पशुधन तकनीक के लिए 663 कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना
कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि राजस्थान में अधिकांश प्रखंड सूखे और अभावग्रस्त क्षेत्रों में तबदील हो गए हैं। ऐसी परिस्थितियों में वैज्ञानिकों को ऐसी तकनीकों एवं बीजों की उच्च उपज वाली किस्मों को विकसित करना चाहिए, जो पानी की कम मात्रा के साथ अपनाए जाने योग्य हों।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों एवं वैज्ञानिकों को कृषि में पानी के प्रत्येक बूंद के उपयोग के लिए साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। कृषि मंत्री ने भारतीय पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि मेले 2017 के अवसर पर बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह के अवसर पर उक्त उद्गार व्यक्त किये। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने सिंचाई के लिए अधिकतम क्षमता को श्रेणीबद्ध करने तथा सूखे से संबंधित समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना आरंभ की है। उन्होंने कहा कि इस योजना का लक्ष्य प्रत्येक खेत के लिए पानी की व्यवस्था करना है। सरकार ने किसानों के लिए एक अन्य महत्वकांक्षी कार्यक्रम मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना आरंभ की है। अब किसान अपनी मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकने में सक्षम हो जाएंगे, जिसका परिणाम उनके खेतों में अधिक उत्पादन के रूप में सामने आएगा।
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि भारत सरकार ने अगले 5 वर्षों में किसानों की आय को दोगुना करने का एक महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को अर्जित करने के लिए पारम्परिक प्रणाली की जगह अभिनव कदम उठाए गए हैं। इसके लिए राष्ट्रीय कृषि मंडी ई-नाम पोर्टल की स्थापना किसानों हेतु एक क्रांतिकारी पहल है, जिसके साथ किसान किसी भी मंडी में बेहतर मूल्यों पर अपने कृषि उत्पादों की बिक्री कर सकते हैं। सिंह ने कहा कि 2017-18 के लिए कृषि बजट को पिछले वर्ष के 44,250 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 51,026 करोड़ रुपये कर दिया गया है। नाबार्ड की सहायता से सिंचाई के लिए 20,000 करोड़ रुपये तक के एक अलग कोष की स्थापना की गई है।
सरकार ने कृषि ऋण को इस वर्ष बढ़ाकर 9 लाख करोड़ रुपये तक कर दिया है, जो किसानों को अधिक ऋण प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि 2013-14 तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत केवल तीन फसलों चावल, गेहूं और दालों को शामिल किया गया था। अब इस मिशन के तहत 7 फसलों यथा चावल, गेहूं, दाल, पटसन, गन्ना, कपास एवं अनाजों को शामिल कर दिया गया है। इसके बाद कृषि मंत्री ने पशु चिकित्सा एवं पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, राजस्थान (राजूवास), बीकानेर में आयोजित एक समारोह में लोगों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि देश में पहली बार राष्ट्रीय गोकुल मिशन नामक एक नई पहल राष्ट्रीय गौ पशु प्रजनन एवं डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत गौ-पशुओं की घरेलू प्रजातियों के परीक्षण एवं संवर्धन के लिए 500 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ आरंभ की गई है। इस मिशन के तहत, 14 गोकुल गांवों की स्थापना की गई है। अधिक धनराशि की सहायता से उन्नत प्रजाति के सांड उपलब्ध कराए जाने के द्वारा 35 पशु प्रजनन केन्द्रों को परिष्कृत किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, आनुवंशिक सुधार के लिए 3629 सांडों का नियतन किया गया है।
सिंह ने यह भी कहा कि सरकार ने गौपशुओं की घरेलू प्रजातियों के विकास के लिए 2007-08 से 2013-14 के दौरान केवल 45 करोड़ रुपये व्यय किये थे, जबकि वर्तमान सरकार ने दिसंबर 2015 तक केवल डेढ़ वर्ष की समय अवधि में 27 राज्यों द्वारा प्राप्त 35 प्रस्तावों के लिए 582.09 करोड़ रुपये की राशि मंजूरी की है। पिछले दो वर्षों के दौरान यह राशि 13 गुना बढ़ चुकी है। दो नये राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केन्द्रों (एक मध्य प्रदेश-उत्तर भारत तथा एक आंध्र प्रदेश-दक्षिण भारत में) की स्थापना की जा रही है, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए पशु चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या 36 से बढ़ाकर 46 कर दी गई है। इन महाविद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या 60 से बढ़कर 100 हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि 17 पशु चिकित्सा महाविद्यालयों में कुल सीटों की संख्या में पर्याप्त बढ़ोतरी कर दी गई है। पशु चिकित्सा स्नातकोत्तर छात्रों की संख्या डेढ़ गुनी बढ़ चुकी है। पशु चिकित्सा महाविद्यालयों में भी डेढ़ गुनी अधिक सीटें बढ़ा दी गई हैं। वर्तमान स्नातक पशु चिकित्सा पाठ्यक्रमों एवं मानकों को वैश्विक स्तर पर स्वीकृत मानदंडों के अनुरूप रूपांतरित करने के लिए पशु चिकित्सा न्यूनतम मानक विनियमन, 2008 में व्यापक सुधार किये गय हैं। सिंह ने यह भी कहा कि 825 करोड़ रुपये की राशि के साथ नवम्बर 2016 में एक नई योजना – राष्ट्रीय गौपशु उत्पादकता मिशन आरंभ की गई है।
इस येाजना के चार तत्व हैं- पशुधन संजीवनी नकुल स्वास्थ्य पत्र, उन्नत प्रजनन तकनीक, देसी नस्ल जीनोमिक केन्द्र, ई-पशुधन हाट। उन्होंने यह भी कहा कि पशु स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम के तहत पशुओं के खुरपका एवं मुंहपका रोगों के उपचार के लिए बेहतर तकनीकों के द्वारा प्रकोपों की संख्या वर्ष 2013 के 377 से घटकर 109 हो गई है। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने बताया कि 2015-16 के दौरान कुल दुग्ध उत्पादन 52.21 मिलियन टन था, जो 2016-17 में बढ़कर 54.50 मिलियन टन हो गया। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में 4.38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2015-16 के दौरान अंडों का कुल उत्पादन 27.33 बिलियन था, जो बढ़कर 2016-17 के दौरान 29.09 बिलियन तक पहुंच गया। अंडों के उत्पादन में 6.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है1 2015-16 की तुलना में मांस के उत्पादन में 2016-17 के दौरान 8.74 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने युवाओं को प्रेरित करने के लिए देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं प्रथम कृषि मंत्री भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जन्मशती मनाने के लिए 3 दिसंबर को कृषि शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार 15 अक्टूबर को महिला कृषि दिवस के रूप में मनाए जाने का फैसला किया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पर 5वीं डीन कमेटी की रिपोर्ट 2016-17 के अकादमिक सत्र से कार्यान्वित की जा रही है। तीन नये केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। इसी प्रकार दो नये आईएआरआई (झारखंड, असम) की भी स्थापना की जा रही है।
सरकार ने देश के 100 शिक्षा संस्थानों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना कार्यान्वित करने का फैसला किया है। जिससे कि जमीनी स्तर कृषि शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने कहा कि इस वर्ष फसलों की रिकॉर्ड 310 नयी प्रजातियां जारी की गई हैं। कृषि तथा पशुधन तकनीकों को किसानों तक सुलभ बनाने के लिए 663 कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना की गई है।







