डल को बताया कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) 200 प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहा है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अमेरिका में लगभग एक मिलियन भारतीय मूल के वैज्ञानिक और इंजीनियर काम कर रहे हैं। 
      उन्‍होंने कहा कि ‘प्रतिभा पलायन’ की प्रक्रिया अब ‘प्रतिभा लाभ’ में बदल गई है क्‍योंकि अनेक युवा वैज्ञानिक भारत लौटने लगे हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वित्त पोषण में वृद्धि से मूल गतिविधियां बढ़ाई जा सकती हैं। दोनों पक्षों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

भारत में ही नहीं विश्‍व में अरबों दिलों पर डॉ. एम.एस. सुब्‍बुलक्ष्‍मी ने राज किया

    चेन्‍नई। उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि कर्नाटक संगीत में डॉ. एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी अद्वितीय रहेंगी। 

   उपराष्‍ट्रपति तमिलनाडु के चेन्‍नई में डॉ. एम.एस. सुब्‍बुलक्ष्‍मी के जन्‍म शताब्‍दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्‍यपाल बनवारीलाल पुरोहित, तमिलनाडु के मत्‍स्‍य, कार्मिक और प्रशासनिक सुधार मंत्री डी. जयकुमार, डॉ.एम.एस. सुब्‍बुलक्ष्‍मी के पारिवारिक सदस्‍य तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति मौजूद थे।
      उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि डॉ. एम.एस. सुब्‍बुलक्ष्‍मी को एम.एस अम्‍मा के रूप में जाना जाता है, जो कई दशकों तक भारतीय कर्नाटक संगीत की प्रमुख हस्‍ती रहीं। उन्‍होंने न केवल तमिलनाडु, दक्षिण भारत तथा भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्‍व में अरबों दिलों पर राज किया। 
    उन्‍होंने शास्‍त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि वह उस ऊंचाई तक पहुंच गई, जहां सभी मतभेद खत्‍म हो जाते हैं। उन्होंने जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाया तो सारे देश एक साथ खड़े हो गए थे। इस तरह की शानदार कला से जाति, धर्म और राष्ट्रीयता जैसे सभी भेदभाव खत्म हो जाते हैं। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब महात्मा गांधी ने 'वैष्णव जन तो' गीत सुना था तो वह भी मंत्रमुग्ध हो गए थे। उन्होंने आगे कहा कि वह जानते थे कि वह वह शायद गाना नहीं गा सकती हैं लेकिन उन्होंने अनुरोध किया था। महात्मा गांधी ने उनसे कहा था, "मैं चाहूंगा कि मैं उनके द्वारा की गई पंक्तियों का पाठ भले ही सुन लूं, लेकिन किसी और की आवाज में इसे पंसद नहीं करूंगा" उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह न केवल एक उत्कृष्ट गायक थीं, बल्कि एक महान अभिनेत्री भी थी, जिन्होंने सिल्वर स्क्रीन पर भक्त मीरा और शकुंतला की भूमिका भी निभाई थी।

देश का पहला अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान राष्‍ट्र को समर्पित

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आयुर्वेद दिवस पर नई दिल्‍ली में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान राष्‍ट्र को समर्पित किया। 

  अब तक के इस पहले अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान (एआईआईए) की स्‍थापना अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (एम्‍स) की तर्ज पर की गई है। आयुष मंत्रालय के तहत एक शीर्ष संस्‍थान के रूप में एआईआईए आयुर्वेद की पारंपरिक बुद्धिमत्‍ता और आधुनिक नैदानिक उपकरण एवं प्रौद्योगिकी के बीच समन्‍वय स्‍थापित करेगा। केन्‍द्रीय आयुष राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीपद नाईक भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
  इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने आयुर्वेद दिवस पर धनवंतरि जयंती मनाने के लिए उपस्थित जन समूह को बधाई दी। उन्‍होंने आयुष मंत्रालय को अखिल भारतीय आयुर्वेद की स्‍थापना के लिए सराहना की। 
     प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि राष्‍ट्र तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक वह अपने इतिहास और विरासत का सम्‍मान नहीं करता, उन्‍हें संजो कर नहीं रखता। उन्‍होंने कहा कि जो राष्‍ट्र अपनी विरासत को पीछे छोड़ देते हैं, वे अपनी पहचान भी खो बैठते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत स्‍वतंत्र नहीं था, तब उसके ज्ञान और योग तथा आयुर्वेद जैसी इसकी परंपराओं का सम्‍मान नहीं किया जाता था।
      प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश के प्रत्‍येक जिले में एक आयुर्वेद अस्‍पताल की स्‍थापना करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्‍होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में 65 से अधिक आयुष अस्‍पतालों का निर्माण किया गया है। श्रीपद येस्‍सो नाईक ने घोषणा की कि निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के साथ सरकार अगले पांच वर्षों के दौरान आयुर्वेद सुविधाओं में तीन गुना बढ़ोत्‍तरी के लिए प्रयास करेगी। 
      मंत्री ने कहा कि ‘भारत 2022 में अपना 75वां स्‍वतंत्रता दिवस मनायेगा। इस अवसर पर हमारी कोशिश अगले पांच वर्षों में आयुर्वेद सुविधाओं में तीन गुना बढ़ोत्‍तरी करने की है।‘ नाईक ने यह भी कहा कि इस लक्ष्‍य को अर्जित करने के लिए भारी मात्रा में निवेश करने की जरूरत है। इसलिए, सरकार निजी क्षेत्र को भी आयुर्वेद के क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रोत्‍साहित कर रही है।
      उन्‍होंने ‘आयुष्मान भारत’ के स्‍वप्‍न को पूरा करने के लिए स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्‍वच्‍छ भारत – स्‍वस्‍थ भारत एवं स्‍टार्ट अप इंडिया जैसी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए चिकित्‍सकों, छात्रों एवं आयुर्वेद का अनुसरण करने वालों से अपील की। मंत्री ने उपस्थित जन समूह को उनके मंत्रालय द्वारा आयुर्वेद एवं चिकित्‍सा की अन्‍य वैकिल्‍पक प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए उठाये गये कदमों के बारे में जानकारी दी।
     उन्‍होंने कहा कि पिछले 2 वर्षों के दौरान आयुर्वेद में लोगों की दिलचस्‍पी और विश्‍वास कई गुना बढ़ा है। निजी क्षेत्र में भी आयुर्वेद अस्‍पतालों की संख्‍या बढ़ रही है। मंत्रालय ने इस प्राचीन चिकित्‍सा पद्धति में दवाओं और उपचारों को मानक बनाने के लिए एक ‘आयुर्वेद मानक दिशा निर्देश’ का प्रकाशन किया है। भारतीय चिकित्‍सा फार्माकोपिया आयोग दवाओं के मानकीकरण के लिए कार्य कर रहा है। 
     नाईक ने कहा कि विश्‍व भर में चिकित्‍सा की भारतीय प्रणालियों को लोकप्रिय बनाने के लिए, मंत्रालय ने 29 देशों में आयुष सूचना प्रकोष्‍ठों की स्‍थापना की है। कई देशों में आयुर्वेद पीठों की भी स्‍थापना की गई है। मंत्रालय ने आयुर्वेद एवं योग के विकास के लिए अमेरिका के राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ‘आयुर्वेदिक मानक उपचार दिशा निर्देश’ का विमोचन किया। आयुष मंत्रालय द्वारा इन दिशा निर्देशों को तैयार किया गया है। 
      प्रधानमंत्री ने पुणे के राम मणि अयंगर स्‍मारक योग्‍य संस्‍थान, जिसकी घोषणा इस वर्ष अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस पर की गई थी, को योग पुरस्‍कार प्रदान किये। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान (एआईआईए) की स्‍थापना 157 करोड़ रूपये के बजट के साथ 10.015 एकड के कुल परिसर क्षेत्र में की गई है। इसमें एक एनएबीएच प्रत्‍यायित अस्‍पताल एवं एक अकेडमिक ब्‍लॉक है। बाहर से आने वाले रोगियों को एआईआईए के अस्‍पताल ब्‍लॉक में सेवाएं प्रदान की जाती हैं और निशुल्‍क दवाएं दी जाती हैं। 
     वर्तमान में अस्पताल के ब्लॉक में चल रहे नैदानिक विशेषताओं में न्यूरोलॉजिकल एंड डिगेनेरेटिव डिसीज केयर यूनिट, रुमेटोलॉजी और मस्कुलोस्केलेटल केयर यूनिट, मधुमेह और मेटाबोलिक, एलर्जी संबंधी विकारों की देखभाल इकाई, योग, पंचकर्म क्लिनिक, क्रिया कल्प, मधुमेह रेटिनोपैथी क्लिनिक, क्षार एवं अनुशास्‍त्र कर्म और बांझपन क्लिनिक शामिल हैं। इसमें रोग विज्ञान, जैव रसायन, सूक्ष्म जीव विज्ञान और रेडियोलॉजी प्रयोगशालाओं, निदान सुविधाएं शामिल हैं।
     इनडोर रोगी विभाग में 200 बिस्तरों के लिए प्रावधान है। आयुष मंत्रालय ने सभी राज्‍य सरकारों, राज्‍य आयुष निदेशालयों, सभी आयुर्वेद महा विद्यालय, शिक्षण संस्‍थानों, आयुष / स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍व विद्यालयों, आयुर्वेद चिकित्‍सक संगठनों, आयुर्वेद उद्योगों एवं भारत में तथा विदेश में आयुर्वेद के सभी समर्थकों / शुभचिंतकों तथा हितधारकों से 17 अक्‍टूबर, 2017 को आयुर्वेद दिवस मनाने तथा आयुर्वेद दिवस समारोह के एक हिस्‍से के रूप में सार्वजनिक व्‍याख्‍यानों / संगोष्ठियों / प्रदर्शनियों / रेडियो वार्ताओं आदि के आयोजन जैसी विभिन्‍न गतिविधियां आरंभ करने का आग्रह किया है।

जनसेवा कर रहे संस्थान को सहायता की जरूरत

   चेन्नई। उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि हरिजन सेवक संघ जैसे संस्थान जन-सेवा कर रहे हैं।  इसलिए इन्हें समाजसेवियों, कार्पोरेट और संसाधनों वाले व्यक्तियों से मदद मिलनी चाहिए। 

    उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू चेन्नई, तमिलनाडु में ठक्कर बापा विद्यालय के पुनः समर्पण, ठक्कर बापा की पुनर्निर्मित मूर्ति के अनावरण और दीदी निर्मला देशपांडे निलयम के स्तंभ की आधारशिला की फाउंडेशन की पट्टिका के अनावरण के लिए आयोजित समारोह में संबोधित कर रहे थे। 
    तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और तमिलनाडु के मत्स्य पालन, कार्मिक और प्रशासनिक सुधार मंत्री डी.जयकुमार भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीदी निर्मला देशपांडे ने अपनी अंतिम सांस तक इस संगठन का नेतृत्व किया। वे समर्पित गांधीवादी थी। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में हजारों लोगों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया। उन्होंने भू-दान आंदोलन में भाग लिया और महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज के संदेश को लोकप्रिय बनाने के लिए पूरे देश में 40,000 किलोमीटर लंबी पद यात्रा की। वह शांति की सच्ची दूत थी। उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी संघर्ष किया था।
     उप राष्ट्रपति ने श्री गीता भवन न्यास की पट्टिका के अनावरण पर खुशी जाहिर की। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए। इस सेवा को जारी रखते हुए लोगों की सहायता करने में योगदान करने के लिए बधाई दी। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि हरिजन सेवक संघ और इसकी इकाइयां प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर भाग ले रही हैं। उन्होंने इस महान उद्देश्य में बड़े उत्साह और उमंग के साथ भाग लेने के लिए भी विजेताओं को बधाई दी। 
      उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि मैं इस गांधीवादी संस्थान हरिजन सेवक संघ के साथ जुड़कर अपने आप को सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। इस संस्थान का संविधान, नियम और विनियम महात्मा गांधी ने स्वयं 1932 में स्वयं लिखे थे। मैं विशेष रुप से ठक्कर बापा विद्यालय का पुनः समर्पण और दीदी निर्मला देशपांडे निलयम के स्तंभ आधारशिला की पट्टिका के अनावरण के अवसर पर आयोजित समारोह में आकर बहुत प्रसन्न हों क्योंकि यह कार्यक्रम उन दीदी निर्मला देशपांडे के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है जिन्हें में दशकों से जानता था। 
      उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि दीदी निर्मला देशपांडे ने अपनी अंतिम सांस तक इस संस्थान का नेतृत्व किया और वे समर्पित गांधीवादी थी। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में हजारों लोगों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया। उन्होंने भू-दान आंदोलन में भाग लिया और महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज के संदेश को लोकप्रिय बनाने के लिए पूरे देश में 40,000 किलोमीटर लंबी पद यात्रा की। वह शांति की सच्ची दूत थी और उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी संघर्ष किया था।
      उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि ठक्कर बापा विद्यालय 2015 में बाढ़ के कारण तबाह हो गया था और आठ फीट गहरे पानी में चला गया था। 2016 में चक्रवात में यह फिर से क्षतिग्रस्त हो गया था और सबसे बड़े दुख की बात यह है कि बाढ़ में गांधीजी पर लिखी 10,000 से भी अधिक किताबें नष्ट हो गईं थीं। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि अपील के बाद अनेक लोगों ने राष्ट्रपिता के बारे में लिखी अनेक किताबें इस विद्यालय को दान कर दी थीं। विद्यालय की कार्यशाला और मशीनरी की भी मरम्मत हो गई है। 
      उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि ठक्कर बापा गांधीजी के निकट सहयोगी थे। उनकी मूर्ति भी जलमग्न हो गई थी। उसका नवीनीकरण किया गया है। इस मूर्ति का अनावरण करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मुझे बताया गया है कि इस मूर्ति का मूल रूप से अनावरण 29.11.1962 को किया गया था। वास्तव में यह गौरव की बात है कि डॉ राजेंद्र प्रसाद, श्री राजगोपालाचारी, श्री वेंकटरमन और दीदी निर्मला देशपांडे इस प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़े थे। 
     यह संस्थान जो 1935 में हरिजन लड़कों के लिए औद्योगिक विद्यालय के रूप में शुरू किया गया था, अब इसमें सभी वर्गों के छात्रों का दाखिला हो रहा है समुदाय के भाइयों और बहनों को प्राथमिकता देते हुए सभी वर्गों को गांधीजी की इच्छानुसार एकीकृत कर रहा है। मुझे जानकर प्रसन्नता हुई कि यह परिसर प्री.के.जी से प्राथमिक स्तर की मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने के अलाव घर से दूर रहने वाली कामकाजी महिलाओं को एक छात्रावास उपलब्ध करा रहा है और यहां गांधी सार्वजनिक पुस्तकालय भी स्थित है। 
     उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि हरिजन सेवक संघ की दीदी निर्मला देशपांडे निलयम को उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली लड़कियों के लिए आवास उपलब्ध कराने के लिए बनाया जा रहा है। संघ उन्हें निःशुल्क आवास और शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। इसमें परोपकारी व्यक्तियों और संगठनों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। कुछ छात्रों के लिए बोर्डिंग अनुदान तमिलनाडु सरकार से भी प्राप्त हो रहा है। मुझे बताया गया है कि 2020 तक इस भवन का निर्माण पूरा हो जाने से 200 से अधिक लड़कियों को आवास सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। 
     उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि मैं समझता हूं कि कठिन सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाली ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली लड़कियों के लिए छात्रावासों की बहुत मांग है। मुझे बताया गया है कि वर्तमान छात्रावास भवन बहुत खतरनाक स्थिति में है और साधारण बारिश होने पर भी इसमें पानी भर जाता है। प्रोफेसर शंकर कुमार सान्याल के नेतृत्व में नए भवन की परियोजना शुरू की गई है। 
     मुझे जानकर खुशी हुई है कि श्री गीता भवन ट्रस्ट ने 65 लाख रूपये की लागत की स्तंभ आधारशिला को प्रायोजित करके नई इमारत का निर्माण शुरू किया है। मैं उन्हें बधाई देता हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में इससे हजारों लड़कियों को मदद मिलेगी। श्री गीता भवन ट्रस्ट की पट्टिका का अनावरण करके मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। 
       उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि मैं सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देता हूं कि उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए अपनी सेवाएं जारी रखी और लोगों की मदद की। मुझे बताया गया है कि सीएसआर की पहल के हिस्से के रूप में ठक्कर बापा विद्यालय और हरिजन सेवक संघ दोनों के प्रस्तावों पर विभिन्न सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों जैसे - नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन, ओएनजीसी, कोल इंडिया, एलआईसी, गोल्डन जुबली फंड, एशियन पेंट्स, आरसीसी दिवा झ्र्राजस्थान एसोसिएशनट, लायंस क्लब और अन्य विचार कर रही हैं। 
      मुझे विश्वास है कि ये संगठन ठक्कर बापा विद्यालय और हरिजन सेवक संघ की मदद के लिए इन परियोजनाएं में सहायता करेंगे। महात्मा गांधी ने कहा कि "मानवता की सेवा भगवान की सेवा है"। ये संस्थान लोक सेवा कर रहे हैं इन्हें परोपकारी, कॉर्पोरेट और अन्य संसाधनों वाले व्यक्तियों से मदद मिलनी चाहिए। 
     मुझे बताया गया है कि हरिजन सेवक संघ और इसकी इकाइयां प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर भाग ले रही हैं। मैं इनके लिए इन्हें बधाई देता हूँ। अंततः दीदी निर्मला देशपांडे के सहयोगी के रूप में, मैं आप सभी से इस महान संस्थान की सहायता करने की अपील करता हूँ क्योंकि इस संस्था का संविधान खुद महात्मा गांधी ने लिखा है।

निर्माण श्रमिको के रहने की गरिमा सुनिश्चित करें बिल्‍डर

   नई दिल्ली। आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बड़ी संख्‍या में निर्माण श्रमिकों के रहने की स्थिति पर गंभीर चिंता व्‍यक्‍त की है। बिल्डिरों से आग्रह किया है कि वे श्रमिकों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करें, ताकि वे एक सम्‍मानित जीवन शैली जी सकें।

   यह बात उन्‍होंने इंडियन बिल्‍डर्स कांग्रेस (आईबीसी) के 25 साल पूरे होने के अवसर पर एक स्‍मारक टिकट जारी करने के बाद कही। पुरी ने आईबीसी के 5,100 सदस्‍यों को याद दिलाया कि सामान्‍य अनुबंध शर्तें और अनुबंध श्रम (विनियमन) अधिनियम की धारा 19एच के तहत निर्माण स्‍थल पर रहने वाले श्रमिकों के लिए खाना पकाने, नहाने और शौचालय की सुविधाओं के साथ सम्‍मानित जीवन शैली जीने की स्थिति सुनिश्चित करना उनकी जिम्‍मेदारी है। 
   मंत्री ने कहा कि आमतौर पर इसका अनुपालन नहीं किया जाता है, जो स्‍वीकार्य योग्‍य नहीं है। पुरी ने जोर देकर कहा कि निर्माण श्रमिक देश के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं और सम्‍मान के साथ जीना उनका समान रूप से अधिकार है। 
    पुरी ने कहा कि निर्माण स्‍थल पर रहने वाले श्रमिकों का रहने की जीवन शैली भी महत्‍वपूर्ण है। पुरी ने कहा कि रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में किये गये आर्थिक सुधार जारी है, लेकिन एक नियामक तंत्र की कमी की वजह से इसमें बाधाएं भी आ रही थीं। 
  इस वजह से रियल एस्‍टेट कानून को जरूरी कर दिया गया है, जिसे सरकार ने आठ साल के लम्‍बे इंतजार के बाद पिछले वर्ष लागू कर दिया है। पुरी ने जोर देकर कहा कि रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में कई बाधाएं आईं, लेकिन जल्‍द ही इन्‍हें दूर कर लिया जाएगा। सभी हितधारकों तथा श्रमिकों के लिए स्थिति सामान्‍य हो जाएगी।

बांग्‍लादेश का नौसैनिक जहाज सोमुद्र अभिजन विशाखापत्तनम की सद्भावना यात्रा पर

  विशाखापत्तनम। बांग्‍लादेश का नौसैनिक जहाज सोमुद्र अभिजन चार दिन की पूर्वी नौसेना कमान की सद्भावना यात्रा पर 16 अक्‍टूबर, 2017 को विशाखापत्तनम पहुंचा। 

  आगमन से पहले जहाज ने ‘पैसेज अभ्‍यास’ किया। इसमें बंदरगाह में प्रवेश करने से पहले बंगाल की खाड़ी में नौसैनिक करतब शामिल है। बांग्‍लादेश के नौसैनिक जहाज को पूर्वी नौसेना कमान और पूर्वी बेड़े के अधिकारियों ने शानदार स्‍वागत किया। 
   जहाज के आगमन पर भारतीय नौसेना की आरे से बैंड वादन किया गया। सोमुद्र अभिजन की कमान कमांडर एम. मोनीरुज्‍जमा (टीएएस), पीएससी, बीएन संभाल रहे हैं। सोमुद्र अभिजन 60 कैडेटों वाला कैडेट प्रशिक्षण स्‍क्‍वैड्रन का हिस्‍सा है।
   विशाखापत्तनम प्रवास के दौरान बांग्‍लादेश के दल के लिए पेशेवर, क्रॉस डेक विजिट खेलकूद तथा सामाजिक संवाद के कार्यक्रम तय किए गए हैं। कमान अधिकारी, पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, वाइस एडमिरल एचसीएस बिष्‍ट, पीवीएसएम, एवीएसएम एडीसी से मुलाकात करेंगे।

राजभाषा के मूल-लेखन पर बल

     नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री, राम विलास पासवान ने नई दिल्ली में उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा आयोजित हिंदी पखवाड़े की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए । 

01 सितम्बर, 2017 से 15 सितम्बर, 2017 तक आयोजित किए गए हिंदी पखवाड़े के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगभग 60 अधिकारियों कर्मचारियों ने भाग लिया। 28 अधिकारियों कर्मचारियों को पुरस्कृत किया गया।
    इस अवसर पर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री सी आर चौधरी सहित विभाग के सचिव, अविनाश कुमार श्रीवास्तव एवं अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। 
      राम विलास पासवान ने पुरस्कृत किए गए सभी अधिकारियों कर्मचारियों को प्रमाणपत्र एवं नकद पुरस्कार वितरित किए। इस अवसर पर पासवान ने अपने विचार रखते हुए राजभाषा के मूल-लेखन पर बल दिया। केंद्रीय राज्य मंत्री, सी आर चौधरी ने अन्य भाषाओं के शब्दों को हिंदी में अपनाने पर बल दिया।
    विभाग के सचिव, अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि हमें अपना अधिक-से-अधिक कार्य मूलरूप से हिंदी में करना चाहिए। इस कार्यक्रम के अंत में विभाग के हिंदी प्रभारी, अवधेश कुमार चौधरी ने सभी उपस्थितों का धन्यवाद किया तथा कृतज्ञता व्यक्त की।