Sunday, 12 November 2017

भारत-फिलिपींस के बीच कृषि समझौता

  नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि और संबंधित क्षेत्रों में भारत और फिलिपींस के बीच समझौता पर हस्‍ताक्षर को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। 

   इस एमओयू से कृषि के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग में सुधार आएगा और यह दोनों देशों के लिए परस्‍पर लाभकारी होगा।
   इससे दोनों देशों के बीच सर्वोत्‍तम कृषि पद्धतियों को समझने में बढ़ावा मिलेगा। इससे बेहतर उत्‍पादकता के साथ-साथ उन्‍नत वैश्‍विक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। 
    इस एमओयू में धान उत्‍पादन और प्रसंस्‍करण, बहुफसली प्रणाली, शुष्‍क भूमि खेती प्रणाली, जैविक खेती,सॉलिड और जल अनुरक्षण एवं प्रबंधन, मृदा की उर्वरकता, रेशम कीट पालन, कृषि वाणिकी, पशुधन सुधार आदि के क्षेत्रों में सहयोग के लिए प्रावधान किया गया है। 
    इस एमओयू में संयुक्‍त कार्यदल के गठन का प्रावधान है जिसमें समान संख्‍या में प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस संयुक्‍त कार्यदल की प्रत्‍येक दो वर्षों में एक बैठक होगी, जो बारी-बारी से फिलीपींस और भारत में आयोजित की जाएगी।

गुरू का स्थान नहीं ले सकता गूगल

    भुवनेश्वर। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि गूगल कभी भी गुरू का स्थान नहीं ले सकता। वे ओडिशा में भुवनेश्वर में स्थित कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी युनिवर्सिटी के 13वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

  ओड़िशा के राज्यपाल एस.सी. जमीर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
  उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा की प्रक्रिया कक्षाओं, खेल मैदानों, घर, इंटरनेट के माध्यम और मीडिया तथा अपने आसपास के लोगों के साथ बातचीत के साथ चलती रहती है।
  उन्होंने कहा कि सभी औपचारिक और अनौपचारिक तौर-तरीके हमें शिक्षित करने में अपना योगदान देते हैं।
  नायडू ने कहा कि आज के ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के दौर में नए कौशल और नवीन ज्ञान को प्राप्त करना बेहद महत्तवपूर्ण है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अपनी क्षमताओं और ज्ञान में वृद्धि तथा तेजी से बदल रहे कामकाज के तौर-तरीकों के हिसाब से स्वयं को ढालना बेहद जरूरी हो गया है। 
    उन्होंने छात्रों को कुछ नया और अलग तरह से सोचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज पहले की तुलना में सूचना और ज्ञान के ज्यादा संसाधन मौजूद हैं, छात्रों को इनका सटीक इस्तेमाल करना चाहिए और अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ बनने का प्रयास करना चाहिए। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि नए विचारों का सृजन, नए विचारों को अपनाना और उसके अनुसार स्वयं को ढालना भारत की ताकत रही है और इस मार्ग को अपनाकर हमें अपनी मातृभूमि के गौरव को बढ़ाना होगा।

अहिंसा से ही स्वस्थ समाज की रचना

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि अहिंसा के पथ पर चलकर ही स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है।

   वे आज नई दिल्ली में अहिंसा विश्व भारती द्वारा 13वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित अहिंसा दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
    इस अवसर पर अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डॉ. लोकेश मुनि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 
  उप राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व भारती संस्थान की स्थापना का उद्देश्य देश और पूरे विश्व में अहिंसा, शांति और सद्भभाव की स्थापना करना है।
    उन्होंने यह भी कहा कि धर्म को समाज सेवा से जोड़कर हम सामाजिक बुराईयों को दूर कर सकते हैं और धर्म को आध्यात्म जोड़ सकते हैं। उपराष्ट्रपति एम. वेकैंया नायडू ने यह भी कहा कि विकास के लिए समाज में शांति और सद्भाव की आवश्यकता है।
       उन्होंने कहा कि अहिंसा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंसा से किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। हिंसा से प्रत्युत्तर में भी हिंसा ही मिलती है इस कारण हिंसा में और बढ़ोतरी होती है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश में भगवान महावीर, भगवान बुद्ध जैसी कई महान विभूतियां हुई है जिन्होंने अहिंसा पर बल दिया है। 
      उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा के शस्त्र से ही भारत को आजादी दिलाई। उन्होंने यह भी कहा की अहिंसा का अर्थ कायरता नहीं है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति बहुवादी है और इसके मूल में बहुलता में एकता है। इसका मूल मंत्र सर्व धर्म सद्भाव है।
    उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि अहिंसा विश्व भारती संस्थान समाज सेवा के जरिए और विशेष रूप से युवाओं को अहिंसा के पथ पर जोड़कर देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।