Wednesday, 10 March 2021

सोना उगलेगी बुंदेलखंड की धरती

     महोबा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बुंदेलखंड की धरती आने वाले दिनों में सोना उगलेगी। अर्जुन सहायक नहर परियोजना की इसमें बड़ी भूमिका होगी। बुंदेलखंड को जिस विकास की आस थी, उसे वह हक मिलना ही चाहिए।

   

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को महोबा जनपद में अर्जुन सहायक परियोजना के लहचूरा बांध का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद वहां उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2600 करोड़ रुपये की लागत वाली अर्जुन सहायक परियोजना से महोबा, हमीरपुर और बांदा जिले के करीब 1.5 लाख किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी। शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इसका लोकार्पण कराया जाएगा। धसान नदी पर बनी इस परियोजना से महोबा, बांदा और हमीरपुर के 168 गांवों के किसानों को सिंचाई और चार लाख लोगों को शुद्ध पेयजल मिलेगा।15000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इस परियोजना के तहत 44381 हेक्टेयर सिंचाई नवसिंचन क्षमता का विस्तार होना है।

    नदी भारत की संस्कृति और परंपरा : सीएम योगी ने कहा कि नदी भारत की संस्कृति व परंपरा व जल के पवित्र स्रोत का आधार रही है। हर नदी को मां का संबोधन देकर गंगा मैया की तरह हमने पूजा है। देशकाल व परिस्थिति के अनुरूप एक-एक बूंद जल का नियोजन होना चाहिए था। लेकिन आजादी के बाद तत्कालीन सरकारों ने इसे लेकर कोई प्रयास नहीं किया। कुछ योजनाएं बनीं भी तो धन की कमी आड़े आ गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आभारी हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कि उन्होंने पीएम कृषि सिंचाई योजना के साथ ही किसी भी परियोजना में धन की कमी नही होने दी।

     महोबा से मेरा विशेष लगाव : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महोबा से मेरा विशेष लगाव है। यह वीरभूमि है, आस्था की भूमि है। यहां की कई विशेषताएं हमें आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं से जोड़ती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार यहां तेजी से विकास कार्य कर रही है। पूर्व की सरकारों ने यहां के 168 गांव को सिंचाई की सुविधा से तथा चार लाख लोगों को पेयजल की सुविधा से वंचित कर रखा था। यहां की योजनाएं कई सालों से लंबित पड़ी थीं। अब हम इस क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर कई स्तर पर कार्य कर रहे हैं। बुंदेलखंड को एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर और जल जीवन मिशन जैसी परियोजनाएं नई ऊंचाई पर ले जाएंगी।

     शुद्ध पेयजल से दूर होंगी आधी बीमारियां : मुख्यमंत्री ने कहा कि शुद्ध पेयजल से आधी बीमारियां अपने आप दूर हो जाएंगी। बुंदेलखंड में हम जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचा रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जलशक्ति मंत्री डॉ महेंद्र सिंह से परिहास करते हुए कहा कि एक समय तक लोग इन्हें हैंडपंप मंत्री मानते थे लेकिन अब यह जल की शक्ति का एहसास करा रहे हैं। जल शक्ति मंत्रालय सिंचाई, पेयजल, ट्यूबवेल और हैंडपंप के जरिए लोगों के जीवन में खुशहाली लाने का कार्य कर रहा है।

     स्थानीय युवाओं को जल जीवन मिशन में मिलेगा रोजगार : सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर स्थानीय नौजवानों को प्लंबिंग की ट्रेनिंग देने की कार्ययोजना बनाएं। इससे यहां के नौजवानों को जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव रोजगार मिल जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस बात के लिए भी प्रेरित किया कि वे संस्थाओं के सीएसआर (कारपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी) फंड के जरिए स्कूलों का कायाकल्प कराएं। मुख्यमंत्री ने महोबा जनपद के लोगों को महाशिवरात्रि और होली की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, जल शक्ति मंत्री डॉ महेंद्र सिंह, महोबा के प्रभारी मंत्री जीएस धर्मेश, सांसद कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, विधायक राकेश गोस्वामी, बृजभूषण राजपूत, अपर मुख्य सचिव जलशक्ति टी.वेंकटेश आदि मौजूद रहे।

सहजन खाने से मजबूत होंगी हड्डियां

     सहजन खाने से मजबूत होंगी हड्डियां... सहजन की जड़, पत्ती, फूल और बीज में कई तरह के गुण पाए जाते है। सहजन खाने से इससे शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, एमिनो एसिड, एंटी-ऑक्सिडेंट मिलते हैं। सहजन कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल करता है। इसमें संतरे से सात गुना ज्यादा विटामिन सी और गाजर से चार गुना ज्यादा विटामिन ए होता है। मोरिंगा की पत्तियों को ताजा या पाउडर के रूप में भोजन के पूरक के रूप में उपयोग किया जाता है।

    हाई ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल :हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को सहजन की पत्तियों का रस निकालकर काढ़ा बनाकर देने से लाभ मिलता है। साथ ही इसका काढ़ा पीने से घबराहट, चक्कर आना, उल्टी में भी राहत मिलती है।

   कैल्शियम का स्रोत :सहजन की फली में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है, जो बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे हड्डियां और दांत दोनों ही मजबूत बनते हैं। इसे गर्भवती महिलाओं को देने से उनके होने वाले बच्चों में कैल्शियम की मात्रा भरपूर मिलती है और होने वाला शिशु तंदुरस्त होता है।

   मोटापा करे कम :मोटापा और शरीर की बढ़ी हुई चर्बी को दूर करने के लिए सहजन को एक लाभदायक औषधि माना गया है। इसमें फॉस्फोरस की मात्रा पायी जाती है, जो कि शरीर की अतिरिक्त कैलोरी को कम करती है और साथ ही वसा को कम कर मोटापा कम करने में सहायक होती है।

     सिरदर्द करे दूर :सहजन के पत्तों का पेस्ट घाव पर लगाया जाता है और इसे सब्जी के रूप में खाने से सिर दर्द में राहत मिलती है। साथ ही सहजन के सेवन से खून साफ होता है, आंखों की रोशनी तेज होती है।

    आनंद कुमार मिश्र, संस्थापक एवं संचालक आर्गेनिक हाट नंदनगर करौंदी आईटीआई रोड वाराणसी

Tuesday, 9 March 2021

दस्तक अभियान : खिलाई जाएगी पेट से कीड़े निकालने की दवा

     लखनऊ।उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में बुधवार यानि 10 तारीख से दस्तक अभियान शुरू हो रहा है। इस अभियान के तहत बच्चों को आयरन की गोली और पेट से कीड़े निकालने की दवा वितरित की जाएगी। यह अभियान 24 मार्च तक चलेगा।

     राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि इस बार दस्तक अभियान के साथ ही राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान भी चलाया जा रहा है। विफ्स कार्यक्रम के अंतर्गत 6 साल से 10 साल के बच्चों को आयरन की पिंक गोली और 11 साल से 19 साल के किशोर किशोरियों को आयरन की नीली गोली वितरित की जाएगी। यह कार्य आशा घर-घर जाकर करेंगी। हर लाभार्थी को 8 गोली दी जाएगी। एक गोली हर हफ्ते खानी है।

   वहीं राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत बुधवार से 1 वर्ष से 19 वर्ष के बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से अल्बेण्डजाल की गोली खिलाई जाएगी। यह अभियान प्रदेश के चिन्हित 25 जनपदों में चलेगा। इन जिलों में हैं अलीगढ़, आगरा, अमरोहा, बिजनौर, बदायूं, बागपत, बुलंदशहर, शामली, सहारनपुर, संभल, मुजफ्फरनगर, रामपुर, मेरठ, मुरादाबाद, ललितपुर, मैनपुरी, कासगंज, मथुरा, हाथरस, झांसी, जीबी नगर, गाजियाबाद, हापुड़, फिरोजाबाद एवं एटा।

      डॉ वेद ने बताया कि पेट में कीड़े और आयरन की कमी दोनों ही बच्चों के विकास में बाधक है। इसलिए बच्चों को यह दवा खाना आवश्यक है। उन्होने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान अभी 25 जिलों में चलाया जा रहा है। शेष जनपदों में आने वालों दिनों में चलाया जाएगा।

      कोविड प्रोटोकाल पर चलेगा अभियान : घर-घर दवा खिलाने जाने वाली आशा कार्यकर्ता कोविड प्रोटोकाल का पालन पूरी तरह से करेंगी। भ्रमण के दौरान आशा को समय-समय ग्लब्स, मास्क और सेनीटाइजर का प्रयोग करना है। साथ ही दो गज की दूरी बनाए रखते हुये अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाना है। आशा को यह निर्देश दिया गया है कि मां-पिता को सिर्फ दवा ही नहीं देनी बल्कि अपने सामने चबाकर कर खिलानी है।

     आज से निःशुल्क बनेंगे आयुष्मान गोल्डन कार्ड : प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत एवं मुख्यमंत्री अभियान के तहत योजना के चयनित लाभार्थियों का आज से निःशुल्क गोल्डन कार्ड बनाया जा रहा है। यह अभियान 24 मार्च तक चलेगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव ने पत्र भी जारी किया है। पत्र के अनुसार गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए अभी तक जन सेवा केन्द्रों पर रुपये 30 देने पड़ते थे लेकिन इस पखवाड़ा के दौरान यह कार्ड मुफ्त में बनाया जाएगा। गौरतलब है कि उक्त योजना के तहत पात्र लाभार्थी के परिवार को प्रति वर्ष रुपये 5 लाख तक सुविधा निशुल्क उपचार की सुविधा मिलती है। गोल्डन कार्ड बनाने के लिए 15 दिसंबर 2020 से 15 जनवरी 2021 तक चले अभियान के दौरान यूपी में 10 लाख से अधिक कार्ड बनाए गए लेकिन अब भी राज्य में इस योजना से आच्छादित 63 प्रतिशत परिवारों का गोल्ड कार्ड बनना शेष है।

दुग्‍ध, पशुपालन व कृषि में महिलाओं ने पुरूषों को पछाड़ा

     लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की महिलाओं व बेटियों को उनकी शक्ति का बोध वृहद अभियान मिशन शक्ति से कराया जा रहा है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ प्रदेश में महिलाओं व बेटियों की सुरक्षा, सम्‍मान व स्‍वावलंबन के लिए संकल्‍पबद्ध हैं। महिलाओं व बेटियों को सशक्‍त बनाने के उद्देश्‍य से उत्‍तर प्रदेश सरकार की स्‍वर्णिम योजनाएं लागू की गई हैं जिससे महिलाओं का आत्‍मबल बढ़ा है। प्रदेश की महिलाओं व बेटियों को सीधे तौर पर योगी सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। बेटियों व महिलाओं के चौमुखी विकास के लिए उनकी सुरक्षा, शिक्षा, स्‍वावलंबन, सम्‍मान, सेहत को केन्द्रित करते हुए योगी सरकार की योजनाओं से प्रदेश की आधी आबादी को प्रोत्‍साहन मिल रहा है।
 
 
    अन्‍तर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने जब प्रदेश की उन महिलाओं को सम्‍मानित किया। जिन्‍होंने योगी सरकार की स्‍वर्णिम योजनाओं से न सिर्फ खुद की जिन्‍दगी में सकारात्‍मक बदलाव लाए बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार की मुख्‍यधारा से जोड़ा। कार्यक्रम में झांसी की रवि रंजना पाल भी उन महिलाओं में से एक थी जिनकी जिन्‍दगी योगी सरकार की योजनाओं से बदली। उन्‍होंने कहा कि दुनिया से गुलामी का नाम मिटा देंगें, हर महिला बंधन को हम मिट्टी में मिला देंगें… इस गीत से अपने संबोधन की शुरूआत करते हुए उन्‍होंने कहा कि मैं बेहद खुश हूं कि स्‍वंय सहायता समूह व राष्‍ट्रीय आजीविका मिशन से महिलाओं को रोजगार दिलाने संग उन्‍हें आत्‍मनिर्भर बनाने का कार्य कर रहीं हूं।
 
 
     उन्‍होंने बताया कि सीएम योगी आदित्‍यनाथ से मिलकर और उनके हाथों सम्‍मान पाकर मेरा आत्‍मविश्‍वास बढ़ा है। उन्‍होंने कहा जय दुर्गा माता स्‍वंय सहायता समूह से अब तक 62 दूसरी महिलाओं को जोड़कर उनको जैविक खेती, पशुपालन की ट्रेनिंग दे रहीं हूं। इसके साथ ही अब तक 140 से अधिक महिलाओं को रोजगार दिला चुकी हूं। उन्‍होंने बताया कि प्रतिमाह 32 हजार की आमदनी योगी सरकार की स्‍वर्णिम योजनाओं से होने लगी है। इसके साथ ही प्रतिदिन 20 से 25 लीटर दूध का उत्‍पादन कर दूसरी महिलाओं को भी डेयरी के जरिए रोजगार मुहैय्या करा रहीं हूं। मैं अपने गांव में 16 सवंय सहायता समूहों की देखरेख कर रहीं हूं।
 
 
     बुंदेलखंड में बलिनी मिल्‍क प्रोडयूसर कंपनी बनाकर बनी आत्‍मनिर्भर : राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ कर महिलाएं कृषि, दुग्‍ध व मुर्गी पालन जैसे व्‍यवसायों में पुरुषों को पछाड़ रही हैं। अकेले बुंदेलखंड में 8 हजार समूह की महिलाएं बालिनी मिल्‍क प्रोडयूसर कंपनी बनाकर 21 हजार लीटर दुग्‍ध का संग्रह कर रही हैं। वहीं, दस लाख से अधिक महिलाओं को खेती व पशुपालन का प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया जा चुका है। यूपी ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक बुंदेलखंड क्षेत्र में दुग्‍ध बेचने के लिए महिलाओं ने प्रोडयूसर कंपनी का गठन किया है। जो बुंदेलखंड के 600 सुदूर इलाकों में एनडीएस के सहयोग से डेयरी परियोजना के तहत 3600 स्‍वयं सहायता समूह की 48 हजार महिलाएं को बालिनी मिल्‍क प्रोडयूसर कंपनी से जोड़ा जा रहा है। अभी स्‍वयं सहायता समूह से जुड़ी चुकी महिलाएं 21 हजार लीटर प्रतिदिन दुग्‍ध उत्‍पादन कर रही हैं।

Sunday, 7 March 2021

प्रधानमंत्री बोले, देशवासी स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच स्थानों शिमला, हिमाचल प्रदेश, भोपाल, मध्यप्रदेश, अहमदाबाद, गुजरात, मारुति नगर, दीव और मंगलौर, कर्नाटक में लाभार्थियों, केंद्र संचालकों और जन औषधि मित्रों के साथ वार्तालाप किया। लाभार्थियों के साथ वार्तालाप करते हुए, प्रधानमंत्री ने उनसे स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का अनुरोध किया। प्रधानमंत्री नें उन्हें बताया कि किफायती दामों के कारण, रोगी बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए आवश्यक दवाएं ले रहे हैं। उन्होंने जन औषधि आंदोलन को बढ़ावा देने वाले युवाओं की प्रशंसा की और उनसे वर्तमान में जारी टीका अभियान में सहयोग करने की अपील की।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 'जन औषधि दिवस' समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान एनईआईजीआरआईएचएमएस, शिलांग में 7500वें जनऔषधि केंद्र को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के लाभार्थियों के साथ वार्तालाप भी किया। प्रधानमंत्री ने हितधारकों के उत्कृष्ट कार्य के लिए उनकी सराहना की।

    प्रधानमंत्री ने लाभार्थियों से कहा कि वह जन औषधि के लाभों के विषय में प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने कहा आप मेरा परिवार हैं और आपके रोग मेरे परिवार के सदस्यों के रोग है, इसलिए, मैं चाहता हूं कि मेरे सभी देशवासी स्वस्थ रहें। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जनऔषधि योजना गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए काफी सहयोगी साबित हुई है। यह सेवा और रोजगार दोनों का माध्यम बन रहा है। शिलांग में जनऔषधि के 7500वें केंद्र का समर्पण पूर्वोत्तर में जन औषधि केंद्रों के प्रचार-प्रसार का संकेत है। मोदी ने कहा कि यह योजना पहाड़ी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को कम मूल्य पर दवाएं उपलब्ध करा रही है।

   उन्होंने कहा कि 7500वें केंद्र का समर्पण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छह वर्ष पूर्व संपूर्ण भारत में इसके 100 केंद्र भी नहीं थे। उन्होंने 10,000 केंद्रों का लक्ष्य प्राप्त करने का आह्वान किया। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार महंगी दवाओं पर प्रति वर्ष लगभग 3600 करोड़ रुपये बचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं के मध्य आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी बढ़ावा दे रही है क्योंकि 1000 से अधिक केंद्र महिलाओं द्वारा ही संचालित किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना को बढ़ावा देने के लिए, दलित, जनजातीय महिलाओं और पूर्वोत्तर के लोगों के लिए 2 लाख के अतिरिक्त प्रोत्साहन के साथ आर्थिक प्रोत्साहन को 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया गया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में दवाओं और शल्य चिकित्सा की मांग बढ़ी है। बढ़ती मांग के साथ ताल-मेल रखने के लिए उत्पादन भी बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनऔषधि केंद्रों में अब75आयुष दवाएं भी उपलब्ध हैं। आयुष दवाओं के सस्ते में मिलने से रोगियों को भी लाभ होगा और आयुर्वेद एवं आयुष चिकित्सा के क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय से, सरकारी दृष्टि में स्वास्थ्य को केवल रोग और उपचार का विषय माना। हालांकि, स्वास्थ्य का विषय केवल रोग और उपचार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, स्वास्थ्य के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण बनाने हेतु, सरकार ने रोगों के कारणों पर भी काम किया है। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान, निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन, आयुष्मान भारत, मिशन इन्द्रधनुष, पोषण अभियान और योग जैसे स्वास्थ्य के प्रति सरकार के समग्र दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया।

     प्रधानमंत्री ने वर्ष 2023 को मोटे अनाज का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में संयुक्त राष्ट्र की मान्यता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मोटे अनाज को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि यह न केवल पौष्टिक खाद्य अनाज प्रदान करेगा बल्कि किसानों की आय में भी बढ़ोतरी करेगा।

    गरीब परिवारों पर चिकित्सा उपचार के भारी बोझ पर ध्यान केन्द्रित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में उपचार में सभी प्रकार के भेदभाव को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है और देश के प्रत्येक गरीब व्यक्ति के लिए चिकित्सा उपचार को सुलभ बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए आवश्यक दवाओं हार्ट स्टेंट घुटने की सर्जरी संबंधी उपकरणों की कीमतें कई गुना कम कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना ने देश के50करोड़ से अधिक गरीब परिवारों के लिए5लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज सुनिश्चित किया है। अब तक1.5करोड़ से अधिक लोगों ने इसका लाभ उठाया है और लगभग30,000करोड़ रुपये की बचत की है।

    प्रधानमंत्री ने स्वदेशी रूप से विकसित कोरोना वैक्सीन के लिए वैज्ञानिकों की सराहना की और कहा कि आज भारत के पास न केवल स्थानीय उपयोग के लिए बल्कि दुनिया की सहायता के लिए भी टीके उपलब्ध हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार ने टीकाकरण के लिए गरीब और मध्यम वर्ग के हितों को विशेष रूप से ध्यान में रखा है। सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण निःशुल्क है और निजी अस्पतालों में सिर्फ 250 रुपये लिये जा रहे हैं जो विश्व में सबसे कम मूल्य है।

     प्रधानमंत्री ने प्रभावी उपचार और गुणवत्ता वाले चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता के लिए बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने गांवों में प्राथमिक अस्पतालों से लेकर तृतीयक अस्पतालों और एम्स जैसे मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने में समग्र दृष्टिकोण पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया है।

      प्रधानमंत्री ने पिछले छह वर्षों में चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार के प्रयासों को स्मरण किया। उन्होंने बताया कि पिछले 6 वर्षों में 2014 में मौजूद 55 हजार एमबीबीएस सीटों में 30 हजार से अधिक सीटें जोड़ी गई हैं। इसी तरह, 30 हजार पोस्ट ग्रेजुएट सीटों में भी 24 हजार नई सीटों को जोड़ा गया है। पिछले छह वर्षों में 180 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। गांवों में 1.5 लाख स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 50 हजार ने पहले ही कार्य करना आरंभ कर दिया है। यह केंद्र गंभीर रोगों का इलाज कर रहे हैं और परिष्कृत परीक्षण को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करा रहे हैं।

     श्री मोदी ने बजट में स्वास्थ्य के लिए आवंटन में भारी वृद्धि और स्वास्थ्य समस्याओं के पूर्ण समाधान के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हर जिले में नैदानिक ​​केंद्र उपलब्ध कराए गए हैं और 600 से अधिक गहन देखभाल अस्पताल स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि तीन लोकसभा क्षेत्रों में एक चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की योजना पर भी कार्य प्रगति पर है।

     प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सरकार का प्रयास सभी के लिए इलाज को सस्ता और सुलभ बनाना है। इसी दृष्टिकोण के साथ, आज नीतियां और कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के नेटवर्क में तीव्रता से विस्तार हुआ है और जहां तक संभव हो इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया गया है।

    इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा, मनसुख मंडाविया, अनुराग ठाकुर, हिमाचल प्रदेश और मेघालय के मुख्यमंत्री, मेघालय और गुजरात के उप-मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे।

कोरोना टीकाकरण व जांच में उत्‍तर प्रदेश नंबर वन

     लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के कुशल नेतृत्‍व में प्रदेश में कोरोना के आंकड़ों में तेजी से गिरावट दर्ज हुई है। सफल कोविड मेनेजमेंट का ही परिणाम है कि प्रदेश में अब महज 1,647 एक्टिव केस रह गए हैं। उत्‍तर प्रदेश के सफल कोविड प्रबंधन के कारण ही आज मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के दिशा-निर्देशन में उत्‍तर प्रदेश कोरोना टीकाकरण व जांच में देश में नंबर वन है। प्रदेश में अब तक 3,20,86,306 सैम्पलों की जांच की जा चुकी है। रोजना डेढ़ लाख से अधिक कोरोना की जांच प्रदेश में की जा रहीं हैं। प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना से संक्रमित महज 117 नए मामले सामने आए हैं।

     कोविड महामारी से निपटने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीति का ही नतीजा है कि अब उत्तर प्रदेश में कोरोना से पूर्व की तरह ही गतिविधियां सामान्‍य हो रहीं हैं। प्रदेश के सभी जनपदों के मेडिकल कॉलेजों में अब पूर्व की तरह सामान्‍य नागरिकों के लिए सुविधाएं भी सुलभ हो रहीं हैं। 

    प्रदेश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने में प्रदेश सरकार की रणनीति में सर्विलांस टीमें व कांट्रेक्‍ट ट्रेंसिंग अहम रही। जिस कारण आज 24 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में 18 करोड़ की आबादी तक ये टीमें पहुंची चुकी हैं।

    महिला दिवस पर योगी सरकार ने दी महिलाओं को टीकाकरण की सौगात :अन्‍तर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर योगी सरकार ने महिलाओं को सौगात देते हुए उत्‍तर प्रदेश के सभी जनपदों में तीन-तीन वैक्‍सीनेशन बूथ पर महिलाओं के विशेष टीकाकरण कैंप लगाया जाएगा। इस विशेष कैंप में 45 से 60 साल की महिलाओं का टीकाकरण किया जाएगा। हर जिले में विशेष तीन सत्रों में महिलाओं का टीकाकरण किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में 13 मार्च से फोकस टेस्टिंग की शुरूआत की जाएगी। होली के पर्व को ध्‍यान में रखते हुए अन्‍य प्रदेशों से आने वाले लोगों की जांच समेत रेस्‍त्रां, ठेले-खुमचों, खाने पीने की दुकानों समेत शराब के ठेकों, भांग के ठेकों पर इस महा अभियान के तहत फोकस टेस्टिंग की जाएगी।  

     प्रदेश में 5.93 लाख लोग हुए संक्रमण मुक्‍त :सर्वाधिक आबादी वाले प्रदेश में अब कोरोना के एक्टिव केस के आंकड़े महज 1,647 रह गए हैं। प्रदेश में अब तक 5.93 लाख लोग संक्रमण मुक्‍त हो चुके हैं। पिछले 24 घंटों में प्रदेश में 191 मरीज कोरोना संक्रमण मुक्‍त होकर डिस्‍चार्ज किए जा चुके हैं। इस तरह प्रदेश का रिकवरी रेट 98 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है जो अन्‍य प्रदेशों से कहीं अधिक है।

    प्रदेश में 20 लाख लोगों को हुआ टीकाकरण : टीकाकरण अभियान के तहत प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का वैक्सीनेशन का कार्य चल रहा है।  प्रदेश में 45 से 60 वर्ष की आयु वाले लोग जो पहले से चिन्हित बीमारियों से ग्रसित है उनका भी वैक्सीनेशन किया जा रहा है। टीकाकरण अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंट लाइन वर्कर्स और 60 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को मिलाकर 20 लाख लोगों को वैक्सीन की डोज लग चुकी है।

Saturday, 6 March 2021

अमृत है देशी गाय का घी

    देशी गाय का घी धरती पर अमृत सरीखा माना गया है। यह करीब 80 प्रकार के रोग जो वात-पित्त के असंतुलन से होते है पर अंकुश लगाता है। इतना ही नही देशी गाय का घी शरीर को संतुलित करता है, इसमें दिमाग की गर्मी को शांत करने की अद्भुत क्षमता है। क्रोध व चिड़चिड़ा पन स्वभाव वालो को भी शांत रखने में इसकी अहम भूमिका है।

    देशी गाय के घी में जो चिकनाई होती है, उसे स्नेह कहा जाता है। इसे खाने से शरीर व मन दोनों को ताकत मिलती है। मस्तिष्क का करीब 20 प्रतिशत भाग चिकनाई से बना है। अध्ययनों की माने तो मस्तिष्क केवल 3.5 माइक्रोन से छोटी चिकनाई को ही ग्रहण कर पाता है। देशी गाय का बिलौने का घी 3.1 से 3.3 माइक्रोन का होता है, अन्य सभी चिकनाई 4.8 माइक्रोन से अधिक होती हैं। अर्थात् मस्तिष्क के लिए एक ही चिकनाई है देशी गाय का घी। प्रसव या ऑपरेशन के कारण हुए घाव को देशी गाय का घी सबसे तेजी से भरता है। 

    आयुर्वेद कहता है कि देशी गाय का घी बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने में सहायक है। दही मथकर बिलौने से तैयार किया गया है। गिर गाय के घी में सोने जैसे तत्व पाए जाते है। स्वास्थ्य के लिहाज यह घी बहुत ही गुणकारी है। सामान्य तौर पर बाजार में बिकने वाले ज्यादातर घी दूध से सीधीे फैट निकाल कर तैयार किए जाते हैं। इनमें बिलौने वाले घी का गुण नहीं होता। देशी नस्ल की गाय को सूर्यग्रंथी यानी उसका डिल ही खास बनाता है। सूर्यग्रंथी के कारण ही इने दूध की गुणवत्ता सामान्य गाय से बेहतर होती है।  

    पारंपरिक वैदिक प्रक्रिया का उपयोग करके इसके दूध से बिलौना वाला घी बनाया जाता है। सबसे पहले गाय के दूध को दही में बदल कर मक्खन (बिलौना) बनाने के बाद घी तैयार किया गया है। देशी घी शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करने के लिए एंटी ऑक्सीडेंट प्रदान करता है। याद रखिए कि जब भी आप देसी गाय से जुड़े कोई भी उत्पाद खरीदते हैं तो किसी ना किसी रूप में आप गौ सेवा में अपना योगदान व अंशदान दे रहे होते हैं जो देसी गायों के संरक्षण में अहम भूमिका अदा करेगी।

    आर्गेनिक हाट करौंदी में जैविक खाद्य पदार्थ के साथ ही शुद्ध व कुटीर उद्योग के जुड़े उत्पाद मिलते हैं। हमारे यहां गिर गाय का घी, सरसो के फूल वाला शहद, अर्जुन छाल पाउडर, बेल चूर्ण, आंवला चूर्ण, अश्वगंधा, शतावरी, कालमेघ, त्रिफला चूर्ण तथा शहद के साथ ही जैविक जौ का आटा, मडुवा आटा, मल्टीग्रेन, तिल व सरसो का जैविक तेल, बाजरा, मूंगफली, च्यवनप्राश, सुगंधित चावल, गुड़ के साथ ही रसोइ में उपयोग के सभी सामान मिलते हैं।

     आनंद कुमार मिश्र

ऐसे रखें हृदय को चुस्त-दुरुस्त

   व्यस्ततापूर्ण दिनचर्या, अनियमित खानपान, तनाव और श्रमहीन, विलासिता पूर्ण जीवन जीना, यह पांच महाशत्रु वैसे तो रोगों की जड़ है, हद्वय के विभिन्न रोग और रक्त चाप की समस्या भी इन्हीं पांच सेहत के दुश्मनों की ही देन है। हद्वय को शक्तिशाली बनाने और रक्तचाप से बचाव के लिए क्या आहार लें क्या सजगता रखें, इस विषय पर बहुत ही ज्ञानवर्धक और सरल सहज जानकारी श्रीनाथ चिकित्सालय भगवतदास घाट सिविल लाइंस कानपुर की मुख्य चिकित्सक डा. रजनी पोरवाल ने दी है।


   जरूर ध्यान दीजिए :उच्च रक्तचाप और अनियमित दिल की धड़कने सर्दी के मौसम में हार्टअटैक ब्रेन स्ट्रोक या अन्य जानलेवा हद्वय रोगों का कारण बन जाती है। भोजन में नमक की ज्यादा मात्रा अधिक वजन, धूम्रपान शराब का सेवन भी हद्वय रोगों व रक्तचाप के लिए घातक माना जाता है।

   जानिए रक्तचाप क्या है :हद्वय द्वारा पम्प किए गए शुद्ध रक्त को धनमियां शरीर के अन्य भागों तक ले जाती है। इसके बाद अशुद्ध खून को अन्य रक्त को अन्य रक्त वाहिकाएं हद्वय तक वापस लेकर आती हैं। हद्वय द्वारा खून को पम्प किए जाने पर रक्त वाहिकाओं में उत्पन्न दबाव को ही रक्तचाप कहते हैं। रक्तचाप को पारे के मिली मीटर एमएम/एचजी में मापा जाता है। जब हद्वय रक्त को बाहर निकालने के लिए धड़कता है तब रक्त का दबाव सिस्टोमिक यानी ऊपर वाला रक्त चाप कहलाता है। जब दिल की दो धड़कनों के बीच हद्वय आराम की स्थिति में होता है तो उसे डायस्टोमिक यानी नीचे वाला रक्त चाप कहते हैं। 130/80 एमएस/एचजी रक्तचाप को आदर्श समझा जाता है।

     अच्छी आदतें सच्ची मित्र :समय पर सोना, समय पर जागना, समय पर नाश्ता खाना लेना, आरामदायक वस्त्र पहनना, भरपूर पानी पीना फाइबर युक्त अन्न और ताजे फलों गाजर, टमाटर का ताजा रस अच्छी सेहत की आधारशिला है।

     ऐसे करें दिन की शुरूआत :रक्तचाप और हद्वय रोगों से बचाव के लिए प्रात: सूर्योदय के पूर्व सोकर उठें। शौच आदि से निवृत्त होकर दस मिनट तक योगासन, पांच मिनट का हार्ट फुलनेस ध्यान का प्रारंभिक सोपान आपके सोच में जबर्दस्त सकारात्मकता, उडत्साह और निर्णय लेने की क्षमता में जबर्दस्त वृद्धि करेगा। मानसिक तनाव से उलझना नहीं बल्कि सहज रूप से उससे छुटकारा पाना ही श्रेष्ठ है। बिस्तर पर चाय पान मसाला, बीड़ी सिगरेट का सेवन जहरतुल्य है।

    आलस्य और विलासता बड़े दुश्मन :आलस्य और दिलासता आपके अच्छे स्वास्थ्य एवं लंबी उम्र का स्पीड ब्रेकर है। श्रम करने में शरमाएं नहीं, विलासिता की चीजों का दुरूपयोग न करें या दूसरों को दिखाने को उन पर अपनी बादशाहत कायम करने के लिए विलासिता की चीजों का अनावश्यक प्रयोग सेहत के लिए खराब है। दिखावा करने वाले मार्निंग वाक से निरोगता प्राप्त होना कठिन है। हमें अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए बढ़ती उम्र के रोगों से बचाव के लिए ईमानदारी से कदम उठाने चाहिए।

     भोजन में इन्हें शामिल करें :आहार में नींबू शामिल करें। इसका विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट रक्तचाप को काबू में रखता है। दाल या सब्जी में नींबू निचोड़कर खाने से एसिडिटी और गैस से बचाव करता है। प्रोटीन कैल्शियम विटामिन बी6 बी 12 से भरपूर दही हद्वय के लिय रामबाण है। कच्चे लहसुन की दो चार कलियां हद्वय व रक्तचाप के रोगों को नियंत्रण में रखती है। सहजन की सूखी पत्तियों का 5 से 10 ग्राम चूर्ण प्रात: खाली पेट पानी से लेना हद्वय रोगों, जोड़ों का दर्द और इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे अच्छा साधन है। अलसी या तीसी को भूनकर उसका पाउडर दूध के साथ लेने से जो लाभ मिलते हैं, उन्हें शब्दों में कहना कठिन है। यह बुढ़ापे पर ब्रेक रोगों से बचाव व शरीर में दुख दे रही बीमारियों को खदेड़ कर अच्छा स्वास्थ्य देता है। अदरक और तुलसी की पत्ती का रस भी हद्वय को बल देकर रक्तचाप को बेकाबू होने से रोककर जीवन की रक्षा करता है।

     बाजरा है सुपर फूड :सर्दी में बाजरा का आटा श्रेष्ठ सुपर फूड है। इसमें गेहूं की तुलना में एक तिहाई कैलोरी होती है किन्तु प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट और भरपूर फाइबर के साथ फालेट आयरन मैग्नीशियम नियासिन थियासिन फास्फोरस जिंक और अनेक विटामिनों का बेहतरीन श्रोत है। बाजरा ग्लूटेन फ्री होता है। इसके एंटीआक्सीडेंट, पालीफेनाल्स और फाइटो केमिकल हद्वय रोगों और रक्तचाप से बचाव का सशक्त हथियार है। आयुर्वेद दृष्टि से भी बाजरा शरीर के तापक्रम का नियमन करके सर्दी ठंड ज्यादा लगना जैसी समस्याओं से रक्षा करता है।

Friday, 5 March 2021

सुपरफूड है मोरिंगा पाउडर

   मोरिंगा पाउडर मोरिंगा के पेड़ की पत्तियों से बनाया जाता है और इसमें ढेर सारे औषधीय गुण हैं। इस सुपरफूड का इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है। मोरिंगा के पत्तों को सुपरफूड के रूप में देखा जाता है क्योंकि एक कप कटी हुई पत्तियां आयरन, कैल्शियम, विटामिन सी, विटामिन बी 6 और राइबोफ्लेविन का अच्छा स्रोत हैं।

    इसके अलावा इसमें पोटेशियम, विटामिन , विटामिन और मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होती है। संतरे की तुलना में इसके पत्ते में विटामिन सी अधिक होता है। मोरिंगा बेहतर दृष्टि और इम्यूनिटी से लेकर हड्डियों की हेल्थ और त्वचा को ग्लोइंग बनाने तक, सब कुछ कर सकता है।

    यह प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत है। स्मूदी या सूप में मोरिंगा पाउडर को मिलाएं। एक बड़े चम्मच मोरिंगा पाउडर में तीन ग्राम प्रोटीन और सभी आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं, जो मसल्स की मरम्मत, एनर्जी के उत्पादन और मूड को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक हैं। मोरिंगा के पत्तों से बने पाउडर माइल्ड फ्लेवर का होता है, इसलिए इसका इस्तेमाल आप कई अलग-अलग व्यंजनों के साथ कर सकती हैं। इसका फेस मास्क के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

    लिवर की करता है रक्षा :लिवर को शरीर का डिटॉक्सिफायर समझें। यह ब्लड को फिल्टर करता है, केमिकल्स को डिटॉक्सीफाई करता है और फैट को मेटाबोलाइज करता है। मोरिंगा इसे बेहतर काम करने में मदद करता है।

    सूजन होती है कम :मोरिंगा पाउडर लेने से सेल्स में सूजन कम हो जाती है। सूजन कम करने वाली पॉलीफेनोल्स और आइसोथियोसाइनेट्स के साथ, मोरिंगा शरीर में सूजन एंजाइम और प्रोटीन को दबाकर सूजन को कम करता है।

   ब्लड शुगर को बैलेंस करने में मददगार :इंसुलिन और ब्लड शुगर के बढ़ने से मूड स्विंग और शुगर की समस्या हो सकती है और यहां तक कि टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे का भी कारण हो सकता है। मोरिंगा पाउडर लिपिड और ग्लूकोज के लेवल को कम करने और ऑक्सीडेटिव तनाव को नियंत्रित करने में प्रभावी होता है।

    ब्रेन के लिए अच्छा :65 वर्ष से अधिक उम्र के आठ लोगों में से एक को अल्जाइमर रोग परेशान करता है। मोरिंगा का पत्ता विटामिन सी और से भरपूर होता है, जो अल्जाइमर से जुड़े ऑक्सीडेटिव तनाव का मुकाबला करता है। मोरिंगा डोपामाइन और सेरोटोनिन (हैप्पी हार्मोन) को बढ़ाने में मदद करता है और इसका उपयोग भविष्य में डिप्रेशन के इलाज में मदद के लिए किया जाता है।

     त्वचा और बालों के लिए अच्छा :मोरिंगा पाउडर बालों के लिए फायदेमंद है और बालों को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करता है। हेल्दी त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। यह त्वचा के संक्रमण और घावों को ठीक करने में उपयोगी होता है।

     आर्गेनिक हाट करौंदी में जैविक खाद्य पदार्थ के साथ ही शुद्ध कुटीर उद्योग के जुड़े उत्पाद मिलते हैं। यहां मोरिंगा पाडर, मोरिंगा जैगरी, मोरिंगा टेबलेट तथा मोरिंगा से बना साबुन उपलब्ध है। इसके अलावा गिर गाय का घी, अर्जुन छाल पाउडर, बेल चुर्ण, आंवला चूर्ण, अश्वगंधा, शतावरी, कालमेघ, त्रिफला चूर्ण तथा शहद के साथ ही जैविक जौ का आटा, मडुवा आटा, मल्टीग्रेन, तिल सरसो का जैविक तेल, बाजरा, मूंगफली, च्यवनप्राश, सुगंधित चावल, गुड़ के साथ ही रसोइ में उपयोग के सभी सामान मिलते हैं।

    आनंद कुमार मिश्र

वैश्विक स्तर का हो अयोध्याधाम का अयोध्या महोत्सव

      अयोध्या। भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने कहा अयोध्या महोत्सव का आयोजन सिर्फ़ अयोध्याधाम की धरती पर ही नही बल्कि इस प्रकार का आयोजन वैश्विक स्तर का हो। 


    इस कार्यक्रम के बतौर अध्यक्ष श्री शुक्ल ने कहा हिंदुओं के आराध्य दशरथ कौशल्या नंदन प्रभु श्रीराम के अयोध्याधाम में गत आठ दिनों से अयोध्या महोत्सव का आज जो माहौल बना है, उसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अहम योगदान है।

    श्री शुक्ल ने कहा आधुनिकता की आपाधापी में लोककलाएं व लोकसंस्कृति विलुप्त होती जा रही हैं। ऐसी स्थित में अयोध्याधाम में हो रहे अयोध्या महोत्सव के माध्यम से लोककलाओं के लोकप्रिय लोक कलाकारों को भी समाज में सम्मानित होने का अवसर मिलेगा और लोक संस्कृति की परंपराएं जीवित रहेंगीं।

एयर ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में हाहाकार, कोमा से निकालने को चाहिए 13 लाख करोड़

   कोविड ने भारत सहित पूरी दुनिया के संपूर्ण हवाई परिवहन उद्योग को नीचे से ऊपर तक इतना जख्मी कर दिया कि वो अपने पंखों को पसार कर आकाश में स्वच्छंद उड़ान भरने के लायक नहीं रह गया है। विमान निर्माण कंपनियों से लेकर एयर लाइंस, एयरपोर्ट्स और एयर नैविगेशन सेवा प्रदाता तक को मिलाकर 35 लाख करोड़ रु का अभूतपूर्व नुकसान उठाना पड़ा है।

    यात्रियों की कमी से अगले पांच-छ:महीनों में ८ हजार विमानों के खड़े होने पर 88-90 हजार पायलट के बेरोजगार होने का अंदेशा विशेषज्ञों ने जताया है। विश्व जीडीपी में वार्षिक 2.7 ट्रिलियन डालर (लगभग 4 फीसद) का योगदान करने वाले और वर्तमान में संकटग्रस्त इस उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए 12-13 लाख करोड़ रु धनराशि की जरूरत आंकी गई है।


    पिछले बाईस सालों में एयर ट्रांसपोर्ट उद्योग को पांच झटके लगे। इनमें कोविड ने 'मेगा शाॅक' का रोल निभाया। वर्ष 1998 में एशियाई संकट, 2001 सितंबर में अमेरिका में आतंकी हमला, 2003 में सार्स प्रकोप और 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट (लेहमन), पांचवां सबसे भारी पड़ा। जानकार बताते हैं कि उद्योग विभन्न मामलों में आठ-दस से लेकर पंद्रह साल पीछे चला गया। 2019 के स्तर पर पहुंचने में कम से कम चार से छ: साल तो लग ही जाएंगे, वो भी स्थितियां सामान्य रहेंगी तभी।

     अपने देश से शुरू करते हैं। भारत ने 2020 में मार्च 23-25 से हवाई सेवाए निरस्त कीं थीं। 25 मई से घरेलू सेवाएं आंशिक रूप से खुलीं और विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के मकसद से वंदे मातरम मिशन भी मई में शुरू किया गया। इंडिगो को चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल -जून 2020 में 2884 करोड़ रु, दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर में 1194 करोड़ रु का नुकसान लगा और स्पाइस जेट को 600 करोड़ रु व 112 करोड़ रु, साथ ही दोनों ने वेतन में 10 से 30 फीसद कटौती लागू की। गोएयर ने अप्रैल में अपने अधिकांश स्टाफ को बगैर वेतन की छुट्टी पर भेज दिया।

    विस्तारा ने भी बगैर वेतन छुट्टी कर हानि कम करने की कोशिश की। एयर इंडिया के बाबत कुछ कहने की जरूरत नहीं। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (एआईटीए), एयर पोर्ट्स कांउसिल इंटरनेशनल (एसीआई), केपीएमजी, एयरबस इंडस्ट्रीज़ और सेंटर फाॅर एविएशन (सीएपीए) सहित विभिन्न माध्यमों से जुटाई गई जानकारी से पता चलता है कि कोविड-19 में वैश्विक पर्यटन के ठंडा पड़ने से एयर ट्रांसपोर्ट उद्योग में यात्रियों का टोटा पड़ गया। साथ ही माल असबाब की हवाई ढुलाई भी प्रभावित हुई।

     यूं तो छोटी मध्यम और बड़ी मिलाकर दुनिया में कोई 5 हजार एयर लाइंस हैं। इनमें से वित्तीय आधार पर सशक्त एयर लाइंस अल्पसंख्या में हैं। आय, बाजार पूंजीकरण, परिसंपत्ति (एसेट्स) के हिसाब से विश्व में सबसे धनी डेल्टा एयर लाइंस है, 4.32 लाख करोड़ रु है। विमानों का सबसे बड़ा बेड़ा अमेरिकन एयरलाइंस ग्रुप के पास है। इसकी परिसंपत्ति 4.24 लाख करोड़ रु है। ये दोनों अमेरिकी हैं। जर्मन कंपनी लुफ्थांसा में सबसे ज्यादा कर्मचारी हैं। परिसंपत्ति के आधार पर यह तीसरे पायदान पर आती है।

    कोविड के फैलने का नतीजा यह हुआ कि थाई एयरवेज़, दक्षिण अफ्रीकी एयरवेज़, और यूरो विंग्स दिवालिया हो गईं हैं। वर्जिन एयरवेज़ ने अपने 600 पायलटों सहित 3 हजार कर्मचारियों को जबरिया छुट्टी (ले आॅफ) दे दी। लुफ्थांसा एयरलाइन 72 विमानों को दो किस्तों में खड़ा कर रही है। फिन एयरवेज़ ने 12 विमान खड़े कर 2400 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया। फिजी एयरवेज़ ने 700 कर्मचारियों को जबरिया छुट्टी दे दी।

     कमोबेश यही स्थिति नार्वेज़ियन एयर लाइंस, ब्रसेल्स एयरलाइन, एयरमाॅरिशस, आईएजी (ब्रिटिश एयरवेज़), लक्स एयर रयान एयर, विज़ एयर, एचओपी, और यू (वाईओयू) की हो गई है। यात्री अभाव से ग्रस्त अमीरात एयरवेज़ ने 'ए 380' श्रेणी के 38 विमान खड़े कर दिए। तमाम कर्मचारियों से अवकाश लेने को भी कह दिया है। एतिहाद एयरवेज़ ने 720 कर्मचारियों को छुट्टी पर जाने का निर्देश जारी कर दिया है। स्थिति वर्ष 2008 के स्तर पर आ गई। विश्व में इस वक्त लगभग 16900 यात्री जेट सक्रिय चल रहे हैं। बारह वर्ष पूर्व 2008 में 17000 विमान आ जा रहे थे। 2019 के अंतिम दौर में 23600 विमान यात्री सेवाएं दे रहे थे।

      अब विमान निर्माण क्षेत्र पर नजर डालें। शिकागो स्थित बोइंग निर्माता कंपनी के करीब 600 विमानों के खरीद आर्डर रद्द कर दिए गए। बोइंग के प्रतिद्वंद्वी‌ फ्रांस स्थित एयरबस ग्रुप के पास 55 से अधिक नवनिर्मित विमान डिलीवरी के इंतज़ार में खड़े हुए हैं। वर्ष 2020 के शुरू में विश्व में 28 हजार से अधिक विमान यात्री परिवहन में और कोई 3 हजार विमान माल ढुलाई में लगे थे।

     इंटरनेशनल सिविल एविएशन आॅर्गनागज़ेशन (आईसीएओ) के क्षेत्रवार आकड़ों से साफ होता है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक 8.4 लाख करोड़ रु का नुकसान एयर ट्रांसपोर्ट उद्योग को हुआ। यूरोप में‌ 7 लाख करोड़ रु उ.अमेरिका में 6.16 लाख करोड़ रु, मध्य पूर्व में 1.54 लाख करोड़, लैटिन अमेरिका में 1.82 लाख करोड़ और अफ्रीका‌ में 98 हजार करोड़ रु सहित 26 लाख करोड़ की हानि हुई। इसके अलावा हवाई अड्डों को 8.05 लाख करोड़ रु और नेविगेशन सेवा प्रदाताओं को 91 हजार करोड़ रु का नुकसान लगा।

     विभिन्न देशों की सरकारें संकट से उबारने के लिए पैकेज भी मुहैया करा रहीं हैं। वैसे इस इस उद्योग से सरकारों को समग्र रूप से सालाना 7 लाख करोड़ रु का कर राजस्व मिलता था। विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार पुनर्जीवन देने के लिए इस उद्योग को 12-13 लाख करोड़ रु की जरूरत है।

   प्रणतेश नारायण बाजपेयी