Wednesday, 13 December 2017

‘जीवन की सहजता’ बढ़ाने पर केन्द्र सरकार का ध्यान

   नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) की 90वीं वार्षिक आम बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। 1927 में फिक्की के स्थापना समय को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय उद्योग ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित साइमन कमीशन के खिलाफ एकजुट हुआ था।

   उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय उद्योग समाज के हर वर्ग के साथ खड़ा था। नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भी वैसा ही माहौल मौजूद है, जब देशवासी राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए आगे आ रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि लोग चाहते हैं कि देश को भ्रष्टाचार और कालेधन जैसी घरेलू समस्याओं से निजात मिले। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और उद्योग संघों को देश की जरूरतों तथा लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए। 
    प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद बहुत सी उपल्बधियां प्राप्त हुई हैं, लेकिन कई चुनौतियां भी खड़ी हो गयी हैं। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों को व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा और बैंक खातों, गैस कंनेक्शनों, छात्रवृत्तियों, पेंशन इत्यादि जैसे मुद्दों पर जूझना पड़ता रहा। केन्द्र सरकार इस संघर्ष को समाप्त करने का प्रयास कर रही है। उसका प्रयास है कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाये जो पारदर्शी और संवेदनशील हो। 
    उन्होंने कहा कि जनधन योजना इसकी एक मिसाल है। ‘जीवन की सहजता’ बढ़ाने पर केन्द्र सरकार ध्यान दे रही है। उन्होंने उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना का भी उल्लेख किया। 
   उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद गरीबी देखी है, और वे इस बात को बखूबी समझते हैं कि गरीबों और राष्ट्र की जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता है। उन्होंने उद्यमियों को गैर-जमानती ऋण प्रदान करने वाली मुद्रा योजना का भी उल्लेख किया।
      प्रधानमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार बैंकिंग प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या वर्तमान सरकार को विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि अब वित्तीय नियमन एवं जमा बीमा (एफआरडीआई) विधेयक के बारे में अफवाह फैलाई जा रही है।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार खाताधारकों के हितों की रक्षा करने के लिए काम कर रही है लेकिन इसके विपरीत अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि फिक्की जैसे संगठनों की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मुद्दों पर लोगों में जागरूकता पैदा करें।
   उन्होंने कहा कि इसी तरह फिक्की को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को और कारगर बनाने के लिए भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक व्यापार गतिविधियों का जीएसटी के लिए पंजीकरण सुनिश्चित हो सके।
   उन्होंने कहा कि व्यवस्था जितनी औपचारिक बनेगी, गरीबों को उतना अधिक फायदा होगा। इससे बैंकों से आसानी से ऋण मिलेगा, लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी आएगी, जिसके कारण व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि छोटे कारोबारियों के बीच बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करने के लिए फिक्की के पास जरूर कोई योजना होगी। 
    उन्होंने यह भी कहा कि फिक्की को जरूरत आने पर बिल्डरों द्वारा आम आदमी के शोषण जैसे मुद्दों के खिलाफ भी आवाज उठानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने यूरिया, कपड़ा, नागरिक विमानन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों के लिए नीतिगत फैसलों तथा उनके लाभों का भी उल्लेख किया।
    उन्होंने रक्षा, निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण जैसे अन्यान्य क्षेत्रों में होने वाले सुधारों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उपरोक्त उपायों के नतीजे में विश्व बैंक की ‘व्यापार करने की आसानी’ रैंकिंग में भारत 142वें स्थान से उठकर 100वें स्थान पर पहुंच गया है।
     उन्होंने उन संकेतकों का भी हवाला दिया, जो भारत की सेहतमंद अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाये गये कदम रोजगार पैदा करने की दिशा में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
   प्रधानमंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण, स्टार्टअप, मशीनों से प्राप्त होने वाली जानकारी, सौर ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में फिक्की की मुख्य भूमिका है। उन्होंने फिक्की से आग्रह किया कि वह एमएसएमई क्षेत्र के लिए थिंक-टैंक की भूमिका निभाये।

सिक्किम के समुदायों को जनजातीय सूची में शामिल करने की मांग

    नई दिल्ली। सिक्किम के 11 स्थानीय समुदायों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केन्‍द्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जन शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की।

  प्रतिनिधिमंडल में राय, सांगर, गुरुंग, थामी, भुजेल, जोगी, सन्यासी, गिरि, नेवर, खास (भवन और छेत्री) और दीवान (यखा) समुदाय के प्रतिनिधि शामिल थे। 
  प्रतिनिधिमंडल ने अपने-अपने समुदायों को जनजातीय सूची में शामिल करने की मांग को लेकर श्री सिंह को एक ज्ञापन सौंपा। बैठक में इन समुदायों से जुड़े विभिन्न मसलों पर बातचीत हुई।
  प्रतिनिधियों ने अपने समुदाय का राज्य विधानसभा में प्रतिनिधित्व, नौकरियों में आरक्षण, आयकर छूट सहित विभिन्न मसलों पर बातचीत की। प्रतिनिधियों ने सिक्किम और अपने-अपने समुदायों से जुड़े इतिहास, भूगोल और अन्य विषयों के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया।
    प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह समुदायों के योगदान की सराहना की और कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि इन समुदयों के साथ हर स्तर पर न्याय हो। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के ज्ञापन को जनजातीय मामलों के मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
     श्री सिंह ने सिक्किम के महत्व और योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वोत्तर क्षेत्र को सदैव उच्च प्राथमिकता देते हैं और प्रधानमंत्री ने स्वयं सिक्किम का दौरा भी किया है। सरकार ने सिक्क्म को ऑर्गेनिक स्टेट यानि जैविक राज्य घोषित किया है। 
      सिक्कम देश का पहला खुले में शौच से मुक्त घोषित राज्य है। राज्य की साक्षरता और सकल घरेलू उत्पाद दर भी बेहतर है। श्री सिंह ने कहा कि सिक्किम ने पर्यटन के क्षेत्र में भी अच्छा काम किया है। इन कारणों से सिक्कम ने देश के अन्य राज्यों के समक्ष एक उदाहरण पेश किया है।
     प्रतिनिधिमंडल को धैर्यपूर्वक सुनने के बाद डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह हमारा उत्तरदायित्व है कि समाज के सभी तबकों को न्याय मिले। इस अवसर पूर्वोत्तर मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

अफ्रीकी देशों को 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण

     नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारत ने यह पाया है कि नाइजीरिया की संघीय सरकार की नवीनतम गतिविधियों को संचालित करने में काफी रुचि है, विशेषकर वह हरित वैकल्पिक आरम्भ – एक रोड मैप तैयार करने की इच्छुक है ताकि नाइजीरिया को कृषि में आत्मनिर्भर एवं कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक बनाया जा सके। 

    कृषि मंत्री ने यह बात आज कृषि भवन, नई दिल्ली में नाइजीरिया के कृषि मंत्री आदु अग्बेह के साथ हुई बैठक में कही। कृषि मंत्री ने कहा कि भारत 1960 के दशक के मध्य तक खाद्य की कमी वाला देश था, लेकिन आज भारत घरेलू खपत से कहीं अधिक खाद्यान्नों का उत्पादन कर रहा हैं।
     आज भारत कृषि उत्पादों का एक बृहद उत्पादक देश है। उन्होंने कहा कि भारत को कृषि के किसी भी क्षेत्र में नाइजीरिया की प्राथमिकता के अनुरूप भारत के अनुभव एवं विशेषज्ञता साझा करने में खुशी होगी।
    भारत के कृषि मंत्री ने कहा कि भारत ने 2015 में रियायती दरों पर अफ्रीकी देशों को 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी बताया गया कि 20 से अधिक अधिकारियों ने कृषि- संबंधित क्षेत्रों में लघु आवधिक क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में भाग लिया है।
     हाल ही में भारत सरकार ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के अंतर्गत एक वर्ष में प्रशिक्षण सत्रों की संख्या नाइजीरिया के लिए 200 से बढ़ाकर 310 कर दी है जिसमें कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में लघु आवधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल हैं। 
     भारत के कृषि मंत्री ने नाइजीरिया के कृषि मंत्री से अनुरोध किया कि इस रियायती ऋण (साख पत्र) एवं कृषि व संबद्ध क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ उठाएं। 
   कृषि मंत्री ने कहा कि यह संतोषजनक स्थिति है कि पिछले कुछ वर्षों से भारत, नाइजीरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है और नाइजीरिया, अफ्रीका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। व्यापार की मात्रा में और वृद्धि करने की संभावना है।
     नाइजीरिया ताजे अंगूर, काली मिर्च, गेहूं, मक्का, चावल व कपास का आयात करने पर विचार कर सकता है। 
     इस मौके पर भारत के केन्द्रीय कृषि और किसान मंत्री राधा मोहन सिंह ने नाइजीरिया के कृषि क्षेत्र में निवेशक एवं कृषि सेवाएं, कृषि मशीनरी एवं प्रौद्योगिकी सहायता के प्रदाता के रूप में नाइजीरियाई कृषि क्षेत्रों में संभावनाओं का पता लगाने के लिए भारतीय कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए नाइजीरिया के कृषि मंत्री का आभार व्यक्त किया। 
     कृषि मंत्री ने पिछले सप्ताह 5 दिसंबर, 2017 को आबूजा में भारतीय उच्चाचयुक्त द्वारा आयोजित ‘कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में भारत – नाइजीरिया सहयोग:अवसर एवं भावी रणनीति’ नामक व्यापार मेले के उद्घाटन के लिए नाइजीरिया के कृषि मंत्री को धन्यवाद दिया।
      भारत के कृषि मंत्री ने कहा कि भारत एवं नाइजीरिया के सौहार्दपूर्ण व मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। दोनों देश विभिन्न धर्मों व विशिष्ट संस्कृति वाले विकासशील देश हैं। दोनों देश लोकतंत्र, विभिन्न धर्मों को मानने वाले समाज व मानव अधिकारों व कानून का सम्मान करते हैं।
    उन्होंने कहा कि भारत सरकार को कृषि व संबद्ध क्षेत्रों में नाइजीरिया सरकार की प्राथमिकताओं में योगदान देने पर प्रसन्नता होगी।

अफगानिस्तान को 1,70,000 टन गेहूं की आपूर्ति

    नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने दौरे पर आए अफगानिस्तान इस्लामिक राजतंत्र के द्वितीय उपराष्ट्रपति मोहम्मद सरवर दानिश के साथ बातचीत की। 

    बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने हाल ही में भारतीय निवेश और वित्तपोषण से निर्मित ईरान में चाबहार बंदरगाह के पहले चरण के उद्घाटन से अब तक इस बंदरगाह द्वारा अफगानिस्तान को 1,70,000 टन गेहूं की आपूर्ति की है। 
   श्री वेंकैया नायडू ने यह भी बताया कि जून, 2017 में एयर फ्रेट कॉरिडोर के शुभारंभ के बाद से अफगानिस्तान और भारत के बीच 50 से अधिक उड़ानें भरी गई हैं।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले वर्ष तक भारत ने अफगानिस्तान को 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की है। सितंबर 2016 में, हमारे प्रधान मंत्री ने अफगानिस्तान के लोगों के लिए 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त सहायता की घोषणा की थी।
    उन्होंने आगे कहा कि इन सब कार्यों से सितंबर, 2017 में "नई विकास साझेदारी" की नींव रखी गई। वेंकैया नायडू ने कहा है कि इस साझेदारी के तहत अफगानिस्तान के 34 प्रान्तों में से 31 में 116 'उच्च परिणामी सामुदायिक विकास परियोजनाओं' का चयन किया गया। कई अन्य बड़ी नई परियोजनाओं की घोषणा की गई है। 
   उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान पूरे एशियाई और यूरेशियन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापार, निवेश और संपर्क माध्यम के रूप में उभर सकता है। अफगानिस्तान के सामने खड़ी चुनौतियों तथा सीमापार से आतंकवादियों को मिलने वाली मदद तथा उनकी आश्रय स्थली जैसे मुद्दों पर चिंता जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने पडौसी द्वारा आतंकवाद को राज्य के समर्थन की नीति का पुरजोर विरोध करना चाहिए।
       यह बताते हुए कि वर्ष 2001 से अब तक अफगानिस्तान के लिए पिछला वर्ष अत्यधिक हिंसा का रहा जिसके दौरान 10,000 से अधिक लोगों की मौत हुई जिनमें से 25 प्रतिशत आम जनता से थे, श्री नायडू ने कहा कि हमें आतंकवाद से लड़ने और उनके सुरक्षित आश्रयों तथा अन्य मदद को खत्म करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सत्यापन तंत्र की स्थापना करने के लिए काम करना चाहिए।