Sunday, 19 February 2017

पशुधन तकनीक के लिए 663 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों की स्‍थापना

              कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि राजस्‍थान में अधिकांश प्रखंड सूखे और अभावग्रस्‍त क्षेत्रों में तबदील हो गए हैं। ऐसी परिस्थितियों में वैज्ञानिकों को ऐसी तकनीकों एवं बीजों की उच्‍च उपज वाली किस्‍मों को विकसित करना चाहिए, जो पानी की कम मात्रा के साथ अपनाए जाने योग्‍य हों।

        उन्‍होंने यह भी कहा कि किसानों एवं वैज्ञानिकों को कृषि में पानी के प्रत्‍येक बूंद के उपयोग के लिए साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। कृषि मंत्री ने भारतीय पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि मेले 2017 के अवसर पर बीकानेर के स्‍वामी केशवानंद राजस्‍थान कृषि विश्‍वविद्यालय के परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह के अवसर पर उक्‍त उद्गार व्‍यक्‍त किये। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने सिंचाई के लिए अधिकतम क्षमता को श्रेणीबद्ध करने तथा सूखे से संबंधित समस्‍याओं से मुक्ति पाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना आरंभ की है। उन्‍होंने कहा कि इस योजना का लक्ष्‍य प्रत्‍येक खेत के लिए पानी की व्‍यवस्‍था करना है। सरकार ने किसानों के लिए एक अन्‍य महत्‍वकांक्षी कार्यक्रम मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना आरंभ की है। अब किसान अपनी मिट्टी में मौजूद पोषक तत्‍वों के बारे में जानकारी प्राप्‍त कर सकने में सक्षम हो जाएंगे, जिसका परिणाम उनके खेतों में अधिक उत्‍पादन के रूप में सामने आएगा। 

            कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि भारत सरकार ने अगले 5 वर्षों में किसानों की आय को दोगुना करने का एक महत्‍वकांक्षी लक्ष्‍य निर्धारित किया है। इस लक्ष्‍य को अर्जित करने के लिए पारम्‍परिक प्रणाली की जगह अभिनव कदम उठाए गए हैं। इसके लिए राष्‍ट्रीय कृषि मंडी ई-नाम पोर्टल की स्‍थापना किसानों हेतु एक क्रांतिकारी पहल है, जिसके साथ किसान किसी भी मंडी में बेहतर मूल्‍यों पर अपने कृषि उत्‍पादों की बिक्री कर सकते हैं। सिंह ने कहा कि 2017-18 के लिए कृषि बजट को पिछले वर्ष के 44,250 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 51,026 करोड़ रुपये कर दिया गया है। नाबार्ड की सहायता से सिंचाई के लिए 20,000 करोड़ रुपये तक के एक अलग कोष की स्‍थापना की गई है। 

               सरकार ने कृषि ऋण को इस वर्ष बढ़ाकर 9 लाख करोड़ रुपये तक कर दिया है, जो किसानों को अधिक ऋण प्राप्‍त करने में सक्षम बनाएगा। उन्‍होंने यह भी कहा कि 2013-14 तक राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत केवल तीन फसलों चावल, गेहूं और दालों को शामिल किया गया था। अब इस मिशन के तहत 7 फसलों यथा चावल, गेहूं, दाल, पटसन, गन्‍ना, कपास एवं अनाजों को शामिल कर दिया गया है। इसके बाद कृषि मंत्री ने पशु चिकित्‍सा एवं पशु चिकित्‍सा विज्ञान विश्‍वविद्यालय, राजस्‍थान (राजूवास), बीकानेर में आयोजित एक समारोह में लोगों को संबोधित किया। 

             उन्‍होंने कहा कि देश में पहली बार राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन नामक एक नई पहल राष्‍ट्रीय गौ पशु प्रजनन एवं डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत गौ-पशुओं की घरेलू प्रजातियों के प‍रीक्षण एवं संवर्धन के लिए 500 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ आरंभ की गई है। इस मिशन के तहत, 14 गोकुल गांवों की स्‍थापना की गई है। अधिक धनराशि की सहायता से उन्‍नत प्रजाति के सांड उपलब्‍ध कराए जाने के द्वारा 35 पशु प्रजनन केन्‍द्रों को परिष्‍कृत किया जा रहा है। इसके अतिरिक्‍त, आनुवंशिक सुधार के लिए 3629 सांडों का नियतन किया गया है। 

            सिंह ने यह भी कहा कि सरकार ने गौपशुओं की घरेलू प्रजातियों के विकास के लिए 2007-08 से 2013-14 के दौरान केवल 45 करोड़ रुपये व्‍यय किये थे, जबकि वर्तमान सरकार ने दिसंबर 2015 तक केवल डेढ़ वर्ष की समय अवधि में 27 राज्‍यों द्वारा प्राप्‍त 35 प्रस्‍तावों के लिए 582.09 करोड़ रुपये की राशि मंजूरी की है। पिछले दो वर्षों के दौरान यह राशि 13 गुना बढ़ चुकी है। दो नये राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केन्‍द्रों (एक मध्‍य प्रदेश-उत्‍तर भारत तथा एक आंध्र प्रदेश-दक्षिण भारत में) की स्‍थापना की जा रही है, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। 

           कृषि मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित पशु चिकित्‍सकों की कमी को दूर करने के लिए पशु चिकित्‍सा महाविद्यालयों की संख्‍या 36 से बढ़ाकर 46 कर दी गई है। इन महाविद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्‍या  60 से बढ़कर 100 हो गई है। उन्‍होंने यह भी कहा कि 17 पशु चिकित्‍सा महाविद्यालयों में कुल सीटों की संख्‍या में पर्याप्‍त बढ़ोतरी कर दी गई है। पशु चिकित्‍सा स्‍नातकोत्‍तर छात्रों की संख्‍या डेढ़ गुनी बढ़ चुकी है। पशु चिकित्‍सा महाविद्यालयों में भी डेढ़ गुनी अधिक सीटें बढ़ा दी गई हैं। वर्तमान स्‍नातक पशु चिकित्‍सा पाठ्यक्रमों एवं मानकों  को वैश्विक स्‍तर पर स्‍वीकृत मानदंडों के अनुरूप रूपांतरित करने के लिए पशु चिकित्‍सा न्‍यूनतम मानक विनियमन, 2008 में व्‍यापक सुधार किये गय हैं। सिंह ने यह भी कहा कि 825 करोड़ रुपये की राशि के साथ नवम्‍बर 2016 में एक नई योजना – राष्‍ट्रीय गौपशु उत्‍पादकता मिशन आरंभ की गई है।

            इस येाजना के चार तत्‍व हैं- पशुधन संजीवनी नकुल स्‍वास्‍थ्‍य पत्र, उन्‍नत प्रजनन तकनीक, देसी नस्‍ल जीनोमिक केन्‍द्र, ई-पशुधन हाट। उन्‍होंने  यह भी कहा कि पशु स्‍वास्‍थ्‍य सुधार कार्यक्रम के तहत पशुओं के खुरपका एवं मुंहपका रोगों के उपचार के लिए बेहतर तकनीकों के द्वारा प्रकोपों की संख्‍या वर्ष 2013 के 377 से घटकर 109 हो गई है। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने बताया कि 2015-16 के दौरान कुल दुग्‍ध उत्‍पादन 52.21 मिलियन टन था, जो 2016-17 में बढ़कर 54.50 मिलियन टन हो गया। दुग्‍ध उत्‍पादन के क्षेत्र में 4.38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2015-16 के दौरान अंडों का कुल उत्‍पादन 27.33 बिलियन था, जो बढ़कर 2016-17 के दौरान 29.09 बिलियन तक पहुंच गया। अंडों के उत्‍पादन में 6.42 प्रतिशत की वृद्धि द‍र्ज की गई है1 2015-16 की तुलना में मांस के उत्‍पादन में 2016-17 के दौरान 8.74 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

            सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने युवाओं को प्रेरित करने के‍ लिए देश के प्रथम राष्‍ट्रपति एवं प्रथम कृषि  मंत्री भारत रत्‍न डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद की जन्‍मशती मनाने के लिए 3 दिसंबर को कृषि शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार 15 अक्‍टूबर को महिला कृषि दिवस के रूप में मनाए जाने का फैसला किया गया है। उन्‍होंने यह भी जानकारी दी कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पर 5वीं डीन कमेटी की रिपोर्ट 2016-17 के अकादमिक सत्र से कार्यान्वित की जा रही है। तीन नये केन्‍द्रीय कृषि विश्‍वविद्यालयों की स्‍थापना की गई है। इसी प्रकार दो नये आईएआरआई (झारखंड, असम) की भी स्‍थापना की जा रही है।

          सरकार ने देश के 100 शिक्षा संस्‍थानों में पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय उन्‍नत कृषि शिक्षा योजना कार्यान्वित करने का फैसला किया है। जिससे कि जमीनी स्‍तर कृषि शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। उन्‍होंने कहा कि इस वर्ष फसलों की रिकॉर्ड 310 नयी प्रजातियां जारी  की गई हैं। कृषि तथा पशुधन तकनीकों को किसानों तक सुलभ बनाने के लिए 663 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों की स्‍थापना की गई है।  

भारतीय टीकाकरण नियामकीय प्रणाली

                 विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने डब्‍ल्‍यूएचओ एनआरए ग्‍लोबल बेंचमार्किंग टूल (जीबीटी) के तहत बेंचमार्किंग के लिए भारतीय टीकाकरण नियामकीय प्रणाली की स्थिति का आकलन पूरा कर लिया है। प्रणाली की परिपक्‍वता की माप कर ली है। 

              यह आकलन डब्‍ल्‍यूएचओ की एक टीम द्वारा किया गया है। जिसमें डब्‍ल्‍यूएचओ मुख्‍यालय जिनेवा के विभिन्‍न क्षेत्रों, डब्‍ल्‍यूएचओ इंडिया कंट्री ऑफिस के विशेषज्ञ, अमेरिका, इटली, जर्मनी, नीदरलैंड, इंडोनेशिया, थाईलैंड एवं मिस्र के विनियामकों से संबंधित विशेषज्ञ शामिल हैं। यह आकलन 9 विभिन्‍न कार्य क्षमताओं के संबंध में किया गया है। भारतीय एनआरए को 4 अर्थात 5 कार्यों के संबंध में दी गई वर्तमान परिभाषाओं के अनुरुप अंक दिए गए हैं। एवं 4 कार्यों के संबंध में 3 परिपक्‍वता स्‍तर के साथ ‘कार्यशील’ घोषित किया गया है। जहां 4 का परिपक्‍वता स्‍तर अच्‍छे परिणामों और सतत बेहतर रुझानों का संकेत देता है, वहीं 3 का परिपक्‍वता स्‍तर प्रणालीगत प्रक्रिया आधारित दृष्टिकोण, प्रणालीगत बेहतरी के प्रारंभिक चरण लक्ष्‍यों के अनुरूप डाटा उपलब्‍धता एवं बेहतरी के रूझानों के अस्तित्‍व को परिलक्षित करता है। 

               भारत का विश्‍व के फार्मास्‍यूटिकल उद्योग में अग्रणी स्‍थान है। फार्मास्‍यूटिकल उद्योग में पारंपरिक तथा टीका, चिकित्‍सा उपकरणों एवं पारंपरिक दवाओं समेत जीव विज्ञानी चिकित्‍सकीय उत्‍पाद शामिल हैं। एक बड़े टीका उत्‍पादक देश के रूप में भारत वर्तमान में संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की एजेंसियों (यूनिसेफ, डब्‍ल्‍यूएचओ एवं पीएएचओ) को कई प्रकार के टीकों की आपूर्ति कर रहा है। 

            एक पूर्ण रूप से कार्यशील एनआरए टीकों के डब्‍ल्‍यूएचओ पूर्व आहर्ता के लिए एक पूर्व शर्त है। योग्‍य बने रहने तथा पूर्व आहर्ता दर्जे को बनाए रखने की आवश्‍यकताओं में से एक डब्‍ल्‍यूएचओ द्वारा प्रकाशित एनआरए संकेतकों पर कार्यशील के रूप में आकलित राष्‍ट्रीय नियामकीय प्राधिकरण की उपस्थिति है।

राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा : डिजाइन, निर्माण, परिचालन एवं रख-रखाव

           उत्‍तराखंड जल विद्युत निगम एवं आईआईटी रूड़की के सहयोग से केन्‍द्रीय जल आयोग द्वारा आयोजित तृतीय राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा सम्‍मेलन आज रूडकी में सम्‍पन्‍न हो गया। 

        इस सम्‍मेलन में बांध सुरक्षा के क्षेत्र में प्रमुख चुनौतियों पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया, जिनका सामना वर्तमान में जारी बांध सुरक्षा पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के कार्यान्‍वयन में करना पड़ रहा है। विभिन्‍न राष्‍ट्रीय एवं विदेशी विशेषज्ञों द्वारा ज्ञान, अनुभव, नवोन्‍मेषन, नवीन प्रौद्योगिकियों आदि साझा किये जाने से बांध डिजाइन, निर्माण, परिचालन एवं रख-रखाव से जुड़ी अनिश्चितताओं को कारगर ढंग से प्रबंधित करने के लिए कार्य नीतियों को आकार देने में और मदद मिली। इस सम्‍मेलन को काफी उत्‍साहवर्धक प्रतिक्रिया प्राप्‍त हुई। 

                   जिसमें 400 से अधिक शिष्‍टमंडलों ने भाग लिया। देश के भीतर और देश के बाहर के विशेषज्ञों के 70 से अधिक तकनीकी शोध पत्र प्रस्‍तुत किये गये। लगभग 40 राष्‍ट्रीय एवं विदेशी संगठनों ने सम्‍मेलन स्‍थल पर आयोजित प्रदर्शनी के जरिए अपनी प्रौद्योगिकियों, उत्‍पादों एवं सेवाओं को प्रदर्शित किया। इस समारोह में अमरीका, ऑस्‍ट्रेलिया, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, स्‍पेन, नीदरलैंड तथा जर्मनी के पेशेवर व्‍यक्तियों ने हिस्‍सा लिया। 

                सम्‍मेलन का उद्घाटन भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय में सचिव डॉ. अमरजीत सिंह द्वारा उत्‍तराखंड सरकार के मुख्‍य सचिव एस. रामस्‍वामी, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के एनएमसीजी के महानिदेशक यू.पी. सिंह, आईआईटी रूडकी के निदेशक प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी एवं केन्‍द्र सरकार, राज्‍य सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों तथा डीआरआईपी कार्यान्वित करने वाले अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।
 

              प्रतिभागियों के बीच अंत:संपर्कों, संगठनों द्वारा अपनी प्रौद्योगिकियों तथा अपने उत्‍पाद पेश किये जाने तथा विशेषज्ञों द्वारा शोध पत्र प्रस्‍तुत किये जाने से बांधों की बेहतर निगरानी, संचालन एवं रख-रखाव तथा पुनर्वास के लिए कार्य नीतियों को और अधिक निर्धारित करने में बांध सुरक्षा पेशेवर व्‍यक्तियों एवं प्रबंधनों को मदद मिलेगी। 

       सम्‍मेलन के दौरान किये गये विचार विमर्शें से उत्‍पन्‍न प्रमुख अनुशंसाओं को हितधारकों तथा कार्यान्‍वयन के लिए नीति निर्माताओं को वितरित किये जाएंगे। सम्‍मेलन के लिए प्राप्‍त चुने हुए शोध पत्रों को बांधों के डिजाइन, निर्माण, परिचालन एवं रख-रखाव के लिए जिम्‍मेदार राज्‍य एजेंसियों के पुस्‍तकालयों में एक स्‍थायी संदर्भ उपलब्‍ध कराने के लिए एक सार संग्रह के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। बांधों ने तेज एवं सतत कृषि तथा ग्रामीण प्रगति और विकास को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाई है, जोकि आजादी के बाद से भारत सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही है।

               पिछले 70 वर्षों के दौरान भारत ने खाद्य, ऊर्जा एवं जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलाशयों में सीमित सतही जल संसाधनों को प्रबंधित एवं भंडारण करने के लिए आवश्‍यक अवसंरचना में उल्‍लेखनीय रूप से निवेश किया है। लगभग 283 बिलियन क्‍यूबिक मीटर की कुल भंडारण क्षमता के साथ बड़े बांधों की संख्‍या के लिहाज से दुनिया में चीन और अमरीका के बाद भारत का तीसरा स्‍थान है। लगभग 80 प्रतिशत बड़े बांधों ने 25 वर्ष की उम्र पार कर ली है। 

            उनमें से कई के सामने अब विलंबित रख-रखाव की चुनौती खड़ी हो गई है। इनमें से कई बांध बेहद पुराने हैं (लगभग 170 बांधों की उम्र 100 वर्ष से अधिक है) और उनका निर्माण ऐसे समय में हुआ था, जिनके डिजाइन प्रचलन एवं सुरक्षा संबंधी विचार वर्तमान डिजाइन मानकों एवं मौजूदा सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं हैं। इनमें से कई बांधों के सामने कठिनाइयां उत्‍पन्‍न हो रही हैं। उनकी संरचनात्‍मक सुरक्षा तथा परिचालनगत कुशलता सुनिश्चित करने के लिए उन पर तत्‍काल ध्‍यान दिये जाने की आवश्‍यकता है। बड़े बांधों की विफलता बांधों द्वारा उपलब्‍ध कराई जा रही सेवाओं को बाधित करने के अलावा गंभीर रूप से जान, माल एवं पर्यावरण को प्रभावित कर सकती है।

               इसके महत्‍व को महसूस करते हुए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने 2012 में विश्‍व बैंक की सहायता से 6 वर्षींय बांध सुरक्षा पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) की शुरूआत की। इसमें संस्‍थागत सुधारों एवं सुरक्षित तथा वित्‍तीय रूप से टिकाऊ बांध परिचालनों से संबंधित नियामकों उपायों को मजबूत बनाने के साथ भारत के 7 राज्‍यों में 225 बड़ी बांध परियोजनाओं में व्‍यापक पुनर्वासएवं सुधार के प्रावधान हैं। 

                इस परियोजना का कार्यान्‍वयन 7 राज्‍यों (झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्‍य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु एवं उत्‍तराखंड) में किया जा रहा है। डीआरआईपी नवीन समाधानों एवं प्रौद्योगिकियों को लागू करने के द्वारा इस गंभीर समस्‍या का समाधान करने तथा बांध सुरक्षा मुद्दों पर जागरूकता के प्रचार-प्रसार करने में सफल रही है। चूंकि यह परियोजना केवल पांच प्रतिशत बड़े बांधों एवं 7 राज्‍यों से ही संबंधित है, इसलिए विभिन्‍न राज्‍यों में एक वार्षिक समारोह के रूप में बांध सुरक्षा क्षेत्रों में ज्ञान एवं अनुभव को साझा करने के लिए गैर-डीआरआईपी राज्‍यों के पेशेवर व्‍यक्तियों, शिक्षाविदों, उद्योगों तथा वैश्विक विशेषज्ञों के साथ राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा सम्‍मेलनों (एनडीएससी) का आयोजन किया जा रहा है। 

           इस प्रकार के सम्‍मेलन नये बांधों के डिजाइन एवं निर्माण के लिए तकनीकों, उपकरणों, सामग्रियों आदि तथा मौजूदा बांधों के अनुवीक्षण, निगरानी, परिचालन, रख-रखाव एवं पुनर्वास की अवधारणाओं को प्रचारित करेंगे।          

आसियान-भारत डिजिटल साझेदारी

           आसियान-भारत संबंधों के 25वें वर्ष का समारोह मनाने के लिए टीईपीसी (दूरसंचार उपकरण एवं सेवा निर्यात संवर्धन परिषद) नई दिल्‍ली में आसियान देशों और भारत के दूरसंचार मंत्रियों के बीच एक अंत:मंत्रिस्‍तरीय बैठक का आयोजन कर रही है।

           भारत के संचार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्‍हा बांग्‍लादेश, कंबोडिया, लाओस पीडीआर, इंडोनेशिया एवं भूटान के दूरसंचार मंत्रियों, सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों एवं उद्योगपतियों के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल से विचार-विमर्श का नेतृत्‍व करेंगे। 

                भारत सरकार ने भारत और आसियान क्षेत्र के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को सक्षम बनाने में आसियान देशों के साथ साझेदारी करने और आसियान देशों के भीतर भी ब्राडबैंड को सक्षम बनाने के प्रति गहरी दिलचस्‍पी दिखाई है। ये डिजिटल कनेक्टिविटी परियोजनाएं रणनीतिक महत्‍व की हैं। इनका भारत और आसियाना के बीच अर्थव्‍यवस्‍था एवं सहयोग पर एक रूपांतरकारी प्रभाव पड़ सकता है। 

              भारत में ऐसी परियोजनाओं के लिए वित्‍तीय एवं प्रौद्योगिकीय समर्थन उपलब्‍ध कराने की प्रतिबद्धता की है, जिनमें हाई स्‍पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, डिजिटल ग्राम, ग्रामीण ब्रॉडबैंड, नेशनल नॉलेज नेटवर्क, सिक्‍योर्ड कम्‍युनिकेशन नेटवर्क एवं दूरसंचार प्रशिक्षण तथा कौशल विकास शामिल हैं। भारतीय कंपनियों ने विश्‍व स्‍तरीय उत्‍पादों एवं समाधानों का सृजन किया है, जो न केवल सर्वोच्‍च गुणवत्‍ता वाली हैं, बल्कि काफी लागत-प्रतिस्‍पर्धी भी हैं। ये कंपनियां आसियान क्षेत्र में अपने उत्‍पादों को निर्यात करने की इच्‍छुक हैं, जहां भारत जैसी ही आवश्‍यकताएं विद्यमान हैं। 

           टीईपीसी, सरकार के सहयोग से नई दिल्‍ली के सांगरिला होटल इरोस में 21-22 फरवरी, 2017 को अपने प्रमुख समारोह ‘भारतीय दूरसंचार 2017: एक विशिष्‍ट अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यवसाय प्रदर्शनी’ का आयोजन कर रही है। समारोह में 30 से अधिक देशों के 100 से अधिक उच्‍चस्‍तरीय आईसीटी उद्योग शिष्‍टमंडल भाग लेंगे। इस प्रदर्शनी का मुख्‍य उद्देश्‍य एसएमई एवं स्‍टार्ट-अप्‍स समेत भारतीय दूरसंचार निर्यातकों को विदेशों के योग्‍य खरीदारों की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए अवसर प्रदान करना है।

            इस प्रदर्शनी में विभिन्‍न देशों के खरीदारों और भारतीय निर्यातकों को एक-दूसरे से मिलने का अवसर उपलब्‍ध कराया जाएगा, जो उन्‍हें उनके उत्‍पादों एवं प्रौद्योगिकी समाधानों के बारे में अवगत कराएगा। 

 

एयरोबैटिक टीमों के साथ ऐरो इंडिया 2017 संपन्‍न

            एयरो इंडिया 2017 के सफल समापन को चिन्हित करने तथा एयर शो के दौरान पिछले कुछ दिनों के सा‍र्थक संबंधों की यादगारी के एक प्रतीक के रूप में आज एयरोबैटिक डिस्‍पले टीमें आज एकजुट हुईं।

     स्‍कैन्डिनेविया टीम के ग्रुममैन जी-164 एवं याकोवलेव टीम के याक-50 के सामने पोज करते हुए सूर्यकिरण एयरोबैटिक टीम (एसकेएटी), याकोवलेव एवं स्‍कैन्डिनेविया की टीमों के स्‍टंट पायलटों ने अपने तीन ‘स्‍काईकैट्स’ के साथ मनोहारी दृश्‍य प्रस्‍तुत किया। विंग कमांडर अजीत कुलकर्णी के नेतृत्‍व में एसकेएटी पायलट अपने लाल फ्लाइंग चौगा में देदीप्‍यमान दिखे।

                 स्‍कैन्डिनेविया टीम के लीडर जैकोब हॉलेंडर का फ्लाइंग सूट उनके फ्लाइंग मशीन के रंग के साथ मैच कर रहा था जबकि स्‍काईकैट्स ने फोटोग्राफ के लिए खुद को पीले तथा नीले वायुयान के ऊपर रखा। जेज के नेतृत्‍व में याकोवलेव के पायलट अपने काले फ्लाइंग सूट में बहुत पेशेवर दिख रहे थे। ‘फोटो सत्र’ के बाद एसकेएटी रणबांकुरो ने दर्शकों के साथ मुलाकात की एवं उनसे हाथ मिलाए तथा स्‍मृति चिन्‍हों का वितरण किया।

नोएडा में शहीदों को श्रद्धांजलि

             नौसेना प्रमुख, पीवीएसएम, एवीएसएम, एडीसी एडमिरल सुनील लाम्‍बा ने नोएडा संस्‍था द्वारा आयोजित एक औपचारिक समारोह में सुबह ‘शहीद स्‍मारक’ पर श्रद्धांजलि एवं पुष्‍पांजलि अर्पित की।

        इस अवसर पर नौसेना प्रमुख ने कहा कि स्‍थल सेना, वायु सेना एवं नौसेना के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके लिए एक सम्‍मान की बात है। उन्‍होंने इस अवसर पर इन जांबाज शहीदों के परिवारों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सश्‍स्‍त्र बलें हमारे समुद्र क्षेत्र एवं सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनके दिखाए रास्‍ते पर मजबूती से आगे बढ़ती रहेंगी। 

                इस समारोह में बड़ी संख्‍या में नागरिक एवं सैन्‍य क्षेत्र के गणमान्‍य व्‍यक्तियों, भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, स्‍कूल के छात्रों एवं आम नागरिकों ने भाग लिया जो वहां इन अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आए थे। किसी भी देश की महानता उसके नागरिकों द्वारा बहादुर सशस्‍त्र बलों के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दिए जाने में प्रदर्शित होती है। जिन्‍होंने हमारी मातृभूमि की सुरक्षा एवं हिफाजत के लिए अपनी सर्वोच्‍च कुर्बानी दी है। 

                ‘नोएडा शहीद स्‍मारक’ नोएडा टाउनशिप द्वारा निर्मित एक ऐसा ही अनूठी त्रि-सेना मेमोरियल है। जिसने हमारे शहीदों की यादों और उनकी भावना को जीवित रखा है। शहीदों का सम्‍मान करने के लिए इस प्रकार के एक युद्ध स्‍मारक को स्‍थापित करने की संकल्‍पना 1998 में  की गई थी। वर्तमान मेमोरियल उन सभी सशस्‍त्र बलों के जवानों को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। 

          जिन्‍होंने आजादी के बाद से विभिन्‍न निर्णायक जीतों के लिए अपनी सर्वोच्‍च कुर्बानी दी है। आज नोएडा शहीद स्‍मारक (एनएसएस) एक प्रतिष्ठित मील का पत्‍थर है जो न केवल इन बहादुर जवानों को याद रखता है। आने वाले पीढ़ी के लिए प्रेरणा के एक श्रोत के रूप में कार्य करता है, बल्कि उन लोगों को हमारी शाश्‍वत कृतज्ञता भी अर्पित करता है।

            जिन्‍होंने अपना सर्वोच्‍च बलिदान इसलिए दिया कि हम एक बेहतर भविष्‍य देख सकें। प्रत्‍येक वर्ष एनएसएस संस्‍था फरवरी महीने में हमारे जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए वार्षिक पुष्‍पांजलि समारोह का आयोजन करता है। युद्ध के वीरों के प्रति‍ श्रद्धां‍जलि ने इस अवसर पर उपस्थित सभी व्‍यक्तियों के दिलों को गर्व की भावना से भर दिया।

‘साइंस एक्‍सप्रेस : देश के 6 लाख से अधिक गांवों तक पहुंच

                 संयुक्‍त रूप से सफदरजंग रेलवे स्‍टेशन से साइंस एक्‍सप्रेस क्‍लाइमेट एक्‍शन स्‍पेशल (एसईसीएएस) के 9वें चरण को हरी झंडी। जहां पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे एवं केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन रेलवे स्‍टेशन पर उपस्थित थे, केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इस समारोह को हरी झंडी दिखाई। 

         पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे ने कहा कि भविष्‍य में साइंस एक्‍सप्रेस को देश के 6.5 लाख गांवों तक पहुंचना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि जब तक रेल गाड़ी जन आंदोलन एवं जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए व्‍यक्तिगत पहल करने एवं कदम उठाने के लिए लोगों को प्रोत्‍साहित करने के एक माध्‍यम के रूप में तब्‍दील नहीं हो जाती, यह जमीनी स्‍तर पर अपने प्रयासों में सफल नहीं होगी। केवल संगोष्ठियों में चर्चा के एक बिन्‍दु के रूप में ही सिमट कर रह जाएगी। दवे ने बताया कि ‘किसी व्‍यक्ति विशेष को क्‍या करना चाहिए, सरकारों को क्‍या करना चाहिए, समाज को क्‍या करना चाहिए, सभी की भूमिका निर्धारित की जानी चाहिए’।

                   मंत्री ने रेखांकित किया कि कार्यों में पारदर्शिता होनी चाहिए। करदताओं के पैसे का प्रत्‍येक हिस्‍सा स‍ही तरीके से उपयोग में लाया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित किए जाने के प्रयास जारी रखे जाना चाहिए कि लोगों तक पैसा पहुंच सके। रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि जलवायु परिवर्तन मानवता के लिए एक बड़ा खतरा है। इससे सहयोगात्‍मक प्रयासों के जरिये निपटा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में भारत ने पेरिस सम्‍मेलन के दौरान जलवायु कार्ययोजना की पहल करने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

               उन्‍होंने यह भी कहा कि साइंस एक्‍सप्रेस न केवल जलवायु परिवर्तन के बारे में संदेश देगी बल्कि इस ज्‍वलंत मुद्दे पर बहस एवं परिचर्चाओं को भी जन्‍म देगी। साइंस एक्‍सप्रेस 8 सितंबर 2017 तक पूरे भारत में 68 स्‍थलों को कवर करने के लिए 19 हजार किलो मीटर से अधिक की अपनी यात्रा आरंभ करेगी एवं इसके 30 लाख आगंतुकों को आकर्षित करने की उम्‍मीद है। क्‍लाइमेट स्‍पेशल एक्‍शन इस प्रमुख मुद्दे पर जागरुकता का प्रयास करेगी। एक बेहतर भविष्‍य सुनिश्चित करने के हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाएगी। 

              इस अवसर पर डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि ‘इसे और बड़ा आंदोलन बनाने के लिए आगे आने वाले वर्षों में 4 और रेल गाडि़यां अवश्‍य चलाई जानी चाहिए’। मंत्री ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के महत्‍व का इस तथ्‍य से अनुमान लगाया जा सकता है कि यह एक मात्र थीम है जिसे साइंस एक्‍सप्रेस के लिए दो लगातार वर्षों के लिए चुना गया है। 

            पिछले वर्ष मिशन इनोवेशन एवं स्‍वच्‍छ ऊर्जा पर दो मंत्री स्‍तरीय बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्‍व करने के लिए सैन फ्रांसिस्‍को की अपनी यात्रा का स्‍मरण करते हुए मंत्री ने कहा कि विश्‍व के 21 बड़े देशों ने स्‍वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में भारत ने स्‍वच्‍छ ऊर्जा, मिशन इनोवेशन के क्षेत्र में अद्वतीय पहल की है। भारत के पास विश्‍व का नेतृत्‍व करने की क्षमता एवं ताकत है। उन्‍होंने यह भी कहा कि सांइस एक्‍सप्रेस को लोगों का आंदोलन बनाने के लिए स्‍कूली छात्रों की भूमिका सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण है। 

        संख्‍याओं की गिनती करते हुए मंत्री ने कहा कि अभी तक 1.5 करोड़ आगंतुक एवं 33801 विद्यालयों के छात्र साइंस एक्‍सप्रेस की यात्रा कर चुके हैं। मंत्री ने केंद्र एवं राज्‍यों के सभी विभागों एवं एजेंसियों तथा साइंस एक्‍सप्रेस के संचालन में रेल गाड़ी में सवार शिक्षकों की भूमिका एवं योगदान की भी सराहना की। 

           इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव अजय नारायण झा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीविभाग  में सचिव आशुतोष शर्मा, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अपर सचिव डॉ. अमिता प्रसाद, रेलवे बोर्ड के मेम्‍बर रवीन्‍द्र गुप्‍ता भी उपस्थित थे। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव अजय नारायण झा ने स्‍वागत भाषण दिया।